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	<title>पितृपक्ष &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>पितृपक्ष &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>पितृपक्ष की षष्ठी तिथि पर ऐसे करें पितरों की आरती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 04:42:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[पितृपक्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="373" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ghbnmk-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ghbnmk.jpg 683w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ghbnmk-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बहुत पवित्र माना जाता है। इस दौरान पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। आज पितृपक्ष की षष्ठी तिथि है। पितृपक्ष में षष्ठी तिथि का दिन उन पितरों के लिए बहुत खास है जिनका निधन इस तिथि को हुआ हो। इस दिन विशेष रूप से उनकी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="373" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ghbnmk-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ghbnmk.jpg 683w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/ghbnmk-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म में पितृपक्ष का समय बहुत पवित्र माना जाता है। इस दौरान पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। आज पितृपक्ष की षष्ठी तिथि है। पितृपक्ष में षष्ठी तिथि का दिन उन पितरों के लिए बहुत खास है जिनका निधन इस तिथि को हुआ हो। इस दिन विशेष रूप से उनकी पूजा-अर्चना और आरती करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।</p>



<p>ऐसी मान्यता है कि पितर प्रसन्न होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं, तो आइए उनकी भव्य आरती करते हैं।</p>



<p><strong>पितृ देव की आरती</strong></p>



<p>जय जय पितर जी महाराज,</p>



<p>मैं शरण पड़ा तुम्हारी,</p>



<p>शरण पड़ा हूं तुम्हारी देवा,</p>



<p>रख लेना लाज हमारी,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>आप ही रक्षक आप ही दाता,</p>



<p>आप ही खेवनहारे,</p>



<p>मैं मूरख हूं कछु नहिं जानू,</p>



<p>आप ही हो रखवारे,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,</p>



<p>करने मेरी रखवारी,</p>



<p>हम सब जन हैं शरण आपकी,</p>



<p>है ये अरज गुजारी,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>देश और परदेश सब जगह,</p>



<p>आप ही करो सहाई,</p>



<p>काम पड़े पर नाम आपके,</p>



<p>लगे बहुत सुखदाई,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>भक्त सभी हैं शरण आपकी,</p>



<p>अपने सहित परिवार,</p>



<p>रक्षा करो आप ही सबकी,</p>



<p>रहूं मैं बारम्बार,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p>जय जय पितर जी महाराज,</p>



<p>मैं शरण पड़ा हू तुम्हारी,</p>



<p>शरण पड़ा हूं तुम्हारी देवा,</p>



<p>रखियो लाज हमारी,</p>



<p>जय जय पितृ जी महाराज, मैं शरण पड़ा तुम्हारी।।</p>



<p><strong>भगवान विष्णु की आरती</strong></p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे आरती</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे,</p>



<p>स्वामी जय जगदीश हरे ।</p>



<p>भक्त जनों के संकट,</p>



<p>दास जनों के संकट,</p>



<p>क्षण में दूर करे ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>जो ध्यावे फल पावे,</p>



<p>दुःख बिनसे मन का,</p>



<p>स्वामी दुःख बिनसे मन का ।</p>



<p>सुख सम्पति घर आवे,</p>



<p>सुख सम्पति घर आवे,</p>



<p>कष्ट मिटे तन का ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>मात पिता तुम मेरे,</p>



<p>शरण गहूं किसकी,</p>



<p>स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।</p>



<p>तुम बिन और न दूजा,</p>



<p>तुम बिन और न दूजा,</p>



<p>आस करूं मैं जिसकी ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम पूरण परमात्मा,</p>



<p>तुम अन्तर्यामी,</p>



<p>स्वामी तुम अन्तर्यामी ।</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर,</p>



<p>पारब्रह्म परमेश्वर,</p>



<p>तुम सब के स्वामी ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम करुणा के सागर,</p>



<p>तुम पालनकर्ता,</p>



<p>स्वामी तुम पालनकर्ता ।</p>



<p>मैं मूरख फलकामी,</p>



<p>मैं सेवक तुम स्वामी,</p>



<p>कृपा करो भर्ता॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>तुम हो एक अगोचर,</p>



<p>सबके प्राणपति,</p>



<p>स्वामी सबके प्राणपति ।</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय,</p>



<p>किस विधि मिलूं दयामय,</p>



<p>तुमको मैं कुमति ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,</p>



<p>ठाकुर तुम मेरे,</p>



<p>स्वामी रक्षक तुम मेरे ।</p>



<p>अपने हाथ उठाओ,</p>



<p>अपने शरण लगाओ,</p>



<p>द्वार पड़ा तेरे ॥</p>



<p>॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥</p>



<p>विषय-विकार मिटाओ,</p>



<p>पाप हरो देवा,</p>



<p>स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।</p>



<p>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,</p>



<p>श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,</p>



<p>सन्तन की सेवा ॥</p>



<p>ॐ जय जगदीश हरे,</p>



<p>स्वामी जय जगदीश हरे ।</p>



<p>भक्त जनों के संकट,</p>



<p>दास जनों के संकट,</p>



<p>क्षण में दूर करे ॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पितृपक्ष की चतुर्थी तिथि पर ऐसे करें पूजा</title>
		<link>https://livehalchal.com/%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%a5%e0%a4%bf/631822</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 04:25:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[पितृपक्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="467" height="374" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhuj-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhuj.jpg 467w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhuj-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 467px) 100vw, 467px" />आज 11 सितंबर को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि मनाई जा रही है। यह पितरों को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तिथि पर लोग अपने पितरों के नाम से पिंडदान और तर्पण करते हैं। ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। वहीं, इस दिन (Pitru Paksha 2025) भगवान &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="467" height="374" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhuj-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhuj.jpg 467w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/yhuj-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 467px) 100vw, 467px" />
<p>आज 11 सितंबर को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि मनाई जा रही है। यह पितरों को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तिथि पर लोग अपने पितरों के नाम से पिंडदान और तर्पण करते हैं। ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। वहीं, इस दिन (Pitru Paksha 2025) भगवान विष्णु की पूजा का बड़ा महत्व है। ऐसे में स्नान के बाद श्री हरि के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद विष्णु भगवान के 108 नामों का जप करें।</p>



<p>अंत में आरती से पूजा को समाप्त करें। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है।</p>



<p><strong>।।भगवान विष्णु के 108 नाम।।</strong></p>



<ol class="wp-block-list">
<li>ऊँ श्री प्रकटाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री वयासाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री हंसाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री वामनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री गगनसदृश्यमाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताजाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री प्रभवे नमः</li>



<li>ऊँ श्री गरुडध्वजाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री परमधार्मिकाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री यशोदानन्दनयाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री विराटपुरुषाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री अक्रूराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सुलोचनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री विशुद्धात्मने नमः</li>



<li>ऊँ श्री श्रीपतये नमः</li>



<li>ऊँ श्री आनन्दाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री कमलापतये नमः</li>



<li>ऊँ श्री सिद्ध संकल्पयाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री महाबलाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सुरेशाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री ईश्वराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री विराट पुरुषाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री चक्रगदाधराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री योगिनेय नमः</li>



<li>ऊँ श्री दयानिधि नमः</li>



<li>ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नमः</li>



<li>ऊँ श्री कमलनयनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री शंख भृते नमः</li>



<li>ऊँ श्री दु:स्वपननाशनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री हयग्रीवाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री कपिलेश्वराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री महीधराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री द्वारकानाथाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सप्तवाहनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री श्री यदुश्रेष्ठाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नमः</li>



<li>ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री लोकनाथाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री वंशवर्धनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री एकपदे नमः</li>



<li>ऊँ श्री धनुर्धराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री केश्वाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री धनंजाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री शान्तिदाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री वाराहय नमः</li>



<li>ऊँ श्री नरसिंहाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री रामाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री शोकनाशनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री श्रीहरये नमः</li>



<li>ऊँ श्री गोपतये नमः</li>



<li>ऊँ श्री विश्वकर्मणे नमः</li>



<li>ऊँ श्री हृषीकेशाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री पद्मनाभाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री कृष्णाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री विश्वातमने नमः</li>



<li>ऊँ श्री गोविन्दाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नमः</li>



<li>ऊँ श्री दामोदराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री अच्युताय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री वासुदेवाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री पुण्डरीक्षाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री नर-नारायणा नमः</li>



<li>ऊँ श्री जनार्दनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री चतुर्भुजाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री विष्णवे नमः</li>



<li>ऊँ श्री केशवाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री मुकुन्दाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सत्यधर्माय नमः</li>



<li>ऊँ श्री परमात्मने नमः</li>



<li>ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः</li>



<li>ऊँ श्री माधवाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री अनन्तजिते नमः</li>



<li>ऊँ श्री महेन्द्राय नमः</li>



<li>ऊँ श्री नारायणाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सहस्त्राक्षाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री प्रजापतये नमः</li>



<li>ऊँ श्री भूभवे नमः</li>



<li>ऊँ श्री प्राणदाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री देवकी नन्दनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सुरेशाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री जगतगुरूवे नमः</li>



<li>ऊँ श्री सनातन नमः</li>



<li>ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री दानवेन्द्र विनाशकाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री एकातम्ने नमः</li>



<li>ऊँ श्री शत्रुजिते नमः</li>



<li>ऊँ श्री घनश्यामाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री वामनाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री गरुडध्वजाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री धनेश्वराय नमः</li>



<li>103.ऊँ श्री भगवते नमः</li>



<li>ऊँ श्री उपेन्द्राय नमः</li>



<li>ऊँ श्री परमेश्वराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री सर्वेश्वराय नमः</li>



<li>ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नमः</li>



<li>ऊँ श्री प्रजापतये नमः।</li>
</ol>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पितृपक्ष में करें ये एक काम, नहीं पड़ेगा पितृ दोष का प्रभाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Sep 2025 05:18:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[पितृपक्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="561" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sxx-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sxx.jpg 686w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sxx-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />पितृपक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इसका हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह 15 दिनों की वह अवधि है, जब लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए कई तरह धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इस साल पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू हो चुका है। ऐसी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="561" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sxx-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sxx.jpg 686w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/sxx-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>पितृपक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इसका हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। यह 15 दिनों की वह अवधि है, जब लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए कई तरह धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इस साल पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू हो चुका है। ऐसी मान्यता है कि इस अवधि में हमारे पूर्वज पृथ्वी लोक पर आते हैं। ऐसे में इस समय विधि-विधान से उनका तर्पण गंगा तट पर करें।</p>



<p>फिर देवी गंगा की विधिवत पूजा करें। गंगा चालीसा का पाठ और आरती करें। अंत में कुछ दान और दक्षिणा दें। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है, तो आइए यहां गंगा चालीसा का पाठ करते हैं।</p>



<p>॥गंगा चालीसा॥</p>



<p>॥ दोहा॥</p>



<p>जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग।</p>



<p>जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग॥</p>



<p>॥ चौपाई ॥</p>



<p>जय जय जननी हरण अघ खानी।</p>



<p>आनंद करनि गंग महारानी॥</p>



<p>जय भगीरथी सुरसरि माता।</p>



<p>कलिमल मूल दलनि विख्याता॥</p>



<p>जय जय जहानु सुता अघ हनानी।</p>



<p>भीष्म की माता जगा जननी॥</p>



<p>धवल कमल दल मम तनु साजे।</p>



<p>लखि शत शरद चंद्र छवि लाजे॥</p>



<p>वाहन मकर विमल शुचि सोहै।</p>



<p>अमिय कलश कर लखि मन मोहै॥</p>



<p>जड़ित रत्न कंचन आभूषण।</p>



<p>हिय मणि हर, हरणितम दूषण॥</p>



<p>जग पावनि त्रय ताप नसावनि।</p>



<p>तरल तरंग तंग मन भावनि॥</p>



<p>जो गणपति अति पूज्य प्रधाना।</p>



<p>तिहूं ते प्रथम गंगा स्नाना॥</p>



<p>ब्रह्म कमंडल वासिनी देवी।</p>



<p>श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि॥</p>



<p>साठि सहस्त्र सागर सुत तारयो।</p>



<p>गंगा सागर तीरथ धरयो॥</p>



<p>अगम तरंग उठ्यो मन भावन।</p>



<p>लखि तीरथ हरिद्वार सुहावन॥</p>



<p>तीरथ राज प्रयाग अक्षैवट।</p>



<p>धरयौ मातु पुनि काशी करवट॥</p>



<p>धनि धनि सुरसरि स्वर्ग की सीढी।</p>



<p>तारणि अमित पितु पद पिढी॥</p>



<p>भागीरथ तप कियो अपारा।</p>



<p>दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा॥</p>



<p>जब जग जननी चल्यो हहराई।</p>



<p>शम्भु जाटा महं रह्यो समाई॥</p>



<p>वर्ष पर्यंत गंग महारानी।</p>



<p>रहीं शम्भू के जटा भुलानी॥</p>



<p>पुनि भागीरथी शंभुहिं ध्यायो।</p>



<p>तब इक बूंद जटा से पायो॥</p>



<p>ताते मातु भइ त्रय धारा।</p>



<p>मृत्यु लोक, नाभ, अरु पातारा॥</p>



<p>गईं पाताल प्रभावति नामा।</p>



<p>मन्दाकिनी गई गगन ललामा॥</p>



<p>मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनि।</p>



<p>कलिमल हरणि अगम जग पावनि॥</p>



<p>धनि मइया तब महिमा भारी।</p>



<p>धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी॥</p>



<p>मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी।</p>



<p>धनि सुरसरित सकल भयनासिनी॥</p>



<p>पान करत निर्मल गंगा जल।</p>



<p>पावत मन इच्छित अनंत फल॥</p>



<p>पूर्व जन्म पुण्य जब जागत।</p>



<p>तबहीं ध्यान गंगा महं लागत॥</p>



<p>जई पगु सुरसरी हेतु उठावही।</p>



<p>तई जगि अश्वमेघ फल पावहि॥</p>



<p>महा पतित जिन काहू न तारे।</p>



<p>तिन तारे इक नाम तिहारे॥</p>



<p>शत योजनहू से जो ध्यावहिं।</p>



<p>निशचाई विष्णु लोक पद पावहिं॥</p>



<p>नाम भजत अगणित अघ नाशै।</p>



<p>विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशै॥</p>



<p>जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना।</p>



<p>धर्मं मूल गंगाजल पाना॥</p>



<p>तब गुण गुणन करत दुख भाजत।</p>



<p>गृह गृह सम्पति सुमति विराजत॥</p>



<p>गंगाहि नेम सहित नित ध्यावत।</p>



<p>दुर्जनहुँ सज्जन पद पावत॥</p>



<p>बुद्दिहिन विद्या बल पावै।</p>



<p>रोगी रोग मुक्त ह्वै जावै॥</p>



<p>गंगा गंगा जो नर कहहीं।</p>



<p>भूखे नंगे कबहु न रहहि॥</p>



<p>निकसत ही मुख गंगा माई।</p>



<p>श्रवण दाबी यम चलहिं पराई॥</p>



<p>महाँ अधिन अधमन कहँ तारें।</p>



<p>भए नर्क के बंद किवारें॥</p>



<p>जो नर जपै गंग शत नामा।</p>



<p>सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा॥</p>



<p>सब सुख भोग परम पद पावहिं।</p>



<p>आवागमन रहित ह्वै जावहीं॥</p>



<p>धनि मइया सुरसरि सुख दैनी।</p>



<p>धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी॥</p>



<p>कंकरा ग्राम ऋषि दुर्वासा।</p>



<p>सुन्दरदास गंगा कर दासा॥</p>



<p>जो यह पढ़े गंगा चालीसा।</p>



<p>मिली भक्ति अविरल वागीसा॥</p>



<p>॥ दोहा ॥</p>



<p>नित नव सुख सम्पति लहैं। धरें गंगा का ध्यान।</p>



<p>अंत समय सुरपुर बसै। सादर बैठी विमान॥</p>



<p>संवत भुज नभ दिशि । राम जन्म दिन चैत्र।</p>



<p>पूरण चालीसा कियो। हरी भक्तन हित नैत्र॥</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>मध्य प्रदेश:  पितृपक्ष के पहले दिन लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 05:27:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[पितृपक्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="341" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/oplk-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/oplk.jpg 741w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/oplk-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />हर साल भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष आरंभ होता है। इस बार पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 को हो रही है। संयोग यह है कि इसी दिन साल का अंतिम पूर्ण चंद्र ग्रहण भी लगेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि धार्मिक और खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह दिन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="341" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/oplk-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/oplk.jpg 741w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/09/oplk-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हर साल भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष आरंभ होता है। इस बार पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 को हो रही है। संयोग यह है कि इसी दिन साल का अंतिम पूर्ण चंद्र ग्रहण भी लगेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि धार्मिक और खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह दिन बेहद खास रहने वाला है।</p>



<p><strong>कब और कहां दिखेगा ग्रहण<br></strong>यह पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत सहित एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, अमेरिका के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण स्पष्ट रूप से नजर आएगा, इसलिए सूतक काल का पालन अनिवार्य होगा। ग्रहण का छाया प्रवेश रात 8:58 बजे, स्पर्श 9:57 बजे, मध्यम 1:27 बजे और मोक्ष 2:25 बजे होगा। सूतक काल दोपहर 12:50 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा।</p>



<p><strong>पूजा-पाठ और दान की परंपरा<br></strong>ग्रहण के दौरान धार्मिक कार्य, भोजन और यात्रा निषेध मानी गई है। इस अवधि में भगवान का स्मरण और जप करना सर्वोत्तम है। मान्यता है कि ग्रहण काल में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। राहु ग्रह के दोष निवारण हेतु सात अनाज, वस्त्र, लोहा और तिलदान विशेष लाभकारी बताए गए हैं।</p>



<p><strong>राशि अनुसार प्रभाव और परामर्श<br></strong>ज्योतिषाचार्य के अनुसार यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा। इसलिए कुंभ और मीन राशि के जातकों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इनके लिए ग्रहण देखना वर्जित है। ग्रहण का शुभ प्रभाव मेष, वृषभ, कन्या और धनु राशि वालों के लिए रहेगा, जबकि मिथुन, सिंह, तुला और मकर पर सामान्य असर रहेगा। वहीं कर्क, वृश्चिक, मीन और कुंभ राशि के लिए यह ग्रहण अशुभ फलदायी माना गया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Pitru Paksha 2023: न करें ये गलतियां पितृपक्ष के दौरान, वरना नाराज हो सकते हैं आपके पूर्वज</title>
		<link>https://livehalchal.com/pitru-paksha-2023/519438</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Sep 2023 12:02:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[Pitru Paksha 2023]]></category>
		<category><![CDATA[पितृपक्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="372" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/09/Pitru-Paksha-2023-780x470-1.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/09/Pitru-Paksha-2023-780x470-1.webp 780w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/09/Pitru-Paksha-2023-780x470-1-300x181.webp 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/09/Pitru-Paksha-2023-780x470-1-768x463.webp 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />Pitru Paksha 2023: पंचांग के अनुसार इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 29 सितंबर 2023 से हो रही है। इसका समापन 14 अक्टूबर को होगा। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। पितृपक्ष पूरी तरह से पूर्वजों को समर्पित माना जाता है। इस दौरान पूरी श्रद्धा के साथ पितरों को याद किया जाता है &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="372" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/09/Pitru-Paksha-2023-780x470-1.webp" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/09/Pitru-Paksha-2023-780x470-1.webp 780w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/09/Pitru-Paksha-2023-780x470-1-300x181.webp 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/09/Pitru-Paksha-2023-780x470-1-768x463.webp 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>Pitru Paksha 2023: पंचांग के अनुसार इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 29 सितंबर 2023 से हो रही है। इसका समापन 14 अक्टूबर को होगा। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। पितृपक्ष पूरी तरह से पूर्वजों को समर्पित माना जाता है। इस दौरान पूरी श्रद्धा के साथ पितरों को याद किया जाता है और उनकी आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और अन्य अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि श्राद्ध करने से पितर खुश होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि पितृपक्ष में पितरों की आत्मा अपने परिवार वालों को आर्शीवाद देने के लिए धरती पर आती है, इसलिए इस दौरान कुछ कार्य करने से बचना चाहिए वरना आपके पितर नाराज हो सकते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं पितृपक्ष के दौरान कौन से कार्य नहीं करने चाहिए…</p>



<p>Pitru Paksha 2023: इस दिन से हो रही है पितृपक्ष की शुरुआत, जानें तर्पण विधि और श्राद्ध पक्ष की तिथियां</p>



<p><strong>तामसिक चीजों से रहें दूर</strong><br>पितृपक्ष के दौरान तामसिक चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस दौरान घर में सात्विकता का माहौल बनाए रखना चाहिए। संभव हो तो इन दिनों लहसुन और प्याज का भी सेवन नहीं करना चाहिए। तामसिक चीजों के इस्तेमाल से आपके पितर नाराज हो सकते हैं।</p>



<p><strong>बाल और नाखून न काटें</strong><br>पितृपक्ष में श्राद्धकर्म करने वाले व्यक्ति को पूरे 15 दिनों तक बाल और नाखून नहीं कटवाने चाहिए। साथ ही इस दौरान ब्रह्माचार्य का भी पालन करना चाहिए।</p>



<p><strong>किसी भी पक्षी को न सताएं</strong><br>कहा जाता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पक्षियों के रूप में इस धरती पर आते हैं, इसलिए इन दिनों गलती से भी किसी पक्षी को नहीं सताना चाहिए। ऐसा करने से हमारे पूर्वज नाराज हो सकते हैं।</p>



<p><strong>न करें मांगलिक कार्य का आयोजन</strong><br>पितृपक्ष पूर्वजों के लिए समर्पित होता है, इसलिए इस दौरान किसी भी तरह का मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। पितृपक्ष के दौरान शादी, मुंडन, सगाई और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।</p>
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