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	<title>भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारी अक्षय तृतीया से होंती है शुरू, जानें यात्रा से जुड़ी कुछ रोचक बातें</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Babita Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2020 10:33:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानें यात्रा से जुड़ी कुछ रोचक बातें]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="375" height="225" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj.jpg 375w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj-300x180.jpg 300w" sizes="(max-width: 375px) 100vw, 375px" />मंदिर में विष्णु अवतार भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जगन्नाथ रूप में  विराजमान हैं. इस मंदिर में भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम और उनकी बहन देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना की जाती है. रथ यात्रा में इन तीनों के ही अलग अलग रथ सजाए जाते हैं. जिनकी भव्यता और विशालता देखते बनती हैं. इस रथ यात्रा में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="375" height="225" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj.jpg 375w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj-300x180.jpg 300w" sizes="(max-width: 375px) 100vw, 375px" /><p>मंदिर में विष्णु अवतार भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जगन्नाथ रूप में  विराजमान हैं. इस मंदिर में भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम और उनकी बहन देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना की जाती है. रथ यात्रा में इन तीनों के ही अलग अलग रथ सजाए जाते हैं. जिनकी भव्यता और विशालता देखते बनती हैं. इस रथ यात्रा में सबसे आगे बलदेव यानि बलरामजी का रथ चलता है. इसके बाद देवी सुभद्रा और सबसे अंत में भगवान श्रीकृष्ण यानि जगन्नाथ का रथ चलता है.<img decoding="async" class=" wp-image-344533 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj-300x180.jpg" alt="" width="548" height="329" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj-300x180.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/06/kjklj.jpg 375w" sizes="(max-width: 548px) 100vw, 548px" /></p>
<p><strong>तालध्वज रथ</strong><br />
भगवान जगन्नाथ की रथ में सभी देवगणों के रथ अलग अलग होते हैं जिनके नाम हैं. जैसे सबसे आगे चलने वाले बलदेव जी के रथ को &#8216;तालध्वज&#8217; कहते हैं. इनके रथ का रंग लाल और हरा होता है.</p>
<p><strong>दर्पदलन रथ</strong><br />
बलदेव के रथ के पीछे देवी सुभद्रा का रथ चलता है. इस रथ को &#8216;दर्पदलन&#8217; या ‘पद्म रथ’ कहा जाता है. इस रथ में काले, नीले और लाल रंग का प्रयोग किया जाता है. यह भी भव्य और विशाल होता है.</p>
<p><strong>गरुड़ध्वज</strong><br />
सबसे पीछे भगवान श्रीकृष्ण स्वयं जगन्नाथ के रूप में रथ पर विराजाते हैं. भगवान जगन्नाथ के रथ को &#8216;नंदीघोष&#8217; या &#8216;गरुड़ध्वज&#8217; कहा जाता है. ये पीतांबर वर्ण और लाल रंग का होता है. ये बेहद विशाल और भव्य होता है. इस रथ की ऊंचाई करीब 45.6 फीट होती है.</p>
<p><strong>अक्षय तृतीया से आरंभ होती हैं रथ की तैयारी</strong><br />
जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारी अक्षय तृतीया की पवित्र तिथि से ही आरंभ हो जाती हैं. पंचांग के अनुसार रथ निर्माण का आरंभ अक्षय तृतीया की तिथि से होता है.</p>
<p><strong>नीम की लकड़ी से तैयार होता है रथ</strong><br />
विशेष बात है कि अक्षय तृतीया की तिथि से जहां रथ के निर्माण का कार्य प्रारंभ होता है वहीं रथ निर्माण के लिए लड़की का चयन बसंत पंचमी के दिन से ही प्रारंभ हो जाता है. रथ के प्रयोग में लाई जाने वाली लकड़ी को ‘दारु’ कहा जाता है. विशेष बात ये है कि रथ के लिए लकड़ी चयन की जिम्मेदारी जगन्नाथ मंदिर एक खास समिति की होती है. रथ निर्माण में समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाता है. रथ निर्माण में किसी प्रकार की धातु का प्रयोग नहीं किया जाता है. मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.</p>
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		<title>भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हुई तो द्रोणनगरी का वातावरण जयकारों से रहा गुंजायमान&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jaya Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jan 2020 05:50:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू]]></category>
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					<description><![CDATA[अनंत रूप अन्नांत नाम, अनंत रूप अन्नांत नाम, आधी मूला नारायणा, आधी मूला नारायणा, जय जय श्री जगन्नाथ के साथ जब भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हुई तो द्रोणनगरी का वातावरण जयकारों से गुंजायमान रहा। भगवान जगन्नाथ द्रोणनगरी को आशीर्वाद देने भ्रमण पर निकले। पुष्प वर्षा के साथ जगह-जगह रथ यात्रा का भव्य स्वागत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अनंत रूप अन्नांत नाम, अनंत रूप अन्नांत नाम, आधी मूला नारायणा, आधी मूला नारायणा, जय जय श्री जगन्नाथ के साथ जब भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हुई तो द्रोणनगरी का वातावरण जयकारों से गुंजायमान रहा। भगवान जगन्नाथ द्रोणनगरी को आशीर्वाद देने भ्रमण पर निकले। पुष्प वर्षा के साथ जगह-जगह रथ यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। दूनवासियों ने भगवान जगन्नाथ का प्रसाद ग्रहण किया।<img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-307597 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/01/e4w3rewrfwqe-300x249.jpg" alt="" width="475" height="394" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/01/e4w3rewrfwqe-300x249.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/01/e4w3rewrfwqe.jpg 650w" sizes="auto, (max-width: 475px) 100vw, 475px" /></p>
<p>श्रीश्री जगन्नाथ मंदिर समिति की ओर से भव्य 20वीं रथ यात्रा निकाली गई। ऋषिकेश स्थित मधुबन आश्रम के स्वामी परमानंद महाराज ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर यात्रा को रवाना किया। फिर परेड मैदान से भगवान जगन्नाथ के रथ का रस्सा खींचकर महापौर सुनील उनियाल गामा ने यात्रा का शुभारंभ किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="lazy aligncenter" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimage/yatradnace.jpg" alt="" width="650" height="480" /></p>
<p>बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ रथ में विराजमान भगवान जगन्नाथ ने शहरवासियों पर अपनी कृपा बरसाई। मकर संक्रांति के पर्व पर मंदिर समिति की ओर से भगवान जगन्नाथ को नगर भ्रमण कराया गया। रथ यात्रा सुबह करीब सवा दस बजे परेड मैदान से रवाना हुई। यहां से भक्तों में रथ का रस्सा खींचने और यात्रा मार्ग पर झाडू़ लगाने की होड़ मची रही।</p>
<p>इस दौरान जगह-जगह भगवान जगन्नाथ के रथ पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। रथ के साथ चली रही झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। मंदिर समिति के सदस्य पूरी यात्रा के दौरान भक्तों को प्रसाद स्वरूप फल वितरित करते रहे। रथ यात्रा एस्ले हॉल चौक होते हुए घंटाघर पहुंची तो लोगों का उत्साह बढ़ता गया। यहां से रथ यात्रा पलटन बाजार को रवाना हुई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="lazy aligncenter" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimage/yatradoli.jpg" alt="" width="650" height="488" /></p>
<p>यहां व्यापारियों ने भगवान के दर्शन किए और आशीर्वाद ग्रहण किया। साथ ही भगवान के भजनों और जयकारों के साथ यात्रा आगे बढ़ती रही। पलटन बाजार से होते हुए रथयात्रा गांधी रोड, पिं्रस चौक से हरिद्वार रोड स्थित एक वेडिंग प्वाइंट पहुंची और यहां पर यात्रा ने विश्राम किया। साथ ही हल्दी, चंदन, चावल और दूध से भगवान को भोग लगाया गया। इस अवसर पर भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने भगवान का भोग छका।</p>
<p>यहां से हरिद्वार बाईपास स्थित मंदिर में रथ यात्रा का समापन हुआ। रथ यात्रा में मुख्य रूप सेे सुनील चंद जैन, अतुल वर्मा, विपुल वर्मा, कमल रस्तोगी, शिव प्रसाद ममगाईं, नरेंद्र गुप्ता, विधायक उमेश शर्मा काऊ, गणेश जोशी, विनोद चमोली, सुभाष जोशी, आनंद स्वरूप गुप्ता आदि शामिल थे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="lazy aligncenter" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimage/yatrakirtan.jpg" alt="" width="650" height="488" /></p>
<p><strong>सब पर कृपा बरसाते हैं भगवान जगन्नाथ: अग्रवाल</strong></p>
<p>जगन्नाथ रथयात्रा के संस्थापक राम कुमार अग्रवाल ने बताया कि साल में एक बार भगवान जगन्नाथ को मंदिर से बाहर नगर भ्रमण कराया जाता है। भगवान जगन्नाथ किसी के साथ भेदभाव नहीं करते, सभी पर कृपा बरसाते हैं। उन्होंने  बताया कि 19 जनवरी को मंदिर परिसर में मोक्ष योगा सेंटर की ओर से महामंत्र पर योग और मधुकर कला मंच की नृत्य प्रस्तुति के साथ रथयात्रा का समापन होगा। यह आयोजन शाम चार बजे हरिद्वार बाईपास रोड पर विष्णु विहार में स्थित मंदिर प्रांगण में होगा।</p>
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		<title>भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू, जानिये क्यों कराई जाती है यह यात्रा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[publisher]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 25 Jun 2017 07:03:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानिये क्यों कराई जाती है यह यात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू, जानिये क्यों कराई जाती है यह यात्रा" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421.png 748w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है. ब्रह्म और स्कंद पुराण के अनुसार, पुरी में भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया था. वह यहां सबर जनजाति के परम पूज्य देवता बन गए. सबर जनजाति के देवता होने की वजह से यहां भगवान जगन्नाथ का रूप कबीलाई देवताओं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="347" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू, जानिये क्यों कराई जाती है यह यात्रा" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421.png 748w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>पुराणों में जगन्नाथ पुरी को धरती का बैकुंठ कहा गया है. ब्रह्म और स्कंद पुराण के अनुसार, पुरी में भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया था. वह यहां सबर जनजाति के परम पूज्य देवता बन गए. सबर जनजाति के देवता होने की वजह से यहां भगवान जगन्नाथ का रूप कबीलाई देवताओं की तरह है. जगन्नाथ मंदिर की महीमा देश में ही नहीं विश्व में भी प्रसिद्ध हैं. <img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-60808" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421.png" alt="भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू, जानिये क्यों कराई जाती है यह यात्रा" width="748" height="420" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421.png 748w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/06/jagannathaji_1498361377_749x421-300x168.png 300w" sizes="auto, (max-width: 748px) 100vw, 748px" /></strong></p>
<p><strong>भगवान जगन्नाथ को साल में एक बार उनके गर्भ गृह से निकालकर यात्रा कराई जाती है. आज उसी यात्रा का शुभारंभ हुआ है. यात्रा के पीछे यह मान्यता है कि भगवान अपने गर्भ गृह से निकलकर प्रजा के सुख-दुख को खुद देखते हैं. </strong></p>
<p><strong>पुरी रथयात्रा के लिए बलराम, श्रीकृष्ण और देवी सुभद्रा के लिए तीन अलग-अलग रथ निर्मित किए जाते हैं. रथयात्रा में सबसे आगे बलरामजी का रथ, उसके बाद बीच में देवी सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण का रथ होता है. इसे उनके रंग और ऊंचाई से पहचाना जाता है. पुरी में बना जगन्नाथ मंदिर भारत में हिंदुओं के चार धामों में से एक है. यह धाम तकरबीन 800 सालों से भी ज्यादा पुराना माना जाता है.</strong></p>
<p><strong>भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ 45.6 फीट ऊंचा, बलरामजी का तालध्वज रथ 45 फीट ऊंचा और देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ 44.6 फीट ऊंचा होता है.</strong></p>
<p><strong><a href="http://www.livehalchal.com/%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b-%e0%a4%b2%e0%a5%9c%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a4%b2%e0%a4%bf/60803" target="_blank" rel="noopener noreferrer">वीडियो : लड़की के साथ रंगरलिया मनाते हुए पकड़ा गया,फतवा जारी करने वाला मौलवी</a></strong></p>
<p><strong>वैसे, जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़ी कुछ ऐसी चमत्कारी बातें हैं जो सभी को आश्चर्यचकित कर देती हैं &#8211;</strong></p>
<p><strong>&#8211; जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर स्थित झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है.</strong></p>
<p><strong>&#8211; इसी तरह मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है. इस चक्र को किसी भी दिशा से खड़े होकर देखने पर ऐसा लगता है कि चक्र का मुंह आपकी तरफ है.</strong></p>
<p><strong>&#8211; मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं. यह प्रसाद मिट्टी के बर्तनों में लकड़ी पर ही पकाया जाता है. इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है फिर नीचे की तरफ से एक के बाद एक प्रसाद पकता जाता है. </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>&#8211; मंदिर के सिंहद्वार से पहला कदम अंदर रखने पर ही आप समुद्र की लहरों से आने वाली आवाज को नहीं सुन सकते. आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देने लगती है. यह अनुभव शाम के समय और भी अलौकि&#x200d;क लगता है.</strong></p>
<p><strong>&#8211; हमने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे और उड़ते देखे हैं. जगन्नाथ मंदिर की यह बात आपको चौंका देगी कि इसके ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता. यहां तक कि हवाई जहाज भी मंदिर के ऊपर से नहीं निकलता.</strong></p>
<p><strong>&#8211; मंदिर में हर दिन बनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता साथ ही मंदिर के पट बंद होते ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है.</strong></p>
<p><strong>&#8211; दिन के किसी भी समय जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती.</strong></p>
<p><strong>&#8211; एक पुजारी मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदलता है. ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 वर्षों के लिए बंद हो जाएगा.</strong></p>
<p><strong>&#8211; आमतौर पर दिन में चलने वाली हवा समुद्र से धरती की तरफ चलती और शाम को धरती से समुद्र की तरफ. चकित कर देने वाली बात यह है कि पुरी में यह प्रक्रिया उल्टी है.</strong></p>
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