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	<title>भगवान गणेश &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>भगवान गणेश &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>क्यों कहा जाता है भगवान गणेश को गजानन?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Aug 2025 04:17:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
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		<category><![CDATA[भगवान गणेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="448" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/56-22-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/56-22.jpg 856w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/56-22-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/08/56-22-768x557.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भगवान गणेश, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता, अपने हर स्वरूप में गहरी आध्यात्मिक शिक्षा छिपाए हुए हैं। इन्हीं स्वरूपों में से एक है गजानन रूप, जिसे देखकर हर भक्त के मन में श्रद्धा और करुणा जाग उठती है। हाथीमुख वाले गणेश जी की यह कथा केवल एक पुराणकथा भर नहीं है, बल्कि यह त्याग, धैर्य और माता-पिता &#8230;]]></description>
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<p>भगवान गणेश, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता, अपने हर स्वरूप में गहरी आध्यात्मिक शिक्षा छिपाए हुए हैं। इन्हीं स्वरूपों में से एक है गजानन रूप, जिसे देखकर हर भक्त के मन में श्रद्धा और करुणा जाग उठती है। हाथीमुख वाले गणेश जी की यह कथा केवल एक पुराणकथा भर नहीं है, बल्कि यह त्याग, धैर्य और माता-पिता के प्रति अटूट समर्पण का संदेश देती है।</p>



<p>गजानन रूप हमें सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी विवेक और धैर्य से काम लेना ही सच्चा साहस है।</p>



<p><strong>गजानन स्वरूप की कथा</strong><br>शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश का हाथीमुख बनने की कथा अत्यंत भावनात्मक है। कहा जाता है कि माता पार्वती ने अपने पुत्र गणेश को द्वार पर पहरा देने के लिए खड़ा किया था। जब भगवान शिव वहां पहुंचे और उन्होंने घर में प्रवेश करना चाहा, तो गणेश जी ने उन्हें रोक दिया और बहुत प्रयास करने के बाद भी गणेश जी ने अपने पिता को प्रवेश नहीं करने दिया।</p>



<p>इस बात से क्रोधित होकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर अलग कर दिया। माता पार्वती दुख और पीड़ा से व्याकुल हो उठीं और तब भगवान शिव ने गणेश जी को पुनर्जीवित करने के लिए एक हाथी का सिर उनके शरीर पर स्थापित किया और गणेश जी का यही रूप गजानन कहलाया।</p>



<p><strong>गजानन का अर्थ</strong><br>‘गज’ का अर्थ है हाथी और ‘आनन’ का अर्थ है मुख। इस तरह ‘गजानन’ का अर्थ हुआ हाथीमुख वाले भगवान। लेकिन यह केवल एक रूप का संकेत नहीं है, बल्कि गहरे आध्यात्मिक संदेश को भी अपने भीतर समेटे हुए है। हाथी शक्ति, धैर्य, स्थिरता और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है।</p>



<p>जब हम भगवान गणेश को गजानन कहते हैं, तो यह हमें जीवन में कठिनाइयों के बीच विवेक और साहस से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।</p>
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		<title>बुधवार के दिन इस विधि से करें भगवान गणेश की पूजा, जल्द बनेंगे बिगड़े काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 04:39:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान गणेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="370" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-204-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-204.jpg 662w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-204-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />बुधवार का दिन गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बुधवार व्रत करने से साधक को भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन मंदिर या गरीब लोगों में दान करने का विशेष महत्व है। आइए जानते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="370" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-204-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-204.jpg 662w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/04/Capture-204-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बुधवार का दिन गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बुधवार व्रत करने से साधक को भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन मंदिर या गरीब लोगों में दान करने का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं कैसे करें भगवान गणेश को प्रसन्न?</p>



<p>बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन महादेव के पुत्र गणपति बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए। साथ ही मोदक समेत आदि चीजों का भोग भी लगाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा करने से साधक के जीवन की सभी बाधा दूर होती है। साथ ही रुके हुए काम जल्द पूरे होते हैं। पूजा के दौरान गणेश स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कैसे करें भगवान गणेश की पूजा?</p>



<p><strong>भगवान गणेश की पूजा विधि<br></strong>इस दिन स्नान कर साफ कपड़े पहने।<br>चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और गणपति बप्पा की प्रतिमा को विराजमान करें।<br>माला और दूर्वा घास अर्पित करें।<br>दीपक जलाकर आरती करें।<br>गणेश स्तोत्र और मंत्रों का जप करें।<br>मोदक और फल का भोग लगाएं।<br>आखिरी में लोगों में प्रसाद बाटें।</p>



<p><strong>गणेश स्तोत्र (Ganesha Stotram)<br></strong>शृणु पुत्र महाभाग योगशान्तिप्रदायकम् ।<br>येन त्वं सर्वयोगज्ञो ब्रह्मभूतो भविष्यसि ॥<br>चित्तं पञ्चविधं प्रोक्तं क्षिप्तं मूढं महामते ।<br>विक्षिप्तं च तथैकाग्रं निरोधं भूमिसज्ञकम् ॥<br>तत्र प्रकाशकर्ताऽसौ चिन्तामणिहृदि स्थितः ।<br>साक्षाद्योगेश योगेज्ञैर्लभ्यते भूमिनाशनात् ॥<br>चित्तरूपा स्वयंबुद्धिश्चित्तभ्रान्तिकरी मता ।<br>सिद्धिर्माया गणेशस्य मायाखेलक उच्यते ॥<br>अतो गणेशमन्त्रेण गणेशं भज पुत्रक ।<br>तेन त्वं ब्रह्मभूतस्तं शन्तियोगमवापस्यसि ॥<br>इत्युक्त्वा गणराजस्य ददौ मन्त्रं तथारुणिः ।<br>एकाक्षरं स्वपुत्राय ध्यनादिभ्यः सुसंयुतम् ॥<br>तेन तं साधयति स्म गणेशं सर्वसिद्धिदम् ।<br>क्रमेण शान्तिमापन्नो योगिवन्द्योऽभवत्ततः ॥</p>



<p><strong>गणेश गायत्री मंत्र<br></strong>ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥<br>ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥<br>ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥</p>



<p><strong>सिद्धि प्राप्ति हेतु मंत्र<br></strong>श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा ॥</p>



<p><strong>धन लाभ हेतु मंत्र<br></strong>ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।</p>



<p><strong>गणेश जी की आरती<br></strong>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।</p>



<p>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।<br>माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।<br>लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।<br>बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।<br>कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥<br>जय गणेश जय गणेश…<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥<br>जय गणेश जय गणेश…</p>
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		<title>भगवान गणेश को ऐसे करें प्रसन्न, करियर में आ रही बाधा होगी दूर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 05 Mar 2025 05:06:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान गणेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="466" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-98-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-98.jpg 762w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-98-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />भगवान गणेश (Lord Ganesh) की बुधवार के दिन विधिपूर्वक पूजा की जाती है। साथ ही जीवन में खुशियों के आगमन के लिए विशेष उपाय (Budhwar Ke Upay) भी किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ कामों को करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान गणेश की कृपा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="466" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-98-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-98.jpg 762w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/03/Capture-98-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>भगवान गणेश (Lord Ganesh) की बुधवार के दिन विधिपूर्वक पूजा की जाती है। साथ ही जीवन में खुशियों के आगमन के लिए विशेष उपाय (Budhwar Ke Upay) भी किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ कामों को करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान गणेश की कृपा से मनचाहा करियर मिलता है।</p>



<p>धार्मिक मान्यता के अनुसार, महादेव के पुत्र भगवान गणेश की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। बुधवार के दिन सच्चे मन गणपति बप्पा की पूजा करें। साथ ही फल और मोदक का भोग लगाएं। इस दौरान जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। ऐसे में गणपति बप्पा के 108 नामों का जप करें। इससे प्रभु प्रसन्न होते हैं और साधक के करियर में आ रही बाधा दूर होगी।</p>



<p><strong>गणेश जी के 108 नाम</strong></p>



<p>गजानन: ॐ गजाननाय नमः।<br>गणाध्यक्ष: ॐ गणाध्यक्षाय नमः।<br>विघ्नराज: ॐ विघ्नराजाय नमः।<br>विनायक: ॐ विनायकाय नमः।<br>द्वैमातुर: ॐ द्वैमातुराय नमः।<br>द्विमुख: ॐ द्विमुखाय नमः।<br>प्रमुख: ॐ प्रमुखाय नमः।<br>सुमुख: ॐ सुमुखाय नमः।<br>कृति: ॐ कृतिने नमः।<br>सुप्रदीप: ॐ सुप्रदीपाय नमः।<br>सुखनिधी: ॐ सुखनिधये नमः।<br>सुराध्यक्ष: ॐ सुराध्यक्षाय नमः।<br>सुरारिघ्न: ॐ सुरारिघ्नाय नमः।<br>महागणपति: ॐ महागणपतये नमः।<br>मान्या: ॐ मान्याय नमः।<br>महाकाल: ॐ महाकालाय नमः।<br>महाबला: ॐ महाबलाय नमः।<br>हेरम्ब: ॐ हेरम्बाय नमः।<br>लम्बजठर: ॐ लम्बजठरायै नमः।<br>ह्रस्वग्रीव: ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः।<br>महोदरा: ॐ महोदराय नमः।<br>मदोत्कट: ॐ मदोत्कटाय नमः।<br>महावीर: ॐ महावीराय नमः।<br>मन्त्रिणे: ॐ मन्त्रिणे नमः।<br>मङ्गल स्वरा: ॐ मङ्गल स्वराय नमः।<br>प्रमधा: ॐ प्रमधाय नमः।<br>प्रथम: ॐ प्रथमाय नमः।<br>प्रज्ञा: ॐ प्राज्ञाय नमः।<br>विघ्नकर्ता: ॐ विघ्नकर्त्रे नमः।<br>विघ्नहर्ता: ॐ विघ्नहर्त्रे नमः।<br>विश्वनेत्र: ॐ विश्वनेत्रे नमः।<br>विराट्पति: ॐ विराट्पतये नमः।<br>श्रीपति: ॐ श्रीपतये नमः।<br>वाक्पति: ॐ वाक्पतये नमः।<br>शृङ्गारिण: ॐ शृङ्गारिणे नमः।<br>अश्रितवत्सल: ॐ अश्रितवत्सलाय नमः।<br>शिवप्रिय: ॐ शिवप्रियाय नमः।<br>शीघ्रकारिण: ॐ शीघ्रकारिणे नमः।<br>शाश्वत: ॐ शाश्वताय नमः।<br>बल: ॐ बल नमः।<br>बलोत्थिताय: ॐ बलोत्थिताय नमः।<br>भवात्मजाय: ॐ भवात्मजाय नमः।<br>पुराण पुरुष: ॐ पुराण पुरुषाय नमः।<br>पूष्णे: ॐ पूष्णे नमः।<br>पुष्करोत्षिप्त वारिणे: ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः।<br>अग्रगण्याय: ॐ अग्रगण्याय नमः।<br>अग्रपूज्याय: ॐ अग्रपूज्याय नमः।<br>अग्रगामिने: ॐ अग्रगामिने नमः।<br>मन्त्रकृते: ॐ मन्त्रकृते नमः।<br>चामीकरप्रभाय: ॐ चामीकरप्रभाय नमः।<br>सर्वाय: ॐ सर्वाय नमः।<br>सर्वोपास्याय: ॐ सर्वोपास्याय नमः।<br>सर्व कर्त्रे: ॐ सर्व कर्त्रे नमः।<br>सर्वनेत्रे: ॐ सर्वनेत्रे नमः।<br>सर्वसिद्धिप्रदाय: ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः।<br>सिद्धये: ॐ सिद्धये नमः।<br>पञ्चहस्ताय: ॐ पञ्चहस्ताय नमः।<br>पार्वतीनन्दनाय: ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः।<br>प्रभवे: ॐ प्रभवे नमः।<br>कुमारगुरवे: ॐ कुमारगुरवे नमः।<br>अक्षोभ्याय: ॐ अक्षोभ्याय नमः।<br>कुञ्जरासुर भञ्जनाय: ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः।<br>प्रमोदाय: ॐ प्रमोदाय नमः।<br>मोदकप्रियाय: ॐ मोदकप्रियाय नमः।<br>कान्तिमते: ॐ कान्तिमते नमः।<br>धृतिमते: ॐ धृतिमते नमः।<br>कामिने: ॐ कामिने नमः।<br>कपित्थपनसप्रियाय: ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः।<br>ब्रह्मचारिणे: ॐ ब्रह्मचारिणे नमः।<br>ब्रह्मरूपिणे: ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः।<br>ब्रह्मविद्यादि दानभुवे: ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः।<br>जिष्णवे: ॐ जिष्णवे नमः।<br>विष्णुप्रियाय: ॐ विष्णुप्रियाय नमः।<br>भक्त जीविताय: ॐ भक्त जीविताय नमः।<br>जितमन्मधाय: ॐ जितमन्मधाय नमः।<br>ऐश्वर्यकारणाय: ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः।<br>ज्यायसे: ॐ ज्यायसे नमः।<br>यक्षकिन्नेर सेविताय: ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः।<br>गङ्गा सुताय: ॐ गङ्गा सुताय नमः।<br>गणाधीशाय: ॐ गणाधीशाय नमः।<br>गम्भीर निनदाय: ॐ गम्भीर निनदाय नमः।<br>वटवे: ॐ वटवे नमः।<br>अभीष्टवरदाय: ॐ अभीष्टवरदाय नमः।<br>ज्योतिषे: ॐ ज्योतिषे नमः।<br>भक्तनिधये: ॐ भक्तनिधये नमः।<br>भावगम्याय: ॐ भावगम्याय नमः।<br>मङ्गलप्रदाय: ॐ मङ्गलप्रदाय नमः।<br>अव्यक्ताय: ॐ अव्यक्ताय नमः।<br>अप्राकृत पराक्रमाय: ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः।<br>सत्यधर्मिणे: ॐ सत्यधर्मिणे नमः।<br>सखये: ॐ सखये नमः।<br>सरसाम्बुनिधये: ॐ सरसाम्बुनिधये नमः।<br>महेशाय: ॐ महेशाय नमः।<br>दिव्याङ्गाय: ॐ दिव्याङ्गाय नमः।<br>मणिकिङ्किणी मेखालाय: ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः।<br>समस्त देवता मूर्तये: ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः।<br>सहिष्णवे: ॐ सहिष्णवे नमः।<br>सततोत्थिताय: ॐ सततोत्थिताय नमः।<br>विघातकारिणे: ॐ विघातकारिणे नमः।<br>विश्वग्दृशे: ॐ विश्वग्दृशे नमः।<br>विश्वरक्षाकृते: ॐ विश्वरक्षाकृते नमः।<br>कल्याणगुरवे: ॐ कल्याणगुरवे नमः।<br>उन्मत्तवेषाय: ॐ उन्मत्तवेषाय नमः।<br>अपराजिते: ॐ अपराजिते नमः।<br>समस्त जगदाधाराय: ॐ समस्त जगदाधाराय नमः।<br>सर्वैश्वर्यप्रदाय: ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः।<br>आक्रान्त चिद चित्प्रभवे: ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः।<br>श्री विघ्नेश्वराय: ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः।</p>
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		<title>भगवान गणेश की पूजा में करें इस स्तोत्र का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Feb 2025 04:45:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान गणेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="427" height="373" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-441-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-441.jpg 427w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-441-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 427px) 100vw, 427px" />सनातन धर्म में बुधवार का दिन महादेव के पुत्र गणपति बप्पा को बेहद को प्रिय है। इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से बुध देव प्रसन्न होते हैं। बुध देव की कृपा से साधक को कारोबार में लाभ मिलता है और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="427" height="373" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-441-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-441.jpg 427w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/02/Capture-441-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 427px) 100vw, 427px" />
<p>सनातन धर्म में बुधवार का दिन महादेव के पुत्र गणपति बप्पा को बेहद को प्रिय है। इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से बुध देव प्रसन्न होते हैं। बुध देव की कृपा से साधक को कारोबार में लाभ मिलता है और जीवन में आ रही बाधा से छुटकारा मिलता है। साथ ही जीवन खुशहाल होता है।</p>



<p>बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह गणपति की पूजा करें। इसके बाद अन्न और धन का दान करें। मान्यता है कि बुधवार के दिन दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसे में इस दिन आप ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र का पाठ कर गणेश जी को प्रसन्न कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इसका पाठ करने से आर्थिक तंगी दूर होती है और रुका हुआ धन मिलता है। साथ ही मन को शांति मिलती है।</p>



<p><strong>॥ ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम् ॥</strong></p>



<p><strong>॥ विनियोग ॥</strong><br>ॐ अस्य श्रीऋणविमोचनमहागणपति-स्तोत्रमन्त्रस्य<br>शुक्राचार्य ऋषिः ऋणविमोचनमहागणपतिर्देवता<br>अनुष्टुप् छन्दः ऋणविमोचनमहागणपतिप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।</p>



<p><strong>॥ स्तोत्र पाठ ॥</strong><br>ॐ स्मरामि देवदेवेशंवक्रतुण्डं महाबलम्।<br>षडक्षरं कृपासिन्धुंनमामि ऋणमुक्तये॥</p>



<p>महागणपतिं वन्देमहासेतुं महाबलम्।<br>एकमेवाद्वितीयं तुनमामि ऋणमुक्तये॥<br>एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकंब्रह्म सनातनम्।<br>महाविघ्नहरं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥<br>शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णंशुक्लगन्धानुलेपनम्।<br>सर्वशुक्लमयं देवंनमामि ऋणमुक्तये॥<br>रक्ताम्बरं रक्तवर्णंरक्तगन्धानुलेपनम्।<br>रक्तपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥<br>कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णंकृष्णगन्धानुलेपनम्।<br>कृष्णयज्ञोपवीतं चनमामि ऋणमुक्तये॥<br>पीताम्बरं पीतवर्णपीतगन्धानुलेपनम्।<br>पीतपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥<br>सर्वात्मकं सर्ववर्णंसर्वगन्धानुलेपनम्।<br>सर्वपुष्पैः पूज्यमानंनमामि ऋणमुक्तये॥<br>एतद् ऋणहरं स्तोत्रंत्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।<br>षण्मासाभ्यन्तरे तस्यऋणच्छेदो न संशयः॥<br>सहस्रदशकं कृत्वाऋणमुक्तो धनी भवेत्॥<br>॥ इति रुद्रयामले ऋणमुक्ति श्री गणेशस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥<br>भगवान गणेश के मंत्र<br>‘गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।<br>नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।<br>धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।<br>गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।<br>ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।<br>ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।<br>ॐ गं क्षिप्रप्रसादनाय नम।<br>ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गण्पत्ये वर वरदे नमः<br>ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात ।।<br>ॐ वक्रतुण्डेक द्रष्टाय क्लींहीं श्रीं गं गणपतये<br>वर वरद सर्वजनं मं दशमानय स्वाहा ।।<br>विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लंबोदराय सकलाय जगद्धितायं।<br>नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।<br>अमेयाय च हेरंब परशुधारकाय ते।<br>मूषक वाहनायैव विश्वेशाय नमो नमः।।<br>एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः।<br>प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।<br>एकदंताय विद्&#x200d;महे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात।।<br>ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रेय<br>सर्व विघ्न प्रशमनाय सर्वाजाय वश्यकर्णाय<br>सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा..!!</p>
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		<title>नए साल के दिन इस विधि से करें भगवान गणेश की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Jan 2025 05:12:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान गणेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="496" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-2.jpg 692w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-2-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />बुधवार के दिन महादेव के पुत्र गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से गणपति बप्पा की उपासना करने से जातक को मनचाहा करियर प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में आ रहे दुख और संकट से छुटकारा मिलता है। बुधवार के दिन श्रद्धा अनुसार दान करने से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="496" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-2-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-2.jpg 692w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/01/Capture-2-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बुधवार के दिन महादेव के पुत्र गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से गणपति बप्पा की उपासना करने से जातक को मनचाहा करियर प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में आ रहे दुख और संकट से छुटकारा मिलता है। बुधवार के दिन श्रद्धा अनुसार दान करने से कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती है।</p>



<p>सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को प्रिय है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। साथ ही सच्चे मन से व्रत करना चाहिए। इससे सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस बार नए साल के दिन बुधवार पड़ रहा है, तो ऐसे में नए साल के दिन भगवान गणेश की उपासना करना जीवन के लिए अधिक शुभ रहेगा।</p>



<p><strong>इस विधि से करें भगवान गणेश की पूजा<br></strong>नए साल के दिन सुबह जल्दी उठें।<br>स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित करें।<br>इसके बाद विधिपूर्वक भगवान गणेश की पूजा करें।<br>माला और दूर्वा घास अर्पित करें।<br>मोदक और फल का भोग लगाएं<br>जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।<br>अंत में लोगों में अन्न और धन का दान करें।<br>भगवान गणेश की आरती<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।<br>माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।<br>लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।<br>बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥<br>दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।<br>कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥<br>जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।<br>माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥</p>



<p><strong>गणेश मंत्र</strong><br>ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।<br>निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥<br>ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥<br>ऊँ गं गणपतये नमो नमः<br>ॐ गं गणपतये नमः<br>“ॐ वक्रतुंडाय हुम्‌”</p>



<p><strong>आर्थिक प्रगति हेतु मंत्र</strong><br>ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥<br>ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥<br>ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥</p>
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