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	<title>मोहिनी एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मोहिनी एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सभी पापों से चाहते हैं मुक्ति, तो मोहिनी एकादशी के दिन करें इस कथा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 05:16:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मोहिनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="368" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/88.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/88.jpg 827w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/88-300x179.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/88-768x458.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हर महीने में दो बार एकादशी व्रत किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस बार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="368" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/88.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/88.jpg 827w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/88-300x179.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/88-768x458.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हर महीने में दो बार एकादशी व्रत किया जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इस बार यह व्रत आज यानी 27 अप्रैल को किया जा रहा है।</p>



<p>इस दिन पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा बरसती है। अगर आप भी श्री हरि का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो मोहिनी एकादशी के दिन कथा का पाठ जरूर करें।</p>



<p><strong>मोहिनी एकादशी की कथा (Mohini Ekadashi Vrat Katha)<br></strong>पौराणिक कथा के अनुसार, सरस्वती नदी के पास के नगर था, जिसका नाम भद्रावती था। इस नगर के राजा का नाम धृतिमान था। इस नगर में एक धनी वैश्य धनपाल रहता था। वह बहुत परोपकारी और भगवान विष्णु भक्त था। उसके 5 पुत्र थे। सबसे छोटा बेटा धृष्टबुद्धि पापी था।</p>



<p>वह जुआ खेलता था। इस तरह से वह पिता की धन-संपत्ति को बर्बाद कर देता था। इस समस्या से परेशान होकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया। इसके बाद वह दर-दर भटकने लगा। उसके पास कुछ भी खाने के लिए नहीं था। वह चोरी करने लगा। राजा ने उसे कारागार में डाल दिया। बाद में उसे नगर से बाहर निकाल दिया गया।</p>



<p>एक बार वह जंगल में भटकते हुए कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम में पहुँचा। उसने ऋषि से अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए कोई उपाय पूछा। ऐसे में ऋषि कौण्डिन्य ने उसे वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। ऋषि ने कहा कि इस व्रत को करने से जन्म-जन्मांतर के सभी पाप नष्ट हो जाएंगे।</p>



<p>इसके बाद उसने विधिपूर्वक मोहिनी एकादशी व्रत किया। इस व्रत को करने से उसे सभी पापों से मुक्ति मिली और भगवान विष्णु के लोक ‘वैकुण्ठ’ को प्राप्त हुआ।</p>



<p><strong>विष्णु मंत्र</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li>ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु ।</li>
</ol>



<p>यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्”।।</p>



<ol start="2" class="wp-block-list">
<li>वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |</li>
</ol>



<p>पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी ।।</p>



<p>एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |</p>



<p>य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत।।</p>



<ol start="3" class="wp-block-list">
<li>ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||</li>
</ol>



<p>ॐ तत्पुरुषाय विद्&#x200d;महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु संग करें देवी एकादशी की आरती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 05:12:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मोहिनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-62.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-62.jpg 697w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-62-300x175.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />मोहिनी एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह विष्णु भगवान को समर्पित है, जो लोग इस व्रत को रखते हैं, उन्हें शुभ फलों की प्राप्ति होती है। एकादशी माह में दो बार शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में आती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह एकादशी (Mohini Ekadashi 2026) &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="361" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-62.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-62.jpg 697w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-62-300x175.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मोहिनी एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह विष्णु भगवान को समर्पित है, जो लोग इस व्रत को रखते हैं, उन्हें शुभ फलों की प्राप्ति होती है। एकादशी माह में दो बार शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में आती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह एकादशी (Mohini Ekadashi 2026) आज यानी 27 अप्रैल, 2026 को मनाई जा रही है।</p>



<p>ऐसा कहा जाता है कि जो साधक इस दिन भक्ति भाव के साथ पूजा करते हैं, उन्हें धन-वैभव और अपार यश की प्राप्ति होती है, तो आइए यहां श्री हरि की कृपा पाने के लिए उनकी भव्य आरती करते हैं, जो इस प्रकार है।</p>



<p><strong>॥भगवान विष्णु की आरती॥ (Lord Vishnu Aarti)<br></strong>ॐ जय जगदीश हरे आरती</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे,</p>



<p>स्वामी जय जगदीश हरे ।</p>



<p>भक्त जनों के संकट,</p>



<p>दास जनों के संकट,</p>



<p>क्षण में दूर करे ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>जो ध्यावे फल पावे,</p>



<p>दुःख बिनसे मन का,</p>



<p>स्वामी दुःख बिनसे मन का ।</p>



<p>सुख सम्पति घर आवे,</p>



<p>सुख सम्पति घर आवे,</p>



<p>कष्ट मिटे तन का ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>मात पिता तुम मेरे,</p>



<p>शरण गहूं किसकी,</p>



<p>स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।</p>



<p>तुम बिन और न दूजा,</p>



<p>तुम बिन और न दूजा,</p>



<p>आस करूं मैं जिसकी ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम पूरण परमात्मा,</p>



<p>तुम अन्तर्यामी,</p>



<p>स्वामी तुम अन्तर्यामी ।</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर,</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर,</p>



<p>तुम सब के स्वामी ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम करुणा के सागर,</p>



<p>तुम पालनकर्ता,</p>



<p>स्वामी तुम पालनकर्ता ।</p>



<p>मैं मूरख फलकामी,</p>



<p>मैं सेवक तुम स्वामी,</p>



<p>कृपा करो भर्ता॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम हो एक अगोचर,</p>



<p>सबके प्राणपति,</p>



<p>स्वामी सबके प्राणपति ।</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय,</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय,</p>



<p>तुमको मैं कुमति ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,</p>



<p>ठाकुर तुम मेरे,</p>



<p>स्वामी रक्षक तुम मेरे ।</p>



<p>अपने हाथ उठाओ,</p>



<p>अपने शरण लगाओ,</p>



<p>द्वार पड़ा तेरे ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>विषय-विकार मिटाओ,</p>



<p>पाप हरो देवा,</p>



<p>स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।</p>



<p>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,</p>



<p>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,</p>



<p>सन्तन की सेवा ॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे,</p>



<p>स्वामी जय जगदीश हरे ।</p>



<p>भक्त जनों के संकट,</p>



<p>दास जनों के संकट,</p>



<p>क्षण में दूर करे ॥</p>



<p><strong>॥एकादशी माता की आरती॥<br></strong>ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।</p>



<p>विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>तेरे नाम गिनाऊं देवी,भक्ति प्रदान करनी।</p>



<p>गण गौरव की देनी माता,शास्त्रों में वरनी॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना,विश्वतारनी जन्मी।</p>



<p>शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा,मुक्तिदाता बन आई॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>पौष के कृष्णपक्ष की,सफला नामक है।</p>



<p>शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा,आनन्द अधिक रहै॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>नाम षटतिला माघ मास में,कृष्णपक्ष आवै।</p>



<p>शुक्लपक्ष में जया, कहावै,विजय सदा पावै॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>विजया फागुन कृष्णपक्ष मेंशुक्ला आमलकी।</p>



<p>पापमोचनी कृष्ण पक्ष में,चैत्र महाबलि की॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>चैत्र शुक्ल में नाम कामदा,धन देने वाली।</p>



<p>नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में,वैसाख माह वाली॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>शुक्ल पक्ष में होयमोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।</p>



<p>नाम निर्जला सब सुख करनी,शुक्लपक्ष रखी॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>योगिनी नाम आषाढ में जानों,कृष्णपक्ष करनी।</p>



<p>देवशयनी नाम कहायो,शुक्लपक्ष धरनी॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>कामिका श्रावण मास में आवै,कृष्णपक्ष कहिए।</p>



<p>श्रावण शुक्ला होयपवित्रा आनन्द से रहिए॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की,परिवर्तिनी शुक्ला।</p>



<p>इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में,व्रत से भवसागर निकला॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में,आप हरनहारी।</p>



<p>रमा मास कार्तिक में आवै,सुखदायक भारी॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>देवोत्थानी शुक्लपक्ष की,दुखनाशक मैया।</p>



<p>पावन मास में करूंविनती पार करो नैया॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>परमा कृष्णपक्ष में होती,जन मंगल करनी।</p>



<p>शुक्ल मास में होयपद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>



<p>जो कोई आरती एकादशी की,भक्ति सहित गावै।</p>



<p>जन गुरदिता स्वर्ग का वासा,निश्चय वह पावै॥</p>



<p>ॐ जय एकादशी…॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>मोहिनी एकादशी पर करें ये काम, बनेंगे सभी बिगड़े काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 May 2025 04:43:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मोहिनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="552" height="381" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-149-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-149.jpg 552w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-149-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-149-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 552px) 100vw, 552px" />मोहिनी एकादशी का व्रत बेहद फलदायी माना जाता है। यह व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। इस साल यह व्रत (Mohini Ekadashi 2025 Date) 8 मई यानी आज के दिन रखा जा रहा है। ऐसे में इस दिन श्री राधा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="552" height="381" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-149-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-149.jpg 552w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-149-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-149-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 552px) 100vw, 552px" />
<p>मोहिनी एकादशी का व्रत बेहद फलदायी माना जाता है। यह व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। इस साल यह व्रत (Mohini Ekadashi 2025 Date) 8 मई यानी आज के दिन रखा जा रहा है। ऐसे में इस दिन श्री राधा कृष्ण अष्टकम का पाठ जरूर करें जो बहुत शुभ माना जाता है।</p>



<p>वैशाख मास के शुक्ल पक्ष को आने वाली एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की मोहिनी रूप की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने सभी कष्टों से मुक्ति मिलती और जीवन में सुखों का आगमन होता है। वहीं, इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा भी होती है।</p>



<p>ऐसे में इस दिन (Mohini Ekadashi Vrat 2025) ”श्री राधा कृष्ण अष्टकम” का पाठ जरूर करें। यह परम फलदायी माना गया है, आइए इसका पाठ करते हैं।</p>



<p><strong>।।श्री राधा कृष्ण अष्टकम।। (Shri Radha Krishna Stotra)</strong></p>



<p>चथुर मुखाधि संस्थुथं, समास्थ स्थ्वथोनुथं ।<br>हलौधधि सयुथं, नमामि रधिकधिपं ॥<br>भकाधि दैथ्य कालकं, सगोपगोपिपलकं ।<br>मनोहरसि थालकं, नमामि रधिकधिपं ॥<br>सुरेन्द्र गर्व बन्जनं, विरिञ्चि मोह बन्जनं ।<br>वृजङ्ग ननु रञ्जनं, नमामि रधिकधिपं ॥<br>मयूर पिञ्च मण्डनं, गजेन्द्र दण्ड गन्दनं ।<br>नृशंस कंस दण्डनं, नमामि रधिकधिपं ॥<br>प्रदथ विप्रदरकं, सुधमधम कारकं ।<br>सुरद्रुमपःअरकं, नमामि रधिकधिपं ॥<br>दानन्जय जयपाहं, महा चमूक्षयवाहं ।<br>इथमहव्यधपहम्, नमामि रधिकधिपं ॥<br>मुनीन्द्र सप करणं, यदुप्रजप हरिणं ।<br>धरभरवत्हरणं, नमामि रधिकधिपं ॥<br>सुवृक्ष मूल सयिनं, मृगारि मोक्षधयिनं ।<br>श्र्वकीयधमययिनम्, नमामि रधिकधिपं ॥</p>



<p><strong>।।श्री राधा कृष्ण स्तोत्र।।<br></strong>वन्दे नवघनश्यामं पीतकौशेयवाससम् ।<br>सानन्दं सुन्दरं शुद्धं श्रीकृष्णं प्रकृतेः परम् ॥<br>राधेशं राधिकाप्राणवल्लभं वल्लवीसुतम् ।<br>राधासेवितपादाब्जं राधावक्षस्थलस्थितम् ॥<br>राधानुगं राधिकेष्टं राधापहृतमानसम् ।<br>राधाधारं भवाधारं सर्वाधारं नमामि तम् ॥<br>राधाहृत्पद्ममध्ये च वसन्तं सन्ततं शुभम् ।<br>राधासहचरं शश्वत् राधाज्ञापरिपालकम् ॥<br>ध्यायन्ते योगिनो योगान् सिद्धाः सिद्धेश्वराश्च यम् ।<br>तं ध्यायेत् सततं शुद्धं भगवन्तं सनातनम् ॥<br>निर्लिप्तं च निरीहं च परमात्मानमीश्वरम् ।<br>नित्यं सत्यं च परमं भगवन्तं सनातनम् ॥<br>यः सृष्टेरादिभूतं च सर्वबीजं परात्परम् ।<br>योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ॥<br>बीजं नानावताराणां सर्वकारणकारणम् ।<br>वेदवेद्यं वेदबीजं वेदकारणकारणम् ॥<br>योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम् ।<br>गन्धर्वेण कृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।<br>इहैव जीवन्मुक्तश्च परं याति परां गतिम् ॥<br>हरिभक्तिं हरेर्दास्यं गोलोकं च निरामयम् ।<br>पार्षदप्रवरत्वं च लभते नात्र संशयः ॥</p>
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		<title>मोहिनी एकादशी पर अभी से नोट कर लें पारण का समय और इसकी विधि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 May 2025 08:36:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मोहिनी एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="437" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-117-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-117.jpg 753w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-117-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />एकादशी व्रत की तरह ही उसका सही तरीके से पारण करना भी जरूरी माना गया है तभी आपको उसका पूरा फल मिल सकता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आप किस तरह मोहिनी एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं ताकि आपको भगवान विष्णु और माता की असीम कृपा कि प्राप्ति हो सके। वैशाख &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="437" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-117-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-117.jpg 753w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-117-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>एकादशी व्रत की तरह ही उसका सही तरीके से पारण करना भी जरूरी माना गया है तभी आपको उसका पूरा फल मिल सकता है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आप किस तरह मोहिनी एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं ताकि आपको भगवान विष्णु और माता की असीम कृपा कि प्राप्ति हो सके।</p>



<p>वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि अगर एकादशी व्रत का पारण सही तरीके से किया जाए, तो साधक को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।</p>



<p><strong>मोहिनी एकादशी मुहूर्त<br></strong>वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 7 मई को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 8 मई को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर होगा। उदयातिथि में मोहिनी एकादशी का व्रत गुरुवार 8 मई को किया जाएगा। मोहिनी व्रत के पारण का समय कुछ इस प्रकार रहेगा –</p>



<p><strong>पारण का समय –</strong>&nbsp;9 मई प्रातः 5 बजकर 34 मिनट से सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक</p>



<p><strong>एकादशी व्रत पारण विधि (Ekadashi Vrat Parana vidhi)</strong><br>एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद किया जाता है। व्रत का पारण करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत हो और सूर्य देव को जल अर्पित करें।</p>



<p><strong>इसके बाद भगवान गणेश की पूजा-</strong>अर्चना करें फिर विधिवत रूप से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें। इसके बाद अपने मुंह में तुलसी का पत्ता रखकर एकादशी व्रत का पारण करें। इस बात का खासतौर से ध्यान रखें कि पारण के दिन केवल सात्विक भोजन ही खाना चाहिए।</p>



<p><strong>इन नियमों का रखें ख्याल</strong><br>एकादशी व्रत के पारण के दौरान मूली, बैंगन, साग, मसूर दाल, लहसुन-प्याज आदि का सेवन करना वर्जित माना जाता है। साथ ही इस दिन पर अपनी क्षमता के अनुसार, ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। साथ ही किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराकर अपने व्रत का पारण करना भी शुभ फलदायी माना जाता है।</p>



<p><strong>विष्णु जी के मंत्र (Lord Vishnu Mantra)</strong><br>ॐ नमोः नारायणाय॥<br>ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥<br>विष्णु गायत्री मंत्र –<br>ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि।<br>तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥<br>मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः।<br>मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥<br>शांताकारम भुजङ्गशयनम पद्मनाभं सुरेशम।<br>विश्वाधारं गगनसद्र्श्यं मेघवर्णम शुभांगम।<br>लक्ष्मी कान्तं कमल नयनम योगिभिर्ध्यान नग्म्य्म।<br>वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम।</p>
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		<title>कब है मोहिनी एकादशी और सीता नवमी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 May 2025 08:42:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="392" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-92-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-92.jpg 758w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-92-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैशाख माह में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीहरि की उपासना करने से जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार मई के नए सप्ताह में कई व्रत और पर्व मनाए जाएंगे। आइए जानते हैं इस सप्ताह के त्योहार की लिस्ट। अब जल्द &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="392" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-92-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-92.jpg 758w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-92-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैशाख माह में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीहरि की उपासना करने से जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार मई के नए सप्ताह में कई व्रत और पर्व मनाए जाएंगे। आइए जानते हैं इस सप्ताह के त्योहार की लिस्ट।</p>



<p>अब जल्द ही मई के नए सप्ताह की शुरुआत होने जा रही है। धार्मिक दृष्टि के अनुसार, इस सप्ताह को अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस सप्ताह में मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) और सीता नवमी समेत कई व्रत और पर्व मनाए जाएंगे। आइए जानते हैं कि इस सप्ताह के व्रत-त्योहारों (Weekly Vrat Tyohar 2025) की डेट और शुभ मुहूर्त के बारे में।</p>



<p><strong>कब है सीता नवमी? (Sita Navami 2025 Date And Shubh Muhurat)<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 5 मई को सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 6 मई को सुबह 8 बजकर 38 मिनट पर होगा। ऐसे में 5 मई को सीता नवमी मनाई जाएगी। इस दिन बगलामुखी जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी भी मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>मोहिनी एकादशी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Mohini Ekadashi 2025 Date and Shubh Muhurat)<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 07 मई को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 08 मई को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर होगा। इस प्रकार 08 मई को मोहिनी एकादशी मनाई जाएगी। इसी दिन परशुराम द्वादशी मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>कब है प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2025 Date)<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 9 मई को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 10 मई को शाम को 5 बजकर 29 मिनट पर तिथि खत्म होगी। ऐसे में प्रदोष व्रत 9 मई को किया जाएगा।</p>



<p><strong>कब है नरसिंह जयंती? (Narasimha Jayanti 2025 Shubh Muhurat)<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 10 मई को शाम 05 बजकर 29 मिनट पर होगी और गए अगले दिन 11 मई को रात 09 बजकर 19 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में 11 मई को नरसिंह जयंती मनाई जाएगी। इसी दिन छिन्नमस्ता जयंती भी मनाई जाएगी।</p>
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