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	<title>मकर संक्रांति &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मकर संक्रांति &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>अयोध्या: रामलला ने भी मनाया मकर संक्रांति का पर्व, अर्पित की गई पतंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 04:59:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[मकर संक्रांति]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="491" height="339" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/54.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/54.jpg 491w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/54-300x207.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/54-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 491px) 100vw, 491px" />मकर संक्रांति का पर्व अयोध्या में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर रामलला को पतंग अर्पित की गई। आज भारी संख्या में भक्तों के मंदिर में आने की संभावना है। राम नगरी में मकर संक्रांति का पर्व भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भोर से ही श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="491" height="339" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/54.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/54.jpg 491w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/54-300x207.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/54-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 491px) 100vw, 491px" />
<p>मकर संक्रांति का पर्व अयोध्या में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर रामलला को पतंग अर्पित की गई। आज भारी संख्या में भक्तों के मंदिर में आने की संभावना है।</p>



<p>राम नगरी में मकर संक्रांति का पर्व भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भोर से ही श्रद्धालुओं ने सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई और तिल, गुड़, वस्त्र व अन्न का दान कर पुण्य अर्जित किया। ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा है। सरयू तट पर सुबह 4:00 से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई।</p>



<p>राम मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन किया गया। इस दौरान भक्तों की ओर से रामलला को पतंग भेंट कर पर्व की परंपरा को साकार किया गया। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न हुई, वहीं जय श्रीराम के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। इस दौरान विशेष तरह का भोग अर्पित किया गया।</p>



<p>पर्व के इस मौके पर सरयू के विविध घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को दान-पुण्य किया और रामलला के दर्शन के लिए मंदिर की ओर प्रस्थान किया।</p>
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		<title>मकर संक्रांति पर कुबेरेश्वरधाम में भक्तों का जमघट, 5100 तिल-गुड़ के लड्डुओं से बनेगा शिव भोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Jan 2026 06:15:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[मकर संक्रांति]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-221138.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-221138.png 877w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-221138-300x166.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-221138-768x425.png 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सीहोर स्थित कुबेरेश्वरधाम में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन होंगे और भगवान शिव को 5100 तिल-गुड़ के लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाएगा। सीहोर स्थित कुबेरेश्वरधाम पर मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी गहन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="342" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-221138.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-221138.png 877w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-221138-300x166.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-221138-768x425.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सीहोर स्थित कुबेरेश्वरधाम में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन होंगे और भगवान शिव को 5100 तिल-गुड़ के लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाएगा।</p>



<p>सीहोर स्थित कुबेरेश्वरधाम पर मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष की तरह इस बार भी गहन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में विशेष धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो प्रकृति, कृषि और आध्यात्मिक चेतना को एक सूत्र में बांधता है। कुबेरेश्वरधाम में इस दिन भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है, जो सूर्य के उत्तरायण होने की इस शुभ बेला में भगवान शिव की आराधना कर पुण्य लाभ अर्जित करती है।</p>



<p><strong>5100 तिल-गुड़ लड्डुओं का विशेष भोग</strong></p>



<p>मकर संक्रांति के अवसर पर इस वर्ष कुबेरेश्वरधाम में लगभग 5100 तिल-गुड़ के लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। तिल और गुड़ का विशेष महत्व इस पर्व से जुड़ा हुआ है, जो स्वास्थ्य, मधुरता और आपसी सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। आधुनिक भोजनशाला में इन लड्डुओं के निर्माण की तैयारियां पूरे विधि-विधान और शुद्धता के साथ की जा रही हैं। भोग अर्पित होने के पश्चात इन्हें श्रद्धालुओं में प्रसादी के रूप में वितरित किया जाएगा, जिससे हर भक्त इस पावन पुण्य का सहभागी बन सके।</p>



<p><strong>हजारों श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रसादी व्यवस्था</strong></p>



<p>धाम पर आने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए व्यापक स्तर पर भोजन-प्रसादी की व्यवस्था की गई है। तिल-गुड़ के लड्डुओं के साथ-साथ खिचड़ी, नुक्ती, मिठाई और नमकीन भी वितरित की जाएगी। मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। यही कारण है कि इस पर्व पर खिचड़ी का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व है। कुबेरेश्वरधाम में यह परंपरा पूरी श्रद्धा और सेवा भाव से निभाई जाती है।</p>



<p><strong>सेवा कार्यों में जुटे मंदिर पदाधिकारी</strong></p>



<p>मंगलवार को मंदिर व्यवस्थापक पंडित समीर शुक्ला, पंडित विनय मिश्रा सहित अन्य सेवाभावी कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया। व्यवस्थाओं की निगरानी स्वयं समिति के वरिष्ठ सदस्य कर रहे हैं, ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो। सेवा को ही साधना मानकर कार्य कर रहे स्वयंसेवकों का उत्साह देखते ही बनता है। पूरा वातावरण “सेवा ही शिव है” की भावना से ओतप्रोत दिखाई देता है।</p>



<p><strong>मकर संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व</strong></p>



<p>विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि मकर संक्रांति देशभर में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाई जाती है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और नई फसल की कटाई का प्रतीक है। यही कारण है कि यह त्योहार केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी संदेश देता है। कुबेरेश्वरधाम पर इस दिन आस्था के साथ-साथ लोक परंपराओं का भी सुंदर संगम देखने को मिलता है।</p>



<p><strong>रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों की रूपरेखा</strong></p>



<p>मकर संक्रांति के आयोजन के साथ ही विठलेश सेवा समिति द्वारा आगामी रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों को लेकर भी चर्चा की गई। समिति के सदस्यों ने आयोजन की रूपरेखा तैयार करते हुए व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विचार किया। कुबेरेश्वरधाम निरंतर धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजनों का केंद्र बनता जा रहा है। यहां मनाए जाने वाले पर्व न केवल श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति जगाते हैं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और सद्भाव का संदेश भी देते हैं।</p>
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			</item>
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		<title>मकर संक्रांति के विशेष अवसर पर अपनों को भेजें प्यार भरे शुभकामना संदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Jan 2026 04:54:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मकर संक्रांति]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="304" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-205027.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-205027.png 746w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-205027-300x148.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />मकर संक्रांति हिंदू धर्म में विशेष त्योहारों में से एक है, जिस पर स्नान-दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है, जिससे जातक को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे में आप आज यानी मकर संक्रांति के विशेष अवसर पर अपने प्रियजनों व परिवारजनों को मकर संक्रांति &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="304" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-205027.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-205027.png 746w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-205027-300x148.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मकर संक्रांति हिंदू धर्म में विशेष त्योहारों में से एक है, जिस पर स्नान-दान का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है, जिससे जातक को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे में आप आज यानी मकर संक्रांति के विशेष अवसर पर अपने प्रियजनों व परिवारजनों को मकर संक्रांति के शुभकामना (Makar Sankranti 2026 wishes) संदेश भेज सकते हैं।</p>



<p>आज यानी बुधवार, 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जा रही है। इस दिन पर गंगा में स्नान करने से साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और पापों से भी मुक्ति मिलती है। मकर संक्रांति पर ही खरमास का भी समापन होता है, जिससे शुभ व मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं।</p>



<p>आप इस खास मौके पर अपने दोस्तों व दिल के करीब लोगों को यह खूबसूरत संदेश (heartfelt Sankranti messages) भेजकर उनके लिए इस दिन को और भी खास बना सकते हैं।</p>



<p><strong>मकर संक्रांति की शुभकामनाएं (Makar Sankranti 2026 wishes)</strong></p>



<p>तिल-गुड़ का लड्डू खाओ</p>



<p>अपनी वाणी में भी वही मिठास लाओ।</p>



<p>मकर संक्रांति के इस महापर्व की तुम्हें हार्दिक शुभकामना</p>



<p>तिलकुट की खुश्बू</p>



<p>दही-चूड़ा की बहार</p>



<p>शुभ हो आपके लिए मकर संक्रांति का त्योहार</p>



<p>मकर संक्रांति की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं</p>



<p>मकर संक्रांति का दिन तुम्हारे जीवन में नई उमंग और जोश लाए।</p>



<p>इस मकर संक्रांति तुम्हारी मेहनत रंग लाएं।</p>



<p>आपको मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामना</p>



<p>मुंगफली की खुशबू</p>



<p>और गुड़ की मिठास</p>



<p>दिलों में खुशी और अपनो का प्यार,</p>



<p>मुबारक हो आपको</p>



<p>मकर संक्रांति का त्यौहार!</p>



<p>सूरज की तरह चमकता रहे आपका जीवन,</p>



<p>मकर संक्रांति लाए खुशियों का संगम</p>



<p>आपको व आपके परिवार को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं</p>



<p>सूर्य देव आपके जीवन से आलस्य और अंधकार दूर करें</p>



<p>आपको व आपको परिवार को तेज व ऊर्जा प्रदान करें</p>



<p>मकर संक्रांति की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई</p>



<p>सूरज की राशि बदलेगी</p>



<p>बहुतों की किस्मत बदलेगी</p>



<p>यह साल का पहला पर्व होगा जो बस खुशियों से भरा होगा</p>



<p>मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं</p>



<p>मकर संक्रांति की धूप</p>



<p>आपके जीवन में नई रोशनी लेकर आए</p>



<p>और सफलता के द्वार खोले</p>



<p>मकर संक्रांति (festival greetings) की हार्दिक शुभकामनाएं</p>



<p>गंगा-यमुना के तट पर उमड़ा जन सैलाब</p>



<p>सभी को मिले भगवान सूर्य का आशीर्वाद</p>



<p>यही है मकर संक्रांति के पर्व का उल्लास</p>



<p>मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं</p>



<p>मीठे गुड़ में मिल गया तिल</p>



<p>उड़ीं पतंग और खिल गया दिल</p>



<p>आपके जीवन में आए हर दिन सुख और शांति</p>



<p>मुबारक हो आप सभी को मकर संक्रांति</p>



<p>मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मकर संक्रांति, षटतिला एकादशी का दुर्लभ महासंयोग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Jan 2026 04:51:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मकर संक्रांति]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="294" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-203732.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-203732.png 748w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-203732-300x143.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />Aaj ka Panchang 14 जनवरी 2026 के अनुसार, मकर संक्रांति, षटतिला एकादशी और पोंगल मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती है। इस दिन विशेष चीजों का दान करने का विशेष महत्व है और षटतिला एकादशी व्रत करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं। ऐसे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="294" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-203732.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-203732.png 748w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-13-203732-300x143.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>Aaj ka Panchang 14 जनवरी 2026 के अनुसार, मकर संक्रांति, षटतिला एकादशी और पोंगल मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाई जाती है। इस दिन विशेष चीजों का दान करने का विशेष महत्व है और षटतिला एकादशी व्रत करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं। ऐसे में आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल का समय समेत आदि जानकारी।</p>



<p>पंचांग के अनुसार, आज यानी 14 जनवरी को माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi 2026) किया जा रहा है। साथ ही आज मकर संक्रांति ( Makar Sankranti 2026) और पोंगल भी मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर कई योग का निर्माण भी हो रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 14 January 2026) के बारे में।</p>



<p><strong>तिथि: </strong>कृष्ण एकादशी</p>



<p><strong>मास पूर्णिमात</strong>: माघ</p>



<p><strong>दिन:</strong> बुधवार</p>



<p><strong>संवत्: </strong>2082</p>



<p><strong>तिथि:</strong> कृष्ण एकादशी – सायं 05 बजकर 52 मिनट तक</p>



<p><strong>योग:</strong> गण्ड – सायं 07 बजकर 56 मिनट तक</p>



<p><strong>करण:</strong> बालव – सायं 05 बजकर 52 मिनट तक</p>



<p><strong>करण:</strong> कौलव – 15 जनवरी को प्रातः 07 बजकर 06 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</strong></p>



<p><strong>सूर्योदय का समय:</strong> प्रातः 07 बजकर 15 मिनट पर</p>



<p><strong>सूर्यास्त का समय</strong>: सायं 05 बजकर 45 मिनट पर</p>



<p><strong>चंद्रोदय का समय:</strong> 15 जनवरी को प्रातः 04 बजकर 26 मिनट पर</p>



<p><strong>चंद्रास्त का समय</strong>: दोपहर 01 बजकर 49 मिनट पर</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त</strong></p>



<p><strong>अभिजीत मुहूर्त:</strong> नहीं है</p>



<p><strong>अमृत काल:</strong> दोपहर 03 बजकर 23 मिनट से सायं 05 बजकर 10 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय</strong></p>



<p><strong>राहुकाल: </strong>दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से दोपहर 01 बजकर 49 मिनट तक</p>



<p><strong>गुलिकाल:</strong> प्रातः 11 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक</p>



<p><strong>यमगण्ड: </strong>प्रातः 08 बजकर 34 मिनट से प्रातः 09 बजकर 53 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong></p>



<p><strong>आज चंद्रदेव अनुराधा नक्षत्र में रहेंगे।</strong></p>



<p><strong>अनुराधा नक्षत्र</strong>: प्रातः 03:03 बजे तक (15 जनवरी)</p>



<p><strong>सामान्य विशेषताएं</strong>: समाज में सम्मानित, आत्मकेंद्रित, आक्रामक, साहसी, बुद्धिमान, मेहनती, विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित और सुंदर बाल</p>



<p><strong>नक्षत्र स्वामी:</strong> शनि देव</p>



<p><strong>राशि स्वामी:</strong> मंगल देव</p>



<p><strong>देवता</strong>: मित्रता के देवता</p>



<p><strong>प्रतीक: </strong>अंतिम रेखा पर एक फूल</p>



<p>मकर संक्रांति, पोंगल और षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व</p>



<p><strong>मकर संक्रांति</strong></p>



<p>मकर संक्रांति हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। इसे सूर्य देव की उपासना का दिन माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इस पर्व के अलग-अलग नाम और रीति-रिवाज हैं। उत्तर भारत में पतंगबाजी, दक्षिण में तिल और गुड़ से बने पकवानों का महत्व है। लोग नदी में स्नान करके पवित्रता प्राप्त करते हैं और गरीबों को दान करते हैं। यह पर्व नए कृषि मौसम के शुभ आरंभ और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रतीक है।</p>



<p><strong>पोंगल</strong></p>



<p>पोंगल दक्षिण भारत का प्रमुख त्योहार है, विशेषकर तमिलनाडु में। यह सूर्य देव को समर्पित होता है और मुख्य रूप से जनवरी के मध्य मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी जैसी मिठाई ‘पोंगल’ बनाई जाती है, जो पकवान के रूप में भगवान को अर्पित की जाती है। त्योहार चार दिन तक चलता है और हर दिन का महत्व अलग होता है। पहला दिन ‘भोगी’, दूसरे दिन मुख्य पोंगल, तीसरा दिन ‘मट्टु पोंगल’ और चौथा दिन ‘कन्नम पोंगल’ कहलाता है। यह पर्व कृषि और फसल की समृद्धि का प्रतीक है। परिवार और पड़ोसी मिलकर खुशी से इसे मनाते हैं।</p>



<p><strong>षटतिला एकादशी</strong></p>



<p>षटतिला एकादशी प्रत्येक माह की एकादशी को आती है और इसे विशेष रूप से पुण्यदायक माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से तिल (सेंधा) का दान और उपवास का महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया उपवास और दान पापों का नाश करता है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और तिल से बने व्यंजन गरीबों और जरूरतमंदों को अर्पित करते हैं। यह एकादशी शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि का समय मानी जाती है और जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य लाने वाला उपाय भी है।</p>
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		<title>आखिर मकर संक्रांति पर क्यों खाई जाती है खिचड़ी? </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 05:52:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मकर संक्रांति]]></category>
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<p>हर वर्ष की तरह 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, इसी दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण का आरंभ होता है। मकर संक्रांति को केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं माना जाता, बल्कि इसे दान, पुण्य, संयम और नए आरंभ का विशेष पर्व कहा गया है।</p>



<p>उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना एक पुरानी परंपरा है। यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी का स्मरण स्वतः हो जाता है। परंपरा के पीछे केवल स्वाद नहीं, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना जुड़ी मानी जाती है।</p>



<p><strong>बाबा गोरखनाथ से जुड़ी धार्मिक मान्यता<br></strong>धार्मिक कथाओं में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा का संबंध बाबा गोरखनाथ से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि एक समय कठिन परिस्थितियों और आक्रमणों के कारण योगी और साधु नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे। ऐसे समय में बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाने की सलाह दी। यह भोजन कम समय में तैयार हो जाता था और लंबे समय तक ऊर्जा देता था। धीरे धीरे यह साधारण और पौष्टिक भोजन साधु संतों से समाज तक पहुंचा और मकर संक्रांति से जुड़ गया। तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और ग्रहण करना शुभ माना जाने लगा।</p>



<p><strong>ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से महत्व<br></strong>ज्योतिष के अनुसार, मकर संक्रांति पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश एक शुभ परिवर्तन माना जाता है। इस दिन किया गया दान विशेष फल देता है। खिचड़ी में प्रयुक्त चावल, दाल और घी को सात्विक आहार माना गया है, जो सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त समझा जाता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। यही कारण है कि स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परंपरा बनी। यह धार्मिक भावना लोगों को संयम और सेवा का संदेश भी देती है।</p>



<p><strong>स्वास्थ्य और सामाजिक संदेश<br></strong>मकर संक्रांति के समय ठंड अपने चरम पर होती है। ऐसे मौसम में खिचड़ी शरीर के लिए लाभकारी मानी जाती है। दाल और चावल का संतुलन शरीर को आवश्यक ऊर्जा देता है, जबकि घी पाचन शक्ति को मजबूत करता है। यह भोजन हल्का, सुपाच्य और पोषण से भरपूर होता है। इसके साथ ही खिचड़ी का दान सामाजिक समरसता का प्रतीक माना गया है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन या सामग्री देने से सहयोग और करुणा का भाव बढ़ता है। कुल मिलाकर, मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा आस्था, स्वास्थ्य और सामाजिक मूल्यों का सुंदर संगम है, जो इस पर्व को विशेष अर्थ देता है।</p>
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