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	<title>फटकार &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>फटकार &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की फटकार</title>
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		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 10:28:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[फटकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="367" height="206" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xcvvv-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xcvvv.jpg 367w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xcvvv-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 367px) 100vw, 367px" />पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि कई जिलों में न्यायिक अधिकारियों के लिए स्थायी आवास उपलब्ध न होना अजीब ही नहीं, बल्कि चौंकाने वाली स्थिति है। हाईकोर्ट यह जानकर नाराज हुआ कि मोगा, मोहाली और पठानकोट के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभी भी अधिग्रहित मकानों में रह रहे हैं। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="367" height="206" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xcvvv-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xcvvv.jpg 367w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/xcvvv-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 367px) 100vw, 367px" />
<p>पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि कई जिलों में न्यायिक अधिकारियों के लिए स्थायी आवास उपलब्ध न होना अजीब ही नहीं, बल्कि चौंकाने वाली स्थिति है। हाईकोर्ट यह जानकर नाराज हुआ कि मोगा, मोहाली और पठानकोट के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभी भी अधिग्रहित मकानों में रह रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने पूछा कि ऐसा क्यों है? इतने वर्षों से जिले मौजूद हैं, फिर भी बेसिक आवास सुनिश्चित क्यों नहीं किया गया?</p>



<p>सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने 12 सितंबर के हाईकोर्ट आदेश में संशोधन की मांग की। उस आदेश में मालेरकोटला के डिप्टी कमिश्नर के गेस्ट हाउस और एसएसपी आवास को तुरंत खाली कराने और उन्हें जिला एवं सत्र न्यायाधीश के उपयोग में देने का आदेश दिया गया था। इसके साथ ही बिल्डिंग कमेटी को दो अस्थायी अदालत कक्षों की स्थिति पर फिर से विचार करने के लिए भी कहा गया था।</p>



<p>बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में पंजाब की ओर से तीन महीने का समय मांगा था। उन्होंने कहा कि राज्य आदेश को वापस नहीं लेना चाहता, सिर्फ उसे लागू करने के लिए और समय चाहता है। वहीं अदालत के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य ने अपनी अपील 14 नवंबर को वापस लेते समय यह तथ्य नहीं बताया कि हाईकोर्ट पहले ही 1 अक्तूबर को उसकी समीक्षा याचिका खारिज कर चुका है।</p>



<p>हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान भी अदालत के वकील ने कहा कि पंजाब उन मुद्दों को दोबारा उठाने की कोशिश कर रहा है जिन पर पहले ही अंतिम निर्णय हो चुका है। इनमें मालेरकोटला में डीसी और एसएसपी आवासों को खाली कराने से जुड़ी दलीलें भी शामिल हैं। राज्य की ओर से अदालत को बताया कि मालेरकोटला में दो नए कोर्टरूम बन चुके हैं और फैमिली कोर्ट का काम शुरू हो गया है। न्यायिक आवास के नए नक्शे 25 सितंबर को बिल्डिंग कमेटी को भेज दिए गए हैं और मंजूरी का इंतजार है। साथ ही पीडब्ल्यूडी की तकनीकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि डीसी गेस्ट हाउस और एसएसपी आवास अदालत कक्षों में बदलने के लिए सुरक्षित नहीं हैं।</p>



<p>पंजाब सरकार ने डीसी और एसएसपी आवास खाली कराने में दिक्कतें बताते हुए कहा कि वहां पुलिस कंट्रोल रूम और कार्यालय चल रहे हैं जिन्हें हटाना आसान नहीं है। इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर काफी दबाव है और राज्य को कुछ और समय चाहिए। कोर्ट ने फिलहाल समय बढ़ाते हुए कहा कि हम आपको अभी के लिए 12 सितंबर के आदेश का पालन करने के लिए समय दे रहे हैं। अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी।</p>
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		<title>पंजाब में पराली जलने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने किसानों को लगाई फटकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 06:55:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[फटकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fvvbb-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fvvbb.jpg 688w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fvvbb-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंजाब में इस सीजन में अब तक पराली जलाने के 12,688 मामले सामने आ चुके हैं। करीब 16 किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से हवा चल रही है जिस कारण पराली का धुंआ दिल्ली पहुंच रहा है। साथ ही पंजाब और हरियाणा में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="349" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fvvbb-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fvvbb.jpg 688w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/fvvbb-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंजाब में इस सीजन में अब तक पराली जलाने के 12,688 मामले सामने आ चुके हैं।</p>



<p>करीब 16 किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से हवा चल रही है जिस कारण पराली का धुंआ दिल्ली पहुंच रहा है। साथ ही पंजाब और हरियाणा में भी इसका असर देखने को मिल रहा है।</p>



<p>पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) चंडीगढ़ की संयुक्त टीम की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। दूसरी तरफ पंजाब और हरियाणा में पराली जलने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। आयोग ने पंजाब और हरियाणा को फटकार लगाई है। साथ ही दिल्ली में हालात बिगड़ने के लिए पंजाब और हरियाणा को जिम्मेदार ठहराया है।</p>



<p>इस रिपोर्ट के अनुसार दोनों राज्यों में पहले के मुकाबले पराली जलाने के केस कम जरूर हुए हैं लेकिन अभी भी पराली का जलना चिंताजनक है। पिछले कुछ दिन से मामलों में अचानक बढ़ोतरी हुई है। पंजाब में पराली जलाने के 4662 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं जबकि हरियाणा में 464 जगह पराली जली है।</p>



<p>पीयू-पीजीआई की टीम पराली और प्रदूषण को लेकर आंकड़े जुटा रही है जिसमें पंजाब विश्वविद्यालय से पर्यावरण अध्ययन विभाग की प्रोफेसर सुमन मोर और पीजीआई से इस टीम का नेतृत्व सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डाॅ. रविंद्र खैवाल कर रहे हैं। प्रो. खैवाल ने बताया कि पाकिस्तान के पंजाब में पराली जलाने के अधिक मामले आ रहे हैं। हवा की रुख भी इस समय दिल्ली की तरफ है जिस कारण पराली का प्रदूषण सीधे दिल्ली और इसके आसपास के एरिया को प्रभावित कर रहा है।</p>



<p>दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) वीरवार को 404 दर्ज किया गया है जो गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है। पंजाब के तीन शहरों की हवा भी खराब श्रेणी में चल रही है। मंडी गोबिंदगढ़ का 247, खन्ना का 219 और जालंधर का एक्यूआई 210 दर्ज किया गया है। इसी तरह तीन शहर यलो जोन में हैं। लुधियाना का 154, पटियाला का 138 और अमृतसर का एक्यूआई 1ृ27 दर्ज किया गया है।</p>



<p><strong>1185 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी</strong></p>



<p>सरकार ने पराली जलने पर 1185 अधिकारियों को ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम की धारा 14 के तहत 56 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई शुरू की गई है। इसी के तहत आठ जिलों के डीसी और एसएसपी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। पराली जलाने पर किसानों के राजस्व रिकाॅर्ड में 1920 रेड एंट्री भी की गई है।</p>



<p><strong>10 हजार अधिकारियों की लगाई ड्यूटी</strong></p>



<p>इस बार किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए 10 हजार अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही पराली प्रबंधन के लिए 1,48,451 सीआरएम मशीनें प्रदान की हैं फिर भी पराली जल रही है। किसान जत्थेबंदियों का आरोप है कि सभी किसानों तक पराली के निपटारे के लिए मशीनें नहीं पहुंच रही हैं।</p>



<p> </p>
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		<title> अवैध रूप से पेड़ों की कटाई-छंटाई के मामले में निगम को कड़ी फटकार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Nov 2025 05:06:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[फटकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="591" height="330" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/wedd-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/wedd-1.jpg 591w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/wedd-1-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 591px) 100vw, 591px" />दिल्ली: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पश्चिम विहार में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और छंटाई के मामले में नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल ने एमसीडी के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए 50,000 रुपये का जुर्माना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="591" height="330" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/wedd-1-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/wedd-1.jpg 591w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/11/wedd-1-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 591px) 100vw, 591px" />
<p><strong>दिल्ली:</strong> राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पश्चिम विहार में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और छंटाई के मामले में नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल ने एमसीडी के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया और एक सप्ताह के अंदर राशि जमा करने का आदेश दिया।</p>



<p>याचिकाकर्ता ख्याति आनंद ने फरवरी-मार्च 2024 में क्षेत्र में अवैध रूप से 250 से अधिक पेड़ों की कटाई और 20 से ज्यादा पेड़ों की ऊपरी शाखाओं की भारी छंटाई का आरोप लगाया था। संयुक्त समिति की जांच रिपोर्ट ने इन आरोपों की पुष्टि की।</p>



<p>रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई पेड़ों की अत्यधिक छंटाई की गई जबकि कटे पेड़ों की लकड़ी पंजाबी बाग के श्मशान घाट में भेजने का दावा किया गया लेकिन परिवहन की कोई अनुमति या दस्तावेज पेश नहीं किए गए। तीन पेड़ मृत पाए गए लेकिन बदले में नए पेड़ नहीं लगाए गए। साथ ही, कई पेड़ों के आसपास सीमेंट की पक्की सतह बना दी गई जिसे एनजीटी के पुराने आदेशों के बावजूद नहीं हटाया गया।</p>



<p>वहीं, एमसीडी ने बचाव में कहा कि छंटाई का काम ठेकेदार का था। उस पर निगम का नियंत्रण नहीं था जिसे अधिकरण ने सिरे से खारिज कर दिया। पीठ ने इसे एमसीडी की लापरवाही बताया। अधिकरण ने एमसीडी को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का समय दिया है लेकिन जुर्माने के साथ चेतावनी दी कि आगे ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की सुनवाई 16 जनवरी को होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट पर, अदालत ने लगाई थी फटकार&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Hema Bisht]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 May 2019 10:23:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[कारोबार]]></category>
		<category><![CDATA[अदालत]]></category>
		<category><![CDATA[अधूरे प्रोजेक्ट]]></category>
		<category><![CDATA[आम्रपाली]]></category>
		<category><![CDATA[फटकार]]></category>
		<category><![CDATA[सुनवाई आज]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="450" height="300" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu.jpg 450w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" />आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट मामले में आज भी सुनवाई होगी. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप को फटकार लगाते हुए कहा था कि अथॉरिटी और बैंकर्स की मिली भगत के कारण खरीददारों और निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. कोर्ट ने कहा कि आम्रपाली ने आकाश की ऊंचाई तक लोंगों से धोखाधड़ी की है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="450" height="300" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu.jpg 450w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 450px) 100vw, 450px" /><p>आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट मामले में आज भी सुनवाई होगी. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप को फटकार लगाते हुए कहा था कि अथॉरिटी और बैंकर्स की मिली भगत के कारण खरीददारों और निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. कोर्ट ने कहा कि आम्रपाली ने आकाश की ऊंचाई तक लोंगों से धोखाधड़ी की है और जो भी लोग इसके पीछे है चाहे वो कितने शक्तिशाली हों उन सब पर कड़ी कार्रवाई होगी. अदालत ने कहा कि आम्रपाली ने घर खरीददार, बैंक और अथॉरिटी सबको धोखा दिया है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-227345 " src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu.jpg" alt="" width="690" height="460" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu.jpg 450w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2019/05/yutyu-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 690px) 100vw, 690px" /></p>
<p><strong>फोरेंसिक ऑडिटर्स की रिपोर्ट को स्वीकार किया-  </strong>इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक ऑडिटर्स की उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था, जिसमें बताया गया है कि कितने पैसों का गबन हुआ, किसका क्या रोल है और कैसे रकम की उगाही जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ आगे भी जांच जारी रखने का निर्देश दिया था. इससे पहले फॉरेंसिक ऑडिटर ने अंतरिम रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसके मुताबिक 330 करोड़ से ज्यादा हेराफरी हुई है. बैंकों की भी मिलीभगत सामने आई थी. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को आम्रपाली के सीएमडी और दो निदेशकों को गिरफ्तार करने निर्देश दिया था.</p>
<p><strong>होमबॉयर्स के पैसे से खरीदी गई संपत्ति को अटैच करने के निर्देश-  </strong>सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के फाइव स्टार होटल, लग्जरी कारें, मॉल, FMCG कंपनी, फैक्टरी कॉरपोरेट ऑफिस और होमबॉयर्स के पैसे से खरीदी गई अन्य संपत्ति को अटैच करने के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल को ये संपत्ति बेचने के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने आम्रपाली के सीएमडी और निदेशकों को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक केस शुरू किए जाए. सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप से जुड़े लोगों को कहा था कि होम बायर्स के पैसे जो भी मिले हैं वो सुप्रीम कोर्ट के खाते में तक जमा कर दें.</p>
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<p><strong>NBCC से पूछा, किस तरह पूरे होंगे अधूरे प्रोजेक्ट-  </strong>कोर्ट ने कहा कि जो ये नहीं करेगा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 2015 से 2018 तक के बीच के कागजात सोमवार तक फोरेंसिक ऑडिटर्स को दिए जाए. सुप्रीम कोर्ट ने NBCC से भी पूछा था कि आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट किस तरह पूरे होंगे. आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा की और से माना गया था कि होम बॉयर्स के 2900 करोड़ रुपये दूसरी कंपनियों और अफसरों को बतौर गिफ्ट व अन्य तरीके से दिए गए. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि तीनों निदेशक पुलिस निगरानी मे रहकर अपने ग्रुप की 46 कंपनियों के दस्तावेजों का कैटलॉग तैयार करके फारेंसिक ऑडिटर्स को सौंपेंगे.</p>
<p><strong>तीनों निदेशकों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा-  </strong>कोर्ट ने कहा था कि तीनों निदेशक रोज सुबह 8 से शाम 6 बजे तक दस्तावेजों का कैटलॉग बनवाएंगे. इसके बाद पुलिस निगरानी मे नोएडा के सेक्टर-62 स्थित होटल में रहेंगे. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने तीनों निदेशकों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था. तीनों निदेशकों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार फॉरेंसिक ऑडिट के लिए अपने प्रोजेक्टों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न कराने का आरोप है. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह के निदेशकों समेत कुछ अन्य अधिकारियों को कोर्ट की अवमानना का नोटिस भी भेजा था. तीन दिन तक नोएडा व दिल्ली पुलिस की हिरासत में रहने के दौरान फॉरेंसिक ऑडिट संबंधी सभी दस्तावेज एकत्र नहीं हो सके थे.</p>
<p>पुलिस ने तीनों निदेशकों को कोर्ट में पेश कर संबंधित दस्तावेज एकत्र करने के लिए और समय मांगा था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीनों निदेशकों को फिर से 15 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था. आम्रपाली समूह को फॉरेंसिक ऑडिट के लिए अपनी 46 कंपनियों के दस्तावेज ऑडिटर को उपलब्ध कराने हैं.</p>
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		<title>हाफिज पर मेहरबान पाक सरकार को कोर्ट ने लगाई फटकार</title>
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		<pubDate>Wed, 11 Oct 2017 12:26:22 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[नजरबंदी]]></category>
		<category><![CDATA[फटकार]]></category>
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		<category><![CDATA[हाफिज पर मेहरबान पाक सरकार को कोर्ट की फटकार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1.jpeg 690w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1-300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />मुंबई हमले का मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा चीफ हाफिज सईद की नजरबंदी खत्म हो सकती है। लाहौर हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर पाकिस्तान सरकार ने उसके खिलाफ सबूत नहीं पेश किए तो नजरबंदी का फैसला रद्द कर दिया जाएगा। जमात-उद-दावा का चीफ सईद इस साल 31 जनवरी से लाहौर में नजरबंद है। लाहौर हाई कोर्ट ने सईद को नजरबंदी में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="412" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1.jpeg 690w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1-300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /><div class="desc">
<div><strong>मुंबई हमले का मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा चीफ हाफिज सईद की नजरबंदी खत्म हो सकती है। लाहौर हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर पाकिस्तान सरकार ने उसके खिलाफ सबूत नहीं पेश किए तो नजरबंदी का फैसला रद्द कर दिया जाएगा। जमात-उद-दावा का चीफ सईद इस साल 31 जनवरी से लाहौर में नजरबंद है।</strong></div>
<div class="desc"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-84783" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1.jpeg" alt="" width="690" height="460" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1.jpeg 690w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/10/hafiz-saeed_1462270793-1-300x200.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 690px) 100vw, 690px" />लाहौर हाई कोर्ट ने सईद को नजरबंदी में रखने के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई की थी। सुनवाई में गृह सचिव को सईद और उसके साथ चार लोगों की नजरबंदी से जुड़े तमाम दस्तावेजों के  साथ हाजिर होने को कहा गया था।</strong></p>
<p><strong>लेकिन वह हाजिर नहीं हुए। इस पर जस्टिस सैयद मजहर अली अकबर नकवी नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को लंबे समय तक सिर्फ प्रेस क्लीपिंग्स के आधार पर नजरबंद नहीं रखा जा सकता।</strong></p>
<p><strong>सईद के मामले में सरकार का रवैया यह दिखाता है कि उसके पास ठोस सबूत नहीं हैं। अगर सरकार ने सईद के खिलाफ सबूत पेश नहीं किया तो नजरबंदी के फैसले को खारिज किया जा सकता है।</strong></p>
<p><strong>डिप्टी अटॉर्नी जनरल के साथ पहुंचे गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने अदालत से कहा कि इस्लामाबाद में बेहद जरूरी सरकारी काम में व्यस्त होने की वजह से सचिव अदालत में पेश नहीं हो सके।</strong></p>
<p><strong>सरकारी वकील ने सईद की नजरबंदी के खिलाफ याचिका का जवाब देने के लिए कुछ और समय मांगा। सरकार के इस रवैये को देखते हुए जस्टिस नकवी ने अफसोस जताया कि एक सरकारी आदमी को बचाने के लिए अफसरों की फौज तैनात कर दी जाती है लेकिन अदालत की सहायता के लिए एक अफसर भी मुहैया नहीं कराया जाता।</strong></p>
<p><strong>अदालत की कार्रवाई रोकने की बार-बार दरख्वास्त से नाराज जज ने सुनवाई 13 अक्टूबर तक टाल दी। सईद के वकील ए के डोगर ने कहा सरकार ने जमात-उद-दावा के नेता को अफवाहों और आशंकाओं के आधार पर नजरबंद किया है।</strong></p>
<p><strong>उन्होंने कहा कि जब तक पुख्ता सबूत न हो आप किसी को नजरबंद नहीं रख सकते। हालांकि पंजाब सरकार ने अदालत से कहा है कि सईद को अगर छोड़ा गया तो कानून-व्यवस्था भंग हो सकती है और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है। गौरतलब है कि सईद और उसके चार सहयोगियों को लाहौर में आतंकरोधी कानून के तहत नजरबंद किया गया है।</strong></div>
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<div class="sambandhit-news oh"><strong> </strong></div>
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