फाइटर जेट – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Sun, 18 Jan 2026 05:20:03 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg फाइटर जेट – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32  सुखोई-57 के लिए रास्ता खुला, रूस के फाइटर जेट पर विचार https://livehalchal.com/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%88-57-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be/655167 Sun, 18 Jan 2026 05:20:03 +0000 https://livehalchal.com/?p=655167 भारत ने 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए पहला कदम आगे बढ़ाया है, लेकिन रूस के सुखोई-57 को शामिल करने का विकल्प अभी भी खुला है। राफेल तात्कालिक जरूरतों के लिए चुना गया है, जबकि सुखोई-57 भविष्य की उच्च-तीव्रता वाले युद्धों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। इस मामले पर विशेषज्ञ क्या कह रहे …]]>

भारत ने 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए पहला कदम आगे बढ़ाया है, लेकिन रूस के सुखोई-57 को शामिल करने का विकल्प अभी भी खुला है। राफेल तात्कालिक जरूरतों के लिए चुना गया है, जबकि सुखोई-57 भविष्य की उच्च-तीव्रता वाले युद्धों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। इस मामले पर विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं, पढ़िए रिपोर्ट-

फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की दिशा में पहला कदम बढ़ने के बावजूद रूस के सुखोई-57 को शामिल करने का विकल्प अभी भी खुला है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राफेल प्रस्ताव को मंजूरी मिलने का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि सुखोई-57 को लेकर विचार समाप्त हो गया है। सरकार इस विकल्प पर अब भी मंथन कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, राफेल और सुखोई-57 की भूमिका और उद्देश्य अलग-अलग हैं। राफेल एक अत्याधुनिक 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसे भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वॉड्रन संख्या को तेजी से पूरा करने और तात्कालिक परिचालन जरूरतों के लिए चुना जा रहा है। इसके विपरीत, सुखोई-57 पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है, जिसे भविष्य की उच्च तीव्रता वाली लड़ाइयों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

फिलहाल वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की केवल 29 स्क्वॉड्रन बची हैं, जबकि दोतरफा युद्ध की चुनौती को देखते हुए 42 स्क्वॉड्रन की जरूरत मानी जाती है। राफेल सौदा इसी तत्काल संकट से निपटने के लिए आगे बढ़ाया गया है। पहले से सेवा में होने के कारण इसके इंडक्शन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज हो सकती है। सुखोई-57 को दीर्घकालिक रणनीतिक तैयारी के नजरिए से उपयोगी माना जा रहा है। ऐसे में भारत सीमित संख्या में इसकी कुछ स्क्वॉड्रन शामिल करने पर विचार कर सकता है।

राफेल और सुखोई-57 की क्षमताओं में अंतर
राफेल अपनी बहुउद्देश्यीय क्षमता, भरोसेमंद एवियोनिक्स, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सटीक हथियार प्रणालियों के लिए जाना जाता है। यह हवा से हवा, हवा से जमीन और परमाणु डिलीवरी जैसी कई भूमिकाएं निभाने में सक्षम है, जिससे मौजूदा हालात में यह बेहद प्रभावी साबित होता है। वहीं, सुखोई-57 अपनी विशिष्ट पांचवीं पीढ़ी की क्षमताओं के कारण अहम माना जा रहा है। स्टेल्थ डिजाइन, सुपरक्रूज क्षमता, अत्याधुनिक सेंसर फ्यूजन, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और एआई आधारित प्रणालियों से लैस यह विमान दुश्मन के एयर डिफेंस नेटवर्क में गहराई तक घुसकर हमला करने और बिना पकड़े वापस लौटने की क्षमता रखता है। चीन जैसे देशों द्वारा पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ विमानों की तैनाती के बीच इन क्षमताओं को सामरिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञ बोले-114 राफेल की डील जल्द पूरी की जानी चाहिए
रक्षा मामलों के विशेषज्ञ और सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज के पूर्व महानिदेशक एयर मार्शल अनिल चोपड़ा का कहना है कि सामरिक जरूरतों को देखते हुए 114 राफेल की डील जल्द पूरी की जानी चाहिए। साथ ही रूस से सुखोई-57 की कुछ स्क्वॉड्रन लेने पर भी विचार हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमका) कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सुखोई-57 का देश में निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।

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देखे फोटो: फाइटर जेट चलाएगी अब 21 साल की ये कश्मीरी लड़की, इनके अन्दर है ये खास हुनर… https://livehalchal.com/%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%8f%e0%a4%97%e0%a5%80-21-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%87/66845 Thu, 27 Jul 2017 11:41:14 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=66845 लड़कियां सिर्फ गोल रोटियां और बिरयानी पकाने के लिए नहीं बनीं, बल्कि उचित मौके मिलने पर वह हवा में उड़ कर अपनी चमक हर ओर बिखेर सकती हैं. कश्मीर की रहने वाली आयशा अजीज ने यह बात साबित कर दी है. बड़ी बिहार में बड़ा सियासी तूफान… नितीश किसी भी वक्त उठा सकते है ये …]]>

लड़कियां सिर्फ गोल रोटियां और बिरयानी पकाने के लिए नहीं बनीं, बल्कि उचित मौके मिलने पर वह हवा में उड़ कर अपनी चमक हर ओर बिखेर सकती हैं. कश्मीर की रहने वाली आयशा अजीज ने यह बात साबित कर दी है.देखे फोटो: फाइटर जेट चलाएगी अब 21 साल की ये कश्मीरी लड़की, इनके अन्दर है ये खास हुनर...

बड़ी बिहार में बड़ा सियासी तूफान… नितीश किसी भी वक्त उठा सकते है ये बड़ा कदम…

जिस उम्र में युवा अपने भविष्य की योजना बनाते हैं और किस क्षेत्र में कदम रखना है, यह सोचते हैं, उसी उम्र में आयशा मिग-29 उड़ाने की तैयारी कर रही हैं.

 21 साल की आयशा सबसे कम उम्र में फाइटर जेट उड़ाने वाली पहली महिला बनने जा रही हैं. भारत में सबसे कम उम्र की पायलट होने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है. 

आयशा का कहना है कि वह अंतरिक्ष के किनारे तक पहुंचना चाहती हैं, इसलिए मिग 29 में उड़ान भरने के लिए रूसी एजेंसी से बात कर रही हैं. आयशा को हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान ही बॉम्बे फ्लाइंग क्लब से स्टूडेंट पायलट लाइसेंस मिला, तब वो 16 साल की थीं. 

इसके बाद साल 2012 में नासा से उन्होंने दो महीने का अंतरिक्ष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा किया. वह तीन भारतीयों में चुनी गई थीं. उनकी प्रेरणा भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स हैं.

आयशा अपनी सक्सेस का श्रेय फैमिली को देती हैं. कहती हैं कि पापा ने मुझे एक बार कहने पर फ्लाइंग स्कूल भेजा था. दूसरी ओर, बेटी की इस कामयाबी पर पिता को फक्र है. जम्मू कश्मीर की मुख्य मंत्री महबूबा मुफ्ती सईद के साथ आयशा अजीज 

आयशा की मां जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले की हैं, जबकि पिता महाराष्ट्र के मुंबई से हैं. आयशा के भाई आरिब लोखंडवाला ने कहा कि मुझे उनकी उपलब्धियों पर गर्व है. हम चाहते हैं कि वह आगे और आगे बढ़ती रहे. वह मेरी प्रेरणा हैं. आयशा की नजरें पूरी तरह से अपने फाइटर विमान उड़ाने के मिशन पर हैं. 

यही नहीं आयशा ने कश्मीर लड़कियों के लिए मैसेज भी दिया कि उन्हें अपने सपनों का पीछा करना होगा. अपने जीवन में लक्ष्य रखें और उन्हें पूरा करें. आयशा कहती हैं कि देश की यंगेस्ट पायलट होने के मुकाबले, मैं अपने बचपन का टारगेट पूरा होने पर ज्यादा खुश हूं. महिलाओं का जुनून ही पुरुष प्रधान दुनिया में असली ताकत है. हमें फोकस, स्टेबिलिटी, मेहनत और खुद पर विश्वास की जरूरत है. 

आयशा को सेल्फी का काफी शौक है भारत में सबसे कम उम्र की पायलट होने का रिकॉर्ड भी आयशा के नाम है यहां हम आपको विशेष तौर पर बताते चलें कि आएशा न सिर्फ एक पायलट हैं, बल्कि वह टीवी पर आने वाले कुछ विज्ञापनों के अलावा कई बड़ी मैगजीन्स के फोटोशूट का भी हिस्सा रह चुकी हैं. उन्हें आज फर्राटे से हवाई उड़ान भरते देखा जा सकता है.

आयशा कमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल कर चुकीं हैं और अब फाइटर जेट मिग-29 उड़ाने की तैयारी में हैं. इसके लिए वह रशियन एजेंसी के कॉन्टैक्ट में हैं. अगर ऐसा हुआ तो वह ध्वनि की गति से परे के फाइटर को उड़ाने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय लड़की बन जाएंगी. 

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