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	<title>योगी को लिखा पत्र &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>योगी को लिखा पत्र &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सरकारी बंगला खाली करने को तैयार हुईं मायावती, योगी को लिखा पत्र, रखी ये शर्तें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[somali sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Jun 2018 09:55:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[योगी को लिखा पत्र]]></category>
		<category><![CDATA[रखी ये शर्तें]]></category>
		<category><![CDATA[सरकारी बंगला खाली करने को तैयार हुईं मायावती]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="319" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/योगी-और-मायावती-640x330.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने अपने एक दांव से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधिकारियों को चित्त कर दिया है। सरकारी बंगले को खाली करने के दबाव को देखते हुए मायावती ने अब योगी को एक पत्र भेजकर सातफतौर पर यह बता दिया है कि 13ए, मॉल एवेन्यू, पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर आवंटित आवास नहीं है। मायावती के पत्र को लेकर शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा और लालजी वर्मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। मायावती के प्रतिनिधि के रूप में एनेक्सी पहुंचे दोनों नेताओं ने योगी को पत्र सौंपकर बसपा शासनकाल में हुए कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी। मायावती की तरफ से मुख्यमंत्री योगी से मिलने पहुंचे सतीश चंद्र मिश्रा ने मुलाकात करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर मायावती को 6, लाल बहादुर शात्री मार्ग आवंटित हुआ था, जिसको छोड़ने को वह तैयार हैं। पत्र में मायावती ने लिखा है, “13 जनवरी, 2011 को (बसपा शासनकाल) 13, माल एवेन्यू कांशीराम जी यादगार स्थल घोषित किया जा चुका है। उसके कुछ भाग में मुझे इस उद्देश्य से रहने की अनुमति दी गई थी कि इस स्थल का रखरखाव एवं सुरक्षा मेरी देखभाल में हो सके।” उन्होंने अपने पत्र में आगे कहा है, “23 दिसंबर, 2011 में राज्य संपत्ति विभाग ने 6, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग को उन्हें आवास के रूप में आवंटित किया था। इसलिए मैं इसे खाली कर विभाग को सौंप दूंगी।” मायावती ने आगे लिखा है, “कांशीराम यादगार स्थल का रखरखाव जो प्राइवेट कर्मी करते थे, वह मेरे ही बंगले में रहकर करते थे, लेकिन अब जो मेरा निजी मकान है, उसमें इतनी जगह नहीं है कि मैं इन कर्मियों को रख सकूं। इसलिए इनके ठहरने की व्यवस्था करने तक मुझे समय दिया जाए।” मायावती ने ये भी अनुरोध किया है कि कांशीराम यादगार विश्राम स्थल की देखरेख और सुरक्षा राज्य संपत्ति विभाग करे और अगर किसी तरह की दिक्कत विभाग को होती है तो पहले की तरह ही बसपा को इसके लिए अधिकृत करे। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास देने के कानून को रद्द कर दिया था। इसके बाद राज्य संपत्ति विभाग ने प्रदेश के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला 15 दिन में खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था। इस पर बसपा प्रमुख मायावती ने अपने बंगले 13ए, माल एवेन्यू पर ‘श्री कांशीराम जी यादगार विश्राम स्थल’ का बोर्ड लगाकर यह बताने का प्रयास किया है कि उनका बंगला कांशीराम के अनुयायियों की स्मृतियों से जुड़ा है। लेकिन, राज्य संपत्ति विभाग ने मामले पर सीधा जवाब देते हुए कहा कि सिर्फ बोर्ड लगा देने से शीर्ष अदालत के आदेश पर अमल कराने में कोई बाधा नहीं है। उन्हें हर हाल में सरकारी आवास खाली ही करना होगा।" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/योगी-और-मायावती-640x330.jpg 640w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/योगी-और-मायावती-640x330-300x155.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने अपने एक दांव से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधिकारियों को चित्त कर दिया है। सरकारी बंगले को खाली करने के दबाव को देखते हुए मायावती ने अब योगी को एक पत्र भेजकर सातफतौर पर यह बता दिया है कि 13ए, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="319" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/योगी-और-मायावती-640x330.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने अपने एक दांव से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधिकारियों को चित्त कर दिया है। सरकारी बंगले को खाली करने के दबाव को देखते हुए मायावती ने अब योगी को एक पत्र भेजकर सातफतौर पर यह बता दिया है कि 13ए, मॉल एवेन्यू, पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर आवंटित आवास नहीं है। मायावती के पत्र को लेकर शुक्रवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा और लालजी वर्मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। मायावती के प्रतिनिधि के रूप में एनेक्सी पहुंचे दोनों नेताओं ने योगी को पत्र सौंपकर बसपा शासनकाल में हुए कैबिनेट के फैसले की जानकारी दी। मायावती की तरफ से मुख्यमंत्री योगी से मिलने पहुंचे सतीश चंद्र मिश्रा ने मुलाकात करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर मायावती को 6, लाल बहादुर शात्री मार्ग आवंटित हुआ था, जिसको छोड़ने को वह तैयार हैं। पत्र में मायावती ने लिखा है, “13 जनवरी, 2011 को (बसपा शासनकाल) 13, माल एवेन्यू कांशीराम जी यादगार स्थल घोषित किया जा चुका है। उसके कुछ भाग में मुझे इस उद्देश्य से रहने की अनुमति दी गई थी कि इस स्थल का रखरखाव एवं सुरक्षा मेरी देखभाल में हो सके।” उन्होंने अपने पत्र में आगे कहा है, “23 दिसंबर, 2011 में राज्य संपत्ति विभाग ने 6, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग को उन्हें आवास के रूप में आवंटित किया था। इसलिए मैं इसे खाली कर विभाग को सौंप दूंगी।” मायावती ने आगे लिखा है, “कांशीराम यादगार स्थल का रखरखाव जो प्राइवेट कर्मी करते थे, वह मेरे ही बंगले में रहकर करते थे, लेकिन अब जो मेरा निजी मकान है, उसमें इतनी जगह नहीं है कि मैं इन कर्मियों को रख सकूं। इसलिए इनके ठहरने की व्यवस्था करने तक मुझे समय दिया जाए।” मायावती ने ये भी अनुरोध किया है कि कांशीराम यादगार विश्राम स्थल की देखरेख और सुरक्षा राज्य संपत्ति विभाग करे और अगर किसी तरह की दिक्कत विभाग को होती है तो पहले की तरह ही बसपा को इसके लिए अधिकृत करे। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास देने के कानून को रद्द कर दिया था। इसके बाद राज्य संपत्ति विभाग ने प्रदेश के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला 15 दिन में खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था। इस पर बसपा प्रमुख मायावती ने अपने बंगले 13ए, माल एवेन्यू पर ‘श्री कांशीराम जी यादगार विश्राम स्थल’ का बोर्ड लगाकर यह बताने का प्रयास किया है कि उनका बंगला कांशीराम के अनुयायियों की स्मृतियों से जुड़ा है। लेकिन, राज्य संपत्ति विभाग ने मामले पर सीधा जवाब देते हुए कहा कि सिर्फ बोर्ड लगा देने से शीर्ष अदालत के आदेश पर अमल कराने में कोई बाधा नहीं है। उन्हें हर हाल में सरकारी आवास खाली ही करना होगा।" style="display: block; 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<p>&nbsp;</p>
<p><strong>मायावती की तरफ से मुख्यमंत्री योगी से मिलने पहुंचे सतीश चंद्र मिश्रा ने मुलाकात करने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर मायावती को 6, लाल बहादुर शात्री मार्ग आवंटित हुआ था, जिसको छोड़ने को वह तैयार हैं।</strong></p>
<p><strong>पत्र में मायावती ने लिखा है, “13 जनवरी, 2011 को (बसपा शासनकाल) 13, माल एवेन्यू कांशीराम जी यादगार स्थल घोषित किया जा चुका है। उसके कुछ भाग में मुझे इस उद्देश्य से रहने की अनुमति दी गई थी कि इस स्थल का रखरखाव एवं सुरक्षा मेरी देखभाल में हो सके।”</strong></p>
<p><strong>उन्होंने अपने पत्र में आगे कहा है, “23 दिसंबर, 2011 में राज्य संपत्ति विभाग ने 6, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग को उन्हें आवास के रूप में आवंटित किया था। इसलिए मैं इसे खाली कर विभाग को सौंप दूंगी।”</strong></p>
<p><strong>मायावती ने आगे लिखा है, “कांशीराम यादगार स्थल का रखरखाव जो प्राइवेट कर्मी करते थे, वह मेरे ही बंगले में रहकर करते थे, लेकिन अब जो मेरा निजी मकान है, उसमें इतनी जगह नहीं है कि मैं इन कर्मियों को रख सकूं। इसलिए इनके ठहरने की व्यवस्था करने तक मुझे समय दिया जाए।”</strong></p>
<p><strong>मायावती ने ये भी अनुरोध किया है कि कांशीराम यादगार विश्राम स्थल की देखरेख और सुरक्षा राज्य संपत्ति विभाग करे और अगर किसी तरह की दिक्कत विभाग को होती है तो पहले की तरह ही बसपा को इसके लिए अधिकृत करे। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास देने के कानून को रद्द कर दिया था। इसके बाद राज्य संपत्ति विभाग ने प्रदेश के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला 15 दिन में खाली करने के लिए नोटिस जारी किया था।</strong></p>
<p><strong>इस पर बसपा प्रमुख मायावती ने अपने बंगले 13ए, माल एवेन्यू पर ‘श्री कांशीराम जी यादगार विश्राम स्थल’ का बोर्ड लगाकर यह बताने का प्रयास किया है कि उनका बंगला कांशीराम के अनुयायियों की स्मृतियों से जुड़ा है।</strong></p>
<p><strong>लेकिन, राज्य संपत्ति विभाग ने मामले पर सीधा जवाब देते हुए कहा कि सिर्फ बोर्ड लगा देने से शीर्ष अदालत के आदेश पर अमल कराने में कोई बाधा नहीं है। उन्हें हर हाल में सरकारी आवास खाली ही करना होगा।</strong></p>
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