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	<title>महाभारत &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>महाभारत &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>महाभारत फेम अभिनेता पंकज धीर का निधन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Oct 2025 09:56:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मनोरंजन]]></category>
		<category><![CDATA[महाभारत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/66-1-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/66-1.png 736w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/66-1-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />बी आर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में कर्ण के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता पंकज धीर का निधन हो गया है। अमर उजाला से इस खबर की पुष्टि ‘महाभारत’ में ही अर्जुन का किरदार निभाने वाले अभिनेता फिरोज खान ने की। पंकज का निधन बुधवार (15 अक्तूबर) सुबह 11:30 बजे हुआ। फिलहाल उनके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/66-1-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/66-1.png 736w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/10/66-1-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बी आर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में कर्ण के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता पंकज धीर का निधन हो गया है। अमर उजाला से इस खबर की पुष्टि ‘महाभारत’ में ही अर्जुन का किरदार निभाने वाले अभिनेता फिरोज खान ने की। पंकज का निधन बुधवार (15 अक्तूबर) सुबह 11:30 बजे हुआ। फिलहाल उनके निधन की खबर सुनकर हर कोई हैरान है। उनका अंतिम संस्कार शाम 4:30 बजे मुंबई के विले पार्ले में किया जाएगा।</p>



<p><strong>दोस्त ने दी जानकारी</strong></p>



<p>इस खबर के सामने आने के बाद इंडस्ट्री के दोस्त और फैंस गहरे सदमे में है। महाभारत में अर्जुन का किरदार निभाने वाले और पंकज के सह अभिनेता रहे फिरोज खान ने अमर उजाला से खास बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘हां, यह सच है कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। व्यक्तिगत रूप से, मैंने एक बहुत ही अच्छे दोस्त को खो दिया है। वह बेहद अच्छे इंसान थे। मैं अभी भी सदमे में हूँ और मुझे नहीं पता क्या कहना चाहिए। वह वाकई में एक अद्भुत व्यक्ति थे… फिलहाल मैं और अधिक कुछ नहीं कह सकता।’</p>



<p><strong>कैंसर के चलते हुआ निधन</strong></p>



<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंकज धीर का निधन कैंसर की वजह से हुआ। कुछ समय पहले उन्होंने कैंसर को हराया था लेकिन कुछ समय के बाद उनका कैंसर फिर से लौट आया। वो पिछले काफी समय से इसी के चलते बीमार चल रहे थे।</p>



<p><strong>किस्मत ने बना दिया महाभारत का ‘कर्ण’</strong></p>



<p>एक इंटरव्यू में पंकज धीर ने उस दिलचस्प किस्से को याद किया था जब उन्हें अर्जुन के किरदार के लिए सिलेक्ट किया गया था। उस समय लेखकों और पैनल के सदस्यों रही मासूम रजा, भृंग तुपकरी और पंडित नरेंद्र शर्मा ने एकमत से कहा था कि वह अर्जुन के किरदार के लिए बिल्कुल फिट हैं। उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट पर साइन भी कर दिया था। लेकिन तभी चोपड़ा साहब ने कहा कि अर्जुन के रूप में उन्हें बृहन्नला (अर्जुन का नपुंसक अवतार) की भूमिका भी निभानी होगी, जिसके लिए मूंछें हटानी जरूरी हैं।</p>



<p>पंकज धीर ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका चेहरा मूंछों के साथ ही संतुलित दिखता है, और बिना मूंछ के उनका लुक बदल जाएगा। बी.आर. चोपड़ा ने नाराज होकर उनसे कहा, ‘क्या आप वाकई एक्टर हैं? इतनी बड़ी भूमिका सिर्फ मूंछ के कारण छोड़ रहे हैं?’ और इसी के साथ उन्होंने पंकज को अपने ऑफिस से बाहर जाने के लिए कह दिया।</p>
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		<title>करोड़ों में बनी थी बी आर चोपड़ की &#8216;महाभारत&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Nov 2023 04:51:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मनोरंजन]]></category>
		<category><![CDATA[&#039;महाभारत&#039; शो]]></category>
		<category><![CDATA[महाभारत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="399" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/enter-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/enter-2.jpg 851w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/enter-2-300x194.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/enter-2-768x496.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />21वीं सदी के इस जमाने में अनेकों &#8216;महाभारत&#8217; शो बने। चेहरे बदले, लेकिन किरदार वही रहे। बात जब भी महाभारत की होती है, तो इस ऐतिहासिक शो की कहानी को छोटे पर्दे पर उतरने वाले बलदेव राज चोपड़ा (बी आर चोपड़ा) का जिक्र जरूर होता है। आज है बी आर चोपड़ा की डेथ एनिवर्सरी बी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="399" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/enter-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/enter-2.jpg 851w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/enter-2-300x194.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/enter-2-768x496.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>21वीं सदी के इस जमाने में अनेकों &#8216;महाभारत&#8217; शो बने। चेहरे बदले, लेकिन किरदार वही रहे। बात जब भी महाभारत की होती है, तो इस ऐतिहासिक शो की कहानी को छोटे पर्दे पर उतरने वाले बलदेव राज चोपड़ा (बी आर चोपड़ा) का जिक्र जरूर होता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">आज है बी आर चोपड़ा की डेथ एनिवर्सरी</h2>



<p>बी आर चोपड़ा ने महाभारत की कहानी को कुछ इस तरह दिखाया की फिर कभी किरदारों का वैसा जादू दूसरी पौराणिक कहानियों में नहीं देखने को मिला। हालांकि, बी आर चोपड़ा सिर्फ &#8216;महाभारत&#8217; के लिए नहीं जाने जाते हैं। उन्होंने कुछ मशहूर फिल्में भी बनाई थीं, जिसने समाज को पारिवारिक और साफ सुथरी कहानियां परोसी‌ं। आज 5 नवंबर को बी आर चोपड़ा की डेथ एनिवर्सरी है।</p>



<p>बी आर चोपड़ा का जन्म 22 अप्रैल, 1914 में पंजाब के लुधियाना में हुआ था। उन्होंने लाहौर के मशहूर विश्वविद्यालय से इंग्लिश में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद बी आर चोपड़ा ने हेराल्ड नाम की मैगजीन में बतौर फिल्मी पत्रकार काम किया।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पहली फिल्म और विभाजन</h2>



<p>1947 तक बी आर चोपड़ा ने सिने हेराल्ड में काम करने के दौरान उन्होंने फिल्म &#8216;चांदनी चौक&#8217; बनाना शुरू किया। इस फिल्म की अभी शुरुआत हुई ही थी कि इस दौरान लाहौर में दंगे हो गए। इसके बाद 1947 में विभाजन के बाद वह और उनके परिवार भारत में मुंबई में आकर बस गया। फिल्मों के शौकीन बी आर चोपड़ा का प्यार चकाचौंध की दुनिया के लिए यहां पर आकर भी कम नहीं हुआ।</p>



<h2 class="wp-block-heading">इंडिया आकर बॉलीवुड में आजमाई किस्मत</h2>



<p>&#8216;चांदनी चौक&#8217; तो धरी रह गई। इसके बाद इंडिया आकर बी आर चोपड़ा ने 1948 में पहली मूवी &#8216;करवट&#8217; का निर्माण किया। हालांकि बी आर चोपड़ा को इंडस्ट्री में अभी तक पहचान नहीं मिली थी क्योंकि यह फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई थी। बीआर चोपड़ा द्वारा प्रोड्यूस की गई हिट फिल्म &#8216;अफसाना&#8217; थी, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अपने प्रोडक्शन में बनाई यह फिल्में</h2>



<p>1955 में बीआर चोपड़ा ने खुद का प्रोडक्शन हाउस बी आर फिल्म्स शुरू किया। इस बैनर में पहली फिल्म &#8216;नया दौर&#8217; बनी थी, जिससे बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक रिस्पांस मिलने के साथ ही दिलीप कुमार और वैजयंती माला की जोड़ी भी हिट हो गई थी। इसके बाद गुमराह, साधना, कानून जैसी तमाम सुपरहिट फिल्में इस बैनर के तले बनाई गईं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">&#8216;महाभारत&#8217; ने चमकाई किस्मत</h2>



<p>टेलीविजन की दुनिया में भी बी आर चोपड़ा का योगदान अहम रहा है। फिल्म प्रोडक्शन से उन्हें इंडस्ट्री में पहचान तो मिल गई थी, उनके सफल नाम के आगे सबसे ज्यादा &#8216;महाभारत&#8217; को जोड़कर देखा गया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">9 करोड़ में बनाई थी &#8216;महाभारत&#8217;</h2>



<p>यह सीरियल उस दौर में बनाया गया था, जब इसकी लागत करीब 9 करोड रुपए थी। जहां बी आर चोपड़ा ने शो के प्रोडक्शन की जिम्मेदारी संभाली, तो वहीं उनके बेटे रवि चोपड़ा ने सीरियल को डायरेक्ट किया था। 1988 में शुरू हुए इस शो की बराबरी नहीं कर सका।</p>



<h2 class="wp-block-heading">द्रौपदी के लिए पहली पसंद थी यह एक्ट्रेस</h2>



<p>द्रौपदी &#8216;महाभारत&#8217; का मुख्य किरदार है। बी आर चोपड़ा की महाभारत में रूपा गांगुली ने निभाया था। लेकिन रूपा इसके लिए पहली पसंद नहीं थीं। कहा जाता है कि बी आर, जूही चावला को द्रौपदी बनाना चाहते थे। इसके लिए एक्ट्रेस से बात भी की गई थी। लेकिन तब उनकी फिल्म &#8216;कयामत से कयामत तक&#8217; रिलीज हो गई थी। ऐसे में जूही ने टीवी का रुख न करना सही समझा।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अमिताभ बच्चन संग बनाई आखिरी फिल्म</h2>



<p>बी आर चोपड़ा की आखिरी फिल्म &#8216;भूतनाथ&#8217; थी। अमिताभ बच्चन के करियर की सुपरहिट फिल्मों में से एक इस मूवी के निर्माता भी वही थे। 5 नवंबर, 2008 को उनका 94 की उम्र में निधन हो गया।</p>



<h2 class="wp-block-heading">फिल्मों में बेहतरीन योगदान के लिए मिले थे यह अवार्ड्स</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li>फिल्मफेयर पुरस्कार- सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (कानून)</li>



<li>दादासाहेब फाल्के पुरस्कार- 1998</li>



<li>अप्सरा पुरस्कार- सर्वश्रेष्ठ कॉन्ट्रिब्यूशन टू इंडियन सिनेमा</li>



<li>पद्म भूषण- 2001</li>



<li>राष्ट्रीय रजत पदक &#8211; 1961 (धर्मपुत्र)</li>



<li>फिल्मफेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ निदेशक- 1962</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महाभारत का युद्ध, शकुनि की इन 3 चालों के कारन हुआ था&#8230;</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%bf-%e0%a4%95%e0%a5%80/236739</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 May 2019 06:57:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[3 चालों]]></category>
		<category><![CDATA[महाभारत]]></category>
		<category><![CDATA[शकुनि]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="259" height="194" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/download-2019-05-24T122634.847.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />महाभारत की गाथा में कौरवों के मामाश्री शकुनि को अपनी कुटिल बुद्धि के लिए विख्&#x200d;यात माना जाता है. इसी के साथ छल, कपट और दुष्कृत्यों में माहिर शकुनि ने युद्ध तक पांडवों के विनाश के लिए कई चालें चली. कहा जाता है इन्हीं चालों के कारण पांडवों के जीवन में उथल पुथल रही और अंतत: &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="259" height="194" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/download-2019-05-24T122634.847.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><strong>महाभारत की गाथा में कौरवों के मामाश्री शकुनि को अपनी कुटिल बुद्धि के लिए विख्&#x200d;यात माना जाता है. इसी के साथ छल, कपट और दुष्कृत्यों में माहिर शकुनि ने युद्ध तक पांडवों के विनाश के लिए कई चालें चली. </strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-236742 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/download-2019-05-24T122634.847.jpg" alt="" width="689" height="516" /></p>
<p><strong>कहा जाता है इन्हीं चालों के कारण पांडवों के जीवन में उथल पुथल रही और अंतत: युद्ध की नौबत आ गई. आइए जानते हैं उन चालों को.</strong></p>
<p><strong>1.पहली चाल- दुर्योधन और गांधारी का भाई शकुनि, कुंती के पुत्रों को मारने के लिए नई-नई योजनाएं बनाते थे. इसी योजना के तहत एक बार दुष्ट दुर्योधन ने भीम को जहर देने की योजना बनाई. सभी को गंगा के तट पर प्रणामकोटि स्थान में जलक्रीड़ा करने और उत्सव मनाने के लिए एकत्रित किया और दुर्योधन की योजना अनुसार भीमसेन के भोजन में विष मिला दिया गया. </strong></p>
<p><strong>कहते हैं कि यह कालकूट विष था जिसका असर धीरे-धीरे होता है. निश्चेष्&#x200d;ठ भीम को दुर्योधन लता की रस्सियों से मुर्दे की तरह बांधकर गंगा के ऊंचे तट से जल में ढकेल देता है. अन्य पांडवों को इसका भान भी नहीं होता है. </strong><strong>भीम बेहोश अवस्था में ही गंगा के भीतर स्थित नागलोक जा पहुंचता है. वहां विषैले सांप भीमसेन को खूब डसते हैं. सर्पों के द्वारा डसने से दुर्योधन द्वारा दिए गए विष का प्रभाव कम हो जाता है. भीमसेन जाग्रत हो जाता है. तब वह सर्पों को पकड़ पकड़ कर मारने लगता है. यह देख बाकी के सर्प भाग जाते हैं. भागकर वे नागराज वासुकि के पास जाते हैं और उन्हें सारा वृत्तांत सुनाते हैं. ऐसे में वासुकि नाग स्वयं भीमसेन के पास जाते हैं. उनके साथ गए आर्यक नाम के एक नाग भीमसेन को देखकर पहचान लेते हैं. आर्यक नाग भीमसेन के नाना का नाना था. तब वासुकि पूछते हैं, &#8216;हम इसको क्या भेंट दें. इसको बहुत सारे धन और रत्न दे दों.&#8217;&#8230; आर्यक कहते हैं कि नागेंद्र यह धन और रत्न लेकर क्या करेगा. यदि आप इस पर प्रसन्न हैं तो इस उन कुण्डों का रस पीने की आज्ञा दीजिए, जिनसे सहस्रों हाथियों का बल प्राप्त होता है.&#8217; इस प्रकार भीमसेन के शरीर में दस हजार हाथियों का बल प्राप्त हो जाता है.</strong></p>
<p><strong>2.दूसरी चाल- जब धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर को हस्तिनापुर का युवराज घोषित किया. तब दुर्योधन और शकुनि के मन में आग लग गई. तब शकुनि ने पांचों पांडवों को मारने की योजना बनाई. उसने पांचों पांडवों को धृतराष्ट्र पर दबाव डालकर वारणावत भेज दिया जहां लाक्षागृह में आग लगाकर पांडवों को जिंदा जला कर मारने की योजना बनाई. लेकिन एन वक्त पर महात्मा विदुर ने पांडवों को गुप्त संदेश भिजवाया और शकुनि की चाल का खुलासा हुआ. तब पांचों पांडवों ने विदुर के एक विश्&#x200d;वासपात्र से सुरंग खुदवाई और उसी सुरंग के माध्यम से वे लाक्षागृह से बाहर निकलकर गंगापार जंगल में चले गए. इधर हस्तिनापुर में खबर फैला दी गई की पांडव लाक्षागृह की दुर्घटना में मारे गए हैं. लेकिन कुछ काल के बाद विदुरजी ही पांडवों को हस्तिनापुर लेकर आए और फिर उनको इंद्रप्रस्थ का राज्य दिया गया. </strong><strong>शकुनि की इस चाल से यह मकसद तो सिद्ध हो गया कि पांडवों को हस्तिनापुर का राज्य नहीं मिलेगा और दुर्योधन ही हस्तिनापुर का युवराज बनेगा. हुआ भी यही. शुनिक की इस चाल से पांडवों को राज्य से दूर जंगल में समय बिताना पड़ा. हालांकि वहां भीम ने जहां हिडिंबा से विवाह किया वहीं पांचों पांडवों ने द्रौपदी से विवाह भी किया.</strong></p>
<p><strong>3.तीसरी चाल- जब युधिष्ठिर को इंद्रप्रस्थ का राज्य मिला तो उन्होंने अपने राज्य के विस्तार के लिए राजसूय यज्ञ किया. इस यज्ञ के चलते उनके राज्य का विस्तार होता गया और उनकी शक्ति बढ़ती गई. इस बढ़ती शक्ति से चिंतित होकर ही शकुनि ने दुर्योधन के साथ मिलकर कपट की नई योजना बनाई. उसने चौसर अथवा द्यूतक्रीड़ा (जूए के खेल का आयोजन करवाया). लेकिन पांडव यह नहीं जानते थे कि शकुनि के पासे केवल उसी के इशारे पर चलते हैं. खेल की शुरुआत में पांडवों का उत्साह बढ़ाने के लिए शकुनि ने दुर्योधन को आरंभ में कुछ पारियों की जीत युधिष्ठिर के पक्ष में चले जाने को कहा जिससे कि पांडवों में खेल के प्रति उत्साह उत्पन्न हो सके. फिर धीरे-धीरे खेल के उत्साह में युधिष्ठिर अपनी सारी दौलत व साम्राज्य जुए में हार गए.</strong></p>
<p><strong> अंत में शकुनि ने युधिष्ठिर को सब कुछ एक शर्त पर वापस लौटा देने का वादा किया कि यदि वे अपने बाकी पांडव भाइयों व अपनी पत्नी द्रौपदी को दांव पर लगाएं. मजबूर होकर युधिष्ठिर ने शकुनि की बात मान ली और अंत में वे यह पारी भी हार गए. इस खेल में पांडवों व द्रौपदी का अपमान ही कुरुक्षेत्र के युद्ध का सबसे बड़ा कारण साबित हुआ.</strong><strong>फिर धृतराष्ट्र के द्रौपदी के वचन देने पर पांडवो को दासत्व से मुक्त किया गया. धृतराष्ट्र ने सभी को धन और धान्य देकर पुन: इंद्रप्रस्&#x200d;थ जाने की आज्ञा दी, लेकिन यह देखकर शकुनि, दुर्योधन और दुशासन भड़क उठे और उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया. उन्होंने कहा कि हम वनवास की शर्त पर पांडवों के साथ पुन: जुआ खेलेंगे.</strong><strong>युधिष्ठिर से शकुनि ने कहा कि आपको सभी धनराशि लौटा दी गई है. लेकिन अब हम एक दांव और लगाना चाहते हैं. यदि आप इस अंतिम दांव में हा जाएंगे तो आपको बारह वर्ष तक वनवास भोगना होगा और उस समय कोई पहचान ले तो आपको एक वर्ष और अज्ञात वास में रहना होगा. और इस वक्त भी कोई पहचान ले तो फिर से बारह वर्ष वन में ही रहना होगा. इस प्रकार तेरह वर्ष पूर्ण होने पर आप उचितरूप से अपना राज्य पुन: ले सकते हैं. यदि हम हार गए तो अभी ही ले सकते हैं. जुए का खेल शुरू हुआ और पांडव फिर हार गए. इस हार के बाद पांडवों को तेरह वर्ष वनवास में ही रहना पड़ा जिसके चलते उनका जीवन बदल गया.</strong></p>
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		<title>यह राजकुमारी करती थी कर्ण से बहुत प्यार, महाभारत की, माता-पिता के खिलाफ शादी की थी&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 May 2019 09:28:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[कर्ण]]></category>
		<category><![CDATA[महाभारत]]></category>
		<category><![CDATA[माता पिता]]></category>
		<category><![CDATA[राजकुमारी]]></category>
		<category><![CDATA[शादी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-1024x576.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-1024x576.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-768x432.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />बहुत कम लोग महाभारत से जुडी सभी बातों को जानते हैं. ऐसे में महाभारत में कई सुंदर स्त्रियों ने जन्म लिया था लेकिन उरवी एक ऐसी सुंदर स्त्री थी जिसने कर्ण के शौर्य और पराक्रम को देख कर उससे प्रेम और विवाह किया था. कहा जाता है राजकुमारी उरवी सुंदर होने के साथ-साथ एक पक्के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-1024x576.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-1024x576.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-768x432.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8.jpg 1280w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>बहुत कम लोग महाभारत से जुडी सभी बातों को जानते हैं. ऐसे में महाभारत में कई सुंदर स्त्रियों ने जन्म लिया था लेकिन उरवी एक ऐसी सुंदर स्त्री थी जिसने कर्ण के शौर्य और पराक्रम को देख कर उससे प्रेम और विवाह किया था. कहा जाता है राजकुमारी उरवी सुंदर होने के साथ-साथ एक पक्के इरादों वाली महिला थी और उनके पिता एक सम्मानित राज्य पुकैय के राजा थे उनके पिता सम्मानित राजा होने के कारण राजकुमारी उरवी के लिए कई राजकुमारों के रिश्ते आए थे.</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-234324 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8.jpg 1280w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-768x432.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/maxresdefault-8-1024x576.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>वह केवल कर्ण से प्रेम करती थी और उससे विवाह करना चाहती थी इस कारण से उसने अपने माता-पिता के सम्मान को ना देखते हुए कर्ण की पत्नी बनने का फैसला लिया था. कहा जाता है जब उरवी ने कर्ण से शादी की तो उसे और उनके पिता को खूब आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था क्योंकि कर्ण एक सारथी का पुत्र था और उस जमाने में सारथी को एक नीच वर्ग का व्यक्ति समझा जाता था. इसी के साथ कहते हैं उरवी का जीवन कर्ण के साथ काफी चुनौतीपूर्ण तरीके से बिता था क्योंकि कर्ण दुर्योधन का पक्का मित्र था और वह दुर्योधन की हर प्रकार से सहायता करता था. इस कारण उरवी को पहले ही पता था कि कर्ण की मृत्यु एक दिन दुर्योधन के कारण ही होगी लेकिन फिर भी उरवी ने अपने आप को संभाला और एक सशक्त महिला होने का परिचय दिया था. इसी के साथ कर्ण की मृत्यु के बाद उरवी पांडवों के साथ रहने चली गईं थीं.</strong></p>
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		<title>महाभारत युद्ध की वजह थी द्रोपदी, कैसे हुआ था जन्म जानिए&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 May 2019 06:17:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जन्म]]></category>
		<category><![CDATA[द्रोपदी]]></category>
		<category><![CDATA[महाभारत]]></category>
		<category><![CDATA[युद्ध]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="435" height="326" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017.jpg 435w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 435px) 100vw, 435px" />आज के समय में पौराणिक कथाओं को पढ़ने के लिए लोग शास्त्रों का सहारा लेते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं द्रोपदी की एक ऐसी कथा जिसे आप शायद ही जानते होंगे. जी हाँ, कहा जाता है शास्त्रों के अनुसार अगर कौरव भरी सभा में यूं द्रोपदी का अपमान न करते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="435" height="326" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017.jpg 435w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 435px) 100vw, 435px" /><p><strong>आज के समय में पौराणिक कथाओं को पढ़ने के लिए लोग शास्त्रों का सहारा लेते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं द्रोपदी की एक ऐसी कथा जिसे आप शायद ही जानते होंगे. जी हाँ, कहा जाता है शास्त्रों के अनुसार अगर कौरव भरी सभा में यूं द्रोपदी का अपमान न करते तो शायद महाभारत का युद्ध हुआ ही न होता. महाभारत के युद्ध में द्रोपदी की अहम भूमिका थी और द्रौपदी पांडवों की पत्नी थी और भरी सभा में कौरवों ने उसका अपमान किया था. इसी के साथ उसके बाद कौरवों से बदला लेने के लिए पांडवों ने उनसे युद्ध किया लेकिन क्या आप जानते हैं द्रौपदी का जन्म कैसे हुआ. अगर नहीं तो आइए हम आपको बताते हैं इसके बारे में.</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-233260 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017.jpg" alt="" width="435" height="326" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017.jpg 435w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dropadhijiii_27_06_2017-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 435px) 100vw, 435px" /></p>
<p><strong>द्रोपदी के जन्म की कथा-  द्रोणाचार्य और द्रुपद बचपन के मित्र थे. राजा बनने के बाद द्रुपद को अंहकार हो गया. जब द्रोणाचार्य राजा द्रुपद को अपना मित्र समझकर उनसे मिलने गए तो द्रुपद ने उनका बहुत अपमान किया. बाद में द्रोणाचार्य ने पाण्डवों के माध्यम से द्रुपद को पराजित कर अपने अपमान का बदला लिया. राजा द्रुपद अपनी पराजय का बदला लेना चाहते थे इसलिए उन्होंने ऐसा यज्ञ करने का निर्णय लिया, जिसमें से द्रोणाचार्य का वध करने वाला वीर पुत्र उत्पन्न हो सके.राजा द्रुपद इस यज्ञ को करवाने के लिए कई विद्वान ऋषियों के पास गए, लेकिन किसी ने भी उनकी इच्छा पूरी नहीं की. </strong><strong>अंत में महात्मा याज ने द्रुपद का यज्ञ करना स्वीकार किया. महात्मा याज ने जब राजा द्रुपद का यज्ञ करवाया तो यज्ञ के अग्निकुण्ड में से एक दिव्य कुमार प्रकट हुआ. इसके बाद उस अग्निकुंड में से एक दिव्य कन्या भी प्रकट हुई. वह अत्यंत ही सुंदर थी. ब्राह्मणों ने उन दोनों का नामकरण किया. वे बोले- यह कुमार बड़ा धृष्ट (ढीट) और असहिष्णु है. इसकी उत्पत्ति अग्निकुंड से हुई है, इसलिए इसका धृष्टद्युम्न होगा. यह कुमारी कृष्ण वर्ण की है इसलिए इसका नाम कृष्णा होगा. द्रुपद की पुत्री होने के कारण कृष्णा ही द्रौपदी के नाम से विख्यात हुई.</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
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