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	<title>मायोपिया &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मायोपिया &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>बच्चों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा मायोपिया!</title>
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		<pubDate>Fri, 27 Sep 2024 08:27:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-965-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-965.jpg 760w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-965-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />एक स्टडी में बेहद चौंकाने वाले खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक हर तीन में से एक बच्चा मायोपिया (Myopia in Kids) का शिकार है। बच्चों में मायोपिया के मामले कोविड महामारी के दौरान लगे लॉक डाउन के बाद से बढ़ने शुरू हुए हैं जो यह बताता है कि स्क्रीन टाइम का इसमें कितना अहम रोल &#8230;]]></description>
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<p>एक स्टडी में बेहद चौंकाने वाले खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक हर तीन में से एक बच्चा मायोपिया (Myopia in Kids) का शिकार है। बच्चों में मायोपिया के मामले कोविड महामारी के दौरान लगे लॉक डाउन के बाद से बढ़ने शुरू हुए हैं जो यह बताता है कि स्क्रीन टाइम का इसमें कितना अहम रोल है। जानें बच्चों की आंखों को सुरक्षित रखने के कुछ उपाय (Tips to Prevent Myopia)।</p>



<p>हाल ही में एक स्टडी में ये पता चला है कि कोविड-19 महामारी के बाद बच्चों में मायोपिया के मामले काफी बढ़ गए हैं। अब हर तीन में से एक बच्चा मायोपिया का शिकार है। मायोपिया, जिसे निकट दृष्टि दोष भी कहते हैं, एक ऐसी समस्या है जिसमें दूर की चीजों को देखने में परेशानी होती है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2050 तक बच्चों में मायोपिया के मामले 74 करोड़ तक पहुंच सकते हैं। इस आर्टिकल में हम मायोपिया के कारण और बचाव के तरीकों (Tips to Prevent Myopia) के बारे में जानेंगे।</p>



<p><strong>क्या है बच्चों में बढ़ते मायोपिया की वजह?</strong><br>स्टडी के मुताबिक मायोपिया के मामले बढ़ने के पीछे की वजह है ज्यादा लंबा स्क्रीन टाइम। कोविड-19 महामारी के दौरान लगे लॉक डाउन में बाहर जाने का कोई ऑप्शन नहीं था। इसलिए बच्चों की पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, सबकुछ मोबाइल फोन या कंप्यूटर के जरिए ही हुआ। लॉक डाउन के बाद भी अब बच्चों का ज्यादातर समय फोन या कंप्यूटर के सामने ही बीतता है। इसके कारण उनका स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है।</p>



<p>ज्यादा स्क्रीन टाइम के कारण आंखों में स्ट्रेन, रेडनेस और ड्राईनेस जैसी परेशानियां भी होती हैं, जो आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। स्क्रीन टाइम ज्यादा होने के साथ-साथ और भी कुछ फैक्टर्स हो सकते हैं, जो मायोपिया की वजह बन सकते हैं, जैसे-</p>



<p><strong>जेनेटिक्स-</strong> यदि माता-पिता में से किसी एक या दोनों को मायोपिया है, तो उनके बच्चों में भी इसकी संभावना ज्यादा होती है।<br><strong>बाहरी गतिविधियों की कमी-</strong> बाहर खेलने और धूप में रहने से आंखों को आराम मिलता है और मायोपिया का खतरा कम होता है। लेकिन इसकी कमी की वजह से आंखों को नुकसान पहुंचता है।<br><strong>कम रोशनी में पढ़ना- </strong>कम रोशनी में पढ़ने या फोन चलाने से आंखों पर ज्यादा स्ट्रेन पड़ता है, जिससे मायोपिया हो सकता है।</p>



<p><strong>मायोपिया से बचने के उपाय</strong><br>मायोपिया को पूरी तरह से रोकना मुश्किल हो सकता है, खासकर यदि परिवार में इसका इतिहास है। हालांकि, कुछ उपाय अपनाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है, जैसे-</p>



<p><strong>बाहरी गतिविधियों को बढ़ावा देना-</strong> बच्चों को हर दिन कम से कम 2-3 घंटे बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।<br><strong>स्क्रीन समय को सीमित करना- </strong>कंप्यूटर, टैबलेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल हर दिन 2 घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए।<br><strong>आंखों को आराम देना- </strong>नियमित रूप से आंखों को आराम देने के लिए 20-20-20 नियम का पालन करें। यानी हर 20 मिनट के स्क्रीन समय के बाद, 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर की किसी चीज को देखें।<br><strong>सही रोशनी में पढ़ना-</strong> पढ़ते समय बच्चों के कमरे की रोशनी सही हो, इसका ध्यान रखें और उन्हें अंधेरे में फोन न चलाने दें।<br><strong>नियमित आंखों की जांच कराना-</strong> बच्चों की आंखों की नियमित जांच कराना जरूरी है, ताकि मायोपिया के शुरुआती लक्षणों का पता चल सके और सही इलाज किया जा सके।<br><strong>पोषण पर ध्यान दें- </strong>बच्चे की डाइट में विटामिन-ए, डी, ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर हो।<br><strong>आंखों की एक्सरसाइज करना-</strong> कुछ आंखों की एक्सरसाइज भी मायोपिया को रोकने में मदद कर सकता है। इनमें आंखों को घुमाना, आंखों को बंद करके आराम करना और दूर की चीजों पर फोकस करना शामिल हो सकता है।</p>
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		<title>मायोपिया की समस्या से निपटने में असरदार साबित हो सकते हैं ये आयुर्वेदिक उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 May 2024 07:41:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[आयुर्वेदिक उपाय]]></category>
		<category><![CDATA[मायोपिया]]></category>
		<category><![CDATA[समस्या से निपटने]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="515" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6.jpg 515w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6-300x202.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 515px) 100vw, 515px" />आजकल बच्चे बाहर खेलने के बजाय मोबाइल लैपटॉप टीवी के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। जिस वजह से सेहत पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव देखने के मिल रहे हैं। इस आदत से बच्चे बचपन में ही मोटापे डायबिटीज जैसी और भी कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इनमें से एक मायोपिया भी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="515" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6.jpg 515w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6-300x202.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/health-1-6-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 515px) 100vw, 515px" />
<p>आजकल बच्चे बाहर खेलने के बजाय मोबाइल लैपटॉप टीवी के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। जिस वजह से सेहत पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव देखने के मिल रहे हैं। इस आदत से बच्चे बचपन में ही मोटापे डायबिटीज जैसी और भी कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इनमें से एक मायोपिया भी है। जिसमें दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं।</p>



<p>भारतीय बच्चों में मायोपिया तेजी से बढ़ती हुई एक गंभीर समस्या है। अध्य्यनों से पता चला है कि शहरी क्षेत्रों में 5 से 15 साल के बच्चों में मायोपिया की प्रॉब्लम 1999 में 4.44% से बढ़कर 2019 में 21.15% हो गई है। एक अनुमान के अनुसार भारत में 2050 तक 48% तक मायोपिया के मामले बढ़ सकते हैं। इसे लेकर पेरेंट्स को सतर्क होने की जरूरत है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या है मायोपिया?&nbsp;</h2>



<p>मायोपिया, जिसे आमतौर पर निकट-दृष्टि दोष के रूप में जाना जाता है। इस बीमारी में आई बॉल यानी आंख की पुतली का आकार बढ़ जाता है। ऐसे में प्रतिबिंब रेटिना पर बनने के बजाय थोड़ा आगे बनता है। जिस वजह से दूर की चीजों के देखने में समस्या होती है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">मायोपिया के लक्षण</h2>



<p>मायोपिया से जूझ रहे बच्चों में आंखों से पानी आना और सिरदर्द की समस्या सबसे आम है। इसके अलावा बार-बार पलकें झपकाना, दूर की चीजों को सही से न पढ़ पाना भी मायोपिया के लक्षण हैं।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">मायोपिया से निपटने के आयुर्वेदिक उपाय</h2>



<p>कुछ आयुर्वेद उपाय निकट दृष्टि दोष सहित अन्य दूसरी आंखों से जुड़ी समस्याओं से भी निपटने में मददगार साबित हो सकते हैं। इसके लिए&#8230;</p>



<h2 class="wp-block-heading">1. हेल्दी डाइट लें</h2>



<p>हरी पत्तेदार सब्जियां के साथ गाजर, विटामिन सी से भरपूर फल, विटामिन ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड को अपनी डाइट में शामिल करें। जो शरीर के साथ आंखों को भी हेल्दी रखते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">2. त्रिफला और आंवला का सेवन</h2>



<p>त्रिफला, एक पारंपरिक आयुर्वेदिक फार्मूला है जिसमें तीन फल &#8211; अमलाकी (आंवला), बिभीतकी और हरीतकी शामिल हैं, जो आंखों को मजबूत बनाने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। त्रिफला चूर्ण और आंवले का सेवन करने से दृष्टि में सुधार और आंखों से जुड़ी समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">3. हाइड्रेटेड रहें</h2>



<p>आंखों को हेल्दी रखने के लिए बॉडी को हाइड्रेट रखना भी जरूरी है। इससे ड्राई आई की प्रॉब्लम नहीं होती, जो मायोपिया के खतरे को बढ़ाने को बढ़ा सकता है। </p>



<h2 class="wp-block-heading">4. प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन कम करें</h2>



<p>प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करें, क्योंकि इनमें शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है। दूसरा यह सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाने का काम करते हैं, जिससे आंखों की हेल्थ पर असर पड़ता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">5.&nbsp;तर्पण चिकित्सा</h2>



<p>तर्पण, एक आयुर्वेदिक नेत्र देखभाल चिकित्सा है, जिसमें घी या तेल से आंखों को पोषण दिया जाता है। यह थेरेपी आंखों को चिकनाई देने, दृष्टि में सुधार करने, ड्राईनेस के साथ जलन को कम करने में मदद करती है। गर्मियों के दौरान यह चिकित्सा खासतौर से फायदेमंद होती है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">6. पंचकर्म थेरेपी</h2>



<p>यह उपचार आंखों के साथ शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का काम करता है, जिससे आंखों की रोशनी में सुधार होता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">7. नेत्र बस्ती</h2>



<p>आंखों के चारों ओर गर्म औषधीय तेल लगाया जाता है, जिससे टिश्यू को पोषण मिलता है और दृष्टि में सुधार होता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">8. त्राटक</h2>



<p>यह एक ऐसा योग है जिसमें मोमबत्ती की लौ पर ध्यान केंद्रित करना होता है। इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।&nbsp;</p>



<p>इन आयुर्वेदिक उपायों की मदद से मायोपिया की समस्या को रोकने के साथ लक्षणों को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।&nbsp;</p>



<p>(डॉ. मंदीप सिंह बासु, डायरेक्टर, डॉ. बासु आई हॉस्पिटल से बातचीत पर आधारित)&nbsp;</p>
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