<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>लुप्त सभ्यता की कथा संजोए है उनाकोटि &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%8f/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Tue, 12 Nov 2019 07:31:21 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.5</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>लुप्त सभ्यता की कथा संजोए है उनाकोटि &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>लुप्त सभ्यता की कथा संजोए है उनाकोटि&#8230;</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b2%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%8f/286075</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Nandita Pal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 Nov 2019 07:31:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पर्यटन]]></category>
		<category><![CDATA[लुप्त सभ्यता की कथा संजोए है उनाकोटि]]></category>
		<guid isPermaLink="false">http://www.livehalchal.com/?p=286075</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="358" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33.jpg 828w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33-300x174.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33-768x445.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />लहरदार पगडंडियां, घने जंगल और घाटियां और संकरी नदियां और स्रोतों के मनोरम दृश्य, अनोखी वनस्पतियां और वन्य जीवों के आसपास होने का अहसास, और अपनी शहरी जिंदगी की रेलमपेल से भागे हुए जंगल के अभयारण्यक। ऐसा ही है उनाकोटि का प्राकृतिक भंडार, जो इतिहास, पुरातत्व और धार्मिक खूबियों के रंग, गंध से पर्यटकों को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="358" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33.jpg 828w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33-300x174.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33-768x445.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>लहरदार पगडंडियां, घने जंगल और घाटियां और संकरी नदियां और स्रोतों के मनोरम दृश्य, अनोखी वनस्पतियां और वन्य जीवों के आसपास होने का अहसास, और अपनी शहरी जिंदगी की रेलमपेल से भागे हुए जंगल के अभयारण्यक। ऐसा ही है उनाकोटि का प्राकृतिक भंडार, जो इतिहास, पुरातत्व और धार्मिक खूबियों के रंग, गंध से पर्यटकों को अपनी ओर इशारे से बुलाता है। यह एक औसत ऊंचाई वाली पहाड़ी श्रृंखला है, जो उत्तरी त्रिपुरा के हरे-भरे शांत और शीतल वातावरण में स्थित है।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-286076 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33.jpg" alt="" width="828" height="480" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33.jpg 828w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33-300x174.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/11/unakoti-tripura-1_563b82d45ea33-768x445.jpg 768w" sizes="(max-width: 828px) 100vw, 828px" /></p>
<p>राज्य की राजधानी से 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उनाकोटि की पहाड़ी पर हिन्दू देवी-देवताओं की चट्टानों पर उकेरी गई अनगिनत मूर्तियां और शिल्प मौजूद हैं। बड़ी-बड़ी चट्टानों पर ये विशाल नक्काशियों की तरह दिखते हैं, और ये शिल्प छोटे-बड़े आकार में और यहां-वहां चारों तरफ फैले हैं। पौराणिक कथाओं में इसके बारे में दिलचस्प कथा मिलती है, जिसके अनुसार यहां देवी-देवताओं की एक सभा हुई थी। भगवान शिव, बनारस जाते समय यहां रुके थे, तभी से इसका नाम उनाकोटि पड़ा है।</p>
<p>उनाकोटि में चट्टानों पर उकेरे गए नक्काशी के शिल्प और पत्थर की मूर्तियां हैं। इन शिल्पों का केंद्र शिव और गणेश हैं। 30 फुट ऊंचे शिव की विशालतम छवि खड़ी चट्टान पर उकेरी हुई है, जिसे &#8216;उनाकोटिस्वर काल भैरव&#8217; कहा जाता है। इसके सिर को 10 फीट तक के लंबे बालों के रूप में उकेरा गया है। इसी के पास शेर पर सवार देवी दुर्गा का शिल्प चट्टान पर उकेरी हुई है, वहां दूसरी तरफ मकर पर सवार देवी गंगा का शिल्प भी है। यहां नंदी बैल की जमीन पर आधी उकेरे हुए शिल्प भी हैं।</p>
<p>शिव के शिल्पों से कुछ ही मीटर दूर भगवान गणेश की तीन शानदार मूर्तियां हैं। चार-भुजाओं वाले गणेश की दुर्लभ नक्काशी के एक तरफ तीन दांत वाले साराभुजा गणेश और चार दांत वाले अष्टभुजा गणेश की दो मूर्तियां स्थित हैं। इसके अलावा तीन आंखों वाला एक शिल्प भी है, जिसके बारे में माना जाता है कि वह सूर्य या विष्णु भगवान का है।</p>
<p>चतुर्मुख शिवलिंग, नांदी, नरसिम्हा, श्रीराम, रावण, हनुमान, और अन्य अनेक देवी-देवताओं के शिल्प और मूर्तियों यहां हैं। एक किंवदंती है कि अभी भी वहां कोई चट्टानों को उकेर रहा है, इसीलिए इस उनाकोटि-बेल्कुम पहाड़ी को देवस्थल के रूप में जाना जाता है, आप कहीं से भी, किधर से भी गुजर जाइए आपको शिव या किसी देव की चट्टान पर उकेरी हुई मूर्ति या शिल्प मिलेगा।</p>
<p>पहाड़ों से गिरते हुए सुंदर सोते उनाकोटि के तल में एक कुंड को भरते हैं, जिसे &#8216;सीता कुंड&#8217; कहते हैं। इसमें स्नान करना पवित्र माना जाता है। हर साल यहां अप्रैल के महीने में &#8216;अशोकाष्टमी मेला&#8217; लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं और &#8216;सीता कुंड&#8217; में स्नान करते हैं।</p>
<p>इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने 2009-10 में उनाकोटि डेस्टिनेशन डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट के तहत यहां 5 किलोमीटर के दायरे में पर्यटक सूचना केंद्र, कैफेटेरिया, सार्वजनिक सुविधाएं, प्राकृतिक दृश्यों के लिए व्यूप्वाइंट आदि के निर्माण के लिए 1.13 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। त्रिपुरा पर्यटन विकास के योजना अधिकारियों के अनुसार, यह योजना एएसआई को सौंप दी गई है, और जल्दी ही इस पर काम शुरू होने की संभावना है।</p>
<p>माना जाता है कि उनाकोटि पर भारतीय इतिहास के मध्यकाल के पाला-युग के शिव पंथ का प्रभाव है। इस पुरातात्विक महत्व के स्थल के आसपास तांत्रिक, शक्ति, और हठ योगी जैसे कई अन्य संप्रदायों का प्रभाव भी पाया जाता है। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) के अनुसार उनाकोटि का काल 8वीं या 9वीं शताब्दी का है। हालांकि, इसके शिल्पों के बारे में, उनके समय-काल के बारे अनेक मत हैं।</p>
<p>देखा जाए तो ऐतिहासिक रूप से और उनकोटि की कथाएं अभी भी एएसआई और ऐसी ही अन्य संस्थाओं से इस पर समन्वित अनुसंधान की मांग कर रही हैं, ताकि भारतीय सभ्यता के लुप्त अध्याय के रहस्य को उजागर किया जा सके।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
