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	<title>प्रदोष व्रत &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>प्रदोष व्रत &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>जुलाई में कब-कब पड़ रहा है प्रदोष व्रत?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 04:52:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदोष व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="411" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66.jpg 784w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66-768x511.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्&#x200d;व बताया गया है। इस व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। यह व्रत पितृ दोष शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्&#x200d;त करने के लिए भी रखा जाता है। हिंदू द्रिक पंचांग के आधार पर जुलाई 2026 में दो प्रदोष व्रत आएंगे और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="411" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66.jpg 784w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66-300x200.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66-768x511.jpg 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/06/7-66-310x205.jpg 310w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्&#x200d;व बताया गया है। इस व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। यह व्रत पितृ दोष शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्&#x200d;त करने के लिए भी रखा जाता है। हिंदू द्रिक पंचांग के आधार पर जुलाई 2026 में दो प्रदोष व्रत आएंगे और दोनों ही रविवार के दिन पड़ रहे हैं। ऐसे में इन्&#x200d;हें रवि प्रदोष कहा जाएगा। चलिए इन दोनों व्रतों की सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त आपको बाताते हैं।</p>



<p><strong>आषाढ़ कृष्ण पक्ष रवि प्रदोष व्रत 2026<br></strong>इस बार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष का रवि प्रदोष व्रत रविवार 12 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। ऐसे में शिव और सूर्य का संयोग बहुत ही शुभ माना गाया है। इस दिन भक्&#x200d;त व्रत रखकर इन दोनों का ही आशीर्वाद पा सकते हैं। साथ ही इस संयोग से जीवन में मान-सम्&#x200d;मान बढ़ता है और दीर्घ आयु मिलती है।</p>



<p><strong>आषाढ़ कृष्ण पक्ष रवि प्रदोष व्रत एंव पूजा का मुहूर्त<br></strong>12 जुलाई 2026 को प्रात: 2 बजकर 4 मिनट पर त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा और रात्रि 10 बजकर 29 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्&#x200d;त हो जाएगी। प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शाम 7 बजकर 22 मिनेट से लेकर रात्रि 9 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।</p>



<p><strong>आषाढ़ शुक्ल पक्ष रवि प्रदोष व्रत 2026<br></strong>आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष का रवि प्रदोष व्रत रविवार 26 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा। आषाढ़ में पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से, सभी पापों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक शास्&#x200d;त्रों के आधार पर यह वो समय होता है, जब भगवान शिव प्रसन्&#x200d;न होते हैं और भक्&#x200d;तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।</p>



<p><strong>आषाढ़ शुक्ल पक्ष रवि प्रदोष व्रत एंव पूजा का मुहूर्त<br></strong>26 जुलाई 2026 को दोपहर 1 बजकर 57 मिनट पर त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी और 27 जुलाई 2026 को शाम 4 बजकर 14 मिनट पर तिथि समाप्&#x200d;त हो जाएगी। प्रदोष व्रत की पूजा 26 जुलाई को शाम 7 बजकर 16 मिनट से लेकर रात्रि 9 बजे से लेकर 21 मिनट तक की जा सकती है।</p>



<p><strong>आषाढ़ माह में पड़ने वाले रवि प्रदोष का महत्&#x200d;व<br></strong>आषाढ़ माह में पड़ने वाले रिव प्रदोष का व्रत रखने से भक्&#x200d;त निरोग रहता है और समाज में उसका यश भी बढ़ता है। साथ ही भगवान शिव और सूर्य देव की विशेष कृपा भी प्रप्&#x200d;ता होती है।</p>
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		<title>अधूरी है प्रदोष व्रत की पूजा, अगर अंत में नहीं की ये आरती</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b7-%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%82/670481</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Apr 2026 05:09:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदोष व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/45-9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/45-9.jpg 699w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/45-9-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन माना गया है। भक्त पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय यानी ‘प्रदोष काल’ में महादेव का अभिषेक और पूजन करते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, किसी भी पूजा या अनुष्ठान के अंत में अगर आरती न की जाए, तो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/45-9.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/45-9.jpg 699w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/04/45-9-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन माना गया है। भक्त पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय यानी ‘प्रदोष काल’ में महादेव का अभिषेक और पूजन करते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, किसी भी पूजा या अनुष्ठान के अंत में अगर आरती न की जाए, तो वह पूजा अधूरी रह जाती है। ऐसे में आइए भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए उनकी आरती करते हैं, जो इस प्रकार हैं –</p>



<p><strong>।।शिव जी की आरती।। (Lord Shiv Aarti)<br></strong>जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।</p>



<p>ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p>एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।</p>



<p>हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p>दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।</p>



<p>त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p>अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।</p>



<p>चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p>श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।</p>



<p>सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p>कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।</p>



<p>जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p>ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।</p>



<p>प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p>काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।</p>



<p>नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p>त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।</p>



<p>कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥</p>



<p><strong>।।माता पार्वती की आरती।। (Mata Parvati Ki Aarti)<br></strong>जय पार्वती माता जय पार्वती माता</p>



<p>ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।</p>



<p>जय पार्वती माता जय पार्वती माता।</p>



<p>अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता</p>



<p>जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।</p>



<p>जय पार्वती माता जय पार्वती माता।</p>



<p>सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा</p>



<p>देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।</p>



<p>जय पार्वती माता जय पार्वती माता।</p>



<p>सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता</p>



<p>हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।</p>



<p>जय पार्वती माता जय पार्वती माता।</p>



<p>शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता</p>



<p>सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।</p>



<p>जय पार्वती माता जय पार्वती माता।</p>



<p>सृष्ट&#x200d;ि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता</p>



<p>नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।</p>



<p>जय पार्वती माता जय पार्वती माता।</p>



<p>देवन अरज करत हम चित को लाता</p>



<p>गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।</p>



<p>जय पार्वती माता जय पार्वती माता।</p>



<p>श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता</p>



<p>सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।</p>



<p>जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रदोष व्रत पर क्या है शिव पूजन का सही समय?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 06:52:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदोष व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="317" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-02-28-225054.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-02-28-225054.png 874w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-02-28-225054-300x154.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-02-28-225054-768x394.png 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />आज यानी 1 मार्च को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन महादेव की पूजा करने से ससभी भय दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शिव जी कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत पर कई योग भी बन &#8230;]]></description>
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<p>आज यानी 1 मार्च को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन महादेव की पूजा करने से ससभी भय दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शिव जी कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत पर कई योग भी बन रहे हैं। आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल का समय समेत आदि जानकारी।</p>



<p>तिथि: शुक्ल त्रयोदश<br>मास: फाल्गुन<br>दिन: रविवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल त्रयोदशी – सायं 07 बजकर 09 मिनट तक<br>योग: शोभन – दोपहर 02 बजकर 33 मिनट तक<br>करण: कौलव – प्रातः 07 बजकर 54 मिनट तक<br>करण: तैतिल – सायं 07 बजकर 09 मिनट तक<br>करण: गरज – प्रातः 06 बजकर 29 मिनट तक (2 मार्च)</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय का समय: प्रातः 06 बजकर 46 मिनट पर<br>सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 21 मिनट पर<br>चंद्रोदय का समय: सायं 04 बजकर 16 मिनट पर<br>चंद्रास्त का समय: प्रातः 06:00 बजे (2 मार्च)</p>



<p><strong>सूर्य और चंद्रमा की राशियां<br></strong>सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं<br>चन्द्र देव: कर्क राशि में स्थित हैं</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक<br>अमृत काल: प्रातः 06 बजकर 18 मिनट से प्रातः 07 बजकर 51 मिनट (2 मार्च) तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: सायं 04 बजकर 54 मिनट से सायं 06 बजकर 21 मिनट तक<br>गुलिकाल: दोपहर 03 बजकर 27 मिनट से सायं 04 बजकर 54 मिनट तक<br>यमगण्ड: दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से 02:00 बजे तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव पुष्य नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।<br>पुष्य नक्षत्र: प्रातः 08 बजकर 34 मिनट तक<br>सामान्य विशेषताएं: सहायक, संवेदनशील, आत्मनिर्भर, धैर्यशील, परिश्रमी, शांतचित्त, बुद्धिमान, कर्तव्यनिष्ठ, नियमपालक, धर्मपरायण, उदार और परोपकारी।<br>नक्षत्र स्वामी: शनि देव<br>राशि स्वामी: चंद्र देव<br>देवता: बृहस्पति देव<br>प्रतीक: कमल या गाय का थन</p>



<p><strong>रवि प्रदोष व्रत 2026<br></strong>प्रदोष काल समय: शाम 06 बजकर 21 मिनट से रात 08 बजकर 50 मिनट तक<br>त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 फरवरी, 2026 को रात 08 बजकर 43 मिनट<br>त्रयोदशी तिथि समाप्त: 01 मार्च, 2026 को शाम 07 बजकर 09 मिनट</p>



<p>प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की दोनों त्रयोदशी तिथियों को किया जाता है। जब त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में पड़ती है, तब भगवान शिव की पूजा अत्यंत शुभ होती है। रविवार को होने के कारण इसे रवि प्रदोष कहते हैं, जो पितृ दोष से मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण है।</p>



<p>सूर्य देव द्वारा शासित होने के कारण यह व्रत कुंडली में सूर्य संबंधी समस्याओं को दूर कर लंबी आयु और आरोग्य प्रदान करता है। इससे भक्तों को पारिवारिक सुख और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। यह आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>प्रदोष व्रत आज, इस विधि से करें पूजा, जानिए भोग, मंत्र और पूजन सामग्री लिस्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 05:17:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदोष व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="331" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211526.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211526.png 756w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211526-300x161.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211526-310x165.png 310w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन माना जाता है। पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत आज यानी 30 जनवरी को रखा जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त प्रदोष काल में महादेव &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="331" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211526.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211526.png 756w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211526-300x161.png 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211526-310x165.png 310w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन माना जाता है। पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस साल यह व्रत आज यानी 30 जनवरी को रखा जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त प्रदोष काल में महादेव की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन से सभी तरह के दुख-दरिद्रता, रोग और दोष का नाश हो जाता है। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।</p>



<p><strong>प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व<br></strong>शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं और सभी देवी-देवता उनकी स्तुति करते हैं। इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से साधक को लंबी आयु, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है।</p>



<p><strong>पूजन सामग्री लिस्ट<br></strong>शुद्ध जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर।<br>चंदन, अक्षत, बिल्व पत्र, धतूरा, मदार के फूल, भांग, और शमी के पत्ते।<br>गाय का घी, रुई की बत्ती, कपूर और धूप।<br>भस्म, जनेऊ, कलावा और माता पार्वती के लिए चुनरी व शृंगार सामग्री।</p>



<p><strong>पूजन विधि<br></strong>सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।<br>पूरे दिन फलाहार रहें और मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप करें।<br>सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस समय दोबारा स्नान कर विधिवत पूजा करें।<br>शिवलिंग पर पहले गंगाजल चढ़ाएं, फिर पंचामृत से अभिषेक करें।<br>अंत में शुद्ध जल से स्नान कराएं।<br>शिव जी को चंदन का तिलक लगाएं। बिल्व पत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।<br>ध्यान रहे कि बिल्व पत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की ओर होना चाहिए।<br>खीर का भोग लगाएं।<br>प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।<br>इसके बाद धूप-दीप जलाकर शिवजी की आरती करें।<br>अंत में पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।</p>



<p><strong>भोग<br></strong>महादेव को सफेद रंग की चीजें प्रिय हैं। ऐसे में आप खीर, मखाने की खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा मौसमी फल भी अर्पित करें।</p>



<p><strong>पूजन मंत्र<br></strong>ॐ नमः शिवाय॥<br>ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।<br>उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥</p>
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		<title>आज है शुक्र प्रदोष व्रत, बन रहे कई शुभ योग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 05:16:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदोष व्रत]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="323" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211411.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211411.png 758w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211411-300x157.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पंचांग के अनुसार, आज यानी 30 जनवरी को माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस तिथि पर जया एकादशी व्रत का पारण और शुक्र प्रदोष व्रत किया जाएगा। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्त्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। साथ ही जीवन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="323" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211411.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211411.png 758w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/01/Screenshot-2026-01-29-211411-300x157.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पंचांग के अनुसार, आज यानी 30 जनवरी को माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। इस तिथि पर जया एकादशी व्रत का पारण और शुक्र प्रदोष व्रत किया जाएगा। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्त्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है। प्रदोष व्रत पर कई योग भी बन रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।</p>



<p>तिथि: शुक्ल द्वादशी<br>मास पूर्णिमांत: माघ<br>दिन: शुक्रवार<br>संवत्: 2082</p>



<p>तिथि: शुक्ल द्वादशी – प्रातः 11 बजकर 09 मिनट तक<br>योग: वैधृति – सायं 04 बजकर 58 मिनट तक<br>करण: बालव – प्रातः 11 बजकर 09 मिनट तक<br>करण: कौलव – रात्रि 09 बजकर 46 मिनट तक</p>



<p><strong>सूर्योदय और सूर्यास्त का समय<br></strong>सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 10 मिनट पर<br>सूर्यास्त का समय: सायं 04 बजकर 58 मिनट पर<br>चंद्रोदय का समय: दोपहर 03 बजकर 06 मिनट पर<br>चंद्रास्त का समय: 31 जनवरी को प्रातः 05 बजकर 54 मिनट पर</p>



<p><strong>आज के शुभ मुहूर्त<br></strong>अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक<br>अमृत काल: सायं 06 बजकर 18 मिनट से सायं 07 बजकर 46 मिनट तक</p>



<p><strong>आज के अशुभ समय<br></strong>राहुकाल: प्रातः 11 बजकर 14 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक<br>गुलिकाल: प्रातः 08 बजकर 31 मिनटसे प्रातः 09 बजकर 52 मिनट तक<br>यमगण्ड: सायं 03 बजकर 17 मिनट से सायं 04 बजकर 38 मिनट तक</p>



<p><strong>आज का नक्षत्र<br></strong>आज चंद्रदेव आर्द्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।<br>आर्द्रा नक्षत्र: 31 जनवरी को रात्रि 03 बजकर 27 मिनट तक<br>सामान्य विशेषताएं: बुद्धिमान, चालाक, भौतिकवादी, ईमानदारी की कमी, जल्दी गुस्सा, विनाशकारी शक्ति, अहंकार और आत्मिक सौभाग्य।<br>नक्षत्र स्वामी: राहु देव<br>राशि स्वामी: बुध देव<br>देवता: रुद्र (भगवान शिव)<br>प्रतीक: अश्रु (आंसू की बूंद)</p>



<p><strong>शुक्र प्रदोष का धार्मिक महत्व<br></strong>शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित विशेष व्रत है। यह प्रत्येक माह त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, और जब यह शुक्रवार को पड़ता है तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और शिव पूजन करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, प्रेम, सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से स्त्रियां इस व्रत को परिवार की खुशहाली और दांपत्य सुख के लिए करती हैं। प्रदोष काल में किया गया शिव पूजन अत्यंत फलदायी माना गया है।</p>



<p><strong>शुक्र प्रदोष व्रत विधि<br></strong>प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें व्रत का संकल्प लें।<br>दिन भर सात्विक आहार लें या उपवास रखें सायंकाल प्रदोष काल में पुनः स्नान करें।<br>घर के मंदिर में भगवान शिव की पूजा की तैयारी करें।<br>शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें बेल पत्र, सफेद फूल और अक्षत अर्पित करें।<br>शिव मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।<br>अंत में भगवान शिव की आरती करें अगले दिन व्रत का पारण करें।</p>
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