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		<title>चीन-यूएस के बाद बिजली उत्पादन में दुनिया में सबसे आगे निकला भारत</title>
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		<pubDate>Fri, 20 Jun 2025 06:06:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[बिजली उत्पादन]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-20-113520-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-20-113520.png 733w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-20-113520-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली उत्पादन के इस विस्तार का प्रमुख चालक अक्षय ऊर्जा की ओर मजबूत झुकाव है, क्योंकि स्वच्छ ऊर्जा और विशेष रूप से सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) परियोजनाओं में बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत में गैर-जीवाश्म ऊर्जा परियोजनाओं में किए गए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="353" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-20-113520-large.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-20-113520.png 733w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-20-113520-medium.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<pre class="wp-block-code"><code> भारत पिछले पांच वर्षों में बिजली उत्पादन क्षमता के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। बिजली उत्पादन वृद्धि में अब सिर्फ अमेरिका और चीन ही भारत से आगे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में कई कारणों से बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। इनमें वाणिज्यिक एवं आवासीय स्थानों का विस्तार, एयर कंडीशनर (एसी) व अन्य घरेलू उपकरणों के इस्तेमाल में वृद्धि और उद्योगों की बढ़ती मांग शामिल है। इस मांग को पूरा करने के लिए भारत में सभी ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन बढ़ाया गया है।</code></pre>



<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली उत्पादन के इस विस्तार का प्रमुख चालक अक्षय ऊर्जा की ओर मजबूत झुकाव है, क्योंकि स्वच्छ ऊर्जा और विशेष रूप से सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) परियोजनाओं में बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत में गैर-जीवाश्म ऊर्जा परियोजनाओं में किए गए कुल निवेश में सौर पीवी की आधे से अधिक हिस्सेदारी रही। 2024 में भारत के बिजली क्षेत्र में किए गए कुल निवेश का 83 फीसदी हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा पहलों पर खर्च किया गया।</p>



<p><strong>निवेश बढ़ाने में सरकारी नीतियों की बड़ी भूमिका</strong><br>भारत के बिजली क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ाने में सरकारी नीतियों का अहम योगदान है, जो बिजली उत्पादन (परमाणु ऊर्जा को छोड़कर) और ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचे से जुड़े सभी क्षेत्रों में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति देती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) में पिछले दो वर्षों में गिरावट देखी गई है। इस गिरावट का कारण व्यापक आर्थिक और क्षेत्र आधारित चुनौतियों का मिश्रण है। हालांकि, भारत के बिजली क्षेत्र में दीर्घकालिक रुझान सकारात्मक बना हुआ है।</p>



<p><strong>स्वच्छ ऊर्जा के लिए मिला सर्वाधिक फंड</strong><br>आईईए ने रिपोर्ट में दावा किया कि भारत 2024 में स्वच्छ ऊर्जा के लिए विकास वित्त संस्थान (डीएफआई) से मिलने वाली फंडिंग का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता था। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भारत को करीब 2.4 अरब डॉलर मिले। भारत के बिजली क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लगातार बढ़ रहा है, जो 2023 में 5 अरब डॉलर पहुंच गया। यह कोविड-19 महामारी से पूर्व के निवेश से लगभग दोगुना है।</p>



<p><strong>50 लाख टन हरित हाइड्रोजन लक्ष्य पाने के लिए सृजित करनी होगी व्यापक मांग</strong><br>देश में 2030 तक 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लक्ष्य को पाने के लिए व्यापक स्तर पर मांग सृजित करना महत्वपूर्ण है। बेन एंड कंपनी, उद्योग मंडल सीआईआई और रॉकी माउंटेन इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत रणनीतिक क्षेत्रों के चयन, मिश्रण, सार्वजनिक खरीद का लाभ उठाने और निर्यात अवसरों के साथ तालमेल बिठाकर इस लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। हरित हाइड्रोजन को अपनाने से जुड़े जोखिम से निपटने के लिए कच्चे माल की लागत को कम करने समेत कई उपाय करने होंगे।</p>



<p>रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 तक तेल शोधन संयंत्रों से हरित हाइड्रोजन की मांग 20 लाख टन, उर्वरक क्षेत्र से 9 लाख टन और पाइप वाली प्राकृतिक गैस से एक लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है। निर्यात के मोर्चे पर हरित हाइड्रोजन निर्यात आठ से 11 लाख टन के बीच उत्पन्न हो सकता है।</p>
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		<title>दिल्ली : फसलों के साथ अब हाइड्रोपोनिक बागवानी से होगा बिजली उत्पादन</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Jul 2024 05:33:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[बिजली उत्पादन]]></category>
		<category><![CDATA[हाइड्रोपोनिक बागवानी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-514.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-514.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-514-300x169.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />प्रोजेक्ट से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रोजेक्ट में जैव रासायनिक प्रतिक्रिया से मिले इलेक्ट्रॉन से बिजली का उत्पादन होता है। तकनीक प्लांट माइक्रोबियल फ्यूल सेल (पीएमएफसी) की है। इसमें पौधों और बैक्टीरिया के बीच की साझेदारी का उपयोग करके सूर्य के प्रकाश को बिजली में बदला जाता है। फसलों के साथ हाइड्रोपोनिक बागवानी से अब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-514.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-514.png 737w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-514-300x169.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>प्रोजेक्ट से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रोजेक्ट में जैव रासायनिक प्रतिक्रिया से मिले इलेक्ट्रॉन से बिजली का उत्पादन होता है। तकनीक प्लांट माइक्रोबियल फ्यूल सेल (पीएमएफसी) की है। इसमें पौधों और बैक्टीरिया के बीच की साझेदारी का उपयोग करके सूर्य के प्रकाश को बिजली में बदला जाता है।</p>



<p>फसलों के साथ हाइड्रोपोनिक बागवानी से अब बिजली का उत्पादन होगा। इसके लिए नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनएसयूटी) ने एक प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। इसमें कैंपस के भीतर करीब 709 वर्ग मीटर में 231 मेगावाट प्रति घन मीटर बिजली पैदा हो रही है। प्रोजेक्ट से जुड़े शोधार्थियों का कहना है कि दिल्ली में अपनी तरह का यह पहला प्रोजेक्ट अभी प्रायोगिक स्तर पर है। नतीजे बेहतर आने पर इसका विस्तार किया जाएगा।</p>



<p>प्रोजेक्ट से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रोजेक्ट में जैव रासायनिक प्रतिक्रिया से मिले इलेक्ट्रॉन से बिजली का उत्पादन होता है। तकनीक प्लांट माइक्रोबियल फ्यूल सेल (पीएमएफसी) की है। इसमें पौधों और बैक्टीरिया के बीच की साझेदारी का उपयोग करके सूर्य के प्रकाश को बिजली में बदला जाता है। पौधे सूर्य की ऊर्जा का 40 फीसदी खुद के लिए उपयोग करते हैं। बची 60 फीसदी ऊर्जा को बैक्टीरिया की मदद से तोड़ा जाता है। इसी से इलेक्ट्रॉन निकलता है। प्रोजेक्ट में अभी 281 मेगावाट प्रति घन मीटर बिजली पैदा हो रही है।</p>



<p><strong>शोध को बढ़ावा देना मकसद<br></strong>प्रोजेक्ट बागवानी शिक्षा और नवाचार की दिशा में बड़ी पहल है। इसका फायदा उद्यमियों के साथ किसानों को भी मिलेगा। वहीं, बागवानी फसलों के लिए हाइड्रोपोनिक खेती के तरीकों पर शोध और विकास भी होगा। इसमें अभी सब्जी, औषधीय पौधे, फूल के पौधे, हरे पत्ते वाली सब्जी व गेंहू जैसी फसलों का उत्पादन होता है। इसके जरिए प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और पारिस्थितिकी तंत्र को साफ-सुथरा रखा जा सकेगा।</p>



<p><strong>दो पाठ्यक्रम शुरू किए<br></strong>इस प्रोजेक्ट का कामयाब बनाने के लिए एनएसयूटी ने दो नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए हैं। इसमें स्नातक स्तर पर हाइड्रोपोनिक्स प्रौद्योगिकी और स्नातकोत्तर स्तर पर कंट्रोल इनवायरमेंट इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम है। एनएसयूटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पाठ्यक्रम में जल्द ही अन्य संस्थानों के छात्रों, नवोदित उद्यमियों और स्थानीय किसानों के लिए इंटर्नशिप और प्रमाणपत्र कार्यक्रमों के रूप में पेश किए जाएंगे। हाइड्रोपोनिक्स प्रशिक्षण और अनुसंधान केंद्र सतत कृषि और उद्यमशीलता विकास को बढ़ावा दे रहा है।</p>



<p><strong>ऐसे होता है बायो बिजली का उत्पादन<br></strong>विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया से पौधे भोजन बनाते हैं। इसमें वह करीब 40 फीसदी ऊर्जा का इस्तेमाल अपने लिए करते हैं, जबकि 60 फीसदी हिस्सा जड़ों के आसपास चला जाता है। पौधे के लिए इसका खास उपयोग नहीं है। प्रोजेक्ट में फोकस इसी 60 फीसदी पर रखा गया है। इसका उपयोगी बनाने के लिए ऐसे बैक्टीरिया का इस्तेमाल होता है, जो इस ऊर्जा का तोड़ सकें। इससे जो इलेक्ट्रान निकलता है, उसी का पीएमएफसी में इस्तेमाल होता है।</p>



<p>अब तक लगभग 1200 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। पीएमएफसी के जरिये उत्पादन होने वाली बायो बिजली का उपयोग वहां लगी हल्की रोशनी के बल्ब को जगमग किया जा रहा है। इसकी क्षमता बढ़ाने पर भी शोध किया जा रहा है। इस तकनीक में फसल उत्पादन करना किफायती है।<strong> &#8211; डॉ. अखिलेश दुबे, सहायक प्रोफेसर, एनएसयूटी</strong></p>
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