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	<title>बासमती चावल &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>बासमती चावल &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>US-ईरान युद्ध का असर: बासमती चावल निर्यात पर ब्रेक, कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर अटके</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 07:57:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[बासमती चावल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="360" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/unnamed-file-27.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/unnamed-file-27.jpg 1009w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/unnamed-file-27-300x175.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/unnamed-file-27-768x448.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />कारोबारियों का कहना है कि जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और बीमा कंपनियों की ओर से जोखिम बढ़ने के कारण कई कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर ही रुक गए हैं। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई देने लगा है और मंडियों में बासमती के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और &#8230;]]></description>
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<p>कारोबारियों का कहना है कि जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और बीमा कंपनियों की ओर से जोखिम बढ़ने के कारण कई कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर ही रुक गए हैं। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई देने लगा है और मंडियों में बासमती के दामों में गिरावट दर्ज की गई है।</p>



<p>पश्चिम एशिया में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब बासमती चावल के निर्यात पर भी दिखाई देने लगा है। इसका सीधा प्रभाव प्रमुख चावल व्यापार केंद्रों पर पड़ा है, जिनमें कैथल भी शामिल है। यहां के चावल कारोबारियों का कहना है कि निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ गई है और कई कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर ही अटके हुए हैं, जिससे व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है।</p>



<p>भारत से बासमती चावल का बड़ा हिस्सा खाड़ी और पश्चिम एशियाई देशों में निर्यात किया जाता है। इनमें सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन प्रमुख हैं। मौजूदा हालात में युद्ध के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से निर्यात प्रक्रिया में रुकावट आ रही है। कारोबारियों के अनुसार सबसे अधिक असर ईरान को होने वाले निर्यात पर पड़ा है। ईरान भारत का बड़ा खरीदार है और हर साल वहां बड़ी मात्रा में बासमती चावल भेजा जाता है।</p>



<p>कारोबारियों का कहना है कि जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने और बीमा कंपनियों की ओर से जोखिम बढ़ने के कारण कई कंसाइनमेंट बंदरगाहों पर ही रुक गए हैं। इसका असर घरेलू बाजार में भी दिखाई देने लगा है और मंडियों में बासमती के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। यदि निर्यात जल्द सामान्य नहीं हुआ तो किसानों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>



<p><strong>कारोबारियों के अनुसार<br></strong>जिले से हर साल बड़ी मात्रा में बासमती चावल विदेशों में भेजा जाता है। आमतौर पर कैथल और आसपास के क्षेत्रों से तैयार चावल को करनाल और अन्य निर्यात केंद्रों के जरिए विदेश भेजा जाता है। अब भुगतान रुकने की भी आशंका बनी हुई है।&nbsp;<strong>-अमित गोयल, स्थानीय व्यापारी।</strong></p>



<p>युद्ध के कारण सबसे बड़ी समस्या भुगतान में देरी की है। कई देशों से आने वाली रकम समय पर नहीं मिल रही, जिससे व्यापारियों की पूंजी फंस रही है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो छोटे व्यापारियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।&nbsp;<strong>-अजय, चावल कारोबारी।</strong></p>



<p>पश्चिम एशिया में युद्ध क्षेत्र के आसपास से गुजरने वाले जहाजों के बीमा को लेकर भी परेशानी आ रही है। बीमा कंपनियां आसानी से कवर नहीं दे रही हैं या प्रीमियम काफी बढ़ गया है। ऐसे में निर्यात करना जोखिम भरा होता जा रहा है।<strong>&nbsp;-विवेक, चावल कारोबारी।</strong></p>
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		<title>सरकार ने प्याज और बासमती चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य सीमा हटाई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Sep 2024 09:59:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[प्याज]]></category>
		<category><![CDATA[बासमती चावल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="372" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/बासमती-780x470-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/बासमती-780x470-1.jpg 780w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/बासमती-780x470-1-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/बासमती-780x470-1-768x463.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सरकार ने शुक्रवार को प्याज और बासमती चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की सीमाओं को हटाने का निर्णय लिया है। यह कदम निर्यात को प्रोत्साहन देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्याज पर पहले 550 डॉलर प्रति टन का एमईपी लागू था, जिसे अब हटा दिया गया है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="372" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/बासमती-780x470-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/बासमती-780x470-1.jpg 780w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/बासमती-780x470-1-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/बासमती-780x470-1-768x463.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सरकार ने शुक्रवार को प्याज और बासमती चावल पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) की सीमाओं को हटाने का निर्णय लिया है। यह कदम निर्यात को प्रोत्साहन देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्याज पर पहले 550 डॉलर प्रति टन का एमईपी लागू था, जिसे अब हटा दिया गया है। इसी तरह, बासमती चावल के निर्यात के लिए 950 डॉलर प्रति टन की एमईपी सीमा को भी समाप्त कर दिया गया है।</p>



<p>इस निर्णय का विशेष महत्व आगामी महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों के संदर्भ में है। महाराष्ट्र प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य है, जबकि हरियाणा बासमती चावल के प्रमुख उत्पादकों में से है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि इस कदम से निर्यात बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में सुधार होगा।</p>



<p>सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए हैं। दिल्ली और मुंबई में प्याज की रियायती दरों पर खुदरा बिक्री शुरू की गई है, जिसमें प्याज 35 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। सरकार का 4.7 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है, जो कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।</p>



<p>यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब प्याज के खुदरा मूल्य में वृद्धि हो रही है और सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की उपलब्धता के सकारात्मक रहने की उम्मीद जताई है।</p>
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		<title>पंजाब: बासमती चावल के निर्यात से किसानों की बल्ले-बल्ले…</title>
		<link>https://livehalchal.com/panjab/526514</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Nov 2023 06:36:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[बासमती चावल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="606" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/Capture-16.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/Capture-16.png 606w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/Capture-16-300x170.png 300w" sizes="auto, (max-width: 606px) 100vw, 606px" />पूरे निर्यात में 35 फीसदी भागीदारी पंजाब के किसानों की थी। पंजाब बासमती निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान अशोक सेठी ने कहा कि बासमती चावल का निर्यात बढ़ रहा है और बढ़ती मांग के कारण व्यापारी अत्यधिक सक्रिय हैं। पंजाब के किसानों को इस बार काफी मुनाफा बासमती से हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="606" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/Capture-16.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/Capture-16.png 606w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/11/Capture-16-300x170.png 300w" sizes="auto, (max-width: 606px) 100vw, 606px" />
<p>पूरे निर्यात में 35 फीसदी भागीदारी पंजाब के किसानों की थी। पंजाब बासमती निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान अशोक सेठी ने कहा कि बासमती चावल का निर्यात बढ़ रहा है और बढ़ती मांग के कारण व्यापारी अत्यधिक सक्रिय हैं। पंजाब के किसानों को इस बार काफी मुनाफा बासमती से हुआ है।</p>



<p>केंद्र सरकार की ओर से बासमती पर न्यूनतम निर्यात मूल्य 950 डॉलर प्रति टन करने का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। चालू वित्त वर्ष में बासमती का निर्यात 18,310.35 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें 34 फीसदी से अधिक हिस्सा पंजाब के किसानों का है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंबे दाने वाली प्रीमियम बासमती किस्मों की बढ़ती कीमतें कारण बताई जा रही हैं।</p>



<p>देश से 20.10 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) निर्यात हुआ है। इसकी तुलना में 2022-23 की इसी अवधि में 18.75 एलएमटी की शिपिंग के साथ 15,452.44 करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात हुआ। इसी तरह, 2021-22 में, भारत ने 17.02 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिससे 10,690.03 करोड़ रुपये की आय हुई थी।</p>



<p>पूरे निर्यात में 35 फीसदी भागीदारी पंजाब के किसानों की थी। पंजाब बासमती निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान अशोक सेठी ने कहा कि बासमती चावल का निर्यात बढ़ रहा है और बढ़ती मांग के कारण व्यापारी अत्यधिक सक्रिय हैं। पंजाब के किसानों को इस बार काफी मुनाफा बासमती से हुआ है। केंद्र सरकार ने जब बासमती पर एमईपी 1200 डॉलर प्रति टन रखी हुई थी तो बासमती की खरीद काफी गिर गई थी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान की बासमती का डंका बजने लगा था।</p>



<p>हालात यह थे कि पंजाब में बासमती की फसल की खरीद 3 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई थी, लेकिन जैसे ही केंद्र सरकार ने एमईपी 950 डॉलर प्रति टन की तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारी बासमती की कीमतें गिर गईं, जिसका नतीजा यह हुआ कि डिमांड बढी और पारंपरिक बासमती की कीमतें 6,000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक तक पहुंच गईं, जबकि पूसा 1121, 1718 और मूछल जैसी अन्य प्रीमियम किस्मों को 4,500 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास दाम मिले।</p>



<p>पंजाब से 140 देशों में होता है निर्यात<br>पंजाब के किसान 140 से अधिक देशों में बासमती चावल भेजकर निर्यात में लगभग 35 फीसदी का योगदान करते हैं। पंजाब में इस साल 20 फीसदी बासमती का अधिक उत्पादन हुआ है। पंजाब कृषि विभाग ने इसकी खेती के लिए 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य तय किया था, जो पिछले साल के 4.94 लाख हेक्टेयर से करीब 20 फीसदी ज्यादा है।</p>



<p>बासमती उगाने वाले किसान बलवंत सिंह का कहना है कि इस साल पहले तो घबराहट हो रही थी, क्योंकि निर्यातकों ने हाथ खड़े कर दिए थे, लेकिन जैसे ही केंद्र सरकार ने एमईपी 950 डॉलर प्रति टन की, उसके बाद बासमती 5 हजार रुपये तक पहुंच गई और इसके बाद अच्छी फसल 6 हजार तक भी बिकी है।</p>



<p>बासमती की फसल बचाती है पानी<br>पंजाब कृषि विभाग के आंकडों के अनुसार, इस वर्ष राज्य में लगभग 6 लाख हेक्टेयर भूमि बासमती की खेती के लिए समर्पित की गई है। यह फसल 110 दिन में तैयार हो जाती है। यानी धान की खेती से एक माह पहले। इस तरह से बासमती की खेती में धान के मुकाबले 30 फीसदी पानी की बचत होती है।</p>
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