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	<title>यौन उत्पीड़न &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>यौन उत्पीड़न &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>महाराष्ट्र: कोर्ट ने शख्स को आठ साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न का दोषी माना</title>
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		<pubDate>Wed, 16 Jul 2025 10:06:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यौन उत्पीड़न]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="341" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-95-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-95.jpg 809w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-95-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-95-768x423.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में चार अगस्त 2018 को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें कहा गया था कि 52 वर्षीय आरोपी ने सार्वजनिक शौचालय में नाबालिग का यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों को देखकर पता चलता है कि आरोपी ने पीड़िता से दुष्कर्म नहीं किया है। कोर्ट ने आरोपी को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="341" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-95-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-95.jpg 809w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-95-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/4-95-768x423.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में चार अगस्त 2018 को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें कहा गया था कि 52 वर्षीय आरोपी ने सार्वजनिक शौचालय में नाबालिग का यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों को देखकर पता चलता है कि आरोपी ने पीड़िता से दुष्कर्म नहीं किया है। कोर्ट ने आरोपी को यौन उत्पीड़न का दोषी माना। जबकि सबूतों के अभाव में उसे दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया।</p>



<p>महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने 2018 में आठ साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न मामले में फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार आरोपी को यौन उत्पीड़न का दोषी माना। जबकि सबूतों के अभाव में उसे दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों को देखकर पता चलता है कि आरोपी ने पीड़िता से दुष्कर्म नहीं किया है।</p>



<p>पॉक्सो से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालत के न्यायाधीश डीएस देशमुख ने आरोपी रमेश सिंह विजय बहादुर सिंह को यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया और उसे कारावास की अवधि (सात वर्ष और दो महीने की सजा सुनाई। जो कि आरोपी पहले ही काट चुका है। अदालत ने आरोपी पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया।</p>



<p>विशेष सरकारी वकील रेखा हिवराले ने बताया कि कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में चार अगस्त 2018 को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें कहा गया था कि 29 अप्रैल, 2018 से 6 मई, 2018 के बीच 52 वर्षीय आरोपी ने सार्वजनिक शौचालय में नाबालिग का यौन उत्पीड़न किया। पीड़िता के पिता ने शिकायत तब दर्ज कराई जब उसके भाई ने आरोपी को अपराध करते देखा। पीड़िता ने भी यौन उत्पीड़न का खुलासा किया।</p>



<p>आरोपी के अधिवक्ता संजय गायकवाड़ ने सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि पीड़िता की एकमात्र गवाही असंगत और अपर्याप्त थी। पुलिस और मजिस्ट्रेट को दिए गए उसके बयानों में विसंगतियां बताईं। जबकि पीड़िता के चाचा के घटना को देखने की बात भी गलत थी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मेडिकल जांच रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न का समर्थन नहीं किया गया है। पीड़िता की गवाही की पुष्टि किसी भी स्वतंत्र साक्ष्य से नहीं हुई है।</p>



<p>इस पर अदालत ने कहा कि दुष्कर्म के आरोप को साबित करने के लिए भौतिक साक्ष्यों का अभाव था। चिकित्सा अधिकारी को पीड़ित लड़की के गुप्तांग पर कोई चोट के निशान नहीं मिले। जबकि अभियुक्त की मेडिकल जांच में घर्षण के कारण चोटें पाई गईं। रिपोर्ट में यह कहा गया कि आरोपी केवल यौन उत्पीड़न करने में सक्षम है, न कि उसने ऐसा किया था।</p>



<p>न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाह को दिए गए अपने इतिहास में पीड़िता ने स्पष्ट रूप से यौन उत्पीड़न का जिक्र नहीं किया। उसने केवल इतना कहा कि अभियुक्त ने सार्वजनिक शौचालय में उसके गुप्तांग को छुआ।</p>



<p>अदालत ने कहा कि इसलिए दुष्कर्म के आरोप लागू नहीं होते। जबकि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि पीड़िता के साथ आरोपी ने यौन उत्पीड़न किया है। आरोपी की उम्र, उसके परिवार की निर्भरता और उसकी गिरफ्तारी के बाद से जेल में बिताए गए सात साल से अधिक समय को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सिंह को पहले से ही बिताई गई अवधि की सजा सुनाई। अदालत ने पीड़िता को मुआवजा देने के लिए मामले को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), ठाणे को सौंपने की सिफारिश की है।</p>
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		<title>दिल्ली: जामिया ने यौन उत्पीड़न पर सहायक प्रोफेसर को किया बर्खास्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Mar 2025 07:19:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यौन उत्पीड़न]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-527-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-527.jpg 726w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-527-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />यह कार्रवाई प्रशासन ने न्यू फ्रेंडस पुलिस थाने में एक महिला द्वारा दर्ज कराई शिकायत के बाद सहायक प्रोफेसर की गिरफ्तारी पर की गई है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने यौन उत्पीड़न के आरोप पर राजनीतिक विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर (अनुबंधित) को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई प्रशासन ने न्यू फ्रेंडस पुलिस थाने में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-527-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-527.jpg 726w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-527-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>यह कार्रवाई प्रशासन ने न्यू फ्रेंडस पुलिस थाने में एक महिला द्वारा दर्ज कराई शिकायत के बाद सहायक प्रोफेसर की गिरफ्तारी पर की गई है।</p>



<p>जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने यौन उत्पीड़न के आरोप पर राजनीतिक विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर (अनुबंधित) को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई प्रशासन ने न्यू फ्रेंडस पुलिस थाने में एक महिला द्वारा दर्ज कराई शिकायत के बाद सहायक प्रोफेसर की गिरफ्तारी पर की गई है।</p>



<p>जामिया प्रशासन के अनुसार, सहायक प्रोफेसर की सेवाओं को समाप्त कर दिया है। महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति का पालन किया जाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस जघन्य अपराध की कड़ी निंदा करता है। आरोपी स्थायी संकाय सदस्य नहीं है, बल्कि अनुबंधित कर्मचारी है, जिसे अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया था।</p>



<p>यौन उत्पीड़न की घटना विश्वविद्यालय परिसर के बाहर हुई थी। यह पूरी तरह से व्यक्तिगत एवं निजी मामला है। जामिया का इस कथित घटना से कोई संबंध नहीं है। फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीर अपराध की कड़ी निंदा करते हुए उसको बर्खास्त कर दिया। जामिया प्रशासन का कहना है कि महिलाओं के सम्मान, गरिमा और अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>
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		<title>दिल्ली: यौन उत्पीड़न से पीड़ित नाबालिगों के प्रति संवेदनशील हों न्यायालय, हाईकोर्ट ने कहा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 25 Mar 2025 07:18:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यौन उत्पीड़न]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-472-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-472.jpg 724w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-472-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />अदालत ने जमानत पर सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि जब तक पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो जाते, तब तक जमानत नहीं दी जाएगी। अदालत ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो के एक मामले में ट्रायल कोर्ट को नाबालिग पीड़ितों के प्रति संवेदनशील होने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-472-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-472.jpg 724w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-472-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अदालत ने जमानत पर सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि जब तक पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो जाते, तब तक जमानत नहीं दी जाएगी। अदालत ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया है।</p>



<p>दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो के एक मामले में ट्रायल कोर्ट को नाबालिग पीड़ितों के प्रति संवेदनशील होने के लिए कहा है। अदालत इस मामले के आरोपियों की जमानत पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने जमानत पर सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि जब तक पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो जाते, तब तक जमानत नहीं दी जाएगी। अदालत ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाया है। अदालत ने स्थानीय एसीपी से विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है। मामला शालीमार बाग थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है।</p>



<p>न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने कहा कि पीड़िता के बयान दर्ज होने तक जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करना उचित नहीं होगा, क्योंकि अभियुक्त उसी इलाके में रहते हैं जहां पीड़िता रहती है और उन पर पीड़िता को धमकाने का खतरा हो सकता है। अभियोजन पक्ष के वकील लक्ष्य खन्ना ने इस बात का समर्थन किया, जबकि आरोपियों के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता जानबूझकर कार्यवाही में देरी कर रही है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के 18 और 19 मार्च 2025 के आदेशों पर भी गंभीर टिप्पणी की, जिसमें पीड़िता की बीमारी के दावे की जांच के लिए पुलिस को निर्देश दिए गए थे।</p>



<p>कोर्ट ने कहा कि यौन हिंसा की शिकार नाबालिग लड़की के मामले में संवेदनशीलता जरूरी है और उसकी छूट की अर्जी को सामान्य अपराधियों की तरह नहीं देखा जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि 18 मार्च की रात को एक पुरुष कांस्टेबल पीड़िता के घर गया, जबकि ट्रायल कोर्ट ने जांच अधिकारी या थाना प्रभारी को जांच का निर्देश दिया था। मामले की अगली सुनवाई अब 22 अप्रैल 2025 को होगी।</p>



<p><strong>यह है मामला</strong><br>वर्ष 2024 में पीड़िता को एक आरोपी प्रिंस ने नशीला पदार्थ पिलाया और फिर प्रिंस व सोनू ने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी आश्लोक पर आरोप है कि वह उस समय मौजूद था, जब पीड़िता को नशीला पदार्थ दिया गया और बाद में उसने कमरे को बाहर से बंद कर दिया।</p>
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		<title>ठाणे में अदालत ने किशोर के यौन उत्पीड़न के आरोपी को किया बरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 Feb 2025 08:53:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यौन उत्पीड़न]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-268-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-268.jpg 718w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-268-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />ठाणे जिला अदालत ने किशोर के यौन उत्पीड़न के आरोपी को बरी करते हुए अभियोजन पक्ष को फटकार लगाई है। अदालत ने ये भी कहा है कि, मामले में आधे-अधूरे मन से जांच की गई है। अदालत ने कहा, ‘संक्षेप में, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि आरोपी ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-268-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-268.jpg 718w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-268-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>ठाणे जिला अदालत ने किशोर के यौन उत्पीड़न के आरोपी को बरी करते हुए अभियोजन पक्ष को फटकार लगाई है। अदालत ने ये भी कहा है कि, मामले में आधे-अधूरे मन से जांच की गई है। अदालत ने कहा, ‘संक्षेप में, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि आरोपी ने नाबालिग का अपहरण किया था और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया था।’</p>



<p>महाराष्ट्र के ठाणे जिले में जिला अदालत ने एक किशोर के यौन उत्पीड़न के आरोपी शख्स को बरी कर दिया है। इस कोर्ट ने मामले में टिप्पणी भी की है, जिसमें उसने कहा कि- इस मामले में आधे-अधूरे मन से जांच की गई है। अदालत ने 2018 में 15 वर्षीय लड़के के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति को बरी करते हुए अभियोजन पक्ष को ‘आधे-अधूरे’ जांच के लिए फटकार भी लगाई है। यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामलों को देखने वाले विशेष न्यायाधीश पीआर अष्टुरकर की अदालत ने 3 फरवरी को आदेश में कहा कि मारपीट, आपराधिक धमकी और धमकी के आरोप भी विधिवत साबित नहीं हुए। मंगलवार को आदेश की एक प्रति उपलब्ध कराई गई।</p>



<p><strong>मदद के बहाने आरोपी ने किया उत्पीड़न</strong><br>इस मामले में अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि उल्हासनगर के रहने वाले 33 वर्षीय आरोपी, जो लड़के के एक परिचित का दोस्त था, ने 30 मई, 2018 को पीड़ित का यौन उत्पीड़न किया। पीड़ित ने दावा किया कि आरोपी ने उसे घर वापस लाने के लिए गाड़ी से लिफ्ट की पेशकश की, लेकिन उसे एक सुनसान इलाके में ले गया, शराब पी और उसका यौन उत्पीड़न किया। आरोपी पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम समेत कई कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।</p>



<p><strong>अदालत ने जांच करने में विफलता की ओर किया इशारा</strong><br>हालांकि, न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष के मामले में कई विसंगतियों और खामियों को उजागर किया। अदालत ने कहा, अभियोजन पक्ष की तरफ से पेश किए गए सबूतों में, एक भी गवाह ने यह नहीं बताया कि उन्हें मौके का निरीक्षण के दौरान या अन्यथा खून के धब्बे (पीड़िता के कपड़ों पर) दिखे थे। फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला रिपोर्ट में खून के धब्बों का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट नहीं किया गया कि खून पीड़ित का था या आरोपी का। अदालत ने अभियोजन पक्ष की तरफ से दो महत्वपूर्ण गवाहों की जांच करने में विफलता की ओर भी इशारा किया।</p>



<p><strong>‘अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में रहा विफल’</strong><br>न्यायाधीश ने कहा कि उनकी अनुपस्थिति ने अभियोजन पक्ष के कथन में एक महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर दिया, जिससे पता चलता है कि उन्हें जानबूझकर छोड़ दिया गया हो सकता है। न्यायाधीश ने कहा, ‘आधे-अधूरे मन से जांच की गाथा यहीं खत्म नहीं होती है।’ अदालत ने कहा, ‘पीड़िता की जांच करने वाले डॉक्टर को उसके गुप्तांगों के पास कोई चोट, घर्षण या रंग में कोई बदलाव नहीं मिला। हालांकि, एक सर्जन ने पाया कि पीड़िता के गुदा के अंदरूनी हिस्से में चोट थी। दुर्भाग्य से, अभियोजन पक्ष सर्जन की जांच करने में विफल रहा।’ वहीं मेडिकल गवाह ने स्वीकार किया कि चोट अन्य कारणों से भी लग सकती है, और सर्जन की रिपोर्ट में महत्वपूर्ण विवरण जैसे कि चोट कब लगी। अदालत ने कहा, ‘संक्षेप में, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि आरोपी ने नाबालिग का अपहरण किया था और उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया था।’</p>
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		<title>महाराष्ट्र: नाबालिग से यौन उत्पीड़न के आरोप में आरोपी को तीन साल की सजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2025 08:34:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यौन उत्पीड़न]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-783-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-783.jpg 734w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-783-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />न्यायाधीश देशमुख ने बुधवार को आरोपी को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि इन दिनों नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इन घटनाओं के बाद बहुत कम ही पीड़ित शिकायत दर्ज कराने आते हैं। महाराष्ट्र के ठाणे में एक अदालत ने 2019 में एक लड़की का यौन उत्पीड़न करने के आरोप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-783-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-783.jpg 734w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-783-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>न्यायाधीश देशमुख ने बुधवार को आरोपी को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि इन दिनों नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इन घटनाओं के बाद बहुत कम ही पीड़ित शिकायत दर्ज कराने आते हैं।</p>



<p>महाराष्ट्र के ठाणे में एक अदालत ने 2019 में एक लड़की का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में 51 वर्षीय व्यक्ति को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश डीएस देशमुख ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जानकारी पुलिस को दी जानी चाहिए। इससे समाज में जागरूकता पैदा होती है और सजा आरोपियों के लिए निवारक के रूप में काम करेगी। विशेष लोक अभियोजक संध्या एच. मात्रे ने अदालत को बताया कि पांच जुलाई 2019 को पीड़िता 13 साल की थी और वह स्कूल जा रही थी, तब आरोपी मोइज हातिम रामपुरवाला ने उसका पीछा किया और उसे गलत तरीके से छुआ।</p>



<p><strong>एक महिला ने की थी पीड़िता की मदद</strong><br>लड़की ने आरोपी की हरकतों का विरोध किया। शोर मचाया और छाते से उसे मारने की कोशिश की। वहां से गुजर रही एक महिला ने पीड़िता को बचाया, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया। पीड़िता और महिला ने आरोपी का उसके घर तक पीछा किया और उसे पकड़ लिया। पीड़ित लड़की और महिला ने बाद में पुलिस से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।</p>



<p><strong>आरोपी को ठहराया गया दोषी</strong><br>न्यायाधीश देशमुख ने बुधवार को आरोपी को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि इन दिनों नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इन घटनाओं के बाद बहुत कम ही पीड़ित शिकायत दर्ज कराने आते हैं। न्यायाधीश ने कहा, “समाज को यह समझना चाहिए कि यह एक अपराध है और ऐसी घटनाओं की शिकायत की जानी चाहिए। इससे लड़कियों को सुरक्षा देने और समाज में जागरूकता पैदा करने में काफी मदद मिलेगी। इस तरह की सजा से अपराधियों पर लगाम लगेगी।”</p>



<p>अदालत ने आरोपी पर 20 हजार का जुर्माना भी लगाया। न्यायाधीश के निर्देश के अनुसार, एक बार आरोपी से राशि बरामद होने के बाद इसे पीड़ित को मुआवजे के रूप में भुगतान किया जाना चाहिए। आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पीड़िता और उसकी मदद करने वाली महिला समेत चार लोगों से पूछताछ की गई।</p>
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