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	<title>रमा एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>रमा एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>दीवाली से पहले रमा एकादशी पर घर ले आएं 5 चीजें</title>
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		<pubDate>Sun, 27 Oct 2024 08:58:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="298" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-164-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-164.jpg 861w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-164-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-164-768x370.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म में कार्तिक महीने का विशेष महत्व है। इस महीने में रमा एकादशी (Rama Ekadashi 2024 Upay) और देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। रमा एकादशी कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। वहीं देवउठनी एकादशी शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="298" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-164-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-164.jpg 861w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-164-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-164-768x370.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन धर्म में कार्तिक महीने का विशेष महत्व है। इस महीने में रमा एकादशी (Rama Ekadashi 2024 Upay) और देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। रमा एकादशी कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। वहीं देवउठनी एकादशी शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।</p>



<p>सनातन धर्म में एकादशी पर्व का विशेष महत्व है। यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। इस शुभ अवसर पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके साथ ही एकादशी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मत है कि एकादशी व्रत करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि भी होती है। ज्योतिष शास्त्र में एकादशी तिथि पर विशेष उपाय करने का विधान है। इन उपायों को करने से आर्थिक तंगी दूर होती है। अगर आप भी आर्थिक तंगी से निजात पाना चाहते हैं, तो दीवाली से पूर्व रमा एकादशी (Rama Ekadashi Puja Vidhi) पर ये चीजें जरूर घर ले आएं। आइए जानते हैं-</p>



<p><strong>घर लाएं ये चीजें</strong><br>जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी को श्रीफल अति प्रिय है। अतः रमा एकादशी के दिन श्रीफल अवश्य घर लाएं। आप चांदी से निर्मित श्रीफल भी लेकर आ सकते हैं। इसके अलावा, रमा एकादशी पर लक्ष्मी नारायण जी को एकाक्षी नारियल अर्पित करें। इस उपाय को करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही आय और सौभाग्य में वृद्धि होती है।<br>अगर आप आर्थिक तंगी से निजात पाना चाहते हैं, तो रमा एकादशी पर चांदी से निर्मित कामधेनु गाय की प्रतिमा खरीदकर घर ले आएं। पूजा के समय विधि-विधान से कामधेनु गाय की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करें। इस उपाय को करने से धन संबंधी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही दुखों का नाश होता है।<br>वास्तु दोष को दूर करने के लिए दीवाली से पूर्व रमा एकादशी पर दक्षिणावर्ती शंख खरीदकर लाएं। स्नान-ध्यान के बाद दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल रख भगवान विष्णु का अभिषेक करें। आप चाहे तो गाय के कच्चे दूध से भी भगवान विष्णु का अभिषेक कर सकते हैं।<br>जीवन में व्याप्त दुखों से निजात पाना चाहते हैं, तो रमा एकादशी के दिन विधि पूर्वक लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें। इस दिन चांदी से निर्मित गजराज की प्रतिमा खरीदकर घर ले आएं। इस उपाय को करने से वास्तु दोष भी दूर होता है।<br>जीवन में तरक्की और उन्नति पाने के लिए रमा एकादशी के दिन तुलसी माता की अवश्य पूजा करें। इसके साथ ही घर पर तुलसी का पौधा लगाएं। अगर पूर्व से घर में तुलसी का पौधा लगा है, तो प्रातः काल में तुलसी जी की पूजा करें। वहीं, संध्याकाल में तुलसी माता की आरती करें।</p>
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		<title>रमा एकादशी के दिन तुलसी आरती के बाद करें ये उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Oct 2024 08:56:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रमा एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="256" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163.jpg 834w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-768x319.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्री हरि की पूजा होती है। इस बार यह व्रत 28 अक्टूबर को रखा जाएगा। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी माता की पूजा-अर्चना करने से जीवन में खुशहाली आती है। वहीं इस दिन (Rama Ekadashi &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="256" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163.jpg 834w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-163-768x319.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्री हरि की पूजा होती है। इस बार यह व्रत 28 अक्टूबर को रखा जाएगा। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी माता की पूजा-अर्चना करने से जीवन में खुशहाली आती है। वहीं इस दिन (Rama Ekadashi 2024) तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है।</p>



<p>रमा एकादशी का व्रत बेहद पुण्यदायी माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी प्रति मास शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के 11वें दिन मनाई जाती है। इस बार यह 28 अक्टूबर को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत (Rama Ekadashi 2024) को करने से आर्थिक तंगी से निजात मिलती है। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में इस दिन देवी तुलसी की पूजा करने को भी कहा गया है।</p>



<p>ऐसी मान्यता है सुबह उठकर देवी तुलसी की विधि अनुसार, पूजा करें और उनकी आरती करें। इससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं रहेगी। साथ ही व्यक्ति के सभी पापों का नाश होगा, तो चलिए यहां पढ़ते हैं।</p>



<p><strong>।।तुलसी माता की आरती।। (Ekadashi Par Karen Maa Tulsi Ki Aarti)</strong></p>



<p>जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता ।<br>सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता।।<br>मैय्या जय तुलसी माता।।<br>सब योगों से ऊपर, सब रोगों से ऊपर।<br>रज से रक्ष करके, सबकी भव त्राता।<br>मैय्या जय तुलसी माता।।</p>



<p>तुलसी के उपाय &#8211; रमा एकादशी के दिन कठिन व्रत का पालन करें। फिर देवी को लाल चुनरी और लाल चूड़ी अर्पित करें। उनके सामने देसी घी का दीपक जलाएं और फिर आरती करें। आरती के पश्चात &#8221;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः&#8221; का जाप करें और तुलसी माता का ध्यान करें। इससे जीवन में सकारात्मक बदलाव होने लग जाएंगे।</p>



<p>बटु पुत्री है श्यामा, सूर बल्ली है ग्राम्या।<br>विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे, सो नर तर जाता।<br>मैय्या जय तुलसी माता।।<br>हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वंदित।<br>पतित जनों की तारिणी, तुम हो विख्याता।<br>मैय्या जय तुलसी माता।।</p>



<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, रमा एकादशी तिथि का पूजन समय 8 बजकर 11 मिनट से लेकर 9 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। ऐसे में भक्त इस दौरान विष्णु जी की उपासना करें।</p>



<p>लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।<br>मानव लोक तुम्हीं से, सुख-संपति पाता।<br>मैय्या जय तुलसी माता।।<br>हरि को तुम अति प्यारी, श्याम वर्ण सुकुमारी।<br>प्रेम अजब है उनका, तुमसे कैसा नाता।<br>हमारी विपद हरो तुम, कृपा करो माता।<br>मैय्या जय तुलसी माता।।<br>जय जय तुलसी माता, मैय्या जय तुलसी माता।<br>सब जग की सुख दाता, सबकी वर माता॥<br>मैय्या जय तुलसी माता।।</p>



<p>रमा एकादशी के मौके पर तुलसी पूजन का विशेष महत्व है, जो लोग इस दिन माता तुलसी की आराधना करते हैं, उन्हें अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता है।</p>
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		<item>
		<title>27 या 28 अक्टूबर, कब मनाई जाएगी रमा एकादशी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Oct 2024 04:42:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रमा एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="320" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-95-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-95.jpg 865w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-95-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-95-768x398.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />ज्योतिषियों की मानें तो कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन (Rama Ekadashi 2024 Date) रमा एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष रमा एकादशी पर दुर्लभ इंद्र योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही शिववास योग का संयोग बन रहा है। इन योग में जगत के पालनहार भगवान विष्णु &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="320" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-95-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-95.jpg 865w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-95-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-95-768x398.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>ज्योतिषियों की मानें तो कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन (Rama Ekadashi 2024 Date) रमा एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष रमा एकादशी पर दुर्लभ इंद्र योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही शिववास योग का संयोग बन रहा है। इन योग में जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।</p>



<p>सनातन धर्म में कार्तिक महीने (Ekadashi in october 2024) का विशेष महत्व है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस महीने में रमा और देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। वहीं, प्रतिदिन भगवान विष्णु संग तुलसी माता की पूजा की जाती है।</p>



<p>कार्तिक मास में जगत के पालनहार भगवान विष्णु योग निद्रा से जागृत होते हैं। इस शुभ अवसर पर देवउठनी एकादशी मनाई जाती है। इससे पूर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन रमा एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी (Ekadashi Vrat Kab Hai) का व्रत रखा जाता है। आइए, रमा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं-</p>



<p><strong>रमा एकादशी शुभ मुहूर्त (Rama Ekadashi Shubh Muhurat)<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 27 अक्टूबर को सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर शुरू होगी और 28 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। वैष्णव समाज के अनुयायी 28 अक्टूबर को रमा एकादशी मनाएंगे। अतः सामान्य जन 28 अक्टूबर को रमा एकादशी मना सकते हैं। वहीं, 29 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 31 मिनट से लेकर 08 बजकर 44 मिनट के मध्य साधक पारण कर सकते हैं। इसके लिए आप स्थानीय पंचांग का सहारा ले सकते हैं।</p>



<p><strong>रमा एकादशी महत्व (Rama Ekadashi Importance)<br></strong>सनातन धर्म में एकादशी पर्व का विशेष महत्व है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। साथ ही भजन-कीर्तन किया जाता है। एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को अमोघ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख एवं संकट दूर हो जाते हैं।</p>



<p><strong>पूजा विधि (Rama Ekadashi Puja Vidhi)<br></strong>कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को ब्रह्म बेला में उठें। इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत्त होने के बाद स्नान-ध्यान करें। अब आचमन कर पीले रंग का वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। अब पंचोपचार कर विधिवत भगवान विष्णु की पूजा करें। इस समय भगवान विष्णु को पीले रंग का फूल और फल अर्पित करें। साथ ही विष्णु चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती अर्चना करें।</p>



<p><strong>पंचांग<br></strong>सूर्योदय &#8211; सुबह 06 बजकर 30 मिनट पर<br>सूर्यास्त &#8211; शाम 05 बजकर 39 मिनट पर<br>चंद्रोदय- देर रात 03 बजकर 36 मिनट पर ( 29 अक्टूबर)<br>चंद्रास्त- दोपहर 03 बजकर 32 मिनट पर<br>ब्रह्म मुहूर्त &#8211; सुबह 04 बजकर 48 मिनट से 05 बजकर 39 मिनट तक<br>विजय मुहूर्त &#8211; दोपहर 01 बजकर 56 मिनट से 02 बजकर 41 मिनट तक<br>गोधूलि मुहूर्त &#8211; शाम 05 बजकर 39 मिनट से 06 बजकर 05 मिनट तक<br>निशिता मुहूर्त &#8211; रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक</p>
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		<title>रमा एकादशी के दिन करें तुलसी से जुड़ा एक उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Oct 2024 04:57:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रमा एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="333" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-82-large.gif" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-82.gif 813w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-82-medium.gif 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-82-768x414.gif 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भाव से श्री हरि और माता लक्ष्मी की उपासना करने से साधक के सभी पापों का अंत हो जाता है तो आइए इस दिन से जुड़ी कुछ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="333" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-82-large.gif" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-82.gif 813w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-82-medium.gif 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/Capture-82-768x414.gif 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भाव से श्री हरि और माता लक्ष्मी की उपासना करने से साधक के सभी पापों का अंत हो जाता है तो आइए इस दिन से जुड़ी कुछ प्रमुख (Rama Ekadashi 2024 Date) बातों को जानते हैं।</p>



<p>रमा एकादशी का व्रत बहुत लाभकारी माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती हैं। पंचांग के अनुसार, एकादशी प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के 11वें दिन मनाई जाती है। इस बार यह 28 अक्टूबर को मनाई जाएगी। ऐसा कहा जा रहा है कि इस व्रत (Rama Ekadashi 2024) को करने से श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है। वहीं, ज्योतिष शास्त्र में इस दिन तुलसी पूजन को भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस तिथि पर माता तुलसी की आराधना करते हैं, उनके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। साथ ही इससे व्यक्ति के सभी पापों का अंत होता है। ऐसे में सबसे पहले सुबह उठें। इसके बाद तुलसी पर जल चढ़ाएं। कुमकुम, इत्र, फूल, लाल चुनरी और मिठाई आदि चीजें अर्पित करें।</p>



<p>फिर &#8221;तुलसी चालीसा&#8221; का पाठ करके उनकी 7 बार परिक्रमा करें। आरती से पूजा को संपूर्ण करें। इस मौके पर (Rama Ekadashi) तुलसी चालीसा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है, तो आइए यहां करते हैं।</p>



<p><strong>।।तुलसी चालीसा।।</strong></p>



<p><strong>।।दोहा।।</strong></p>



<p>जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी।<br>नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी॥<br>श्री हरि शीश बिरजिनी, देहु अमर वर अम्ब।<br>जनहित हे वृन्दावनी अब न करहु विलम्ब॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥</strong></p>



<p>धन्य धन्य श्री तुलसी माता। महिमा अगम सदा श्रुति गाता॥<br>हरि के प्राणहु से तुम प्यारी। हरीहीँ हेतु कीन्हो तप भारी॥<br>जब प्रसन्न है दर्शन दीन्ह्यो। तब कर जोरी विनय उस कीन्ह्यो॥<br>हे भगवन्त कन्त मम होहू। दीन जानी जनि छाडाहू छोहु॥<br>सुनी लक्ष्मी तुलसी की बानी। दीन्हो श्राप कध पर आनी॥<br>उस अयोग्य वर मांगन हारी। होहू विटप तुम जड़ तनु धारी॥<br>सुनी तुलसी हीँ श्रप्यो तेहिं ठामा। करहु वास तुहू नीचन धामा॥<br>दियो वचन हरि तब तत्काला। सुनहु सुमुखी जनि होहू बिहाला॥<br>समय पाई व्हौ रौ पाती तोरा। पुजिहौ आस वचन सत मोरा॥<br>तब गोकुल मह गोप सुदामा। तासु भई तुलसी तू बामा॥<br>कृष्ण रास लीला के माही। राधे शक्यो प्रेम लखी नाही॥<br>दियो श्राप तुलसिह तत्काला। नर लोकही तुम जन्महु बाला॥<br>यो गोप वह दानव राजा। शङ्ख चुड नामक शिर ताजा॥<br>तुलसी भई तासु की नारी। परम सती गुण रूप अगारी॥<br>अस द्वै कल्प बीत जब गयऊ। कल्प तृतीय जन्म तब भयऊ॥<br>वृन्दा नाम भयो तुलसी को। असुर जलन्धर नाम पति को॥<br>करि अति द्वन्द अतुल बलधामा। लीन्हा शंकर से संग्राम॥<br>जब निज सैन्य सहित शिव हारे। मरही न तब हर हरिही पुकारे॥<br>पतिव्रता वृन्दा थी नारी। कोऊ न सके पतिहि संहारी॥<br>तब जलन्धर ही भेष बनाई। वृन्दा ढिग हरि पहुच्यो जाई॥<br>शिव हित लही करि कपट प्रसंगा। कियो सतीत्व धर्म तोही भंगा॥<br>भयो जलन्धर कर संहारा। सुनी उर शोक उपारा॥<br>तिही क्षण दियो कपट हरि टारी। लखी वृन्दा दुःख गिरा उचारी॥<br>जलन्धर जस हत्यो अभीता। सोई रावन तस हरिही सीता॥<br>अस प्रस्तर सम ह्रदय तुम्हारा। धर्म खण्डी मम पतिहि संहारा॥<br>यही कारण लही श्राप हमारा। होवे तनु पाषाण तुम्हारा॥<br>सुनी हरि तुरतहि वचन उचारे। दियो श्राप बिना विचारे॥<br>लख्यो न निज करतूती पति को। छलन चह्यो जब पार्वती को॥<br>जड़मति तुहु अस हो जड़रूपा। जग मह तुलसी विटप अनूपा॥<br>धग्व रूप हम शालिग्रामा। नदी गण्डकी बीच ललामा॥<br>जो तुलसी दल हमही चढ़ इहैं। सब सुख भोगी परम पद पईहै॥<br>बिनु तुलसी हरि जलत शरीरा। अतिशय उठत शीश उर पीरा॥<br>जो तुलसी दल हरि शिर धारत। सो सहस्त्र घट अमृत डारत॥<br>तुलसी हरि मन रञ्जनी हारी। रोग दोष दुःख भंजनी हारी॥<br>प्रेम सहित हरि भजन निरन्तर। तुलसी राधा मंज नाही अन्तर॥<br>व्यन्जन हो छप्पनहु प्रकारा। बिनु तुलसी दल न हरीहि प्यारा॥<br>सकल तीर्थ तुलसी तरु छाही। लहत मुक्ति जन संशय नाही॥<br>कवि सुन्दर इक हरि गुण गावत। तुलसिहि निकट सहसगुण पावत॥<br>बसत निकट दुर्बासा धामा। जो प्रयास ते पूर्व ललामा॥<br>पाठ करहि जो नित नर नारी। होही सुख भाषहि त्रिपुरारी॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong></p>



<p>तुलसी चालीसा पढ़ही तुलसी तरु ग्रह धारी।<br>दीपदान करि पुत्र फल पावही बन्ध्यहु नारी॥<br>सकल दुःख दरिद्र हरि हार ह्वै परम प्रसन्न।<br>आशिय धन जन लड़हि ग्रह बसही पूर्णा अत्र॥<br>लाही अभिमत फल जगत मह लाही पूर्ण सब काम।<br>जेई दल अर्पही तुलसी तंह सहस बसही हरीराम॥<br>तुलसी महिमा नाम लख तुलसी सूत सुखराम।<br>मानस चालीस रच्यो जग महं तुलसीदास॥</p>
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		<title>इन चीजों को खाने से खंडित हो सकता है रमा एकादशी का व्रत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Oct 2024 04:48:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रमा एकादशी]]></category>
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<p>रमा एकादशी का व्रत बेहद शुभ माना जाता है। एकादशी प्रति माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से साधक के सभी पापों का नाश होता है तो आइए इस दिन (Rama Ekadashi 2024 Date) क्या खान चाहिए और क्या नहीं जानते हैं।</p>



<p>हिंदुओं में एकादशी व्रत का बड़ा धार्मिक महत्व है, जो हर महीने में दो बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। इस बार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रमा एकादशी मनाई जाएगी, जिसका महत्व कार्तिक माह में पड़ने की वजह से बहुत बढ़ गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन श्री हरि की पूजा से जीवन में शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल रमा एकादशी का व्रत (Rama Ekadashi 2024 Date ) 28 अक्टूबर 2024 को रखा जाएगा,</p>



<p>तो आइए इस दिन क्या खाना चाहिए और क्या नहीं ? (What eat and not on Ekadashi?) उसके बारे में जानते हैं, जिससे आपका व्रत खंडित न हो और आपको उसका पूर्ण फल प्राप्त हो सके।</p>



<p><strong>रमा एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं? (ekadashi vrat me kya khana chahiye)</strong></p>



<p>रमा एकादशी व्रत के पावन दिन पर साधक दूध, दही, फल, शरबत, साबुदाना, बादाम, नारियल, शकरकंद, आलू, मिर्च सेंधा नमक, राजगीर का आटा आदि का सेवन कर सकते हैं। व्रती इस बात का खास ख्याल रखें कि श्री हरि की पूजा के बाद ही कुछ ग्रहण करें। साथ ही प्रसाद बनाते समय पवित्रता का खास ख्याल रखें, जिससे व्रत में किसी प्रकार की दिक्कत न आए।</p>



<p><strong>रमा एकादशी पर वर्जित है इन चीजों का सेवन (ekadashi vrat me kya nahi khana chahiye)<br></strong>जो साधक रमा एकादशी का व्रत रख रहे हैं, उन्हें अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि यह व्रत को सफल और असफल बनाने में अहम भूमिक निभाता है और इससे व्रत खंडित भी हो सकता है। ऐसे में व्रती को एकादशी के शुभ अवसर पर अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इस मौके पर तामसिक भोजन जैस- मांस-मदिरा प्याज, लहसुन आदि से भी दूर रहना चाहिए।</p>



<p>वहीं, इस तिथि पर चावल और नमक का सेवन पूर्णत: वर्जित माना गया है। अगर कोई व्रत न भी कर रहा हो, तो उसे इन चीजों के सेवन से बचना चाहिए।</p>



<p><strong>भगवान विष्णु भोग मंत्र</strong><br>भगवान विष्णु को भोग लगाते समय इस मंत्र &#8221;त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये। गृहाण सम्मुखो भूत्वा प्रसीद परमेश्वर ।।&#8221; का जाप करें।</p>
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