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	<title>रामचरितमानस &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>रामचरितमानस &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सत्य ही सनातन है, पढ़ें वेदों से रामचरितमानस तक की यात्रा</title>
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		<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 08:34:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रामचरितमानस]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="316" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-16-002756.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-16-002756.png 770w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-16-002756-300x154.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-16-002756-768x393.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>करुणा और अहिंसा इसका स्वभाव है। सनातन में सब समाहित हैं, इसीलिए यह विश्व मंगल का मूल है।</p>



<p>सनातन धर्म ही एकमात्र शाश्वत परंपरा है, जो ऐतिहासिक सीमाओं से परे है और सभी आध्यात्मिक मार्गों के सार को समाहित करती है। इसके मूल में सत्य, प्रेम, करुणा और अहिंसा हैं। सनातन धर्म की पवित्र ग्रंथ परंपरा वेदों से शुरू होती है, जिसके बाद उपनिषद, पुराण और श्रीमद्भगवद्गीता आते हैं। गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस इस परंपरा का अंतिम ग्रंथ है। यदि सनातन धर्म के आध्यात्मिक प्रतीकवाद का काव्यात्मक वर्णन किया जाए तो कहा जा सकता है कि इसकी धारा गंगा है। इसका पवित्र पर्वत कैलास है। इसका वृक्ष अक्षय वट है।</p>



<p><strong>दिव्यास्त्र सुदर्शन चक्र<br></strong>इसका ग्रंथ वेद है और इसका दिव्यास्त्र सुदर्शन चक्र है। इसकी सुखदायक शांति चंद्रमा है और इसका प्रकाश सूर्य है। सनातन धर्म में सभी का समावेश है। वह अपने अंदर सबको समाहित किए है। इसका कब आरंभ हुआ, यह गणना नहीं है, शेष सबकी काल गणना है कि कौन कब से है। मानस में सनातन शब्द नहीं आया, मगर मानस में सब कुछ सनातन है। मानस का सत्य ही सनातन धर्म है। प्रेम ही सनातन धर्म है। करुणा ही तो सनातन धर्म है। अहिंसा ही तो सनातन धर्म है।</p>



<p><strong>वैश्विक और दिक का अर्थ<br></strong>हमारी संस्कृति वैदिक सनातन धर्म है। वै का अर्थ है वैश्विक और दिक का अर्थ दिशा। जो संस्कृति विश्व को दिशा दे, वह वैदिक है। जो धर्म वैश्विक दिशा दर्शाता है, उसी का नाम है वैदिक सनातन धर्म है। जो वैश्विक मार्गदर्शन करता है, इस दिशा में हमें प्रेरित करता है, गति देता है और लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आशीर्वाद देता है। विश्व मंगल के लिए जो धाराएं आईं, उनमें जो सनातन मूल्य हैं, उन्हें हम नकार नहीं सकते। सनातनता परम सत्य है। हमें इन बातों में नहीं जाना कि कौन हीन है, कौन श्रेष्ठ है। जनवरी में जैन मुनि ने राजधानी में राम कथा कराई। यह भी सनातन विचार का परिणाम है।</p>



<p><strong>पांच देवों की विशेष मान्यता<br></strong>सनातन में पांच देवों की विशेष मान्यता है। पांच देवों के संदेश युवा अपने हृदय में धारण करें। गणेश विवेक के देव हैं। आवश्यकता है विवेक की। दूसरे देव, सूर्य की उपासना का अर्थ है कि हम उजाले में जिएं। प्रकाश की तरफ हमारी गति हो। सनातन कहता है कि युवाओं को प्रकाश में जीने का संकल्प लेना चाहिए। तीसरे देव हैं विष्णु। विष्णु यानी व्यापकता। हमारे विचार विशाल हों। संकीर्णता के कारण अच्छी विचारधारा भी लड़ रही हैं। विशाल दृष्टिकोण की आवश्यकता हमेशा रही है, मगर आज और भी अधिक है। चौथे देव शिव हैं विश्वास। विश्वास के बिना सब अधूरा है। उसके तीन नेत्र हैं। पांचवी, दुर्गा श्रद्धा हैं। ये पंच देव की आध्यात्मिक पूजा है।</p>



<p>सनातन विचार कहते हैं कि गुरु में ये पांचों हैं। सनातन सप्तक है। सात वस्तुओं से सनातन जुड़ा हुआ है। ब्रह्म सनातन है। बुद्ध पुरुष सनातन है। हमारा स्वभाव सनातन है। जीव सनातन है। कुलधर्म सनातन है। धर्म सनातन है। सत्य सनातन है। सत्य, प्रेम, करुणा और अहिंसा… मेरी दृष्टि में मूल सनातन धर्म के सिद्धांतों में हैं।</p>



<p><strong>मानस सनातन धर्म कथा<br></strong>सिद्धांत शब्द भी ठीक नहीं लगता। सनातन धर्म के स्वभाव में हैं। इसलिए राजधानी की मानस सनातन धर्म कथा के लिए चार पंक्ति मानस की उठाईं। एक पंक्ति में सनातन धर्म का सत्य है… धरमु न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना।। दूसरी में प्रेम जो सनातन धर्म की बातें कर रहा है, वह है… रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जान निहारा।। तीसरी में सनातन की करुणा है… जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होई। करुना सागर कीजिअ सोई।। चौथी पंक्ति में अहिंसा है.. परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा। पर निंदा सम अघ न गरीसा।।</p>



<p><strong>सनातन धर्म के आठ प्रधान लक्षण<br></strong>वैदिक सनातन धर्म के आठ प्रधान लक्षण हैं। लक्षण को मैं स्वभाव कहूंगा। सत्य, सनातन धर्म का स्वभाव है। ऋत जो परिवर्तन करती है। उसका एक सार्वभौम नियम है, एक वैश्विक स्वभाव। यज्ञ सनातन धर्म का स्वभाव है। यज्ञ यानी आहुति देना। अपने लिए नहीं, बल्कि जगत के लिए। धर्म को कर्म में परिवर्तित करना है। वस्तु वचनात्मक ना रहे, रचनात्मक हो जाए। पूर्व जन्म और पुनर्जन्म सनातन धर्म की देन है। ध्यान और वर्ण आश्रम भी सनातन की देन हैं। ब्रह्मचर्याश्रम, गृहस्थाश्रम, वानप्रस्थाश्रम आदि भी सनातन में ही हैं। मोक्ष की यात्रा भी सनातन का लक्षण है।</p>



<p><strong>सनातन पुरुष के कुछ लक्षण<br></strong>सनातन है तो सनातन पुरुष भी हैं। सनातन पुरुष के कुछ लक्षण हैं। सनातन पुरुष वह है, धीरे-धीरे जिसके सभी विषय विराम लेने लगें। धीरे-धीरे। इसकी एक कसक होनी चाहिए कि अभी तक वैराग्य नहीं आया। विषय के साथ विकार भी जुड़ा है। विषय के साथ संस्कार भी जुड़ा है। जिसका संग हमें बहुत अच्छा लगे, ऐसा कोई साधु सनातन है। असहाय को देखकर जिसके हृदय में करुणा जागे, संवेदना प्रकट हो। जो बुद्धपुरुष सज्जनों से मैत्री करता हो, श्रेष्ठों को आदर देता हो, वह चलता-फिरता सनातन धर्म है।</p>



<p><strong>सनातन धर्म का कोई आदि अंत नहीं<br></strong>सनातन धर्म का कोई आदि अंत नहीं। उसे मिटाने की कोशिश हुई, लेकिन किसी को निर्मूल तब किया जाए, जब मूल नीचे हो। सनातन धर्म का मूल ऊर्ध्व मूल है। उसकी शाखाएं नीचे आई हैं, मूल ऊपर है। और वहां तक हम पहुंच नहीं पाते। धर्म में जब संकीर्णता आ जाती है, अपने-अपने आग्रह आ जाते हैं, तब कूपमंडूकता आ जाती है। सनातन धर्म में संकीर्णता नहीं, व्यापकता है। देश, काल और आज के समाज में इसकी आवश्यकता है।</p>
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		<title>रामचरितमानस, पंचतंत्र, सहृदयलोक-लोकन बने यूनेस्को &#8216;मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक&#8217; रजिस्टर का हिस्सा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 May 2024 06:55:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="360" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-4-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-4-2.jpg 666w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-4-2-300x175.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />रामचरितमानस पंचतंत्र और सह्रदयालोक-लोकन को यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला 7-8 मई को मंगोलियाई राजधानी उलानबटार में आयोजित मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कमेटी फॉर एशिया एंड द पैसिफिक की 10वीं आम बैठक में लिया गया। सहृदयालोक-लोकन पंचतंत्र और रामचरितमानस क्रमशः &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="360" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-4-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-4-2.jpg 666w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/national-4-2-300x175.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>रामचरितमानस पंचतंत्र और सह्रदयालोक-लोकन को यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह फैसला 7-8 मई को मंगोलियाई राजधानी उलानबटार में आयोजित मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कमेटी फॉर एशिया एंड द पैसिफिक की 10वीं आम बैठक में लिया गया। सहृदयालोक-लोकन पंचतंत्र और रामचरितमानस क्रमशः आचार्य आनंदवर्धन पंडित विष्णु शर्मा और गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखे गए थे।</p>



<p>रामचरितमानस, पंचतंत्र और सह्रदयालोक-लोकन को &#8216;यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर&#8217; में शामिल किया गया है।</p>



<p>अधिकारियों ने सोमवार को दिल्ली में कहा कि यह निर्णय 7-8 मई को मंगोलियाई राजधानी उलानबटार में आयोजित मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कमेटी फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (एमओडब्ल्यूसीएपी) की 10वीं आम बैठक में लिया गया।</p>



<p>&#8216;सहृदयालोक-लोकन&#8217;, &#8216;पंचतंत्र&#8217; और &#8216;रामचरितमानस&#8217; क्रमशः आचार्य आनंदवर्धन, पंडित विष्णु शर्मा और गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखे गए थे।</p>



<p>एक प्रेस विज्ञप्ति में, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने कहा कि ये &#8220;कालातीत कार्य हैं जिन्होंने भारतीय साहित्य और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया है, देश के नैतिक ताने-बाने और कलात्मक अभिव्यक्तियों को आकार दिया है&#8221;।</p>



<p>इन साहित्यिक कृतियों ने समय और स्थान से परे जाकर भारत के भीतर और बाहर दोनों जगह पाठकों और कलाकारों पर छाप छोड़ी है।</p>



<p>इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में कला निधि प्रभाग के डीन (प्रशासन) और विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रमेश चंद्र गौड़ ने भारत से तीन प्रविष्टियों को सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। मंत्रालय ने कहा, गौर ने सम्मेलन में नामांकन का प्रभावी ढंग से बचाव किया।</p>



<p>तीनों कार्यों को यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर में शामिल किया गया था, जिसे सदस्य-राज्य प्रतिनिधियों द्वारा कठोर विचार-विमर्श और मतदान के बाद 2008 में बनाया गया था।</p>



<p>विश्व निकाय ने 8 मई को एक बयान में कहा कि MOWCAP की 10वीं आम बैठक मंगोलिया के संस्कृति मंत्रालय, यूनेस्को के लिए मंगोलियाई राष्ट्रीय आयोग और बैंकॉक में यूनेस्को क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा आयोजित की गई थी।</p>



<p>इस वर्ष, MOWCAP क्षेत्रीय रजिस्टर ने &#8220;मानव अनुसंधान, नवाचार और कल्पना&#8221; का जश्न मनाने की मांग की।</p>



<p>बयान में कहा गया है, 2024 शिलालेखों में वंशावली रिकॉर्ड विशेष रूप से उल्लेखनीय थे, जिसमें मंगोलिया के खलखा मंगोलों के वंशानुगत प्रभुओं का पारिवारिक चार्ट, चंगेज खान का घर शामिल था; साथ ही चीन में हुइझोउ और मलेशिया में केदाह राज्य के समुदाय, क्षेत्रीय पारिवारिक इतिहास को एकत्रित करने के महत्व के प्रमाण के रूप में।</p>



<h2 class="wp-block-heading">विश्व रजिस्टर की यूनेस्को मेमोरी क्या है?</h2>



<p>यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर मानवता की दस्तावेजी विरासत की सुरक्षा के लिए 1992 में यूनेस्को द्वारा शुरू की गई एक अंतरराष्ट्रीय पहल का हिस्सा है।</p>



<p>कार्यक्रम का उद्देश्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक मूल्य की दस्तावेजी सामग्रियों को संरक्षित करना और उन तक पहुंच सुनिश्चित करना है।</p>



<p>इसमें पांडुलिपियाँ, मुद्रित पुस्तकें, अभिलेखीय दस्तावेज, फिल्में, ऑडियो और फोटोग्राफिक रिकॉर्ड शामिल हैं जो अद्वितीय और अपूरणीय हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>लखनऊ हाईकार्ट का फैसला: रामचरितमानस जलाने वालों पर रासुका को ठहराया उचित</title>
		<link>https://livehalchal.com/l-5/534929</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Jan 2024 04:41:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[रामचरितमानस]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ हाईकार्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/Capture-6-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/Capture-6.png 844w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/Capture-6-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/Capture-6-768x428.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश देवेंद्र प्रताप यादव व सुरेश सिंह यादव की याचिकाओं पर दिया। इनमें दोनों की रासुका के तहत कार्रवाई के आदेशों को चुनौती दी गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रामचरितमानस की प्रतियां फाड़कर जलाने के दो आरोपियों पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="344" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/Capture-6-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/Capture-6.png 844w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/Capture-6-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/01/Capture-6-768x428.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश देवेंद्र प्रताप यादव व सुरेश सिंह यादव की याचिकाओं पर दिया। इनमें दोनों की रासुका के तहत कार्रवाई के आदेशों को चुनौती दी गई थी।</p>



<p>इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रामचरितमानस की प्रतियां फाड़कर जलाने के दो आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई को उचित ठहराया है। कोर्ट ने रासुका के तहत दोनों को निरुद्ध करने के डीएम लखनऊ के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है।</p>



<p>न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जौहरी की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश देवेंद्र प्रताप यादव व सुरेश सिंह यादव की याचिकाओं पर दिया। इनमें दोनों की रासुका के तहत कार्रवाई के आदेशों को चुनौती दी गई थी। इस मामले में सतनाम सिंह लवी ने गत वर्ष 29 जनवरी को स्थानीय पीजीआई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि आपराधिक साजिश के तहत सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा रामचरितमानस पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के समर्थन में और उनकी शह पर देवेंद्र प्रताप यादव व अन्य ने वृंदावन कॉलोनी में रामचरितमानस की प्रतियां फाड़कर जला दीं थीं। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ा और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस की रिपोर्ट के तहत दोनों के खिलाफ जिलाधिकारी ने रासुका के तहत कार्रवाई का आदेश दिया था।</p>



<p><strong>इससे समाज में आक्रोश व गुस्सा स्वाभाविक</strong><br>कोर्ट ने कहा, आरोपियों ने अपने सहयोगियों के साथ, सार्वजनिक स्थल पर, दिन के प्रकाश में, समाज के बहुसंख्यक वर्ग द्वारा उनकी धार्मिक मान्यताओं व आस्था के अंतर्गत भगवान राम के जीवन के घटनाक्रम से संबंधित धर्म ग्रंथ का जिस प्रकार अपमान किया, उससे समाज में आक्रोश व गुस्से का उत्पन्न होना स्वाभाविक है। समाज में धार्मिक उन्माद व आक्रोश फैलने की स्थिति का परिदृश्य में आ सकना, वर्तमान स्थिति में विशेषकर जहां मोबाइल फोन व सोशल मीडिया से समाज का लगभग प्रत्येक व्यक्ति जुड़ा हुआ है, स्वाभाविक प्रतीत होता है।</p>
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