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	<title>बॉम्बे हाई कोर्ट &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>बॉम्बे हाई कोर्ट &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>कोल्हापुर के पन्हाला में दो दरगाह तोड़ने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक</title>
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		<pubDate>Mon, 11 May 2026 10:34:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[बॉम्बे हाई कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="352" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-13.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-13.jpg 914w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-13-300x171.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/7-13-768x437.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने पन्हाला में मौजूद 15वीं सदी के दो मुस्लिम धार्मिक स्थलों को तोड़ने के आदेश पर रोक लगा दिया है। कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए यह आदेश पन्हाला गिरिस्तान नगर परिषद को दिया है। इन दो मुस्लिम धार्मिक स्थलों में एक हजरत पीर शाहबुद्दीन खटावली दरगाह है और &#8230;]]></description>
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<p>बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने पन्हाला में मौजूद 15वीं सदी के दो मुस्लिम धार्मिक स्थलों को तोड़ने के आदेश पर रोक लगा दिया है। कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए यह आदेश पन्हाला गिरिस्तान नगर परिषद को दिया है। इन दो मुस्लिम धार्मिक स्थलों में एक हजरत पीर शाहबुद्दीन खटावली दरगाह है और दूसरा हजरत पीर साधु खटल दरगाह है।</p>



<p>जस्टिस माधव जमदार और जस्टिस प्रवीण एस पाटिल की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय करते हुए कहा, &#8220;तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, यह जरूरी है कि सभी प्रतिवादी जवाब में हलफनामा दाखिल करें। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील (युवराज) नरवणकर ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह दोनों दरगाह लगभग 15वीं सदी से अस्तित्व में है और बॉम्बे गजट में भी दर्ज है।</p>



<p><strong>15 जून तक दाखिल करें हलफनामा: हाई कोर्ट<br></strong>वहीं कोर्ट ने आगे कहा, &#8220;जवाबी हलफनामा 15 जून 2026 को या उससे पहले दाखिल किया जाए।&#8221; मालूम हो कि, पन्हाला हिल स्टेशन की नगर निकाय संस्था ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन (MRTP) अधिनियम की धारा 52 और 53 (दोनों ही अनाधिकृत निर्माण और उसे गिराने की शक्ति से संबंधित हैं) के तहत, इन दरगाहों का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट को एक नोटिस जारी किया था।</p>



<p>यह नोटिस 1 जुलाई 2024 को एक स्थानीय निवासी द्वारा तहसीलदार के समक्ष की गई शिकायत के आधार पर जारी किया गया था। इस साल की शुरुआत में, दरगाह ट्रस्ट ने संपत्ति पर अपने कब्जे और अधिकार की वैधता साबित करने के लिए भूमि अभिलेख अधीक्षक (SLR) के समक्ष कार्यवाही शुरू की थी।</p>



<p>ट्रस्ट ने हाई कोर्ट में अपनी याचिका में तर्क दिया कि नगर परिषद ने नोटिस उस समय जारी किया, जब SLR के समक्ष उसकी याचिका निरीक्षण के प्रोसेस में थी। बता दें कि, याचिकाकर्ता और ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी अब्दुलसत्तार मुजावर ने 7 मई के नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी।</p>



<p>इसके साथ ही यह निर्देश देने का आग्रह किया था कि प्रतिवादियों, उनके अधिकारियों, एजेंटों, कर्मचारियों और उनकी ओर से कार्य करने वाले सभी व्यक्तियों को याचिका की सुनवाई और अंतिम निपटारे तक दरगाह के निर्माण, संरचनाओं और धार्मिक वस्तुओं को गिराने, उनमें छेड़छाड़ करने, उन्हें हटाने या उनमें हस्तक्षेप करने से रोका जाए।&#8221;</p>
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		<title>कोल्हापुर के पन्हाला में दो दरगाह तोड़ने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 05:47:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बॉम्बे हाई कोर्ट]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="346" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kjlklkg.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kjlklkg.jpg 792w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kjlklkg-300x168.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/kjlklkg-768x430.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>&nbsp;बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने पन्हाला में मौजूद 15वीं सदी के दो मुस्लिम धार्मिक स्थलों को तोड़ने के आदेश पर रोक लगा दिया है। कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए यह आदेश पन्हाला गिरिस्तान नगर परिषद को दिया है। इन दो मुस्लिम धार्मिक स्थलों में एक हजरत पीर शाहबुद्दीन खटावली दरगाह है और दूसरा हजरत पीर साधु खटल दरगाह है।</p>



<p>जस्टिस माधव जमदार और जस्टिस प्रवीण एस पाटिल की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय करते हुए कहा, &#8220;तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, यह जरूरी है कि सभी प्रतिवादी जवाब में हलफनामा दाखिल करें। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील (युवराज) नरवणकर ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह दोनों दरगाह लगभग 15वीं सदी से अस्तित्व में है और बॉम्बे गजट में भी दर्ज है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">15 जून तक दाखिल करें हलफनामा: हाई कोर्ट</h2>



<p>वहीं कोर्ट ने आगे कहा, &#8220;जवाबी हलफनामा 15 जून 2026 को या उससे पहले दाखिल किया जाए।&#8221; मालूम हो कि, पन्हाला हिल स्टेशन की नगर निकाय संस्था ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन (MRTP) अधिनियम की धारा 52 और 53 (दोनों ही अनाधिकृत निर्माण और उसे गिराने की शक्ति से संबंधित हैं) के तहत, इन दरगाहों का प्रबंधन करने वाले ट्रस्ट को एक नोटिस जारी किया था।</p>



<p>यह नोटिस 1 जुलाई 2024 को एक स्थानीय निवासी द्वारा तहसीलदार के समक्ष की गई शिकायत के आधार पर जारी किया गया था। इस साल की शुरुआत में, दरगाह ट्रस्ट ने संपत्ति पर अपने कब्जे और अधिकार की वैधता साबित करने के लिए भूमि अभिलेख अधीक्षक (SLR) के समक्ष कार्यवाही शुरू की थी।</p>



<p>ट्रस्ट ने हाई कोर्ट में अपनी याचिका में तर्क दिया कि नगर परिषद ने नोटिस उस समय जारी किया, जब SLR के समक्ष उसकी याचिका निरीक्षण के प्रोसेस में थी। बता दें कि, याचिकाकर्ता और ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी अब्दुलसत्तार मुजावर ने 7 मई के नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी।</p>



<p>इसके साथ ही यह निर्देश देने का आग्रह किया था कि प्रतिवादियों, उनके अधिकारियों, एजेंटों, कर्मचारियों और उनकी ओर से कार्य करने वाले सभी व्यक्तियों को याचिका की सुनवाई और अंतिम निपटारे तक दरगाह के निर्माण, संरचनाओं और धार्मिक वस्तुओं को गिराने, उनमें छेड़छाड़ करने, उन्हें हटाने या उनमें हस्तक्षेप करने से रोका जाए।&#8221;</p>
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		<title>बॉम्बे हाई कोर्ट ने नाविकों को रिहा करने का दिया आदेश; पोत मालिकों को लगाई फटकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 May 2026 05:20:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[बॉम्बे हाई कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/uiuioy.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/uiuioy.jpg 709w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/uiuioy-300x168.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई तट के पास जब्त किए गए तीन पोतों पर फंसे 50 नाविकों को छोड़ने का मंगलवार को निर्देश दिया। अदालत ने पोत मालिकों को फटकार लगाते हुए कहा कि पोतों के मालिक चालक दल के सदस्यों को महीनों से नाम मात्र के लिए भोजन और पानी उपलब्ध कराके उनके साथ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="345" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/uiuioy.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/uiuioy.jpg 709w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/uiuioy-300x168.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई तट के पास जब्त किए गए तीन पोतों पर फंसे 50 नाविकों को छोड़ने का मंगलवार को निर्देश दिया। अदालत ने पोत मालिकों को फटकार लगाते हुए कहा कि पोतों के मालिक चालक दल के सदस्यों को महीनों से नाम मात्र के लिए भोजन और पानी उपलब्ध कराके उनके साथ पालतू जानवरों से भी बुरा व्यवहार कर रहे हैं।</p>



<p>हाई कोर्ट ने कहा,&nbsp;पोत मालिक नाविकों के स्वास्थ्य के बजाय अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। जीवन केवल एक बार मिलता है। हम पुनर्जन्म में विश्वास नहीं करते हैं।&nbsp;पोतों पर फंसे नाविकों ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया कि उनके पास नाम मात्र के लिए भोजन और पानी उपलब्ध है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मालिकों ने नाविकों को उनके हाल पर छोड़ा</h2>



<p>तीनों पोतों को तेल और कोयले के अवैध परिवहन के आरोप में मुंबई से लगभग 11 समुद्री मील दूर बीच समुद्र में जब्त कर लिया गया था, जिसके बाद मालिकों ने नाविकों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।</p>



<p>एमटी एस्फाल्ट स्टार, एमटी स्टेलर रूबी और एमटी अल जाफजिया नामक पोतों पर लगभग 50 नाविक फंसे हुए हैं, जिनमें से सात ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के साथ हाई कोर्ट का रुख किया है। हाई कोर्ट ने सोमवार को येलो गेट पुलिस को मंगलवार को सभी नाविकों को उसके समक्ष पेश करने का आदेश दिया।</p>



<p>गौरतलब है कि बंदी प्रत्यक्षीकरण का अर्थ है सशरीर प्रस्तुत करना। यह सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय द्वारा जारी किया जाने कानूनी रिट है। इसके तहत अदालत आदेश देता है कि बंदी को अदालत में पेश किया जाए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">नाविकों ने कोर्ट में क्या कहा?</h2>



<p>सभी नाविकों को जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस हितेन वेनेगांवकर की पीठ के समक्ष पेश किया गया। नाविकों ने पीठ को बताया कि वे पोतों पर वापस नहीं जाना चाहते। नाविकों ने पीठ से कहा कि उन्होंने पोतों पर नाम मात्र भोजन और रोजाना केवल 300 मिलीलीटर पानी दिया जा रहा है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">अदालत ने लगाई फटकार</h2>



<p>अदालत ने पोत मालिकों को फटकार लगाते हुए कहा, आप (जहाज मालिक) चालक दल के सदस्यों को रोजाना केवल 300 मिलीलीटर पानी कैसे दे सकते हैं? हमारे घरों में पालतू जानवरों को भी रोजाना इससे अधिक पानी मिलता है। हम इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे।</p>



<p>हाई कोर्ट ने येलो गेट पुलिस को सभी 50 नाविकों की रिहाई की औपचारिकताएं पूरी करने और उन्हें छोड़ने का निर्देश दिया।</p>
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		<item>
		<title>बॉम्बे HC के आदेश के बाद MVA ने वापस लिया महाराष्ट्र बंद का एलान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Aug 2024 05:47:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[बॉम्बे हाई कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/opp-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/opp.jpg 745w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/opp-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />बॉम्बे हाई कोर्ट&#160;द्वारा राजनीतिक दलों या व्यक्तियों को महाराष्ट्र बंद का आह्वान करने से रोकने के बाद महाविकास आघाड़ी ने शनिवार को आहूत राज्यव्यापी बंद वापस ले लिया है। विपक्ष ने बंद का किया था आह्वान बंद का आह्वान विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (मविआ) द्वारा ठाणे के बदलापुर में एक स्कूल में दो बच्चियों के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="350" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/opp-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/opp.jpg 745w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/08/opp-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बॉम्बे हाई कोर्ट&nbsp;द्वारा राजनीतिक दलों या व्यक्तियों को महाराष्ट्र बंद का आह्वान करने से रोकने के बाद महाविकास आघाड़ी ने शनिवार को आहूत राज्यव्यापी बंद वापस ले लिया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">विपक्ष ने बंद का किया था आह्वान</h2>



<p>बंद का आह्वान विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (मविआ) द्वारा ठाणे के बदलापुर में एक स्कूल में दो बच्चियों के कथित यौन उत्पीड़न के विरोध में 24 अगस्त को किया गया था। शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अब मविआ के नेता और कार्यकर्ता पूरे राज्य में जगह-जगह मुंह पर काली पट्टी बांधकर एवं हाथों में काला झंडा लेकर प्रदर्शन करेंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">कोर्ट ने क्या कहा?</h2>



<p>शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार बंद को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी। न्यायाधीशों ने कहा कि वे बंद के आह्वान को चुनौती देने वाली अधिवक्ता सुभाष झा और गुणरत्न सदावर्ते के माध्यम से दायर दो याचिकाओं पर शीघ्र ही विस्तृत आदेश पारित करेंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">महाराष्ट्र सरकार ने हड़ताल के आह्वान को बताया अवैध</h2>



<p>उन्होंने कहा कि हम किसी भी राजनीतिक दल और/या किसी भी व्यक्ति को बंद का आह्वान करने से रोक रहे हैं। राज्य को इस संबंध में सभी निवारक कदम उठाने होंगे। सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया कि हड़ताल का आह्वान अवैध है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाएगी कि मानव जीवन या संपत्ति को कोई नुकसान या विनाश न हो। राज्य अपना कर्तव्य निभाएगा, लेकिन सभी की संवैधानिक जिम्मेदारी है, जिनका उन्हें पालन करना चाहिए।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मराठा आरक्षण आंदोलन का दिया उदाहरण</h2>



<p>अधिवक्ता झा और सदावर्ते ने केरल उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए याचिका में कहा था कि कोई भी राजनीतिक दल राज्यव्यापी बंद का आह्वान नहीं कर सकता, और उच्च न्यायालय के पास ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने की पर्याप्त शक्तियां हैं। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन का भी उदाहरण दिया, जिसके दौरान बड़ी मात्रा में सार्वजनिक संपत्ति नष्ट कर दी गई थी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">सीएम शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर किया कटाक्ष</h2>



<p>मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नासिक में लाड़की बहन योजना से संबंधित एक समारोह में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ लोग मुख्यमंत्री पद पाने के लिए इतने उत्सुक हैं कि वे इस तरह की राजनीति कर रहे हैं। यह गलत है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इसी समारोह में अपने भाषण में बंद का आह्वान करने के लिए विपक्ष की आलोचना की।</p>



<p>गृह मंत्रालय के प्रभारी फडणवीस ने कहा कि यह बंद राजनीति के लिए है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि आपने कोलकाता में एक महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या पर ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ कोई स्टैंड नहीं लिया, लेकिन यहां आप अपने स्वार्थ के लिए बंद का आह्वान कर रहे हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">&nbsp;उद्धव ठाकरे ने लोगों से की थी ये अपील</h2>



<p>बता दें कि उच्च न्यायालय का फैसला आने से पहले उद्धव ठाकरे ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि विपक्षी दल महाविकास अघाड़ी &nbsp;द्वारा 24 अगस्त को बुलाया गया ‘महाराष्ट्र बंद’ राजनीतिक नहीं है, बल्कि एक ‘विकृति’ के खिलाफ है। उन्होंने जाति और धर्म से ऊपर उठकर लोगों से इसमें भाग लेने का आग्रह किया था।</p>



<p>&nbsp;उद्धव ने कहा था कि बंद का उद्देश्य सरकार को यह अहसास दिलाना है कि व्यवस्था को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी लगन से करना चाहिए, जबकि उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद उद्धव ने कहा कि हम उच्च न्यायालय के फैसले से सहमत नहीं हैं। हम इसे चुनौती दे सकते हैं, लेकिन अब हमने बंद का आह्वान करने के बजाय राज्यव्यापी प्रदर्शन करने का निर्णय किया है।</p>



<p>राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) प्रमुख शरद पवार ने भी शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र में बच्चियों और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि गृह विभाग को ऐसे अपराधों पर नजर रखने के लिए सतर्क रहना चाहिए।</p>
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		<title>बॉम्बे हाई कोर्ट: विवाहेतर संबंध तलाक का आधार हो सकता है, बच्चे की कस्टडी का नहीं</title>
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		<pubDate>Sat, 20 Apr 2024 09:40:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[बॉम्बे हाई कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="354" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/maharashtra-1-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/maharashtra-1-4.jpg 683w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/maharashtra-1-4-300x172.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />एक नौ वर्षीय बालिका की कस्टडी उसकी मां को सौंपते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि विवाहेतर संबंध तलाक का आधार हो सकता है लेकिन बच्चे की कस्टडी प्रदान करने का नहीं। परिवार अदालत ने भी बालिका की कस्टडी उसकी मां को सौंपी थी। इस मामले में युगल का विवाह 2010 में हुआ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="354" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/maharashtra-1-4.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/maharashtra-1-4.jpg 683w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/04/maharashtra-1-4-300x172.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>एक नौ वर्षीय बालिका की कस्टडी उसकी मां को सौंपते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि विवाहेतर संबंध तलाक का आधार हो सकता है लेकिन बच्चे की कस्टडी प्रदान करने का नहीं। परिवार अदालत ने भी बालिका की कस्टडी उसकी मां को सौंपी थी। इस मामले में युगल का विवाह 2010 में हुआ था और उनकी पुत्री 2015 में जन्मी थी।</p>



<p>एक नौ वर्षीय बालिका की कस्टडी उसकी मां को सौंपते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि विवाहेतर संबंध तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन बच्चे की कस्टडी प्रदान करने का नहीं। जस्टिस राजेश पाटिल की एकल पीठ ने 12 अप्रैल को एक महिला पूर्व विधायक के पुत्र की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें परिवार अदालत के फरवरी, 2023 के फैसले को चुनौती दी गई थी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या है पूरा मामला?</h2>



<p>परिवार अदालत ने भी बालिका की कस्टडी उसकी मां को सौंपी थी। इस मामले में युगल का विवाह 2010 में हुआ था और उनकी पुत्री 2015 में जन्मी थी। पेशे से डॉक्टर महिला ने दावा किया था कि 2019 में उसे घर से निकाल दिया गया था, जबकि याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी अपनी इच्छा से चली गई थी।</p>



<p>याचिकाकर्ता की वकील इंदिरा जयसिंह ने अदालत में दलील दी कि महिला के कई विवाहेतर संबंध हैं, लिहाजा बालिका की कस्टडी उसे सौंपना उचित नहीं होगा। अदालत ने कहा,</p>



<p>एक अच्छी पत्नी नहीं होने का मतलब यह नहीं कि वह एक अच्छी मां नहीं है।</p>



<p><strong>याचिका में क्या कुछ कहा गया?<br></strong>याचिकाकर्ता ने याचिका में दावा किया कि उसकी बेटी अपनी मां के साथ खुश नहीं थी और उसे व्यवहार में कुछ परिवर्तन आए हैं। लिहाजा बेटी के हित में उसे उसके व उसके माता-पिता के साथ रहने की अनुमति दी जाए। जयसिंह ने अदालत से कहा कि बालिका के स्कूल ने भी याचिकाकर्ता की मां को ई-मेल लिखे थे जिसमें उसके व्यवहार को लेकर चिंता जताई गई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।</p>



<p><strong>&#8216;पिता को कस्टडी देने का कोई कारण नहीं&#8217;<br></strong>न्यायाधीश ने कहा कि स्कूल प्रशासन के पास बालिका से जुड़े मुद्दे के बारे में उसकी राजनीतिज्ञ दादी को सूचित करने का कोई कारण नहीं था, जबकि बालिका के माता-पिता सुशिक्षित हैं और उसकी मां तो डॉक्टर है। जस्टिस पाटिल ने कहा,</p>



<p>बालिका नौ वर्ष की है, जो युवावस्था से पहले की उम्र है और कस्टडी के ऐसे मामलों में अदालत को बच्चे हित को सर्वोपरि रखना चाहिए। बालिका की देखभाल उसकी नानी कर रही थी और मां की कस्टडी में रहने के दौरान उसका अकादमिक रिकॉर्ड भी अच्छा था। लिहाजा बालिका की कस्टडी मां से छीनकर पिता को देने का कोई कारण नहीं है।</p>



<p>अदालत ने याचिकाकर्ता को 21 अप्रैल तक बालिका की कस्टडी उसकी मां को सौंपने का आदेश दिया। बालिका जब अपने पिता से एक वीकेंड पर मिलने आई थी तो पिता ने उसे वापस मां के पास भेजने से इनकार कर दिया था। इस मामले में 2020 में महिला ने अपने पति और सास-ससुर के विरुद्ध पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी जिसमें उसने उत्पीड़न करने, हमला करने, डराने-धमकाने व बेटी को छीनने का आरोप लगाया था। महिला ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में घरेलू हिंसा की शिकायत और परिवार अदालत में बेटी की कस्टडी मांगने की अर्जी भी दाखिल की थी।</p>
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