महात्मा गांधी – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Tue, 28 Apr 2026 08:57:24 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg महात्मा गांधी – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 AAP नेताओं के साथ राजघाट पहुंचे अरविंद केजरीवाल, महात्मा गांधी को किया नमन https://livehalchal.com/aap-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%98%e0%a4%be%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%82/670571 Tue, 28 Apr 2026 08:57:23 +0000 https://livehalchal.com/?p=670571 आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया राजघाट पहुंचे हैं। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष आतिशी भी हैं। उन्होंने राजघाट पर महात्मा गांधी को नमन किया। इससे पहले अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्ण कांता को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत …]]>

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया राजघाट पहुंचे हैं। उनके साथ नेता प्रतिपक्ष आतिशी भी हैं। उन्होंने राजघाट पर महात्मा गांधी को नमन किया। इससे पहले अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्ण कांता को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की अदालत में खुद या वकील के पेश नहीं होने का एलान किया। उन्होंने इसे सत्याग्रह का नाम दिया है।

यह बेहद संवेदनशील मामला है: केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘हम अपने देश की न्यायप्रणाली का बहुत सम्मान करते हैं। आज हम जो आजाद घूम रहे हैं तो उसका कारण केवल हमारी न्याय प्रणाली है। कुछ ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जिस कारण हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। हमने सभी बाते उस चिट्ठी में लिखी हैं जो कि हमने जज साहिबा को भेजी है। यह बेहद संवेदनशील मामला है।’ सीबीआई की अपील याचिका पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा सुनवाई किए जाने पर आपत्ति जताने के बाद केजरीवाल ने फैसला किया कि वह आगे इस मामले में न तो खुद पेश होंगे और न ही उनके कोई वकील जिरह करेंगे।

अरविंद केजरीवाल ने अपने पत्र में क्या कहा था?
केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को चार पन्नों का पत्र लिखकर यह जानकारी दी। पत्र में उन्होंने कहा कि मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर यह निर्णय ले रहा हूं। मैं इसके नतीजों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। हो सकता है कि इससे मेरे कानूनी हितों को नुकसान पहुंचे, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि वे न्यायमूर्ति शर्मा के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अपना अधिकार सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने लिखा अपने पत्र में अदालत में बहस के दौरान दी गई दलील दोहराते हुए कहा कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।

गांधी के सत्याग्रह का हवाला
पत्र में केजरीवाल ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के सिद्धांत का हवाला दिया और कहा कि यह फैसला केवल इसी मामले तक सीमित है। उन्होंने न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन के उदाहरण दिए, जिन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के वकालत करने के कारण हाईकोर्ट से स्थानांतरण की मांग की थी। केजरीवाल ने लिखा कि न्यायमूर्ति शर्मा की टिप्पणियों से उनकी अर्जी को न्यायिक और संस्थागत अपमान के रूप में लिया गया, जिसके बाद निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं रह गई है।

सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को चिट्ठी लिखी
वहीं, मनीष सिसोदिया ने चिट्ठी में लिखा, ‘मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा। आपके बच्चों का भविष्य सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के हाथों में है। ऐसे में मुझे न्याय की उम्मीद नहीं है। सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। ‘

यह है मामला
दिल्ली हाईकोर्ट में सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है, जिसमें आबकारी घोटाले में केजरीवाल समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इस अपील याचिका पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा सुनवाई कर रही हैं। केजरीवाल ने 13 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर न्यायमूर्ति शर्मा से खुद को मामले से अलग करने की मांग की थी।

20 अप्रैल को अदालत ने उनकी इस अर्जी को खारिज कर दिया और टिप्पणी की कि किसी राजनेता को न्यायपालिका पर अविश्वास फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद केजरीवाल ने पत्र लिखकर कहा कि अब उन्हें विश्वास नहीं रहा कि न्यायमूर्ति शर्मा निष्पक्ष तरीके से सुनवाई कर पाएंगी।

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महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि आज, पीएम मोदी समेत इन नेताओं ने बापू को किया नमन https://livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-78%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a3%e0%a5%8d/657619 Fri, 30 Jan 2026 05:02:49 +0000 https://livehalchal.com/?p=657619 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने अहिंसा को दुनिया बदलने वाली सबसे बड़ी ताकत बताया। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने बापू को याद करते हुए उनके भजनों के जरिए दूसरों का दुख समझने और नफरत को प्रेम से जीतने का संदेश दिया। …]]>

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने अहिंसा को दुनिया बदलने वाली सबसे बड़ी ताकत बताया। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने बापू को याद करते हुए उनके भजनों के जरिए दूसरों का दुख समझने और नफरत को प्रेम से जीतने का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया और उनके महान विचारों को याद किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर बापू को श्रद्धांजलि देते हुए उनके सिद्धांत पर जोर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से उन्होंने बापू को नमन करते हुए लिखा, “पूज्य बापू ने मानवता की रक्षा के लिए हमेशा अहिंसा पर बल दिया। इसमें वह शक्ति है जो बिना हथियार के दुनिया को बदल सकती है। ‘अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते।’ (अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, अहिंसा ही सबसे बड़ा तप है और अहिंसा ही परम सत्य है, जिससे धर्म की स्थापना होती है।)”

मल्लिकार्जुन खरगे ने बापू को दी श्रद्धांजलि
कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बापू के पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “वैश्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ परायी जाणे रे, पर-दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान ना आणे रे (सच्चा ईश्वर भक्त (वैष्णव) वही है, जो दूसरों के दुःख-दर्द को समझता है, दूसरों पर उपकार (भलाई) करता है, लेकिन अपने मन में किसी भी प्रकार का अहंकार (गर्व) नहीं आने देता है)” उन्होंने आगे लिखा, “जिस नफ़रत ने हमें बापू से जुदा किया, उसका तोड़ भी बापू की ही राह है… सत्य का उजाला, अहिंसा की ताकत, और प्रेम की करुणा।”

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केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी का नाम हटाने के साथ ही गरीबों का छीन लिया निवाला https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%97/657391 Wed, 28 Jan 2026 09:37:42 +0000 https://livehalchal.com/?p=657391 केंद्र की एन.डी.ए. सरकार ने कांग्रेस द्वारा लागू की गई मनरेगा योजना में नए कानून के तहत महात्मा गांधी का नाम ही नहीं हटाया बल्कि देश के करोड़ों गरीबों के मुंह से निवाला भी छीन लिया है। ये बात कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने कही। वे मंगलवार को बेंगलुरु …]]>

केंद्र की एन.डी.ए. सरकार ने कांग्रेस द्वारा लागू की गई मनरेगा योजना में नए कानून के तहत महात्मा गांधी का नाम ही नहीं हटाया बल्कि देश के करोड़ों गरीबों के मुंह से निवाला भी छीन लिया है। ये बात कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुर्जेवाला ने कही। वे मंगलवार को बेंगलुरु में कांग्रेस द्वारा फ्रीडम पार्क में किए गए विशाल विरोध प्रदर्शन में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया व उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी मौजूद थे।

अपने संबोधन के दौरान पार्टी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुर्जेवाला ने बड़े ही आक्रामक अंदाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किए और मनरेगा की जगह बनाए गए वी.बी.जी.राम.जी. कानून की कड़े शब्दों में आलोचना की और कहा कि इस नए कानून ने गरीबों, मजदूरों और श्रमिकों के हक अधिकार पर डाका डाल दिया है। सांसद सुर्जेवाला ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी सरकार के दौरान मनरेगा को लागू करके गरीबों और देश के करोड़ों मजदूर परिवार को आजीविका कमाने का एक अधिकार दिया था और समूल पैसा केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता था मगर अब इस नए कानून ने इस गारंटी को ही खत्म कर दिया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मांगों को लेकर राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा।

महात्मा गांधी ने दी थी देश को एक नई दिशा

राज्यसभा सदस्य रणदीप सुर्जेवाला ने कहा कि महात्मा गांधी ने इस देश को नई दिशा दी थी। कांग्रेस की जब सरकार आई तो महात्मा गांधी के नाम से देश के मजदूर परिवारों के लिए रोजगार की गारंटी योजना शुरू की। इस योजना में प्रावधान था कि योजना के अंतर्गत सारा पैसा केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को दिया जाता था क्योंकि वो युग महात्मा गांधी के देश का था मगर अब पिछले 11 सालों से एक ऐसी सरकार सत्ता पर काबिज है जो न केवल महात्मा गांधी के नाम से चिढ़ती है बल्कि देश के गरीबों और मजदूरों से भी कोई सरोकार नहीं है।

सुर्जेवाला ने कहा कि पहले इस योजना का प्रांतीय सरकारों पर कोई भार नहीं था मगर इस नए कानून ने राज्य सरकारों पर अतिरिक्त भार डाल कर योजना की प्रासंगिकता को ही खत्म कर डाली है। आज राज्य सरकारों के पास पैसा नहीं है क्योंकि किसी न किसी बहाने से केंद्र सरकार इन राज्यों से पैसा इक_ा करके अमीरों को देने पर आमादा है जबकि गरीब आदमी अपने हक अधिकार को लेकर जिदंगी के भंवर में उलझा हुआ है। सुर्जेवाला ने कहा कि रोजगार की गारंटी के अधिकार मनरेगा कानून को खत्म कर भाजपा सरकार ने 12 करोड़ से अधिक मजदूरों को रोजी रोटी का घाव दिया है। यह कानून करोड़ों मजदूरों के हकों पर डाका है और उनके अधिकारों पर कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार तथा आजीविका मिशन कानून सही मायनों में ‘मनरेगा’ कानून की दिनदहाड़े हत्या है।

केंद्र सरकार से सुर्जेवाला ने पूछे सवाल

बेंगलुरु में कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान अपने संबोधन के जरिए कर्नाटक प्रभारी एवं सांसद रणदीप सुर्जेवाला ने मजदूरों के हितार्थ केंद्र सरकार से कई अहम सवाल भी पूछे हैं। सुर्जेवाला ने कहा कि वी.बी.ग्राम कानून कर्नाटक के 71 लाख सक्रिय मनरेगा श्रमिकों की आजीविका पर हमला है, जिनमें से 37 लाख महिलाएं हैं। इसके अलावा 13 लाख एस.सी हैं, 8 लाख एस.टी हैं, 40 लाख ओ.बी.सी हैं और 10 लाख सामान्य गरीब हैं। क्या कर्नाटक का भाजपा-जद(एस) नेतृत्व विशेष रूप से उनके एम.ओ और केंद्रीय मंत्री, जवाब देंगे कि उन्होंने मनरेगा को रद्द करने के लिए वोट क्यों दिया? उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार देने की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है। मनरेगा कानून के तहत मनरेगा मजदूरी बजट का 100 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था जबकि इस नए कानून के तहत केंद्र सरकार सिर्फ 60 फीसदी बजट देगी और बाकी 40 फीसदी बजट राज्य सरकारों को देना होगा।

सुर्जेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उपकर में सालाना 5 लाख करोड़ रुपए लगाने से राज्यों के पास मुश्किल से ही कोई वित्त बचा है। इसका शुद्ध परिणाम श्रमिकों को रोजगार से वंचित करना होगा। उन्होंने कहा कि मजदूरों से काम मांगने का अधिकार केंद्र सरकार ने छीन लिया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि मनरेगा कानून मांग प्रेरित था। यदि कोई श्रमिक काम मांगता है तो उसे अनिवार्य रूप से देना होगा, चाहे वह श्रमिक देश के किसी भी गांव, तालुका या जिले में हो मगर नए कानून के तहत केंद्र सरकार तय करेगी कि किस राज्य में कितना काम देना है, राज्य के किस हिस्से में कितना काम देना है और कितने दिनों के लिए काम देना है. इसलिए सभी अधिकार केंद्र सरकार के पास हैं और श्रमिकों द्वारा काम मांगने का अधिकार निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी है मगर इस लड़ाई में सभी को मिलकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी।

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महात्मा गांधी की जयंती पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि https://livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0/583289 Wed, 02 Oct 2024 07:49:05 +0000 https://livehalchal.com/?p=583289 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी समेत तमाम नेताओं ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान कभी नहीं भूला जा सकता। पीएम ने कहा पूज्य बापू का जीवन और सत्य सद्भाव और समानता पर आधारित आदर्श हमेशा देश के लोगों …]]>

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी समेत तमाम नेताओं ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान कभी नहीं भूला जा सकता। पीएम ने कहा पूज्य बापू का जीवन और सत्य सद्भाव और समानता पर आधारित आदर्श हमेशा देश के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे।

महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी समेत तमाम नेताओं ने राजघाट जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान कभी नहीं भूला जा सकता।

वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी राजघाट पर महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

बापू का जीवन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत
एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा,

पूज्य बापू का जीवन और सत्य, सद्भाव और समानता पर आधारित आदर्श हमेशा देश के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों का दृढ़ता से पालन किया और दुनिया भर के राजनेताओं और कार्यकर्ताओं की पीढ़ियों को प्रेरित किया।

लाल बहादुर शास्त्री को भी दी श्रद्धांजलि
पीएम मोदी ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी श्रद्धांजलि दी, जिनका जन्म भी इसी दिन हुआ था। मोदी ने शास्त्री के बारे में कहा कि उन्होंने अपना जीवन देश के सैनिकों, किसानों और गौरव के लिए समर्पित कर दिया, जिन्होंने “जय जवान, जय किसान” का नारा दिया और उनकी सादगी और ईमानदारी ने उन्हें व्यापक सम्मान दिलाया।

राहुल गांधी ने भी दी श्रद्धांजलि
कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

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महात्मा गांधी ने अहमदाबाद में कोचरब आश्रम की स्थापना क्यों की? https://livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%85%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be/575502 Wed, 14 Aug 2024 10:47:11 +0000 https://livehalchal.com/?p=575502 दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद उन्हें एक आश्रम की स्थापना करनी थी। आश्रम की स्थापना के लिए महात्मा गांधी अहमदाबाद शहर को चुना। महात्मा गांधी ने अहमदाबाद में एक आश्रम स्थापित करने का निर्णय लिया और कोचरब में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की। इस आश्रम का मुख्य भवन दो मंजिल का है। जिसमें सबसे …]]>

दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद उन्हें एक आश्रम की स्थापना करनी थी। आश्रम की स्थापना के लिए महात्मा गांधी अहमदाबाद शहर को चुना। महात्मा गांधी ने अहमदाबाद में एक आश्रम स्थापित करने का निर्णय लिया और कोचरब में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की। इस आश्रम का मुख्य भवन दो मंजिल का है। जिसमें सबसे नीचे ग्राउंड फ्लोर पर पहला महात्मा गांधी का कमरा है।

महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत आए और अहिंसा के माध्यम से देश की सेवा करने के लिए एक आश्रम की स्थापना की। आश्रम की स्थापना साबरमती नदी के तट पर अहमदाबाद के कोचरब गांव में बैरिस्टर जीवनलाल व्रजलाल देसाई के किराए के बंगले में की गई थी।

आश्रम का निर्माण 20 मई 1915 को हुआ था। 22 मई 1915 को दक्षिण अफ्रीका से उनके साथ आये 25 प्रवासी उनके साथ रहने चले गये। आश्रम की औपचारिक स्थापना 25 मई 1915 को हुई थी।

इस आश्रम के माध्यम से भारतवर्ष को सत्याग्रह की उस पद्धति से परिचित कराया गया जिसका उपयोग उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में नस्लवाद को मिटाने के लिए किया था। इसलिए उन्होंने और उनके सहयोगियों ने आश्रम का नाम ‘सत्याग्रहाश्रम’ चुना। अपने हाथ से लिखे आश्रम के नियमों में गांधी जी ने आश्रम का उद्देश्य ‘से राष्ट्रीय सेवा विकसित करना जो विश्व के हितों के विरुद्ध न हो और उसे राष्ट्रीय सेवा करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहना’ बताया है। कुछ समय पहले ही इस आश्रम का जीर्णोद्धार किया गया था. आज भी आश्रम में महात्मा गांधी की कुछ महत्वपूर्ण चीजें संरक्षित हैं।

अहमदाबाद में ही क्यों आश्रम की स्थापना की गई
महासचिव हर्षद पटेल ने कहा कि महात्मा गांधी गुजराती थे। दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद उन्हें एक आश्रम की स्थापना करनी थी। आश्रम की स्थापना के लिए उन्होंने अहमदाबाद शहर को चुना। वैसे तो वह अपने मूल वतन पोरबंदर में एक आश्रम स्थापित कर सकते थे। लेकिन अहमदाबाद में आश्रम की स्थापना के संबंध में महात्मा गांधी ने लिखा है कि, मेरी नजरें अहमदाबाद पर टिकी थीं।

एक गुजराती होने के नाते मेरा मानना था कि मैं गुजराती भाषा के माध्यम से देश की अधिक सेवा कर सकता हूं। अहमदाबाद मे हथकरघा केंद्र होने के कारण माना जा रहा था कि रेंटिया का काम यहां अच्छे से हो सकता है। गुजरात की राजधानी होने के नाते यह भी उम्मीद थी कि यहां के अमीर लोग अधिक आर्थिक मदद कर सकेंगे।

महात्मा गांधी ने की कोचरब में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना
इसलिए महात्मा गांधी ने अहमदाबाद में एक आश्रम स्थापित करने का निर्णय लिया। और कोचरब में सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की। इस आश्रम का मुख्य भवन दो मंजिल का है। जिसमें सबसे नीचे ग्राउंड फ्लोर पर पहला महात्मा गांधी का कमरा है।

जहां आज भी चरखा, टेबल कुर्सियां, गलीचे और कुशन हैं। महात्मा गांधी के कमरे में कई पत्र रखे गए हैं. बगल में कस्तूरबा का कमरा है. कस्तूरबा जीस चरखे से बुनाई करते थे वो भी इसमें संरक्षित है। ऊपरी मंजिल पर एक बड़ा हॉल है। जहां महत्वपूर्ण बैठक होती थीं. हॉल के बगल में एक छोटी सी लाइब्रेरी थी जिसमें एक मेज और दो-चार कुर्सियां आज भी सुरक्षित रखी गई हैं।

कोचरब आश्रम में भोजन के साथ अस्वाद व्रत मनाया जाता था
महात्मा गांधी आश्रम वासियों के भोजन का विशेष ध्यान रखते थे। आश्रम में रहने वाले लोगों के लिए भोजन का मेनू भी तैयार किया गया था. जिसमें सुबह नाश्ते में फल दिये जाते थे। नाश्ते का समय 5.30 से 7.00 बजे तक रखा गया था. दोपहर के भोजन में दाल भात, सब्जी, रोटी और फल दिये जाते थे. लंच का समय 10.00 से 12.00 बजे तक रखा गया था। शाम के भोजन में दाल भात, सब्जी रोटी और फल दिये जाते थे. शाम के भोजन का समय 5.00 से 6.00 बजे तक रखा गया था।

गांधी जी खाना पकाने में कड़वी मेथी का करते थे प्रयोग
भोजन के बाद सभी लोग अपने-अपने बर्तन साफ करते थे। कोचरब आश्रम के भोजन के बारे में मामा साहेब फड़के लिखते हैं कि आश्रम का जीवन बहुत कठिन था। भोजन में मिर्च, मसालों का अधिक प्रयोग नहीं किया जाता था। अरे ऊपर से नमक लेना हो तो ले सकते हो।

दूध दही छाछ आदि वर्जित था। कभी-कभी साबुत मेथी को बिना कुछ मिलाएं सब्जी के रूप में खाया जाता था। इसका मतलब यह नहीं कि वे भूखे मर रहे थे। कहा जाता था कि अस्वाद व्रत था। महर्षि कवि जैसे अतिथियों को भी इसे खाना पड़ता था। गांधी जी खाना पकाने में कड़वी मेथी का प्रयोग करते थे तो स्वादिष्ट बड़े रसीले आम भी खूब खाते थे। दोनों भोजन में केले खिलाए जाते। ताजे नींबू का उदारतापूर्वक उपयोग किया गया।

महात्मा गांधी सभी को चार बजे जगा देते थे
कोचरब आश्रम में, अगासी में दूसरी मंजिल पर जहां बैठक कक्ष स्थित है, एक घंटी अभी भी लगी हुई है। महात्मा गांधी के कोचरब आश्रम में रहने के बाद से यह घंटी यहां संरक्षित रखी गई है। महात्मा गांधी सुबह चार बजे उठ जाते थे. इसके बाद वे आश्रम में रहते हुए आश्रम वासियों को जगाने के लिए घंटी बजाते थे। जो आज भी संरक्षित है।

सन् 1915 में मामा साहब फड़केओ ने अपनी जीवनी में लिखा है कि हम लोग प्रातः 4 बजे उठ जाते थे। उस वक्त मैं सबको जगाने के लिए घंटी बजाता था। सुबह उठकर सबसे पहला काम पीसना होता था। आश्रम की रसोई में दो-तीन घंटियां थीं जिनमें अलग-अलग आदमी काम कर रहे थे। इस प्रकार कोचरब आश्रम में सुबह की गतिविधियों के कुछ प्रमाण मिलते हैं।

गांधीजी द्वारा कोचरब आश्रम में किया गया उपवास
आश्रम में रहने वाले लड़कों के झूठ के कारण महात्मा गांधी 1 जून 1915 को अनशन पर बैठ गये। 12 सितम्बर 1915 को आश्रम के एक निवासी ने बीड़ी पी ली जिससे महात्मा गांधी अनशन पर बैठ गये। 12 जून 1916 को, मणिलाल ने गांधी की जानकारी के बिना कुछ पैसे भेजकर हरिलाल की मदद की, इसलिए गांधी ने तीन दिनों तक उपवास किया। इस प्रकार, यदि कोचरब आश्रम में किसी भी प्रकार के नियम का पालन नहीं किया जाता था, तो गांधीजी ने इसे स्पष्ट करने के लिए उपवास के हथियार का इस्तेमाल किया।

सत्याग्रह आश्रम नाम कैसे पड़ा?
गांधी जी ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि आश्रम का नाम क्या रखा जाए यह सवाल तुरंत उठा। दोस्तों से सलाह ली. कुछ नाम मिले, सुझाए गए जैसे सेवाश्रम, तपोवन। सेवाश्रम नाम बहुत पसंद आया। लेकिन इसे सेवा के रूप में मान्यता नहीं मिली। तपोवन नाम इसलिए नहीं चुना गया, क्योंकि तपस्या पसंदीदा होने के बावजूद यह नाम बहुत भारी लगता था। हमें सत्य की आराधना करनी थी, सत्य की खोज करनी थी। उन्हें इस पर जोर देना पड़ा. और जो पद्धति मैंने दक्षिण अफ़्रीका में प्रयोग की वह भारत में लागू की गई। और देखना ये था कि उनकी ताकत कहां तक फैल सकती है। इसलिए मैंने और मेरे साथियों ने ‘सत्याग्रह’ नाम चुना। इसमें सेवा की कीमत और सेवा पद्धति को थोड़ा कम किया गया।

आश्रम में स्त्री-पुरुष के बीच कोई भेद नहीं था
जैसा कि गुजरात विश्वकोश में दिखाया गया है, आश्रम में धर्म, जाति, ऊंचाई या लिंग का कोई मतभेद नहीं था। आश्रम के सभी निवासियों का व्यवहार ऐसा था मानो वे एक ही विस्तृत परिवार के सदस्य हों। आश्रम में कोई नौकर नहीं था. पीसना, पानी भरना, खाना पकाना, खाने के बर्तन, आश्रम की सफाई तथा भोजन आदि सभी आश्रमवासी बारी-बारी से करते थे।

गांधीजी ने आश्रम वासियों के बच्चों की शिक्षा के लिए आश्रम में एक राष्ट्रीय विद्यालय खोला। इसमें मातृभाषा, राष्ट्रभाषा और एक विषय के रूप में अंग्रेजी पढ़ाई जाती थी। प्रत्येक छात्र को दो घंटे का उत्पादक श्रम करना था। शिक्षा के लिए कोई वेतन भोगी शिक्षक नहीं था। आश्रमवासी अध्यापक का कार्य करते थे। शिक्षा में ज्ञान की अपेक्षा विद्यार्थी के चरित्र निर्माण पर विशेष बल दिया जाता था।

दूदाभाई दाफड़ा कोचरब आश्रम में रहने वाला पहला परिवार था
कोचरब आश्रम में रहने के लिए आने वाला पहला परिवार दानीबेन दाफदा और दूदाभाई दाफदा थे। उनका परिवार कोचरब आश्रम में रहने वाला पहला और आखिरी परिवार था। दूदाभाई के साथ पत्नी दानीबेन और एक साल की बेटी लक्ष्मी भी थीं। सत्याग्रह आश्रम की स्थापना के कुछ ही महीनों के भीतर, वह ठक्करबापा की सिफारिश पर आश्रम आ गए, मुंबई में एक शिक्षक के रूप में काम करते हुए, दूदाभाई आश्रम के नियमों का पालन करने के लिए तैयार थे।

अत: गांधीजी उन्हें आश्रम में ले गये, लेकिन उनके के प्रवेश से आश्रम के अंदर और बाहर हंगामा शुरू हो गया। आश्रम की आर्थिक सहायता बंद कर दी गई। हालांकि, कुछ ही समय में अप्रत्याशित वित्तीय मदद मिली। आश्रम में सूक्ष्म भेदभाव होने के बावजूद दूदाभाई और उनकी पत्नी दानीबेन आदर्श आश्रमवासी बन रहे थे। कुछ ही समय में ऐसे सूक्ष्म भेद भी भूल गये। और आश्रम में अस्पृश्यता का कोई स्थान नहीं है, यह शुरुआती दिनों में ही स्पष्ट कर दिया गया था।

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