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	<title>योग &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>योग &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>दिसंबर के पहले प्रदोष व्रत पर बन रहे ये योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 04:39:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[आज यानी 2 दिसंबर को प्रदोष व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना संध्याकाल में करने का विधान है। साथ ही विशेष चीजों का दान भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को शिव जी की कृपा प्राप्त होती है। साथ &#8230;]]></description>
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<p>आज यानी 2 दिसंबर को प्रदोष व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना संध्याकाल में करने का विधान है। साथ ही विशेष चीजों का दान भी किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को शिव जी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।</p>



<p>तिथि: शुक्ल द्वदशी<br>मास पूर्णिमांत: मार्गशीर्ष<br>दिन: मंगलवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल द्वादशी – प्रातः 03 बजकर 57 मिनट तक<br>योग: वारियाना – रात्रि 09 बजकर 08 मिनट तक<br>करण: बालव – प्रातः 03 बजकर 57 मिनट तक<br>करण: कौलव – 03 दिसंबर को प्रातः 02 बजकर 14 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 57 मिनट पर<br>सूर्यास्त: सायं 05 बजकर 24 मिनट पर<br>चंद्रोदय: दोपहर 02 बजकर 29 मिनट पर<br>चंद्रास्त: 03 दिसंबर को प्रातः 04 बजकर 53 मिनट पर</p>



<p>सूर्य राशि: वृश्चिक<br>चन्द्रमा की राशि: मेष</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक<br>अमृत काल: दोपहर 02 बजकर 23 मिनट से 03 बजकर 49 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: दोपहर 02 बजकर 47 मिनट से 04 बजकर 06 मिनट तक<br>गुलिकाल: दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 01 बजकर 29 मिनट तक<br>यमगण्ड: प्रातः 09 बजकर 34 मिनट से 10 बजकर 52 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव अश्विनी नक्षत्र में रहेंगे।<br>अश्विनी नक्षत्र: रात्रि 08 बजकर 51 मिनट तक<br>सामान्य विशेषताएं: सुंदर व्यक्तित्व, आभूषण-प्रिय, तेज बुद्धि, निपुण, यात्राप्रिय, स्वस्थ, जोशीले, नेतृत्व क्षमता, खेल-प्रिय, अधीर, आक्रामक और क्रोधी<br>शासक ग्रह: केतु देव<br>राशि स्वामी: मंगल देव<br>देवता: अश्विनी कुमार<br>प्रतीक: घोड़े का सिर</p>



<p><strong>भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व<br></strong>भौम प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है जब प्रदोष का समय मंगलवार को पड़ता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और विशेष रूप से जीवन में शांति, समृद्धि और रोगों से मुक्ति के लिए किया जाता है।<br>श्रद्धालु इस दिन प्रात:काल स्नान कर शिवलिंग पर दूध, जल, बेलपत्र और फल अर्पित करते हैं। व्रत के दौरान फलाहार या उपवास रखा जाता है। शाम के समय प्रदोष काल में शिव आराधना, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन करने का विशेष महत्व होता है। यह व्रत संकट निवारण, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है।</p>



<p><strong>भौम प्रदोष व्रत की विधि<br></strong>प्रात:काल उठकर स्वच्छ होकर स्नान करें।<br>शिवलिंग घर पर स्थापित करें या मंदिर में पूजा करें।<br>शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धूप और दीप अर्पित करें।<br>व्रत के दौरान फलाहार या निर्जल उपवास रखें।<br>शाम के प्रदोषकाल में रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन करें।<br>“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।<br>दिनभर क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।<br>अगले दिन व्रत का पारण करें।<br>जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान दें।</p>
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		<title>विवाह पंचमी से पहले घर में रखें ये चीजें, जल्द विवाह का बनेगा योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 04:34:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदू धर्म में विवाह पंचमी का पर्व बहुत विशेष और पवित्र माना जाता है। यह दिन भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह की शादी की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है। हर साल मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व (Vivah Panchami 2025) आता है। इस इस साल &#8230;]]></description>
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<p>हिंदू धर्म में विवाह पंचमी का पर्व बहुत विशेष और पवित्र माना जाता है। यह दिन भगवान श्री राम और माता सीता के विवाह की शादी की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है। हर साल मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व (Vivah Panchami 2025) आता है। इस इस साल यह 25 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा। यह तिथि उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिनके विवाह में देरी हो रही है या बाधाएं आ रही हैं।</p>



<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष वस्तुएं घर में रखने और पूजा-अर्चना करने से शीघ्र विवाह के योग बनने लगते हैं और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।</p>



<p><strong>भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा या तस्वीर<br></strong>विवाह पंचमी से पहले ही राम-सीता की प्रतिमा घर के मंदिर में स्थापित करें। विवाह पंचमी के दिन उनकी विधिवत पूजा करें। ऐसा करने से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और विवाह से जुड़ी सभी बाधाएं दूर होती हैं।</p>



<p><strong>भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा<br></strong>भगवान विष्णु को जगत का पालक और माता लक्ष्मी को धन और सौभाग्य की देवी माना जाता है। उनकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन में शांति, समृद्धि और स्थिरता बनी रहती है। इनकी प्रतिमा घर में रखने से जल्द विवाह के योग भी बनते हैं।</p>



<p><strong>राम तुलसी का पौधा<br></strong>तुलसी को देवी का रूप माना जाता है। विशेष रूप से &#8216;राम तुलसी&#8217; का पौधा घर में लगाने और उसकी नियमित पूजा करने से घर में शुभता आती है। नकारात्मकता दूर होती है और वैवाहिक जीवन में तनाव कम होकर मधुरता आती है।</p>



<p><strong>दक्षिणावर्ती शंख<br></strong>दक्षिणावर्ती शंख को घर में रखना बहुत शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और विवाह में आ रही अड़चने दूर होती हैं।</p>



<p><strong>कछुए की प्रतिमा<br></strong>फेंगशुई और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, कछुआ स्थिरता का प्रतीक है। अगर दांपत्य जीवन में खटास या अस्थिरता महसूस हो रही है, तो घर में कछुए की छोटी मूर्ति या तस्वीर रखना शुभ माना जाता है। इससे रिश्तों में विश्वास और स्थिरता आती है।</p>



<p><strong>शीघ्र विवाह के लिए करें ये खास उपाय<br></strong>विवाह पंचमी के दिन बालकांड&#8217; में वर्णित श्री राम-सीता विवाह प्रसंग का पाठ करना या सुनना बहुत शुभकारी माना जाता है। इसके अलावा, अविवाहित लोग इस दिन &#8220;ॐ जानकीवल्लभाय नमः&#8221; मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं। ऐसा करने से जल्द ही विवाह का सुंदर योग बन सकता है।</p>
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		<title>तुलसी विवाह पर बन रहे कई मंगलकारी योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 Nov 2025 04:32:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[आज यानी 02 नवंबर को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस तिथि पर तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तुलसी विवाह करने से वैवाहिक सुख में खुशियों का आगमन होता है। तुलसी विवाह के दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं। ऐसे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज यानी 02 नवंबर को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस तिथि पर तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तुलसी विवाह करने से वैवाहिक सुख में खुशियों का आगमन होता है। तुलसी विवाह के दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 02 November 2025) के बारे में।</p>



<p>तिथि: शुक्ल एकादशी<br>मास पूर्णिमांत: कार्तिक<br>दिन: रविवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल एकादशी प्रातः 07 बजकर 31 मिनट तक, फिर द्वादशी<br>योग: व्याघात रात्रि 11 बजकर 11 मिनट तक<br>करण: विष्टि प्रातः 07 बजकर 31 मिनट तक<br>करण: बव सायं 06 बजकर 24 मिनट तक<br>करण: 3 नवम्बर को बालव प्रातः 05 बजकर 07 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</strong></p>



<p>सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 34 मिनट पर<br>सूर्यास्त: सायं 05 बजकर 35 मिनट पर<br>चंद्रोदय: दोपहर 03 बजकर 21 मिनट पर<br>चन्द्रास्त: 3 नवम्बर को सुबह 03 बजकर 50 मिनट पर</p>



<p>सूर्य राशि: तुला<br>चंद्र राशि: कुंभ<br>पक्ष: शुक्ल</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक<br>अमृत काल: प्रातः 09 बजकर 29 मिनट से 11 बजे तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय</strong></p>



<p>राहुकाल: सायं 04 बजकर 12 मिनट से सायं 05 बजकर 35 मिनट तक<br>गुलिकाल: दोपहर 02 बजकर 50 मिनट से सायं 04 बजकर 12 मिनट तक<br>यमगण्ड: दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से दोपहर 01 बजकर 27 मिनट तक</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह<br></strong>देवउठनी एकादशी</p>



<p>कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं और सृष्टि में शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। यह दिन विवाह, गृहप्रवेश और नए कार्यों के आरंभ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से मोक्ष तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी पूजा विधि:</strong></p>



<p>प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।<br>विष्णु की शालिग्राम स्वरूप या चित्र पर पूजा आरंभ करें।<br>दीपक जलाकर गंगाजल, तुलसी दल, पीले फूल और पंचामृत अर्पित करें।<br>“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।<br>भगवान विष्णु को खीर, फल और तुलसी पत्र का भोग लगाएं।<br>तुलसी माता की आराधना करें और देवजागरण की कथा सुनें।<br>रात्रि में दीपदान करें और भगवान को जगाकर आरती करें।<br>अंत में दान और अन्न सेवा का संकल्प लेकर व्रत पूर्ण करें।</p>



<p><br><strong>तुलसी विवाह:<br></strong>तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल द्वादशी या देवउठनी एकादशी के अगले दिन मनाया जाता है। यह पावन दिन माता तुलसी (जो देवी लक्ष्मी का रूप हैं) और भगवान विष्णु (शालिग्राम स्वरूप) के दिव्य मिलन का प्रतीक है। इसी दिन से विवाह जैसे शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। पौराणिक मान्यता है कि तुलसी विवाह करने से वैवाहिक सुख, समृद्धि और गृहस्थ जीवन में सौहार्द की वृद्धि होती है।</p>



<p><strong>तुलसी विवाह पूजा विधि:</strong></p>



<p>प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।<br>आंगन या मंदिर में तुलसी माता के पौधे को सजाएं।<br>तुलसी माता को हल्दी-कुमकुम, साड़ी, गहने और पुष्प अर्पित करें।<br>शालिग्राम या भगवान विष्णु की मूर्ति को वर के रूप में स्थापित करें।<br>मंगल गीत गाते हुए तुलसी और शालिग्राम का विवाह संपन्न करें।<br>पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद वितरण करें।<br>विवाह पूर्ण होने पर ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान दें।<br>इस दिन विवाहित जोड़ों को एकसाथ तुलसी पूजा करनी चाहिए, जिससे दांपत्य जीवन में प्रेम और स्थायित्व बना रहे।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>देवउठनी एकादशी पर बन रहा है ये शुभ योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 01 Nov 2025 04:38:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागते हैं और सृष्टि में शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। यह दिन विवाह, गृहप्रवेश और नए कार्यों के आरंभ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागते हैं और सृष्टि में शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत होती है। यह दिन विवाह, गृहप्रवेश और नए कार्यों के आरंभ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से मोक्ष तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>



<p><strong>आज का पंचांग (Panchang 1 November 2025)<br></strong>कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि समाप्त &#8211; सुबह 9 बजकर 11 मिनट तक</p>



<p>ध्रुव योग &#8211; देर रात 2 बजकर 10 मिनट तक (2 नवंबर)</p>



<p>गरज &#8211; सुबह 9 बजकर 11 मिनट तक</p>



<p>वणिज &#8211; रात 8 बजकर 27 मिनट तक</p>



<p>वार &#8211; शनिवार</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय &#8211; सुबह 6 बजकर 33 मिनट से</p>



<p>सूर्यास्त &#8211; शाम 5 बजकर 36 मिनट पर</p>



<p>चंद्रोदय &#8211; दोपहर 2 बजकर 49 मिनट पर</p>



<p>चंद्रास्त &#8211; देर रात 2 बजकर 46 मिनट पर (2 नवंबर)</p>



<p>सूर्य राशि &#8211; तुला</p>



<p>चंद्र राशि &#8211; कुंभ</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त &#8211; सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक</p>



<p>अमृत काल &#8211; सुबह 11 बजकर 17 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का अशुभ समय<br></strong>राहुकाल &#8211; सुबह 9 बजकर 19 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक</p>



<p>गुलिक काल &#8211; सुबह 6 बजकर 33 मिनट से सुबह 7 बजकर 56 मिनट तक</p>



<p>यमगण्ड &#8211; दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से दोपहर 2 बजकर 50 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव शतभिषा नक्षत्र में रहेंगे…</p>



<p>शतभिषा नक्षत्र: शाम 6 बजकर 20 मिनट तक</p>



<p>सामान्य विशेषताएं: उच्च बुद्धिमत्ता, सबके प्रिय, स्वतंत्र, धैर्यवान, आलसी, तृत्व क्षमता, सीमाओं को तोड़ने की प्रवृत्ति, महत्वाकांक्षी और जिज्ञासु</p>



<p>नक्षत्र स्वामी: राहु देव</p>



<p>राशि स्वामी: शनि देव</p>



<p>देवता: वरुण (जल देवता)</p>



<p>प्रतीक: खाली घेरा</p>



<p><strong>आज का व्रत त्योहार &#8211; देवउठनी एकादशी</strong></p>



<p><strong>देवउठनी एकादशी पूजा विधि &#8211;<br></strong>प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें।<br>भगवान विष्णु की शालिग्राम स्वरूप या चित्र पर पूजा आरंभ करें।<br>दीपक जलाकर गंगाजल, तुलसी दल, पीले फूल और पंचामृत अर्पित करें।<br>“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।<br>भगवान विष्णु को खीर, फल और तुलसी पत्र का भोग लगाएं।<br>तुलसी माता की आराधना करें और देवजागरण की कथा सुनें।<br>रात्रि में दीपदान करें और भगवान को जगाकर आरती करें।<br>अंत में दान और अन्न सेवा का संकल्प लेकर व्रत पूर्ण करें।</p>
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		<title>अक्षय नवमी पर बन रहा है वृद्धि योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Oct 2025 04:42:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[कार्तिक शुक्ल नवमी को मनाई जाने वाली अक्षय नवमी को अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला दिन कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन कल्पवृक्ष का प्रकट होना हुआ था, इसलिए इसे कल्पनवमी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से असीम समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>कार्तिक शुक्ल नवमी को मनाई जाने वाली अक्षय नवमी को अक्षय पुण्य प्रदान करने वाला दिन कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी दिन कल्पवृक्ष का प्रकट होना हुआ था, इसलिए इसे कल्पनवमी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से असीम समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। चलिए पढ़ते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 31 October 2025) और जानते हैं शुभ मुहूर्त के बारे में।।</p>



<p><strong>आज का पंचांग (Panchang 31 October 2025)<br></strong>कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि समाप्त &#8211; सुबह 10 बजकर 3 मिनट तक</p>



<p>वृद्धि योग &#8211; ब्रह्म मुहूर्त 4 बजकर 32 मिनट तक (1 नवंबर)</p>



<p>कौलव &#8211; सुबह 10 बजकर 3 मिनट तक</p>



<p>तैतिल &#8211; रात 9 बजकर 43 मिनट तक</p>



<p>वार &#8211; शुक्रवार</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय &#8211; सुबह 6 बजकर 32 मिनट से</p>



<p>सूर्यास्त- शाम 5 बजकर 37 मिनट पर</p>



<p>चंद्रोदय &#8211; दोपहर 2 बजकर 16 मिनट पर</p>



<p>चंद्रास्त &#8211; देर रात 1 बजकर 44 मिनट पर (1 नवंबर)</p>



<p>सूर्य राशि &#8211; तुला</p>



<p>चंद्र राशि &#8211; मकर (सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक) फिर कुंभ राशि में प्रवेश</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त &#8211; सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक</p>



<p>अमृत काल &#8211; सुबह 8 बजकर 19 मिनट से सुबह 9 बजकर 56 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का अशुभ समय<br></strong>राहुकाल &#8211; सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 4 मिनट तक</p>



<p>गुलिक काल &#8211; सुबह 7 बजकर 55 मिनट से सुबह 9 बजकर 18 मिनट तक</p>



<p>यमगण्ड &#8211; दोपहर 2 बजकर 51 मिनट से शाम 4 बजकर 14 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव धनिष्ठा नक्षत्र में रहेंगे…</p>



<p>धनिष्ठा नक्षत्र- सायं 06:51 बजे तक</p>



<p>सामान्य विशेषताएं: आत्मविश्वासी, शक्तिशाली, धैर्यवान, परिश्रमी, प्रसिद्धि, सौंदर्य, धन, कलात्मक प्रतिभा, स्वतंत्र स्वभाव, स्वार्थी, लालची, क्रोधी, विश्वसनीय और दानशील</p>



<p>नक्षत्र स्वामी: मंगल देव</p>



<p>राशि स्वामी: शनि देव</p>



<p>देवता: आठ वसु (भौतिक समृद्धि के देवता)</p>



<p>प्रतीक: ढोल या बांसुरी</p>



<p><strong>आज का पर्व &#8211; अक्षय नवमी<br></strong>अक्षय नवमी आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। जो व्यक्ति इस दिन दान, व्रत या सेवा करता है, उसका पुण्य अक्षय रहता है अर्थात कभी समाप्त नहीं होता। यह दिन धर्म और भक्ति की शक्ति का प्रतीक है।</p>



<p><strong>अक्षय नवमी पूजा विधि &#8211;<br></strong>प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।<br>घर या मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।<br>गंगाजल से स्थान को पवित्र करें और दीप प्रज्वलित करें।<br>भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल और पीले वस्त्र अर्पित करें।<br>माता लक्ष्मी को लाल फूल, सिंदूर और सुगंधित पुष्प चढ़ाएं।<br>आंवले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर पूजा करें, और भगवान विष्णु का नाम जप करें।<br>ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र का दान करें।<br>अंत में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर आरती करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>अक्टूबर के आखिरी बुधवार पर बन रहे ये शुभ-अशुभ योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Oct 2025 04:39:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[आज यानी 29 अक्टूबर को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस तिथि पर बुधवार पड़ रहा है। सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज यानी 29 अक्टूबर को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस तिथि पर बुधवार पड़ रहा है। सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। अक्टूबर के आखिरी बुधवार पर कई योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।</p>



<p>तिथि: शुक्ल सप्तमी</p>



<p>मास पूर्णिमांत: कार्तिक</p>



<p>दिन: बुधवार</p>



<p>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल सप्तमी प्रातः 09 बजकर 23 मिनट तक</p>



<p>योग: धृति प्रातः 07 बजकर 51 मिनट तक</p>



<p>करण: वणिज प्रातः 09 बजकर 23 मिनट तक</p>



<p>करण: विष्टि रात्रि 09 बजकर 50 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</strong></p>



<p>सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 31 मिनट पर</p>



<p>सूर्यास्त: सायं 05 बजकर 38 मिनट पर</p>



<p>चंद्रोदय: दोपहर 01 बजकर 04 मिनट पर</p>



<p>चन्द्रास्त: रात 11 बजकर 41 मिनट पर</p>



<p>सूर्य राशि: तुला</p>



<p>चंद्र राशि: मकर</p>



<p>पक्ष: शुक्ल</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>अभिजीत मुहूर्त: आज नहीं है</p>



<p>अमृत काल: रात 10 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय</strong></p>



<p>राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 28 मिनट तक</p>



<p>गुलिकाल: प्रातः 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 05 मिनट तक</p>



<p>यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 54 मिनट से प्रातः 09 बजकर 18 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong></p>



<p>आज चंद्रदेव उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेंगे…</p>



<p>उत्तराषाढ़ा नक्षत्र- सायं 05 बजकर 29 मिनट तक</p>



<p>सामान्य विशेषताएं: परिश्रमी, धैर्यवान, मजबूत, गठीला शरीर, लंबी नाक, तीखे नयन-नक्श, दयालु, अच्छे भोजन और संगति के शौकीन, ईमानदार, विश्वसनीय, बुद्धिमान और दूरदर्शी</p>



<p>नक्षत्र स्वामी: सूर्य देव</p>



<p>राशि स्वामी: बृहस्पति देव, शनि देव</p>



<p>देवता: विश्वदेव (अप्रतिद्वंद्वी विजय के देवता)</p>



<p>प्रतीक: हाथी का दांत या छोटा बिस्तर</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>छठ पूजा के चौथे दिन बन रहे कई मंगलकारी योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Oct 2025 04:40:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[आज यानी 28 अक्टूबर को छठ पूजा (Chhath Puja 2025) का आखिरी और चौथा दिन है। आज दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करने का विधान है। आज उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा। धार्मिक मान्यता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज यानी 28 अक्टूबर को छठ पूजा (Chhath Puja 2025) का आखिरी और चौथा दिन है। आज दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करने का विधान है। आज उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, छठ व्रत करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। मंगलवार के दिन कई योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 28 October 2025) के बारे में।</p>



<p>तिथि: शुक्ल षष्ठी<br>मास पूर्णिमांत: कार्तिक<br>दिन: मंगलवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल षष्ठी प्रातः 07 बजकर 59 मिनट तक<br>योग: सुकर्मा प्रातः 07 बजकर 51 मिनट तक<br>करण: तैतिल प्रातः 07 बजकर 59 मिनट तक<br>करण: गरज सायं 08 बजकर 45 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</strong></p>



<p>सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 30 मिनट पर<br>सूर्यास्त: सायं 05 बजकर 39 बजकर पर<br>चंद्रोदय: दोपहर 12 बजकर 22 बजकर पर<br>चन्द्रास्त: रात 10 बजकर 41 मिनट पर</p>



<p>सूर्य राशि: तुला<br>चंद्र राशि: धनु</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक<br>अमृत काल: रात 10 बजकर 29 मिनट से प्रातः 12 बजकर 15 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय</strong></p>



<p>राहुकाल: दोपहर 02 बजकर 52 मिनट से सांय 04 बजकर 15 मिनट तक<br>गुलिकाल: दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 28 मिनट तक<br>यमगण्ड: प्रातः 09 बजकर 17 मिनट से प्रातः 10 बजकर 41 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong></p>



<p>आज चंद्रदेव पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में रहेंगे…<br>पूर्वाषाढ़ नक्षत्र- दोपहर 03 बजकर 45 मिनट तक<br>सामान्य विशेषताएं: लोकप्रिय, धार्मिक, आध्यात्मिक, साहसी, हंसमुख, बुद्धिमान, सलाहकार, दयालु, उदार, वफादार मित्र, खतरनाक शत्रु, लंबा कद, यात्रा प्रिय और विलासिता<br>नक्षत्र स्वामी: शुक्र देव<br>राशि स्वामी: बृहस्पति देव<br>देवता: अपस (ब्रह्मांडीय महासागर)<br>प्रतीक: हाथी का दांत और पंखा</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दीवाली पर बन रहे कई मंगलकारी योग</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a5%82/639048</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Oct 2025 04:48:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[आज यानी 20 अक्टूबर को दीवाली का पर्व मनाया जा रहा है। इस त्योहार को देशभर में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से सभी मुरादें पूरी होती हैं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज यानी 20 अक्टूबर को दीवाली का पर्व मनाया जा रहा है। इस त्योहार को देशभर में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से सभी मुरादें पूरी होती हैं और बिगड़े काम पूरे होते हैं। इस दिन कई शुभ-अशुभ योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।</p>



<p>तिथि: कृष्ण चतुर्दशी</p>



<p>मास पूर्णिमांत: कार्तिक</p>



<p>दिन: सोमवार</p>



<p>संवत्: 2082</p>



<p><strong>लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>लक्ष्मी पूजा मुहूर्त – शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक</p>



<p>प्रदोष काल – शाम 05 बजकर 46 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक</p>



<p>वृषभ काल – रात 07 बजकर 8 मिनट से रात 09 बजकर 03 मिनट तक</p>



<p>तिथि: कृष्ण चतुर्दशी प्रातः 03 बजकर 44 मिनट तक</p>



<p>योग: वैधृति प्रातः 02 बजकर 35 मिनट तक</p>



<p>करण: शकुनी दोपहर 03 बजकर 44 मिनट तक</p>



<p>करण: चतुष्पाद प्रातः 04 बजकर 47 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</strong></p>



<p>सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 25 मिनट पर</p>



<p>सूर्यास्त: सायं 05 बजकर 46 बजकर पर</p>



<p>चंद्रोदय: प्रातः 06 बजकर 06 बजकर पर</p>



<p>चन्द्रास्त: सायं: 05 बजकर 01 मिनट पर</p>



<p>सूर्य राशि: तुला</p>



<p>चंद्र राशि: कन्या</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 43 मिनट से प्रातः 12 बजकर 28 मिनट तक</p>



<p>अमृत काल: दोपहर 01 बजकर 40 मिनट से दोपहर 03 बजकर 26 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय</strong></p>



<p>राहुकाल: प्रातः 07 बजकर 50 मिनट से प्रातः 09 बजकर 15 मिनट तक</p>



<p>गुलिकाल: दोपहर 01 बजकर 31 बजे से दोपहर 02 बजकर 56 मिनट तक</p>



<p>यमगण्ड: प्रातः 10 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजकर 06 मिनट तक</p>



<p><strong>दीवाली का धार्मिक महत्व</strong></p>



<p>दीवाली, प्रकाश और खुशियों का पर्व है। यह अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं। घरों को सजाया जाता है, दीप जलाए जाते हैं और मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा की जाती है।</p>



<p>यह पर्व केवल बाहरी रोशनी का नहीं, बल्कि मन के अंधकार को दूर कर नई आशा और सकारात्मकता जगाने का संदेश देता है। दीवाली का अर्थ है। अपने जीवन में उजाला फैलाना और प्रेम, सद्भाव तथा समृद्धि का स्वागत करना।</p>



<p><strong>अमावस्या अवधि-</strong></p>



<p>अमावस्या तिथि आरंभ– 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट</p>



<p>अमावस्या तिथि समाप्त– 21 अक्टूबर 2025 को शाम 05 बजकर 54 मिनट</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कार्तिक माह की षष्ठी तिथि पर बन रहे ये योग</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b7%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf/637578</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 04:59:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[आज यानी 12 अक्टूबर से कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस तिथि पर रविवार पड़ रहा है। सनातन धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की पूजा करने से बिगड़े काम पूरे होते हैं और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>आज यानी 12 अक्टूबर से कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस तिथि पर रविवार पड़ रहा है। सनातन धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव की पूजा करने से बिगड़े काम पूरे होते हैं और सूर्य देव की कृपा से सभी मुरादें पूरी होती हैं। आज कई शुभ-अशुभ योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 12 October 2025) के बारे में।</p>



<p><strong>आज का पंचांग (Panchang 12 October 2025)<br></strong>तिथि: कृष्ण षष्ठी<br>मास पूर्णिमांत: कार्तिक<br>दिन: रविवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: कृष्ण षष्ठी दोपहर 02 बजकर 16 मिनट तक<br>योग: वारियाना प्रातः 10 बजकर 55 मिनट तक<br>करण: वणिज दोपहर 02 बजकर 16 मिनट तक<br>करण: 13 अक्टूबर को विष्टि प्रातः 01 बजकर 15 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</strong></p>



<p>सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 20 मिनट पर<br>सूर्यास्त: सायं 05 बजकर 55 मिनट पर<br>चंद्रमा का उदय: रात 10 बजकर 14 मिनट पर<br>चंद्रास्त: प्रातः 12 बजकर 06 मिनट पर</p>



<p>सूर्य राशि: कन्या<br>चंद्र राशि: मिथुन<br>पक्ष: कृष्ण</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p>अभिजीत मुहूर्त : प्रातः 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक<br>अमृत काल : प्रातः 02 बजकर 56 मिनट से 04 बजकर 27 बजे तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय</strong></p>



<p>राहुकाल : दोपहर 04 बजकर 28 मिनट से 05 बजकर 55 मिनट तक<br>गुलिकाल : दोपहर 03 बजकर 01 बजे से 04 बजकर 28 मिनट तक<br>यमगण्ड : दोपहर 12 बजकर 07 बजे से 01 बजकर 34 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong></p>



<p>आज चंद्रदेव मृगशिरा नक्षत्र में रहेंगे…<br>मृगशिरा नक्षत्र- दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक<br>सामान्य विशेषताएं: कला प्रिय, रचनात्मक, रोमांटिक, व्यावसायिक समझ, ऐश्वर्यप्रिय, जिद्दी, व्यवहारिक, भोग-विलासी, दिखावटी, बड़ी आंखें, ईमानदार, उदार, दानशील, संवाद-कुशल, एकाग्रचित्त, और शांत स्वभाव<br>नक्षत्र स्वामी: चंद्र देव<br>राशि स्वामी: शुक्र देव<br>देवता: ब्रह्मा या प्रजापति<br>प्रतीक: गाड़ी का पहिया</p>



<p><strong>सूर्य देव के मंत्र</strong></p>



<p>ॐ घृ&#x200d;णिं सूर्य्य: आदित्य:<br>ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ।<br>ॐ सूर्याय नम: ।<br>ॐ घृणि सूर्याय नम: ।<br>ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।।<br>ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।<br>ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पंचांग के अनुसार: आज बन रहे हैं कई शुभ-अशुभ योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 04:42:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[योग]]></category>
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					<description><![CDATA[हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन धन की देवी यानी मां लक्ष्मी के लिए समर्पित माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पर विशेष विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से साधक की धन संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं। ऐसे में चलिए आज के पंचांग से जानते हैं शुभ-अशुभ योग के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन धन की देवी यानी मां लक्ष्मी के लिए समर्पित माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पर विशेष विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से साधक की धन संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं। ऐसे में चलिए आज के पंचांग से जानते हैं शुभ-अशुभ योग के बारे में।</p>



<p><strong>आज का पंचांग (Panchang 11 October 2025)<br></strong>कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि &#8211; शाम 4 बजकर 43 मिनट तक</p>



<p>व्यतीपात योग &#8211; दोपहर 2 बजकर 7 मिनट तक</p>



<p>करण &#8211;<br>तैतिल &#8211; शाम 4 बजकर 43 मिनट तक</p>



<p>गरज &#8211; ब्रह्म मुहूर्त 3 बजकर 26 मिनट तक (12 अक्टूबर)</p>



<p>वार &#8211; शनिवार</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय &#8211; सुबह 6 बजकर 19 मिनट से</p>



<p>सूर्यास्त &#8211; शाम 5 बजकर 56 मिनट पर</p>



<p>चंद्रोदय &#8211; रात 9 बजकर 10 मिनट पर</p>



<p>चंद्रास्त &#8211; सुबह 11 बजे</p>



<p>सूर्य राशि &#8211; कन्या</p>



<p>चंद्र राशि &#8211; वृषभ देर रात 2 बजकर 24 मिनट तक (12 अक्टूबर)</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त &#8211; सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक</p>



<p>अमृत काल &#8211; सुबह 5 बजकर 26 मिनट से सुबह 6 बजकर 55 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का अशुभ समय<br></strong>राहुकाल &#8211; सुबह 9 बजकर 14 मिनट से सुबह 10 बजकर 41 मिनट तक</p>



<p>गुलिक काल &#8211; सुबह 6 बजकर 19 मिनट से सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक</p>



<p>यमगण्ड &#8211; दोपहर 1 बजकर 35 मिनट से दोपहर 3 बजकर 2 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे…</p>



<p>रोहिणी नक्षत्र &#8211; दोपहर 3 बजकर 20 मिनट तक</p>



<p>सामान्य विशेषताएं &#8211; कला प्रिय, रचनात्मक, रोमांटिक, व्यावसायिक समझ, ऐश्वर्य प्रिय, जिद्दी, व्यवहारिक, भोग-विलासी, दिखावटी, बड़ी आंखें, ईमानदार, उदार, दानशील, संवाद-कुशल, एकाग्रचित्त, और शांत स्वभाव</p>



<p>नक्षत्र स्वामी &#8211; चंद्र देव</p>



<p>राशि स्वामी &#8211; शुक्र देव</p>



<p>देवता &#8211; ब्रह्मा देव या प्रजापति</p>



<p>प्रतीक &#8211; गाड़ी का पहिया</p>
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