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	<title>बीमारी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>बीमारी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>जहरीली हवा से बढ़ रहा फेफड़ों की इस गंभीर बीमारी का खतरा</title>
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		<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 04:50:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[बीमारी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="259" height="178" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cvbnm-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cvbnm.jpg 259w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cvbnm-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 259px) 100vw, 259px" />फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के बारे में हम अक्सर धूम्रपान को ही सबसे बड़ा कारण मान लेते हैं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल है। COPD (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) आज भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में एक बढ़ता हुआ स्वास्थ्य संकट बन चुका है और इसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ सिगरेट का धुआं नहीं, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="259" height="178" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cvbnm-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cvbnm.jpg 259w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/cvbnm-110x75.jpg 110w" sizes="(max-width: 259px) 100vw, 259px" />
<p>फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के बारे में हम अक्सर धूम्रपान को ही सबसे बड़ा कारण मान लेते हैं, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल है। COPD (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) आज भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में एक बढ़ता हुआ स्वास्थ्य संकट बन चुका है और इसकी सबसे बड़ी वजह सिर्फ सिगरेट का धुआं नहीं, बल्कि हमारे आसपास की जहरीली हवा भी है।</p>



<p>World COPD Day 2025 के मौके पर यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर हवा की गुणवत्ता हमारे फेफड़ों को किस तरह नुकसान पहुंचा रही है।</p>



<p><strong>वायु प्रदूषण से होता है यह अनदेखा नुकसान<br></strong>डॉक्टर के अनुसार, लंबे समय तक खराब हवा में सांस लेना हमारे फेफड़ों में लगातार सूजन पैदा कर देता है। PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण, वाहनों का धुआं, फैक्ट्री से निकलने वाले केमिकल और घरों में जलने वाला बायोमास (जैसे लकड़ी, कोयला, गोबर)- ये सभी धीरे-धीरे फेफड़ों को कमजोर कर देते हैं।</p>



<p>समस्या यह है कि यह नुकसान तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन समय के साथ फेफड़ों की क्षमता घटती जाती है, सांस फूलना बढ़ जाता है और व्यक्ति आसानी से थकान महसूस करने लगता है।</p>



<p>सर्दियों में हवा की गुणवत्ता और बिगड़ने से अचानक COPD की तीव्रता बढ़ जाती है। ऐसे समय में, मरीजों को सांस लेने में इतनी परेशानी होती है कि अक्सर उन्हें इमरजेंसी में भर्ती करना पड़ता है।</p>



<p><strong>COPD सिर्फ स्मोकर्स की बीमारी नहीं<br></strong>आम धारणा है कि COPD सिर्फ धूम्रपान करने वालों को प्रभावित करता है, जबकि वास्तविकता अलग है। भारत में लगभग एक-तिहाई COPD मामलों के पीछे खराब हवा और इंडोर स्मोक का हाथ है। यानी घर में चूल्हे का धुआं, खराब वेंटिलेशन या आस-पास का प्रदूषण- ये सब उतना ही नुकसान कर सकते हैं जितना सिगरेट का धुआं। इसका मतलब है कि COPD से बचाव केवल धूम्रपान छोड़ने तक सीमित नहीं है, साफ और सुरक्षित हवा भी उतनी ही जरूरी है।</p>



<p><strong>किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा?<br></strong>कुछ ग्रुप ऐसे हैं जिन पर प्रदूषण का असर और भी तेज पड़ता है-</p>



<p> बुजुर्ग<strong><br></strong>अस्थमा या पुरानी खांसी वाले लोग<br>बाहर ज्यादा समय तक काम करने वाले कर्मचारी<br>बच्चे और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग<br>इन लोगों के लिए खराब हवा में सांस लेना फेफड़ों पर एक्स्ट्रा दबाव डालता है, जिससे बीमारी तेजी से बढ़ सकती है।</p>



<p><strong>साफ हवा क्यों है जरूरी?<br></strong>World COPD Day का संदेश बेहद साफ है- जिस हवा में हम सांस लेते हैं, वही हमारी सेहत की सबसे बड़ी कुंजी है। अगर हवा साफ नहीं होगी, तो फेफड़ों की बीमारी को रोकना मुश्किल होता जाएगा। इसलिए यह सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि एक बड़ी पब्लिक हेल्थ चैलेंज भी है।</p>



<p><strong>क्या कर सकते हैं हम?<br></strong>COPD के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं-</p>



<p>घरों में क्लीन कुकिंग फ्यूल (जैसे LPG, बिजली आधारित उपकरण) का इस्तेमाल<br>प्रदूषण वाले दिनों में मास्क पहनना<br>ज्यादा समय बाहर बिताने वालों के लिए रेगुलर हेल्थ चेकअप<br>आसपास हरियाली बढ़ाना और धुएं के स्रोतों को कम करना<br>सरकार और समुदाय स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के सख्त कदम<br>जब हम हवा को साफ करेंगे, तभी फेफड़ों को बचा सकेंगे।<br>यह दिन हमें याद दिलाता है कि फेफड़ों की सेहत सिर्फ हमारे व्यक्तिगत व्यवहार पर निर्भर नहीं करती, बल्कि हमारे आस-पास की हवा पर भी करती है। प्रदूषण को कम करना सिर्फ पर्यावरण की रक्षा करना नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के फेफड़ों को एक बेहतर भविष्य देने जैसा है।</p>
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		<title>टीबी के जैसी लक्षण वाली बीमारी को लेकर एमपी में अलर्ट, सीएम बोले-रोकथाम के करें उपाय</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Sep 2025 06:04:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[बीमारी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="351" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/Capture-10-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/Capture-10.jpg 633w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/Capture-10-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />भोपाल स्थित एम्स के रिसर्च में सामने आई टीबी के जैसे लक्षण वाली खतरनाक बीमारी मेलिओइडोसिस को लेकर मध्य प्रदेश अलर्ट पर आ गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिसर्च पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के धान किसानों में होने वाली मेलिओइडोसिस की रोकथाम के निर्देश दिए हैं। सीएम ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और प्रमुख &#8230;]]></description>
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<p>भोपाल स्थित एम्स के रिसर्च में सामने आई टीबी के जैसे लक्षण वाली खतरनाक बीमारी मेलिओइडोसिस को लेकर मध्य प्रदेश अलर्ट पर आ गया है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिसर्च पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के धान किसानों में होने वाली मेलिओइडोसिस की रोकथाम के निर्देश दिए हैं। सीएम ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और प्रमुख सचिव कृषि को संयुक्त रूप से किसानों की जांच, इलाज और बीमारी की रोकथाम के लिए काम करने और स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए। यदि कोई किसान रोग से ग्रस्त पाया जाता है तो उसका सरकारी खर्च पर इलाज कराया जाएगा।</p>



<p><strong>20 से अधिक जिलों में मिले मरीज<br></strong>भोपाल एम्स की रिपोर्ट में 20 से अधिक जिलों में 130 मरीजों में मेलिओइडोसिस की पुष्टि हुई है। यह बैक्टीरिया संक्रमित मिट्टी और दूषित पानी में पाया जाता है। बीमारी के लक्षण बुखार, बार-बार बुखार आना, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सीने में दर्द हैं। मधुमेह और अधिक शराब सेवन करने वाले मरीज अधिक प्रभावित होते हैं। एम्स के अनुसार यह रोग खतरनाक है, हर 10 में से 4 मरीज की मौत हो जाती है।</p>



<p><strong>मेलिओइडोसिस क्या है?</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li>यह एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है, जो अक्सर मिट्टी और गंदे पानी से फैलता है।</li>



<li>लक्षण साधारण बुखार, खांसी या फोड़े जैसे दिख सकते हैं, लेकिन यह शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।</li>



<li>समय पर पहचान और सही इलाज मिलने पर मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।</li>
</ol>



<p><strong>टीबी जैसे लक्षण<br></strong>मेलियोइडोसिस एक गंभीर रोग है, जो बर्कहोल्डेरिया स्यूडोमैलीआई नामक बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया मिट्टी में पाया जाता है, खासकर धान के खेतों में। संक्रमित मिट्टी या पानी के संपर्क में आने से यह मनुष्यों में फैल सकता है। यह बीमारी कई अंगों को प्रभावित करती है और लक्षणों में अक्सर टीबी जैसी लगती है। यदि सही समय पर उपचार न मिले तो यह जानलेवा भी हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य से जुड़े लोगों को इसका अधिक खतरा होता है, लेकिन शहरी क्षेत्रों के लोग भी खासकर डायबिटीज से पीड़ित या लगातार शराब का सेवन करने वाले लोग, इससे प्रभावित हो सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>डायबिटीज की बीमारी बन सकती है किडनी फेलियर की वजह</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 Feb 2024 07:09:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[किडनी फेलियर]]></category>
		<category><![CDATA[डायबिटीज]]></category>
		<category><![CDATA[बीमारी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="365" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-20-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-20.jpg 792w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-20-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-20-768x454.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />डायबिटीज (मधुमेह) मेटाबॉलिज्म से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें मरीज का ब्लड ग्लूकोज लेवल बढ़ जाता है। दुनिया में लगभग 422 मिलियन (42 करोड़) लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसका असर शरीर के कई सारे अंगों पर पड़ता है, लेकिन इससे सबसे ज्यादा किडनी प्रभावित होती है, जिसे अकसर नजरअंदाज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="365" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-20-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-20.jpg 792w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-20-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/lifestyle-1-20-768x454.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>डायबिटीज (मधुमेह) मेटाबॉलिज्म से जुड़ी एक समस्या है, जिसमें मरीज का ब्लड ग्लूकोज लेवल बढ़ जाता है। दुनिया में लगभग 422 मिलियन (42 करोड़) लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसका असर शरीर के कई सारे अंगों पर पड़ता है, लेकिन इससे सबसे ज्यादा किडनी प्रभावित होती है, जिसे अकसर नजरअंदाज कर दिया जाता है। डायबिटीज से पीड़ित हर 3 में से 1 वयस्क किडनी से संबंधित समस्याओं से पीड़ित है।</p>



<p>डायबिटीज और किडनी फंक्शन के बीच यह कनेक्शन एक बड़ी चिंता का कारण है। ग्लूकोज लेवल बढ़ने से शरीर के कई अंग खासतौर से कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम और किडनी के खराब होने सबसे ज्यादा खतरा होता है। किडनी के डैमेज होने की स्थिति को डायबिटीक नेफ्रोपैथी कहते हैं। डायबिटीक नेफ्रोपैथी एक तरह का क्रोनिक किडनी डिजीज़ है। हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की समस्या से परेशान लोगों को इसका ज्यादा खतरा होता है।&nbsp;</p>



<p>किडनी शरीर के आंतरिक संतुलन को बनाए रखने और ब्लड से अपशिष्ट व अतिरिक्त तरल पदार्थों को फ़िल्टर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डायबिटीज में ब्लड शुगर लंबे समय तक हाई रहने से किडनी की नाजुक फ़िल्टर इकाइयों को नुकसान होता है, जिन्हें नेफ्रॉन के रूप में जाना जाता है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">इन तरीकों से डैमेज होती है किडनी</h2>



<h2 class="wp-block-heading">ग्लोमेरुलर डैमेज</h2>



<p>हाई ब्लड शुगर का लेवल ग्लोमेरुली (किडनी के नेफ्रॉन के भीतर छोटी ब्लड वेसेल्स) को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे अपशिष्ट पदार्थों को फ़िल्टर करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">पुरानी सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव</h2>



<p>ये सूजन संबंधी प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर करके और फ्री रेडिकल्स के निर्माण को बढ़ावा देकर किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट (एजीई) का संचय</h2>



<p>हाई ब्लड शुगर के स्तर पर प्रोटीन के लंबे समय तक संपर्क में रहने से एजीई का फॉर्मेशन होता है, जो किडनी फंक्शन को ख़राब कर सकता है और सूजन व फाइब्रोसिस का कारण बन सकता है।&nbsp;</p>



<p>डायबिटीज के साथ अक्सर हाई ब्लड प्रेशर भी रहता है, जिससे दोनों के बीच एक नुकसानदायक तालमेल बनता है, जो किडनी के नुकसान को और बढ़ा देता है। बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी में पहले से ही डैमेज ब्लड वेसेल्स पर एक्स्ट्रा प्रेशर डालता है, जिससे डायबिटीज संबंधी नेफ्रोपैथी की गति और तेज हो जाती है। </p>



<p>जैसे-जैसे डायबिटीज किडनी को नुकसान पहुंचाता रहता है, अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को फ़िल्टर करने की उनकी क्षमता कम हो जाती है। किडनी की कार्यक्षमता में इस कमी से रक्त में विषाक्त पदार्थों का संचय हो सकता है, जिससे कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। डायबेटिक नेफ्रोपैथी वाले व्यक्तियों को दिल के दौरे और स्ट्रोक सहित हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading">शीघ्र इलाज और मैनेजमेंट</h2>



<p><strong>डॉ. संजीव गुलाटी, प्रेसिडेंट, इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी और प्रिंसिपल डायरेक्&#x200d;टर, नेफ्रोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, दिल्ली&nbsp;</strong>का कहना है कि, &#8216;डायबेटिक किडनी की बीमारी एक साइलेंट किलर है। डायबेटिक किडनी की बीमारी वाले अधिकांश रोगियों में लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसलिए, यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन रेशियो (यूएसीआर) और अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्टरेशन रेट (ईजीएफआर) जैसे टेस्ट के जरिए किडनी की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी से इस रोग शीघ्र पता लगाने और समय पर इसके उपचार में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, दवा, खानपान और जीवनशैली में बदलाव के जरिए डायबिटीज के रोगियों में ब्लड शुगर के स्तर पर नियंत्रण डायबेटिक किडनी की बीमारी को रोकने और मैनेज करने के लिए महत्वपूर्ण है। हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जीवनशैली में बदलाव और दवाएं ब्लड प्रेशर को सही सीमा के भीतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।&#8217;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>पिता ने बताया किस बीमारी से दुनिया छोड़ गईं दंगल गर्ल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 18 Feb 2024 07:33:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[दंगल गर्ल]]></category>
		<category><![CDATA[बीमारी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="425" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-1-13-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-1-13.jpg 618w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-1-13-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-1-13-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />दंगल फिल्म में पहलवान बबीता फोगाट के बचपन का रोल निभाने वाली सुहानी भटनागर का शनिवार को महज 19 वर्ष की उम्र में दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। बताया गया है कि दो माह पहले सुहानी के हाथ में सूजन आ गई थी और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने लगे।&#160; फिर डर्मेटोमायोसिटिस बीमारी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="425" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-1-13-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-1-13.jpg 618w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-1-13-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/02/haryana-1-13-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>दंगल फिल्म में पहलवान बबीता फोगाट के बचपन का रोल निभाने वाली सुहानी भटनागर का शनिवार को महज 19 वर्ष की उम्र में दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। बताया गया है कि दो माह पहले सुहानी के हाथ में सूजन आ गई थी और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने लगे।&nbsp;</p>



<p>फिर डर्मेटोमायोसिटिस बीमारी की चपेट में आकर शरीर में पानी (फ्ल्यूड) भरने के कारण फेफड़े खराब हो गए। शाम को अजरौंदा श्मशान घाट में सुहानी का दाह संस्कार किया गया। छह वर्ष की उम्र में दंगल गर्ल बनकर आईं सुर्खियों में सेक्टर 17 निवासी सुहानी भटनागर ने कई विज्ञापनों में भी काम किया।</p>



<p><strong>10 दिन से एम्स में थी भर्ती</strong><br>अभी मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रही थीं। अभिनेता आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस ने भी संवेदनाएं जताई हैं। पिता पुनीत भटनागर ने बताया कि हाथ पर लाल चकत्ते होने पर उन्हें लगा एलर्जी हो गई है, जिसके बाद फरीदाबाद के कई अस्पतालों में इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर दस दिन पहले दिल्ली एम्स में भर्ती कराया था।</p>



<p><strong>दो माह पहले ही हुई थी डर्मेटोमायोसिटिस नामक बीमारी</strong><br>पिता पुनीत भटनागर ने बताया कि उनकी बेटी को डर्मेटोमायोसिटिस नामक बीमारी थी। दो माह पहले बेटी के हाथ पर लाल दाग बन गया था। उन्हें लगा कि बेटी को एलर्जी हुई है जिसके बाद उन्होंने फरीदाबाद के कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन के किसी भी अस्पताल के डॉक्टर बीमारी को नहीं पकड़ पाए।</p>



<p>जब हालत ज्यादा बिगड़ने लगी तो बीते मंगलवार को उन्होंने अपनी बेटी को दिल्ली के एम्स अस्पताल में इलाज की भर्ती कराया था, लेकिन वहां भी उनकी बेटी की हालत में सुधार नहीं हुआ और धीरे-धीरे शरीर में पानी भरने लगा। इसके चलते फेफड़े खराब हो गए और इस दुनिया को अलविदा कह दिया।</p>



<p><strong>अधूरा रह गया बेटी का सपना</strong><br>मां पूजा भटनागर ने बताया कि उनकी बेटी को शुरू से मॉडलिंग और एक्टिंग करने का शौक था। इसी के चलते उनकी बेटी को दिल्ली में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। जहां पर 1000 बच्चों में से उनकी बेटी के साथ-साथ एक और बच्ची का चयन हुआ था। जिसके बाद बेटी ने दंगल फिल्म में बबीता फोगाट का रोल अदा किया था। </p>



<p>उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को एक्टिंग का शौक था बावजूद उसके उसने मास कम्युनिकेशन (जर्नलिज्म) को चुना था। वह फरीदाबाद की मानव रचना शिक्षण संस्थान में द्वितीय वर्ष में पढ़ रही थी। उसका सपना था कि वह पढ़ाई के बाद अपने एक्टिंग के करियर को आगे बढ़ाएगी, लेकिन उनकी बेटी का सपना पूरा नहीं हो पाया। उनकी मौत से पूरा परिवार बेहद दुखी है।</p>
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		<title>बीमारी, संकट के लिए कल्याणकारी है नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व महानवमी पूजा, जाने महत्व</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Apr 2021 05:58:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जाने महत्व]]></category>
		<category><![CDATA[बीमारी]]></category>
		<category><![CDATA[संकट के लिए कल्याणकारी है नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व महानवमी पूजा]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="441" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc-300x214.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व महानवमी पूजन का बड़ा ही महत्व है। इस अष्टमी व नवमी की कल्याणप्रद, शुभ बेला श्रद्धालु भक्तजनों को मनोवांछित फल देकर नव दिनों तक लगातार चलने वाले व्रत व पूजन महोत्सव के संपन्न होने के संकेत देती है। मां दुर्गा की आराधना से व्यक्ति एक सद्गृहस्थ जीवन के अनेक शुभ लक्षणों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="441" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc-300x214.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p>नवरात्रि में दुर्गाष्टमी व महानवमी पूजन का बड़ा ही महत्व है। इस अष्टमी व नवमी की कल्याणप्रद, शुभ बेला श्रद्धालु भक्तजनों को मनोवांछित फल देकर नव दिनों तक लगातार चलने वाले व्रत व पूजन महोत्सव के संपन्न होने के संकेत देती है। मां दुर्गा की आराधना से व्यक्ति एक सद्गृहस्थ जीवन के अनेक शुभ लक्षणों धन, ऐश्वर्य, पत्नी, पुत्र, पौत्र व स्वास्थ्य से युक्त हो जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष को भी सहज ही प्राप्त कर लेता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-437215 aligncenter" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc.jpg" alt="" width="700" height="500" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc.jpg 700w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2021/04/sxczc-300x214.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 700px) 100vw, 700px" /></p>
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<div id="div-gpt-ad-1593067077351-0" data-google-query-id="CImB6MuRjPACFZlQfQodeOYLLA">
<div>इतना ही नहीं बीमारी, महामारी, बाढ़, सूखा, प्राकृतिक उपद्रव व शत्रु से घिरे हुए किसी राज्य, देश व संपूर्ण विश्व के लिए भी मां भगवती की आराधना परम कल्याणकारी है।</div>
<div></div>
<div>इस पूजा में पवित्रता, नियम व संयम तथा ब्रह्मचर्य का विषेश महत्व है। पूजा के समय घर व देवालय को तोरण व विविध प्रकार के मांगलिक पत्र, पुष्पों से सजाना चाहिए तथा स्थापित समस्त देवी-देवताओं का आवाह्‌न उनके &#8221;नाम मंत्रों&#8221; द्वारा कर षोडषोपचार पूजा करनी चाहिए जो विशेष फलदायनी है। भविष्य पुराण के उत्तर-पूर्व में महानवमी व दुर्गाष्टमी पूजन के विषय में भगवान श्रीकृष्ण से धर्मराज युधिष्ठिर का संवाद मिलता है। जिसमें नवमी व दुर्गाष्टमी पूजन का स्पष्ट उल्लेख है।</div>
<div>
<div>यह पूजन प्रत्येक युगों, सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग तथा कल्पों व मन्वन्तरों आदि में भी प्रचलित था। मां भगवती सम्पूर्ण जगत्‌ में परमशक्ति अनन्ता, सर्वव्यापिनी, भावगम्या, आद्या आदि नाम से विख्यात हैं जिन्हें माया, कात्यायिनी, काली, दुर्गा, चामुण्डा, सर्वमंगला, शंकरप्रिया, जगत जननी, जगदम्बा, भवानी आदि अनेक रूपों में देव, दानव, राक्षस, गन्धर्व, नाग, यक्ष, किन्नर, मनुष्य आदि अष्टमी व नवमी को पूजते है।</div>
<div></div>
<div>मां भगवती का पूजन अष्टमी व नवमी को करने से कष्ट, दुःख मिट जाते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती। यह तिथि परम कल्याणकारी, पवित्र, सुख को देने वाली और धर्म की वृद्धि करने वाली है।</div>
<div></div>
<div>अनेक प्रकार मंत्रोपचार से विधि प्रकार पूजा करते हुए भगवती से सुख, समृद्धि, यश, कीर्ति, विजय, आरोग्यता की कामना करनी चाहिए। नवरात्रि के आठवें दिन की देवी मां महागौरी हैं। परम कृपालु मां महागौरी कठिन तपस्या कर गौरवर्ण को प्राप्त कर भगवती महागौरी के नाम से संपूर्ण विश्व में विख्यात हुई। भगवती महागौरी की आराधना सभी मनोवांछित को पूर्ण करने वाली और भक्तों को अभय, रूप व सौदर्य प्रदान करने वाली है। अर्थात्‌ शरीर में उत्पन्न नाना प्रकार के विष व्याधियों का अंत कर जीवन को सुख-समृद्धि व आरोग्यता से पूर्ण करती हैं।</div>
<div></div>
<div><strong>मां की शास्त्रीय पद्धति से पूजा करने वाले सभी रोगों से मुक्त हो जाते हैं और धन वैभव संपन्न होते हैं।</strong></div>
<div></div>
<div>नौवें दिन की दुर्गा सिद्धिदात्री हैं यह दिन मां सिद्धिदात्री दुर्गा की पूजा के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। मां भगवती ने नौवें दिन देवताओं और भक्तों के सभी वांछित मनोरथों को सिद्ध कर दिया, जिससे मां सिद्धिदात्री के रूप में संपूर्ण विश्व में व्याप्त हुई। परम करूणामयी सिद्धिदात्री की अर्चना व पूजा से भक्तों के सभी कार्य सिद्ध होते हैं। बाधाएं समाप्त होती हैं एवं सुख व मोक्ष की प्राप्ति होती है।</div>
<div></div>
<div>इस प्रकार अष्टमी को विविध प्रकार से भगवती जगदंबा का पूजन कर रात्रि को जागरण करते हुए भजन, कीर्तन, नृत्यादि उत्सव मनाना चाहिए तथा नवमी को विविध प्रकार से पूजा-हवन कर नौ कन्याओं को भोजन खिलाना चाहिए और हलुआ आदि प्रसाद वितरित करना चाहिए और पूजन हवन की पूर्णाहुति कर दशमी तिथि को व्रती को व्रत खोलना (पारण) चाहिए।</div>
<div></div>
<div>यदि नवमी तिथि की वृद्धि हो तो एक नवमी को व्रत कर दूसरे नवमी में अर्थात्‌ दसवें दिन पारण करने का विधान शास्त्रों में मिलता है। जो सभी प्रकार के अमंगल को दूर कर जीवन को सुखद व सुंदर बना देता है।</div>
</div>
</div>
</div>
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