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	<title>मौनी अमावस्या &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मौनी अमावस्या &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>मौनी अमावस्या पर बन रहे हैं ये शुभ योग, पंचांग से जानें आज का मुहूर्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 05:36:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मौनी अमावस्या]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="293" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213432.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213432.png 772w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213432-300x142.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213432-768x364.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन पर गंगा नदी में स्नान व दान करने का भी विशेष महत्व माना गया है। इससे साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। ऐसे में चलिए आज के पंचांग से जानते हैं कि आज के दिन कौन-कौन से शुभ मुहूर्त बन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="293" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213432.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213432.png 772w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213432-300x142.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213432-768x364.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन पर गंगा नदी में स्नान व दान करने का भी विशेष महत्व माना गया है। इससे साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। ऐसे में चलिए आज के पंचांग से जानते हैं कि आज के दिन कौन-कौन से शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।</p>



<p><strong>आज का पंचांग<br></strong>संवत – 2082</p>



<p>माघ माह की अमावस्या तिथि समाप्त – देर रात 1 बजकर 21 मिनट तक (19 जनवरी)</p>



<p>हर्षण योग – रात 9 बजकर 11 मिनट तक</p>



<p><strong>करण –<br></strong>चतुष्पद – दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक</p>



<p>नागव – देर रात 1 बजकर 21 मिनट तक (19 जनवरी)</p>



<p>वार – रविवार</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय – सुबह 7 बजकर 15 मिनट से</p>



<p>सूर्यास्त – शाम 5 बजकर 49 मिनट पर</p>



<p>चंद्रोदय का समय – चंद्रोदय नहीं होगा</p>



<p>चन्द्रास्त का समय – शाम 5 बजकर 20 मिनट पर</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक</p>



<p>अमृत काल – प्रातः 5 बजकर 2 मिनट से सुबह 6 बजकर 44 मिनट तक (19 जनवरी)</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल – शाम 4 बजकर 29 मिनट से शाम 5 बजकर 49 मिनट तक</p>



<p>गुलिकाल – दोपहर 3 बजकर 10 मिनट से शाम 4 बजकर 29 मिनट तक</p>



<p>यमगण्ड – दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से दोपहर 1 बजकर 51 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में रहेंगे।</p>



<p>पूर्वाषाढ़ नक्षत्र – सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक</p>



<p>सामान्य विशेषताएं – लोकप्रिय, धार्मिक, आध्यात्मिक, साहसी, हंसमुख, बुद्धिमान, सलाहकार, दयालु, उदार, वफादार मित्र, खतरनाक शत्रु, लंबा कद, यात्रा प्रिय और विलासिता</p>



<p>नक्षत्र स्वामी – शुक्र देव</p>



<p>राशि स्वामी – बृहस्पति देव</p>



<p>देवता – अपस (ब्रह्मांडीय महासागर)</p>



<p>प्रतीक – हाथी का दांत और पंखा</p>



<p><strong>आज मौनी अमावस्या है<br></strong>मौनी अमावस्या हर वर्ष माघ मास की अमावस्या को आती है और इसे विशेष रूप से संपूर्ण मौन और साधना का दिन माना जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन मौन रखते हैं और केवल शांतिपूर्ण कर्म और साधना में समय व्यतीत करते हैं। पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन किए गए व्रत, दान और तप से पाप नाश और आत्मशुद्धि होती है। मौनी अमावस्या पर श्रद्धालु भगवान शिव, सूर्य और पितरों के लिए विशेष प्रार्थना और पूजन करते हैं। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का अद्भुत अवसर है।</p>



<p><strong>मौनी अमावस्या व्रत की विधि<br></strong>दिन की शुरुआत पवित्र जल से स्नान करके करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।<br>पूरे दिन मौन रखें और अनावश्यक बोलचाल से बचें।<br>घर में साफ स्थान पर दीपक जलाएं और भगवान शिव या सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र रखें।<br>शिवलिंग या सूर्य देव को जल, अक्षत और फूल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” या सूर्य मंत्र का जाप करें।<br>अपनी श्रद्धा अनुसार अनाज, वस्त्र या धन का दान करें और पितरों के लिए तर्पण करें।<br>दिनभर मौन और साधना के बाद रात में या अगले दिन उपवास खोलें।</p>
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		<title>मौनी अमावस्या पर करें ये आरती, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 05:32:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मौनी अमावस्या]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213024.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213024.png 765w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213024-300x175.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या पूजा-पाठ के लिए सबसे पवित्र तिथियों में से एक है। आज मनाई जा रही इस अमावस्या का महत्व अन्य सभी अमावस्याओं से कहीं अधिक है। इस दिन मौन रहकर दान-स्नान करने का विधान तो है ही, साथ ही यह दिन पितरों को खुश करने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213024.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213024.png 765w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-213024-300x175.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या पूजा-पाठ के लिए सबसे पवित्र तिथियों में से एक है। आज मनाई जा रही इस अमावस्या का महत्व अन्य सभी अमावस्याओं से कहीं अधिक है। इस दिन मौन रहकर दान-स्नान करने का विधान तो है ही, साथ ही यह दिन पितरों को खुश करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए भी बहुत शुभ है।</p>



<p>ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर पितृ देव पृथ्वी लोक पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा के बाद भगवान विष्णु और पितृ देव की आरती करने से पितृ दोष शांत होता है और घर में खुशहाली आती है, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>।।पितृ देव की आरती ।।<br></strong>जय जय पितर जी महाराज,</p>



<p>मैं शरण पड़ा तुम्हारी,</p>



<p>शरण पड़ा हूं तुम्हारी देवा,</p>



<p>रख लेना लाज हमारी,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>आप ही रक्षक आप ही दाता,</p>



<p>आप ही खेवनहारे,</p>



<p>मैं मूरख हूं कछु नहिं जानू,</p>



<p>आप ही हो रखवारे,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,</p>



<p>करने मेरी रखवारी,</p>



<p>हम सब जन हैं शरण आपकी,</p>



<p>है ये अरज गुजारी,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>देश और परदेश सब जगह,</p>



<p>आप ही करो सहाई,</p>



<p>काम पड़े पर नाम आपके,</p>



<p>लगे बहुत सुखदाई,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>भक्त सभी हैं शरण आपकी,</p>



<p>अपने सहित परिवार,</p>



<p>रक्षा करो आप ही सबकी,</p>



<p>रहूं मैं बारम्बार,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>जय जय पितर जी महाराज,</p>



<p>मैं शरण पड़ा हू तुम्हारी,</p>



<p>शरण पड़ा हूं तुम्हारी देवा,</p>



<p>रखियो लाज हमारी,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p><strong>भगवान विष्णु की आरती<br></strong>ॐ जय जगदीश हरे आरती</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे,</p>



<p>स्वामी जय जगदीश हरे ।</p>



<p>भक्त जनों के संकट,</p>



<p>दास जनों के संकट,</p>



<p>क्षण में दूर करे ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>जो ध्यावे फल पावे,</p>



<p>दुःख बिनसे मन का,</p>



<p>स्वामी दुःख बिनसे मन का ।</p>



<p>सुख सम्पति घर आवे,</p>



<p>सुख सम्पति घर आवे,</p>



<p>कष्ट मिटे तन का ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>मात पिता तुम मेरे,</p>



<p>शरण गहूं किसकी,</p>



<p>स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।</p>



<p>तुम बिन और न दूजा,</p>



<p>तुम बिन और न दूजा,</p>



<p>आस करूं मैं जिसकी ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम पूरण परमात्मा,</p>



<p>तुम अन्तर्यामी,</p>



<p>स्वामी तुम अन्तर्यामी ।</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर,</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर,</p>



<p>तुम सब के स्वामी ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम करुणा के सागर,</p>



<p>तुम पालनकर्ता,</p>



<p>स्वामी तुम पालनकर्ता ।</p>



<p>मैं मूरख फलकामी,</p>



<p>मैं सेवक तुम स्वामी,</p>



<p>कृपा करो भर्ता॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम हो एक अगोचर,</p>



<p>सबके प्राणपति,</p>



<p>स्वामी सबके प्राणपति ।</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय,</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय,</p>



<p>तुमको मैं कुमति ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,</p>



<p>ठाकुर तुम मेरे,</p>



<p>स्वामी रक्षक तुम मेरे ।</p>



<p>अपने हाथ उठाओ,</p>



<p>अपने शरण लगाओ,</p>



<p>द्वार पड़ा तेरे ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>विषय-विकार मिटाओ,</p>



<p>पाप हरो देवा,</p>



<p>स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।</p>



<p>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,</p>



<p>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,</p>



<p>सन्तन की सेवा ॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे,</p>



<p>स्वामी जय जगदीश हरे ।</p>



<p>भक्त जनों के संकट,</p>



<p>दास जनों के संकट,</p>



<p>क्षण में दूर करे ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मौनी अमावस्या आज, इस विधि से करें पूजा, जानें क्या करें और क्या नहीं?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Jan 2026 05:28:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मौनी अमावस्या]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="311" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-212616.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-212616.png 769w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-212616-300x151.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज यानी 18 जनवरी 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मौनी अमावस्या मनाई जा रही है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की इस अमावस्या को हिंदू धर्म में सभी अमावस्याओं में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, विशेषकर प्रयागराज के संगम में स्नान करने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="311" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-212616.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-212616.png 769w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-17-212616-300x151.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज यानी 18 जनवरी 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मौनी अमावस्या मनाई जा रही है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की इस अमावस्या को हिंदू धर्म में सभी अमावस्याओं में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, विशेषकर प्रयागराज के संगम में स्नान करने से अक्षय पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। वहीं, इस दिन मौन रहकर साधना करने का बड़ा महत्व है, आइए इस आर्टिकल में इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>मौनी अमावस्या शुभ मुहूर्त<br></strong>हर्षण योग – रात 9 बजकर 11 मिनट तक<br>अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक<br>अमृत काल – सुबह 5 बजकर 2 मिनट से सुबह 6 बजकर 44 मिनट तक। (19 जनवरी)</p>



<p><strong>मौनी अमावस्या की पूजा विधि<br></strong>सुबह जल्दी उठें। अगर नदी पर जाना मुश्किल है, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें।<br>स्नान के बाद हाथ में जल लेकर दिन भर या कम से कम पूजा के समय तक मौन रहने का संकल्प लें।<br>तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और काले तिल डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।<br>भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाएं।<br>उन्हें पीले पुष्प, फल और तुलसी दल अर्पित करें।<br>यह पितरों का दिन भी है, इसलिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पूर्वजों के नाम से तिल और जल से तर्पण करें।<br>पूजा के बाद तिल, गुड़, कंबल, अन्न या वस्त्र का दान किसी जरूरतमंद को जरूर करें।</p>



<p><strong>क्या करें और क्या न करें?<br></strong>क्या करें – इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का ज्यादा से ज्यादा जप करें। साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।<br>क्या न करें – इस बार अमावस्या पर रविवार है, इसलिए पीपल और तुलसी के पौधे को भूलकर भी न छुएं, केवल दूर से प्रणाम व पूजा-पाठ करें। इसके अलावा तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें और किसी से वाद-विवाद न करें।</p>



<p><strong>मौनी अमावस्या के लाभ<br></strong>धार्मिक मान्यता है कि माघ अमावस्या पर स्वर्ग से देवता पवित्र नदियों में वास करते हैं। इस दिन किया गया दान सौ यज्ञों के समान शुभ फल देता है। वहीं, इस दिन मौन धारण करने से साधक की संकल्प शक्ति बढ़ती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>मौनी अमावस्या पर 3.50 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Jan 2026 05:37:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[मौनी अमावस्या]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="332" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-16-213457.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-16-213457.png 762w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-16-213457-300x161.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />मौनी अमावस्या पर साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना को देखते हुए मेला प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। मेले में एक अतिरिक्त स्नान घाट ‘काली पार्ट-दो’ का विस्तार किया गया है। लखनऊ और अयोध्या की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नागवासुकि क्षेत्र में ही स्नान की व्यवस्था की जा रही &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="332" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-16-213457.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-16-213457.png 762w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-16-213457-300x161.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मौनी अमावस्या पर साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान की संभावना को देखते हुए मेला प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। मेले में एक अतिरिक्त स्नान घाट ‘काली पार्ट-दो’ का विस्तार किया गया है। लखनऊ और अयोध्या की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नागवासुकि क्षेत्र में ही स्नान की व्यवस्था की जा रही है जिससे संगम क्षेत्र पर दबाव कम किया जा सके। शुक्रवार तड़के से ही स्नान का क्रम शुरू हो गया। संगम नोज के अलावा नैनी के अरैल, झूंसी और संगम क्षेत्र के प्रमुख स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।</p>



<p>एक अनुमान के अनुसार शुक्रवार को 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया, जबकि प्रशासन के मुताबिक देर शाम तक 25 से 30 लाख लोगों की मेला क्षेत्र में मौजूदगी दर्ज की गई। इसमें काफी संख्या में कल्पवासी भी शामिल रहे। मौनी अमावस्या के मुख्य स्नान पर्व को लेकर देश-विदेश से श्रद्धालुओं का प्रयागराज पहुंचने का सिलसिला जारी है। शनिवार और रविवार को अवकाश होने से भीड़ में इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।</p>



<p>मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि मेला क्षेत्र को नौ सर्किल में विभाजित किया गया है। भीड़ प्रबंधन के लिए 16 होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं और लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था की गई है। प्रमुख स्नान पर्व पर तीन से साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान करने की संभावना है। इस ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था, डायवर्जन, एआई आधारित सर्विलांस और भीड़ प्रबंधन को और मजबूत किया गया है।</p>



<p>इसके साथ ही जल यातायात योजना, रेडियो संचार, आपदा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, सॉफ्ट स्किल, पांटून पुल, अग्निशमन, सुरक्षा, अभिसूचना और साइबर अपराध से संबंधित योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>



<p><strong>अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग</strong></p>



<p>गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या ज्योतिष पीठम के निदेशक आचार्य विवेक उपाध्याय के अनुसार, इस बार मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसे अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। 17 जनवरी की रात 11:53 बजे से अमावस्या तिथि प्रारंभ होकर 18 जनवरी की रात 1:09 बजे तक रहेगी। इस अवधि में किया गया स्नान, व्रत, ध्यान, जप और हवन विशेष पुण्य फल प्रदान करने वाला माना गया है।</p>
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		<title>मौनी अमावस्या पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, पितरों को प्रसन्न करने का सबसे बड़ा अवसर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 05:02:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मौनी अमावस्या]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="359" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-205748.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-205748.png 765w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-205748-300x175.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन परंपरा में मौनी अमावस्या को आत्म शुद्धि, पितृ तर्पण और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। यह तिथि केवल अमावस्या मात्र नहीं, बल्कि विशेष ग्रह स्थितियों और काल संयोग के कारण दुर्लभ आध्यात्मिक योगों का निर्माण करती है। माघ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="359" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-205748.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-205748.png 765w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-205748-300x175.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन परंपरा में मौनी अमावस्या को आत्म शुद्धि, पितृ तर्पण और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। यह तिथि केवल अमावस्या मात्र नहीं, बल्कि विशेष ग्रह स्थितियों और काल संयोग के कारण दुर्लभ आध्यात्मिक योगों का निर्माण करती है।</p>



<p><strong>माघ मास और अमावस्या का विशेष संयोग<br></strong>मौनी अमावस्या माघ मास में पड़ती है, जिसे सनातन धर्म में पुण्य, तप और दान का श्रेष्ठ महीना माना गया है। माघ मास में अमावस्या का संयोग स्वयं में अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास में किया गया स्नान, दान और तर्पण कई जन्मों के पुण्य के समान फल देता है।</p>



<p>अमावस्या तिथि पितरों से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इस दिन पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व होता है। माघ मास की शुद्ध ऊर्जा और अमावस्या की तिथि मिलकर ऐसा योग बनाती है, जो साधक के भीतर संयम, श्रद्धा और आत्मिक शांति को मजबूत करता है। यही कारण है कि यह संयोग अत्यंत दुर्लभ माना गया है।</p>



<p><strong>उत्तरायण सूर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा<br></strong>मौनी अमावस्या 2026 मकर संक्रांति के बाद आती है, जब सूर्य उत्तरायण होते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन और प्रकाश वृद्धि का काल माना गया है। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण सूर्य के समय किए गए धार्मिक कर्म विशेष रूप से फलदायी होते हैं। इस अवधि में सूर्य की ऊर्जा साधक के भीतर आत्मबल और सकारात्मकता का संचार करती है।</p>



<p>मौनी अमावस्या पर उत्तरायण सूर्य का संयोग तप, जप और दान को कई गुना प्रभावशाली बनाता है। यही कारण है कि इस दिन गंगा स्नान, दान पुण्य और साधना का विशेष महत्व बताया गया है। उत्तरायण सूर्य और अमावस्या का यह दुर्लभ संयोग आत्म शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>



<p><strong>मौन व्रत और पितृ तर्पण से बनने वाला विशेष योग<br></strong>मौनी अमावस्या का प्रमुख महत्व मौन व्रत और पितृ तर्पण से जुड़ा माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन मौन का पालन करने से मन, वाणी और विचारों की शुद्धि होती है। मौन व्रत व्यक्ति को आत्मचिंतन और संयम की ओर प्रेरित करता है। साथ ही अमावस्या तिथि पितरों से जुड़ी होने के कारण इस दिन तर्पण और दान करने का विशेष फल बताया गया है।</p>



<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर श्रद्धा से किया गया तर्पण पितरों को तृप्त करता है और पितृ दोष में कमी लाने में सहायक माना जाता है। मौन व्रत और पितृ कर्म का यह संयोग साधक के भीतर शांति, संतुलन और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करता है, जिससे यह दिन आत्मिक साधना के लिए विशेष बन जाता है।</p>
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