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	<title>बोरिस जॉनसन &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>बोरिस जॉनसन &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>कोरोना संकट : प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ब्रिटेन में दो दिसंबर तक लॉकडाउन लगाया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bhavna Vajpai]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Nov 2020 05:45:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बोरिस जॉनसन]]></category>
		<category><![CDATA[ब्रिटेन में दो दिसंबर तक लॉकडाउन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="362" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/2020_42020042710533698696_0_news_large_9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/2020_42020042710533698696_0_news_large_9.jpg 660w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/2020_42020042710533698696_0_news_large_9-300x176.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />ब्रिटेन में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि को देखते हुए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने देश में दो दिसंबर तक लॉकडाउन लागू करने का एलान किया है। लॉकडाउन दो दिसंबर तक जारी रहेगा। कोविड-19 के मामलों में वृद्धि और अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर पाबंदियां लगाने के मुद्दे पर चर्चा के लिए जॉनसन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="362" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/2020_42020042710533698696_0_news_large_9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/2020_42020042710533698696_0_news_large_9.jpg 660w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/2020_42020042710533698696_0_news_large_9-300x176.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>ब्रिटेन में कोविड-19 के मामलों में वृद्धि को देखते हुए प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने देश में दो दिसंबर तक लॉकडाउन लागू करने का एलान किया है। लॉकडाउन दो दिसंबर तक जारी रहेगा। कोविड-19 के मामलों में वृद्धि और अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर पाबंदियां लगाने के मुद्दे पर चर्चा के लिए जॉनसन ने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ शुक्रवार को बैठक की थी।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter is-resized"><img decoding="async" src="https://www.khabarindianetwork.com/wp-content/uploads/2020/11/2020_42020042710533698696_0_news_large_9.jpg" alt="" class="wp-image-175948" width="793" height="465"/></figure></div>



<p>यूके चांसलर ऋषि सुनक, स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक, चांसलर ऑफ द डची ऑफ लैंकेस्टर माइकल गोव बैठक में उपस्थित थे।&nbsp;<br>ऑस्ट्रिया ने मंगलवार से चार सप्ताह के लिए आंशिक लॉकडाउन की घोषणा की</p>



<p>वहीं, ऑस्ट्रिया ने कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों को काबू करने के मद्देनजर शनिवार को चार सप्ताह के लिए आंशिक लॉकडाउन लागू करने की घोषणा की जो मंगलवार से प्रभावी होगा।</p>



<p>आंशिक लॉकडाउन के दौरान रेस्तरां&nbsp;और बार चार सप्ताह के लिए बंद रहेंगे और सांस्कृतिक, खेल एवं अन्य गतिविधियां भी रद्द रहेंगी। साथ ही निवासियों को रात आठ बजे के बाद घरों में ही रहने को कहा गया है।</p>



<p>चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज ने कहा कि प्रतिबंध मंगलवार से लागू होंगे और नवंबर के अंत तक प्रभावी रहेंगे। लॉकडाउन के कारण प्रभावित होने वाली कंपनियों को उनके राजस्व का 80 फीसदी भुगतान किया जाएगा लेकिन उन्हें अपने कर्मचारियों को बरकरार रखना होगा। नए प्रतिबंधों में कर्फ्यू भी शामिल है जिसके तहत ऑस्ट्रिया के लोगों को रात के आठ बजे से सुबह छह बजे तक घरों में ही रहना होगा।</p>



<p>कुर्ज ने कहा कि कर्फ्यू का मकसद यात्रा पर रोक लगाना और निजी पार्टियों को रोकना है जो वायरस के प्रसार का कारण बनती हैं।दुनिया में शनिवार को कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 4.6 करोड़ पार कर गया, जबकि 11.95 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।</p>



<p>महामारी की चपेट में आए 3.33 करोड़ लोग ठीक भी हुए हैं। विश्व में 1.15 करोड़ सक्रिय मामले हैं, जिनमें 83,573 मरीजों की हालत गंभीर है।</p>
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		<title>बोरिस जॉनसन पर इस वजह से एक बार फिर मतदाताओं ने जताया विश्वास</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bhavna Vajpai]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Dec 2019 12:25:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ीखबर]]></category>
		<category><![CDATA[बोरिस जॉनसन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/12/download-2019-12-15T175412.138.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" />इस बार ब्रिटेन का चुनाव फिर से कुछ बिंदुओं पर सिमटकर रह गया। इसी का नतीजा ये हुआ कि इस बार फिर ब्रिटेन में हुआ चुनाव ब्रेग्जिट चुनाव में बदल गया। यह ब्रिटेन में पिछले पांच वर्षों में हुआ तीसरा चुनाव था। यह संकट तब शुरू हुआ था, जब डेविड कैमरून प्रधानमंत्री थे। उन्होंने सोचा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="300" height="168" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/12/download-2019-12-15T175412.138.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p>इस बार ब्रिटेन का चुनाव फिर से कुछ बिंदुओं पर सिमटकर रह गया। इसी का नतीजा ये हुआ कि इस बार फिर ब्रिटेन में हुआ चुनाव ब्रेग्जिट चुनाव में बदल गया। यह ब्रिटेन में पिछले पांच वर्षों में हुआ तीसरा चुनाव था। यह संकट तब शुरू हुआ था, जब डेविड कैमरून प्रधानमंत्री थे। उन्होंने सोचा था कि जनमत संग्रह से इस संकट का हमेशा के लिए हल निकाला जा सकता है, लेकिन उसके बाद देश दो प्रधानमंत्रियों को जाते देख चुका है, और अब तीसरे प्रधानमंत्री को नया जानदेश मिला है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-295752 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/12/download-2019-12-15T175412.138.jpg" alt="" width="604" height="338" /></p>
<p>लोग चाहते हैं कि 2016 में जो संकट शुरू हुआ था, बोरिस जॉनसन उसे हल कर दें। किंग्स कॉलेज, लंदन के प्रोफेसर हर्ष वी.पंत का कहना है कि बोरिस जॉनसन ने यहां रह रहे भारतीयों से भी तमाम वायदे किए हैं जिसकी वजह से उनको जीत हासिल हुई है, इसके अलावा कई अन्य मुद्दे भी है जिसकी वजह से उनको जीत हासिल हुई है अब देखना ये है कि बोरिस इन मतदाताओं की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाते हैं।</p>
<p>जॉनसन का पूरा जोर ब्रेग्जिट पर था, लेकिन उनकी विश्वसनीयता का सवाल हमेशा बना रहा। उन्हें एक ऐसे चतुर नेता के रूप में देखा जाता है, जो अपनी महत्वाकांक्षाओं के लिए रिश्ते बनाता है और बिगाड़ भी लेता है। दूसरी ओर, जेरेमी कॉर्बिन की ब्रेग्जिट पर कोई स्पष्ट सोच नहीं थी। वह तात्कालिक जरूरतों के हिसाब से अपना पक्ष बदलते रहते थे। जो लोग यूरोपीय संघ के साथ रहना चाहते हैं और जो नहीं रहना चाहते, दोनों ने ही जेरेमी कॉर्बिन को नुकसान पहुंचाया।</p>
<div class="relativeNews">
<p>ऐसा माना जा रहा है कि अब बोरिस के जीतने के बाद ब्रेग्जिट की प्रक्रिया तेज हो जाएगी, लेकिन कुछ मुश्किल सवाल भी सिर उठाएंगे। स्कॉटिश नेशनल पार्टी की नेता और स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टर्जेअन ने कह दिया है कि स्कॉटलैंड का संदेश स्पष्ट है। स्कॉटलैंड बोरिस जॉनसन की कंजर्वेटिव सरकार को नहीं चाहता, प्रधानमंत्री को यह जनादेश नहीं है कि वह स्कॉटलैंड को यूरोपीय संघ से बाहर ले आएं।</p>
<div class="relativeNews">
<p>यह पार्टी एक स्वतंत्र जनमत-संग्रह के पक्ष में दिखती है। ब्रिटिश जनता भले चाहती हो कि ब्रेग्जिट संकट जल्दी टल जाए, लेकिन ब्रिटेन का राजनीतिक भविष्य अभी संघर्ष का विषय है। बोरिस जॉनसन ने भले ही बड़ी जीत हासिल कर ली हो, लेकिन उनकी चुनौतियों का सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ है।</p>
<p>ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की भूमिका वाले सतत ड्रामे से थके ब्रिटिश मतदाताओं ने बोरिस जॉनसन को एक और मौका दे दिया, ताकि वह ब्रेग्जिट पर काम कर सकें। इस बार कंजर्वेटिव को मजबूत जनादेश मिला है। ब्रेग्जिट ने एक तरह से ब्रिटेन का नया राजनीतिक नक्शा खींच डाला है। इस वजह से ही कुछ लोगों ने कुछ महीने पहले यह कल्पना की थी और यह आशा भी कि तीन साल से जारी संकट को किनारे रखकर बेहतर भविष्य की ओर बढ़ा जा सकता है।</p>
<div class="relativeNews">
<p>जॉनसन से पहले प्रधानमंत्री रहीं थेरेसा मे ने भी 2017 में चुनाव कराया, ताकि उन्हें व्यापक जनादेश मिल जाए, लेकिन बढ़ने की बजाय उनकी सीटें घट गईं। नतीजा यह हुआ कि उन्हें डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी का समर्थन लेना पड़ा ताकि उनकी अल्पमत सरकार चल सके। जब थेरेसा के ब्रेग्जिट वापसी समझौते को ब्रिटिश संसद ने तीसरी बार खारिज कर दिया, तब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और जॉनसन ने कार्यभार संभाला।</p>
<div class="relativeNews"></div>
</div>
</div>
</div>
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