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	<title>लाइफस्टाइल &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>लाइफस्टाइल &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>शुगर, थायराइड से लेकर किडनी की बीमारी में बेहतर लाइफस्टाइल से हो सकता है फायदा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 07:14:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="332" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-231403.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-231403.png 875w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-231403-300x161.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-231403-768x413.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह (शुगर), थायरॉयड असंतुलन तथा लिवर, किडनी, हृदय, मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण है- असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता तनाव और अनियमित नींद। जो बीमारियाँ पहले “बुजुर्गों की बीमारी” कही जाती थीं, वे अब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="332" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-231403.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-231403.png 875w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-231403-300x161.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-19-231403-768x413.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह (शुगर), थायरॉयड असंतुलन तथा लिवर, किडनी, हृदय, मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण है- असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता तनाव और अनियमित नींद। जो बीमारियाँ पहले “बुजुर्गों की बीमारी” कही जाती थीं, वे अब युवाओं में भी सामान्य होती जा रही हैं।</p>



<p>हालांकि चिकित्सकीय देखरेख आवश्यक है, लेकिन कई शोध यह दर्शाते हैं कि सुव्यवस्थित जीवनशैली और घरेलू प्राकृतिक उपाय भी संपूर्ण समाधान का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं।</p>



<p><strong>मूल कारणों को समझना<br></strong>हाल ही में एक फेसबुक लाइव में स्वामी रामदेव ने बताया कि ज़्यादातर पुरानी बीमारियों के पीछे कुछ सामान्य कारण होते हैं जैसे शरीर में सूजन (inflammation), इंसुलिन रेजिस्टेंस(insulin resistance), ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस(oxidative stress)और हार्मोनल असंतुलन।</p>



<p>उदाहरण के लिए, मोटापा टाइप-2 डायबिटीज, हाई बीपी और हृदय रोग का जोखिम बढ़ाता है।</p>



<p>इसी प्रकार लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर किडनी, नसों और मस्तिष्क को नुकसान पहुँचा सकती है।</p>



<p>वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार किया जाए, तो जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है और बीमारी की गति को धीमा किया जा सकता है।</p>



<p><strong>पोषण: स्वस्थ होने की आधारशिला<br></strong>2025 के एक अध्ययन के अनुसार, खान-पान में सुधार मेटाबॉलिक और अन्य शारीरिक विकारों के प्रबंधन में बेहद ज़रूरी है। सब्जियाँ, साबुत अनाज, दालें, मेवे, बीज और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित और नियंत्रित मात्रा वाला आहार रक्त शर्करा को संतुलित रखने, बीपी नियंत्रित करने तथा लिवर और किडनी के कार्य को सहारा देने में मदद करता है।</p>



<p><strong>शोध के अनुसार:<br></strong>रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अतिरिक्त चीनी कम करने से इंसुलिन संवेदनशीलता बेहतर होती है।</p>



<p>फाइबर की मात्रा बढ़ाने से कोलेस्ट्रॉल और पाचन स्वास्थ्य सुधरता है।</p>



<p>ओमेगा-3 फैटी एसिड (अलसी, अखरोट या तैलीय मछली से) हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभकारी हैं।</p>



<p>प्रोसेस्ड फूड और अधिक नमक से बचाव हाई बीपी को नियंत्रित करने में सहायक है।</p>



<p>थायरॉयड के लिए प्राकृतिक स्रोतों से पर्याप्त आयोडीन और सेलेनियम लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन किसी भी सप्लीमेंट का सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। लिवर या किडनी रोग में व्यक्तिगत डाइट प्लान आवश्यक है।</p>



<p><strong>शारीरिक गतिविधि: प्राकृतिक नियंत्रक<br></strong>पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक स्वामी रामदेव के अनुसार, “नियमित शारीरिक गतिविधि सबसे प्रभावी और प्रमाणित उपायों में से एक है। मध्यम एरोबिक व्यायाम, शक्ति प्रशिक्षण और लचीलापन बढ़ाने वाले अभ्यास इंसुलिन संवेदनशीलता सुधारते हैं, पेट की चर्बी घटाते हैं और हृदय स्वास्थ्य बेहतर बनाते हैं।”</p>



<p><strong>शोध बताते हैं कि सप्ताह में कम से कम 150 मिनट का मध्यम व्यायाम:</strong></p>



<p>रक्तचाप कम करता है</p>



<p>शुगर नियंत्रण सुधारता है</p>



<p>लिपिड प्रोफाइल बेहतर बनाता है</p>



<p>मस्तिष्क कार्य को सहारा देता है</p>



<p>योग और प्राणायाम जैसे अभ्यास तनाव से जुड़े हार्मोनल असंतुलन को कम करने में मददगार हो सकते हैं।</p>



<p><strong>तनाव, नींद और नर्वस सिस्टम का संतुलन<br></strong>लगातार तनाव से cortisol हार्मोन बढ़ता है, जो बीपी, शुगर और वजन पर असर डालता है। लंबे समय का तनाव थायरॉयड और हृदय स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।</p>



<p>अध्ययनों के अनुसार, मैडिटेशन और 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद नर्वस सिस्टम के संतुलन को बहाल करने में सहायक हैं। अच्छी नींद हार्मोन संतुलन, लिवर डिटॉक्स प्रक्रिया और मस्तिष्क की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</p>



<p><strong>नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह<br></strong>घरेलू उपाय और बेहतर लाइफस्टाइल सहायक हैं, लेकिन वे चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं हैं। ब्लड प्रेशर, HbA1c, थायरॉयड, लिवर एंजाइम और किडनी फंक्शन की नियमित जांच आवश्यक है। समय पर पहचान से जटिलताओं से बचा जा सकता है।</p>



<p>मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग को अलग-अलग समस्या मानने के बजाय उन्हें आपस में जुड़ी स्थितियों के रूप में समझना चाहिए। शोध-आधारित और समग्र जीवनशैली अपनाकर जीवन की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार संभव है।</p>
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		<title>आप कितना लंबा जिएंगे? जवाब आपकी लाइफस्टाइल में नहीं, आपके DNA में छिपा है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 05:05:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="317" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-04-205626.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-04-205626.png 816w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-04-205626-300x154.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-04-205626-768x393.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />साइंस पत्रिका के एक नए अध्ययन के अनुसार, लंबी उम्र का रहस्य काफी हद तक (50-55 प्रतिशत) हमारे जीनों में निहित है, जबकि पहले यह केवल 20-25 प्रतिशत माना जाता था। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव पर्यावरण में सुधार (जैसे टीकाकरण और बेहतर पोषण) के कारण हुआ है, जिससे बाहरी कारणों से होने &#8230;]]></description>
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<p>साइंस पत्रिका के एक नए अध्ययन के अनुसार, लंबी उम्र का रहस्य काफी हद तक (50-55 प्रतिशत) हमारे जीनों में निहित है, जबकि पहले यह केवल 20-25 प्रतिशत माना जाता था। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह बदलाव पर्यावरण में सुधार (जैसे टीकाकरण और बेहतर पोषण) के कारण हुआ है, जिससे बाहरी कारणों से होने वाली मौतें कम हुई हैं और आनुवंशिक कारकों का प्रभाव अधिक स्पष्ट हो गया है।</p>



<p>नियमित व्यायाम से लेकर सख्त आहार तक, कुछ लोग लंबी उम्र पाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने लंबी उम्र का रहस्य उजागर कर दिया है । अध्ययन के अनुसार लंबी उम्र का राज काफी हद तक (50-55 प्रतिशत) हमारे जीन में निहित है। पहले यह माना जाता था कि जीवनकाल का केवल 20 से 25 प्रतिशत ही आनुवंशिकी पर निर्भर करता है, जबकि शेष जीवनशैली और पर्यावरण पर आधारित होता है।</p>



<p><strong>आंतरिक कारणों से होती हैं अधिकांश मौतें</strong><br>शोधकर्ताओं के अनुसार, पिछले अनुमानों में डाटा के अभाव की वजह से मृत्यु के कारणों में समय के साथ आए बदलावों को ध्यान में नहीं रखा गया था। एक सदी पहले कई लोग उन कारणों से मरते थे जिन्हें विज्ञानी बाहरी कारण कहते हैं जैसे दुर्घटनाएं, संक्रमण और अन्य बाहरी खतरे। आज, कम से कम विकसित देशों में, अधिकांश मौतें आंतरिक कारणों से होती हैं। बढ़ती उम्र, डिमेंशिया और हृदय रोग जैसी उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है।</p>



<p><strong>क्या अचानक शक्तिशाली हो गए हैं जीन</strong><br>विज्ञानियों का कहना है कि जीन अचानक अधिक शक्तिशाली नहीं हुए हैं । जो बदला है वह पर्यावरण है। उदाहरण के लिए, सौ साल पहले किसी व्यक्ति की लंबाई उसके पोषण और बचपन की बीमारियों पर निर्भर करती थी। आज, समृद्ध देशों में अधिकांश लोगों को पर्याप्त पोषण मिलता है, जिससे आनुवंशिक अंतरों का प्रभाव अधिक स्पष्ट गया । इसका मतलब यह नहीं है कि पोषण का महत्व समाप्त हो गया है, बल्कि इसलिए अधिकांश लोग अब आनुवंशिक क्षमता तक पहुंच जाते हैं। यही सिद्धांत जीवनकाल पर भी लागू होता है। जैसे-जैसे टीकाकरण में सुधार किया है, प्रदूषण कम किया है, आहार को बेहतर बनाया व स्वस्थ जीवनशैली अपनाई है। पर्यावरणीय कारकों के समग्र प्रभाव को कम किया है।</p>



<p><strong>जीन और पर्यावरण दोनों का महत्व</strong><br>शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि अंततः, जीन और पर्यावरण दोनों ही मायने रखते हैं। लेखकों ने स्वीकार किया है। जीवनकाल में होने वाले लगभग आधे बदलाव अभी भी पर्यावरण, जीवनशैली, स्वास्थ्य देखभाल व अनियमित जैविक प्रक्रियाओं पर निर्भर करते हैं। विभिन्न आनुवंशिक कारक विभिन्न वातावरणों के साथ किस प्रकार परस्पर क्रिया करते हैं, इस बात को समझा जा सकता है कि कुछ लोग दूसरों की तुलना में अधिक समय तक क्यों जीवित रहते हैं।</p>
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		<title>आपका लुक खराब करने लगा है लटकता Belly Fat</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Jun 2024 07:03:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[Belly Fat]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="451" height="289" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health2-1.jpg 451w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health2-1-300x192.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 451px) 100vw, 451px" />तेजी से बदलती लाइफस्टाइल इन दिनों लोगों को कई समस्याओं का शिकार बना रही है। आजकल लोगों का ज्यादातर टाइम ऑफिस में अपनी चेयर पर स्क्रीन के सामने बैठे हुए गुजरता है जिसकी वजह से कई लोग बढ़ते वजन से परेशान रहते हैं। बढ़ता Belly Fat अक्सर आपका लुक खराब कर देता है। ऐसे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="451" height="289" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health2-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health2-1.jpg 451w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health2-1-300x192.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 451px) 100vw, 451px" />
<p>तेजी से बदलती लाइफस्टाइल इन दिनों लोगों को कई समस्याओं का शिकार बना रही है। आजकल लोगों का ज्यादातर टाइम ऑफिस में अपनी चेयर पर स्क्रीन के सामने बैठे हुए गुजरता है जिसकी वजह से कई लोग बढ़ते वजन से परेशान रहते हैं। बढ़ता Belly Fat अक्सर आपका लुक खराब कर देता है। ऐसे में आप कुछ Natural Herbs से अपना बैली फैट कम कर सकते हैं।</p>



<p>बेली फैट (Belly Fat) न सिर्फ देखने में शरीर को बेडौल बनाता है, बल्कि अंदरूनी स्तर पर भी ये शरीर को कई प्रकार के नुकसान पहुंचाता है। बेली फैट ज्यादा होने से ये डायबिटीज (Diabetes), हार्ट अटैक (Heart Attack), डिमेंशिया, कोलोन और पैंक्रिएटिक कैंसर जैसी बीमारियों को न्योता देता है। ये हमारे हार्मोन्स को भी प्रभावित करता है, जिससे हमारी भूख बढ़ती है, साथ ही थकान सी महसूस होती है और ब्रेन की कार्यशैली भी धीमी पड़ जाती है।</p>



<p>स्ट्रेस हमारे बचाव की प्रक्रिया को ट्रिगर करता है, जिससे और भी फैट इकट्ठा होते जाता है, खास तौर से लिवर,किडनी, पेट और आंतों के आसपास यह ज्यादा जमा होता है, जिसे बेली फैट कहते हैं। ऐसे में सेहतमंद रहने के लिए बैली फैट को कम करना बेहद जरूरी है। आप स्वस्थ जीवनशैली और सही खानपान से बेली फैट कम कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ नेचुरल हर्ब्स भी बेली फैट को कम करने के मदद कर सकते हैं। जानते हैं ऐसे ही कुछ हर्ब्स के बारे में-</p>



<h2 class="wp-block-heading">हल्दी</h2>



<p>इसमें मौजूद करक्यूमिन शरीर के अंदर गर्मी बढ़ाता है, जिससे बॉडी फैट बर्न होता है और मेटाबोलिज्म बूस्ट होता है। यह अल्जाइमर डिजीज से भी बचाता है। सब्जी, सूप, चाय या दूध में डाल कर इसका सेवन कर सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अदरक</h2>



<p>यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ ही शुगर या कार्ब रिच फूड का सेवन करने के तुरंत बाद होने वाले शुगर स्पाइक से भी बचाता है। हल्दी की ही तरह इसकी भी थर्मोजेनिक प्रॉपर्टी होती हैं, जिसकी वजह से यह शरीर के अंदर जा कर गर्मी पैदा करते हैं और फैट बर्न और मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने में मदद करते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ओरिगेनो</h2>



<p>यह एक पेरेनियल हर्ब है, जो कि पुदीने से जुड़ा हुआ हर्ब है। इसमें मौजूद कार्वाक्रोल शरीर में ऐसे प्रोटीन और जींस को टारगेट करता है, जो शरीर में फैट सिंथेसिस करने में मदद करते हैं। इस तरह इन्हें टारगेट कर के ओरिगेनो वजन कम करने में भी मदद करता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">थाइम</h2>



<p>सब्जियों पर या मीट पर सीजनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला थाइम एक परफेक्ट हर्ब है। इसमें मौजूद थायमॉल नाम का केमिकल मेटाबॉलिज्म में सुधार लाता है और वेट लॉस करने में मदद करता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">दालचीनी</h2>



<p>खाने का स्वाद दोगुना करने वाली दालचीनी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। यह कई तरह के फायदे भी पहुंचाता है। इसके इस्तेम ब्लड शुगर कंट्रोल करता है, क्रेविंग कम करता है और देर तक पेट भरे होने का एहसास दिलाता है, जिससे बेली फैट कम होता है।</p>



<p><a href="https://www.jagran.com/elections/lok-sabha.html?itm_source=articledetail_banner&amp;itm_medium=banner&amp;itm_campaign=election_promotion"></a></p>
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		<title>इन कॉम्प्लिकेशंस को दूर रखने के लिए भी जरूरी है हेल्दी लाइफस्टाइल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Jun 2024 07:01:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[कॉम्प्लिकेशंस]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="503" height="289" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health1-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health1-4.jpg 503w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health1-4-300x172.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 503px) 100vw, 503px" />Diabetes की समस्या इन दिनों तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रही है। यह एक लाइलाज बीमारी है जिसे हेल्दी लाइफस्टाइल से कंट्रोल किया जाता है। हालांकि डायबिटीज में सिर्फ Blood Sugar Level कंट्रोल करने के लिए ही नहीं कुछ कॉम्प्लिकेशन को दूर रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी है। जानते हैं डायबिटीज में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="503" height="289" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health1-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health1-4.jpg 503w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/06/health1-4-300x172.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 503px) 100vw, 503px" />
<p>Diabetes की समस्या इन दिनों तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रही है। यह एक लाइलाज बीमारी है जिसे हेल्दी लाइफस्टाइल से कंट्रोल किया जाता है। हालांकि डायबिटीज में सिर्फ Blood Sugar Level कंट्रोल करने के लिए ही नहीं कुछ कॉम्प्लिकेशन को दूर रखने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल जरूरी है। जानते हैं डायबिटीज में होने वाले ऐसे ही कुछ कॉम्प्लिकेशन।</p>



<p>ब्लड में बढ़े हुए शुगर के कारण डायबिटीज होती है, लेकिन डायबिटीज के कारण शरीर के अंदर बहुत सारे बदलाव होते हैं। ये ऐसे बदलाव होते हैं, जो शरीर को कई मायने में नुकसान पहुंचाते हैं। इन्हें डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशन कहा जाता है।</p>



<p>डायबिटीज होने के बाद एक स्वस्थ जीवनशैली सिh इसलिए जरूरी नहीं होती है, ताकि शुगर कंट्रोल किया जा सके, ये इससे होने वाले तमाम उन कॉम्प्लिकेशन से बचाव करने के लिए भी फॉलो की जाती है, जिससे हमारा स्वास्थ्य हमेशा अच्छा बना रहे और अन्य नई समस्याओं का सामना न करना पड़े। आइए जानते हैं डायबिटीज के इन कॉम्प्लिकेशंस के बारे में-</p>



<h2 class="wp-block-heading">आई रेटिनोपैथी</h2>



<p>डायबिटीज आंखों के ब्लड वेसल को डैमेज कर सकती है, जिससे अंधापन भी हो सकता है। इसे आई रेटिनोपैथी के नाम से जाना जाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">हार्ट संबंधी समस्याएं</h2>



<p>डायबिटीज कोरोनरी आर्टरी डिजीज के साथ एंजाईना (सीने में दर्द) और एथेरोस्क्लेरोसिस (आर्टरी का संकरा होना), हार्ट अटैक और ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ा देता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">फुट डैमेज</h2>



<p>नर्व डैमेज और खराब ब्लड फ्लो के कारण इन्फेक्शन का खतरा बढ़ता है और पैरों में सूजन या दर्द बढ़ सकता है। इससे पैर सुन्न भी पड़ सकते हैं या फिर एक झनझनाहट महसूस होती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">किडनी डैमेज</h2>



<p>किडनी में मौजूद संवेदनशील ग्लोमेरुलाई फिल्टरिंग सिस्टम जो कि ब्लड में से वेस्ट फिल्टर करता है, डायबिटीज इसे भी डैमेज कर सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सुनने की क्षमता में कमी</h2>



<p>डायबिटीज के कारण कान की नसें भी डैमेज हो सकती हैं, जिससे सुनने की क्षमता कम होती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अल्जाइमर डिजीज</h2>



<p>डायबिटीज डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी और अल्जाइमर के खतरे को और भी बढ़ा देता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">डाइजेस्टिव नर्व डैमेज</h2>



<p>ब्लड में अधिक शुगर होने के कारण ये डाइजेस्टिव ट्रैक्ट को पोषण देने वाली छोटी छोटी कैपिलरी को नष्ट कर देता है, जिससे उलटी, मितली, कब्ज या डायरिया की शिकायत हो सकती है।</p>



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		<title>खराब लाइफस्टाइल बनाती है लिवर से जुड़ी समस्याओं का शिकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Apr 2024 08:39:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="525" height="383" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/lifstyle-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/lifstyle-2.jpg 525w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/lifstyle-2-300x219.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 525px) 100vw, 525px" />लिवर (Liver) हमारे शरीर के सबसे अहम अंगों में से एक है। बावजूद इसके भारत समेत दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या से जूझ रहे हैं। यह जीवन के लिए बड़ा खतरा तो नहीं है लेकिन इसकी लगातार अनदेखी करना खतरनाक हो सकता है। आइए जानते हैं लिवर से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="525" height="383" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/lifstyle-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/lifstyle-2.jpg 525w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/lifstyle-2-300x219.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 525px) 100vw, 525px" />
<p>लिवर (Liver) हमारे शरीर के सबसे अहम अंगों में से एक है। बावजूद इसके भारत समेत दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या से जूझ रहे हैं। यह जीवन के लिए बड़ा खतरा तो नहीं है लेकिन इसकी लगातार अनदेखी करना खतरनाक हो सकता है। आइए जानते हैं लिवर से जुड़ी सामान्य समस्याओं और बचाव के आवश्यक उपायों के बारे में।</p>



<p>आजकल आरामदेह और अव्यवस्थित जीवनशैली के चलते लोगों को अनेक तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसमें से एक समस्या लिवर की भी है, खासकर फैटी लिवर (Fatty Liver), लिवर में सूजन, सिरोसिस जैसी समस्याएं अधिक देखने में आ रही हैं। खानपान में अशुद्धता के चलते लिवर की दिक्कत स्वाभाविक है। वहीं, अगर आप बहुत ज्यादा अल्कोहल पी रहे हैं, तो भी लिवर के कमजोर होने का खतरा बना रहता है।</p>



<p>लिवर की कार्यप्रणाली बाधित हो जाने से अन्य तरह की भी स्वास्थ्य परेशानियां सामने आने लगती हैं। कुल मिलाकर कहें तो लिवर की समस्या का मुख्य कारण ही असंतुलित जीवनशैली है। ऐसे में इस बारे में विस्तार से जानने के लिए ब्रह्मानंद मिश्र ने नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में हेप्टोलॉजी के एसो. प्रोफेसर डॉ. विनोद अरोड़ा से बातचीत की।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आहार व दिनचर्या का असंतुलन</h2>



<p>डॉक्टर कहते हैं कि लगातार कई घंटे तक बैठकर काम करने, पर्याप्त शारीरिक श्रम नहीं करने और भोजन में जंक फूड की अधिकता, जैसे प्रोसेस्ड फूड्स, ज्यादा नमक और चीनी के कारण लिवर से जुड़ी दिक्कतें आ रही हैं। अशुद्ध भोजन से लिवर में चिकनापन और फैट बढ़ जाता है। लिवर के फैटी हो जाने के कारण आगे चलकर अन्य बीमारियों की भी आशंका रहती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">लिवर से जुड़ी मुख्य समस्याएं</h2>



<p>अस्त-व्यस्त जीवनशैली और अशुद्ध भोजन नॉन-अल्कॉहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) का कारण बन रहा है। आजकल मेटाबॉलिक एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज के रूप में एक नई तरह की समस्या भी देखने में आ रही है। इसे सामान्य भाषा में समझें तो अगर किसी को डायबिटीज, मोटापा या अनियंत्रित ब्लड प्रेशर जैसी समस्या है, तो लिवर की बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। कमर के आसपास फैट इकट्ठा हो रहा है या गर्दन मोटी और काली हो रही है तो यह लिवर की समस्या के शुरुआती संकेत हैं। ऐसी हालत में लिवर की जांच अवश्य कराएं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कब और कैसे कराएं जांच</h2>



<p>फाइब्रो-स्कैन करा लेने से लिवर में हो रहे बदलाव का काफी हद तक पता चल जाता है। अगर फैट की अधिकता हो रही है, साथ ही नियमित और अधिक मात्रा में अल्कोहल पी रहे हैं,तो ये सभी कारण मिलकर लिवर के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। वहीं, अगर डायबिटीज है तो बेसलाइन पर फाइब्रो स्कैन, लिपिड प्रोफाइल, एलएफटी करा लेना चाहिए। इससे बीमारी को समझने और इसके आधार पर सही उपचार से उसे गंभीर होने से रोका जा सकता है। कोशिश करें कि हर छह महीने से लेकर एक साल के बीच लिवर की जांच जरूर कराएं। अगर एलएफटी और अन्य टेस्ट सामान्य रेंज में हैं, तो लिवर की जांच एक से दो साल के अंतराल पर भी करा सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">समस्या के शुरुआती लक्षण</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>लिवर में आ रही समस्या का आमतौर पर शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं उभरता। ऐसे में नियमित अंतराल पर जांच से इसका पता लगा सकते हैं।</li>



<li>लिवर की बीमारी में कुछ लक्षण होते हैं, जिसे लेकर सतर्क हो जाना चाहिए। खासकर, सीधे हाथ में ऊपर की तरफ थोड़ा भारीपन महसूस हो सकता है।</li>



<li>आमतौर पर लिवर की बीमारी एडवांस चरण में पकड़ में आती है।</li>



<li>गंभीरता बढ़ने पर पैरों में सूजन, पेट का आकार बढ़ने, पेट में पानी इकट्ठा होने जैसे लक्षण होने लगते हैं।</li>
</ul>



<h2 class="wp-block-heading">हेपेटाइटिस की स्क्रीनिंग भी है जरूरी</h2>



<p>स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या होने पर हेपेटाइटिस बी और सी की भी स्क्रीनिंग करा लेनी चाहिए। कभी जाने-अनजाने में ड्रग्स के प्रयोग, असुरक्षित यौन संबंध जैसे कारणों से भी हेपेटाइटिस की आशंका रहती है। इस बीमारी का बचाव संभव है, बशर्ते सही समय पर जांच हो और सही उपचार हो। वर्तमान में हेपेटाइटिस सी के लिए आसानी से उपचार उपलब्ध है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">बनाएं खानपान और व्यायाम के नियम</h2>



<p>लिवर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है अच्छी हाइट और पर्याप्त एक्सरसाइज। भोजन में चीनी, फैट कम से कम रखें। प्रोटीन का अनुपात बढ़ाकर रखना चाहिए। अगर शाकाहारी हैं तो पनीर, सोया, बादाम, अखरोट, अन्य ड्राई फ्रूट्स का सेवन करना लाभदायक होगा। शाकाहारी नहीं हैं, तो रेड मीट का सेवन कम करें, इससे बेहतर मछली और अंडे है। चिकन का सेवन हफ्ते में एक या दो बार ही करें। रोजाना कम से कम 15 मिनट की हेवी एक्सरसाइज करना जरूरी है। ब्रिस्क वॉक, वजन उठाने वाले एक्सरसाइज, साइकिलिंग, पैडलिंग आदि लिवर को सेहतमंद रखने में उपयोगी होते हैं।</p>
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