<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>रथ सप्तमी &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%E0%A4%B0%E0%A4%A5-%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%AE%E0%A5%80/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Sun, 25 Jan 2026 05:36:35 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>रथ सप्तमी &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>रथ सप्तमी-नर्मदा जयंती आज, इस विधि से करें पूजा</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b0%e0%a4%a5-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%9c/656565</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Jan 2026 05:36:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रथ सप्तमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=656565</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="363" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-213058.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-213058.png 729w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-213058-300x176.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है। इस साल माघ शुक्ल सप्तमी एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आई है। इस दिन जहां एक ओर रथ सप्तमी मनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मोक्षदायिनी मां नर्मदा का प्राकट्य दिवस यानी नर्मदा जयंती भी है। अग्नि और जल की एक साथ पूजा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="363" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-213058.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-213058.png 729w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-24-213058-300x176.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है। इस साल माघ शुक्ल सप्तमी एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आई है। इस दिन जहां एक ओर रथ सप्तमी मनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मोक्षदायिनी मां नर्मदा का प्राकट्य दिवस यानी नर्मदा जयंती भी है। अग्नि और जल की एक साथ पूजा करने का यह ‘शुभ संयोग’ भक्तों के लिए आरोग्&#x200d;य, सुख और शांति का आशीर्वाद लेकर आया है, तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।</p>



<p><strong>महत्व<br></strong>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ सप्तमी को अचला सप्तमी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव ने अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड को अपना आशीर्वाद देते हैं। वहीं, मां नर्मदा एकमात्र ऐसी नदी हैं, जिनकी परिक्रमा की जाती है और जिनके दर्शन मात्र से सभी पापों का नाश हो जाता है। जब यह दोनों पर्व एक साथ हो तो दान, स्नान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।</p>



<p><strong>सूर्य पूजन विधि<br></strong>ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। अगर हो पाए तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, वरना घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या नर्मदा जल और तिल मिलाकर स्नान करें।<br>स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालें।<br>अपने हाथों को सिर से ऊपर उठाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।<br>अर्घ्य देते समय”ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जाप करें।<br>इसके बाद वहीं, खड़े होकर सूर्य की तीन बार परिक्रमा करें।<br>आरती से पूजा को समाप्त करें।</p>



<p><strong>नर्मदा पूजन विधि<br></strong>मां नर्मदा की प्रतिमा स्थापित करें या शिवलिंग का जलाभिषेक करें।<br>उन्हें सिंदूर, फूल और हलवा, खीर आदि अर्पित करें।<br>नर्मदा जयंती पर दीप दान का विशेष महत्व है।<br>शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं।<br>अगर आप नदी के किनारे हैं, तो आटे के 11 दीप जलाकर नदी में प्रवाहित करें।<br>पूजा के समय “त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदे” का जाप करें।<br>अंत में आरती कर पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।</p>



<p><strong>करें ये दान<br></strong>इस शुभ संयोग पर की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती। सूर्य पूजन से कुंडली के दोष दूर होते हैं और आरोग्&#x200d;य व तेज की प्राप्ति होती है। वहीं, मां नर्मदा की पूजा से मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन अपनी क्षमता अनुसार किसी जरूरतमंद को गेहूं, गुड़, तांबा या लाल वस्त्र का दान जरूर करें। इससे जीवन के सभी दुख-दर्द का नाश होता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कब है रथ सप्तमी? जानें सही तिथि, पूजा विधि और मंत्र</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b0%e0%a4%a5-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a4/655940</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 06:50:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रथ सप्तमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=655940</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="322" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224825.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224825.png 765w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224825-300x156.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />माघ मास की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में सूर्य देव की पहली किरण इसी तिथि को पृथ्वी पर आई थी। रथ सप्तमी को माघी सप्तमी, महती सप्तमी, सप्त सप्तमी या पुत्र सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। इस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="322" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224825.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224825.png 765w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224825-300x156.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>माघ मास की सप्तमी तिथि को रथ सप्तमी के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है। माना जाता है कि सृष्टि के आरंभ में सूर्य देव की पहली किरण इसी तिथि को पृथ्वी पर आई थी। रथ सप्तमी को माघी सप्तमी, महती सप्तमी, सप्त सप्तमी या पुत्र सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य का अवतरण हुआ था और इसे सूर्य पूजा का सबसे शुभ अवसर माना जाता है।</p>



<p>रथ सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को उत्तम लोक में स्थान प्राप्त होता है। पद्म पुराण और भविष्य पुराण में इस व्रत की महिमा का उल्लेख मिलता है। इस बार रथ सप्तमी कब है, इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र जानना भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि वे इस पवित्र अवसर का सही ढंग से लाभ उठा सकें।</p>



<p><strong>रथ सप्तमी 2026 कब है?</strong></p>



<p>पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि इस बार 24 जनवरी, शनिवार की रात 12 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी और 25 जनवरी, रविवार की रात 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। इसलिए, उदया तिथि के अनुसार रथ सप्तमी इस बार 25 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन स्नान, दान, व्रत और सूर्य देव की पूजा करना शास्त्र अनुसार अत्यंत शुभ माना जाता है।<br>इस बार रथ सप्तमी और भी विशेष है क्योंकि यह दिन सूर्य जयंती के साथ-साथ रविवार के दिन पड़ रहा है, जो स्वयं सूर्य देवता को समर्पित माना जाता है। इसलिए इस दिन किए गए सभी पूजा और व्रत का फल अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है।</p>



<p><strong>रथ सप्तमी 2026 स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>रथ सप्तमी के दिन स्नान करने का सबसे उत्तम समय सुबह 5:32 बजे से 7:12 बजे तक रहेगा। वहीं, सूर्य देव की पूजा, दान और व्रत करने का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से 12:33 बजे तक रहेगा। इस समय अवधि में पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है और भक्तों को इसका अधिक लाभ प्राप्त होता है।</p>



<p><strong>रथ सप्तमी पूजा विधि और मंत्र</strong></p>



<p>माघी सप्तमी के दिन सूर्योदय के बाद स्नान करना चाहिए। इसके लिए पहले आक के सात पत्ते और बेर के सात पत्ते लेकर तिल और तेल से भरे दीपक में रखें और उसे सिर पर रख लें। इसके बाद सूर्य देवता का ध्यान करते हुए गन्ने के जल को हल्के से हिलाकर दीपक को बहते जल में प्रवाहित कर दें।<br>दीपक बहाने से पहले “नमस्ते रुद्ररूपाय रसानां पतये नमः। वरुणाय नमस्तेऽस्तु” मंत्र का उच्चारण करें।<br>इसके बाद “यद् यज्जन्मकृतं पापं यच्च जन्मान्तरार्जितम…” मंत्र का जाप करते हुए गंगाजल या चरणामृत से स्नान करें। इससे पाप नष्ट होते हैं और मन, वचन और कर्म से हुई गलतियां क्षमा होती हैं।<br>सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए अक्षत, पुष्प, दूर्वा, जल, गंध और सात आक के पत्ते और बदरी पत्र का प्रयोग करें।<br>“सप्तसप्तिवह प्रीत सप्तलोकप्रदीपन, सप्तम्या सहितो देव गृहाणार्घ्य दिवाकर” और “जननी सर्वलोकानां सप्तमी सप्तसप्तिके, सप्तव्याहृतिके देवि नमस्ते सूर्यमण्डले” बोलते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें।<br>यदि पास में सूर्य मंदिर हो तो वहीं बैठे और सूर्य भगवान की मूर्ति को अष्टदल कमल पर स्थापित करके संकल्प करें – “ममाखिलकामना-सिद्ध्यर्थे सूर्यनारायणप्रीतये च सूर्यपूजनं करिष्ये।” इसके बाद “ॐ सूर्याय नमः” या पुरुष सूक्तादि के मंत्रों से षोडशोपचार पूजा करें।<br>सप्तमी के दिन उपवास करके सूर्य पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है। इस दिन रथ में सूर्य को स्थापित कर पूजा करने और प्रत्येक शुक्ल सप्तमी पर इसे दोहराने से जीवन के सात जन्मों के पाप दूर होते हैं। साथ ही, वर्ष के अंत में ब्राह्मण को दान करने से विशेष फल प्राप्त होता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रथ सप्तमी पर करें आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, हर क्षेत्र में मिलेगी मान-प्रतिष्ठा</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b0%e0%a4%a5-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%b9/655936</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jan 2026 06:47:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रथ सप्तमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=655936</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224551.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224551.png 742w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224551-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सूर्यदेव ग्रहों के राजा हैं। इस बार रथ सप्तमी रविवार 25 जनवरी को मनाई जा रही है। रविवार का दिन मुख्य रूप से भगवान सूर्य के लिए ही समर्पित माना जाता है। ऐसे में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। आप इस दिन पर सूर्य देव की कृपा प्राप्ति के लिए आदित्य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224551.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224551.png 742w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-20-224551-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सूर्यदेव ग्रहों के राजा हैं। इस बार रथ सप्तमी रविवार 25 जनवरी को मनाई जा रही है। रविवार का दिन मुख्य रूप से भगवान सूर्य के लिए ही समर्पित माना जाता है। ऐसे में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। आप इस दिन पर सूर्य देव की कृपा प्राप्ति के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।</p>



<p><strong>आदित्य हृदय स्तोत्र<br></strong>आदित्य हृदय स्तोत्र विनियोग –</p>



<p>ओम अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषि: अनुष्टुप्छन्दः आदित्यह्रदयभूतो भगवान् ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः।</p>



<p><strong>पूर्व पिठित</strong></p>



<p>ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌। रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌।<br>दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌। उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा।।<br>राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्‌। येन सर्वानरीन्‌ वत्स समरे विजयिष्यसे।।<br>आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌। जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्‌।।<br>सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌। चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्‌।।</p>



<p><strong>मूल-स्तोत्र</strong></p>



<p>रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌। पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌।।<br>सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन:। एष देवासुरगणांल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभि:।।<br>एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति:। महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यापां पतिः।।<br>पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु:। वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर:।<br>आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान्‌। सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर:।।<br>हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌। तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान्‌।।<br>हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि:। अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन:।।<br>व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग:। घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः।।<br>आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन:। कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव:।<br>नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन:। तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्‌ नमोऽस्तु ते।।<br>नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम:। ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम:।।<br>जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम:। नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम:।।<br>नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम:। नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते।।<br>ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे। भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम:।।<br>तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने। कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम:।।<br>तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे। नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे।।<br>नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु:। पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि:।<br>एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित:। एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌।।<br>देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च। यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभु:।।<br>एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च। कीर्तयन्‌ पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव।।<br>पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम्‌। एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि।।<br>अस्मिन्‌ क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि। एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्‌।।<br>एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्‌ तदा। धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान्‌।।<br>आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्‌। त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌।।<br>रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्‌। सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्‌।।<br>अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण:।<br>निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति।।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रथ सप्तमी पर करें सूर्य देव के इन मंत्रों का जप, खुशियों से भरा रहेगा जीवन</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b0%e0%a4%a5-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a6%e0%a5%87-2/655560</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 04:38:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रथ सप्तमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=655560</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="336" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-203149.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-203149.png 739w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-203149-300x163.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />माघ के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर रथ सप्तमी (Ratha Saptami 2026) मनाई जाती है। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की साधना करने से कारोबार में सफलता मिलती है और रुके हुए काम पूरे होते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, 25 जनवरी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="336" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-203149.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-203149.png 739w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-19-203149-300x163.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>माघ के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर रथ सप्तमी (Ratha Saptami 2026) मनाई जाती है। इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की साधना करने से कारोबार में सफलता मिलती है और रुके हुए काम पूरे होते हैं।</p>



<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, 25 जनवरी (Ratha Saptami 2026 Date) को रथ सप्तमी मनाई जाएगी। पौराणिक कथा के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर सूर्य देव प्रकट हुए थे। इसलिए इस तिथि पर रथ सप्तमी मनाई जाती है। इस खास अवसर पर साधक सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और मंदिर या गरीब लोगों में दान करते हैं।</p>



<p>धर्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की पूजा करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन पूजा के दौरान सूर्य देव के 108 नामों का मंत्र जप जरूर करना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और जातक का जीवन खुशियों से भरा रहता है।</p>



<p><strong>।।सूर्य देव के 108 नाम।।</strong><br>ॐ नित्यानन्दाय नमः।</p>



<p>ॐ निखिलागमवेद्याय नमः।</p>



<p>ॐ दीप्तमूर्तये नमः।</p>



<p>ॐ सौख्यदायिने नमः।</p>



<p>ॐ श्रेयसे नमः।</p>



<p>ॐ श्रीमते नमः।</p>



<p>ॐ अं सुप्रसन्नाय नमः।</p>



<p>ॐ ऐं इष्टार्थदाय नमः।</p>



<p>ॐ सम्पत्कराय नमः।</p>



<p>ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।</p>



<p>ॐ तेजोरूपाय नमः।</p>



<p>ॐ परेशाय नमः।</p>



<p>ॐ नारायणाय नमः।</p>



<p>ॐ कवये नमः।</p>



<p>ॐ सूर्याय नमः।</p>



<p>ॐ सकलजगतांपतये नमः।</p>



<p>ॐ सौख्यप्रदाय नमः।</p>



<p>ॐ आदिमध्यान्तरहिताय नमः।</p>



<p>ॐ भास्कराय नमः।</p>



<p>ॐ ग्रहाणांपतये नमः।</p>



<p>ॐ वरेण्याय नमः।</p>



<p>ॐ तरुणाय नमः।</p>



<p>ॐ परमात्मने नमः।</p>



<p>ॐ हरये नमः।</p>



<p>ॐ रवये नमः।</p>



<p>ॐ अहस्कराय नमः।</p>



<p>ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः।</p>



<p>ॐ अमरेशाय नमः।</p>



<p>ॐ अच्युताय नमः।</p>



<p>ॐ आत्मरूपिणे नमः।</p>



<p>ॐ अचिन्त्याय नमः।</p>



<p>ॐ अन्तर्बहिः प्रकाशाय नमः।</p>



<p>ॐ अब्जवल्लभाय नमः।</p>



<p>ॐ कमनीयकराय नमः।</p>



<p>ॐ असुरारये नमः।</p>



<p>ॐ उच्चस्थान समारूढरथस्थाय नमः।</p>



<p>ॐ जन्ममृत्युजराव्याधिवर्जिताय नमः।</p>



<p>ॐ जगदानन्दहेतवे नमः।</p>



<p>ॐ जयिने नमः।</p>



<p>ॐ ओजस्कराय नमः।</p>



<p>ॐ भक्तवश्याय नमः।</p>



<p>ॐ दशदिक्संप्रकाशाय नमः।</p>



<p>ॐ शौरये नमः।</p>



<p>ॐ हरिदश्वाय नमः।</p>



<p>ॐ शर्वाय नमः।</p>



<p>ॐ ऐश्वर्यदाय नमः।</p>



<p>ॐ ब्रह्मणे नमः।</p>



<p>ॐ बृहते नमः।</p>



<p>ॐ घृणिभृते नमः।</p>



<p>ॐ गुणात्मने नमः।</p>



<p>ॐ सृष्टिस्थित्यन्तकारिणे नमः।</p>



<p>ॐ भगवते नमः।</p>



<p>ॐ एकाकिने नमः।</p>



<p>ॐ आर्तशरण्याय नमः।</p>



<p>ॐ अपवर्गप्रदाय नमः।</p>



<p>ॐ सत्यानन्दस्वरूपिणे नमः।</p>



<p>ॐ लूनिताखिलदैत्याय नमः।</p>



<p>ॐ खद्योताय नमः।</p>



<p>ॐ कनत्कनकभूषाय नमः।</p>



<p>ॐ घनाय नमः।</p>



<p>ॐ कान्तिदाय नमः।</p>



<p>ॐ शान्ताय नमः।</p>



<p>ॐ लुप्तदन्ताय नमः।</p>



<p>ॐ पुष्कराक्षाय नमः।</p>



<p>ॐ ऋक्षाधिनाथमित्राय नमः।</p>



<p>ॐ उज्ज्वलतेजसे नमः।</p>



<p>ॐ ऋकारमातृकावर्णरूपाय नमः।</p>



<p>ॐ नित्यस्तुत्याय नमः।</p>



<p>ॐ ऋजुस्वभावचित्ताय नमः।</p>



<p>ॐ ऋक्षचक्रचराय नमः।</p>



<p>ॐ रुग्घन्त्रे नमः।</p>



<p>ॐ ऋषिवन्द्याय नमः।</p>



<p>ॐ ऊरुद्वयाभावरूपयुक्तसारथये नमः।</p>



<p>ॐ जयाय नमः।</p>



<p>ॐ निर्जराय नमः।</p>



<p>ॐ वीराय नमः।</p>



<p>ॐ ऊर्जस्वलाय नमः।</p>



<p>ॐ हृषीकेशाय नमः।</p>



<p>ॐ उद्यत्किरणजालाय नमः।</p>



<p>ॐ विवस्वते नमः।</p>



<p>ॐ ऊर्ध्वगाय नमः।</p>



<p>ॐ उग्ररूपाय नमः।</p>



<p>ॐ उज्ज्वल नमः।</p>



<p>ॐ वासुदेवाय नमः।</p>



<p>ॐ वसवे नमः।</p>



<p>ॐ वसुप्रदाय नमः।</p>



<p>ॐ सुवर्चसे नमः।</p>



<p>ॐ सुशीलाय नमः।</p>



<p>ॐ सुप्रसन्नाय नमः।</p>



<p>ॐ ईशाय नमः।</p>



<p>ॐ वन्दनीयाय नमः।</p>



<p>ॐ इन्दिरामन्दिराप्ताय नमः।</p>



<p>ॐ भानवे नमः।</p>



<p>ॐ इन्द्राय नमः।</p>



<p>ॐ इज्याय नमः।</p>



<p>ॐ विश्वरूपाय नमः।</p>



<p>ॐ इनाय नमः।</p>



<p>ॐ अनन्ताय नमः।</p>



<p>ॐ अखिलज्ञाय नमः।</p>



<p>ॐ अच्युताय नमः।</p>



<p>ॐ अखिलागमवेदिने नमः।</p>



<p>ॐ आदिभूताय नमः।</p>



<p>ॐ आदित्याय नमः।</p>



<p>ॐ आर्तरक्षकाय नमः।</p>



<p>ॐ असमानबलाय नमः।</p>



<p>ॐ करुणारससिन्धवे नमः।</p>



<p>ॐ शरण्याय नमः।</p>



<p>ॐ अरुणाय नमः।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रथ सप्तमी पर करें सूर्य देव की यह विशेष आरती, भगवान सूर्य बरसाएंगे कृपा</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b0%e0%a4%a5-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%a6%e0%a5%87/651473</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Dec 2025 04:53:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[रथ सप्तमी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=651473</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-28-205124.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-28-205124.png 760w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-28-205124-300x200.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में रथ सप्तमी का दिन भगवान सूर्य के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में यह पावन पर्व 25 जनवरी को पड़ रहा है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव ने अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरे संसार को प्रकाशित करना शुरू किया था। रथ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-28-205124.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-28-205124.png 760w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-28-205124-300x200.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में रथ सप्तमी का दिन भगवान सूर्य के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में यह पावन पर्व 25 जनवरी को पड़ रहा है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव ने अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरे संसार को प्रकाशित करना शुरू किया था। रथ सप्तमी पर सूर्य देव की उपासना करने से न केवल लंबी आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है, बल्कि कुंडली के अशुभ ग्रह दोष भी शांत होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूजा के अंत में अगर पूरी श्रद्धा के साथ सूर्य देव की विशेष आरती की जाए, तो जातक के जीवन से अंधकार और दरिद्रता का नाश होता है, तो आइए भगवान सूर्य की यह दिव्य आरती पढ़ते हैं।</p>



<p><strong>।।सूर्य देव की आरती।।<br></strong>ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।</p>



<p>जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।</p>



<p>धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।</p>



<p>अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे। तुम हो देव महान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।</p>



<p>फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।</p>



<p>गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते। आदित्य हृदय जपते।।</p>



<p>स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।</p>



<p>प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल, बुद्धि और ज्ञान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।</p>



<p>वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्वशक्तिमान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।</p>



<p>ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशुमान।।</p>



<p>।।ॐ जय सूर्य भगवान…।।</p>



<p>ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।</p>



<p>जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।स्वरूपा।।</p>



<p>धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान।।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
