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	<title>वट सावित्री व्रत &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>वट सावित्री व्रत में जरूर पढ़ें यह पौराणिक कथा</title>
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		<pubDate>Sat, 16 May 2026 05:26:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/6-27.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/6-27.jpg 855w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/6-27-300x167.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/6-27-768x428.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />वट सावित्री व्रत एक स्त्री के संकल्प और विश्वास का प्रतीक है। ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है। इस उपवास में सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस कथा को पढ़े या सुने बिना वट सावित्री की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/6-27.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/6-27.jpg 855w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/6-27-300x167.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/6-27-768x428.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वट सावित्री व्रत एक स्त्री के संकल्प और विश्वास का प्रतीक है। ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है। इस उपवास में सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस कथा को पढ़े या सुने बिना वट सावित्री की पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है। ऐसे में आइए इस पावन कथा का पाठ करते हैं –</p>



<p><strong>वट सावित्री व्रत कथा</strong><br>मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति के रूप में चुना था। नारद जी ने सावित्री को आगाह किया था कि सत्यवान अल्पायु हैं और विवाह के ठीक एक साल बाद उनकी मृत्यु निश्चित है। इसके बावजूद, सावित्री अपने निर्णय पर अडिग रहीं और सत्यवान से विवाह कर लिया। वे राजमहल छोड़कर अपने अंधे सास-ससुर की सेवा के लिए वन में रहने लगीं।</p>



<p>जब सत्यवान की मृत्यु का दिन आया, तो वे लकड़ियां काटने जंगल गए और सावित्री भी उनके साथ गईं। बरगद के वृक्ष के नीचे सत्यवान ने सावित्री की गोद में सिर रखकर प्राण त्याग दिए। तभी यमराज सत्यवान के प्राण लेने पहुंचे। सावित्री यमराज के पीछे-पीछे चलने लगीं। यमराज ने उन्हें वापस जाने को कहा, लेकिन सावित्री ने अपनी पतिव्रत और ज्ञान से यमराज को प्रभावित कर दिया।</p>



<p>सावित्री की निष्ठा देखकर यमराज ने उन्हें तीन वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने पहले वरदान में सास-ससुर की आंखों की रोशनी, दूसरे में उनका खोया हुआ राज्य मांगा। तीसरे वरदान में उन्होंने सौ पुत्रों की माता बनने का आशीर्वाद मांग लिया। यमराज ने तथास्तु कह दिया। इसके बाद सावित्री ने बड़ी चतुराई से कहा कि बिना पति के वे माता कैसे बन सकती हैं? अपनी ही बातों में बंधकर यमराज को सत्यवान के प्राण वापस करने पड़े।</p>



<p><strong>वट वृक्ष का महत्व</strong><br>सत्यवान के प्राण वापस मिलने के बाद, सावित्री उसी वट वृक्ष के पास पहुंचीं जहां सत्यवान का मृत शरीर पड़ा था। वट वृक्ष की कृपा और सावित्री के तप से सत्यवान फिर से जीवित हो उठे। तभी से इस दिन वट वृक्ष की पूजा का महत्व बढ़ गया।</p>
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		<title>वट सावित्री व्रत पर क्यों होती है बरगद के पेड़ की पूजा? </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Apr 2026 08:13:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[वट सावित्री व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="313" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/5-39.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/5-39.jpg 754w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/5-39-300x152.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />वट सावित्री का पावन व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं और वट यानी बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करती हैं। वट सावित्री व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्तपंचांग के अनुसार, साल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="313" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/5-39.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/5-39.jpg 754w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/5-39-300x152.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वट सावित्री का पावन व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं और वट यानी बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करती हैं।</p>



<p><strong>वट सावित्री व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त<br></strong>पंचांग के अनुसार, साल 2026 में वट सावित्री का व्रत 16 मई को रखा जाएगा।</p>



<p>अमावस्या तिथि का आरंभ: 16 मई 2026, सुबह 05:11 बजे से</p>



<p>अमावस्या तिथि का समापन: 17 मई 2026, रात 01:30 बजे तक</p>



<p>उदयातिथि और पंचांग की गणना के अनुसार, वट सावित्री का पूजन और व्रत शनिवार, 16 मई को ही करना शुभ होगा।</p>



<p><strong>बरगद के पेड़ का महत्व<br></strong>हिंदू धर्म में बरगद के पेड़ को देवतुल्य माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र पेड़ में त्रिदेवों का वास होता है। पेड़ की जड़ में ब्रह्मा जी, तने में भगवान विष्णु और ऊपरी हिस्से में भगवान शिव निवास करते हैं। इसकी नीचे की तरफ लटकती हुई शाखाओं को माता सावित्री का रूप माना जाता है।</p>



<p>पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी पेड़ के नीचे माता सावित्री ने अपने पतिव्रता धर्म के प्रभाव से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। इसीलिए इस दिन बरगद की पूजा का विशेष महत्व है।</p>



<p><strong>सरल पूजा विधि<br></strong>व्रत के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके दुल्हन की तरह सोलह श्रृंगार करती हैं। इसके बाद बरगद के पेड़ को जल, अक्षत (चावल) और फूल अर्पित किए जाते हैं। महिलाएं पेड़ के तने पर लाल या पीला सूत (धागा) लपेटते हुए श्रद्धा भाव से परिक्रमा करती हैं। सिंदूर चढ़ाने और माता सावित्री की पूजा करने के बाद कथा सुनी जाती है और फिर भोग लगाकर व्रत खोला जाता है।</p>



<p><strong>बरगद के पेड़ से जुड़े अचूक उपाय<br></strong>आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: शुक्रवार को बरगद के साफ पत्ते पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं। इसे मां लक्ष्मी के पास रखकर पूजा करें और फिर अपनी तिजोरी या अलमारी में रख लें। ऐसा 21 शुक्रवार करने से धन की कमी दूर होती है।<br>नौकरी व व्यापार में तरक्की: मनचाही नौकरी के लिए वट सावित्री के दिन पत्ते पर अपनी परेशानी लिखकर रविवार को जल में प्रवाहित करें। व्यापार में नुकसान हो रहा हो, तो इस दिन बरगद के नीचे घी के 5 दीपक जलाएं।<br>पारिवारिक शांति के लिए: घर में रोज झगड़े होते हों, तो प्रतिदिन बरगद के पेड़ के नीचे त्रिदेवों का ध्यान करते हुए घी का दीपक जलाएं।<br>रोग मुक्ति के लिए: मानसिक तनाव या बीमारी दूर करने के लिए बरगद के नीचे हनुमान चालीसा का पाठ करें। बीमार व्यक्ति के तकिए के नीचे बरगद की जड़ रखने से भी स्वास्थ्य में सुधार होता है।</p>
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		<title>वट सावित्री व्रत पर करें ये आरती, शुभ फलों की होगी प्राप्ति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 May 2025 05:00:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[वट सावित्री व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="405" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-458-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-458.jpg 854w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-458-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-458-768x504.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस बार यह व्रत 26 मई यानी आज मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="405" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-458-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-458.jpg 854w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-458-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-458-768x504.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p> वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस बार यह व्रत 26 मई यानी आज मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।</p>



<p>वट सावित्री व्रत का पर्व बहुत फलदायी माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए कठिन व्रत का पालन करती हैं। इसके साथ ही वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस बार यह व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) आज यानी 26 मई को मनाया जा रहा है। कहते हैं कि इस उपवास का पालन करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।</p>



<p>वहीं, जो लोग इस व्रत का पालन कर रहे हैं, उन्हें भगवान विष्णु और धर्मराज जी की आरती जरूर करनी चाहिए, जो इस प्रकार हैं।</p>



<p><strong>॥भगवान विष्णु की आरती॥ (Lord Vishnu Aarti)</strong></p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे आरती<br>ॐ जय जगदीश हरे,<br>स्वामी जय जगदीश हरे ।<br>भक्त जनों के संकट,<br>दास जनों के संकट,<br>क्षण में दूर करे ॥<br>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥<br>जो ध्यावे फल पावे,<br>दुःख बिनसे मन का,<br>स्वामी दुःख बिनसे मन का ।<br>सुख सम्पति घर आवे,<br>सुख सम्पति घर आवे,<br>कष्ट मिटे तन का ॥<br>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥<br>मात पिता तुम मेरे,<br>शरण गहूं किसकी,<br>स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।<br>तुम बिन और न दूजा,<br>तुम बिन और न दूजा,<br>आस करूं मैं जिसकी ॥<br>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥<br>तुम पूरण परमात्मा,<br>तुम अन्तर्यामी,<br>स्वामी तुम अन्तर्यामी ।<br>पारब्रह्म परमेश्वर,<br>पारब्रह्म परमेश्वर,<br>तुम सब के स्वामी ॥<br>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥<br>तुम करुणा के सागर,<br>तुम पालनकर्ता,<br>स्वामी तुम पालनकर्ता ।<br>मैं मूरख फलकामी,<br>मैं सेवक तुम स्वामी,<br>कृपा करो भर्ता॥<br>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥<br>तुम हो एक अगोचर,<br>सबके प्राणपति,<br>स्वामी सबके प्राणपति ।<br>किस विधि मिलूं दयामय,<br>किस विधि मिलूं दयामय,<br>तुमको मैं कुमति ॥<br>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥<br>दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,<br>ठाकुर तुम मेरे,<br>स्वामी रक्षक तुम मेरे ।<br>अपने हाथ उठाओ,<br>अपने शरण लगाओ,<br>द्वार पड़ा तेरे ॥<br>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥<br>विषय-विकार मिटाओ,<br>पाप हरो देवा,<br>स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।<br>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,<br>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,<br>सन्तन की सेवा ॥<br>ॐ जय जगदीश हरे,<br>स्वामी जय जगदीश हरे ।<br>भक्त जनों के संकट,<br>दास जनों के संकट,<br>क्षण में दूर करे ॥</p>



<p><strong>॥धर्मराज जी की आरती॥</strong><br>धर्मराज कर सिद्ध काज, प्रभु मैं शरणागत हूँ तेरी ।<br>पड़ी नाव मझदार भंवर में, पार करो, न करो देरी ॥<br>धर्मराज कर सिद्ध काज…<br>धर्मलोक के तुम स्वामी, श्री यमराज कहलाते हो ।<br>जों जों प्राणी कर्म करत हैं, तुम सब लिखते जाते हो ॥<br>धर्मराज कर सिद्ध काज…<br>अंत समय में सब ही को, तुम दूत भेज बुलाते हो ।<br>पाप पुण्य का सारा लेखा, उनको बांच सुनते हो ॥<br>भुगताते हो प्राणिन को तुम, लख चौरासी की फेरी ॥<br>धर्मराज कर सिद्ध काज…<br>चित्रगुप्त हैं लेखक तुम्हारे, फुर्ती से लिखने वाले ।<br>अलग अगल से सब जीवों का, लेखा जोखा लेने वाले ॥<br>धर्मराज कर सिद्ध काज…<br>पापी जन को पकड़ बुलाते, नरको में ढाने वाले ।<br>बुरे काम करने वालो को, खूब सजा देने वाले ॥<br>कोई नही बच पाता न, याय निति ऐसी तेरी ॥<br>धर्मराज कर सिद्ध काज…<br>दूत भयंकर तेरे स्वामी, बड़े बड़े दर जाते हैं ।<br>पापी जन तो जिन्हें देखते ही, भय से थर्राते हैं ॥<br>धर्मराज कर सिद्ध काज…<br>बांध गले में रस्सी वे, पापी जन को ले जाते हैं ।<br>चाबुक मार लाते, जरा रहम नहीं मन में लाते हैं ॥<br>नरक कुंड भुगताते उनको, नहीं मिलती जिसमें सेरी ॥<br>॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥<br>धर्मी जन को धर्मराज, तुम खुद ही लेने आते हो ।<br>सादर ले जाकर उनको तुम, स्वर्ग धाम पहुचाते हो ।<br>धर्मराज कर सिद्ध काज…<br>जों जन पाप कपट से डरकर, तेरी भक्ति करते हैं ।<br>नर्क यातना कभी ना करते, भवसागर तरते हैं ॥<br>कपिल मोहन पर कृपा करिये, जपता हूँ तेरी माला ॥<br>धर्मराज कर सिद्ध काज…</p>
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		<title>वट सावित्री व्रत पर करें मां लक्ष्मी के इन मंत्रों का जप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 May 2025 04:51:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-457-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-457.jpg 852w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-457-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-457-768x434.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह व्रत पति की लंबी आयु और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए किया जाता है। इस साल यह व्रत 26 मई यानी आज मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से उपवास रखने और माता लक्ष्मी के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-457-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-457.jpg 852w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-457-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-457-768x434.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह व्रत पति की लंबी आयु और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए किया जाता है। इस साल यह व्रत 26 मई यानी आज मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से उपवास रखने और माता लक्ष्मी के 108 नामों का जाप करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।</p>



<p>हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत बेहद मंगलकारी माना गया है। यह उपवास विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखती हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह पावन व्रत 26 मई, 2025 यानी आज के दिन रखा जा रहा है।</p>



<p>कहते हैं कि इस दिन सच्चे भाव के साथ उपवास रखने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसके साथ ही जीवन में खुशहाली आती है। वहीं, इस दिन माता लक्ष्मी के 108 नामों का जप परम कल्याणकारी माना गया है, जो इस प्रकार है।</p>



<p><strong>।।मां लक्ष्मी के 108 नाम।।</strong></p>



<p>ऊँ प्रकृत्यै नम:<br>ऊँ विकृत्यै नम:<br>ऊँ विद्यायै नम:<br>ऊँ सर्वभूत-हितप्रदायै नम:<br>ऊँ श्रद्धायै नम:<br>ऊँ विभूत्यै नम:<br>ऊँ वसुन्धरायै नमः<br>ऊँ उदारांगायै नमः<br>ऊँ हरिण्यै नमः<br>ऊँ हेममालिन्यै नमः<br>ऊँ धनधान्य-कर्ये नमः<br>ऊँ सिद्धयै नमः<br>ऊँ स्त्रैणसौम्यायै नमः<br>ऊँ शुभप्रदायै नमः<br>ऊँ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः<br>ऊँ सुरभ्यै नम:<br>ऊँ परमात्मिकायै नम:<br>ऊँ वाचे नम:<br>ऊँ पद्मालयायै नम:<br>ऊँ पद्मायै नमः<br>ऊँ शुचय़ै नमः<br>ऊँ स्वाहायै नमः<br>ऊँ स्वधायै नमः<br>ऊँ सुधायै नमः<br>ऊँ धन्यायै नमः<br>ऊँ हिरण्मयै नमः<br>ऊँ लक्ष्म्यै नमः<br>ऊँ नित्यपुष्टायै नमः<br>ऊँ विभावर्यै नमः<br>ऊँ अदित्यै नमः<br>ऊँ दित्यै नमः<br>ऊँ दीप्तायै नमः<br>ऊँ वसुधायै नमः<br>ऊँ वसुधारिण्यै नमः<br>ऊँ कमलायै नमः<br>ऊँ कान्तायै नमः<br>ऊँ कामाक्ष्यै नमः<br>ऊँ क्रोधसंभवायै नमः<br>ऊँ अनुग्रहप्रदायै नमः<br>ऊँ बुद्धयै नमः<br>ऊँ अनघायै नमः<br>ऊँ हरिवल्लभायै नमः<br>ऊँ अशोकायै नमः<br>ऊँ अमृतायै नमः<br>ऊँ दीप्तायै नमः<br>ऊँ लोकशोकविनाशिन्यै नमः<br>ऊँ धर्म-निलयायै नमः<br>ऊँ करुणायै नमः<br>ऊँ लोकमात्रे नमः<br>ऊँ पद्मप्रियायै नमः<br>ऊँ पद्महस्तायै नमः<br>ऊँ पद्माक्ष्यै नमः<br>ऊँ पद्मसुन्दर्यै नमः<br>ऊँ पद्मोद्भवायै नमः<br>ऊँ भास्कर्यै नमः<br>ऊँ बिल्वनिलयायै नमः<br>ऊँ वरारोहायै नमः<br>ऊँ यशस्विन्यै नमः<br>ऊँ वरलक्ष्म्यै नमः<br>ऊँ वसुप्रदायै नमः<br>ऊँ शुभायै नमः<br>ऊँ हिरण्यप्राकारायै नमः<br>ऊँ समुद्रतनयायै नमः<br>ऊँ पद्ममुख्यै नमः<br>ऊँ पद्मनाभप्रियायै नमः<br>ऊँ रमायै नमः<br>ऊँ पद्ममालाधरायै नमः<br>ऊँ देव्यै नमः<br>ऊँ पद्मिन्यै नमः<br>ऊँ पद्मगन्धिन्यै नमः<br>ऊँ पुण्यगन्धायै नमः<br>ऊँ सुप्रसन्नायै नमः<br>ऊँ प्रसादाभिमुख्यै नमः<br>ऊँ प्रभायै नमः<br>ऊँ चन्द्रवदनायै नमः<br>ऊँ चन्द्रायै नमः<br>ऊँ चन्द्रसहोदर्यै नमः<br>ऊँ चतुर्भुजायै नमः<br>ऊँ विष्णुपत्न्यै नमः<br>ऊँ प्रसन्नाक्ष्यै नमः<br>ऊँ नारायणसमाश्रितायै नमः<br>ऊँ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः<br>ऊँ देव्यै नमः<br>ऊँ सर्वोपद्रव-वारिण्यै नमः<br>ऊँ नवदुर्गायै नमः<br>ऊँ महाकाल्यै नमः<br>ऊँ ब्रह्माविष्णु-शिवात्मिकायै नमः<br>ऊँ त्रिकालज्ञान-संपन्नायै नमः<br>ऊँ भुवनेश्वर्यै नमः<br>ऊँ चन्द्ररूपायै नमः<br>ऊँ इन्दिरायै नमः<br>ऊँ इन्दुशीतलायै नमः<br>ऊँ अह्लादजनन्यै नमः<br>ऊँ पुष्टयै नमः<br>ऊँ शिवायै नमः<br>ऊँ शिवकर्यै नमः<br>ऊँ सत्यै नमः<br>ऊँ विमलायै नमः<br>ऊँ विश्वजनन्यै नमः<br>ऊँ तुष्टयै नमः<br>ऊँ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः<br>ऊँ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः<br>ऊँ शान्तायै नमः<br>ऊँ शुक्लमाल्यांबरायै नमः<br>ऊँ श्रियै नमः<br>ऊँ जयायै नमः<br>ऊँ मंगलादेव्यै नमः<br>ऊँ विष्णुवक्षस्थलस्थितायै नमः</p>
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		<title>वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ पर क्यों बांधा जाता है कच्चा सूत, जानें वजह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 May 2025 05:08:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[वट सावित्री व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="365" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/tiu-4-large.gif" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/tiu-4.gif 365w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/tiu-4-medium.gif 300w" sizes="auto, (max-width: 365px) 100vw, 365px" />वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) किया जाता है। इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं की अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है। साथ ही पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना करने का विशेष &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="365" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/tiu-4-large.gif" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/tiu-4.gif 365w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/tiu-4-medium.gif 300w" sizes="auto, (max-width: 365px) 100vw, 365px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) किया जाता है। इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं की अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है। साथ ही पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। पूजा के दौरान पेड़ पर सुहागिन महिलाएं कच्चा सूत बांधती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कच्चा सूत कितनी बार बांधना चाहिए और क्यों बांधा जाता है। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए हम आपको बताएंगे इसके बारे में विस्तार से।</p>



<p><strong>वट सावित्री व्रत 2025 डेट और शुभ मुहूर्त<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 26 मई को 12 बजकर 11 मिनट से होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 27 मई को सुबह 08 बजकर 31 मिनट पर होगा। ऐसे में 26 मई को वट सावित्री व्रत किया जाएगा।</p>



<p>ब्रह्म मुहूर्त &#8211; सुबह 04 बजकर 03 मिनट से 04 बजकर 44 मिनट तक<br>विजय मुहूर्त &#8211; दोपहर 02 बजकर 36 मिनट से 03 बजकर 31 मिनट तक<br>गोधूलि मुहूर्त &#8211; शाम 07 बजकर 16 मिनट से 07 बजकर 36 मिनट तक<br>निशिता मुहूर्त &#8211; रात्रि 11 बजकर से 58 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक</p>



<p><strong>बरगद के पेड़ पर कच्चा सूत बांधने का महत्व<br></strong>वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ की पूजा न करने से व्रत अधूरा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट सावित्री व्रत के शुभ अवसर पर बरगद के पेड़ की पूजा करने से सुहागिन महिलाओं को शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही पति को लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।</p>



<p>इस दिन बरगद के पेड़ की परिक्रमा के दौरान कच्चा सूत बांधना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट सावित्री व्रत की पूजा के दौरान बरगद के पेड़ पर सात बार कच्चा सूत बांधने से पति-पत्नी का रिश्ते मजबूत होते हैं। साथ ही वैवाहिक जीवन में आने वाले सभी संकट दूर होते हैं। इसके अलावा पति-पत्नी के रिश्ते सात जन्मों तक बने रहते हैं।</p>



<p><strong>वट सावित्री व्रत के दिन इन बातों का रखें ध्यान<br></strong>वट सावित्री व्रत के दौरान किसी के बारे में गलत न सोचे<br>किसी से वाद-विवाद न करें।<br>काले कपड़े न पहनें।</p>
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