मिडिल ईस्ट – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Wed, 19 Aug 2026 06:18:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg मिडिल ईस्ट – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 मिसाइल हमलों से भड़का UAE, ईरान के साथ सभी व्यापारिक और वित्तीय लेन-देन पर लगाई रोक https://livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%95%e0%a4%be-uae-%e0%a4%88%e0%a4%b0%e0%a4%be/681445 Wed, 19 Aug 2026 06:18:37 +0000 https://livehalchal.com/?p=681445 मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ सभी प्रकार के व्यापारिक और वित्तीय लेन-देन को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा की है। UAE के विदेश मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हामेली ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह सख्त कदम …]]>

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ सभी प्रकार के व्यापारिक और वित्तीय लेन-देन को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा की है।

UAE के विदेश मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हामेली ने कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है और यह रोक अगली सूचना तक जारी रहेगी।

मिसाइल हमलों के बाद लिया फैसला

यह कड़ा फैसला UAE की ओर से ईरान पर समुद्री सीमा के भीतर और बाहर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के आरोप के बाद आया है। UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने ईरान की तरफ से आती दो बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक किया, जो समुद्री जहाजों को निशाना बना रही थीं और समुद्र में गिरीं।

इस घटना के दौरान स्थानीय निवासियों को संभावित मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाला आपातकालीन फोन अलर्ट जारी कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया। हालांकि, यह अलर्ट कुछ समय बाद हटा लिया गया।

ईरान ने आरोपों को किया खारिज

दूसरी ओर, ईरान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि UAE के दावे पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और ऐसे आरोप क्षेत्रीय सुरक्षा प्रयासों को नुकसान पहुंचाते हैं।

फिर भी, ईरान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका के साथ कोई शांति समझौता नहीं हो जाता।

UAE पर 3 हजार से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले

गौरतलब है कि 28 फरवरी को मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद से UAE को ईरान के सबसे भीषण हमलों का सामना करना पड़ा है, जिसके तहत उस पर लगभग 3,000 मिसाइलें और ड्रोन दागे जा चुके हैं।

हाल के हफ्तों में ADNOC के तेल टैंकरों पर भी लगातार हमले हुए हैं। जून में हुआ एक द्विपक्षीय समझौता टूटने के बाद दोनों देशों के संबंध एक बार फिर बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं।

]]>
ईरान के इजरायल पर मिसाइल अटैक के बाद बोले ट्रंप, नेतन्याहू को जवाब न देने की दी सलाह https://livehalchal.com/%e0%a4%88%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%87%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2-%e0%a4%85/674994 Mon, 08 Jun 2026 08:43:33 +0000 https://livehalchal.com/?p=674994 मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। लेबनान में हुए हमले के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इचरायल पर कई मिसाइलें दागीं हैं। जिसके बाद इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह एक्टिव हो गया है और ईरान से बदला लेने की मूड में है। इस बीच अमेरिका राष्ट्रपति …]]>

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। लेबनान में हुए हमले के बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इचरायल पर कई मिसाइलें दागीं हैं। जिसके बाद इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह एक्टिव हो गया है और ईरान से बदला लेने की मूड में है।

इस बीच अमेरिका राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर उन्हें ईरान के इस हमले का जवाब न देने की सलाह देंगे।

फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान को आगाह करते हुए कहा कि ‘आपने अपनी मिसाइलें दाग दीं, बस बहुत हुआ, अब बातचीत की मेज पर वापस आइए और समझौता कीजिए।

टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस को बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात कर रहे हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने तुरंत इस बात की पुष्टि नहीं की है कि ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर बात की है।

CNN के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि हम समझौते के बेहत करीब हैं। ईरान ने मिसाइलें दाग दी है। बस बहुत हुआ। बातचीत की मेज पर वापस आइए और समझौता कीजिए। मैं चाहता हुं कि आने वाले हफ्ते में सोमवार, मंगलवार या बुधवार को समझौता हो जाए।

इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने कहा, “ईरान से इजरायल की ओर दागी गई मिसाइलों की पहचान के बाद देश के कई इलाकों में सायरन बजाए गए। IDF ने ईरान से इजरायल की ओर दागी गई मिसाइलों की पहचान की। खतरे को रोकने के लिए डिफेंस सिस्टम काम कर रहे हैं।”

इजरायली वायु सेना (IAF) ने पुष्टि की कि ईरान से इजरायल की ओर मिसाइलें दागी गई थीं, डिफेंस सिस्टम खतरे को रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और होम फ्रंट कमांड ने जनता के लिए सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं।

पिछले कुछ मिनटों में, होम फ्रंट कमांड ने संबंधित इलाकों में सीधे मोबाइल फोन पर शुरुआती निर्देश भेजे हैं। लोगों से जिम्मेदारी दिखाने और निर्देशों के अनुसार काम करने का अनुरोध किया जाता है- ये निर्देश जान बचाते हैं। अलर्ट मिलने पर, सुरक्षित जगहों पर जाना चाहिए और अगली घोषणा तक वहीं रहना चाहिए। सुरक्षित जगह से बाहर निकलने की इजाजत तभी मिलेगी, जब साफ निर्देश मिले।

ईरान द्वारा इजरायल पर किए हमले पर UK की विदेश मंत्री कूपर ने कहा कि ईरान और इजरायल के बीच फिर से टकराव शुरू होना किसी के भी हित में नहीं है।

]]>
मिडिल ईस्ट में ड्रैगन के फंसे 270 अरब डॉलर ने उड़ाई चिनफिंग की नींद https://livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%88%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%88%e0%a4%97%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab/668306 Fri, 10 Apr 2026 06:37:36 +0000 https://livehalchal.com/?p=668306 भले ही चीन ईरान के सबसे बड़े कूटनीतिक सहयोगियों में से एक बना हुआ है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में फैले चीनी पूंजी के विशाल विस्तार के कारण राष्ट्रपति शी चिनफिंग का इस्लामिक गणराज्य के प्रति समर्थन सीमित हो रहा है। महामारी के बाद से चीन ने मिडिल ईस्ट में अपना निवेश जमकर बढ़ाया। मंदी से …]]>

भले ही चीन ईरान के सबसे बड़े कूटनीतिक सहयोगियों में से एक बना हुआ है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में फैले चीनी पूंजी के विशाल विस्तार के कारण राष्ट्रपति शी चिनफिंग का इस्लामिक गणराज्य के प्रति समर्थन सीमित हो रहा है।

महामारी के बाद से चीन ने मिडिल ईस्ट में अपना निवेश जमकर बढ़ाया। मंदी से प्रभावित कंपनियों ने इस मौका का फायदा उठाने की कोशिश की क्योंकि खाड़ी देश जीवाश्म ईंधन से हटकर ग्रीन टेक और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में विविधता लाने पर जोर दे रहे थे और इन क्षेत्रों में चीन की मजबूत पकड़ है। जाम्बिया और श्रीलंका जैसे विकासशील देशों के अपने कर्ज चुकाने में नाकाम रहने के बाद तेल भंडार से समृद्ध देश निवेश के लिए एक आकर्षक विकल्प नजर आए।

अमेरिका से आगे निकल रहा चीन

इस रणनीति की वजह से हाल के वर्षों में मिडिल-ईस्ट में चीनी निवेश और निर्माण कार्य दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ा है, जिससे यह क्षेत्र शी जिनपिंग की प्रमुख ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ का एक अहम लाभार्थी बन गया है। क्षेत्रीय फाइनेंसर के तौर पर चीन, अमेरिका से आगे निकल रहा है।

AidData के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ब्रैड पार्क्स के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच बीजिंग ने खाड़ी देशों को वॉशिंगटन द्वारा दान या उधार दिए गए हर एक डॉलर के मुकाबले लगभग 2.34 डॉलर दिए।

खतरे में चीन की स्थिरता

अब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के युद्ध ने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है और चीन की उस स्थिरता को खतरे में डाल दिया है, जिस पर वह अपने आर्थिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए निर्भर था। हालांकि ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों को दो हफ्ते के युद्धविराम के लिए राजी करने का श्रेय चीनी अधिकारियों को दिया है, लेकिन उस क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर अभी भी बड़े सवाल बने हुए हैं।

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के ‘चाइना ग्लोबल इन्वेस्टमेंट ट्रैकर’ के अनुसार, चीन ने पिछले दो दशकों में लगभग 270 अरब डॉलर के निवेश और निर्माण परियोजनाएं खड़ी की हैं।

चीन को खाड़ी देशों को दिलाना होगा भरोसा

एशिया ग्रुप में ग्रेटर चाइना प्रैक्टिस के पार्टनर जॉर्ज चेन ने कहा, “खाड़ी क्षेत्र में चीन का दांव बहुत बड़ा है। यहां लोगों से जुड़ा जोखिम है, निवेश का जोखिम है और ऊर्जा-संसाधनों से जुड़ा जोखिम भी है।” बीजिंग को अब ईरान को तनाव कम करने में मदद करनी होगी और साथ ही खाड़ी देशों को यह भरोसा भी दिलाना होगा कि वह उनके साथ सहयोग जारी रखेगा।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के दूत फू कोंग ने इस हफ्ते एक्स पर एक पोस्ट में दोनों पक्षों के दृष्टिकोणों में संतुलन बनाने की अपने देश की इच्छा को जाहिर की। फू ने लिखा कि अमेरिका और इजरायल के हमले अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन थे और साथ ही उन्होंने शिपिंग मार्गों और ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा की भी अपील की। यह तेहरान पर एक परोक्ष रूप से कटाक्ष था।

निशाने पर चीनी प्रोजेक्ट

चीनी प्रोजेक्ट्स पहले से ही निशाने पर हैं। दुबई, कतर और ओमान में चीन की फंडिंग से बने कम से कम तीन इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स पर ईरान ने हमले किए हैं। अमेरिका की विलियम एंड मैरी यूनिवर्सिटी की रिसर्च लैब AidData के अनुमानों के मुताबिक, 12 अन्य प्रोजेक्ट्स भी ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में हैं। इससे करीब 4.66 अरब डॉलर की फंडिंग कमिटमेंट्स खतरे में पड़ गई हैं, जिनमें वे प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं जो पहले ही प्रभावित हो चुके हैं।

हालांकि ईरान के बाहर किसी भी चीनी मजदूर के घायल होने की कोई खबर नहीं है, फिर भी हजारों लोग युद्ध क्षेत्र में काम कर रहे हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, संघर्ष शुरू होने से पहले अकेले संयुक्त अरब अमीरात में ही लगभग 3,70,000 चीनी नागरिक मौजूद थे। तब से मिडिल ईस्ट से 10,000 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन कई ऐसे लोग जिन्होंने वहां बसने के लिए पैसे खर्च किए थे, वे वहीं रुके हुए हैं।

2023 में बीजिंग की तेहरान के साथ दोस्ती और खाड़ी देशों के साथ व्यापारिक संबंध चर्चा का मुख्य केंद्र रहे, जब चीन ने कट्टर दुश्मन सऊदी अरब और ईरान के बीच सुलह करवाई। उस समय इस सफलता की व्यापक रूप से सराहना की गई थी और इसे इस क्षेत्र में शी के बढ़ते प्रभाव का संकेत माना गया था।

संघर्ष के बाद संयम बरत रहा चीन

लेकिन, तब से लेकर अब तक जब से मध्य-पूर्व में संघर्ष फिर से भड़का है, चीन काफी हद तक पीछे हट गया है। अक्टूबर 2023 में हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमलों और उसके बाद बढ़े तनाव ने चीन के प्रभाव की सीमाओं को उजागर कर दिया है। बीजिंग ने खुद को संयम बरतने और तनाव कम करने की अपीलों तक ही सीमित रखा है और उसने अपने तेजी से बढ़ते कारोबार पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर समझा है।

सऊदी अरब में चीन का निवेश

चीन के इस रुख का सऊदी अरब ने स्वागत किया है। चीन के विदेशी निवेश पर नजर रखने वाले अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो डेरेक सिजर्स का कहना है कि अब सऊदी दुनिया भर में चीन की निर्माण गतिविधियों का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बन गया है। खासतौर पर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में, जहां चीनी कंपनियां बड़े-बड़े सोलर प्लांट और विंड टर्बाइन बना रही हैं।

उन्होंने कहा, “यह क्षेत्र चीन की तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना करता है। चीनी कंपनियां ऐसे काम कर सकती हैं जिनकी काफी कद्र होती है।” संयुक्त अरब अमीरात में चीनी कंपनियां दुनिया का सबसे बड़ा बैटरी ऊर्जा भंडारण तंत्र विकसित कर रही हैं, जबकि सऊदी अरब में वे सौर संयंत्र और डेटा केंद्र बना रही हैं। इसके अलावा, पिछले साल चीनी कारों के लिए यूएई दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा बाजार रहा।

खतरों के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा काम

सिंघुआ यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशन्स के एसोसिएट प्रोफेसर शी गैंगझेंग के अनुसार, अब यह युद्ध उन संबंधों को और भी पेचीदा बनाने का खतरा पैदा कर रहा है। शी ने कहा, “खाड़ी क्षेत्र अब चीन के लिए वैसी ‘सोने की खान’ नहीं रह गया है, जैसा वह कभी हुआ करता था।”

खतरों के बावजूद इजरायल, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों में कई कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 7 मार्च को दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक ड्रोन हमले के कुछ ही घंटों बाद एक चीनी मजदूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Douyin पर बताया, “कंस्ट्रक्शन साइट पर काम अभी भी पूरी रफ्तार से चल रहा है।”

चीन के लिए अच्छा मौका

जैसे-जैसे मध्य पूर्व में हालात बदल रहे हैं, चीन के लिए लंबे समय के अवसर खुल सकते हैं। अमेरिका के सहयोगियों के खिलाफ ईरान की जवाबी कार्रवाई ने अमेरिका की साख को चोट पहुंचाई है, जिससे बीजिंग को इस संघर्ष के बाद एक और भी बड़ी आर्थिक भूमिका निभाने का मौका मिल गया है। खबरों के मुताबिक, ईरान अभी से ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए कुछ भुगतान युआन में ले रहा है, जिससे चीनी मुद्रा को बढ़ावा मिल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तब भी चीन एक प्रमुख आर्थिक शक्ति बना रहेगा। भले ही इसमें ऐसे जोखिम और सुरक्षा संबंधी पहलू शामिल हों, जिन्हें पहले ध्यान में नहीं रखा गया था।

]]>
48 घंटे में सीजफायर की धमकी पर ट्रंप को ईरान ने उसी की भाषा में दिया जवाब https://livehalchal.com/48-%e0%a4%98%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%ae%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa/667762 Sun, 05 Apr 2026 06:44:08 +0000 https://livehalchal.com/?p=667762 मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बार-बार ईरान को धमकी दे रहे हैं कि वो अपना हथियार डाल डे और होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे। लेकिन ईरान न तो सीजफायर के लिए तैयार हो रहा है और न ही होर्मुज खोलने के लिए। ट्रंप …]]>

मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात और अधिक गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बार-बार ईरान को धमकी दे रहे हैं कि वो अपना हथियार डाल डे और होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे। लेकिन ईरान न तो सीजफायर के लिए तैयार हो रहा है और न ही होर्मुज खोलने के लिए।

ट्रंप ने धमकी दी कि ईरान के पास समझौता करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 48 घंटे का वक्त बचा है, वरना उस पर भीषण हमला होगा और पूरे ईरान को नरक कर देंगे। ट्रंप की इस धमकी को ईरान ने एक असहाय, घबराहटपूर्ण, बेतूका और बेवकूफी भरी कार्रवाई बताया।

अमेरिका के लिए खुल जाएंगे नरक के द्वार

ट्रंप के 48 घंटों के भीतर शांति समझौता न होने पर तेहरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की बात को ईरान ने मूर्खतापूर्ण बताया। ईरानी जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी ने ट्रंप की भाषा में ही चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान पर हमला हुआ, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के लिए “नरक के द्वार” खुल जाएंगे।

अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले की धमकी

फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, ईरानी जनरल अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर अमेरिका या इजरायल द्वारा किए गए किसी भी हमले के जवाब में पश्चिम एशिया में स्थित सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी हमलों से दिया जाएगा।

अब्दोल्लाही ने कहा, “लगातार हार स्वीकार करने के बाद, अमेरिका के आक्रामक और युद्धप्रिय राष्ट्रपति ने एक हताश, घबराए हुए, असंतुलित और मूर्खतापूर्ण कदम में ईरान के बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय संपत्तियों को निशाना बनाने की धमकी दी है।”

पलभर भी नहीं करेंगे संकोच

अब्दोल्लाही ने कहा कि अगर अमेरिका-इजरायल ईरान पर हमला करते हैं तो ईरानी सशस्त्र बल देश के अधिकारों की रक्षा करने और राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा करने में एक पल के लिए भी संकोच नहीं करेंगे और आक्रमणकारियों को उनकी औकात दिखा देंगे।

और भीषण हो सकता है युद्ध

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने 48 घंटे वाली धमकी से पहले 26 मार्च को ईरान को 10 दिन की समय सीमा दी थी। 6 अप्रैल को इसकी समय सीमा समाप्त होने से ठीक पहले ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को अल्टीमेट दिया है। ऐसे में डेडलाइन खत्म होने तक अगर ईरान समझौता नहीं करता है और अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा। इससे होर्मुज स्ट्रेट समेत पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध और अधिक भीषण हो सकता है।

]]>
कैसे रुकेगा मिडिल ईस्ट का महासंग्राम? अमेरिका के सामने कौन-कौन सी शर्त रखेगा ईरान https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%b2-%e0%a4%88%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%95%e0%a4%be/666511 Wed, 25 Mar 2026 05:52:31 +0000 https://livehalchal.com/?p=666511 अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने बातचीत को लेकर अपना रुख और कड़ा कर लिया है। ईरान इस युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी शर्तें रख सकता है। तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शांति वार्ता की दिशा में कोई भी कदम …]]>

अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान ने बातचीत को लेकर अपना रुख और कड़ा कर लिया है। ईरान इस युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका के सामने कई बड़ी शर्तें रख सकता है।

तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शांति वार्ता की दिशा में कोई भी कदम वॉशिंगटन की ओर से बड़ी रियायतों पर निर्भर करेगा।

अमेरिका के आगे ये शर्त रखेगा ईरान

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने तीन वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान की मांगें शायद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को मंजूर न हों।

ईरान के इस युद्ध को रोकने का मुख्य आधार यह है कि किसी भी बातचीत से पहले युद्ध खत्म होना चाहिए।
इसके साथ ही भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के न होने की गारंटी मिलनी चाहिए।
ईरान को युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा भी मिलना चाहिए।
ईरान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर औपचारिक नियंत्रण भी सुनिश्चित करना चाहता है।

ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर भी एक स्पष्ट रेड लाइन तय कर दी है और इस पर किसी भी तरह की पाबंदी पर चर्चा करने से इनकार कर दिया है।

ट्रंप के बातचीत के दावे को ईरान ने कर दिया था खारिज

सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि युद्ध शुरू होने बाद से पहली बार अमेरिका और ईरान के बीच बहुत मजबूत बातचीत हुई है। ट्रंप के इस दावे को ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया और ऐसी किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के उन तीन सूत्रों ने बताया कि ईरान ने केवल मध्यस्थों (जैसे पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र) के साथ शुरुआती चर्चा की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिका-इजरायल के सार्थक बातचीत के लिए माहौल है या नहीं।

पाकिस्तान में हो सकती है शांति वार्ता

पाकिस्तान के अलग-अलग सूत्रों ने संकेत दिया है कि युद्ध खत्म करने के लिए सीधी बातचीत इस हफ्ते के आखिर में इस्लामाबाद में हो सकती है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बातचीत होती है तो ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हो सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला लेने का अधिकार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पास ही होगा।

]]>