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		<dc:creator><![CDATA[ekta singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 Jun 2018 09:48:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम में संशोधन पर शीर्ष कोर्ट का फैसला 14 जून को आएगा। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य की याचिकाओं पर मंगलवार को न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ में सुनवाई हुई। मालूम हो कि उप्र लोकसेवा आयोग से जनवरी 2018 में जारी पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम को 120 याचियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचियों ने 14 प्रश्नों पर आपत्ति की थी जिसमें कोर्ट ने एक प्रश्न को रद करने व दो के उत्तरों में बदलाव कर आयोग को संशोधित परिणाम जारी करने का निर्देश दिया था। आयोग ने परिणाम तो संशोधित नहीं किया बल्कि शीर्ष कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी। जिस पर आयोग को कोर्ट से स्थगनादेश मिल गया और उसके बाद ही पीसीएस मुख्य परीक्षा कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। मुख्य परीक्षा 18 जून से है। धर्मेंद्र सिंह व अन्य ने शीर्ष कोर्ट में इसी को चुनौती दी है कि आयोग ने हाईकोर्ट के निर्देश का पालन नहीं किया। याचियों का कहना है कि उन सभी को एक या दो नंबर से पीछे रहने के चलते मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिला है, जबकि गलती आयोग की है और हाईकोर्ट ने भी इसे सही माना है। आयोग प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करते तो उन्हें भी मुख्य परीक्षा में शामिल करने का मौका मिल सकता है।" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम में संशोधन पर शीर्ष कोर्ट का फैसला 14 जून को आएगा। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य की याचिकाओं पर मंगलवार को न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ में सुनवाई हुई। मालूम हो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम में संशोधन पर शीर्ष कोर्ट का फैसला 14 जून को आएगा। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य की याचिकाओं पर मंगलवार को न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ में सुनवाई हुई। मालूम हो कि उप्र लोकसेवा आयोग से जनवरी 2018 में जारी पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम को 120 याचियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचियों ने 14 प्रश्नों पर आपत्ति की थी जिसमें कोर्ट ने एक प्रश्न को रद करने व दो के उत्तरों में बदलाव कर आयोग को संशोधित परिणाम जारी करने का निर्देश दिया था। आयोग ने परिणाम तो संशोधित नहीं किया बल्कि शीर्ष कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी। जिस पर आयोग को कोर्ट से स्थगनादेश मिल गया और उसके बाद ही पीसीएस मुख्य परीक्षा कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। मुख्य परीक्षा 18 जून से है। धर्मेंद्र सिंह व अन्य ने शीर्ष कोर्ट में इसी को चुनौती दी है कि आयोग ने हाईकोर्ट के निर्देश का पालन नहीं किया। याचियों का कहना है कि उन सभी को एक या दो नंबर से पीछे रहने के चलते मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिला है, जबकि गलती आयोग की है और हाईकोर्ट ने भी इसे सही माना है। आयोग प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करते तो उन्हें भी मुख्य परीक्षा में शामिल करने का मौका मिल सकता है।" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम में संशोधन पर शीर्ष कोर्ट का फैसला 14 जून को आएगा। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य की याचिकाओं पर मंगलवार को न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ में सुनवाई हुई।<img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-144345" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214.jpg" alt="पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम में संशोधन पर शीर्ष कोर्ट का फैसला 14 जून को आएगा। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया। धर्मेंद्र सिंह सहित अन्य की याचिकाओं पर मंगलवार को न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की खंडपीठ में सुनवाई हुई।  मालूम हो कि उप्र लोकसेवा आयोग से जनवरी 2018 में जारी पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम को 120 याचियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचियों ने 14 प्रश्नों पर आपत्ति की थी जिसमें कोर्ट ने एक प्रश्न को रद करने व दो के उत्तरों में बदलाव कर आयोग को संशोधित परिणाम जारी करने का निर्देश दिया था। आयोग ने परिणाम तो संशोधित नहीं किया बल्कि शीर्ष कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी। जिस पर आयोग को कोर्ट से स्थगनादेश मिल गया और उसके बाद ही पीसीएस मुख्य परीक्षा कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। मुख्य परीक्षा 18 जून से है।  धर्मेंद्र सिंह व अन्य ने शीर्ष कोर्ट में इसी को चुनौती दी है कि आयोग ने हाईकोर्ट के निर्देश का पालन नहीं किया। याचियों का कहना है कि उन सभी को एक या दो नंबर से पीछे रहने के चलते मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिला है, जबकि गलती आयोग की है और हाईकोर्ट ने भी इसे सही माना है। आयोग प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करते तो उन्हें भी मुख्य परीक्षा में शामिल करने का मौका मिल सकता है।" width="650" height="540" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2018/06/13_06_2018-allahabad-high-court_18074214-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></strong></p>
<p><strong>मालूम हो कि उप्र लोकसेवा आयोग से जनवरी 2018 में जारी पीसीएस (प्रारंभिक) परीक्षा 2017 के परिणाम को 120 याचियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचियों ने 14 प्रश्नों पर आपत्ति की थी जिसमें कोर्ट ने एक प्रश्न को रद करने व दो के उत्तरों में बदलाव कर आयोग को संशोधित परिणाम जारी करने का निर्देश दिया था। आयोग ने परिणाम तो संशोधित नहीं किया बल्कि शीर्ष कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी। जिस पर आयोग को कोर्ट से स्थगनादेश मिल गया और उसके बाद ही पीसीएस मुख्य परीक्षा कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। मुख्य परीक्षा 18 जून से है।</strong></p>
<p><strong>धर्मेंद्र सिंह व अन्य ने शीर्ष कोर्ट में इसी को चुनौती दी है कि आयोग ने हाईकोर्ट के निर्देश का पालन नहीं किया। याचियों का कहना है कि उन सभी को एक या दो नंबर से पीछे रहने के चलते मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं मिला है, जबकि गलती आयोग की है और हाईकोर्ट ने भी इसे सही माना है। आयोग प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करते तो उन्हें भी मुख्य परीक्षा में शामिल करने का मौका मिल सकता है।</strong></p>
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