<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>भाद्रपद माह &#8211; Live Halchal</title>
	<atom:link href="https://livehalchal.com/tag/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<description>Latest News, Updated News, Hindi News Portal</description>
	<lastBuildDate>Wed, 20 Aug 2025 04:26:34 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg</url>
	<title>भाद्रपद माह &#8211; Live Halchal</title>
	<link>https://livehalchal.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आज है भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%aa/628094</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Aug 2025 04:26:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदोष व्रत]]></category>
		<category><![CDATA[भाद्रपद माह]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=628094</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="431" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/453-9-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/453-9.jpg 681w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/453-9-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज यानी 20 अगस्त को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस तिथि का समापन दोपहर 01 बजकर 58 मिनट पर होगा। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। त्रयोदशी तिथि पर महादेव को समर्पित है। इस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से सभी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="431" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/453-9-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/453-9.jpg 681w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/453-9-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज यानी 20 अगस्त को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस तिथि का समापन दोपहर 01 बजकर 58 मिनट पर होगा। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। त्रयोदशी तिथि पर महादेव को समर्पित है। इस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से सभी भय से छुटकारा मिलता है और महादेव की कृपा प्राप्त होती है। इस बार प्रदोष व्रत के दिन कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में पूजा करने से साधक को पूजा करने का दोगुना फल मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 20 August 2025) के बारे में।</p>



<p>तिथि: कृष्ण द्वादशी</p>



<p>मास पूर्णिमांत: भाद्रपद</p>



<p>दिन: बुधवार</p>



<p>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: द्वादशी दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक, फिर त्रयोदशी</p>



<p>योग: सिद्धि सायं 06 बजकर 13 मिनट तक</p>



<p>करण: तैतिल दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक</p>



<p>करण: 21 अगस्त को गरज रात 01 बजकर 18 बजे मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय</strong><br>सूर्योदय: सुबह 05 बजकर 53 मिनट पर</p>



<p>सूर्यास्त: शाम 06 बजकर 56 मिनट पर</p>



<p>चंद्रमा का उदय: 21 अगस्त को सुबह 03 बजकर 36 मिनट पर</p>



<p>चन्द्रास्त: सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर</p>



<p>सूर्य राशि: सिंह</p>



<p>चंद्र राशि: मिथुन</p>



<p>पक्ष: कृष्ण</p>



<p><strong>शुभ समय अवधि</strong><br>अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं</p>



<p>अमृत काल: रात 10 बजकर 07 मिनट से 11 बजकर 40 मिनट तक</p>



<p><strong>अशुभ समय अवधि</strong><br>राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 02 बजकर 02 मिनट तक</p>



<p>गुलिकाल: प्रातः 10 बजकर 46 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक</p>



<p>यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 31 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong><br>आज चंद्रदेव पुनर्वसु नक्षत्र में रहेंगे…</p>



<p>पुनर्वसु नक्षत्र: 21 अगस्त को रात 12 बजकर 27 मिनट तक</p>



<p>सामान्य विशेषताएं: ज्ञानवान, आशावादी, आत्मविश्वासी, आकर्षक, आध्यात्मिक, धार्मिक, संवाद में कुशल, बुद्धिमान, संतुलित, कल्पनाशील, दयालु और करुणामयी।</p>



<p>नक्षत्र स्वामी: बृहस्पति</p>



<p>राशि स्वामी: बुध और चंद्रमा</p>



<p>देवी: अदिति</p>



<p>प्रतीक: धनुष और तरकश</p>



<p><strong>प्रदोष व्रत का महत्व</strong><br>बुधवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने वाला माना जाता है। प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद का समय, शिव-पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय होता है। इस दिन भक्तजन व्रत रखकर और प्रदोषकाल में भगवान शिव का रुद्राभिषेक, मंत्रजप व दीपदान करते हैं।</p>



<p>मान्यता है कि बुध प्रदोष व्रत करने से बुद्धि और वाणी पर नियंत्रण मिलता है, व्यापार और व्यवसाय में सफलता मिलती है तथा संतान और परिवार सुखी रहते हैं। जिन लोगों की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर होता है, उनके लिए भी यह व्रत विशेष रूप से शुभ फलदायी माना जाता है।</p>



<p>यह व्रत न केवल शिव कृपा दिलाता है बल्कि जीवन में शांति, समृद्धि और संतुलन भी स्थापित करता है।</p>



<p><strong>त्रयोदशी अवधि-</strong><br>त्रयोदशी तिथि आरंभ – 20 अगस्त 2025 को दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से</p>



<p>त्रयोदशी तिथि समाप्त- 21 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक</p>



<p><strong>व्रत पूजा विधि</strong><br>प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।<br>दिनभर सात्त्विक रहकर फलाहार करें और मन को संयमित रखें।<br>सूर्यास्त के समय शिवालय जाएं या घर पर ही प्रदोष काल में शिवलिंग की स्थापना करें।<br>शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल से रुद्राभिषेक करें।<br>बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, पुष्प और भस्म अर्पित करें।<br>भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।<br>दीपक जलाकर आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>22 या 23 अगस्त कब है भाद्रपद माह की अमावस्या?</title>
		<link>https://livehalchal.com/22-%e0%a4%af%e0%a4%be-23-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9/627539</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 16 Aug 2025 07:31:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भाद्रपद माह]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=627539</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="305" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/3-4-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/3-4.png 686w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/3-4-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भाद्रपद अमावस्या (Bhadrapada Amavasya 2025) का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है जिसे कुशग्रहणी या पिठोरी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन पितरों का तर्पण श्राद्ध और दान-पुण्य किया जाता है। इस दिन माताएं संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं और आटे से चौंसठ योगिनियों की प्रतिमाएं बनाकर उनकी पूजा करती हैं। इस &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="305" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/3-4-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/3-4.png 686w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/3-4-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भाद्रपद अमावस्या (Bhadrapada Amavasya 2025) का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है जिसे कुशग्रहणी या पिठोरी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन पितरों का तर्पण श्राद्ध और दान-पुण्य किया जाता है। इस दिन माताएं संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं और आटे से चौंसठ योगिनियों की प्रतिमाएं बनाकर उनकी पूजा करती हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और गरीबों को दान करने का महत्व है।</p>



<p>हिंदू धर्म में हर माह की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है, लेकिन भाद्रपद माह की अमावस्या का अपना एक अलग ही महत्व है। इसे कुशग्रहणी अमावस्या या पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने का विधान है। इस साल इसकी (Bhadrapada Amavasya 2025) डेट को लेकर लोगों में कन्फूयजन बनी हुई है, तो आइए इस आर्टिकल में इसकी सही डेट जानते हैं।</p>



<p><strong>भाद्रपद अमावस्या शुभ मुहूर्त (Bhadrapada Amavasya 2025 Shubh Muhurat )<br></strong>वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद अमावस्या की तिथि 22 अगस्त दिन शुक्रवार को दिन में 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं, इसकी समाप्ति 23 अगस्त को दिन में 11 बजकर 35 मिनट पर होगी। ऐसे में भाद्रपद अमावस्या 23 अगस्त दिन शनिवार को मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>भाद्रपद अमावस्या का महत्व (Bhadrapada Amavasya 2025 Significance)<br></strong>भाद्रपद अमावस्या को ‘कुशग्रहणी अमावस्या’ भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन एकत्र की गई कुश बहुत पवित्र और लाभकारी होती है। वहीं, इसी दिन माताएं अपनी संतान के दीर्घायु जीवन और सुख-समृद्धि के लिए पिठोरी अमावस्या का व्रत रखती हैं। इस व्रत में माताएं आटे से चौंसठ योगिनियों की प्रतिमाएं बनाकर उनकी पूजा करती हैं।</p>



<p>इसके अलावा इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान का बहुत महत्व है। स्नान के बाद पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इसके साथ ही गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना शुभ माना जाता है।</p>



<p><strong>पितृ पूजा मंत्र (Bhadrapada Amavasya 2025 Puja Mantra)<br></strong>“ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।<br>ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्:।।</p>



<p><strong>भाद्रपद अमावस्या पूजा विधि (Bhadrapada Amavasya 2025 Puja Vidhi)</strong><br>इस दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।<br>स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और बहते जल में काले तिल प्रवाहित करें।<br>इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करना चाहिए। इसके लिए कुश और काले तिल का उपयोग करें।<br>इस दिन पीपल के पेड़ पर जल में दूध मिलाकर अर्पित करें और दीपक जलाएं।<br>पीपल की 7 बार परिक्रमा करें।<br>इस दिन किसी गरीब, जरूरतमंद या ब्राह्मण को अन्न, वस्त्र, जूते-चप्पल और दक्षिणा का दान करें।<br>इस दिन गौ दान का भी विशेष महत्व है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज है भाद्रपद माह का पहला बुधवार, बन रहे कई योग, पढ़ें पंचांग</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ac/627045</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Aug 2025 04:41:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भाद्रपद माह]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=627045</guid>

					<description><![CDATA[<img width="618" height="430" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/342-6-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/342-6.jpg 846w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/342-6-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/342-6-768x535.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म में बुधवार के दिन का विशेष महत्व है। इस दिन को भगवान गणेश जी की पूजा करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणपति बप्पा की पूजा करने से साधक के जीवन में खुशीयों का आगमन होता है। ऐसे में आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="430" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/342-6-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/342-6.jpg 846w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/342-6-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/342-6-768x535.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p><a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%A8_%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE">सनातन धर्म </a>में बुधवार के दिन का विशेष महत्व है। इस दिन को भगवान गणेश जी की पूजा करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणपति बप्पा की पूजा करने से साधक के जीवन में खुशीयों का आगमन होता है। ऐसे में आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज का (Aaj ka Panchang 13 August 2025) पंचांग।</p>



<p>आज यानी 13 अगस्त को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह तिथि आज सुबह 06 बजकर 35 मिनट तक है। इसके बाद पंचमी तिथि की शुरुआत होगी। पंचमी तिथि पर भाद्रपद माह का पहला बुधवार पड़ रहा है।</p>



<p>इस दिन भगवान गणेश (Lord Ganesh) की पूजा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और कामों में आ रही बाधा दूर होती है। इस दिन कई शुभ-अशुभ योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 13 August 2025) के बारे में।</p>



<p>यह भी पढ़े &#8211; <a href="https://livehalchal.com/%e0%a4%8a%e0%a4%a7%e0%a4%ae%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%82%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a4-%e0%a4%85/627083">ऊधमसिंह नगर जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव परिणाम पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक</a></p>



<p>तिथि: कृष्ण चतुर्थी</p>



<p>मास पूर्णिमांत: भाद्रपद</p>



<p>दिन: बुधवार</p>



<p>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: कृष्ण चतुर्थी सुबह 06 बजकर 35 मिनट तक, फिर पंचमी</p>



<p>योग: धृति शाम 04 बजकर 05 मिनट तक</p>



<p>करण: बालव सुबह 06 बजकर 35 मिनट तक</p>



<p>करण: कौलव शाम 05 बजकर 30 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय: सुबह 05 बजकर 49 मिनट पर</p>



<p>सूर्यास्त: शाम 07 बजकर 02 मिनट पर</p>



<p>चंद्रमा का उदय: रात 09 बजकर 32 मिनट पर</p>



<p>चन्द्रास्त: सुबह 09 बजकर 42 मिनट पर</p>



<p>सूर्य राशि: कर्क</p>



<p>चंद्र राशि: मीन</p>



<p>पक्ष: कृष्ण</p>



<p><strong>शुभ समय अवधि</strong></p>



<p>अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं</p>



<p>अमृत काल: प्रातः 06 बजे से प्रातः 07 बजकर 31 मिनट तक</p>



<p><strong>अशुभ समय अवधि</strong><br>राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से दोपहर 02 बजकर 05 मिनट तक</p>



<p>गुलिक काल: प्रातः 10 बजकर 47 मिनट से प्रातः 12 बजकर 26 मिनट तक</p>



<p>यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 28 मिनट से प्रातः 09 बजकर 07 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र</strong><br>आज चंद्रदेव उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में रहेंगे…</p>



<p>उत्तर भाद्रपद: दोपहर 01:00 बजे तक</p>



<p>सामान्य विशेषताएं: एकांतप्रिय, स्वतंत्र स्वभाव, तर्कशील, सुंदरता, आक्रामकता, ईर्ष्या, करुणामयी आत्मा, कूटनीतिक और दयालु</p>



<p>नक्षत्र स्वामी: शनि देव</p>



<p>राशि स्वामी: बृहस्पति देव</p>



<p>देवता: अहीर बुधनिया (जल ड्रैगन)</p>



<p>प्रतीक: शव वाहन (शव ले जाने वाला वाहन)</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भाद्रपद माह में कब है राधा अष्टमी? नोट करें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%be/576449</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Aug 2024 11:40:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भाद्रपद माह]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://livehalchal.com/?p=576449</guid>

					<description><![CDATA[<img width="529" height="387" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-142726-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-142726.png 529w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-142726-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 529px) 100vw, 529px" />प्रत्येक साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टमी तिथि पर राधा रानी जी का जन्म बरसाना में हुआ था। इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस खास अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="529" height="387" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-142726-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-142726.png 529w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/Screenshot-2024-08-20-142726-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 529px) 100vw, 529px" />
<p>प्रत्येक साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर राधा अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अष्टमी तिथि पर राधा रानी जी का जन्म बरसाना में हुआ था। इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस खास अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही शुभ फल की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे राधा अष्टमी की डेट, शुभ मुहूर्त (Radha Ashtami Shubh Muhurat) और पूजा विधि के बारे में।</p>



<h2 class="wp-block-heading">राधा अष्टमी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त</h2>



<p>पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10 सितंबर को रात 11 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 11 सितंबर को रात 11 बजकर 46 मिनट पर होगा। ऐसे में राधा अष्टमी 11 सितंबर को मनाई जाएगी।</p>



<p><strong>राधा अष्टमी पूजा विधि<br></strong>राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठें स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मंदिर की सफाई करें। सूर्य देव को जल अर्पित करें। अब चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को विराजमान करें। पंचोपचार कर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। देसी घी जलाकर आरती करें और जीवन में सुख-शांति की कामना करें। मंत्रो का जप करना भी शुभ माना जाता है। दिन भर उपवास रखें। शाम को विधिपूर्वक पूजा कर आरती करें। अंत में फल और मिठाई आदि चीजों का भोग लगाकर फलाहार करें। अगले दिन पूजा पाठ कर व्रत का पारण करें और गरीब लोगों में विशेष चीजों का दान जरूर करें।</p>



<p><strong>राधा अष्टमी उपाय</strong></p>



<p>अगर आप मनचाहा जीवनसाथी पाना चाहते हैं, तो राधा अष्टमी के दिन पूजा के दौरान राधा रानी को कुमकुम का तिलक लगाएं और भगवान श्रीकृष्ण को हल्दी और चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद जिस प्रेमी को पाना चाहते हैं, उसका नाम पान के पत्ते पर लिखकर राधा रानी के चरणों में रख दें। धार्मिक मान्यता है कि इस उपाय को करने से साधक को मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
