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	<title>महिलाएं भी बनती हैं नागा साधु &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>महिलाएं भी बनती हैं नागा साधु, जानिए 14 रोचक जानकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Jan 2021 06:08:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए 14 रोचक जानकारी]]></category>
		<category><![CDATA[महिलाएं भी बनती हैं नागा साधु]]></category>
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					<description><![CDATA[सिंहस्थ, कुंभ और महाकुभ में महिला नागा साधुओं को लेकर हमेशा से उत्सुकता बनी रही है। लोग यह जानने को बेचैन रहते हैं कि कैसा होता है महिला नागा साधुओं का जीवन। आमतौर पर कुंभ या महाकुंभ में महिला नागा साधु नजर नहीं आती थी, परंतु सन् 2019 के प्रयागराज कुंभ में पहली बार धूम &#8230;]]></description>
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<p>सिंहस्थ, कुंभ और महाकुभ में महिला नागा साधुओं को लेकर हमेशा से उत्सुकता बनी रही है। लोग यह जानने को बेचैन रहते हैं कि कैसा होता है महिला नागा साधुओं का जीवन। आमतौर पर कुंभ या महाकुंभ में महिला नागा साधु नजर नहीं आती थी, परंतु सन् 2019 के प्रयागराज कुंभ में पहली बार धूम धाम से उनकी सवारी निकली थी तब लोगों एक साथ इतनी महिला साधुओं को देखा था। आओ जानते हैं महिला नागा साधुओं के बारे में दिलचस्प जानकारी।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="456" height="329" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/01/dfgdfg.jpg" alt="" class="wp-image-414591" /></figure>



<p>1. पुरुष साधुओं को सार्वजनिक तौर पर नग्न होने की इजाजत है लेकिन महिला साधु ऐसा नहीं कर सकती। हालांकि जूना अखाड़े की महिलाओं को यह इजाजत भी मिली हुई है। वैसे महिला नागा साधु को नग्न रहने की इजाजत नहीं है। खासकर कुंभ में डुबकी लगाने वाले दिन में तो एकदम नहीं।<br>2. नागा एक पदवी होती है। साधुओं में वैष्&#x200d;णव, शैव और उदासीन तीनों ही संप्रदायों के अखाड़े नागा बनाते हैं। नागा में बहुत से वस्त्रधारी और बहुत से दिगंबर (निर्वस्त्र) होते हैं। इसी तरह महिलाएं भी जब संन्यास में दीक्षा लेती हैं तो उन्हें भी नागा बनाया जाता है, लेकिन वे सभी वस्त्रधारी होती हैं।3. महिला साधुओं को बस एक ही कपड़ा पहनने की अनुमति होती है। यह कपड़ा भी सिला हुआ नहीं होता है। इसे &#8216;गंती&#8217; कहा जाता है। इन महिलाओं को कुंभ के स्नान के दौरान नग्न स्नान भी नहीं करना होता है। वे स्नान के वक्त भी इस गेरुए वस्त्र को पहने रहती हैं।<br>4. 13 अखाड़ों से जूना अखाड़ा साधुओं का सबसे बड़ा अखाड़ा है। पहली बार प्रयागराज 2013 में जूना अखाड़े में महिलाओं के माई बाड़ा अखाड़े को भी जूना अखाड़ा में शामिल कर लिया गया था। </p>



<p>5. इसके बाद प्रयागराज 2019 के कुंभ में किन्नर अखाड़े को भी अखाड़े की मान्यता देकर जूना अखाड़ा में शामिल कर लिया गया है। किन्नर अखाड़े के प्रमुख लक्ष्मीनाराण त्रिपाठी है।</p>



<p>6. महिलाओं के इस अखाड़े से अलग अखाड़ों में भी कई महिला साधु हैं जो भिन्न भिन्न अखाड़ों से जुड़ी हुई हैं और नाग सहित कई अलग अलग पदवियों से सम्मानित है।<br>7 . जूना अखाड़ा ने माई बाड़ा को दशनाम संन्यासिनी अखाड़ा का स्वरूप प्रदान कर किया था। कुंभ क्षेत्र में माई बाड़ा का पूरा चोला बदल गया है और अखाड़े ने सहमति देकर मुहर लगा दी है। उस वक्त लखनऊ के श्री मनकामनेश्वर मंदिर की प्रमुख महंत दिव्या गिरी को संन्यासिनी अखाड़े का अध्यक्ष बनाया गया था।</p>



<p>8. इस अखाड़े की महिला साधुओं को &#8216;माई&#8217;, &#8216;अवधूतानी&#8217; या &#8216;नागिन&#8217; कहा जाता है। हालांकि इन &#8216;माई&#8217; या &#8216;नागिनों&#8217; को अखाड़े के प्रमुख पदों में से किसी पद पर नहीं चुना जाता है। लेकिन उन्हें किसी खास इलाके के प्रमुख के तौर पर &#8216;श्रीमहंत&#8217; का पद दिया जाता है।</p>



<p>9. श्रीमहंत के पद पर चुनी जाने वाली महिलाएं शाही स्नान के दौरान पालकी में चलती हैं। साथ ही उन्हें अखाड़े का ध्वज, डंका और दाना अपने धार्मिक ध्वज के नीचे लगाने की छूट होती है।</p>



<p>10. जूना अखाड़े में दस हजार से अधिक महिला साधु-संन्यासी हैं। इसमें विदेशी महिलाओं की संख्या भी बहुतायत में है। खासकर यूरोप की महिलाओं के बीच नागा साधु बनने का आकर्षण बढ़ा है। यह जानते हुए भी कि नागा बनने के लिए कई कठिन प्रक्रिया और तपस्या से गुजरना होता है विदेशी महिलाओं ने इसे अपनाया है।<br>11. पिछले 2013 के कुंभ में फ्रांस की कोरिने लियरे &#8216;नागा साधु&#8217; बनी थीं। उन्हें नया नाम दिव्या गिरी दिया गया था। वैसे दिव्या ने 2004 में साधु की दीक्षा ली लेकिन कठित तप करने के बाद उन्हें नागा पद मिला। उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड हाइजिन, नई दिल्ली से मेडिकल टेक्नीशियन की पढ़ाई पूरी की थी। उनका कहना है कि महिलाएं कुछ चीजे अलग से करना चाहती है। वह कहती है कि अब हमारी नई पहचान है। भगवा कपड़ों में लिपटी दिव्या बताती है अभी भी अखाड़ों में पुरुष और महिलाओं में बराबरी नहीं आई है। फ्रांस की एक अन्य महिला अपना पुराना नाम नहीं बतातीं, लेकिन दीक्षा लेने के बाद उनका नाम अब संगम गिरि है। संगम गिरि ने अपने लिए महिला गुरुओं की तलाश शुरू कर दी है। एक नागा साधु को पांच गुरु चुनने होते हैं।<br>निकोले जैकिस न्यूयॉर्क में फिल्म निर्माण से जुडी थीं। वह 2001 में साधु बन चुकी है और अब कुछ महिला साधुओं के लिए संपर्क अधिकारी के तौर पर काम कर रही है। उनका कहना है कि भारत में महिलाएं अब तक अपने जीवन में पुरुषों पर निर्भर रही है। कभी पिता कभी पति और कभी बेटे पर, लेकिन<br>पश्चिम में ऐसा नहीं होता।</p>



<p>12. महिला साधु अपने अखाड़े में तकनीक का इस्तेमाल भी खूब करती है। जूना संन्यासिन अखाड़ा में तीन चौथाई महिलाएं नेपाल से आई हुई है। नेपाल में ऊंची जाति की विधवाओं के दोबारा शादी करने को समाज स्वीकार नहीं करता। ऐसे मे ये विधवाएं अपने घर लौटने की बजाए साधु बन जाती है।</p>



<p>14. अखाड़ा कुंभ पर्व में महिला संन्यासियों के लिए माई बाड़ा नाम से अलग शिविर स्थापित किया जाता है। यह शिविर जूना अखाड़े के ठीक बगल में बनवाया जाता है।<br>गौरलतब है कि माई बाड़ा की अपनी कोई स्वतंत्र पहचान नहीं थी और न ही उनकी धर्मध्वजा अलग थी। महिला साधुओं की सभी धार्मिक गतिविधियां जूना अखाड़े के साथ सम्मिलित थीं। इस बीच अखाड़े में महिला साधुओं की संख्या बढ़ने पर उन्होंने अपने अलग अस्तित्व की मांग उठाई। उनकी मांग पर जूना अखाड़े ने प्रयाग कुंभ 2013 में महिला संन्यासियों की मांग पर विचार करने को बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में उनकी सभी मांगे स्वीकार कर उन्हें मान्यता दी गई।</p>
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