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	<title>भोलेनाथ &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>भोलेनाथ &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>सोमवार के दिन भोलेनाथ को अर्पित करें ये 4 चीजें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 05:27:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="325" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-30.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-30.jpg 795w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-30-300x158.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-30-768x404.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />दांपत्य जीवन में कड़वाहट और तनाव किसी भी व्यक्ति के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन केवल महादेव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में दूरियां आ गई हैं, तो शिव-गौरी का आशीर्वाद आपके रिश्ते को पुनर्जीवित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="325" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-30.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-30.jpg 795w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-30-300x158.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-30-768x404.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>दांपत्य जीवन में कड़वाहट और तनाव किसी भी व्यक्ति के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन केवल महादेव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में दूरियां आ गई हैं, तो शिव-गौरी का आशीर्वाद आपके रिश्ते को पुनर्जीवित कर सकता है। चलिए पढ़ते हैं इस दिन के कुछ खास उपाय।</p>



<p><strong>शिव-गौरी में जरूर करें ये काम<br></strong>सोमवार के दिन सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाएं और महादेव व माता पार्वती की संयुक्त पूजा करें।<br>शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही और शहद (पंचामृत) से अभिषेक करें। मान्यता है कि पंचामृत से अभिषेक करने पर वैवाहिक जीवन की कड़वाहट खत्म होती है और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है।<br>सोमवार के दिन शिवलिंग पर गौरी-शंकर रुद्राक्ष या पंचमुखी रुद्राक्ष की माला अर्पित करें। यह अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है।<br>21 बेलपत्र लें और उन पर चंदन से ‘राम’ लिखें। इन्हें शिवलिंग पर चढ़ाते समय मन-ही-मन अपने साथी के साथ सुखद जीवन की प्रार्थना करें।<br>शिवलिंग पर चंदन के साथ केसर का तिलक लगाएं। इस उपाय को करने से दांपत्य जीवन में सुख बढ़ाता है।</p>



<p><strong>करें इस मंत्रों का जप<br></strong>सोमवार के दिन पूजा के दौरान रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का कम-से-कम 11 या 108 बार जप करें –</p>



<p><strong>“हे गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया।<br>तथा मां कुरु कल्याणी कान्त कान्तां सुदुर्लभाम्॥”</strong></p>



<p><strong>शीघ्र विवाह के लिए उपाय<br></strong>यदि विवाह में देरी हो रही है या बार-बार बाधाएं आ रही हैं, तो ये उपाय आपके काम आ सकते हैं।</p>



<p>सोमवार के दिन शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध चढ़ाएं। इससे जल्दी विवाह के योग बनने लगते हैं।<br>जो जातक मनचाहे जीवनसाथी की चाह रखते हैं, उन्हें 16 सोमवार का व्रत करना चाहिए।<br>शिव मंदिर में 11 बूंदी के लड्डू चढ़ाएं और इसके बाद इन्हें जरूरतमंदों में बांट दें।</p>



<p><strong>भूल से भी न करें ये काम<br></strong>अगर आप इन नियमों का पालन करते हैं, तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।</p>



<p>किसी बड़े-बुजुर्ग, स्त्री, माता-पिता, साधु-संतों या मेहमानों का अपमान न करें।<br>तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) से दूर रहें।<br>शिवलिंग की पूजा में हल्दी, कुमकुम, सिंदूर या तुलसी भूलकर भी न चढ़ाएं। इन चीजों को शिव पूजा में वर्जित माना जाता है।</p>
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		<title>सावन में अगर आपको दिखे ये संकेत, तो भोलेनाथ की होने वाली है आप पर कृपा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Jul 2025 04:41:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भोलेनाथ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="477" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-163-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-163.jpg 477w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-163-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 477px) 100vw, 477px" />सावन के महीने में भोलेनाथ की पूजा और व्रत करने से भक्तों को कई संकेत मिलते हैं जो बताते हैं कि उन पर भगवान शिव की कृपा हो रही है। मानसिक शांति तनाव में कमी और शिव भक्ति में लीन होना इसके कुछ संकेत हैं। सपने में शिवलिंग या त्रिशूल जैसे प्रतीक दिखना भी शिव &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="477" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-163-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-163.jpg 477w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/2-163-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 477px) 100vw, 477px" />
<p>सावन के महीने में भोलेनाथ की पूजा और व्रत करने से भक्तों को कई संकेत मिलते हैं जो बताते हैं कि उन पर भगवान शिव की कृपा हो रही है। मानसिक शांति तनाव में कमी और शिव भक्ति में लीन होना इसके कुछ संकेत हैं। सपने में शिवलिंग या त्रिशूल जैसे प्रतीक दिखना भी शिव कृपा का संकेत है।</p>



<p>देवाधिदेव महादेव के प्रिय महीने सावन में भक्त अपने आराध्य की पूजा और व्रत कर रहे हैं। आप भी भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अपने स्तर से कुछ न कुछ जरूर कर रहे होंगे। भले ही एक लोटा जल चढ़ा रहे हों।</p>



<p>यदि ऐसा करते हुए आपको कुछ संकेत मिलने लगें, तो समझ लीजिए कि भोलेनाथ की कृपा आप पर हो रही है। दरअसल, शिवजी सिर्फ भाव के भूखे हैं। यदि कोई उन्हें एक लोटा जल ही पूर्ण श्रद्धा से चढ़ाता है, तो वह उसकी मनोकामनाओं को पूरा कर देते हैं।</p>



<p>सावन में जो व्यक्ति नियमित रूप से भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक करते हैं उनके ऊपर भगवान शिव अपनी विशेष कृपा करते हैं। मगर, आपको कैसे पता चलेगा कि आपके ऊपर शिवजी की कृपा हो रही है।</p>



<p>क्या सच में ऐसे कुछ संकेत मिलने लगेंगे। अगर आप गौर करेंगे, तो पाएंगे कि ऐसा हो रहा है और इसकी वजह से आपकी जिंदगी में भी बदलाव दिखने लगे हैं |</p>



<p><strong>परेशानियां दूर हों और मन रहे शांत<br></strong>भोलेनाथ की भक्ति करने पर आपको मानसिक शांति मिलने लगेगी। आप पाएंगे कि पहले की तुलना में आपको अब गुस्सा कम आ रहा है। तनाव कम हो रहा है। शिवालय जाए बिना या पूजा किए बिना आपको अपने दिन में कुछ अधूरा लगने लगा है |</p>



<p>आपको लग रहा है कि आज कुछ मिस हो गया है, तो समझ लीजिए कि आप पर भोलेनाथ की कृपा हो रही है। बिना भोलेनाथ की मर्जी के आप उनके द्वार भी नहीं पहुंच सकेंगे। इसी तरह यदि आपके जीवन की परेशानियां कम होने लगी हैं या खत्म हो गई हैं, तो भी समझिए कि शिवजी की कृपा मिल रही है।</p>



<p><strong>सपने में होने लगें दर्शन<br></strong>यदि आप अचानक से शिव भक्ति में लीन होने लगे हैं। रोजाना मंदिर जाने लगे हैं। शिव मंत्रों का जाप करने लगे हैं या उनके भजन सुनने लगे हैं, तो भी यह शिव कृपा के संकेत हैं। इसके अलावा यदि सपने में आपको भगवान शिव या उनसे जुड़े प्रतीक जैसे शिवलिंग, त्रिशूल, सांप, बेलपत्र आदि दिखने लगें, तो भी संकेत है कि आप पर भोलेनाथ की कृपा हो रही है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>भोलेनाथ के ससुराल से लेकर पाताल तक, सीहोर में दिखा शिवभक्ति का अद्वितीय स्वरूप</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 21 Jul 2025 09:07:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[भोलेनाथ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/5-50-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/5-50.jpg 812w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/5-50-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/5-50-768x433.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में श्रावण मास के दौरान शिवभक्ति का उत्साह चरम पर है। यहां स्थित चार प्रमुख शिव मंदिर – सहस्त्रलिंगेश्वर, आष्टा का शंकर मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर और पातालेश्वर महादेव – अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और रहस्यमयी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहे हैं। श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की आराधना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/5-50-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/5-50.jpg 812w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/5-50-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/07/5-50-768x433.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में श्रावण मास के दौरान शिवभक्ति का उत्साह चरम पर है। यहां स्थित चार प्रमुख शिव मंदिर – सहस्त्रलिंगेश्वर, आष्टा का शंकर मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर और पातालेश्वर महादेव – अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और रहस्यमयी विशेषताओं के कारण श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रहे हैं।</p>



<p>श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की आराधना के लिए देशभर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में यह उत्साह अपने चरम पर है, जहां के कई प्राचीन और रहस्यमयी शिव मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। मान्यता है कि श्रावण मास में की गई पूजा वर्षभर के पुण्य के बराबर होती है। सीहोर जिले के चार प्रमुख शिव मंदिर – सहस्त्रलिंगेश्वर, आष्टा शंकर मंदिर, मनकामेश्वर मंदिर और पातालेश्वर मंदिर – भक्तों की आस्था के केंद्र बने हुए हैं।</p>



<p><strong>सहस्त्रलिंगेश्वर मंदिर : एक शिवलिंग में समाहित हैं हजार शिवलिंग<br></strong>सीहोर जिले के बड़ियाखेड़ी में स्थित सहस्त्रलिंगेश्वर मंदिर अनूठे शिवलिंग के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। यहां एक विशाल शिवलिंग में एक हजार छोटे-छोटे शिवलिंग समाहित हैं। मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा के अनुसार, यह शिवलिंग सीवन नदी से स्वयंभू रूप में प्राप्त हुआ था, जिसके बाद उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया।</p>



<p>इस पाषाण निर्मित शिवलिंग की स्थापना 300 से 400 वर्ष पूर्व मानी जाती है और इसे तांबे से सुसज्जित किया गया था। श्रावण मास के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। बताया जाता है कि देशभर में सहस्त्रलिंगेश्वर जैसा मंदिर केवल तीन ही स्थानों पर है।</p>



<p><strong>आष्टा: मां पार्वती का मायका, जहां भगवान शंकर जाते हैं ससुराल<br></strong>सीहोर जिले से लगभग 45 किमी दूर आष्टा नगर भी शिवभक्तों के लिए खास महत्व रखता है। यहां स्थित प्राचीन शंकर मंदिर को मां पार्वती का पीहर कहा जाता है। मंदिर में भगवान शिव और मां पार्वती की एक साथ प्रतिमाएं हैं, जहां भक्तों को दोनों के दर्शन एक साथ होते हैं।</p>



<p>मंदिर के पुजारी हेमंत गिरी के अनुसार, यह मंदिर वर्षों पुराना है और ऐसा विरला स्थल है जहां से मां पार्वती की उत्पत्ति बताई जाती है। श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष भीड़ रहती है। हाल के वर्षों में जनसहयोग से मंदिर का कायाकल्प भी किया गया है, जिससे इसकी भव्यता और आस्था दोनों में वृद्धि हुई है।</p>



<p><strong>मनकामेश्वर मंदिर : जहां हर मुराद होती है पूरी<br></strong>सीहोर शहर के तहसील चौराहे पर स्थित मनकामेश्वर मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां आने वाला भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। श्रावण मास के दौरान यहां विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। पेशवाकालीन काल में निर्मित यह मंदिर करीब 200 वर्ष पुराना है और इसकी शिव प्रतिमा नर्मदा स्टोन से बनी है। मंदिर परिसर में स्थित बावड़ी भी आकर्षण का केंद्र है, जिसमें सालभर एक जैसा जल स्तर बना रहता है। पुरातत्व विशेषज्ञों ने भी इसके ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित किया है।</p>



<p><strong>पातालेश्वर महादेव मंदिर, सातदेव : जहां आज भी रहस्य जीवित हैं<br></strong>नर्मदा नदी के उत्तर तट पर बसे सातदेव गांव में स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर अपने रहस्यमय स्वरूप के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां से एक सुरंग सीधे नर्मदा नदी तक जाती है। यह मंदिर उस स्थान पर स्थित है जहां नर्मदा, सीप और नइडी नदियों का संगम होता है। स्थानीय बुजुर्गों और संतों के अनुसार, यहीं सप्त ऋषियों ने वर्षों तक तपस्या की थी, जिसके चलते गांव का नाम ‘सातदेव’ पड़ा।</p>



<p>मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है और कहा जाता है कि इसकी लंबाई हर वर्ष बढ़ती जाती है। शिवलिंग के पास सिक्का डालने पर देर तक गूंज सुनाई देती है, जो इसकी गहराई और प्राचीनता को प्रमाणित करती है। मंदिर के नीचे नर्मदा तट पर स्थित कुंड में स्नान करने का भी विशेष महत्व बताया जाता है।</p>



<p>श्रावण मास में सीहोर जिले के इन प्राचीन शिव मंदिरों में श्रद्धालु दूर-दूर से आकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। किसी को सहस्त्र शिवलिंगों के दर्शन का सुख चाहिए, तो कोई मां पार्वती के पीहर में भोलेनाथ से आशीर्वाद मांग रहा है। हर मंदिर की अपनी अनूठी कथा, रहस्य और विशेषता है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव से भर देती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>माँ पार्वती के इस अवतार के पैरों के नीचे लेट गए थे भोलेनाथ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Radha Rajpoot]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Jun 2019 06:19:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[पार्वती]]></category>
		<category><![CDATA[भोलेनाथ]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-18T114558.196.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />आप सभी को बता दें कि मां दुर्गा के दस अवतारों में से एक हैं महाकाली का अवतार है, जिनके काले और डरावने रूप की उत्पति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी. कहा जाता है यह एक ऐसी शक्ति हैं जिनसे स्वयं काल भी भय खाता है और इनका क्रोध इतना विकराल रूप &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-18T114558.196.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><strong>आप सभी को बता दें कि मां दुर्गा के दस अवतारों में से एक हैं महाकाली का अवतार है, जिनके काले और डरावने रूप की उत्पति राक्षसों का नाश करने के लिए हुई थी. कहा जाता है यह एक ऐसी शक्ति हैं जिनसे स्वयं काल भी भय खाता है और इनका क्रोध इतना विकराल रूप ले लेता है कि संपूर्ण संसार की शक्तियां मिल कर भी उनके गुस्से पर काबू नहीं पा सकती. कहा जाता है माता के इस क्रोध को रोकने के लिए स्वयं उनके पति भगवान शंकर उनके चरणों में आ कर लेट गए थे और उन्होंने उनपर पैर रखकर अपने गस्से को शांत किया था. कहा जाता है इस संबंध में शास्त्रों में बहुत सारी कथाएं वर्णित हैं.लेकिन क्या किसी को ये मालूम है कि भगवान शंकर को क्यों आना पड़ा माता के पैरों के नीचे. वैसे अगर आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं. आइए जानते हैं.</strong></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-246273 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-18T114558.196.jpg" alt="" width="502" height="281" /></p>
<p><strong>कथा &#8211; शास्त्रों में वर्णित कथा के अनुसार एक बार रक्तबीज नामक दैत्य ने कठोर तपस्या की. जिसके बाद उसे वरदान मिला कि उसके शरीर से खून की एक भी बूंद जब धरती पर गिरेगी तो उससे सैकड़ों दैत्य बन जाएंगे. रक्तबीज इस शक्ति के बल पर निर्दोषों को परेशान करना शुरू कर दिया. परिणाम स्वरूप तीनों लोकों पर उसका आतंक मच गया. इतना ही नहीं, रक्तबीज देवताओं को भी ललकारने लगा. जिसके बाद देवताओं और दानवों के बीच भयंकर लड़ाई हुई. देवताओं ने दानवों को हराने के लिए पूरी शक्ति लगा दी. रक्तबीज के शरीर से खून की एक बूंद जमीन पर गिरती तो देखते ही देखते सैकड़ों दैत्य पैदा हो जाते थे. ऐसे में रक्तबीज को हराना लगभग नामुमकिन हो गया था.</strong></p>
<p><strong>देवता लोग इस परेशानी को सुलझाने के लिए मां काली की शरण में गए.माता काली ने राक्षसों का वध करना शुरू कर दिया, लेकिन मां जब भी रक्तबीज के शरीर पर वार करती तो उसके खून से और भी राक्षस पैदा हो जाते. इसके लिए मां ने अपनी जीभ को बड़ा कर लिया. जिसके बाद रक्तबीज का रक्त जमीन पर गिरने की बजाय मां की जीभ पर गिरने लगी. क्रोध से उनके होंठ फड़कने लगे और आंखें बड़ी-बड़ी हो गई.महाकाली के विकराल रूप को देखकर सभी देवता परेशान हो गए, क्योंकि उन्हें शांत करना किसी के बस की बात नहीं थी. दानवों की लाशें बिछने लगी. मां को शांत करने के लिए सभी देव महादेव की शरण में पहुंच गए. भगवान शिव ने मां काली को शांत करने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी. तभी शिव जी उनके रास्ते में लेट गए और जब मां के पैर उन पर पड़े तो मां चौंक गईं. जिसके बाद उनका गुस्सा बिल्कुल शांत हो गया. लेकिन उन्हें इस बात पछतावा हुआ कि उन्होंने अपने पति के ऊपर पांव रख दिए.</strong></p>
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		<title>इस राक्षस से बचने के लिए गुफा में छिप गए थे भोलेनाथ, अनसुनी कथा जानिए&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 May 2019 10:38:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कथा]]></category>
		<category><![CDATA[गुफा]]></category>
		<category><![CDATA[छिप]]></category>
		<category><![CDATA[भोलेनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[राक्षस]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg.jpg 630w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />कई भगवान शिव को भोलेनाथ इसलिए कहा गया क्योंकि वो बड़े ही आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं और उनसे अपनी बात मनवाना बहुत ही आसान है. इसी के साथ देवता हों या फिर राक्षस या फिर कोई साधारण मनुष्य अगर भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया फिर भी कुछ भी मुश्किल नहीं है. जी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg.jpg 630w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>कई भगवान शिव को भोलेनाथ इसलिए कहा गया क्योंकि वो बड़े ही आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं और उनसे अपनी बात मनवाना बहुत ही आसान है. इसी के साथ देवता हों या फिर राक्षस या फिर कोई साधारण मनुष्य अगर भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया फिर भी कुछ भी मुश्किल नहीं है. जी हाँ, भोलेबाबा अपने भक्तों के साथ कोई भेदभाव नहीं करते हैं और वह अपने भक्तों के प्राण की रक्षा भी करते हैं, लेकिन उनके जीवन में एक समय ऐसा आ गया था जब उन्हें अपने ही प्राणों की रक्षा करनी पड़ी थी. जी हाँ, और आज हम आपको इसी के पीछे की कहानी बताने जा रहे हैं.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228853 size-full" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg.jpg" alt="" width="630" height="354" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg.jpg 630w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/dgfdg-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 630px) 100vw, 630px" /></p>
<p><strong>भस्मासुर ने शिवजी को कर लिया प्रसन्न &#8211; </strong>पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बड़ा ही भंयकर राक्षस था भस्मासुर. वो राक्षस दुनिया का सबसे ताकतवर राक्षस बनना चाहता था और उसकी इच्छा थी की वो देवताओं के साथ साथ मनुष्यों पर भी शासन कर सके. अपने इस इच्छा की पूर्ति के लिए उसने शिव जी की कठोर तपस्या की. उसकी तपस्या में थोड़ा वक्त तो लगा, लेकिन उसकी लगन देखकर भगवान शिव प्रसन्न हो गए और उसके सामने प्रकट हो गए.अपने सामने महादेव को देखकर भस्मासुर उनके सामने नतमस्तक हो गया. उसने महादेव को प्रणाम किया और तब महादेव ने पूछा कि किस कारण से तुमने मुझे याद किया है और तुम्हें क्या चाहिए. भस्मासुर ने सबसे पहले महादेव से अमरत्व का वरदान मांग लिया.</p>
<p>भगवान शिव ने अमरत्व का वरदान देने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि जो भी इस संसार में आया है उसे एक दिन जाना है इसलिए अमरत्व का वरदान तो तुम्हें नहीं मिल सकता. तब भस्मासुर ने अपनी मांग बदलकर एक और वरदान मांगा की वो जिसपर भी हाथ रखे वो जलकर भस्म हो जाए. ऐसे किया विष्णु जी ने भस्मासुर का वध भगवान शिव ने उसे वरदान दे दिया. ये वरदान पाते ही भस्मासुर सबसे पहले शिव जी पर ही इसे अपनाने के लिए आतुर हो गया. महादेव अपना दिया वरदान वापस नहीं ले सकते थे ऐसे में अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भटकने लगे. किसी तरह भगवान शिव ने अपनी जान बचाई तो विष्णु जो को सारी बात बता दी.भगवान विष्णु ने सारी बात सुनी और भस्मासुर का अंत करने के लिए उन्होंने मोहिनी रुप धारण कर लिया. भस्मासुर की नजर मोहिनी रुप पर पड़ी तो उसे देखकर मंत्रमुग्ध हो गया. भस्मासुर को किसी भी बात का ध्यान ना रहा. उसका पूरा ध्यान सिर्फ मोहिनी पर आ टिका था.</p>
<p>भस्मासुर ने खूबसूरत स्त्री से पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है? इस पर स्त्री ने बताया की वो मोहिनी है. मोहिनी को देखकर भस्मासुर उसकी खूबसूरती में खो गया. मोहनी ने कहा कि वो नर्तकी है और विवाह उसी से करेगी जिसे नृत्य करना आता हो. भस्मासुर ने उससे कहा कि उसे नृत्य करना तो नहीं आता अगर वो सीखा दे तो सीख लेगा. मोहिनी ने कहा ठीक है मैं तुम्हें नृत्य करना सीखाऊंगी. ऐसे करके वो उसे नृत्य करना सीखाने लगी. प्रेम आकर्षण में डूबा हुआ भस्मासुर भूल गया कि उसे क्या वरदान मिला है. नृत्य करते हुए मोहिनी ने जैसे ही अपने सिर पर हाथ रखा भस्मासुर ने भी अपने सिर पर हाथ रख लिया. इस करह से भस्मासुर का अंत हुआ.</p>
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