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	<title>भस्म आरती &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>भस्म आरती &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>भस्म आरती में सूर्य, चंद्र और त्रिपुंड लगाकर सजे बाबा महाकाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Feb 2025 08:24:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[भस्म आरती]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-482-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-482.jpg 736w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-482-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />मंदिर प्रांगण में 115 वर्षों से जारी हरि कीर्तन परंपरा के अंतर्गत इस वर्ष राष्ट्रीय कीर्तनकार डॉ. अजय अपामार्जने की नौ दिवसीय कथा आयोजित की जा रही है। इसमें राम-कृष्ण-हरि कीर्तन और शिव भक्त नाभाग कथा का वर्णन किया गया। कीर्तन प्रतिदिन संध्या 5 से 6 बजे नवग्रह मंदिर परिसर में आयोजित हो रहा है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-482-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-482.jpg 736w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-482-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>मंदिर प्रांगण में 115 वर्षों से जारी हरि कीर्तन परंपरा के अंतर्गत इस वर्ष राष्ट्रीय कीर्तनकार डॉ. अजय अपामार्जने की नौ दिवसीय कथा आयोजित की जा रही है। इसमें राम-कृष्ण-हरि कीर्तन और शिव भक्त नाभाग कथा का वर्णन किया गया। कीर्तन प्रतिदिन संध्या 5 से 6 बजे नवग्रह मंदिर परिसर में आयोजित हो रहा है।</p>



<p>मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मन्दिर स्थित है। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को भारत के बारह प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से प्रमुख एक माना जाता है। पुण्य सलीला शिप्रा तट पर स्थित उज्जैन प्राचीनकाल में उज्जयिनी के नाम से विख्यात था। इसे अवन्तिकापुरी भी कहते थे। यह स्थान हिन्दू धर्म की सात पवित्र पुरियों में से एक है। श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि का उत्सव बड़ी धूमधाम और उल्हास के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान भगवान श्री महाकालेश्वर 25 फरवरी 2025 तक अलग-अलग स्वरूपों में श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे है। 26 फरवरी को महाशिवरात्रि महापर्व मनाया जाएगा।</p>



<p>प्रतिदिन की भांति श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण में आज कालो के काल बाबा महाकाल भस्म आरती के दौरान सूर्य, चंद्र और त्रिपुंड लगाकर श्रंगारित हुए। श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज सुबह 4 बजे हुई भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन अभिषेक कर आकर्षक स्वरूप में शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। इस शृंगार के बाद फिर उन्होंने भस्म रमाई। उसके बाद भक्तों ने इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया और जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।</p>



<p>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि गुरुवार पर आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। जिसके बाद सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान करवाकर दूध, दही, शहद, शक्कर, घी आदि पंचामृत से स्नान कराया गया और प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। पंचामृत पूजन के बाद भगवान महाकाल का पूजन सामग्री से आकर्षक स्वरूप मे शृंगार किया गया। भक्तों ने बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर इस शृंगार के दर्शन किए और जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे। जिसके बाद बाबा महाकाल को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती की गई।</p>



<p><strong>मंदिर प्रांगण में 115 वर्षों से चल रही हरि कीर्तन की परम्परा</strong><br>श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा इस वर्ष नौ दिवसीय नारदीय कीर्तन हेतु पुणे से राष्ट्रीय कीर्तनकार आयुर्वेदाचार्य डॉ.अजय अपामार्जने को आमंत्रित किया गया है। श्री महाकालेश्वर मंदिर में यह परंपरा विगत 115 वर्षों से भी अधिक समय से चलती आ रही है। डॉ. अजय अपामार्जने की नौ दिवसीय कथा का प्रारंभ हुआ है। कीर्तन प्रतिदिन सायं 5 से 6 बजे तक मन्दिर परिसर मे नवग्रह मन्दिर के पास संगमरमर के चबूतरे पर हो रहा है।</p>



<p>हरिकीर्तन के दूसरे दिन डॉ. अपामर्जने ने राम-कृष्ण-हरि के कीर्तन पश्यात भगवान महाकाल के भक्त की कथा शिव भक्त नाभाग कथा का वर्णन किया। संस्कारी सुपुत्र, कुल का उद्धार करता है धर्मप्रेम, मातृपितृ भक्ति, ईश्वर भक्ति से ही संभव है। श्री अपामार्जने ने कहा कि, देशभक्ति के सभी संस्कार कीर्तन के माध्यम से अत्यंत प्रभाव से संभव है। कीर्तन यह समाज में संस्कार, समाज जागृति का श्रेष्ठ साधन है। उन्होंने कीर्तन को प्रोत्साहन देने का दिव्य कार्य श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति उज्जैन (म.प्र) अत्यंत श्रद्धा पूर्वक कर रही है इस हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। कथा के दौरान तबला पर संगत श्रीधर व्यास ने की।</p>
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		<title>सरसों के पुष्प, फल अर्पित किए…फिर लगाया केसरिया भात का भोग; वसंत पंचमी पर कुछ ऐसे हुई भस्म आरती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Feb 2025 06:57:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[भस्म आरती]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-43-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-43.jpg 720w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-43-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />उज्जैन: मावा, सूखा मेवा और ड्रायफ्रूट अर्पित करने के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। सरसों के पुष्प अर्पित कर फल और मिष्ठान से बाबा महाकाल का भोग लगाया गया। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज बंसत पंचमी पर चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे पुजारियों ने गर्भगृह में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-43-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-43.jpg 720w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-43-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>उज्जैन: मावा, सूखा मेवा और ड्रायफ्रूट अर्पित करने के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। सरसों के पुष्प अर्पित कर फल और मिष्ठान से बाबा महाकाल का भोग लगाया गया।</p>



<p>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज बंसत पंचमी पर चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित भगवान की प्रतिमाओं का पूजन अर्चन किया। दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा महाकाल का पूजन कर अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद सरसों के फूल और पीले वस्त्र अर्पित कर मां सरस्वती के रूप में बाबा महाकाल का श्रृंगार किया गया। मावा, सूखा मेवा और ड्रायफ्रूट अर्पित करने के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। सरसों के पुष्प अर्पित कर फल और मिष्ठान से बाबा महाकाल का भोग लगाया गया।</p>



<p><strong>महाकाल मंदिर में आज से होगी 40 दिवसीय फाग उत्सव की शुरुआत</strong><br>महाकाल मंदिर में बसंत पंचमी पर्व का उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को देवी मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। ग्रंथों के अनुसार इस दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, तब देवताओं ने देवी स्तुति की। स्तुति से वेदों की ऋचाएं बनीं और उनसे वसंत राग। इसलिए इस दिन को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। महाकालेश्वर मंदिर से आज से फाग उत्सव की शुरुआत हो गई है जो होली तक चलेगा।</p>



<p>बसंत पंचमी पर्व पर भस्मारती में बाबा महाकाल को पीले द्रव्य से स्नान कराया गया। पीले चंदन से आकर्षक श्रृंगार कर सरसों और गेंदे के पीले फूल अर्पित किए गए। विशेष आरती कर फिर पीले केसरिया भात का महाभोग लगाया गया। सांध्याकालीन आरती में भी भगवान का आकर्षक श्रृंगार कर फाग उत्सव के तहत गुलाल अर्पित किया गया। पुजारी महेश गुरु ने बताया कि आज से होली की शुरुआत मानी जाती है। भगवान को प्रतिदिन गुलाल चढ़ाया जाएगा। ऐसा होली तक होगा।</p>



<p><strong>साल में 3 बार उड़ाया जाता है गुलाल</strong><br>महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी महेश गुरु बताते हैं कि महाकालेश्वर मंदिर में साल में तीन बार गुलाल आरती होती है, यानी आरती में गुलाल उड़ाया जाता है। सबसे पहले बसंत पंचमी पर्व पर संध्या कालीन आरती में गुलाल उड़ाकर वसंत ऋतु का अभिनंदन होता है। इसके बाद होली और रंग पंचमी पर्व पर भगवान और भक्तों के बीच गुलाल उड़ाया जाता है। भक्त और भगवान के बीच गुलाल उड़ाने की इस परंपरा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।</p>



<p><strong>बच्चों का पाटी (स्लेट) पूजन</strong><br>सांदीपनि आश्रम की परंपरा अनुसार इस दिन पहली बार विद्या अध्ययन की शुरुआत करने वाले बच्चों का पाटी (स्लेट) पूजन कराकर विद्या आरंभ संस्कार संपन्न कराया जाएगा। मान्यता है भगवान बलराम व श्रीकृष्ण ने भी आश्रम में इसी परंपरा से विद्या अध्ययन की शुरुआत की थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>उज्जैन: भस्म आरती में गूंजा श्री महाकालेश्वर तव शरणम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Dec 2024 08:02:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[भस्म आरती]]></category>
		<category><![CDATA[श्री महाकालेश्वर तव शरणम]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-20-132856-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-20-132856.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-20-132856-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पौष माह कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर भगवान को पंचामृत और केसर युक्त जल से स्नान कराया गया। पुजारी पंडित अभिषेक शर्मा ने भस्म आरती का विधि-विधान से संचालन किया। भक्तों ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से दिव्य दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष किया। श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज शुक्रवार सुबह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-20-132856-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-20-132856.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/12/Screenshot-2024-12-20-132856-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पौष माह कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर भगवान को पंचामृत और केसर युक्त जल से स्नान कराया गया। पुजारी पंडित अभिषेक शर्मा ने भस्म आरती का विधि-विधान से संचालन किया। भक्तों ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से दिव्य दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष किया।</p>



<p>श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज शुक्रवार सुबह हुई भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल का भांग, ड्राईफ्रूट और पूजन सामग्री से त्रिपुंड लगाकर आकर्षक शृंगार किया गया। आज भस्म आरती में श्री महाकालेश्वर तव शरणम की गूंज सुनाई दी। साथ ही बाबा महाकाल को एक अलग ही स्वरूप में शृंगार हुआ। आज जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया वह देखते ही रह गया। भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। उसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई।</p>



<p>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित अभिषेक शर्मा (बाला गुरु) ने बताया कि पौष माह कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शुक्रवार पर आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। उसके बाद सबसे पहले भगवान को गर्म जल से स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाने के साथ ही केसर युक्त जल अर्पित किया गया। आज बाबा महाकाल त्रिपुंड लगाकर श्रृंगारित हुए। जिसके बाद फिर पूजन अर्चन के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई।</p>



<p>भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का ऐसा शृंगार देख सभी अभिभूत हो गए। बाबा महाकाल के इस आलौकिक स्वरूप को सभी ने निहारा। उसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए और भस्म आरती की व्यवस्था से लाभान्वित हुए। श्रद्धालुओं ने इस दौरान बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप का दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।</p>



<p><strong>उज्जैन के भक्त द्वारा एक लाख से अधिक की राशि का चेक प्रदान किया</strong><br>श्री महाकालेश्वर मंदिर में उज्जैन के हरिनारायण शर्मा ने श्री महाकालेश्वर मंदिर में रुपये 1 लाख 5 हज़ार 251 की दान राशि का चेक श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को प्रदान किया। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल द्वारा दानदाता का विधिवत सम्मान किया गया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>एकादशी की भस्म आरती में कुमकुम का तिलक और चंद्र लगाकर सजे बाबा महाकाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Oct 2024 07:54:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[भस्म आरती]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/kjghuil-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/kjghuil.png 656w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/kjghuil-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />श्री महाकालेश्वर मंदिर में एकादशी पर आज भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल का कुमकुम का तिलक और चंद्र लगाकर श्रृंगार किया गया। इसके बाद फूलों की माला से उन्हें सजाया गया। जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, वह देखते ही रह गया। भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/kjghuil-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/kjghuil.png 656w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/10/kjghuil-medium.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>श्री महाकालेश्वर मंदिर में एकादशी पर आज भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल का कुमकुम का तिलक और चंद्र लगाकर श्रृंगार किया गया। इसके बाद फूलों की माला से उन्हें सजाया गया। जिसने भी इन दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, वह देखते ही रह गया। भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे, जिसके बाद धूमधाम से भस्मारती की गई।</p>



<p>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि सोमवार होने के कारण बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद सबसे पहले भगवान को स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाया गया और केसर युक्त जल अर्पित किया गया। भस्मारती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया, उनके मस्तक पर कुमकुम का तिलक और चंद्र लगाया गया, इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्मारती के दर्शन किए और इस आयोजन का लाभ लिया। इस दौरान भक्तों ने बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप के दर्शन कर ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष भी किया।</p>



<p><strong>महिलाओं को घूंघट करना पड़ता है</strong><br>बता &nbsp;दें जिस समय शिवलिंग पर भस्म चढ़ाई जाती है, उस समय महिलाओं को घूंघट करने को कहा जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव निराकार रूप में होते हैं, और इस रूप में महिलाओं को दर्शन नहीं करने दिया जाता।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>उज्जैन: भस्म आरती में पगड़ी और मोर पंख लगाकर श्री कृष्ण स्वरूप में सजे बाबा महाकाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Sep 2024 06:35:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[बाबा महाकाल]]></category>
		<category><![CDATA[भस्म आरती]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-574-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-574.jpg 729w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-574-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज गुरुवार को बाबा महाकाल का कृष्ण स्वरूप में श्रृंगार किया गया, पगड़ी और मोर पंख लगाकर उन्हें श्री कृष्ण स्वरूप में सजाया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन बाबा महाकाल का विभिन्न स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है। आज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-574-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-574.jpg 729w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-574-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>आज गुरुवार को बाबा महाकाल का कृष्ण स्वरूप में श्रृंगार किया गया, पगड़ी और मोर पंख लगाकर उन्हें श्री कृष्ण स्वरूप में सजाया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई।</p>



<p>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन बाबा महाकाल का विभिन्न स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है। आज गुरुवार सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को पगड़ी और मोर पंख लगाकर श्री कृष्ण स्वरूप में श्रृंगारित किया गया। जिसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से की गई। जिसका लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने लिया।</p>



<p>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि अश्विन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर गुरुवार को बाबा महाकाल सुबह 4 बजे जागे। भगवान वीरभद्र और मानभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। सबसे पहले भगवान को स्नान, पंचामृत अभिषेक करवाया गया और केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का कृष्ण स्वरूप में श्रृंगार किया गया, पगड़ी और मोर पंख लगाकर उन्हें श्री कृष्ण स्वरूप में सजाया गया।</p>



<p>इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और गणेश मंडपम से बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती के दर्शन किए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के निराकार से साकार होने के स्वरूप के दर्शन कर जय श्री महाकाल का उद्घोष भी किया।</p>



<p><strong>मंदिर को भेट किया प्रिंटर<br></strong>श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा शुभ अवसरों पर दान और भेंट सामग्री, राशि आदि भगवान को अर्पित की जाती है। मंदिर प्रशासक गणेश धाकड़ ने प्रेरित किया कि दर्शनाथीगण जब भी भेंट आदि के लिए संपर्क करें तब उन्हें मंदिर की आवश्यकता और उपयोग अनुरूप सामग्री, सुविधा, व्यवस्था के लिए प्रोत्साहित करें। इसी क्रम में मंदिर की डिजिटलीकरण प्रक्रिया की जरूरत बताए जाने पर पुणे के श्रद्धालु शमी झा और लखनऊ के श्रद्धालु राजीव राय ने लगभग 26,000 मूल्य का उच्च गुणवत्ता का एक प्रिंटर मंदिर प्रबंधन समिति को भेंट किया।</p>
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