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	<title>यमुना &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>यमुना &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>यमुना की सफाई के लिए एक्शन मोड में दिल्ली सरकार</title>
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		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 06:16:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
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					<description><![CDATA[कई साल से फाइलों और घोषणाओं में उलझी यमुना सफाई अब सीधे कार्रवाई के रास्ते पर आ गई है। दिल्ली सरकार ने यमुना में गिरने वाले नालों को प्रदूषण के स्रोत पर ही रोकने के लिए 32 अत्याधुनिक हाई-कैपेसिटी सफाई मशीनों की तैनाती को मंजूरी दी है। मार्च तक सभी मशीनें पूरी तरह ऑपरेशनल होंगी &#8230;]]></description>
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<p>कई साल से फाइलों और घोषणाओं में उलझी यमुना सफाई अब सीधे कार्रवाई के रास्ते पर आ गई है। दिल्ली सरकार ने यमुना में गिरने वाले नालों को प्रदूषण के स्रोत पर ही रोकने के लिए 32 अत्याधुनिक हाई-कैपेसिटी सफाई मशीनों की तैनाती को मंजूरी दी है। मार्च तक सभी मशीनें पूरी तरह ऑपरेशनल होंगी और अभियान की शुरुआत नजफगढ़ ड्रेन से की जाएगी, जिसे यमुना का सबसे बड़ा प्रदूषण स्रोत माना जाता है।</p>



<p>यमुना को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए सरकार ने इस बार प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि तकनीक आधारित और लगातार चलने वाला अभियान शुरू किया है। इस बार योजना का मकसद साफ है, बिना उपचारित कीचड़, सिल्ट और ठोस कचरे को यमुना में पहुंचने से पहले ही नालों में रोका जाएगा। अब तक पारंपरिक तरीके नाकाम रहे हैं। इसके लिए बड़े स्तर पर यांत्रिक सफाई की जाएगी। पहले चरण में नजफगढ़ ड्रेन की गहरी सफाई की जाएगी। यहां काम पूरा होने के बाद मशीनों को अन्य प्रमुख नालों और यमुना के चिन्हित हिस्सों में तैनात किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबकि, ये अभियान दिन-रात चलेगा और हटाए गए कचरे व सिल्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा।</p>



<p><strong>इसी महीने योजना का पहला कदम उठाया<br></strong>एक एम्फीबियस मल्टी पर्पज ड्रेजर फिनलैंड से दिसंबर के अंतिम सप्ताह में दिल्ली पहुंचेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नदी और वेटलैंड पुनर्जीवन में इस्तेमाल होने वाली ये मशीनें जनवरी से पूरी क्षमता के साथ काम शुरू करेंगी। इससे यांत्रिक सफाई की रफ्तार कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने कहा है कि यमुना सफाई अब बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी। इस बार मशीनें जमीन पर उतरेंगी और नतीजे दिखेंगे।</p>



<p><strong>पहले की लापरवाही पर उठाए सवाल<br></strong>मंत्री ने पिछली सरकार की लापरवाही पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यमुना में आज जो हालात हैं, वे लंबे समय की अनदेखी और पुराने सिस्टम का नतीजा हैं। अब आधुनिक मशीनें, सख्त निगरानी और तय जवाबदेही के साथ इस चक्र को तोड़ा जाएगा। भारी प्रदूषण भार को देखते हुए नजफगढ़ ड्रेन को प्राथमिकता दी गई है। सरकार की रणनीति है कि नाले साफ होंगे तो प्रदूषण अपने आप घटेगा और यमुना में सुधार साफ नजर आएगा। मंत्री ने साफ कहा कि इस काम में न कोई बहाना चलेगा और न कोई ढिलाई।</p>



<p><strong>आधुनिक मशीनें तेजी से करेंगी सफाई<br></strong>अधिकारियों के मुताबिक, एम्फीबियस मशीनें गहरे, दलदली और जलभराव वाले इलाकों में भी काम कर सकेंगी, जबकि हॉपर बार्ज सफाई सामग्री को तेजी से हटाने में मदद करेंगी। रोजाना प्रगति की निगरानी और विभागों के बीच तालमेल की व्यवस्था भी की गई है, ताकि यह अभियान किसी मौसम तक सीमित न रहे। सरकार का दावा है कि मशीनें, मैनपावर और राजनीतिक इच्छाशक्ति एक साथ मैदान में उतर रही हैं। मंत्री ने कहा कि संदेश साफ है, यमुना सफाई अब इरादों से आगे बढ़कर स्थायी कार्रवाई की ओर बढ़ चुकी है।</p>



<p><strong>यमुना सफाई के लिए लाई जा रहीं 32 विशेष मशीनें<br></strong>8 लॉन्ग बूम एम्फीबियस एक्स्केवेटर<br>6 लॉन्ग बूम हाइड्रोलिक एक्स्केवेटर<br>2 एम्फीबियस मल्टी पर्पज ड्रेजर<br>6 सेल्फ प्रोपेल्ड, सेल्फ अनलोडिंग हॉपर बार्ज<br>3 मिनी एम्फीबियस एक्स्केवेटर<br>2 वीड हार्वेस्टर मशीनें<br>2 व्हील्ड स्किड स्टीयर लोडर<br>2 क्रॉलर मिनी हाइड्रोलिक एक्स्केवेटर<br>1 सुपर सकर कम जेटिंग मशीन</p>



<p></p>
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		<title>दिल्ली में डिटर्जेंट और गंदे पानी ने बिगाड़ी यमुना की हालत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 06:19:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
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					<description><![CDATA[आस्था के महापर्व छठ पूजा पर जीवनदायिनी यमुना के कई घाटों पर पानी डुबकी लगाने पर संकट खड़ा हो गया है। इसकी वजह नदी की सतह पर सफेद झाग की मोटी परत का फैलना है। सरकार के दावों के बीच ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टेरी) की हालिया रिपोर्ट ने साफ यमुना को लेकर चिंता बढ़ा &#8230;]]></description>
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<p>आस्था के महापर्व छठ पूजा पर जीवनदायिनी यमुना के कई घाटों पर पानी डुबकी लगाने पर संकट खड़ा हो गया है। इसकी वजह नदी की सतह पर सफेद झाग की मोटी परत का फैलना है। सरकार के दावों के बीच ऊर्जा और संसाधन संस्थान (टेरी) की हालिया रिपोर्ट ने साफ यमुना को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यमुना में झाग का जिम्मेदार डिटर्जेंट और नालों से आने वाला गंदा पानी है। ओखला बैराज के पास पानी में प्रदूषण इतना बढ़ गया है कि श्रद्धालुओं को सोचने को विवश होना पड़ रहा है कि आखिर छठ की पवित्र डुबकी इस पानी में कैसे लगाई जाए?</p>



<p>टेरी ने दिल्ली सरकार के लिए एक विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें झाग बनने के कारणों की पहचान की गई है और उसे रोकने के लिए कई ठोस सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना में झाग तब बनता है जब नदी में मौजूद गंदा पानी, डिटर्जेंट में पाए जाने वाले रसायन (सर्फेक्टेंट) और पानी की तेजी या अशांति आपस में मिल जाते हैं।</p>



<p>यह समस्या ओखला बैराज के पास अधिक देखने को मिलती है, जहां गेट खुलने पर पानी में कीचड़ हिलता है और झाग उठने लगता है। अध्ययन में बताया गया है कि यमुना में गिरने वाले बिना साफ नाले और फॉस्फेट वाले डिटर्जेंट झाग की सबसे बड़ी वजह हैं। इसे रोकने के लिए टेरी ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को सुझाव दिया गया है कि वह पानी की जांच में अमोनिया और फॉस्फेट स्तर को भी शामिल करें। साथ ही, धोबी घाटों और कपड़े धोने वाले केंद्रों में छोटे-छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए जाएं।</p>
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		<title>दिल्ली:  यमुना शांत, लेकिन टेंट में रात-दिन गुजारना मुश्किल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 06:03:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
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					<description><![CDATA[यमुना का जलस्तर सामान्य हो गया है, फिर भी लोग चिल्ला, यमुना खादर, विकास मार्ग, पुराना उस्मानपुर और गढ़ी मांडू समेत अन्य जगहों पर सड़क पर टेंट लगाकर रहे हैं। लोगों ने बताया कि अब उनके पास पर्याप्त राशन भी नहीं बचा है जाे कुछ भी था वह बाढ़ में बर्बाद हो गया है। इन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>यमुना का जलस्तर सामान्य हो गया है, फिर भी लोग चिल्ला, यमुना खादर, विकास मार्ग, पुराना उस्मानपुर और गढ़ी मांडू समेत अन्य जगहों पर सड़क पर टेंट लगाकर रहे हैं। लोगों ने बताया कि अब उनके पास पर्याप्त राशन भी नहीं बचा है जाे कुछ भी था वह बाढ़ में बर्बाद हो गया है। इन लोगों ने आरोप लगाया कि बाढ़ के एक-दो दिन तक सरकार की ओर से मदद की गई, लेकिन पानी कम होने के बाद प्रशासन की ओर से न के बराबर मदद की जा रही है।</p>



<p>लोगों ने बताया कि पहले गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) की ओर से यहां पर हर घंटे कुछ न कुछ मदद मिल जाती थी, लेकिन अब वह भी कम हो चुकी है। बाढ़ प्रभावितों ने बताया कि यमुना का पानी कम होते ही वह अपने घरों तक गए लेकिन खाने-पीने का सारा सामान खराब हो चुका था। जो बची हुई चीजें थीं वह साथ लेकर आ गए। कोई संस्था खाने-पीने की चीजें लेकर मदद के लिए पहुंचती है, तो लंबी कतार की वजह से हर जरूरतमंद तक सामान नहीं पहुंच पाता है।</p>



<p><strong>दानदाताओं में फोटो लेने की होड़</strong><br>लोगों ने बताया कि यहां पर कुछ लोग ऐसे भी आते हैं, जो दान करते वक्त हर एक व्यक्ति की फोटो क्लिक करते रहते हैं। वह थोड़ा सा भी कुछ देते हैं, तो वह पहले उसकी फोटो लेते हैं और वीडियो बनाते हैं। फिर उसके बाद वह लोगों की मदद करते हैं। ऐसे में लोग मदद लेते वक्त खुद को शर्मिंदा महसूस करते हैं।</p>



<p>टेंट में रात-दिन गुजारना बहुत मुश्किल हो रहा है। किसी तरह हम लोग यहां पर रहे हैं। शुरू-शुरू में यहां कई लोग मदद के लिए आते थे, लेकिन पानी कम होने के बाद अब यहां पर लोगों ने आना कम कर दिया है।</p>
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		<title>खतरे के निशान की तरफ बढ़ रही गंगा, यमुना भी करीब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 05:35:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[गंगा]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
		<category><![CDATA[सिंचाई विभाग]]></category>
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					<description><![CDATA[सिंचाई विभाग की सोमवार शाम चार बजे की रिपोर्ट के अनुसार फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.01 मीटर पहुंच गया था। गंगा के जलस्तर में प्रतिघंटे दो सेमी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। नैनी में यमुना का जलस्तर 83.81 मीटर पहुंच गया और इसमें प्रतिघंटे 1.50 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। गंगा-यमुना नदियों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>सिंचाई विभाग की सोमवार शाम चार बजे की रिपोर्ट के अनुसार फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.01 मीटर पहुंच गया था। गंगा के जलस्तर में प्रतिघंटे दो सेमी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। नैनी में यमुना का जलस्तर 83.81 मीटर पहुंच गया और इसमें प्रतिघंटे 1.50 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई।</p>



<p>गंगा-यमुना नदियों का जलस्तर खतरे के निशान की तरफ बढ़ता दिख रहा है। गंगा का जलस्तर 84 मीटर के पार हो गया है तो यमुना का भी इसके करीब है। इसका नतीजा है कि एक दर्जन से अधिक बस्तियां बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। मुश्किल यह कि दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी है और टोंस अब भी उफान पर है। ऐसे में बाढ़ का दायरा बढ़ता दिख रहा है।</p>



<p>सिंचाई विभाग की सोमवार शाम चार बजे की रिपोर्ट के अनुसार फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.01 मीटर पहुंच गया था। गंगा के जलस्तर में प्रतिघंटे दो सेमी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। नैनी में यमुना का जलस्तर 83.81 मीटर पहुंच गया और इसमें प्रतिघंटे 1.50 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। दोनों नदियों के खतरे का निशान 84.734 मीटर है।</p>



<p>दोनों नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार कुछ कम जरूर हुई है लेकिन वृद्धि का सिलसिला अभी जारी रहेगा। अफसरों के अनुसार दोनों नदियों के जलस्तर में मंगलवार तक बढ़ोतरी जारी रहने के आसार हैं। इसके अलावा टोंस में ज्यादा पानी आ रहा है। इससे संगम के बाद पानी तेजी से निकल भी नहीं पा रहा है। इससे मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।</p>



<p><strong>खुल गए चार राहत शिविर, 1100 से अधिक लोग पहुंचे<br></strong>जलस्तर बढ़ने के साथ बाढ़ का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। बघाड़ा, सलोरी, बेली, राजापुर, नेवादा आदि मोहल्लों के कछारी इलाकों में ऊपर तक पानी आ गया है और एक दर्जन से अधिक बस्तियां प्रभावित हैं। गंगा के दोनों तरफ शहर की 13 बस्तियों के हजारों परिवारों को तीसरी बार घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसका नतीजा रहा कि सोमवार को राजापुर स्थित ऋषिकुल विद्यालय भी बाढ़ राहत शिविर में तब्दील हो गया और शाम तक पौने तीन सौ लोग इसमें पहुंच भी गए। इस तरह अब चार शिविर चालू हो गए हैं और इनमें करीब 250 परिवारों के 1100 से अधिक लोग पहुंचे हैं। इन शिविरों में लोगों के पहुंचने का सिलसिला रात तक जारी रहा। जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसे देखते हुए दो अन्य शिविर तैयार भी कर दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें भी चालू कर दिया जाएगा।</p>



<p><strong>घंटों गुल रही बिजली, शिविर में परेशान रहे शरणार्थी<br></strong>बाढ़ की वजह से बेघर हुए लोगों को उमस भरी गर्मी ने भी परेशान किया। मेहबूब अली इंटर कॉलेज बाढ़ रात शिविर में दोपहर में लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। यहां दो घंटे से अधिक समय तक बिजली गुल रही। ऐसे में पंखे नहीं चले। लोग हाथ वाले पंखे के सहारे रहे लेकिन चिपचिपाती गर्मी में इससे राहत नहीं मिली।</p>



<p>शिविर में लोगों को सुबह नाश्ते में चाय के अलावा हलवा और केला मिला। बच्चों को दूध और बिस्किट भी मिला। इसके अलावा दोपहर में खाना मिला लेकिन कई लोग इससे वंचित रह गए। म्योराबाद के कल्लू मिस्त्री, छोटकई वर्मा, अमित वर्मा को सुबह नाश्ता नहीं मिला। कल्लू का कहना था कि दोपहर में खाना भी पर्याप्त नहीं मिला। कल्लू, छोटकई का कहना था कि बाहर से कई लोग आ जा रहे हैं जिन्हें खाना दिया जा रहा है लेकिन उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिया गया। इनका कहना था कि सुबह वे लोग काम से चले गए थे और लौटे तो नाश्ता बंट चुका था। मांगने पर बताया गया कि अब नहीं मिलेगा।</p>



<p><strong>प्रभावित मोहल्ले एवं गांव<br></strong>अफसरों के अनुसार सदर तहसील के अंतर्गत कछार मऊ, मऊ सरैया, बघाड़ा जहरूद्दीन, बघाड़ा बालन, मेहंदौरी कछार, शिवकुटी, नेवादा, बेली, सलोरी की बस्तियों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। फूलपुर में सोनौटी, बदरा धोकरी, लीलापुर, करछना में देहली, भगेसर गांव और मोहल्ले बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। इन मोहल्लों और गांवों में 32 नावें व एक मोटर बोट चलानी पड़ी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>यूपी:  ताजमहल तक पहुंचा यमुना का पानी&#8230;खतरे का निशान हुआ पार, लोगों में दहशत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Sep 2025 05:33:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
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					<description><![CDATA[भारी बारिश के बीच हथिनीकुंड बैराज से शुक्रवार को ढाई लाख क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया। यही नहीं, गोकुल बैराज से शुक्रवार शाम सात बजे 1.22 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद यमुना में बाढ़ के हालात बन गए हैं। चेतावनी बिंदु के 3.3 फीट ऊपर (498.3 फीट) बह रही यमुना शनिवार को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>भारी बारिश के बीच हथिनीकुंड बैराज से शुक्रवार को ढाई लाख क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया। यही नहीं, गोकुल बैराज से शुक्रवार शाम सात बजे 1.22 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद यमुना में बाढ़ के हालात बन गए हैं। चेतावनी बिंदु के 3.3 फीट ऊपर (498.3 फीट) बह रही यमुना शनिवार को बाढ़ के स्तर 499 फीट के आंकड़े को पार कर सकती है। बाढ़ के हालात के बीच जिला प्रशासन ने सदर तहसील क्षेत्र में पड़ने वाले ठार आश्रम के मेहरा नाहरगंज के 40 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है। जलस्तर और बढ़ने पर पांच हजार परिवार चपेट में आ सकते हैं।</p>



<p>सिंचाई विभाग के अनुसार यमुना का जलस्तर बढ़ने से कई क्षेत्रों में झोपड़ी-खेल खलिहान डूब चुके हैं। शहर का नगला बूढ़ी, अमर विहार दयालबाग, मोतीमहल, कटरा वजीर खां, रामबाग बस्ती का क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ सकता है। वहीं, ग्राम तनौरा, नूरपुर, मेहरा नाहगंज, विसारना, कैलाश, स्वामी बाग, फतेहाबाद तहसील में ग्राम-भरापुर, बमरौली, इंदौन, मडायना, मेलीकलॉ, गुडा, मेवली खुर्द, हिमायूपुर, बुर्ज, नगला छीतर सिंह, मेहरा नाहरगंज, महल बादशाही, नगला तल्फी, नगल पैमा, तहसील फतेहाबाद में शाहिदपुर, वीरपुरा, बेहड़, पारौली सिकरवार, बिचौला, गिदौन, तहसील एत्मादपुर में नगला धीमर, बढ़नुपरा, रहनकलां, नगला कटा प्रभावित हो सकते हैं।</p>



<p>शहर के विभिन्न इलाकोें में नाले बैक मार रहे हैं। टैपिंग की वजह से भी नालों का पानी पीछे आ रहा है। ऐसे में बारिश के बाद अब उफनाई यमुना की दोहरी मार से शहर के लोगों की परेशानी बढ़ना तय माना जा रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>आज आधी रात से उफान पर होगी यमुना, बाढ़ जैसे हालात, लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Aug 2025 09:34:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
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					<description><![CDATA[यमुना का जलस्तर रविवार शाम 4 बजे 204.60 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी के स्तर 204.50 मीटर से ज्यादा है। ऐसे में दिल्ली में फिर से 2023 की बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। उस समय 45 साल का रिकॉर्ड टूटा था और यमुना का जलस्तर 208.48 मीटर तक पहुंच गया था। पहाड़ों पर &#8230;]]></description>
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<p>यमुना का जलस्तर रविवार शाम 4 बजे 204.60 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी के स्तर 204.50 मीटर से ज्यादा है। ऐसे में दिल्ली में फिर से 2023 की बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं। उस समय 45 साल का रिकॉर्ड टूटा था और यमुना का जलस्तर 208.48 मीटर तक पहुंच गया था। पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश के कारण ऐसी आशंका है कि सोमवार-मंगलवार को आधी रात से दिल्ली में यमुना उफान पर होगी। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कल हथिनीकुंड बैराज के सभी 18 गेट इस मौसम में पहली बार खोल दिए गए हैं।</p>



<p>रविवार शाम 4 बजे हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से एक साथ 1,78,996 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। करीब इसी अनुपात में निरंतर पानी आ रहा है जो रात करीब 2 बजे दिल्ली पहुंचेगा। इससे यमुना का जलस्तर 206 मीटर के पार जाने की आशंका है। इसकी चेतावनी जारी कर दी गई है।दिल्ली सरकार की ओर से यमुना के तटीय इलाकों में रह रहे लोगों को सावधान रहने और पानी बढ़ने पर लोगों को घर खाली करने के लिए सतर्क रहने के आदेश दे दिए गए हैं। प्रशासन ने यमुना के तटीय इलाकों में बाढ़ से निपटने की तैयारियां बढ़ा दी हैं। यमुना बाजार में नदी के किनारे दीवार को मजबूत किया गया है, ताकि पानी बढ़ने पर ये तेजी से बाजार में न घुस पाए, लेकिन यमुना बाजार के आसपास के सीवर अभी से ओवर फ्लो होने लग गए हैं।</p>



<p><strong>2023 में अचानक आई बाढ़<br></strong>2023 में 10 जुलाई को शाम 3 बजे यमुना का जलस्तर 205.10 मीटर था लेकिन हथिनीकुंड बैराज से एक साथ 2,15,677 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और 11 जुलाई को दिल्ली में बाढ़ आ गई थी। यमुना का जलस्तर सुबह 10 बजे ही 206.34 मीटर के पार चला गया था। 11 जुलाई को फिर से एक साथ सबसे अधिक 3,44,035 क्यूसेक पानी हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया। 12 जुलाई को यमुना का जलस्तर 207.38 मीटर था।</p>



<p><strong>208.48 मीटर पहुंचा था जलस्तर<br></strong>भारी मात्रा में पानी छोड़ने से 13 जुलाई, 23 को दिल्ली में बाढ़ का 45 साल का रिकार्ड ध्वस्त हो गया था। दिल्ली में यमुना का जलस्तर 208.48 मीटर तक पहुंच गया था। बाढ़ का पानी कश्मीरी गेट आईएसबीटी के परिसर तक में पहुंच गया था। आउटर रिंग रोड पर रेलवे अंडरपास लबालब था। इस रूट से आवागमन बंद हो गया था। यमुना बाजार, एमनेस्टी मार्केट सब डूबे हुए थे। सबसे ज्यादा नुकसान यमुना खादर में हुआ था। लोगों के घरेलू सामान बह गए थे। लोग अपने पालतू पशुओं को नदी से नहीं निकाल पाए थे। करीब 3000 से अधिक लोगों को बाढ़ क्षेत्र से बाहर सुरक्षित निकाला गया। करीब महीने भर बाढ़ से जनजीवन प्रभावित रहा।</p>



<p><strong>1963 से अब तक आई बाढ़<br></strong>1963 &#8211; 205.40 मीटर<br>1978 &#8211; 207.49 मीटर<br>2010 &#8211; 207.11 मीटर<br>2013 &#8211; 207.32 मीटर<br>2023 &#8211; 208.48 मीटर</p>



<p><strong>यह बोले अधिकारी-<br></strong>पिछले हफ्ते से ही मुनादी चल रही है। हमारी बोट, गोताखोर, फायर ब्रिगेड, आईएफसी, पीडब्ल्यूडी, हेल्थ सहित सभी संबंधित विभागों के नोडल अधिकारी तैयार हैं। गीता कॉलोनी बंध रोड फ्लड कंट्रोल रूम से 24 घंटे यमुना की निगरानी हो रही है। सीडब्ल्यूसी और आईएमडी से हर घंटे यमुना के जलस्तर और मौसम की जानकारी मिल रही है। मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग के मंत्री हमसे लगातार यमुना की रिपोर्ट ले रहे हैं। हम बाढ़ से निपटने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। -संदीप यादव, एसडीएम प्रीत विहार, राजस्व विभाग नोडल अधिकारी</p>



<p><strong>कुछ अहम आंकड़े<br></strong>चेतावनी का जलस्तर &#8211; 204.50 मीटर<br>मौजूदा जलस्तर &#8211; 204.60 मीटर<br>खतरनाक जलस्तर &#8211; 205.33 मीटर<br>निकासी स्तर &#8211; 206 मीटर</p>
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		<title>यमुना में ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली में लाखों मछलियों की मौत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jul 2024 05:14:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[मछलियों]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
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					<description><![CDATA[यमुना में ऑक्सीजन का स्तर घटने से बीते कुछ दिनों में लाखों की तादाद में मछलियां मर गई हैं। अन्य जलीय जीवों की जान भी खतरे में है। यमुना किनारे रहने वाले किसान और मछुआरे बताते हैं कि यमुना में केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने से मछलियां मर रही हैं, जबकि जीव वैज्ञानिकों का मानना &#8230;]]></description>
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<p>यमुना में ऑक्सीजन का स्तर घटने से बीते कुछ दिनों में लाखों की तादाद में मछलियां मर गई हैं। अन्य जलीय जीवों की जान भी खतरे में है। यमुना किनारे रहने वाले किसान और मछुआरे बताते हैं कि यमुना में केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने से मछलियां मर रही हैं, जबकि जीव वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्मी के दिनों में पानी में ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो जाने के कारण अक्सर ऐसा होता है। </p>



<p>यमुना किनारे उतरा रहीं मरी मछलियों के कारण दुर्गंध से करीब एक किलोमीटर के दायरे में लोगों का सांस लेना  मुश्किल हो गया है। यमुना खादर में सब्जियां उगाने वाले और मछली पकड़ने वाले किसानों के लिए नदी किनारे ठहरना मुश्किल हो रहा है। मछुआरों को यमुना के पानी से चर्म रोग की समस्या उत्पन्न हो रही है। </p>



<p><strong>हर एक घाट पर मछलियों की भरमार    </strong><br>वजीराबाद पुस्ते से बुराड़ी पल्ला नंबर-4 के जीरो पॉइंट तक तीन-चार दिन से लाखों मरी मछलियां उतरा रही हैं। स्थानीय किसानों और मछुआरों ने बताया कि यमुना नदी में सोनीपत नहर से आने वाला पानी जब से छोड़ा जाता है, तो इसी प्रकार से मछलियां मर जाती हैं। साल में एक-दो बार आठ नंबर नहर से इसी तरह से जहरीला पानी छोड़ा जाता है। ये इंडस्ट्रियल एरिया से निकला खतरनाक रसायन मिला पानी होता है, जिस कारण यमुना का पानी जहरीला हो गया है। <br><br><strong>रसायन युक्त पानी छोड़ना भी एक कारण </strong><br>यमुना में मछलियों व अन्य जलीय जीवों की मौत के पीछे यमुना के पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम होना हो सकता है। विशेषज्ञ इसके पीछे कई कारण मानते हैं, जैसे साल भर नालों में जमा जहरीली गैसें पहली बारिश होने पर बहकर यमुना के पानी में मिलती हैं। पहले से दूषित यमुना के पानी में ऑक्सीजन का स्तर अचानक बेहद घट जाता है। फैक्ट्रियों से खतरनाक रसायन युक्त पानी यमुना में छोड़ा जाना भी एक कारण हो सकता है।</p>



<p>इन दिनों यमुना में बहाव कम हो गया है, जगह-जगह पानी जमा है। तेज गर्मी से कई जगह पानी सूख गया, जिसके कारण मछलियां मर गईं। दूसरे इन दिनों आसमान में बादल रहने के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर घट गया है, इसलिए इस सीजन में मछलियां मरती हैं। ये समस्या सितंबर तक बने रहने की संभावना है। <strong>&#8211; फैयाज अहमद खुदसर, बायोडायवर्सिटी पार्क में वरिष्ठ वैज्ञानिक</strong></p>
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		<item>
		<title>यमुना में जलस्तर घटने से बिगड़ी स्थिति</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Mar 2024 06:02:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[बिगड़ी स्थिति]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
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					<description><![CDATA[भिवानी के के 172 जलघर टैंकों को भरने में भी अब परेशानी हो रही है वहीं सुंदर सब ब्रांच बंद होने के बाद ही जूई फीडर में पानी चलने की उम्मीद है। फिलहाल स्थिति को देखते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की शहर में पानी की राशनिंग भी जारी रहेगी। यमुना नदी में पानी का स्तर कम होने &#8230;]]></description>
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<p>भिवानी के के 172 जलघर टैंकों को भरने में भी अब परेशानी हो रही है वहीं सुंदर सब ब्रांच बंद होने के बाद ही जूई फीडर में पानी चलने की उम्मीद है। फिलहाल स्थिति को देखते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की शहर में पानी की राशनिंग भी जारी रहेगी।</p>



<p>यमुना नदी में पानी का स्तर कम होने से भिवानी जिले में नहरी पानी का शेड्यूल भी बिगड़ गया है। सुंदर ग्रुप में 2150 क्यूसेक पानी की डिमांड के मुकाबले फिलहाल 940 क्यूसेक पानी ही पहुंच रहा है, जबकि शुरुआत में 1200 क्यूसेक पानी आंका गया था। मगर नहरों में पानी का स्तर बढ़ने के बजाए घट गया, जिसकी वजह से सुंदर सब ब्रांच और मिताथल फीडर में पानी चलाने के लिए जूई फीडर को बंद करना पड़ा।</p>



<p>जिले के 172 जलघर टैंकों को भरने में भी अब परेशानी हो रही है वहीं सुंदर सब ब्रांच बंद होने के बाद ही जूई फीडर में पानी चलने की उम्मीद है। हालांकि सिंचाई विभाग के अधिकारी मुख्यालय से लगातार पानी बढ़वाने के प्रयासों में जुटे हैं। नहरी पानी की कमी की वजह से शहरवासियों को भी होली पर्व पर जलसंकट से निजात नहीं मिलेगी। फिलहाल स्थिति को देखते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की शहर में पानी की राशनिंग भी जारी रहेगी।</p>



<p>सिंचाई विभाग द्वारा सुंदर ग्रुप की नहरों में 17 मार्च से पानी का शेड्यूल निर्धारित किया है और 24 मार्च तक नहरी पानी मिलेगा। मंगलवार को सुंदर सब ब्रांच में 900 क्यूसेक के मुकाबले 700 क्यूसेक पानी चला, वहीं मिताथल फीडर में 350 क्यूसेक की डिमांड पर सिर्फ 240 क्यूसेक पानी ही पहुंचा। जबकि जूई फीडर में करीब 900 क्यूसेक पानी की डिमांड की गई थी, लेकिन नहरी पानी कमी की वजह से दो नहर चलाने के लिए जूई फीडर को बंद करना पड़ा। पानी का स्तर नहीं बढ़ा तो जूई फीडर में पानी चलाने के लिए सुंदर सब ब्रांच बंद करनी पड़ेगी। हालांकि सिर्फ चार दिन ही नहरी पानी मिलेगा। ऐसे में गांवों के जोहड़ और जलघरों के टैंक भरना भी अब सिंचाई विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।</p>



<p><strong>ये है सिंचाई विभाग के नहरी पानी का शेड्यूल</strong><br>सिंचाई विभाग ने पांच ग्रुप बनाए हैं। इनमें सुंदर ग्रुप, भालोठ ग्रुप, जेएलएन ग्रुप, जेएलएन एमकेडी व बुटाना ग्रुप शामिल है। इससे पहले सुंदर ग्रुप, भालोठ, जेएलएन और बुटाना ग्रुप ही बनाए गए थे। जबकि जेएलएन (जवाहरलाल नेहरू कनाल) में तीन नए सब ग्रुप बना दिए हैं। पहले चार ग्रुप बने थे तो उस समय आठ दिन नहर चलती थी और 24 दिन नहरें बंद रहती थी। अब पांच ग्रुप बनाए गए हैं, इसमें आठ दिन प्रत्येक ग्रुप की नहरों में पानी मिलता और 32 दिन नहरें बंद रहती हैं। ऐसे में अगर एक ग्रुप में नहरों के अंदर पानी की कमी रहती है तो फिर उन्हें अगली बार 32 दिन नहर आने का इंतजार करना पड़ता है। मगर भिवानी शहर के लिए सुखद पहलू यह है कि सुंदर ग्रुप के बाद बुटाना ग्रुप में आठ दिन नहर चलने से भी जलघर के टैंकों को कुछ पानी मिल जाता है।</p>



<p><strong>अधिकारी के अनुसार</strong><br>यमुना में पानी का स्तर बहुत कम होने की वजह से डिमांड के अनुरूप पानी नहीं मिला है। 24 मार्च तक सुंदर ग्रुप में नहरी पानी का शेड्यूल है। हमने 2150 क्यूसेक पानी की डिमांड की थी, मगर 940 क्यूसेक पानी चल रहा है। जिसकी वजह से जूई फीडर नहर को बंद करना पड़ा है। मुख्यालय के अधिकारियों से लगातार बातचीत कर पानी बढ़वाने की कोशिश कर रहे हैं, उम्मीद है जल्द हालात सुधरेंगे।&nbsp;<strong>-अमनदीप देशवाल, कार्यकारी अभियंता, जूई वाटर सर्विसेज सिंचाई विभाग भिवानी।</strong></p>
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		<item>
		<title>हरियाणा : राजस्थान को यमुना का पानी देने पर हरियाणा विधानसभा में हंगामा</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%af%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%a8/545023</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 28 Feb 2024 05:40:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
		<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा विधानसभा]]></category>
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					<description><![CDATA[यमुना नदी में बरसात का अतिरिक्त पानी राजस्थान को देने का मुद्दा एक बार फिर हरियाणा विधानसभा में उठा। कांग्रेस ने सरकार के फैसले का जमकर विरोध किया और समझौता रद्द करने की मांग उठाई। हालांकि सरकार साफ तौर पर समझौता रद्द करने से मना कर चुकी है। यमुना नदी में बरसात का अतिरिक्त पानी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>यमुना नदी में बरसात का अतिरिक्त पानी राजस्थान को देने का मुद्दा एक बार फिर हरियाणा विधानसभा में उठा। कांग्रेस ने सरकार के फैसले का जमकर विरोध किया और समझौता रद्द करने की मांग उठाई। हालांकि सरकार साफ तौर पर समझौता रद्द करने से मना कर चुकी है।</p>



<p>यमुना नदी में बरसात का अतिरिक्त पानी राजस्थान को देने को लेकर कांग्रेस ने सदन में फिर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा की अगुवाई में कांग्रेसी विधायकों ने खड़े होकर इस फैसले का विरोध किया और मांग की इस एमओयू को रद्द किया जाए। करीब 15 मिनट तक इस पर हंगामा रहा। हालांकि, कृषि मंत्री जेपी दलाल ने जवाब देने की कोशिश की लेकिन कांग्रेसी हमलावर रहे।</p>



<p>कांग्रेस विधायक रघुवीर कादियान ने राजस्थान को पानी देने के फैसले पर आपत्ति जताई तो सभी विधायकों ने एक सुर में सरकार के फैसले का विरोध किया। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि दक्षिण हरियाणा के जिलों में पाइपलाइन लेकर पानी ले जाने का वह समर्थन करते हैं लेकिन राजस्थान को पानी देने का नहीं।&nbsp;</p>



<p>हुड्डा ने तर्क दिया कि जब उनके पिता रणबीर सिंह हुड्डा मंत्री थे तो जब साबी नदी सहित अन्य दो नदियों का पानी देने के लिए राजस्थान के साथ समझौता हुआ था लेकिन राजस्थान से डैम बनाकर हरियाणा को पानी नहीं दिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस समझौते को रद्द किया जाए, नहीं तो प्रदेशभर में जन आंदोलन चलाया जाएगा।</p>



<p>कृषि मंत्री जेपी दलाल और परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने कांग्रेस की आपत्ति पर तर्क दिया कि हरियाणा के हिस्सा का नहीं, बल्कि यमुना में 24 हजार क्यूसिक से अतिरिक्त पानी दिया जाएगा। कृषि मंत्री जेपी दलाल ने तर्क दिया कि यमुना नदी में 24 हजार क्यूसिक से अतिरिक्त पानी राजस्थान को दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने विरोध जताते हुए कांग्रेस विधायकों को जवाब दिया कि जिन क्षेत्रों में पानी जा रहा है, वे भी विरोध कर रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">एसवाईएल निर्माण पर कस्सी चलाकर पीएम पूरी करें मोदी गारंटी</h2>



<p>प्रदेश सरकार द्वारा एसवाईएल निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। कांग्रेस विधायक रघुवीर कादियान ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हर वर्ष बजट निर्धारित किया जाता है, मगर पांच साल पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सदन को आश्वासन दिया था कि एसवाईएल के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने मिलने का समय लिया जाएगा। अभी तक प्रधानमंत्री से समय नहीं मिला है। राजनीति से ऊपर उठकर सीएम, पीएम से मिलने का समय लें, सभी 90 विधायक पीएम से मिलेंगे और पीएम एसवाईएल निर्माण के लिए कस्सी चलाकर मोदी गारंटी दें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली : 2025 तक यमुना पर बनेगा चौथा रेलवे पुल</title>
		<link>https://livehalchal.com/d-42/544875</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 27 Feb 2024 05:50:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[यमुना]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर रेलवे ने गत वर्ष जून में यमुना पर नए पुल को बनाने के लिए टेंडर जारी किया था। इसका काम आवंटित हाे चुका है और निर्माण कार्य फिलहाल शुरुआती दौर में है। अधिकारियों ने बताया कि मार्च 2025 तक इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गाजियाबाद के बीच &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>उत्तर रेलवे ने गत वर्ष जून में यमुना पर नए पुल को बनाने के लिए टेंडर जारी किया था। इसका काम आवंटित हाे चुका है और निर्माण कार्य फिलहाल शुरुआती दौर में है। अधिकारियों ने बताया कि मार्च 2025 तक इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।</p>



<p>नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गाजियाबाद के बीच के रास्ते ट्रेन परिचालन को सुगम बनाने के लिए यमुना पर रेलवे का चौथा पुल बनाया जा रहा है। दावा है कि मार्च 2025 तक यह पुल बनकर तैयार हो जाएगा। इस के पुल के शुरू होने से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से आनंद विहार के रास्ते गाजियाबाद के बीच ट्रेनों परिचालन में सुधार आएगा और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से समय पर ट्रेनों की आवाजाही सुनिश्चित करने में काफी मदद मिलेगी।</p>



<p>दरअसल, उत्तर रेलवे ने गत वर्ष जून में यमुना पर नए पुल को बनाने के लिए टेंडर जारी किया था। इसका काम आवंटित हाे चुका है और निर्माण कार्य फिलहाल शुरुआती दौर में है। अधिकारियों ने बताया कि मार्च 2025 तक इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इस पुल से दिल्ली से यूपी के रास्ते बिहार-बंगाल जाने वाली ट्रेनों को गति दिया जाएगा। दिल्ली में यमुना पर वर्तमान में रेलवे के दो पुल पुराना लोहा पुल व तिलक ब्रिज पुल के माध्यम से ट्रेनों की आवाजाही होती है। पुरानी दिल्ली से शाहदरा के बीच पुराना लोहा पुल है। डेढ़ सौ वर्ष से अधिक पुराने इस पुल के समानांतर एक नया पुल बनाया जा रहा है। वहीं नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से गाजियाबाद जाने के लिए उपलब्ध पुल तिलक ब्रिज पर दो ट्रैक हैं। इन दोनों स्टेशनों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ने से ट्रैक बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसका काम चल रहा है। इस कारण नए पुल की जरूरत है।</p>



<p><strong>यात्रियों को मिलेगा लाभ</strong><br>रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, तिलक ब्रिज से आनंद बिहार के बीच तीसरी और चौथी लाइन तैयार होने के बाद गाजियाबाद की तरफ से आने वाली ट्रेनों का नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक पहुंचना आसान हो जाएगा। अभी ट्रेनों को सिग्नल नहीं मिलने के कारण अक्सर आउटर पर रुकना पड़ता है। इन लाइनों के बिछने के बाद ट्रेनों को आउटर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। इससे यात्रियों का समय बच सकेगा।&nbsp;</p>



<p>वहीं, इससे पहले नई दिल्ली और तिलक ब्रिज के बीच सिर्फ 4 लाइनें थीं, जो कि ट्रेनों के दबाव की तुलना में कम थी। इस कारण व्यस्त समय में आउटर पर तिलक ब्रिज या शिवाजी ब्रिज पर एक के पीछे एक ट्रेनों को रोकना पड़ता था, इस समस्या को दूर करने के लिए इन दोनों रेलवे स्टेशनों के बीच पांचवीं और छठी लाइन बिछाया गया। इन दोनों स्टेशन के बीच भी 2.65 किलोमीटर तक दो अतिरिक्त लाइन को शुरू कर दिया गया है।</p>



<p><strong>यमुना के 22 किलोमीटर के दायरे 25 पुल</strong><br>दिल्ली में यमुना के 22 किलोमीटर के हिस्से में चालू व निर्माणाधीन मिलाकर कुल 25 पुल हैं। जिसमें मेट्रो के चार चालू व एक निर्माणाधीन, आरआरटीएस का एक निर्माणाधीन, रेलवे के दो चालू व एक निर्माणाधीन पुल है। इसके अतिरिक्त 16 सड़क मार्ग के पुल हैं।</p>
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