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	<title>भूजल स्तर &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>भूजल स्तर &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>पंजाब में पानी पर सियासत: सूखते भविष्य की चिंता के बीच राजस्थान संग विवाद गरमाया</title>
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		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:50:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[भूजल स्तर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/6-13.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/6-13.jpg 828w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/6-13-300x164.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/6-13-768x420.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंजाब में गिरते भूजल स्तर ने पहले ही सरकार की चिंता बढ़ा रखी है। अब दूसरे राज्यों के साथ पानी को लेकर बढ़ते विवाद ने संकट को और गंभीर बना दिया है। खासकर पंजाब-राजस्थान जल विवाद ने एक बार फिर पानी पर सियासत को गरमा दिया है। पंजाब सरकार ने 1920 के दशक में हुए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="338" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/6-13.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/6-13.jpg 828w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/6-13-300x164.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/6-13-768x420.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंजाब में गिरते भूजल स्तर ने पहले ही सरकार की चिंता बढ़ा रखी है। अब दूसरे राज्यों के साथ पानी को लेकर बढ़ते विवाद ने संकट को और गंभीर बना दिया है। खासकर पंजाब-राजस्थान जल विवाद ने एक बार फिर पानी पर सियासत को गरमा दिया है।</p>



<p>पंजाब सरकार ने 1920 के दशक में हुए समझौते का हवाला देते हुए राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग की है। इस कदम के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राज्य खुद गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। सरकार 23 जिलों के 111 ब्लॉकों को ‘अत्यधिक दोहन’ की श्रेणी में घोषित कर चुकी है, जहां नए ट्यूबवेल लगाने पर रोक है।</p>



<p>राज्य के अधिकतर जिलों में भूजल का स्तर तेजी से गिर रहा है। अमृतसर, लुधियाना, पटियाला, जालंधर समेत 20 जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकार नहरी पानी की आपूर्ति बढ़ाने और वर्षा जल संचयन जैसे उपायों पर जोर दे रही है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।</p>



<p><strong>सिंचाई में ही खप रहा भूजल, बढ़ता असंतुलन<br></strong>पंजाब में भूजल संकट की सबसे बड़ी वजह खेती में इसका भारी इस्तेमाल है। हर साल करीब 24.89 अरब घन मीटर भूजल केवल सिंचाई के लिए खपत हो रहा है। ऐसे में फसल विविधीकरण अब समय की जरूरत बन गया है।</p>



<p>आंकड़ों के अनुसार, एक किलो चावल उगाने में लगभग 4 हजार लीटर पानी लगता है। राज्य में हर साल 175 से 180 लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन होता है, जिससे जल दबाव और बढ़ रहा है।</p>



<p>स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जहां वार्षिक जल पुनर्भरण 18.60 अरब घन मीटर है, वहीं भूजल निष्कर्षण 26.27 अरब घन मीटर तक पहुंच चुका है। यानी जितना पानी जमीन से निकाला जा रहा है, उतना वापस नहीं लौट पा रहा—और यही असंतुलन संकट को गहरा रहा है।</p>



<p><strong>फसल चक्र ही जल संकट की जड़<br></strong>विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब में फसल चक्र ही जल संकट की जड़ है। धान और गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण हर साल भारी मात्रा में भूजल निकाला जा रहा है। एक किलो चावल उगाने में करीब 4000 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि भूजल का पुनर्भरण इससे काफी कम है।</p>



<p>इसी कारण अब कृषि विविधीकरण को ही समाधान बताया जा रहा है। पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एएन सिंह के मुताबिक, यदि जल्द फसल पैटर्न नहीं बदला गया तो 2040 तक प्रदेश में हालात और बिगड़ सकते हैं।</p>



<p><strong>हिस्से का पानी कम, भूजल पर बढ़ता दबाव<br></strong>पंजाब को सतलुज, रावी और ब्यास नदियों से हर साल करीब 35 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी मिलता है, लेकिन इसमें उसका आवंटित हिस्सा केवल 17.95 बीसीएम ही है। शेष पानी हरियाणा और राजस्थान को चला जाता है। यही वजह है कि प्रदेश में पानी की कमी को पूरा करने के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन किया जा रहा है।</p>



<p>हालांकि हाल के वर्षों में स्थिति में कुछ सुधार के प्रयास हुए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर असर सीमित ही दिख रहा है। दूसरी ओर, राजस्थान में भी हालात चिंताजनक हैं। वहां 302 में से 214 ब्लॉक अत्यधिक दोहन की श्रेणी में हैं, जो करीब 70.86 फीसदी है। इससे वहां पानी की मांग लगातार बढ़ रही है।</p>



<p>इसी बीच हिमाचल प्रदेश ने भी जल परियोजनाओं से जुड़ी बिजली में अपने हिस्से को लेकर दावेदारी तेज कर दी है, जिससे क्षेत्रीय जल विवाद और जटिल होते जा रहे हैं।</p>



<p><strong>नहरी पानी बढ़ाने के लिए सरकार के बड़े कदम<br></strong>राज्य में 545 किलोमीटर लंबी 79 नहरों को दोबारा चालू किया गया।<br>सरहिंद फीडर नहर की रिलाइनिंग का काम भी पूरा हो चुका है।<br>देवीगढ़ डिवीजन में नौ नई नहरें तैयार की गई हैं। मालवा नहर बनने के बाद नहरी पानी की उपलब्धता और बढ़ने की उम्मीद है।<br>नहरों, खालों के पुनर्जीवन और बुनियादी ढांचे के विकास पर अब तक 4557 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।<br>कंडी नहर परियोजना के तहत 433 गांवों में 1.25 लाख एकड़ क्षेत्र को फिर से सिंचाई सुविधा से जोड़ा गया है।<br>238.90 करोड़ रुपये की लागत से कंडी नहर नेटवर्क की कंक्रीट लाइनिंग कर टेल एंड तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की गई है।<br>राज्य में 1450 अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार कर जल भंडारण व भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।</p>



<p><strong>एसवाईएल पर पंजाब-हरियाणा में खींचतान जारी<br></strong>राजस्थान के अलावा हरियाणा के साथ भी पंजाब का पानी को लेकर विवाद लंबे समय से जारी है। सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर का मुद्दा अब तक सुलझ नहीं पाया है। हरियाणा लगातार अतिरिक्त पानी की मांग कर रहा है, जबकि पंजाब पानी की कमी का हवाला देकर देने से इनकार करता रहा है।</p>



<p>यह विवाद 1981 के जल बंटवारा समझौते से शुरू हुआ था। इसके तहत भाखड़ा बांध का पानी 214 किलोमीटर लंबी एसवाईएल नहर के जरिए हरियाणा तक पहुंचाया जाना था। नहर का 122 किलोमीटर हिस्सा पंजाब और 92 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में बनना था। हरियाणा ने अपना निर्माण कार्य पूरा कर लिया, लेकिन पंजाब ने आगे काम रोक दिया।</p>



<p>मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। दोनों राज्यों के बीच कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है।</p>



<p><strong>विविधीकरण ही विकल्प, वरना 2040 तक संकट गहराएगा<br></strong>पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एएन सिंह ने चेताया है कि प्रदेश को भूजल संकट से बचाने के लिए कृषि विविधीकरण ही एकमात्र रास्ता है। उनके मुताबिक, धान-गेहूं के पारंपरिक चक्र से बाहर निकलकर किसानों को दूसरी फसलों की ओर शिफ्ट करना जरूरी है, तभी हालात में सुधार संभव है।</p>



<p>उन्होंने बताया कि चावल की खेती में सबसे अधिक पानी खर्च होता है, जिससे भूजल का तेजी से दोहन हो रहा है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो 2040 तक पंजाब में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं।</p>



<p>एएन सिंह ने कहा कि धान और गेहूं पंजाब की पारंपरिक फसलें नहीं रही हैं। ऐसे में किसानों को वैकल्पिक फसलों के लिए बेहतर दाम और प्रोत्साहन दिया जाए तो जल संकट पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।</p>



<p>हम 1920 के समझौते के तहत ही राजस्थान से बकाया राशि मांग रहे हैं जो वह 1960 से नहीं चुका रहे हैं। जब हम पानी दे रहे हैं तो पहले की तरह ही राशि भी दी जानी चाहिए। राजस्थान को पत्र लिखा दिया है। पहले किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया है लेकिन अब हमने प्रयास शुरू कर दिए हैं।&nbsp;<strong>-बरिंदर गोयल, जल संसाधन मंत्री, पंजाब।</strong></p>
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		<title>पंजाब में भूजल स्तर के आंकड़े गंभीर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Feb 2024 07:11:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[आंकड़े गंभीर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-6-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-6.jpg 837w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-6-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-6-768x430.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब भूजल संकट का सामना कर रहा है। पंजाब सरकार भी इसे रोकने में नाकाम रही। लगातार दोहन से स्थिति और खराब हो रही है। याची ने अदालत से अधिकारियों को पंजाब भूजल निष्कर्षण और संरक्षण निर्देश- 2023 को वापस लेने या इसमें संशोधन करने की अपील की। पंजाब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-6-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-6.jpg 837w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-6-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/punjab-1-6-768x430.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब भूजल संकट का सामना कर रहा है। पंजाब सरकार भी इसे रोकने में नाकाम रही। लगातार दोहन से स्थिति और खराब हो रही है। याची ने अदालत से अधिकारियों को पंजाब भूजल निष्कर्षण और संरक्षण निर्देश- 2023 को वापस लेने या इसमें संशोधन करने की अपील की।</p>



<p>पंजाब में भूजल के गिरते स्तर से जुडे आंकड़ों को चिंताजनक व गंभीर बताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भूजल संरक्षण के लिए जनवरी 2023 में जारी दिशा-निर्देशों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर पंजाब सरकार, पंजाब जल संसाधन विकास एजेंसी व केंद्रीय भूमिगत जल प्राधिकरण को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।</p>



<p>पंचकूला निवासी ध्रुव चावला ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब में भूजल के गिरते स्तर को रोकने में पंजाब सरकार नाकाम रही है। याचिका में कहा गया कि पंजाब पहले से ही भूजल संकट का सामना कर रहा है। लगातार भूजल के दोहन से स्थिति और खराब होती जा रही है।</p>



<p>केंद्रीय भूजल अथॉरिटी द्वारा 2020 के ब्लॉक वाइज भूजल मूल्यांकन के दौरान पाया गया कि पंजाब के अधिकांश जिलों ने अपने भूजल संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर लिया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के हवाले से बताया गया कि पंजाब का भूजल 2039 तक 300 मीटर से नीचे गिर सकता है। </p>



<p>पंजाब में संबंधित अथॉरिटी द्वारा जल संरक्षण के लिए तैयार की गई प्रणाली दूर-दूर तक प्रभावी नहीं है। सब्सिडी कम होने के चलते उद्योग ट्रीटेड पानी को सिंचाई क्षेत्र को उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। उद्योगों को ट्रीटेड पानी को किसानों तक पहुंचाने के लिए कोई प्रभावी प्रोत्साहन नहीं दिया गया।</p>



<p>पंजाब जल संसाधन विकास एजेंसी ने शुरुआत में 2020 में दिशानिर्देश जारी किए थे। सार्वजनिक आपत्तियों पर विचार करने के बाद उन्होंने 2023 की शुरुआत में अंतिम दिशानिर्देश जारी किए, जिन्हें याचिका में चुनौती दी गई है।</p>



<p>याचिकाकर्ता ने कोर्ट से राज्य सरकार के अधिकारियों को पंजाब भूजल निष्कर्षण और संरक्षण निर्देश, 2023 को वापस लेने या उनमें संशोधन करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। याची ने कहा कि ऐसा करके ही पंजाब में भूजल की कमी से निपटने में अधिक प्रभावी हुआ जा सकता है।</p>



<p>इसके अलावा याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के बाद भूजल की कमी के खिलाफ अपनी नीति तैयार करने का निर्देश देने का आग्रह किया। याची पक्ष की ओर से पेश किए गए आंकड़ों को चिंताजनक बताते हुए हाईकोर्ट ने अब इस मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और तुरंत इस पर कदम उठाना जरूरी है।</p>
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