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	<title>मां जानकी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मां जानकी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>बिहार: भारत के इस हिस्से से मंगवाए जा रहे हैं मां जानकी के मंदिर निर्माण के पत्थर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 31 Jul 2025 09:30:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[मां जानकी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/523-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/523.jpg 833w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/523-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/523-768x429.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />बिहार:&#160;इस पत्थर का एक और विशिष्ट गुण है इसका रंग। यह प्राकृतिक रूप से गहरा लाल होता है, जो सूरज की रोशनी में और अधिक चमकदार नजर आता है। यह रंग समय के साथ फीका नहीं पड़ता, बल्कि और निखरता है, जिससे मंदिर या इमारत को एक दिव्य और राजसी आभा प्राप्त होती है। जब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/523-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/523.jpg 833w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/523-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/523-768x429.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p><strong>बिहार:&nbsp;</strong>इस पत्थर का एक और विशिष्ट गुण है इसका रंग। यह प्राकृतिक रूप से गहरा लाल होता है, जो सूरज की रोशनी में और अधिक चमकदार नजर आता है। यह रंग समय के साथ फीका नहीं पड़ता, बल्कि और निखरता है, जिससे मंदिर या इमारत को एक दिव्य और राजसी आभा प्राप्त होती है।</p>



<p>जब भी देश में किसी भव्य मंदिर या ऐतिहासिक इमारत का निर्माण होता है, तो एक नाम बार-बार सामने आता है राजस्थान का वंशी पहाड़पुर क्षेत्र। यहां से निकाला जाने वाला लाल बलुआ पत्थर न सिर्फ मजबूती और टिकाऊपन के लिए मशहूर है, बल्कि इसकी खूबसूरती और कलात्मकता भी इसे खास बनाती है। अब यही पत्थर बिहार के सीतामढ़ी जिले स्थित पुनौराधाम में बन रहे मां जानकी मंदिर की भव्यता को आकार देगा। मंदिर निर्माण में पूरी तरह इसी पत्थर का उपयोग किया जा रहा है, ताकि उसका सौंदर्य, मजबूती और चमक वर्षों तक बनी रहे।</p>



<p>राजस्थान के करौली जिले के वंशी पहाड़पुर क्षेत्र से निकाले जाने वाले इस खास पत्थर को “रेड सैंडस्टोन” यानी लाल बलुआ पत्थर के नाम से जाना जाता है। यह पत्थर ना केवल अपने सुंदर लाल रंग के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी संरचना और बनावट ऐसी है कि यह वर्षों तक बिना किसी खास क्षति के टिका रहता है।</p>



<p><strong>लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत संरचना<br></strong>इस पत्थर की सबसे पहली विशेषता इसकी प्राकृतिक मजबूती है। यह लाखों वर्षों में भूगर्भीय प्रक्रियाओं के चलते बना होता है, जिससे इसकी सघनता और टिकाऊपन बढ़ जाती है। यही वजह है कि देशभर में जहां भी लंबे समय तक टिकाऊ और मजबूत संरचना की आवश्यकता होती है, वहां इस पत्थर को प्राथमिकता दी जाती है। यह पत्थर आसानी से टूटता-फटता नहीं है, और मौसम के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता।</p>



<p>इसके अलावा इस पत्थर की बनावट भी इसे अद्वितीय बनाती है। इसकी सतह बेहद महीन और समरूप होती है, जिस पर नक्काशी और कलात्मक चित्र उकेरना कारीगरों के लिए बेहद आसान होता है। मंदिरों की दीवारों पर जटिल कथाएं, देवी-देवताओं की मूर्तियां और धार्मिक प्रतीक उकेरे जाते हैं, जिनमें अत्यंत बारीकी की आवश्यकता होती है। इस पत्थर की समरूपता और सख्ती यह सुनिश्चित करती है कि उस पर की गई कलाकृति न केवल स्पष्ट रूप से दिखे, बल्कि वह लंबे समय तक वैसी ही बनी रहे।</p>



<p><strong>आसानी से सह लेता है मौसम की मार<br></strong>इस पत्थर का एक और विशिष्ट गुण है इसका रंग। यह प्राकृतिक रूप से गहरा लाल होता है, जो सूरज की रोशनी में और अधिक चमकदार नजर आता है। यह रंग समय के साथ फीका नहीं पड़ता, बल्कि और निखरता है, जिससे मंदिर या इमारत को एक दिव्य और राजसी आभा प्राप्त होती है।</p>



<p>वंशी पहाड़पुर का यह पत्थर मौसम की मार भी आसानी से सह लेता है। यह न तो गर्मी में सिकुड़ता है और न ही ठंड या बारिश में फैलता है। तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव से इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जिससे यह हर मौसम के लिए उपयुक्त बनता है। यही कारण है कि यह पत्थर समय की रफ्तार को थामने वाला कहा जाता है।</p>



<p>भारतीय स्थापत्य कला की परंपरा में भी इस पत्थर की गहरी पैठ है। देश के कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के निर्माण में इसका प्रयोग किया गया है। दिल्ली का लाल किला, आगरा का किला, अयोध्या में बना श्रीराम मंदिर और बोधगया में बन रहा बुद्ध सम्यक संग्रहालय ये सभी इस लाल बलुआ पत्थर की श्रेष्ठता के उदाहरण हैं। इसकी खासियत यह है कि यह आधुनिक तकनीक और पारंपरिक वास्तुकला दोनों के अनुरूप खुद को ढाल लेता है।</p>



<p><strong>सीतामढ़ी में बन रहा पत्थर<br></strong>बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित पुनौराधाम में जो मां जानकी मंदिर बन रहा है, वह 151 फीट ऊंचा होगा और पूरी तरह इसी लाल पत्थर से निर्मित होगा। बिहार सरकार द्वारा बनवाए जा रहे इस मंदिर के निर्माण से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मंदिर की भव्यता, समानता और दीर्घकालिक सुंदरता को ध्यान में रखते हुए वंशी पहाड़पुर के लाल पत्थर का चयन किया गया है। वे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि मंदिर की हर दीवार एक समान दिखे, उसकी आभा दूर से ही श्रद्धा का भाव जगाए और सौ साल बाद भी उसकी चमक बरकरार रहे।</p>



<p>दरअसल, यह पत्थर सिर्फ एक निर्माण सामग्री नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और शिल्प परंपरा का प्रतीक बन चुका है। इसके माध्यम से केवल एक भवन नहीं बनता, बल्कि उसमें परंपरा, श्रद्धा और शिल्प की आत्मा समाहित होती है। राजस्थान के इस खास पत्थर के माध्यम से बिहार के धार्मिक पर्यटन को भी एक नई ऊंचाई मिलने जा रही है। मां जानकी मंदिर आने वाले समय में न केवल एक आस्था केंद्र होगा, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला की भव्य मिसाल के रूप में भी उभरेगा।</p>
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		<title>सीता नवमी पर करें मां जानकी के 108 नामों का मंत्र जप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 May 2024 12:07:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[108 नामों का मंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[मां जानकी]]></category>
		<category><![CDATA[सीता नवमी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="462" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/Capture-105.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/Capture-105.png 462w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/Capture-105-300x225.png 300w" sizes="(max-width: 462px) 100vw, 462px" />सनातन शास्त्रों में निहित है कि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर जगत जननी मां सीता का प्राकट्य हुआ था। अतः हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी मनाई जाती है। इस दिन स्नान-ध्यान के बाद साधक विधि-विधान से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम संग जगत जननी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="462" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/Capture-105.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/Capture-105.png 462w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/Capture-105-300x225.png 300w" sizes="auto, (max-width: 462px) 100vw, 462px" />
<p>सनातन शास्त्रों में निहित है कि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर जगत जननी मां सीता का प्राकट्य हुआ था। अतः हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी मनाई जाती है। इस दिन स्नान-ध्यान के बाद साधक विधि-विधान से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम संग जगत जननी मां सीता की पूजा करते हैं।</p>



<p>हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी मनाई जाती है। इस वर्ष 16 मई को सीता नवमी है। यह दिन जगत जननी मां सीता को समर्पित होता है। सनातन शास्त्रों में निहित है कि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर जगत जननी मां सीता का प्राकट्य हुआ था। अतः हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी मनाई जाती है। इस दिन स्नान-ध्यान के बाद साधक विधि-विधान से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम संग मां सीता की पूजा करते हैं। धार्मिक मत है कि मां सीता की पूजा-उपासना करने से साधक के जीवन में व्याप्त सकल दुख, संकट, काल और क्लेश दूर हो जाते हैं। साथ ही घर में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली आती है। अगर आप भी मां सीता की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो सीता नवमी पर विधिवत मां जानकी की पूजा करें। साथ ही पूजा के समय मां जानकी के 108 नामों का मंत्र जप करें।</p>



<p><strong>मां जानकी के 108 नाम</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>ॐ सीतायै नमः</li>



<li>ॐ जानक्यै नमः</li>



<li>ॐ देव्यै नमः</li>



<li>ॐ वैदेह्यै नमः</li>



<li>ॐ राघवप्रियायै नमः</li>



<li>ॐ रमायै नमः</li>



<li>ॐ अवनिसुतायै नमः</li>



<li>ॐ रामायै नमः</li>



<li>ॐ राक्षसान्तप्रकारिण्यै नमः</li>



<li>ॐ रत्नगुप्तायै नमः</li>



<li>ॐ मातुलिङ्ग्यै नमः</li>



<li>ॐ मैथिल्यै नमः</li>



<li>ॐ भक्ततोषदायै नमः</li>



<li>ॐ पद्माक्षजायै नमः</li>



<li>ॐ कञ्जनेत्रायै नमः</li>



<li>ॐ स्मितास्यायै नमः</li>



<li>ॐ नूपुरस्वनायै नमः</li>



<li>ॐ वैकुण्ठनिलयायै नमः</li>



<li>ॐ मायै नमः</li>



<li>ॐ श्रियै नमः</li>



<li>ॐ मुक्तिदायै नमः</li>



<li>ॐ कामपूरण्यै नमः</li>



<li>ॐ नृपात्मजायै नमः</li>



<li>ॐ हेमवर्णायै नमः</li>



<li>ॐ मृदुलाङ्ग्यै नमः</li>



<li>ॐ सुभाषिण्यै नमः</li>



<li>ॐ कुशाम्बिकायै नमः</li>



<li>ॐ दिव्यदायै नमः</li>



<li>ॐ लवमात्रे नमः</li>



<li>ॐ मनोहरायै नमः</li>



<li>ॐ हनुमद् वन्दितपदायै नमः</li>



<li>ॐ मुक्तायै नमः</li>



<li>ॐ केयूरधारिण्यै नमः</li>



<li>ॐ अशोकवनमध्यस्थायै नमः</li>



<li>ॐ रावणादिकमोहिण्यै नमः</li>



<li>ॐ विमानसंस्थितायै नमः</li>



<li>ॐ सुभृवे नमः</li>



<li>ॐ सुकेश्यै नमः</li>



<li>ॐ रशनान्वितायै नमः</li>



<li>ॐ रजोरूपायै नमः</li>



<li>ॐ सत्वरूपायै नमः</li>



<li>ॐ तामस्यै नमः</li>



<li>ॐ वह्निवासिन्यै नमः</li>



<li>ॐ हेममृगासक्त चित्तयै नमः</li>



<li>ॐ वाल्मीकाश्रम वासिन्यै नमः</li>



<li>ॐ पतिव्रतायै नमः</li>



<li>ॐ महामायायै नमः</li>



<li>ॐ पीतकौशेय वासिन्यै नमः</li>



<li>ॐ मृगनेत्रायै नमः</li>



<li>ॐ बिम्बोष्ठ्यै नमः</li>



<li>ॐ धनुर्विद्या विशारदायै नमः</li>



<li>ॐ सौम्यरूपायै नमः</li>



<li>ॐ दशरथस्तनुषाय नमः</li>



<li>ॐ चामरवीजितायै नमः</li>



<li>ॐ सुमेधा दुहित्रे नमः</li>



<li>ॐ दिव्यरूपायै नमः</li>



<li>ॐ त्रैलोक्य पालिन्यै नमः</li>



<li>ॐ अन्नपूर्णायै नमः</li>



<li>ॐ महाल्क्ष्म्यै नमः</li>



<li>ॐ धिये नमः</li>



<li>ॐ लज्जायै नमः</li>



<li>ॐ सरस्वत्यै नमः</li>



<li>ॐ शान्त्यै नमः</li>



<li>ॐ पुष्ट्यै नमः</li>



<li>ॐ शमायै नमः</li>



<li>ॐ गौर्यै नमः</li>



<li>ॐ प्रभायै नमः</li>



<li>ॐ अयोध्यानिवासिन्यै नमः</li>



<li>ॐ वसन्तशीतलायै नमः</li>



<li>ॐ गौर्यै नमः</li>



<li>ॐ स्नान सन्तुष्ट मानसायै नमः</li>



<li>ॐ रमानाम भद्रसंस्थायै नमः</li>



<li>ॐ हेमकुम्भपयोधरायै नमः</li>



<li>ॐ सुरार्चितायै नमः</li>



<li>ॐ धृत्यै नमः</li>



<li>ॐ कान्त्यै नमः</li>



<li>ॐ स्मृत्यै नमः</li>



<li>ॐ मेधायै नमः</li>



<li>ॐ विभावर्यै नमः</li>



<li>ॐ लघूधरायै नमः</li>



<li>ॐ वारारोहायै नमः</li>



<li>ॐ हेमकङ्कणमण्दितायै नमः</li>



<li>ॐ द्विजपत्न्यर्पितनिजभूषायै नमः</li>



<li>ॐ रघवतोषिण्यै नमः</li>



<li>ॐ श्रीरामसेवनरतायै नमः</li>



<li>ॐ रत्नताटङ्क धारिण्यै नमः</li>



<li>ॐ रामवामाङ्कसंस्थायै नमः</li>



<li>ॐ रामचन्द्रैक रञ्जिन्यै नमः</li>



<li>ॐ सरयूजल सङ्क्रीडा कारिण्यै नमः</li>



<li>ॐ राममोहिण्यै नमः</li>



<li>ॐ सुवर्ण तुलितायै नमः</li>



<li>ॐ पुण्यायै नमः</li>



<li>ॐ पुण्यकीर्तये नमः</li>



<li>ॐ कलावत्यै नमः</li>



<li>ॐ कलकण्ठायै नमः</li>



<li>ॐ कम्बुकण्ठायै नमः</li>



<li>ॐ रम्भोरवे नमः</li>



<li>ॐ गजगामिन्यै नमः</li>



<li>ॐ रामार्पितमनसे नमः</li>



<li>ॐ रामवन्दितायै नमः</li>



<li>ॐ राम वल्लभायै नमः</li>



<li>ॐ श्रीरामपद चिह्नाङ्गायै नमः</li>



<li>ॐ राम रामेति भाषिण्यै नमः</li>



<li>ॐ रामपर्यङ्कशयनायै नमः</li>



<li>ॐ रामाङ्घ्रिक्षालिण्यै नमः</li>



<li>ॐ वरायै नमः</li>



<li>ॐ कामधेन्वन्नसन्तुष्टायै नमः</li>



<li>ॐ मातुलिङ्गकराधृतायै नमः</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
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