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	<title>मंत्र &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>मंत्र &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी के स्वदेशी मंत्र पर केजरीवाल का पलटवार</title>
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		<pubDate>Mon, 22 Sep 2025 06:44:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[मंत्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="307" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhggg-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhggg.jpg 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhggg-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने के आवाहन पर प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि जनता स्वदेशी सामान का इस्तेमाल करें तो उन्हें खुद इसका पालन करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री किन विदेशी जहाजों और वस्तुओं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="307" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhggg-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhggg.jpg 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhggg-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने के आवाहन पर प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि जनता स्वदेशी सामान का इस्तेमाल करें तो उन्हें खुद इसका पालन करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री किन विदेशी जहाजों और वस्तुओं का रोजाना उपयोग करते हैं और क्या वे उन्हें छोड़ने को तैयार हैं।</p>



<p>केजरीवाल ने भारत में काम कर रही चार अमेरिकी कंपनियों को बंद करने की भी मांग की और ट्रम्प द्वारा भारत तथा भारतीयों के अपमान पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब केवल भाषण नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री से ठोस और प्रभावी कदमों की उम्मीद करती है। इस बयान से स्वदेशी आंदोलन पर चल रही चर्चा और भी तीव्र हो गई है और लोगों का ध्यान सरकार के व्यावहारिक कदमों की ओर केंद्रित हो गया है।</p>
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		<title>अखिलेश यादव ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए ‘मतदान भी-सावधान भी’ का दिया मंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Mar 2024 11:08:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[अखिलेश यादव]]></category>
		<category><![CDATA[आगामी लोकसभा चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[मंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[मतदान भी-सावधान भी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="555" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-151-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-151.png 555w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-151-medium.png 300w" sizes="(max-width: 555px) 100vw, 555px" />सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि जेएनयू में पीडीए ने जीत हासिल की है। इसी तरह जनता लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को हरा देगी। उन्होंने चुनाव में जीत के लिए मतदान भी-सावधान भी का मंत्र दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर कहा कि जेएनयू के छात्रसंघ चुनाव में पीडीए की एकजुटता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="555" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-151-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-151.png 555w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/03/Capture-151-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 555px) 100vw, 555px" />
<p>सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि जेएनयू में पीडीए ने जीत हासिल की है। इसी तरह जनता लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को हरा देगी। उन्होंने चुनाव में जीत के लिए मतदान भी-सावधान भी का मंत्र दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर कहा कि जेएनयू के छात्रसंघ चुनाव में पीडीए की एकजुटता की जीत हुई है।</p>



<p>उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर कहा कि पीडीए की एकजुटता ने जेएनयू छात्र संघ चुनाव में समेकित रूप से सभी महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल की है और भाजपा समर्थित एबीवीपी को भारी अंतर से बुरी तरह हराया है। दलित अध्यक्ष सहित सभी विजयी पदाधिकारियों और उन्हें चुनने वाले सजग, सतर्क मतदाता विद्यार्थियों को भी बहुत बधाई और जेएनयू की नकारात्मक छवि बनाने वालों को आगे भी यूं ही हराते रहने व देशहित में सकारात्मक राजनीति का झंडा फहराते रहने के लिए शुभकामनाएं!</p>



<p>जेएनयू के छात्रों की तरह देश भर के युवा आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा राज में फैली ‘अभूतपूर्व बेरोज़गारी’, पेपर लीक होने की वजह से कहीं ‘नौकरी न मिलने की हताशा’ और ‘इलेक्टोरल बॉण्ड’ के रूप में फैले भाजपा के ‘अथाह भ्रष्टाचार’ को हमेशा के लिए दूर करने के लिए, महंगी पढ़ाई और चतुर्दिक महंगाई से त्रस्त अपने परिवारों और आसपास के लोगों को भी भाजपा के खिलाफ मतदान करने के लिए प्रेरित करेंगे।</p>



<p><strong>साथ ही इस बार लोकसभा व अन्य चुनावों में युवा :</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>मतदान स्थल पर आख़िरी क्षण तक फ़र्ज़ी मतदान पर सजग निगाह रखने;</li>



<li>ईवीएम के सीलबंद होने;</li>



<li>ईवीएम मशीन रखने के स्थान तक मशीनों के सुरक्षित पहुंचने</li>



<li>ईवीएम के गोदामों पर 24 घंटे हर तरफ से चतुर्दिक चौकीदारी करने, किसी को ईवीएम गोदामों के आसपास फटकने न देने के लिए लामबंद रहने</li>



<li>मतगणना के दिन सक्रिय रहकर हर तरह से नजर रखने व</li>



<li>चुनाव परिणाम आने व जीत का सर्टिफिकेट न मिल जाने तक डटे रहने का काम करें।</li>
</ul>



<p>अखिलेश यादव ने कहा कि इस सजगता से ही ‘वोट की रक्षा’ की जा सकती है और जनता के हित में सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं। इसीलिए अपने देश के भविष्य की रक्षा करने के लिए हम अपने अभियान ‘मतदान भी-सावधान भी’ के तहत युवाओं से अपील करते हैं कि ‘न लापरवाही, न ढिलाई’ और ‘जब तक जीत का प्रमाण नहीं, तब तक विश्राम नहीं’! ‘युवा विरोधी भाजपा’ को आप सब ‘युवक-युवती की एकजुट शक्ति’ हरा देगी।</p>



<p>उन्होंने कहा कि भाजपा हटाओ, देश बचाओ! भाजपा हटाओ, नौकरी पाओ! भाजपा हटाओ, भविष्य बचाओ! भाजपा हटाओ, संविधान बचाओ!</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रंभा एकादशी आज : जाने शुभ कथा, मंत्र, मुहूर्त और महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Nov 2020 05:48:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[मुहूर्त और महत्व]]></category>
		<category><![CDATA[रंभा एकादशी आज : जाने शुभ कथा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="358" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc-1024x594.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc-1024x594.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc-300x174.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc-768x446.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc.jpg 1163w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />दीपावली पूर्व आने वाली कार्त‌िक माह की कृष्&#x200d;ण पक्ष की एकादशी के द‌िन से ही धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का स‌िलस‌िला शुरू हो जाता है। पौराणिक शास्त्रों में रमा (रंभा) एकादशी का बड़ा महत्व बताया गया है। इस एकादशी का महत्व इसल‌िए भी अध‌िक है, क्योंक‌ि यह एकादशी चातुर्मास की अंत‌िम &#8230;]]></description>
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<p>दीपावली पूर्व आने वाली कार्त‌िक माह की कृष्&#x200d;ण पक्ष की एकादशी के द‌िन से ही धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का स‌िलस‌िला शुरू हो जाता है। पौराणिक शास्त्रों में रमा (रंभा) एकादशी का बड़ा महत्व बताया गया है। इस एकादशी का महत्व इसल‌िए भी अध‌िक है, क्योंक‌ि यह एकादशी चातुर्मास की अंत‌िम एकादशी है। इस वर्ष यह एकादशी 11 नवंबर 2020, बुधवार को मनाई जा रही है।यह एकादशी इसीलिए भी अतिमहत्वपूर्ण है, क्योंकि श्रीहरि व‌िष्&#x200d;णु की पत्नी देवी लक्ष्मी का एक नाम रमा भी है, अत: यह एकादशी विष्णुजी को अधिक प्रिय है। इस एकादशी का नाम रमा/रंभा एकादशी है। मान्यता है क‌ि इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य सभी सुखों और ऐश्वर्य को प्राप्त करता है। </p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="594" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc-1024x594.jpg" alt="" class="wp-image-392601" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc-1024x594.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc-300x174.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc-768x446.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/scsxc.jpg 1163w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>आइए जानते हैं रमा एकादशी की पौराणिक एवं प्रामाणिक व्रत कथा-</strong> </p>



<p>धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! कार्तिक कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? इसकी विधि क्या है? इसके करने से क्या फल मिलता है? सो आप विस्तारपूर्वक बताइए। </p>



<p>भगवान श्रीकृष्ण बोले कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा है। यह बड़े-बड़े पापों का नाश करने वाली है। इसका माहात्म्य मैं तुमसे कहता हूं, ध्यानपूर्वक सुनो। </p>



<p>हे राजन! प्राचीनकाल में मुचुकुंद नाम का एक राजा था। उसकी इंद्र के साथ मित्रता थी और साथ ही यम, कुबेर, वरुण और विभीषण भी उसके मित्र थे। यह राजा बड़ा धर्मात्मा, विष्णुभक्त और न्याय के साथ राज करता था। उस राजा की एक कन्या थी, जिसका नाम चंद्रभागा था। उस कन्या का विवाह चंद्रसेन के पुत्र शोभन के साथ हुआ था। एक समय वह शोभन ससुराल आया। उन्हीं दिनों जल्दी ही पुण्यदायिनी एकादशी (रमा) भी आने वाली थी। </p>



<p>जब व्रत का दिन समीप आ गया तो चंद्रभागा के मन में अत्यंत सोच उत्पन्न हुआ कि मेरे पति अत्यंत दुर्बल हैं और मेरे पिता की आज्ञा अति कठोर है। दशमी को राजा ने ढोल बजवाकर सारे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिए। ढोल की घोषणा सुनते ही शोभन को अत्यंत चिंता हुई औ अपनी पत्नी से कहा कि हे प्रिये! अब क्या करना चाहिए, मैं किसी प्रकार भी भूख सहन नहीं कर सकूंगा। ऐसा उपाय बतलाओ कि जिससे मेरे प्राण बच सकें, अन्यथा मेरे प्राण अवश्य चले जाएंगे। </p>



<p>चंद्रभागा कहने लगी कि हे स्वामी! मेरे पिता के राज में एकादशी के दिन कोई भी भोजन नहीं करता। हाथी, घोड़ा, ऊंट, बिल्ली, गौ आदि भी तृण, अन्न, जल आदि ग्रहण नहीं कर सकते, फिर मनुष्य का तो कहना ही क्या है। यदि आप भोजन करना चाहते हैं तो किसी दूसरे स्थान पर चले जाइए, क्योंकि यदि आप यहीं रहना चाहते हैं तो आपको अवश्य व्रत करना पड़ेगा। ऐसा सुनकर शोभन कहने लगा कि हे प्रिये! मैं अवश्य व्रत करूंगा, जो भाग्य में होगा, वह देखा जाएगा। </p>



<p>इस प्रकार से विचार कर शोभन ने व्रत रख लिया और वह भूख व प्यास से अत्यंत पीड़ित होने लगा। जब सूर्य नारायण अस्त हो गए और रात्रि को जागरण का समय आया जो वैष्णवों को अत्यंत हर्ष देने वाला था, परंतु शोभन के लिए अत्यंत दु:खदायी हुआ। प्रात:काल होते शोभन के प्राण निकल गए। तब राजा ने सुगंधित काष्ठ से उसका दाह संस्कार करवाया। परंतु चंद्रभागा ने अपने पिता की आज्ञा से अपने शरीर को दग्ध नहीं किया और शोभन की अंत्येष्टि क्रिया के बाद अपने पिता के घर में ही रहने लगी। </p>



<p>रमा एकादशी के प्रभाव से शोभन को मंदराचल पर्वत पर धन-धान्य से युक्त तथा शत्रुओं से रहित एक सुंदर देवपुर प्राप्त हुआ। वह अत्यंत सुंदर रत्न और वैदुर्यमणि जटित स्वर्ण के खंभों पर निर्मित अनेक प्रकार की स्फटिक मणियों से सुशोभित भवन में बहुमूल्य वस्त्राभूषणों तथा छत्र व चंवर से विभूषित, गंधर्व और अप्सराअओं से युक्त सिंहासन पर आरूढ़ ऐसा शोभायमान होता था मानो दूसरा इंद्र विराजमान हो।</p>



<p> एक समय मुचुकुंद नगर में रहने वाले एक सोम शर्मा नामक ब्राह्मण तीर्थयात्रा करता हुआ घूमता-घूमता उधर जा निकला और उसने शोभन को पहचान कर कि यह तो राजा का जमाई शोभन है, उसके निकट गया। शोभन भी उसे पहचान कर अपने आसन से उठकर उसके पास आया और प्रणामादि करके कुशल प्रश्न किया। ब्राह्मण ने कहा कि राजा मुचुकुंद और आपकी पत्नी कुशल से हैं। नगर में भी सब प्रकार से कुशल हैं, परंतु हे राजन! हमें आश्चर्य हो रहा है। आप अपना वृत्तांत कहिए कि ऐसा सुंदर नगर जो न कभी देखा, न सुना, आपको कैसे प्राप्त हुआ। </p>



<p>तब शोभन बोला कि कार्तिक कृष्ण की रमा एकादशी का व्रत करने से मुझे यह नगर प्राप्त हुआ, परंतु यह अस्थिर है। यह स्थिर हो जाए ऐसा उपाय कीजिए। ब्राह्मण कहने लगा कि हे राजन! यह स्थिर क्यों नहीं है और कैसे स्थिर हो सकता है आप बताइए, फिर मैं अवश्यमेव वह उपाय करूंगा। मेरी इस बात को आप मिथ्या न समझिए। शोभन ने कहा कि मैंने इस व्रत को श्रद्धारहित होकर किया है। अत: यह सब कुछ अस्थिर है। यदि आप मुचुकुंद की कन्या चंद्रभागा को यह सब वृत्तांत कहें तो यह स्थिर हो सकता है। </p>



<p>ऐसा सुनकर उस श्रेष्ठ ब्राह्मण ने अपने नगर लौटकर चंद्रभागा से सब वृत्तांत कह सुनाया। ब्राह्मण के वचन सुनकर चंद्रभागा बड़ी प्रसन्नता से ब्राह्मण से कहने लगी कि हे ब्राह्मण! ये सब बातें आपने प्रत्यक्ष देखी हैं या स्वप्न की बातें कर रहे हैं। ब्राह्मण कहने लगा कि हे पुत्री! मैंने महावन में तुम्हारे पति को प्रत्यक्ष देखा है। साथ ही किसी से विजय न हो ऐसा देवताओं के नगर के समान उनका नगर भी देखा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिर नहीं है। जिस प्रकार वह स्थिर रह सके सो उपाय करना चाहिए। </p>



<p>चंद्रभागा कहने लगी हे विप्र! तुम मुझे वहां ले चलो, मुझे पतिदेव के दर्शन की तीव्र लालसा है। मैं अपने किए हुए पुण्य से उस नगर को स्थिर बना दूंगी। आप ऐसा कार्य कीजिए जिससे उनका हमारा संयोग हो क्योंकि वियोगी को मिला देना महान पु्ण्य है। सोम शर्मा यह बात सुनकर चंद्रभागा को लेकर मंदराचल पर्वत के समीप वामदेव ऋषि के आश्रम पर गया। वामदेव जी ने सारी बात सुनकर वेद मंत्रों के उच्चारण से चंद्रभागा का अभिषेक कर दिया। तब ऋषि के मंत्र के प्रभाव और एकादशी के व्रत से चंद्रभागा का शरीर दिव्य हो गया और वह दिव्य गति को प्राप्त हुई।</p>



<p> इसके बाद बड़ी प्रसन्नता के साथ अपने पति के निकट गई। अपनी प्रिय पत्नी को आते देखकर शोभन अति प्रसन्न हुआ। और उसे बुलाकर अपनी बाईं तरफ बिठा लिया। चंद्रभागा कहने लगी कि हे प्राणनाथ! आप मेरे पुण्य को ग्रहण कीजिए। अपने पिता के घर जब मैं आठ वर्ष की थी तब से विधिपूर्वक एकादशी के व्रत को श्रद्धापूर्वक करती आ रही हूं। इस पुण्य के प्रताप से आपका यह नगर स्थिर हो जाएगा तथा समस्त कर्मों से युक्त होकर प्रलय के अंत तक रहेगा। इस प्रकार चंद्रभागा ने दिव्य आभू&#x200d;षणों और वस्त्रों से सुसज्जित होकर अपने पति के साथ आनंदपूर्वक रहने लगी। </p>



<p>हे राजन! यह मैंने रमा एकादशी का माहात्म्य कहा है, जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं, उनके ब्रह्म हत्यादि समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष दोनों की एका&#x200d;दशियां समान हैं, इनमें कोई भेदभाव नहीं है। दोनों समान फल देती हैं। जो मनुष्य इस माहात्म्य को पढ़ते अथवा सुनते हैं, वे समस्त पापों से छूटकर विष्णु लोक को प्राप्त होता हैं।</p>



<p><strong>रमा एकादशी व्रत के शुभ मुहूर्त</strong> कार्तिक कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 11 नवंबर 2020, बुधवार को सबेरे 3.22 मिनट से हो गया है, जो कि बुधवार देर रात 12.40 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि- 12 नवंबर 2020, गुरुवार, सुबह 06.42 मिनट से 08.51 मिनट तक रहेगा तथा द्वादशी तिथि की समाप्ति 12 नवंबर 2020, गुरुवार रात 09.30 मिनट पर होगी।<br></p>



<p><strong>एकादशी के दिन निम्न मंत्रों का जाप करना लाभदायी रहेगा।</strong></p>



<p><strong>मंत्र-<br></strong>1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय </p>



<p>2. लक्ष्मी विनायक मंत्र -दन्ताभये चक्र दरो दधानं,कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रयालक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।। </p>



<p>3. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।। </p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जानिए करवा चौथ शुभ मुहूर्त, मंत्र, चंद्रोदय और पूजा विधि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Nov 2020 05:52:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[चंद्रोदय और पूजा विधि]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए करवा चौथ शुभ मुहूर्त]]></category>
		<category><![CDATA[मंत्र]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="480" height="360" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145.jpg 480w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 480px) 100vw, 480px" />सौभाग्यवती नारियों का सुंदर सुहाग पर्व करवा चौथ इस साल 4 नवंबर 2020 को है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चांद देखने के बाद अपना व्रत खोलती हैं। इस दिन अगर सुहागिन स्त्रियां उपवास रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है और उनका गृहस्थ जीवन सुखी रहता है।ये व्रत सूर्योदय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="480" height="360" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145.jpg 480w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 480px) 100vw, 480px" />
<p>सौभाग्यवती नारियों का सुंदर सुहाग पर्व करवा चौथ इस साल 4 नवंबर 2020 को है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="480" height="360" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145.jpg" alt="" class="wp-image-390482" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145.jpg 480w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/145-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 480px) 100vw, 480px" /></figure>



<p>इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चांद देखने के बाद अपना व्रत खोलती हैं।</p>



<p>इस दिन अगर सुहागिन स्त्रियां उपवास रखें तो उनके पति की उम्र लंबी होती है और उनका गृहस्थ जीवन सुखी रहता है।<br>ये व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होता है जिसे चांद निकलने तक रखा जाता है।</p>



<p>इस व्रत में सास अपनी बहू को सरगी देती है। इस सरगी को लेकर बहुएं अपने व्रत की शुरुआत करती हैं।<br>इस व्रत में शाम के समय शुभ मुहूर्त में चांद निकलने से पहले पूरे शिव परिवार की पूजा की जाती है।</p>



<p>चांद निकलने के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत को संपन्न करती हैं।</p>



<p>हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ मनाया जाता है। करवा चौथ का व्रत सुहागन स्त्रियों के लिए बहुत खास होता है।</p>



<p><strong>कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आने वाली संकष्टी चतुर्थी व्रत को ही करवा चौथ का व्रत है, इस साल कोरोना काल में करवा चौथ 4 नवंबर 2020 दिन बुधवार को मनाया जा रहा है। पति की दीर्घायु, यश-कीर्ति और सौभाग्य में वृद्धि के लिए इस व्रत को विशेष फलदायी माना गया है।</strong></p>



<p><strong>करवा चौथ शुभ मुहूर्त</strong><br>4 नवंबर 2020 , बुधवार –</p>



<p><strong>शाम 05 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 52 मिनट तक करवा चौथ की संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त है,<br></strong><br><strong>इस दिन चंद्रोदय शाम 7 बजकर 57 मिनट तक होगा।</strong></p>



<p><strong>करवा चौथ व्रत की पूजा विधि</strong><br>-सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं। सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें पानी पीएं और भगवान की</p>



<p><strong>पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें।</strong></p>



<p>करवा चौथ में महिलाएं पूरे दिन जल-अन्न कुछ ग्रहण नहीं करतीं फिर शाम के समय चांद को देखने के बाद दर्शन कर व्रत खोलती हैं।<br>-पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना कर इसमें करवे रखें।<br>-एक थाली में धूप, दीप, चंदन, रोली, सिन्दूर रखें और घी का दीपक जलाएं।<br>-पूजा चांद निकलने के एक घंटे पहले शुरू कर देनी चाहिए। इस दिन महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं।<br>-पूजन के समय करवा चौथ कथा जरूर सुनें या सुनाएं।<br>-चांद को छलनी से देखने के बाद अर्घ्य देकर चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए।<br>-चांद को देखने के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलना चाहिए।<br>-इस दिन बहुएं अपनी सास को थाली में मिठाई, फल, मेवे, रुपए आदि देकर उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लेती हैं।</p>



<p><strong>करवा चौथ पूजा मुहूर्त</strong><br><strong>4 नवंबर 2020 बुधवार –</strong></p>



<p><strong>करवा चौथ की संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त</strong><strong>शाम 05 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 52 मिनट तक</strong><strong>चंद्रोदय शाम 7 बजकर 57 मिनट तक होगा</strong></p>



<p><strong>चंद्र को अर्घ्य दें तो यह मंत्र अवश्य बोलें&#8230;.</strong><br><strong>करकं क्षीरसंपूर्णा तोयपूर्णमयापि वा। ददामि रत्नसंयुक्तं चिरंजीवतु मे पतिः॥</strong><strong>इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे। सुवासिनीभ्यो दद्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा।।</strong><strong>एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया। सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम्।।</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर 2020 : जानिए मुहूर्त, मंत्र, महत्व और 8 पौराणिक तथ्य</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%be-16-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-2020/373460</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Sep 2020 05:43:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[महत्व और 8 पौराणिक तथ्य]]></category>
		<category><![CDATA[विश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर 2020 : जानिए मुहूर्त]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="405" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1.jpg 835w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1-300x197.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1-768x503.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />इस वर्ष 16 सितंबर 2020 को विश्वकर्मा पूजा की जाएगी। हर साल अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को विश्वकर्मा पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा जी का जन्म कन्या संक्रांति के दिन हुआ था। इसी कारण हर साल कन्या संक्रांति &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="405" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1.jpg 835w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1-300x197.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1-768x503.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><div>इस वर्ष 16 सितंबर 2020 को विश्वकर्मा पूजा की जाएगी। हर साल अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को विश्वकर्मा पूजा की जाती है।</div>
<div></div>
<div><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-373465 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1.jpg" alt="" width="835" height="547" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1.jpg 835w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1-300x197.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/09/vishvkarma_diwas2_5097847_835x547-m_6403383_835x547-m-1-768x503.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 835px) 100vw, 835px" /></div>
<div></div>
<div>धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। शास्त्रों के अनुसार विश्वकर्मा जी का जन्म कन्या संक्रांति के दिन हुआ था। इसी कारण हर साल कन्या संक्रांति पर इनकी पूजा की जाती है। आपको बता दें कि इस साल विश्वकर्मा दिवस के दिन कई ऐसे योग बन रहे हैं जिनमें पूजा करने पर आपको कई गुना लाभ प्राप्त होंगे।</div>
<div></div>
<div><strong>विश्वकर्मा पूजा का मुहूर्त</strong></div>
<div></div>
<div>16 सितंबर को सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर कन्या संक्रांति का क्षण है। इस समय पर सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या संक्रांति के साथ ही विश्वकर्मा पूजा का मुहूर्त प्रारंभ हो जाएगा।</div>
<div></div>
<div>पूजा के समय राहुकाल का ध्यान रखना होता है। विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 01 बजकर 53 मिनट तक है। इस समय काल में पूजा न करें। राहुकाल को छोड़ कर किसी भी समय पूजा कर सकते हैं</div>
<div></div>
<div>भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए सपत्नीक घर और प्रतिष्ठान में फूल व चावल हल्दी और जल छिड़कने चाहिए।</div>
<div></div>
<div>इसके बाद पूजन करने वाले व्यक्ति को पत्नी के साथ यज्ञ में आहुति देनी चाहिए। पूजा करते समय दीप, धूप, पुष्प, गंध, सुपारी आदि का प्रयोग करना चाहिए। पूजन से अगले दिन प्रतिमा के विसर्जन करने का विधान है।</div>
<div></div>
<div><strong>पूजन के लिए मंत्र:-</strong></div>
<div></div>
<div>भगवान विश्वकर्मा की पूजा में ‘ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:, ॐ अनंतम नम:, पृथिव्यै नम:’ मंत्र का जप करना चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला हो।</div>
<div></div>
<div>यदि आप चाहे तो मात्र एक मंत्र &#8220;ॐ विश्वकर्मणे नमः&#8221; का जाप करना चाहिए। यह विश्वकर्मा जी को प्रसन्न करने का सबसे सुलभ और शुभ फल प्राप्ति करने का मंत्र है।</div>
<div></div>
<div>जप शुरू करने से पहले ग्यारह सौ, इक्कीस सौ, इक्यावन सौ या ग्यारह हजार जप का संकल्प लें। चुंकि इस दिन प्रतिष्ठान में छुट्टी रहती है तो आप किसी पुरोहित से भी जप संपन्न करा सकते हैं।</div>
<div></div>
<div><strong>औजारों की पूजा</strong></div>
<div></div>
<div>विश्वकर्मा जयंती के दिन प्रतिष्ठान के सभी औजारों या मशीनों या अन्य उपकरणों को साफ करके उनका तिलक करना चाहिए। साथ ही उन पर फूल भी चढ़ाएं।</div>
<div></div>
<div>हवन के बाद सभी भक्तों में प्रसाद का वितरण करना चाहिए। भगवान विश्वकर्मा के प्रसन्न होने से व्यक्ति के व्यवसाय में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है।</div>
<div></div>
<div>ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने वाले व्यक्ति के यहां घर धन-धान्य तथा सुख-समृद्धि की कमी नहीं रहती। इस पूजा की महिमा से व्यक्ति के व्यापार में वृद्धि होती है तथा सभी मनोकामना पूरी हो जाती है।</div>
<div></div>
<div>जिस फैक्टरी के मालिक भगवान विश्वकर्मा की जयंती को धूम-धाम से नहीं मनाते उन्हें पूरे साल समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<div></div>
<div><strong>वास्तुशास्त्र के जनक विश्वकर्मा जी से जुड़ी पौराणिक कथाएं :-</strong></div>
<div></div>
<div>1. हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को सृजन का देवता कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि विश्वकर्मा जी ने इन्द्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका आदि का निर्माण किया था। प्रत्येक वर्ष विश्वकर्मा जयंती पर औजार, मशीनों, औद्योगिक इकाइयों की पूजा की जाती है।</div>
<div></div>
<div>2. भगवान विश्वकर्मा को वास्तुशास्त्र का जनक कहा जाता है। उन्होंने अपने ज्ञान से यमपुरी, वरुणपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी, शिवमण्डलपुरी, पुष्पक विमान, विष्णु का चक्र, शंकर का त्रिशूल, यमराज का कालदण्ड आदि का निर्माण किया।</div>
<div></div>
<div>3. विश्वकर्मा जी ने ही सभी देवताओं के भवनों को भी तैयार किया। विश्वमर्का जयंती वाले दिन अधिकतर प्रतिष्ठान बंद रहते हैं। भगवान विश्वकर्मा को आधुनिक युग का इंजीनियर भी कहा जाता है।</div>
<div></div>
<div>4.एक कथा के अनुसार संसार की रचना के शुरुआत में भगवान विष्णु क्षीर सागर में प्रकट हुए। विष्णु जी के नाभि-कमल से ब्रहा जी की उत्पत्ति हुई। ब्रहा जी के पुत्र का नाम धर्म रखा गया। धर्म का विवाह संस्कार वस्तु नाम स्त्री से हुआ।</div>
<div></div>
<div>5.<strong>वास्तुशास्त्र के जनक विश्वकर्मा</strong></div>
<div>धर्म और वस्तु के सात पुत्र हुए। उनके सातवें पुत्र का नाम वास्तु रखा गया। वास्तु शिल्पशास्त्र में निपुण था। वास्तु के पुत्र का नाम विश्वकर्मा था। वास्तुशास्त्र में महारथ होने के कारण विश्कर्मा को वास्तुशास्त्र का जनक कहा गया। इस तरह भगवान विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ</div>
<div></div>
<div>6.<strong>भगवान विश्वकर्मा के जन्म से जुड़ा प्रसंग</strong></div>
<div>एक कथा के अनुसार संसार की रचना के शुरुआत में भगवान विष्णु क्षीर सागर में प्रकट हुए। विष्णु जी के नाभि-कमल से ब्रहा जी की उत्पत्ति हुई। ब्रहा जी के पुत्र का नाम धर्म रखा गया। धर्म का विवाह<br />
वस्तु नाम स्त्री से हुआ। धर्म और वस्तु के सात पुत्र हुए। उनके सातवें पुत्र का नाम वास्तु रखा गया। वास्तु शिल्पशास्त्र में निपुण थे। वास्तु के पुत्र का नाम विश्वकर्मा था। वास्तुशास्त्र में महारथ होने के कारण विश्कर्मा को वास्तुशास्त्र का जनक कहा गया। इस तरह भगवान विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ&#8230;</p>
</div>
<div><strong>7 .सबसे बड़े पुत्र मनु ऋषि</strong></div>
<div>भगवान विश्वकर्मा के सबसे बड़े पुत्र मनु ऋषि थे। इनका विवाह अंगिरा ऋषि की कन्या कंचना के साथ हुआ था। इन्होंने ही मानव सृष्टि का निर्माण किया। विष्णुपुराण में विश्वकर्मा को देवताओं का देव बढ़ई कहा गया है तथा शिल्पावतार के रूप में सम्मान योग्य बताया गया ह</div>
<div></div>
<div>स्कंदपुराण में उन्हें देवायतनों का सृष्टा कहा गया है। विश्वकर्मा इतने बड़े शिल्पकार थे कि उन्होंने जल पर चलने योग्य खड़ाऊ तैयार की थी।</div>
</div>
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