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	<title>मासिक शिवरात्रि &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मासिक शिवरात्रि &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>मासिक शिवरात्रि पर 1 बार जरूर पढ़ें &#8216;शिव तांडव स्तोत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 05:29:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक शिवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="312" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/56-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/56-16.jpg 673w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/56-16-300x152.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की मासिक शिवरात्रि आज यानी 15 अप्रैल को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान शिव की पूजा मध्य रात्रि में करने का विधान है। ऐसे में पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक रहने वाला है। पूजा में शिव तांडव स्तोत्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="312" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/56-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/56-16.jpg 673w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/56-16-300x152.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की मासिक शिवरात्रि आज यानी 15 अप्रैल को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान शिव की पूजा मध्य रात्रि में करने का विधान है। ऐसे में पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक रहने वाला है। पूजा में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना गया है, जिससे साधक को महादेव की कृपा मिलती है, जिससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं।</p>



<p><strong>शिव तांडव स्तोत्र<br></strong>जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले</p>



<p>गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।</p>



<p>डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं</p>



<p>चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ।।</p>



<p>जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी</p>



<p>विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।</p>



<p>धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके</p>



<p>किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ।।</p>



<p>धराधरेन्द्रनंदिनीविलासबन्धुबन्धुर</p>



<p>स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।</p>



<p>कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि</p>



<p>क्वचिद्दिगम्बरे(क्वचिच्चिदम्बरे) मनो विनोदमेतु वस्तुनि ।।</p>



<p>जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा</p>



<p>कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।</p>



<p>मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे</p>



<p>मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ।।</p>



<p>सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर</p>



<p>प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।</p>



<p>भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक</p>



<p>श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ।।</p>



<p>ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा</p>



<p>निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।</p>



<p>सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं</p>



<p>महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः ।।</p>



<p>करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल</p>



<p>द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।</p>



<p>धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक</p>



<p>प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ।।</p>



<p>नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्</p>



<p>कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः ।</p>



<p>निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः</p>



<p>कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ।।</p>



<p>प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा</p>



<p>वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।</p>



<p>स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं</p>



<p>गजच्छिदांधकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ।।</p>



<p>अगर्व सर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी</p>



<p>रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ।</p>



<p>स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं</p>



<p>गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ।।</p>



<p>जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस</p>



<p>द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् ।</p>



<p>धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल</p>



<p>ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ।।</p>



<p>दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्</p>



<p>गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।</p>



<p>तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः</p>



<p>समं प्रव्रितिक: कदा सदाशिवं भजाम्यहम ।।</p>



<p>कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्</p>



<p>विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् ।</p>



<p>विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः</p>



<p>शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ।।</p>



<p>निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-</p>



<p>निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।</p>



<p>तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं</p>



<p>परिश्रय परं पदं तदङ्गजत्विषां चयः ।।</p>



<p>प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी</p>



<p>महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।</p>



<p>विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः</p>



<p>शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ।।</p>



<p>इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं</p>



<p>पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् ।</p>



<p>हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं</p>



<p>विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ।।</p>



<p>पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं</p>



<p>यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।</p>



<p>तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां</p>



<p>लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शम्भुः ।।</p>



<p><strong>भगवान शिव के मंत्र –</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li>ॐ नमः शिवाय</li>



<li>ॐ नमो भगवते रूद्राय</li>



<li>ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात</li>



<li>ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्<br>उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्</li>



<li>कर्पूरगौरं करुणावतारं<br>संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।<br>सदावसन्तं हृदयारविन्दे<br>भवं भवानीसहितं नमामि</li>
</ol>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का दुर्लभ महासंयोग, पंचांग से जानें शुभ-अशुभ योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 05:05:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक शिवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="304" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-210323.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-210323.png 772w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-210323-300x148.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-210323-768x378.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंचांग के अनुसार, आज यानी 16 जनवरी को शुक्र प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि मनाई जा रही है। इस खास अवसर पर भक्त महादेव के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मासिक शिवरात्रि के दिन महादेव की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधा से छुटकारा मिलता है और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="304" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-210323.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-210323.png 772w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-210323-300x148.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-15-210323-768x378.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंचांग के अनुसार, आज यानी 16 जनवरी को शुक्र प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि मनाई जा रही है। इस खास अवसर पर भक्त महादेव के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मासिक शिवरात्रि के दिन महादेव की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधा से छुटकारा मिलता है और प्रदोष व्रत करने से सभी भय दूर होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।</p>



<p>तिथि: कृष्ण त्रयोदशी<br>मास पूर्णिमांत: माघ<br>दिन: शुक्रवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: कृष्ण त्रयदशी – रात्रि 10 बजकर 21 मिनट तक<br>योग: ध्रुव – रात्रि 09 बजकर 06 मिनट तक<br>करण: गरज – प्रातः 09 बजकर 21 मिनट तक<br>करण: वणिज – रात्रि 10 बजकर 21 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 15 मिनट पर<br>सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 47 मिनट पर<br>चंद्रोदय का समय: प्रातः 17 जनवरी को 06 बजकर 12 मिनट पर<br>चंद्रास्त का समय: दोपहर 03 बजकर 25 मिनट पर</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक<br>अमृत काल: 17 जनवरी को रात्रि 01 बजकर 09 मिनट से रात्रि 02 बजकर 55 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: प्रातः 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक<br>गुलिकाल: प्रातः 08 बजकर 34 मिनट से प्रातः 09 बजकर 53 मिनट तक<br>यमगण्ड: दोपहर 03 बजकर 09 मिनट से सायं 04 बजकर 28 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव मूल नक्षत्र में रहेंगे।<br>मूल नक्षत्र: पूर्ण रात्रि तक<br>सामान्य विशेषताएं: क्रोधी, स्थिर मन, अनुशासनप्रिय, आक्रामक, गंभीर व्यक्तित्व, उदार, मिलनसार, दानशील, ईमानदार, कानून का पालन करने वाले, अहंकारी और बुद्धिमान<br>नक्षत्र स्वामी: केतु देव<br>राशि स्वामी: बृहस्पति देव<br>देवता: निरति (विनाश की देवी)<br>प्रतीक: पेड़ की जड़े</p>



<p><strong>शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व<br></strong>शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक विशेष व्रत है, जो हर माह के प्रदोष तिथि को शुक्रवार को किया जाता है। इस दिन व्रती उपवास रखते हैं और शाम को शिवलिंग का पूजन और रुद्राभिषेक करते हैं। पूजा में बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरा का विशेष महत्व होता है। व्रती महामृत्युंजय मंत्र या अन्य शिव मंत्र का जाप कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह व्रत धन, सुख, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में शांति व सौभाग्य लाने वाला माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए जाने पर भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सफलता मिलती है।</p>



<p><strong>शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि<br></strong>स्नान और शुद्धि – सुबह या शाम को स्वच्छ जल से स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।<br>स्थान सजाना – घर में पूजा स्थान पर सफेद कपड़ा बिछाएं और शिवलिंग स्थापित करें।<br>पूजा सामग्री – शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, जल, दूध, घी, कपूर और अक्षत रखें।<br>ध्यान और मंत्र – शिवलिंग पर जल, दूध या घी चढ़ाते हुए “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।<br>दीपक और आरती – दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें।<br>फल और प्रसाद – पूजा के बाद फलों का भोग लगाएं और परिवार में बांटें।<br>व्रत पूर्ण करना – रात को या अगले दिन उपवास खोलें और भगवान शिव की कृपा प्राप्ति की प्रार्थना करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इस दिन मनाई जाएगी साल की पहली मासिक शिवरात्रि, प्राप्त होगी महादेव की कृपा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Jan 2026 05:05:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक शिवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="469" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/654.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/654.jpg 807w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/654-300x228.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/654-768x582.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />कई साधक मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri 2026) का व्रत करते हैं, जो हर माह की शिव जी की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। ऐसे में चलिए पढ़ते हैं कि आप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="469" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/654.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/654.jpg 807w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/654-300x228.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/654-768x582.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>कई साधक मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri 2026) का व्रत करते हैं, जो हर माह की शिव जी की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। ऐसे में चलिए पढ़ते हैं कि आप इस दिन पर किस प्रकार शिव जी को प्रसन्न कर सकते हैं।</p>



<p><strong>मासिक शिवरात्रि मुहूर्त (Masik Shivratri 2026 Muhurat)<br></strong>माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी को रात 10 बजकर 21 मिनट से 18 जनवरी को देर रात 12 बजकर 3 मिनट तक रहने वाली है। ऐसे में साल की पहली मासिक शिवरात्रि का व्रत शुक्रवार 16 जनवरी को किया जाएगा। इस दिन पर पूजा का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहने वाला है –</p>



<p><strong>मासिक शिवरात्रि की पूजा मुहूर्त –&nbsp;</strong>रात 12 बजकर 4 मिनट से देर रात 12 बजकर 58 मिनट तक</p>



<p><strong>भगवान शिव की पूजा विधि –<br></strong>मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवितृ हो जाएं और व्रत का संकल्प लें।<br>मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद गंगाजल छिड़कें।<br>शिवलिंग का दूध, गंगाजल, शहद, घी आदि से अभिषेक करें।<br>पूजा में बिल्वपत्र, धतूरा, सफेद फूल आदि अर्पित करें।<br>भोग के रूप में भगवान शिव को मखाने की खीर, फल व हलवा आदि अर्पित कर सकते हैं।<br>माता पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करें।<br>ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।<br>मासिक शिवरात्रि की कथा का पाठ करें और भगवान शिव व माता पार्वती की आरती करें।<br>अंत में सभी लोगों में प्रसाद बांटें।</p>



<p><strong>शिवलिंग पर अर्पित करें ये चीजें<br></strong>मासिक शिवरात्रि के दिन आप शिवलिंग पर चंदन, बेलपत्र, गन्ने का रस और शहद आदि अर्पित कर सकते हैं। इस सभी चीजों को मासिक शिवरात्रि की पूजा में शिवलिंग पर अर्पित करने से साधक को महादेव का आशीर्वाद मिलता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही जीवन की सभी बाधाएं भी दूर होती हैं।</p>
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		<title>साल की आखिरी मासिक शिवरात्रि पर बन रहा कई योग का शुभ संयोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 05:06:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक शिवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="396" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-210409-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-210409.png 771w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-210409-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-210409-768x492.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंचांग के अनुसार, आज यानी 18 दिसंबर मासिक शिवरात्रि व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन महादेव की पूजा करने से जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="396" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-210409-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-210409.png 771w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-210409-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-210409-768x492.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंचांग के अनुसार, आज यानी 18 दिसंबर मासिक शिवरात्रि व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन महादेव की पूजा करने से जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।</p>



<p>तिथि: कृष्ण चतुर्दशी<br>मास पूर्णिमांत: पौष<br>दिन: गुरुवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: कृष्ण चतुर्दशी – 19 दिसंबर को प्रातः 04 बजकर 59 मिनट तक, फिर अमावस्या<br>योग: धृति – दोपहर 03 बजकर 06 मिनट तक<br>करण: विष्टि – दोपहर 03 बजकर 47 मिनट तक<br>करण: शकुनि –19 दिसंबर को प्रातः 04 बजकर 59 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय: प्रातः 07 बजकर 08 मिनट पर<br>सूर्यास्त: सायं 05 बजकर 28 मिनट पर<br>चंद्रोदय: 19 दिसंबर को प्रातः 06 बजकर 33 मिनट पर<br>चंद्रास्त: दोपहर 03 बजकर 53 मिनट पर</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक<br>अमृत काल: प्रातः 08 बजकर 27 मिनट से प्रातः 10 बजकर 14 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: दोपहर 01 बजकर 35 मिनट से दोपहर 02 बजकर 53 मिनट तक<br>गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 43 मिनट से प्रातः 11 बजे तक<br>यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 08 मिनट से प्रातः 08 बजकर 26 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव अनुराधा नक्षत्र में रहेंगे।<br>अनुराधा नक्षत्र: रात्रि 08 बजकर 07 मिनट तक।<br>सामान्य विशेषताएं: समाज में सम्मानित, आत्मकेंद्रित, आक्रामक, साहसी, बुद्धिमान, मेहनती, विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित और सुंदर बाल<br>नक्षत्र स्वामी: शनि देव<br>राशि स्वामी: मंगल देव<br>देवता: मित्रता के देवता<br>प्रतीक: अंतिम रेखा पर एक फूल</p>
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		<title>मासिक शिवरात्रि आज, यहां पढ़ें शिव जी और माता पार्वती की पूजा विधि व मंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 05:01:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक शिवरात्रि]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-205929-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-205929.png 776w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-205929-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-205929-768x434.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पौष माह की मासिक शिवरात्रि आज यानी 18 दिसंबर 2025 को मनाई जा रही है। मासिक शिवरात्रि को महादेव की कृपा प्राप्ति के लिए एक उत्तम तिथि माना गया है। इस दिन पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से जातक को जीवन में अद्भुत परिणाम मिल सकते हैं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-205929-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-205929.png 776w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-205929-medium.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-17-205929-768x434.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पौष माह की मासिक शिवरात्रि आज यानी 18 दिसंबर 2025 को मनाई जा रही है। मासिक शिवरात्रि को महादेव की कृपा प्राप्ति के लिए एक उत्तम तिथि माना गया है। इस दिन पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से जातक को जीवन में अद्भुत परिणाम मिल सकते हैं। ऐसे में चलिए पढ़ते हैं मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि और महादेव की कृपा प्राप्ति के मंत्र।</p>



<p><strong>मासिक शिवरात्रि मुहूर्त<br></strong>पौष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 18 दिसंबर को देर रात 2 बजकर 32 मिनट से 19 दिसंबर को प्रातः 4 बजकर 59 मिनट तक रहने वाली है। ऐसे में मासिक शिवरात्रि का व्रत गुरुवार 18 दिसंबर को किया जाएगा। इस दिन पर पूजा का मुहूर्त कुछ इस प्रकार रहने वाला है –</p>



<p>मासिक शिवरात्रि की पूजा का समय – रात 11 बजकर 51 मिनट से देर रात 12 बजकर 51 मिनट तक</p>



<p><strong>शिव जी की पूजा विधि –<br></strong>व्रत करने वाले साधक सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवितृ हो जाएं।<br>मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद गंगाजल का छिड़काव करें।<br>एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और शिव जी व माता पार्वती की मूर्ति स्थापित करें।<br>शिवलिंग का जलाभिषेक करें और कच्चा दूध व गंगाजल भी अर्पित करें।<br>भोग के रूप में भगवान शिव को मखाने की खीर, फल व हलवा आदि अर्पित करें।<br>माता पार्वती को 16 शृंगार जैसे सिंदूर, चूड़ी आदि चढ़ाएं।<br>दीपक जलाकर भगवान शिव व माता पार्वती की आरती करें।<br>अंत में सभी लोगों में प्रसाद बांटें।</p>



<p><strong>भगवान शिव के मंत्र –<br></strong>ॐ नमः शिवाय</p>



<p>ॐ नमो भगवते रूद्राय</p>



<p>ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात</p>



<p>ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्<br>उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्</p>



<p>कर्पूरगौरं करुणावतारं<br>संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।<br>सदावसन्तं हृदयारविन्दे<br>भवं भवानीसहितं नमामि</p>



<p><strong>माता पार्वती के मंत्र –<br></strong>ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः</p>



<p>ऊँ गौरये नमः</p>



<p>ऊँ साम्ब शिवाय नमः’</p>



<p>ऊँ पार्वत्यै नमः</p>



<p>हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया।<br>तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्।।</p>
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