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	<title>मिडिल ईस्ट &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मिडिल ईस्ट &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>48 घंटे में सीजफायर की धमकी पर ट्रंप को ईरान ने उसी की भाषा में दिया जवाब</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 06:44:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बार-बार ईरान को धमकी दे रहे हैं कि वो अपना हथियार डाल डे और होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे। लेकिन ईरान न तो सीजफायर के लिए तैयार हो रहा है और न ही होर्मुज खोलने के लिए। ट्रंप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बार-बार ईरान को धमकी दे रहे हैं कि वो अपना हथियार डाल डे और होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे। लेकिन ईरान न तो सीजफायर के लिए तैयार हो रहा है और न ही होर्मुज खोलने के लिए।</p>



<p>ट्रंप ने धमकी दी कि ईरान के पास समझौता करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 48 घंटे का वक्त बचा है, वरना उस पर भीषण हमला होगा और पूरे ईरान को नरक कर देंगे। ट्रंप की इस धमकी को ईरान ने एक असहाय, घबराहटपूर्ण, बेतूका और बेवकूफी भरी कार्रवाई बताया।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अमेरिका के लिए खुल जाएंगे नरक के द्वार</h2>



<p>ट्रंप के 48 घंटों के भीतर शांति समझौता न होने पर तेहरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की बात को ईरान ने मूर्खतापूर्ण बताया। ईरानी जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने ट्रंप की भाषा में ही चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान पर हमला हुआ, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के लिए &#8220;नरक के द्वार&#8221; खुल जाएंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की धमकी</h2>



<p>फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरानी जनरल अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर अमेरिका या इजरायल द्वारा किए गए किसी भी हमले के जवाब में पश्चिम एशिया में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी हमलों से दिया जाएगा।</p>



<p>अब्दोल्लाही ने कहा, &#8220;लगातार हार स्वीकार करने के बाद, अमेरिका के आक्रामक और युद्धप्रिय राष्ट्रपति ने एक हताश, घबराए हुए, असंतुलित और मूर्खतापूर्ण कदम में ईरान के बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय संपत्तियों को निशाना बनाने की धमकी दी है।&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading">पलभर भी नहीं करेंगे संकोच</h2>



<p>अब्दोल्लाही ने कहा कि अगर अमेरिका-इजरायल ईरान पर हमला करते हैं तो ईरानी सशस्त्र बल देश के अधिकारों की रक्षा करने और राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा करने में एक पल के लिए भी संकोच नहीं करेंगे और आक्रमणकारियों को उनकी औकात दिखा देंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">और भीषण हो सकता है युद्ध</h2>



<p>गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने 48 घंटे वाली धमकी से पहले 26 मार्च को ईरान को 10 दिन की समय सीमा दी थी। 6 अप्रैल को इसकी समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को अल्टीमेट दिया है। ऐसे में डेडलाइन खत्म होने तक अगर ईरान समझौता नहीं करता है और अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा। इससे होर्मुज स्ट्रेट समेत पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध और अधिक भीषण हो सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>कैसे रुकेगा मिडिल ईस्ट का महासंग्राम? अमेरिका के सामने कौन-कौन सी शर्त रखेगा ईरान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 05:52:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने बातचीत को लेकर अपना रुख और कड़ा कर लिया है। ईरान इस युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी शर्तें रख सकता है। तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शांति वार्ता की दिशा में कोई भी कदम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने बातचीत को लेकर अपना रुख और कड़ा कर लिया है। ईरान इस युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी शर्तें रख सकता है।</p>



<p>तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शांति वार्ता की दिशा में कोई भी कदम वॉशिंगटन की ओर से बड़ी रियायतों पर निर्भर करेगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अमेरिका के आगे ये शर्त रखेगा ईरान</h3>



<p>न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने तीन वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान की मांगें शायद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को मंजूर न हों।</p>



<p>ईरान के इस युद्ध को रोकने का मुख्य आधार यह है कि किसी भी बातचीत से पहले युद्ध खत्म होना चाहिए।<br>इसके साथ ही भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के न होने की गारंटी मिलनी चाहिए।<br>ईरान को युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा भी मिलना चाहिए।<br>ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण &#8216;स्ट्रेट ऑफ होर्मुज&#8217; पर औपचारिक नियंत्रण भी सुनिश्चित करना चाहता है।</p>



<p>ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी एक स्पष्ट रेड लाइन तय कर दी है और इस पर किसी भी तरह की पाबंदी पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ट्रंप के बातचीत के दावे को ईरान ने कर दिया था खारिज</h3>



<p>सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि युद्ध शुरू होने बाद से पहली बार अमेरिका और ईरान के बीच बहुत मजबूत बातचीत हुई है। ट्रंप के इस दावे को ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया और ऐसी किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया।</p>



<p>रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के उन तीन सूत्रों ने बताया कि ईरान ने केवल मध्यस्थों (जैसे पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र) के साथ शुरुआती चर्चा की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिका-इजरायल के सार्थक बातचीत के लिए माहौल है या नहीं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">पाकिस्तान में हो सकती है शांति वार्ता</h3>



<p>पाकिस्तान के अलग-अलग सूत्रों ने संकेत दिया है कि युद्ध खत्म करने के लिए सीधी बातचीत इस हफ्ते के आखिर में इस्लामाबाद में हो सकती है।</p>



<p>अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बातचीत होती है तो ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हो सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला लेने का अधिकार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पास ही होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और&#8230; मिडिल ईस्ट में ईरान ने अमेरिका को पहुंचाया कितना नुकसान?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 07:18:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;28 फरवरी, 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुई जंग अभी भी जारी है, जिसकी चपेट में पूरा मिडिल ईस्ट है। एक तरफ जहां अमेरिका-इजरायल मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं तो ईरान भी करारा जवाब दे रहा है। इस बीच एक रिपोर्ट आई है, जिसमें मिडिल ईस्ट के अंदर अमेरिका को &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>&nbsp;28 फरवरी, 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुई जंग अभी भी जारी है, जिसकी चपेट में पूरा मिडिल ईस्ट है। एक तरफ जहां अमेरिका-इजरायल मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं तो ईरान भी करारा जवाब दे रहा है। इस बीच एक रिपोर्ट आई है, जिसमें मिडिल ईस्ट के अंदर अमेरिका को हुए नुकसान का आंकलन किया गया है।</p>



<p>बीबीसी के एक विश्लेषण के अनुसार,&nbsp;मिडिल ईस्ट में अमेरिका द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सैन्य ठिकानों पर ईरान के हवाई हमलों से युद्ध के पहले दो हफ्तों में 800 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 75 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">विश्लेषण में क्या सामने निकलकर आया?</h2>



<p>अमेरिका स्थित थिंक टैंक &#8216;सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज&#8217; की एक रिपोर्ट और बीबीसी के विश्लेषण से पता चला है कि इस नुकसान का अधिकांश हिस्सा तेहरान के उन जवाबी हमलों के कारण हुआ, जो 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा समन्वित हवाई हमले किए जाने के बाद के सप्ताह में किए गए थे।</p>



<p>हालांकि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी संपत्तियों को हुए नुकसान का पूरा पैमाना अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन 800 मिलियन डॉलर का आंकड़ा इस बात का अंदाजा देता है कि एक लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की अमेरिका को क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">&#8216;अंदाज से ज्यादा हो सकता है नुकसान&#8217;</h2>



<p>CSIS स्टडी के सह-लेखक मार्क कैन्सियन के हवाले से बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है, &#8220;इस इलाके में यूएस के ठिकानों को हुए नुकसान के बारे में कम बताया गया है। हालांकि यह नुकसान काफी ज्यादा लग रहा है, लेकिन जब तक और जानकारी नहीं मिल जाती तब तक नुकसान की पूरी जानकारी नहीं मिल पाएगी।&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading">अमेरिकी ठिकानों को ईरान ने बनाया निशाना</h2>



<p>ईरान ने जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी के अन्य देशों में अमेरिका के हवाई-रक्षा और सैटेलाइट-संचार सिस्टम को निशाना बनाया है। जॉर्डन में एक अमेरिकी हवाई अड्डे पर मौजूद टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम के रडार को भारी नुकसान पहुंचा है। रक्षा विभाग के बजट दस्तावेजों की CSIS समीक्षा के अनुसार, इस रडार सिस्टम की कीमत लगभग 485 मिलियन डॉलर है।</p>



<p>एक अध्ययन में पाया गया है कि मध्य पूर्व में अमेरिकी हवाई अड्डों पर इमारतों और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण वॉशिंगटन डीसी को अनुमानित तौर पर 310 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त नुकसान हुआ है।</p>



<p>बीबीसी की सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से पता चला है कि ईरान ने कम से कम तीन एयर बेस पर एक से ज्यादा बार हमला किया। सैटेलाइट तस्वीरों में कुवैत का अली अल-सलीम बेस, कतर का अल-उदीद और सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान बेस दिखाई दे रहा है, जिन पर संघर्ष के अलग-अलग चरणों में नया नुकसान हुआ है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मरने वालों की संख्या 3 हजार पार</h2>



<p>युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने भी अपने 13 सैन्य कर्मियों को खो दिया है और अमेरिका स्थित &#8216;ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी&#8217; का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या लगभग 3,200 तक पहुंच गई है, जिनमें से 1,400 आम नागरिक हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>गैस फील्ड पर हमले को लेकर ट्रंप-नेतन्याहू में दरार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Mar 2026 07:32:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160;मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। हाल ही में इजरायल ने ईरान के महत्वपूर्ण साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला किया। जिसके बाद से ईरान इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों में ऊर्जा संयत्रों पर हमले कर रहा है। इसका खामियाजा भारत, चीन समेत दुनिया के कई देशों को भुगतना पड़ सकता है। मिडिल ईस्ट &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>&nbsp;मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। हाल ही में इजरायल ने ईरान के महत्वपूर्ण साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमला किया। जिसके बाद से ईरान इजरायल के साथ-साथ खाड़ी देशों में ऊर्जा संयत्रों पर हमले कर रहा है। इसका खामियाजा भारत, चीन समेत दुनिया के कई देशों को भुगतना पड़ सकता है।</p>



<p>मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बड़ा मतभेद खुलकर सामने आए हैं। ईरान के साउथ पार्स गैस पर हुए हमले को लेकर ट्रंप ने कहा कि मैनें इजरायल से ऐसा न करने के लिए कहा था।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मैनें ऐसा नहीं करने के लिए कहा था-</h2>



<p>दरअसल, ईरान के साउथ पार्स गैस पर इजरायल द्वारा किए हमले के बाद ईरान भी खाड़ी देशों के ईधन वाले जगहों को निशाना बना रहा है। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि वह ईरान की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा संपत्ति मानी जाने वाली जगह पर इजरायल के हमले का समर्थन नहीं करते हैं। ट्रंप ने कहा कि मैनें इजरायल से ऐसा न करने के लिए कहा था।</p>



<p>गौरतलब है कि इजरायल द्वारा गैस क्षेत्र पर किए गए हमले ने ईरान के जवाबी हमलों को जन्म दिया है। जिसके कारण वैश्विक ऊर्जा की कीमतें और अधिक बढ़ गईं हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाई को रोकने के लिए खाड़ी देशों ने ट्रंप ने नेतन्याहू पर लगाम लगाने का आग्रह किया।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कभी-कभी वह कुछ ऐसा कर देते हैं जो मुझे पसंद नहीं आता&#8230;</h2>



<p>ओवल ऑफिस में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ हुई बैठक के दौरान नेतन्याहू के फैसले के बारे में कहा,&nbsp;&#8220;मैंने उनसे कहा, ऐसा मत करो। हमारा तालमेल बहुत अच्छा है। सब कुछ समन्वित है, लेकिन कभी-कभी वह कुछ ऐसा कर देते हैं जो मुझे पसंद नहीं आता। और अगर मुझे वह पसंद नहीं आता, तो हम अब ऐसा नहीं करते।&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading">नेतन्याहू ने मतभेद को नकारा</h2>



<p>हालांकि, इजरायली पीएम नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ चल रहे मतभेद वाली बात को नकार दिया और कहा कि इजरायल ने ईरान के गैस क्षेत्र पर आगे के हमलों से बचने के लिए ट्रंप के अनुरोध को मान लिया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मिडिल ईस्ट में जंग से टूटी पाकिस्तान की कमर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Mar 2026 08:34:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[पाकिस्तान ने 23 मार्च को गणतंत्र दिवस के मौके पर निर्धारित सैन्य परेड और सभी औपचारिक समारोह रद कर दिए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय ने मंगलवार को यह घोषणा की। फैसला अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण उत्पन्न खाड़ी तेल संकट के चलते लिया गया है। सरल साधारण झंडा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>पाकिस्तान ने 23 मार्च को गणतंत्र दिवस के मौके पर निर्धारित सैन्य परेड और सभी औपचारिक समारोह रद कर दिए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय ने मंगलवार को यह घोषणा की। फैसला अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण उत्पन्न खाड़ी तेल संकट के चलते लिया गया है।</p>



<p><strong>सरल साधारण झंडा फहराने का समारोह<br></strong>सरकारी ने एक बयान में कहा कि खाड़ी तेल संकट और सरकार द्वारा घोषित कठोर उपायों को देखते हुए यह तय किया गया है कि 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस परेड और इससे जुड़े सभी समारोह नहीं होंगे। इसके स्थान पर केवल एक साधारण झंडा फहराने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।</p>



<p>बयान में आगे निर्देश दिया गया है कि सभी मंत्रालयों, विभागों और इकाइयों को इस अवसर को सादगी और गरिमा के साथ मनाने का आदेश दिया जाता है, ताकि सीमित समारोहों के बावजूद दिन का महत्व और उसका सच्चा संदेश बरकरार रहे।</p>



<p><strong>युद्ध के कारण बढ़ा ईंधन संकट<br></strong>मार्च में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध से उपजे गंभीर ईंधन संकट और आर्थिक अस्थिरता से निपटने के लिए व्यापक कठोर उपायों की घोषणा की थी। इन आपातकालीन कदमों का मकसद सरकारी खर्च को तेजी से कम करना और ऊर्जा बचाना है, क्योंकि वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू रही हैं।</p>



<p>युद्ध शुरू हुए दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है। इस दौरान ईरान ने खाड़ी में कई जहाजों पर हमला किया, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद हो गया है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के पांचवें हिस्से के कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का मुख्य मार्ग है।</p>



<p>पाकिस्तान खाड़ी देशों से आयातित कच्चे तेल और शुद्ध ईंधन पर पूरी तरह निर्भर है, जो ज्यादातर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है।</p>



<p><strong>रामजान में महंगाई का दर्दनाक झटका<br></strong>स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार ने केरोसिन और लाइट डीजल ऑयल (एलडीओ) की कीमतें बढ़ा दी हैं। ईंधन की कीमतों में तेज उछाल रामजान के दौरान और भी दर्दनाक साबित हो रहा है। पाकिस्तान की बजट पहले से संकट में हैं और बुनियादी जरूरतों की कीमतों में वृद्धि मध्यवर्गीय परिवारों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है।</p>



<p>इस समय लोगों में सार्वजनिक गुस्से को बढ़ा रहा है। रामजान में सरकारों से राहत की उम्मीद की जाती है, लेकिन परिवारों को लागत का ऐसा झटका लग रहा है जो उनकी खरीद क्षमता को तेजी से कम कर रहा है, ठीक उसी समय जब वे ईद के खर्च की तैयारी कर रहे हैं।</p>



<p><strong>ऐतिहासिक महत्व का दिन<br></strong>23 मार्च का दिन पाकिस्तान के लिए गहरा ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह 1940 के लाहौर प्रस्ताव को याद दिलाता है, जिसमें ऑल इंडिया मुस्लिम लीग ने पहली बार स्वतंत्र मुस्लिम मातृभूमि की मांग रखी थी। इसी मांग ने 1947 में भारत के विभाजन का रूप लिया।<br>इस तारीख का दूसरा महत्वपूर्ण आयाम यह है कि 23 मार्च 1956 को पाकिस्तान ने अपना पहला संविधान अपनाया और औपचारिक रूप से गणतंत्र बन गया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए मिली 30 दिन की &#8216;स्पेशल छूट&#8217;, ईरान से जंग के बीच ट्रंप ने दी खुशखबरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 07:41:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। इस छूट से समुद्र में फंसे रूसी तेल टैंकरों को राहत मिलेगी। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत में तेल संकट का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच भारत को &#8230;]]></description>
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<p>मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। इस छूट से समुद्र में फंसे रूसी तेल टैंकरों को राहत मिलेगी।</p>



<p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत में तेल संकट का खतरा मंडरा रहा है। इस बीच भारत को लेकर अमेरिका ने अहम फैसला लिया है। अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है।</p>



<p>दरअसल, जो अमेरिका भारत पर रूसी तेल आयात कम करने का दबाव बना रहा था, उसी अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अब भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की इजाजत दे दी है। इससे समुद्र में अटके उन रूसी टैंकरों (तेल जहाजों) को राहत मिलेगी, जिनके खरीददार नहीं मिल रहे थे।</p>



<p><strong>समुद्र में क्यों खड़े थे टैंकर?<br></strong>समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, रूस के तेल टैंकर समुद्र में इसलिए खड़े थे क्योंकि नए अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान, बीमा की अनिश्चितता की वजह से उनका तेल तुरंत उतारा नहीं जा रहा था। अमेरिकी की तरफ से रूसी तेल टैंकरों पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया था। जिसके चलते कई जहाजों के बीमा, भुगतान और पोर्ट एंट्री पर सवाल खड़े हो गए।</p>



<p>इस दौरान भारतीय तेल रिफाइनर्स भी इंतजार करने लगे कि कहीं रूस से तेल खरीदना नियमों के खिलाफ न हो जाए। इसलिए जहाजों को समुद्र में ही रोक दिया गया। वहीं, अब अमेरिका द्वारा मिली छूट के बात इन तेल टैंकरों के खरीददार मिलने की पूरी संभावना बन गई है।</p>



<p><strong>अमेरिका ने क्या कहा?<br></strong>मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के प्रयास के लिए अमेरिकी की ओर से यह कदम उठाया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री बेसेंट ने भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका का आवश्यक भागीदार बताते हुए X पर एक पोस्ट में लिखा, &#8220;राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के परिणामस्वरूप तेल और गैस उत्पादन अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।</p>



<p><strong>30 दिनों की अस्थायी छूट<br></strong>वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए, वित्त विभाग भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट जारी कर रहा है। यह जानबूझकर उठाया गया अल्पकालिक कदम रूसी सरकार को कोई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं देगा क्योंकि यह केवल समुद्र में फंसे तेल से संबंधित लेनदेन को ही अधिकृत करता है।</p>



<p>भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है, और हमें पूरी उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगी। यह अंतरिम उपाय ईरान द्वारा वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने के प्रयास से उत्पन्न दबाव को कम करेगा।&#8221;</p>
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		<title>क्या युद्ध रोकने के लिए ईरान ने अमेरिका को भेजा सीक्रेट प्रस्ताव?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Mar 2026 07:58:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान ने युद्ध की तबाही से बचने के लिए वार्ता की इच्छा जाहिर की है और गुप्त चैनलों के माध्यम से अमेरिका से संपर्क साधकर संघर्ष समाप्त करने की शर्तों पर बातचीत का प्रस्ताव दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के &#8230;]]></description>
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<p>मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान ने युद्ध की तबाही से बचने के लिए वार्ता की इच्छा जाहिर की है और गुप्त चैनलों के माध्यम से अमेरिका से संपर्क साधकर संघर्ष समाप्त करने की शर्तों पर बातचीत का प्रस्ताव दिया है।</p>



<p>न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खुफिया मंत्रालय के एजेंटों ने किसी तीसरे देश की खुफिया एजेंसी के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी सीआईए से संपर्क किया है, और जंग खत्म करने की शर्तों पर चर्चा की पेशकश की है।</p>



<p><strong>जंग खत्म करने की कोशिश<br></strong>रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिका को सीक्रेट तौर पर बातचीत का प्रस्ताव भेजा है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ईरान की खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने CIA से इनडायरेक्ट कॉन्टेक्ट कर जंग खत्म करने की कोशिश की है।</p>



<p><strong>अमेरिका ने नहीं आई प्रतिक्रिया<br></strong>ईरान के एजेंटों ने सीक्रेट चैनलों के जरिए CIA तक संदेश पहुंचाया और जंग खत्म करने के लिए बातचीत की संभावना तलाशने की कोशिश की। हालांकि, इसको लेकर अमेरिकी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि ईरान के लिए बातचीत शुरू करने का समय निकल चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है।</p>



<p><strong>फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप पर हमला<br></strong>गौरतलब है कि आज अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का छठा दिन है। इस बीच इजरायल ने लेबनान के त्रिपोली शहर में स्थित फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप पर हमला किया है। यह हमला बेद्दावी रिफ्यूजी कैंप में हुआ, जो उत्तरी लेबनान का सबसे बड़ा फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप माना जाता है।</p>



<p>वहीं, ईरान ने इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है। एक ईरानी सैन्य अधिकारी ने कहा कि अगर अमेरिका और इजरायल, ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करते हैं, तो ईरान इजराइल के डिमोना न्यूक्लियर सेंटर को निशाना बना सकता है।</p>
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		<item>
		<title>मिडिल ईस्ट में तनाव से सोने की कीमतों में भारी उछाल; देखें आपके शहर में कितना है दाम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 07:32:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिलाकर रख दिया। मिडिल ईस्ट में जारी इस तनाव की वजह से क्रूड ऑयल से लेकर गोल्ड-सिल्वर की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। इस युद्ध की वजह से सोना पांचवें दिन भी चढ़ा। बुलियन 0.8% तक बढ़कर $5,360 प्रति औंस &#8230;]]></description>
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<p>ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिलाकर रख दिया। मिडिल ईस्ट में जारी इस तनाव की वजह से क्रूड ऑयल से लेकर गोल्ड-सिल्वर की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। इस युद्ध की वजह से सोना पांचवें दिन भी चढ़ा।</p>



<p>बुलियन 0.8% तक बढ़कर $5,360 प्रति औंस पर पहुंच गया, जो पिछले चार सेशन में 3% से ज्यादा बढ़ा था। ईरान-इजरायल संघर्ष का असर पूरे इलाके में दिख रहा है। अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि US जब तक जरूरी (US Attack On Iran) होगा, अपना मिलिट्री हमला जारी रखेगा, और इजरायल ने ईरान के कमांड सेंटर्स को टारगेट करते हुए हमलों की घोषणा की। तेहरान ने तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग को धमकी दी है।</p>



<p>घरेलू मार्केट में भी सोने की कीमतों (Sone Ka Bhav Aaj Ka) में उछाल देखा गया। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक राजधानी 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 8,100 रुपये बढ़कर 1,72,800 रुपये पहुंच गई। वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 2 अप्रैल 2026 का गोल्ड कॉन्टैक्ट 4095 रुपये बढ़कर 166199 रुपये (Gold Rate Today) के स्तर पर पहुंच गया।</p>



<p><strong>आपके शहर में कितनी है सोने की कीमत । City wise Gold Price<br></strong>इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट 10 ग्राम सोने का भाव 167471 रुपये तक पहुंच गया।</p>



<p>सोना 24 कैरेट: 167471 रुपये प्रति 10 ग्राम<br>सोना 23 कैरेट: 166800 रुपये प्रति 10 ग्राम<br>सोना 22 कैरेट: 153403 रुपये प्रति 10 ग्राम<br>सोना 18 कैरेट: 125603 रुपये प्रति 10 ग्राम<br>सोना 14 कैरेट: 97971 रुपये प्रति 10 ग्राम</p>



<p><strong>ग्लोबल लेबल पर भी सोने की कीमतों में भारी उछाल<br></strong>इस साल सोने में लगभग एक चौथाई की तेजी (Gold Price Hike) आई है, जिसकी डिमांड को लगातार जियोपॉलिटिकल और ट्रेड टेंशन के साथ-साथ फेड की आजादी को लेकर चिंताओं से सपोर्ट मिला है। बॉन्ड और करेंसी से बड़े पैमाने पर वापसी, जिसे डिबेसमेंट ट्रेड के नाम से जाना जाता है, ने कई सालों की रैली को नई तेजी दी है। जनवरी के आखिर में मेटल $5,595 प्रति औंस से ज्यादा के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था।</p>



<p>सिंगापुर में सुबह 8:50 बजे तक स्पॉट गोल्ड 0.6% बढ़कर $5,354.32 प्रति औंस (Gold Rate Today) हो गया। सोमवार को 4.7% कम पर बंद होने के बाद सिल्वर 1.9% बढ़कर $91.11 पर पहुंच गया। प्लैटिनम और पैलेडियम में भी बढ़त हुई। US करेंसी का गेज ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स, पिछले सेशन में 0.7% ज्यादा पर बंद होने के बाद फ्लैट था।</p>
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		<title>अमेरिका से तनाव के बीच मिडिल ईस्ट से आई ‘गुड न्यूज’</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 11:19:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[जहां एक तरफ भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर सस्पेंस बना हुआ है, तो वहीं मिडिल ईस्ट से भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। भारत और ओमान के बीच जल्द ही ट्रेड डील साइन हो सकती है। दोनों देशों के बीच इसे लेकर बातचीत पूरी हो चुकी है। भारत के वाणिज्य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>जहां एक तरफ भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर सस्पेंस बना हुआ है, तो वहीं मिडिल ईस्ट से भारत के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। भारत और ओमान के बीच जल्द ही ट्रेड डील साइन हो सकती है। दोनों देशों के बीच इसे लेकर बातचीत पूरी हो चुकी है।</p>



<p>भारत के वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में बताया कि भारत-ओमान के बीच ट्रेड डील पर बातचीत 2023 में शुरू हुई थी, जो अब पूरी हो चुकी है।</p>



<p><strong>कांग्रेस नेता के सवाल पर दिया जवाब<br></strong>दरअसल कांग्रेस नेता हेबी माथेर हिशाम ने भारत की ट्रेड डील पर संसद में सवाल पूछा था, जिसके जवाब में केंद्रीय मंत्री जितिन ने बताया कि भारत और ओमान के बीच ट्रेड डील जल्द ही साइन हो सकती है।</p>



<p>भारत और ओमान की दोस्ती काफी पुरानी है। दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक साझेदार हैं। हमारे बीच 1955 से कूटनीतिक रिश्ते हैं। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने अपने जवाब में ट्रेड डील साइन करने की तारीख का जिक्र नहीं किया।</p>



<p><strong>5 साल में 5 बड़ी ट्रेड डील<br></strong>केंद्रीय मंत्री जितिन ने सदन में बताया कि पिछले पांच सालों में भारत ने अपने व्यापारिक गठबंधन मजबूत किए हैं। हमने 5 बड़े देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) साइन किया है। वहीं, कई देशों के साथ नई डील पर बातचीत चल रही है।</p>



<p><strong>पिछले 5 साल के 5 बड़े व्यापार समझौते<br></strong>2021 – भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग और साझेदारी समझौता (CECPA)<br>2022 – भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA)<br>2022 – भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता (ECTA)<br>2024 – भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA)<br>2025 – भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA)</p>



<p><br><strong>कई देशों से बातचीत जारी<br></strong>भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ट्रेड डील इस साल के आखिर तक लागू होने की संभावना है। इसके अलावा भारत श्रीलंका, पेरू, न्यूजीलैंड और अमेरिका के साथ कई ट्रेड डील पर बातचीत कर रहा है।</p>
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		<title> ईरान पर हमला करने की तैयारी में इजरायल, मिडिल ईस्ट में हाई अलर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jun 2025 11:28:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[मिडिल ईस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[इजरायल जल्द ही ईरान में एक ऑपरेशन की शुरुआत कर सकते हैं। इसके साथ ही अमेरिका को लगता है कि ईरान पड़ोसी मुल्क इराक में कुछ अमेरिकी साइटों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इसलिए अमेरिका ने अपने कुछ नागरिकों को इलाका छोड़ने की सलाह दी है। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>इजरायल जल्द ही ईरान में एक ऑपरेशन की शुरुआत कर सकते हैं। इसके साथ ही अमेरिका को लगता है कि ईरान पड़ोसी मुल्क इराक में कुछ अमेरिकी साइटों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इसलिए अमेरिका ने अपने कुछ नागरिकों को इलाका छोड़ने की सलाह दी है।</p>



<p>सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने गैर-आपातकालीन सरकारी अधिकारियों को बढ़े हुए तनाव को देखते हुए इराक से बाहर जाने का आदेश दिया है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप के मिडिल-ईस्ट के दूत स्टीव विटकॉफ आने वाले दिनों में देश के परमाणु कार्यक्रम पर छठे दौर की वार्ता के लिए ईरान से मिलने की योजना बना रहे हैं।</p>



<h4 class="wp-block-heading">ट्रंप का बयान</h4>



<p>ट्रंप ने गुरुवार को कैनेडी सेंटर में लेस मिजरेबल्स के प्रदर्शन में भाग लेते हुए कहा कि खतरे को देखते हुए अमेरिकी सैन्य कर्मियों को मिडिल-ईस्ट के कुछ देशों से बाहर निकाला जा रहा है। ट्रंप का यह बयान ईरान क साथ अमेरिका की वार्ता के असफल दौर के बाद आया है। उन्होंने कहा, “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते हैं। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।”</p>



<p>टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग और सेना ने बुधवार को कहा कि क्षेत्रिय अशांति की संभावना के कारण मिडिल-ईस्ट में जिनकी जरूरत नहीं है, ऐसे लोगों को वापस भेजा जा रहा है, क्योंकि पड़ोसी ईरान के साथ बिगड़ती परमाणु वार्ता के बीच तनाव बढ़ गया है।</p>



<h4 class="wp-block-heading">अमेरिकी विदेश विभाग का फरमान</h4>



<p>विदेश विभाग के अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इजरायल को बताया, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकियों को अपने देश में और विदेशों में भी सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम अपने सभी दूतावासों में उचित कर्मियों की स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं।”</p>



<p>टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने बहरीन और कुवैत से गैर-जरूरी कर्मियों और परिवार के सदस्यों को जाने की अनुमति दे दी है, जिससे उन्हें देश छोड़ने या न छोड़ने का विकल्प मिल गया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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