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	<title>मोदी को मात देने के लिए अखिलेश बनेंगे जूनियर पार्टनर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>मोदी को मात देने के लिए अखिलेश बनेंगे जूनियर पार्टनर, सीटें &#8216;कुर्बान&#8217; करने को भी तैयार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[somali sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 Jun 2018 06:29:16 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[मोदी को मात देने के लिए अखिलेश बनेंगे जूनियर पार्टनर]]></category>
		<category><![CDATA[सीटें 'कुर्बान' करने को भी तैयार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को 2019 में मात देने के लिए सपा किसी भी सूरत में बसपा का साथ नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि सपा यूपी में बसपा की जूनियर पार्टनर बनने को भी तैयार है. 2019 लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती का दबाव काम आने लगा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को मैनपुरी में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गठबंधन के लिए वह त्याग को तैयार हैं और अगर उन्हें गठबंधन करने के लिए दो-चार सीटें कम पर भी समझौता करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेंगे. बता दें कि मायावती ने कैराना लोकसभा उपचुनाव के पहले साफ कर दिया था कि अगर उन्हें सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी. मायावती के इस बयान को राजनीतिक तौर पर एक बड़े बयान के तौर पर देखा जा रहा था, जिसमें उन्हें बड़ा पार्टनर मानने की एक जिद निहित थी. मैनपुरी में अखिलेश यादव ने एक बार फिर गठबंधन के लिए मायावती के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं और त्याग के नाम पर उन्होंने मायावती को बड़े पार्टनर के तौर पर मंजूर भी कर लिया है. अब देखना यह है अखिलेश यादव के लगभग जूनियर पार्टनर बनने के लिए तैयार हो जाने के बाद कितनी सीटों पर दोनों पार्टियों के बीच समझौता होता है. गौरतलब है कि यूपी में कुल 80 संसदीय सीटें है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में बीजेपी गठबंधन ने 73 सीटों पर जीत हासिल की थी. सपा को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थी.  जबकि बसपा का खाता भी नहीं खुला था. इसी तरह से पिछले साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव में सपा ने बसपा से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही थी. हालांकि इन चुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थी. फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव में सपा को बसपा ने समर्थन किया था. इसका नतीजा था कि बीजेपी को करारी हार मिली. इसके बाद से दोनों पार्टियां के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं. यही वजह है कि अखिलेश यादव बसपा का साथ किसी भी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं है." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347.jpeg 618w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को 2019 में मात देने के लिए सपा किसी भी सूरत में बसपा का साथ नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि सपा यूपी में बसपा की जूनियर पार्टनर बनने को भी तैयार है. 2019 लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती का दबाव काम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को 2019 में मात देने के लिए सपा किसी भी सूरत में बसपा का साथ नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि सपा यूपी में बसपा की जूनियर पार्टनर बनने को भी तैयार है. 2019 लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती का दबाव काम आने लगा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को मैनपुरी में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गठबंधन के लिए वह त्याग को तैयार हैं और अगर उन्हें गठबंधन करने के लिए दो-चार सीटें कम पर भी समझौता करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेंगे. बता दें कि मायावती ने कैराना लोकसभा उपचुनाव के पहले साफ कर दिया था कि अगर उन्हें सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी. मायावती के इस बयान को राजनीतिक तौर पर एक बड़े बयान के तौर पर देखा जा रहा था, जिसमें उन्हें बड़ा पार्टनर मानने की एक जिद निहित थी. मैनपुरी में अखिलेश यादव ने एक बार फिर गठबंधन के लिए मायावती के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं और त्याग के नाम पर उन्होंने मायावती को बड़े पार्टनर के तौर पर मंजूर भी कर लिया है. अब देखना यह है अखिलेश यादव के लगभग जूनियर पार्टनर बनने के लिए तैयार हो जाने के बाद कितनी सीटों पर दोनों पार्टियों के बीच समझौता होता है. गौरतलब है कि यूपी में कुल 80 संसदीय सीटें है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में बीजेपी गठबंधन ने 73 सीटों पर जीत हासिल की थी. सपा को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थी.  जबकि बसपा का खाता भी नहीं खुला था. इसी तरह से पिछले साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव में सपा ने बसपा से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही थी. हालांकि इन चुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थी. फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव में सपा को बसपा ने समर्थन किया था. इसका नतीजा था कि बीजेपी को करारी हार मिली. इसके बाद से दोनों पार्टियां के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं. यही वजह है कि अखिलेश यादव बसपा का साथ किसी भी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं है." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347.jpeg 618w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को 2019 में मात देने के लिए सपा किसी भी सूरत में बसपा का साथ नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि सपा यूपी में बसपा की जूनियर पार्टनर बनने को भी तैयार है.<img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-143870" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347.jpeg" alt="नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी को 2019 में मात देने के लिए सपा किसी भी सूरत में बसपा का साथ नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि सपा यूपी में बसपा की जूनियर पार्टनर बनने को भी तैयार है.  2019 लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती का दबाव काम आने लगा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को मैनपुरी में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गठबंधन के लिए वह त्याग को तैयार हैं और अगर उन्हें गठबंधन करने के लिए दो-चार सीटें कम पर भी समझौता करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेंगे.  बता दें कि मायावती ने कैराना लोकसभा उपचुनाव के पहले साफ कर दिया था कि अगर उन्हें सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी. मायावती के इस बयान को राजनीतिक तौर पर एक बड़े बयान के तौर पर देखा जा रहा था, जिसमें उन्हें बड़ा पार्टनर मानने की एक जिद निहित थी.  मैनपुरी में अखिलेश यादव ने एक बार फिर गठबंधन के लिए मायावती के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं और त्याग के नाम पर उन्होंने मायावती को बड़े पार्टनर के तौर पर मंजूर भी कर लिया है. अब देखना यह है अखिलेश यादव के लगभग जूनियर पार्टनर बनने के लिए तैयार हो जाने के बाद कितनी सीटों पर दोनों पार्टियों के बीच समझौता होता है.  गौरतलब है कि यूपी में कुल 80 संसदीय सीटें है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में बीजेपी गठबंधन ने 73 सीटों पर जीत हासिल की थी. सपा को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थी.  जबकि बसपा का खाता भी नहीं खुला था. इसी तरह से पिछले साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव में सपा ने बसपा से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही थी. हालांकि इन चुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थी.  फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव में सपा को बसपा ने समर्थन किया था. इसका नतीजा था कि बीजेपी को करारी हार मिली. इसके बाद से दोनों पार्टियां के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं. यही वजह है कि अखिलेश यादव बसपा का साथ किसी भी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं है." width="618" height="347" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347.jpeg 618w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/ahilesh_yadav_mayawati_1528682809_618x347-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /></strong></p>
<p><strong>2019 लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती का दबाव काम आने लगा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को मैनपुरी में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गठबंधन के लिए वह त्याग को तैयार हैं और अगर उन्हें गठबंधन करने के लिए दो-चार सीटें कम पर भी समझौता करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटेंगे.</strong></p>
<p><strong>बता दें कि मायावती ने कैराना लोकसभा उपचुनाव के पहले साफ कर दिया था कि अगर उन्हें सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी. मायावती के इस बयान को राजनीतिक तौर पर एक बड़े बयान के तौर पर देखा जा रहा था, जिसमें उन्हें बड़ा पार्टनर मानने की एक जिद निहित थी.</strong></p>
<p><strong>मैनपुरी में अखिलेश यादव ने एक बार फिर गठबंधन के लिए मायावती के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं और त्याग के नाम पर उन्होंने मायावती को बड़े पार्टनर के तौर पर मंजूर भी कर लिया है. अब देखना यह है अखिलेश यादव के लगभग जूनियर पार्टनर बनने के लिए तैयार हो जाने के बाद कितनी सीटों पर दोनों पार्टियों के बीच समझौता होता है.</strong></p>
<p><strong>गौरतलब है कि यूपी में कुल 80 संसदीय सीटें है. 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में बीजेपी गठबंधन ने 73 सीटों पर जीत हासिल की थी. सपा को 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थी.  जबकि बसपा का खाता भी नहीं खुला था. इसी तरह से पिछले साल हुए यूपी विधानसभा चुनाव में सपा ने बसपा से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही थी. हालांकि इन चुनावों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थी.</strong></p>
<p><strong>फूलपुर-गोरखपुर उपचुनाव में सपा को बसपा ने समर्थन किया था. इसका नतीजा था कि बीजेपी को करारी हार मिली. इसके बाद से दोनों पार्टियां के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं. यही वजह है कि अखिलेश यादव बसपा का साथ किसी भी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं है.</strong></p>
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