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	<title>भगवान शिव &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>भगवान शिव &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>भगवान शिव को चावल अर्पित करने से क्यों बढ़ती है स्थिर लक्ष्मी?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jun 2026 04:53:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="328" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27-1024x544.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27-1024x544.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27-300x159.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27-768x408.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27-310x165.jpg 310w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/6-27.jpg 1032w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। शिव भक्त विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्रियों से महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इनमें चावल यानी अक्षत का विशेष स्थान है। शिव पुराण की रुद्र संहिता में भगवान शिव को चावल अर्पित करने के महत्व का उल्लेख मिलता है। धार्मिक &#8230;]]></description>
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<p>हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। शिव भक्त विभिन्न प्रकार की पूजन सामग्रियों से महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इनमें चावल यानी अक्षत का विशेष स्थान है। शिव पुराण की रुद्र संहिता में भगवान शिव को चावल अर्पित करने के महत्व का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और आर्थिक स्थिरता आती है।</p>



<p>शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव को चढ़ाए जाने वाले चावल पूर्ण और अखंड होने चाहिए। टूटे हुए चावल पूजा में इस्तेमाल नहीं किए जाते, क्योंकि अक्षत का अर्थ ही होता है ‘जो खंडित न हो’। अक्षत पूर्णता, शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, शिव पूजा में साबुत चावल अर्पित करने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है।</p>



<p><strong>शिव पूजा में चावल का महत्व<br></strong>रुद्र संहिता में वर्णन मिलता है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा करता है और उन्हें चावल अर्पित करता है, उसके घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। केवल धन की प्राप्ति ही नहीं, बल्कि धन के संरक्षण और उसके सदुपयोग का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही कारण है कि कई लोग आर्थिक उन्नति और परिवार की खुशहाली के लिए नियमित रूप से शिवलिंग पर अक्षत अर्पित करते हैं।</p>



<p><strong>यहां देखें पूजा की विधि<br></strong>पूजा की विधि में सबसे पहले भगवान शिव का जल या पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद रुद्र मंत्रों या ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करते हुए गंध, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। शास्त्रों में सुंदर और स्वच्छ वस्त्र भगवान को अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। इसके पश्चात उन वस्त्रों पर या शिवलिंग के समीप श्रद्धापूर्वक चावल समर्पित किए जाते हैं।</p>



<p>धार्मिक मान्यता है कि इस प्रकार की पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनके साथ माता लक्ष्मी तथा भगवान नारायण की कृपा भी प्राप्त होती है। हालांकि, किसी भी पूजा का वास्तविक फल व्यक्ति की निष्ठा, श्रद्धा और सद्कर्मों पर निर्भर करता है। इसलिए, पूजा के साथ-साथ जीवन में सत्य, सेवा और सदाचार का पालन करना भी उतना ही आवश्यक माना गया है।</p>



<p>यह मान्यता है कि भगवान शिव की विधिवत पूजा और अक्षत अर्पण से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में आर्थिक स्थिरता और समृद्धि भी बढ़ती है।</p>
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		<title>भगवान शिव खोल देंगे बंद किस्मत के ताले, बुध प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें शिव चालीसा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 05:22:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="420" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-4.jpg 762w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-4-300x204.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-4-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत को हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक को सभी भय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="420" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-4.jpg 762w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-4-300x204.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/6-4-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत को हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से साधक को सभी भय से मुक्ति मिलती है और महादेव की कृपा बरसती है।</p>



<p>अगर आप भी शिव जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो प्रदोष व्रत के दिन शिव चालीसा का पाठ जरूर करें और शिवलिंग का अभिषेक करें। ऐसा माना जाता है कि इन कामों को करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है।</p>



<p><strong>इस उपाय से दूर होगी विवाह की बाधा<br></strong>अगर आपके विवाह में कोई बाधा आ रही है, तो प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें और व्रत रखें। शिव चालीसा और कथा का पाठ करें। अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से विवाह में कोई बाधा से मुक्ति मिलती है और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।</p>



<p><strong>शिव चालीसा<br>॥ दोहा ॥</strong></p>



<p>जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।</p>



<p>कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥</strong></p>



<p>जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥</p>



<p>भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥</p>



<p>अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥</p>



<p>वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥</p>



<p>मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥</p>



<p>कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥</p>



<p>नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥</p>



<p>कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥</p>



<p>देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥</p>



<p>किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥</p>



<p>तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥</p>



<p>आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥</p>



<p>त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥</p>



<p>किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥</p>



<p>दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥</p>



<p>वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥</p>



<p>प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥</p>



<p>कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥</p>



<p>पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥</p>



<p>सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥</p>



<p>एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥</p>



<p>कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥</p>



<p>जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥</p>



<p>दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥</p>



<p>त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥</p>



<p>लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो॥</p>



<p>मात-पिता भ्राता सब होई।संकट में पूछत नहिं कोई॥</p>



<p>स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥</p>



<p>धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥</p>



<p>अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥</p>



<p>शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥</p>



<p>योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥</p>



<p>नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥</p>



<p>जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥</p>



<p>ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥</p>



<p>पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥</p>



<p>पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥</p>



<p>त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥</p>



<p>धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥</p>



<p>जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥</p>



<p>कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong></p>



<p>नित्त नेम उठि प्रातः ही,पाठ करो चालीसा।</p>



<p>तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश॥</p>



<p>मगसिर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान।</p>



<p>स्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण॥</p>
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			</item>
		<item>
		<title>फाल्गुन हुआ शुरू, ऐसे करें भगवान शिव और श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 04:45:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शिव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="322" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-204423.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-204423.png 732w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-204423-300x156.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />फाल्गुन माह (Falgun Month 2026) 2 फरवरी यानी आज से शुरू हो गया है, जो हिंदू पंचांग का अंतिम महीना है। यह वसंत के आगमन, भक्ति और उल्लास का प्रतीक है। इस महीने का आध्यात्मिक महत्व अधिक है, क्योंकि यह भगवान शिव और श्रीकृष्ण की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। Falgun Month &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="322" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-204423.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-204423.png 732w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-01-204423-300x156.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>फाल्गुन माह (Falgun Month 2026) 2 फरवरी यानी आज से शुरू हो गया है, जो हिंदू पंचांग का अंतिम महीना है। यह वसंत के आगमन, भक्ति और उल्लास का प्रतीक है। इस महीने का आध्यात्मिक महत्व अधिक है, क्योंकि यह भगवान शिव और श्रीकृष्ण की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।</p>



<p>Falgun Month 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल का अंतिम महीना फाल्गुन आज, 2 फरवरी 2026 से शुरू हो चुका है। यह महीना न केवल वसंत के आगमन का प्रतीक है, बल्कि भक्ति, रंगों और उल्लास का अद्भुत संगम भी है। फाल्गुन महीने का आध्यात्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह महीना देवों के देव महादेव और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए बहुत शुभ माना गया है।</p>



<p>अगर आप इस महीने में सुख, शांति और समृद्धि की कामना रखते हैं, तो भगवान शिव और श्रीकृष्ण की भाव के साथ आरती करें। ऐसा करने से आपको उनकी खास कृपा मिलेगी।</p>



<p><strong>फाल्गुन माह के नियम (Falgun Month 2026 Rules)</strong><br>सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।<br>इस महीने में अनाज का कम और फलों का अधिक सेवन करें।<br>यह आनंद का महीना है, इसलिए वाणी में मधुरता रखें और किसी भी प्रकार के विवाद से बचें।<br>इस दौरान भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें।<br>इस दौरान तामसिक चीजों से दूर रहें।<br>इस दौरान किसी के बारे में बुरा बोलने से बचें।<br>इस दौरान ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य, पूजा-पाठ करें।</p>



<p><strong>॥श्रीकृष्ण जी की आरती॥</strong><br>आरती कुंजबिहारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>आरती कुंजबिहारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>गले में बैजंती माला,</p>



<p>बजावै मुरली मधुर बाला ।</p>



<p>श्रवण में कुण्डल झलकाला,</p>



<p>नंद के आनंद नंदलाला ।</p>



<p>गगन सम अंग कांति काली,</p>



<p>राधिका चमक रही आली ।</p>



<p>लतन में ठाढ़े बनमाली</p>



<p>भ्रमर सी अलक,</p>



<p>कस्तूरी तिलक,</p>



<p>चंद्र सी झलक,</p>



<p>ललित छवि श्यामा प्यारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>आरती कुंजबिहारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>कनकमय मोर मुकुट बिलसै,</p>



<p>देवता दरसन को तरसैं ।</p>



<p>गगन सों सुमन रासि बरसै ।</p>



<p>बजे मुरचंग,</p>



<p>मधुर मिरदंग,</p>



<p>ग्वालिन संग,</p>



<p>अतुल रति गोप कुमारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥</p>



<p>आरती कुंजबिहारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>जहां ते प्रकट भई गंगा,</p>



<p>सकल मन हारिणि श्री गंगा ।</p>



<p>स्मरन ते होत मोह भंगा</p>



<p>बसी शिव सीस,</p>



<p>जटा के बीच,</p>



<p>हरै अघ कीच,</p>



<p>चरन छवि श्री बनवारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>आरती कुंजबिहारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>चमकती उज्ज्वल तट रेनू,</p>



<p>बज रही वृंदावन बेनू ।</p>



<p>चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू</p>



<p>हंसत मृदु मंद,</p>



<p>चांदनी चंद,</p>



<p>कटत भव फंद,</p>



<p>टेर सुन दीन दुखारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>आरती कुंजबिहारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>आरती कुंजबिहारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p>आरती कुंजबिहारी की,</p>



<p>श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥</p>



<p><strong>॥शिवजी की आरती॥</strong><br>ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।</p>



<p>ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥</p>



<p>ॐ जय शिव ओंकारा…</p>



<p>एकानन चतुरानन पंचानन राजे।</p>



<p>हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे ॥</p>



<p>ॐ जय शिव ओंकारा…</p>



<p>दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे ।</p>



<p>त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे ॥</p>



<p>ॐ जय शिव ओंकारा…</p>



<p>अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी ।</p>



<p>चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥</p>



<p>ॐ जय शिव ओंकारा…</p>



<p>श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।</p>



<p>सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे ॥</p>



<p>ॐ जय शिव ओंकारा…</p>



<p>कर के मध्य कमंडल, चक्र त्रिशूलधारी।</p>



<p>सुखकारी दुखहारी, जगपालन कारी॥</p>



<p>ॐ जय शिव ओंकारा…</p>



<p>ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।</p>



<p>प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका ॥</p>



<p>ॐ जय शिव ओंकारा…</p>



<p>त्रिगुणस्वामी जी की आरति, जो कोइ नर गावे।</p>



<p>कहत शिवानंद स्वाम, सुख संपति पावे ॥</p>



<p>ॐ जय शिव ओंकारा…।।</p>



<p></p>
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		<title>जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट करते हैं भगवान शिव, कृपा प्राप्ति का श्रेष्ठ अवसर है सावन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 Aug 2025 04:51:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान शिव]]></category>
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<p>सावन का पावन महीना चल रहा है जो सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन तक रहने वाला है जो 9 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन का पूरा माह भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित है। सावन को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ अवसर बताया गया है। चलिए जानते हैं भगवान शिव से संबंधित इस माह की कुछ और खासियत।</p>



<p>महीना भगवान शिव की सनातन धर्म में सावन का हैं। हरिद्वार में सावन के दौरान की गई पूजा, रुद्राभिषेक और गंगाजल अर्पण सहस्त्र गुणा फलदाई माने आराधना का पवित्र समय माना गया है। इस माह को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर बताया गया है। सावन श्रद्धा और शिवत्व का संगम है।</p>



<p><strong>होती है मोक्ष की प्राप्ति<br></strong>हरिद्वार, जो स्वयं गंगाजल से पावन है, सावन में शिवभक्ति का केंद्र है। यहां श्रद्धा, आस्था और अध्यात्म का संगम होता है। मान्यता है कि सावन में स्वयं भोलेनाथ धर्मनगरी हरिद्वार में निवास करते हैं। यहीं नीलेश्वर महादेव मंदिर है, जहां से दक्षेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव की बारात गई थी। पुराणों में वर्णन है कि हरिद्वार में गंगा स्नान, उपवास और शिव पूजा करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>



<p><strong>शिव ही मोक्ष का द्वार हैं<br></strong>सावन में जो भक्त श्रद्धा से शिव की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती गए हैं। सावन और धर्मनगरी, ये दोनों मिलकर भक्त को शिव के निकट ले जाते हैं। भक्त को शिवत्व की निकटता और दिव्यता का अनुभव कराते हैं। शिव का स्वरूप और उनका परिवार मानव को संकीर्ण वैचारिक परिधि से निकालकर वसुधैव कुटुम्बकम की परिकल्पना को समझाता है।</p>



<p>शिव सनातन हैं। उनके बिना विश्व कल्याण की कामना नहीं की जा सकती। वे ही सृष्टि के मूल कारण हैं। ब्रह्मा को रचयिता, विष्णु को पालनकर्ता और शिव को संहारक कहा गया है, लेकिन स्कंद पुराण में वर्णन है कि ये तीनों ही माहेश्वर अंश से उत्पन्न हुए हैं। अर्थात शिव ही मूल तत्व हैं। शिव ही मोक्ष का द्वार हैं।</p>
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		<title>सावन में भगवान शिव को इस तरह करें प्रसन्न, सभी मुरादें होंगी पूरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Aug 2025 09:07:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/56-6-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/56-6.jpg 628w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/56-6-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />सभी महीनों में सावन को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस माह में महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है और शिव जी की कृपा से सभी मुरादें पूरी होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं सावन में कैसे करें महादेव &#8230;]]></description>
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<p>सभी महीनों में सावन को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस माह में महादेव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है और शिव जी की कृपा से सभी मुरादें पूरी होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं सावन में कैसे करें महादेव को प्रसन्न।</p>



<p>स्वामी कृष्णा पुरी (व्यवस्थापक महादेव, श्री चंदेश्वर मंदिर)। सावन सृष्टि की पूजा का महीना है। प्रकृति की हरियाली से भरने वाला यह महीना धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह मनुष्य के लिए आत्मशुद्धि करने और आंतरिक शांति पाने का महीना भी है। सावन मास में शिव भक्त अपने आराध्य देव की पूजा कर रुद्राभिषेक आदि करते हैं। सोमवार के दिन व्रत का माहात्म्य है।</p>



<p><strong>भगवान शिव के रूप में देते हैं कई संदेश</strong><br>जो भक्त सच्चे मन और भाव से भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह महीना हमें अपने मन के विकारों को दूर करना भी सिखाता है। हम केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जीवन में कुछ करें। भगवान शिव के कई रूप हैं और हर रूप अलग-अलग संदेश देता है। देवों के देव भगवान शिव अपने भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं।</p>



<p><strong>पूजा के दौरान करें इस मंत्र का जप<br></strong>भगवान शिव सब जगह व्याप्त हैं। उनकी आराधना भक्त को मानसिक और आत्मिक शांति प्रदान करती है। यह समय मनुष्य का प्रकृति से सीधे जुड़ने का अवसर भी है। कहते हैं कि जब कोई भक्त ‘ॐ नमः शिवाय’ के उच्चारण के साथ जल भगवान शिव को अर्पित करता है, तो वह अपनी सारी चिंताओं को शिव के चरणों में समर्पित कर देता है।</p>



<p><strong>जरूर करें महामृत्युंजय जाप और शिव चालीसा का पाठ</strong><br>रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, शिव चालीसा, रुद्राष्टक का पाठ इस माह में विशेष फलदायी माना गया है। श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का भी विशेष माहात्म्य है। कांवड़ यात्री गंगाजल के साथ पैदल यात्रा कर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा भक्ति, अनुशासन और सेवा की भावना को भी प्रतिबिंबित करती है।</p>
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