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	<title>मतदाताओं &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मतदाताओं &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>उत्तराखंड के 90 हजार मतदाताओं को लेना होगा बड़ा फैसला, दो जगह वोट होने पर बढ़ेगी मुसीबत</title>
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		<pubDate>Tue, 23 Dec 2025 05:16:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="319" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-22-211134.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-22-211134.png 894w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-22-211134-300x155.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-22-211134-768x396.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है। उत्तराखंड के करीब 90 हजार मतदाताओं को चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने से पहले ही अहम फैसला लेना होगा। उन्हें &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="319" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-22-211134.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-22-211134.png 894w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-22-211134-300x155.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/12/Screenshot-2025-12-22-211134-768x396.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है।</p>



<p>उत्तराखंड के करीब 90 हजार मतदाताओं को चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होने से पहले ही अहम फैसला लेना होगा। उन्हें बतौर सर्विस मतदाता या अपने गांव की वोटर लिस्ट में से कोई एक चुनना होगा। वहीं, सामान्य मतदाता, जिनके वोट शहरों के साथ ही गांव की मतदाता सूची में भी हैं, उन्हें भी कोई एक वोट कटवाना होगा।</p>



<p>प्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से फिलहाल प्री एसआईआर गतिविधियों के तहत मतदाताओं की मैपिंग का काम किया जा रहा है। एक जनवरी 2025 को जारी हुई मतदाताओं की जानकारी के हिसाब से प्रदेश में 89,812 सर्विस मतदाता पंजीकृत थे। इनमें 87,103 पुरुष और 2709 महिला मतदाता थे। ये ऐसे मतदाता हैं जो कि सेना या अर्द्ध सैनिक बलों में सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी की सर्विस के दौरान ही बतौर सर्विस मतदाता वोट बने हुए हैं।</p>



<p>अब एसआईआर शुरू होने से पहले निर्वाचन कार्यालय ने इन सभी सर्विस मतदाताओं से राज्य के भीतर या सर्विस में से कोई एक वोट चुनने और दूसरे को हटवाने की अपील की है। अगर कोई सर्विस मतदाता बनकर गांव या शहर का अपना वोट हटवाना चाहता तो उसे चुनाव आयोग की वेबसाइट voters.eci.gov.in में फॉर्म-7 भरना होगा।</p>



<p>अगर कोई गांव-शहर में अपना वोट चाहता है और सर्विस मतदाता की सूची से नाम हटाना चाहता है तो उसे सर्विस वोटर पोर्टल svp.eci.gov.in के माध्यम से अपना सर्विस वोट हटवाना होगा। जनवरी में जारी हुई मतदाता सूची के हिसाब से प्रदेश में कुल 84,29,459 मतदाता हैं, जिनमें 43,64,667 पुरुष मतदाता, 40,64,488 महिला मतदाता और 304 थर्ड जेंडर शामिल हैं।</p>



<p><strong>प्रधान चुनाव, निकाय चुनाव की वोटर लिस्ट अलग</strong></p>



<p>कई मतदाताओं को ये भी कंफ्यूजन है कि गांव से नाम कटने पर वह प्रधान या नगर पालिका चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। निर्वाचन कार्यालय के मुताबिक, एसआईआर का काम केवल चुनाव आयोग की मतदाता सूची के लिए हो रहा है, जिससे लोकसभा या विधानसभा के चुनाव में वोट डाला जाता है। पंचायत या नगर निकायों के चुनाव की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग संभालता है, जिसकी वोटर लिस्ट अलग बनती है। उसका इससे कोई लेना देना नहीं है।</p>



<p><strong>दो जगह वोट होने पर फंस सकते हैं कानूनी पचड़े में</strong></p>



<p>अगर आपका वोट दो जगह होगा तो आप कानूनी पचड़े में भी फंस सकते हैं। लिहाजा, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि गांव या शहर में से किसी एक ही मतदाता सूची मे अपना नाम रखें। किसी एक जगह से हटवा लें। एसआईआर के दौरान पकड़ में आने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत कार्रवाई हो सकती है, जिसमें सजा का भी प्रावधान है।</p>



<p>जितने भी सर्विस मतदाता हैं, वह किसी एक जगह ही अपना वोट सुनिश्चित कर लें। नियम के हिसाब से किसी का भी वोट दो जगह नहीं हो सकता है। हटवाने के बाद जरूरत पड़ने पर नए सिरे से कभी भी वोट बनवाया जा सकता है।</p>



<p><strong>-डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखंड</strong></p>
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		<title>चुनाव आयोग ने मतदाताओं को दिया ये आसान विकल्प</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Apr 2024 07:11:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[आसान विकल्प]]></category>
		<category><![CDATA[चुनाव आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[मतदाताओं]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-6-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-6.jpg 763w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-6-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />चुनाव आयोग ने कुछ दिनों पहले कहा था कि जो मतदाता अपना मतदाता पहचान पत्र प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हैं उसे अपनी पहचान स्थापित करने के लिए वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से एक को प्रस्तुत करना होगा। इनमें आधार कार्ड मनरेगा जाब कार्ड बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक श्रम मंत्रालय द्वारा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-6-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-6.jpg 763w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/national-6-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>चुनाव आयोग ने कुछ दिनों पहले कहा था कि जो मतदाता अपना मतदाता पहचान पत्र प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हैं उसे अपनी पहचान स्थापित करने के लिए वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से एक को प्रस्तुत करना होगा। इनमें आधार कार्ड मनरेगा जाब कार्ड बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक श्रम मंत्रालय द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड ड्राइ¨वग लाइसेंस पैन कार्ड शामिल हैं।</p>



<p>कोई भी मतदाता मतदान से वंचित न रहे, इसके लिए चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि लिपिकीय या वर्तनी संबंधी त्रुटियों को नजरअंदाज करें, बशर्ते मतदाता की पहचान वोटर आइडी कार्ड के जरिये स्थापित की जा सके।</p>



<p>कहा गया है कि किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी द्वारा जारी मतदाता पहचान पत्र को पहचान के लिए स्वीकार किया जाएगा, बशर्ते कि निर्वाचक का नाम उस मतदान केंद्र की मतदाता सूची में हो, जहां से वह आया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मतदाता को वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज पेश करना होगा&nbsp;</h3>



<p>तस्वीर के बेमेल होने की स्थिति में निर्वाचक को चुनाव आयोग द्वारा सूचीबद्ध वैकल्पिक फोटो दस्तावेजों में से एक को चुनना होगा।</p>



<p>पिछले माह जारी एक आदेश में चुनाव आयोग ने कहा था कि जो मतदाता अपना मतदाता पहचान पत्र प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हैं, उसे अपनी पहचान स्थापित करने के लिए वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों में से एक को प्रस्तुत करना होगा।</p>



<p>इनमें आधार कार्ड, मनरेगा जाब कार्ड, बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड शामिल हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>उत्तराखंड: वृद्ध-दिव्यांग मतदाताओं के लिए 10 से शुरू होगा घर से चुनाव का दूसरा चरण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Apr 2024 06:00:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[दूसरा चरण]]></category>
		<category><![CDATA[मतदाताओं]]></category>
		<category><![CDATA[वृद्ध-दिव्यांग]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="430" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/uk-3-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/uk-3-1.jpg 678w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/uk-3-1-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />वृद्ध मतदाताओं को पोस्टल बैलेट के माध्यम से घर से ही वोट करने की सुविधा का निर्णय निर्वाचन आयोग ने लिया था। राज्य में अभी तक 9,993 वृद्ध मतदाताओं के आवेदन प्राप्त हुए हैं। उत्तराखंड में वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर-घर जाकर वोटिंग का दूसरा चरण 10 अप्रैल से शुरू होगा। इस बार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="430" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/uk-3-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/uk-3-1.jpg 678w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/uk-3-1-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>वृद्ध मतदाताओं को पोस्टल बैलेट के माध्यम से घर से ही वोट करने की सुविधा का निर्णय निर्वाचन आयोग ने लिया था। राज्य में अभी तक 9,993 वृद्ध मतदाताओं के आवेदन प्राप्त हुए हैं।</p>



<p>उत्तराखंड में वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर-घर जाकर वोटिंग का दूसरा चरण 10 अप्रैल से शुरू होगा। इस बार लोकसभा चुनाव के लिए 12,892 वृद्ध-दिव्यांग मतदाताओं ने घर से मतदान का आवेदन किया है।</p>



<p>वहीं, प्रदेश की सभी 70 विधानसभाओं में आदर्श दिव्यांग पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे। अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में प्रेस ब्रीफिंग करते हुए बताया, चुनाव आयोग वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं के कई सुविधाएं देता है। राज्य में कुल 65,160 वृद्ध मतदाता हैं, जिनकी आयु 85 साल से अधिक है।</p>



<p>वृद्ध मतदाताओं को पोस्टल बैलेट के माध्यम से घर से ही वोट करने की सुविधा का निर्णय निर्वाचन आयोग ने लिया था। राज्य में अभी तक 9,993 वृद्ध मतदाताओं के आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी वृद्ध मतदाताओं को घर पर ही पोस्टल बैलेट के माध्यम से मतदान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य में 80,335 दिव्यांग मतदाता चिह्नितकिए गए हैं।</p>



<p>दिव्यांग मतदाताओं के 2,899 ऐसे आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो वैध हैं। जिन पर घर में जाकर मतदान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सभी एआरओ के माध्यम से इन मतदाताओं तक पहुंचने के लिए रूट प्लान तैयार किया गया है। वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर पर जाकर मतदान की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आठ से 10 अप्रैल तक प्रथम चरण का मतदान करने का निर्णय लिया गया था।</p>



<p>कुछ जिलों ने अपनी सुविधा के अनुरूप परिवर्तन करने के लिए छूट दी थी। कुछ जिलों ने वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं को पांच व छह अप्रैल से घर पर जाकर मतदान करवाने का निर्णय लिया है। वृद्ध और दिव्यांग मतदाताओं को घर में जाकर मतदान की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए द्वितीय चरण 10 से 13 अप्रैल के बीच में किया जाएगा।</p>



<p>इसकी सूचना अखबार और टेलीविजन के माध्यम से दी जाएगी। प्रत्याशियों के साथ बैठक करते हुए उन तक रूट चार्ट, मतदान की तिथियां और वृद्ध एवं दिव्यांग मतदाताओं की वैध सूची तैयार करते हुए प्रत्याशियों को उपलब्ध करा दिया गया है।</p>



<p><strong>70 विधानसभाओं में मॉडल पीडब्ल्यूडी पोलिंग बूथ</strong><br>अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी जोगदंडे ने बताया, 2022 में विधानसभा चुनाव में राज्य में 13,732 वृद्ध मतदाताओं और 2162 दिव्यांग मतदाताओं ने घर पर मतदान की सुविधा का प्रयोग किया था। निर्वाचन आयोग ने सक्षम एप की सुविधा दिव्यांग मतदाताओं को दी है। राज्य में 33,111 दिव्यांग मतदाताओं ने सक्षम एप को डाउनलोड किया है। इस एप के माध्यम में दिव्यांग मतदाता अपनी आवश्यकताओं के बारे में सहायता मांग सकते हैं। सक्षम एप के माध्यम से अभी तक 1537 मतदाताओं ने व्हील चेयर, 2221 मतदाताओं ने डोली और 10,839 मतदाताओं ने स्वयंसेवकों की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अनुरोध किया है। दिव्यांग मतदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में 70 विधानसभाओं में मॉडल पीडब्ल्यूडी पोलिंग बूथ बनाने का निर्णय लिया गया है। ये पोलिंग बूथ ऐसी जगह स्थापित किए जाएंगे, जहां एश्योर्ड मिनिमम फैसिलिटी उपलब्ध हो। इन बूथों में सभी कार्मिक दिव्यांग श्रेणी के हैं। उनके लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर पर्याप्त प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। उनकी सहायता के लिए वाहन व्यवस्था और रहने के लिए उचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं।</p>



<p><strong>वोटर कार्ड के अलावा इनसे भी डाल सकेंगे वोट</strong><br>अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया, मतदान के लिए यदि किसी व्यक्ति के पास वोटर कार्ड नहीं है तो 12 अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों से वोट डाल सकते हैं। इसमें आधार कार्ड, बैंकों, डाकघरों से जारी फोटोयुक्त पासबुक, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, एनपीआर कार्ड, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज, कर्मचारियों को जारी किए गए फोटोयुक्त सेवा पहचानपत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड, सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों को जारी किए गए सरकारी पहचानपत्र और भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय दिव्यांगजनों को जारी यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड शामिल हैं।</p>
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		<title>&#8216;बीजेपी की जीत &#8216;सपा-कांग्रेस&#8217; के साथ मायावती ब्रांड के लिए भी खतरे की घंटी&#8217;</title>
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		<pubDate>Tue, 21 Mar 2017 09:33:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />जुमलेबाज पार्टी, नेता-विहीन पार्टी, लोगों को लाइन में खड़ा करवा देने वाली पार्टी, तीन साल में कुछ काम न कर पाने वाली पार्टी ये कुछ वे विश्लेषण हैं जिनसे पिछले दो महीनों में उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी को अलंकृत किया गया था. ये और इससे भी गंभीर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>जुमलेबाज पार्टी, नेता-विहीन पार्टी, लोगों को लाइन में खड़ा करवा देने वाली पार्टी, तीन साल में कुछ काम न कर पाने वाली पार्टी ये कुछ वे विश्लेषण हैं जिनसे पिछले दो महीनों में उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी को अलंकृत किया गया था.<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-44115" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2.jpg" alt="" width="700" height="400" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/03/143518-bjp-live-update-2-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></strong></p>
<p><strong>ये और इससे भी गंभीर आरोप भारतीय जनता पार्टी, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पर लगाए गए थे, और आरोप लगाने वालों में प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव, उनके मंत्री, बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती, कांग्रेस के राहुल गाँधी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व अन्य नेता थे.</strong></p>
<p><strong>लेकिन उत्तर प्रदेश के मतदाताओं ने इन्हें न केवल अनदेखा करके और संयम दिखाते हुए न केवल बिना मुख्य मंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ने वाली पार्टी भारतीय जनता पार्टी को अभूतपूर्व बहुमत दिया बल्कि एक तरह से मोदी पर पूरा विश्वास जताया है कि वे जिसे चाहे उसे उत्तर प्रदेश का मुख्य मंत्री बनायें, उन्होंने यह निर्णय भी मोदी पर छोड़ दिया है.</strong></p>
<div><strong> </strong></div>
<p><strong>पिछले पांच सालों से बड़े बहुमत के साथ प्रदेश पर शासन कर रही समाजवादी पार्टी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश में अनेक परियोजनाएं शुरू कीं, और उन्हें ही अपने चुनाव प्रचार का आधार बनाया था, और चुनाव के कुछ दिन पहले ही कांग्रेस के साथ गठबंधन करके अपने नारे &#8216;यू.पी. को ये साथ पसंद है&#8217; को बुलंद किया.</strong></p>
<p><strong>लेकिन पिछले साल समाजवादी पार्टी के यादव परिवार में हुए घटनाक्रम की वजह से लोगों के बीच यह संदेश गया कि अखिलेश पार्टी और सरकार को अपने तरीके से चलाना चाहते हैं, और उन्हें इसमें अपने पिता मुलायम सिंह यादव की भी दखल पसंद नहीं है. चुनाव नतीजे से तो यही लगता है कि अखिलेश का काम, गठबंधन का नाम और पिता का तथाकथित अपमान यू.पी. को पसंद नहीं आया. और इसके विपरीत, मोदी के आरोप, मोदी के वादे और भारतीय जनता पार्टी के रिकॉर्ड को लोगों ने सर आँखों पर रखा.</strong></p>
<p><strong>लेकिन अखिलेश को यह लगता है कि प्रदेश के लोगों को उनका काम पसंद नहीं आया, और उन्होंने बहकावे में आकर वोट दिया है. अपनी पार्टी के अंदरूनी घटनाक्रम और अपनी सरकार की कार्यशैली के समीक्षा करने के बजाये उन्होंने बीजेपी के प्रचार को ही अपनी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया है.</strong></p>
<h3 class="post-box-title"><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" title="Permalink to जानें, आखिर मुसलमान क्या सोचते हैं योगी आदित्यनाथ के बारे में?" href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8/43980" rel="bookmark">जानें, आखिर मुसलमान क्या सोचते हैं योगी आदित्यनाथ के बारे में?</a></span></h3>
<p><strong>यह केवल सपा-कांग्रेस गठबंधन की ही हार नहीं है, बल्कि मायावती ब्रांड की राजनीति के लिए भी खतरे की घंटी है. मूलतः दलितों के हितों के संरक्षण के कथित उद्देश्य से बनाई गई बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में चार बार सात में रह चुकी है और चारों बार मायावती ही मुख्य मंत्री थीं. और इस बार उन्हें पूरी उम्मीद थी कि प्रदेश में सपा और बसपा के बीच बारी बारी से सत्ता में आने की परंपरा में अब बसपा का नंबर लगेगा.</strong></p>
<p><strong>लेकिन जिस तरह से प्रदेश के मतदाताओं ने बसपा को लगभग पूरी तरह से नकार दिया है, उससे मायावती के सामने गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है. इसके पहले 2014 के लोक सभा चुनाव में बसपा को प्रदेश से एक भी क्षेत्र से जीत नहीं मिली थी.</strong></p>
<p><strong>यहां तक की यदि जनसंख्या में बसपा के स्थापित समर्थकों के समुदाय की हिस्सेदारी को ही आधार माना जाए तो शायद उस समुदाय ने भी बहन मायावती से मुंह मोड़ लिया है. नतीजों के बाद दी गई अपनी प्रतिक्रिया में तो मायावती ने भाजपा पर वोट मशीन (ई.वी.एम.) के साथ छेड़-छाड़ का आरोप लगा दिया. यही नहीं, उन्होने यहाँ तक कहा कि अन्य पार्टियों के समर्पित मतदाताओं का भाजपा के पक्ष में चले जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है.</strong></p>
<p><strong>इन नतीजों ने उत्तर प्रदेश से जुडे कुछ अनुमानों को भी नकार दिया है, जैसे जातिवाद का बोलबाला, ध्रुवीकरण का महत्त्व, राष्ट्रीय दलों की अप्रासंगिकता, क्षेत्रीय, जाति-आधारित दलों का प्रभाव, और प्रादेशिक क्षत्रपों का बोलबाला. भाजपा की इस जीत ने इन सभी अनुमानों को दरकिनार कर कर दिया है. सपा और बसपा के हाशिये पर जाने से यह स्पष्ट है कि पिछड़ी और दलित जातियों के लोगों ने बड़ी मात्रा में बीजेपी को समर्थन दिया है.</strong></p>
<p><strong>साथ ही, एक राष्ट्रीय पार्टी द्वारा केवल एक राष्ट्रीय नेता (नरेन्द्र मोदी) को आगे रख कर क्षेत्रीय क्षत्रपों के महत्त्व को एकदम से घटा कर रख दिया है. और कई सारे मुस्लिम-बहुल इलाकों में भाजपा के प्रत्याशी का जीतना यह भी स्थापित करता है कि शायद अल्पसंख्यक वर्ग ने भी बड़ी हद तक भाजपा का समर्थन किया है और ऐसा तब हुआ जब भाजपा ने एक भी मुस्लिम प्रत्याशी चुनाव में नहीं उतारा था.</strong></p>
<p><strong>जहां राहुल गांधी पंजाब में अपनी पार्टी को मिली बड़ी जीत के दम पर कांग्रेस में अपने प्रभुत्त्व को बनाये रख सकते हैं, वहीँ अखिलेश के सामने बहुत बड़ी चुनौती है अपने परिवार और पार्टी में अपने कार्यकाल और कार्य प्रणाली का औचित्य साबित करना. जिस तरह से उन्होंने पहले पार्टी पर पूरा नियंत्रण पाने के लिए पार्टी को विभाजन की कगार पर खड़ा कर दिया, वैसी ही पार्टी पर नियंत्रण पा लेने के बाद उन्होंने कांग्रेस के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन कर लिया.</strong></p>
<p><strong>यही नहीं, उन्होंने कांग्रेस को उस पार्टी की जीत की सम्भावना से ज्यादा सीटें देकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी नाराज़ किया. अपने काम की बदौलत जीत की उम्मीद लगाये अखिलेश को जबरदस्त झटका लगा है और अब उनके हर निर्णय पर पार्टी के भीतर ही सवाल उठ सकते हैं. और इन सवालों के जवाब देने के लिए उनके नए मित्र राहुल गांधी शायद ही उनकी कोई मदद कर पाएं.</strong></p>
<h3 class="post-box-title"><strong><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" title="Permalink to आदित्यनाथ को लेकर विदेशी मीडिया ने कहा, उन्होंने मुस्लिम संबंधी इस फैसले का किया था समर्थन" href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80/43952" target="_blank" rel="bookmark">आदित्यनाथ को लेकर विदेशी मीडिया ने कहा, उन्होंने मुस्लिम संबंधी इस फैसले का किया था समर्थन</a></span></strong></h3>
<p><strong>नतीजों के बाद अपनी प्रेस वार्ता में अखिलेश ने गठबंधन को उचित ठहराने की हर संभव कोशिश की और कहा कि गठबंधन जारी रहेगा. लेकिन वे यह भी कहने से नहीं चुके कि &#8216;समझाने से नहीं बल्कि बहकाने से वोट मिलता है&#8217; उम्मीद की जा सकती है कि अखिलेश अपनी हार की समीक्षा करते समय दूसरों के &#8216;बहकाने&#8217; के बजाय कुछ आत्ममंथन भी करेंगे.</strong></p>
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