#बड़ा खुलासा: निर्भया का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताई उस रात की ऐसी बातें…. – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Sun, 17 Dec 2017 04:49:28 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg #बड़ा खुलासा: निर्भया का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताई उस रात की ऐसी बातें…. – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 #बड़ा खुलासा: निर्भया का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताई उस रात की ऐसी बातें…. https://livehalchal.com/%e0%a4%ac%e0%a5%9c%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ad%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%b2%e0%a4%be/99263 Sun, 17 Dec 2017 04:49:28 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=99263 16 दिसंबर 2012 की रात तकरीबन डेढ़ बजे जब निर्भया को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया था। वहां सबसे पहले देहरादून के डॉ. विपुल कंडवाल ने निर्भया का इलाज किया था। विपुल कंडवाल इस वक्त दून अस्पताल में कार्यरत हैं। लेकिन, उन दिनों वे सफदरजंग अस्पताल में कार्य कर रहे थे।हाल ही में उन्होंने …]]>
16 दिसंबर 2012 की रात तकरीबन डेढ़ बजे जब निर्भया को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया था। वहां सबसे पहले देहरादून के डॉ. विपुल कंडवाल ने निर्भया का इलाज किया था। विपुल कंडवाल इस वक्त दून अस्पताल में कार्यरत हैं। लेकिन, उन दिनों वे सफदरजंग अस्पताल में कार्य कर रहे थे।#बड़ा खुलासा: निर्भया का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताई उस रात की ऐसी बातें....हाल ही में उन्होंने एक अखबार को दिए इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि निर्भया की हालत देख वे अंदर से दहल गए थे। जिदंगी में पहले कभी ऐसा केस नहीं देखा था।

हालत देखकर दहल गया था दिल

डा. कंडवाल कहते हैं, रात डेढ़ बजे का वक्त रहा होगा। मैं अस्पताल में नाइट ड्यूटी पर था। तभी रोज की तरह सायरन बजाती तेज रफ्तार एंबुलेंस अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर आकर रुकी। तत्काल ही घायल को इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचाया गया।

डॉ. कंडवाल बताते हैं कि मेरे सामने 21 साल की एक युवती थी। उसके शरीर के फटे कपड़े हटाए, अंदर की जांच की तो दिल मानों थम सा गया। ऐसा केस मैंने अपनी जिदंगी में पहले कभी नहीं देखा। मन में सवाल बार-बार उठ रहा था कि कोई इतना क्रूर कैसे हो सकता है?

मैंने खून रोकने के लिए प्रारंभिक सर्जरी शुरू की। खून नहीं रुक रहा था। क्योंकि रॉड से किए गए जख्म इतने गहरे थे कि उसे बड़ी सर्जरी की जरूरत थी। आंत भी गहरी कटी हुई थी। मुझे नहीं पता था कि ये युवती कौन है। इतने में पुलिस और मीडिया के कई वाहन भी अस्पताल पहुंचने लगे।

निर्भया की जान बचा पाते तो आज…

डा. कंडवाल हालांकि इन यादों को शेयर नहीं करना चाहते। वे कहते हैं कि वे पल मेरे लिए बहुत ही इमोशनल हैं। हां अगर हम निर्भया की जान बचा पाते तो उसके साथ फोटो जरूर खिंचाता। उस रात ही नहीं दो-तीन हप्तों तक हम दिन-रात निर्भया की स्थिति ठीक करने में जुटे रहे।

उपचार के लिए विशेषज्ञ डाक्टरों का एक पैनल बनाया गया। इसमें मैं भी था। बाद में हालत बिगड़ने पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया, जहां से एयर एम्बुलेंस के जरिए सिंगापुर भी भेजा गया। लेकिन तमाम कोशिश के बावजूद निर्भया को बचाया नहीं जा सका।

एक साल सफदरजंग के बाद डा. कंडवाल मेदांता अस्पताल चले गए। अब पिछले दो वर्षों से डा. कंडवाल दून अस्पताल में कार्यरत हैं।

 
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