पापांकुशा एकादशी – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Sun, 13 Oct 2024 04:37:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg पापांकुशा एकादशी – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 आज है पापांकुशा एकादशी https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80/584926 Sun, 13 Oct 2024 04:37:36 +0000 https://livehalchal.com/?p=584926 आज आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक रहेगी। इस शुभ तिथि पर कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस दौरान कार्य की शुरुआत करने से सफलता प्राप्त होती है। आइए आज के दिन की शुरुआत करने से पहले पंडित हर्षित जी से आज का पंचांग …]]>

आज आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक रहेगी। इस शुभ तिथि पर कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस दौरान कार्य की शुरुआत करने से सफलता प्राप्त होती है। आइए आज के दिन की शुरुआत करने से पहले पंडित हर्षित जी से आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang 13 October 2024) और राहुकाल का समय जानते हैं।

आज पापांकुशा एकादशी है। यह पूर्ण रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा माना जाता कि जो साधक इस दिन भाव के साथ पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें धन, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में शुभता आती है। आज के दिन की शुरुआत करने से पहले यहां दिए गए शुभ व अशुभ समय को अवश्य जान लें, जो इस प्रकार हैं –

Aaj Ka Panchang 13 October 2024: आज का पंचांग –
पंचांग के अनुसार, आज आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि सुबह 09 बजकर 08 मिनट तक रहेगी।

ऋतु – शरद

चन्द्र राशि – मकर

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 18 मिनट पर

सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 49 मिनट पर

चंद्रोदय – दोपहर 03 बजकर 02 मिनट पर

चन्द्रास्त – देर रात 02 बजकर 28 मिनट पर

शुभ मुहूर्त
रवि योग – सुबह 06 बजकर 21 मिनट से अगले दिन देर रात 02 बजकर 51 मिनट तक

ब्रह्म मुहूर्त – 04 बजकर 41 मिनट से 05 बजकर 31 मिनट तक

विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 02 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 53 मिनट से 06 बजकर 18 मिनट तक

निशिता मुहूर्त – रात्रि 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 23 मिनट तक।

अशुभ समय
राहु काल – दोपहर 04 बजकर 30 मिनट से शाम 05 बजकर 47 मिनट तक

गुलिक काल – दोपहर 02 बजकर 57 मिनट से 04 बजकर 32 मिनट तक।

दिशा शूल – पश्चिम

ताराबल
भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती।

चन्द्रबल
मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन।

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पापांकुशा एकादशी पर जरूर करें तुलसी से जुड़े ये काम https://livehalchal.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b0/584923 Sun, 13 Oct 2024 04:28:42 +0000 https://livehalchal.com/?p=584923 हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। यह तिथि पूर्ण रूप में जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित मानी जाती है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आश्विन माह में आने वाली पापांकुशा एकादशी पर आप तुलसी से जुड़े कौन-से कार्य कर सकते हैं जिससे आपको विष्णु …]]>

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। यह तिथि पूर्ण रूप में जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित मानी जाती है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आश्विन माह में आने वाली पापांकुशा एकादशी पर आप तुलसी से जुड़े कौन-से कार्य कर सकते हैं जिससे आपको विष्णु जी की कृपा मिल सकती है।

पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पापांकुशा एकादशी (Papankusha Ekadashi 2024) का व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में माना गया है कि विष्णु जी को तुलसी अति प्रिय है। ऐसे में एकादशी तिथि पर तुलसी से जुड़े कुछ कार्य करने से आपको विष्णु जी की कृपा से जीवन में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

एकादशी शुभ मुहूर्त (Papankusha Ekadashi Muhurat)
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (Ekadasi 2024 October) तिथि 13 अक्टूबर को सुबह 09 बजकर 08 मिनट पर शुरू हो गई है। वहीं इस तिथि का समापन 14 अक्टूबर को सुबह 06 बजकर 41 मिनट पर होने जा रहा है। ऐसे में रविवार,आज यानी 13 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी व्रत किया जा रहा है, जिसका पारण सोमवार, 14 अक्टूबर को किया जाएगा।

पारण के दौरान करें ये काम
भगवान विष्णु को तुलसी दल अति प्रिय माना गया है। ऐसे में तुलसीदल को अपने मुंह में रखकर एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए। इससे आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

अर्पित करें ये चीजें
एकादशी के दिन तुलसी मां तुलसी को सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ी, चुनरी सिंदूर के साथ-साथ रक्षा सूत्र भी अर्पित कर सकते हैं। इसी के साथ तुलसी के पौधे की 11 बार परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा करने से साधक का वैवाहिक जीवन में खुशहाल बना रहता है और जीवन में अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान
एकादशी के दिन भूल से भी तुलसी में जल अर्पित नहीं करना चाहिए और न ही दीपक जलाना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस तिथि पर माता तुलसी, भगवान विष्णु के निमित्त व्रत रखती हैं। ऐसे में इन कार्यों से उनके व्रत में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।

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पापांकुशा एकादशी, जानें व्रत का महत्व, फल एवं पौराणिक कथा https://livehalchal.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5/387242 Tue, 27 Oct 2020 07:25:30 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=387242 27 अक्टूबर 2020, मंगलवार को पापांकुशा एकादशी है। यह एकादशी पापों से मुक्ति देकर स्वर्ग प्राप्ति में सहायता कर‍ती है। प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि की समाप्ति के बाद और विजयादशमी पर्व के अगले दिन आश्विन शुक्ल एकादशी को ‘पापांकुशा एकादशी’ मनाई जाती है। इस दिन श्रीहरि विष्णु का पूजन किया जाता है। यहां पढ़ें पापांकुशा एकादशी की पौराणिक …]]>

27 अक्टूबर 2020, मंगलवार को पापांकुशा एकादशी है। यह एकादशी पापों से मुक्ति देकर स्वर्ग प्राप्ति में सहायता कर‍ती है। प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि की समाप्ति के बाद और विजयादशमी पर्व के अगले दिन आश्विन शुक्ल एकादशी को ‘पापांकुशा एकादशी’ मनाई जाती है। इस दिन श्रीहरि विष्णु का पूजन किया जाता है। यहां पढ़ें पापांकुशा एकादशी की पौराणिक एवं प्रामाणिक व्रत कथा-

धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! आश्विन शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? अब आप कृपा करके इसकी विधि तथा फल कहिए।

भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! पापों का नाश करने वाली इस एकादशी का नाम पापांकुशा एकादशी है। हे राजन! इस दिन मनुष्य को विधिपूर्वक भगवान पद्‍मनाभ की पूजा करनी चाहिए। यह एकादशी मनुष्य को मनोवांछित फल देकर स्वर्ग को प्राप्त कराने वाली है।

मनुष्य को बहुत दिनों तक कठोर तपस्या से जो फल मिलता है, वह फल भगवान गरुड़ध्वज को नमस्कार करने से प्राप्त हो जाता है। जो मनुष्य अज्ञानवश अनेक पाप करते हैं परंतु हरि को नमस्कार करते हैं, वे नरक में नहीं जाते। विष्णु के नाम के कीर्तन मात्र से संसार के सब तीर्थों के पुण्य का फल मिल जाता है। जो मनुष्य शार्ङ्‍ग धनुषधारी भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं, उन्हें कभी भी यम यातना भोगनी नहीं पड़ती।

जो मनुष्य वैष्णव होकर शिव की और शैव होकर विष्णु की निंदा करते हैं, वे अवश्य नरकवासी होते हैं। सहस्रों वाजपेय और अश्वमेध यज्ञों से जो फल प्राप्त होता है, वह एकादशी के व्रत के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं होता है। संसार में एकादशी के बराबर कोई पुण्य नहीं। इसके बराबर पवित्र तीनों लोकों में कुछ भी नहीं। इस एकादशी के बराबर कोई व्रत नहीं। जब तक मनुष्य पद्‍मनाभ की एकादशी का व्रत नहीं करते हैं, तब तक उनकी देह में पाप वास कर सकते हैं।इस व्रत की कथा के अनुसार प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहता था, वह बड़ा क्रूर था। उसका सारा जीवन हिंसा, लूटपाट, मद्यपान और गलत संगति पाप कर्मों में बीता। जब उसका अंतिम समय आया तब यमराज के दूत बहेलिए को लेने आए और यमदूत ने बहेलिए से कहा कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है हम तुम्हें कल लेने आएंगे।

यह बात सुनकर बहेलिया बहुत भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचा और महर्षि अंगिरा के चरणों पर गिरकर प्रार्थना करने लगा, हे ऋषिवर! मैंने जीवन भर पाप कर्म ही किए हैं। कृपा कर मुझे कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरे सारे पाप मिट जाएं और मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। उसके निवेदन पर महर्षि अंगिरा ने उसे आश्विन शुक्ल की पापांकुशा एकादशी का विधिपूर्वक व्रत रखने के लिए कहा।
महर्षि अंगिरा के कहे अनुसार उस बहेलिए ने यह व्रत किया और किए गए सारे पापों से छुटकारा पा लिया और इस व्रत इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी संचित पाप नष्‍ट हो गए तथा उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।

हे राजेन्द्र! यह एकादशी स्वर्ग, मोक्ष, आरोग्यता, सुंदर स्त्री तथा अन्न और धन की देने वाली है। एकादशी के व्रत के बराबर गंगा, गया, काशी, कुरुक्षेत्र और पुष्कर भी पुण्यवान नहीं हैं। हरिवासर तथा एकादशी का व्रत करने और जागरण करने से सहज ही में मनुष्य विष्णु पद को प्राप्त होता है। हे युधिष्ठिर! इस व्रत के करने वाले दस पीढ़ी मातृ पक्ष, दस पीढ़ी पितृ पक्ष, दस पीढ़ी स्त्री पक्ष तथा दस पीढ़ी मित्र पक्ष का उद्धार कर देते हैं। वे दिव्य देह धारण कर चतुर्भुज रूप हो, पीतांबर पहने और हाथ में माला लेकर गरुड़ पर चढ़कर विष्णुलोक को जाते हैं।

हे नृपोत्तम! बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था में इस व्रत को करने से पापी मनुष्य भी दुर्गति को प्राप्त न होकर सद्‍गति को प्राप्त होता है। आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की इस पापांकुशा एकादशी का व्रत जो मनुष्य करते हैं, वे अंत समय में हरिलोक को प्राप्त होते हैं तथा समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं। सोना, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, छतरी तथा जूती दान करने से मनुष्य यमराज को नहीं देखता।

जो मनुष्य किसी प्रकार के पुण्य कर्म किए बिना जीवन के दिन व्यतीत करता है, वह लोहार की भट्टी की तरह सांस लेता हुआ निर्जीव के समान ही है। निर्धन मनुष्यों को भी अपनी शक्ति के अनुसार दान करना चाहिए तथा धन वालों को सरोवर, बाग, मकान आदि बनवा कर दान करना चाहिए। ऐसे मनुष्यों को यम का द्वार नहीं देखना पड़ता तथा संसार में दीर्घायु होकर धनाढ्‍य, कुलीन और रोगरहित रहते हैं। इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है।

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आज है पापांकुशा एकादशी, जानिए इस पौराणिक कथा का महत्व https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b6%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be/175906 Sat, 20 Oct 2018 05:43:13 +0000 http://www.livehalchal.com/?p=175906 आप सभी को बता दें कि नवरात्रि पर्व की समाप्ति के बाद 19 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व बहुत ही खुशियों के साथ मनाया जा रहा है. ऐसे में आप सभी को बता दें कि दशहरे के अगले दिन 20 अक्टूबर यानी शनिवार को आश्विन शुक्ल एकादशी के दिन ‘पापाकुंशा एकादशी’ व्रत मनाया जाने वाला है. कहा …]]>

आप सभी को बता दें कि नवरात्रि पर्व की समाप्ति के बाद 19 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व बहुत ही खुशियों के साथ मनाया जा रहा है. ऐसे में आप सभी को बता दें कि दशहरे के अगले दिन 20 अक्टूबर यानी शनिवार को आश्विन शुक्ल एकादशी के दिन ‘पापाकुंशा एकादशी’ व्रत मनाया जाने वाला है. कहा जाता है इस दिन श्रीहरि विष्णु के पूजन का विशेष महत्व है और उससे बहुत लाभ होता है. अब आज हम आपको बताने जा रहे हैं पापों का नाश करने वाली तथा मनोवांछित फल देकर स्वर्ग प्राप्ति में सहायक पापांकुशा एकादशी की पौराणिक एवं प्रामाणिक कथा जिसे आप कल पूजा के दौरा पढ़ सकते हैं.

धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! आश्विन शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? अब आप कृपा करके इसकी विधि तथा फल कहिए।भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! पापों का नाश करने वाली इस एकादशी का नाम पापांकुशा एकादशी है. हे राजन! इस दिन मनुष्य को विधिपूर्वक भगवान पद्‍मनाभ की पूजा करनी चाहिए. यह एकादशी मनुष्य को मनोवांछित फल देकर स्वर्ग को प्राप्त कराने वाली है. मनुष्य को बहुत दिनों तक कठोर तपस्या से जो फल मिलता है, वह फल भगवान गरुड़ध्वज को नमस्कार करने से प्राप्त हो जाता है. जो मनुष्य अज्ञानवश अनेक पाप करते हैं परंतु हरि को नमस्कार करते हैं, वे नरक में नहीं जाते.

विष्णु के नाम के कीर्तन मात्र से संसार के सब तीर्थों के पुण्य का फल मिल जाता है. जो मनुष्य शार्ङ्‍ग धनुषधारी भगवान विष्णु की शरण में जाते हैं, उन्हें कभी भी यम यातना भोगनी नहीं पड़ती. जो मनुष्य वैष्णव होकर शिव की और शैव होकर विष्णु की निंदा करते हैं, वे अवश्य नरकवासी होते हैं. सहस्रों वाजपेय और अश्वमेध यज्ञों से जो फल प्राप्त होता है, वह एकादशी के व्रत के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं होता है. संसार में एकादशी के बराबर कोई पुण्य नहीं. इसके बराबर पवित्र तीनों लोकों में कुछ भी नहीं. इस एकादशी के बराबर कोई व्रत नहीं. जब तक मनुष्य पद्‍मनाभ की एकादशी का व्रत नहीं करते हैं, तब तक उनकी देह में पाप वास कर सकते हैं।हे राजेन्द्र! यह एकादशी स्वर्ग, मोक्ष, आरोग्यता, सुंदर स्त्री तथा अन्न और धन की देने वाली है. एकादशी के व्रत के बराबर गंगा, गया, काशी, कुरुक्षेत्र और पुष्कर भी पुण्यवान नहीं हैं. हरिवासर तथा एकादशी का व्रत करने और जागरण करने से सहज ही में मनुष्य विष्णु पद को प्राप्त होता है.

हे युधिष्ठिर! इस व्रत के करने वाले दस पीढ़ी मातृ पक्ष, दस पीढ़ी पितृ पक्ष, दस पीढ़ी स्त्री पक्ष तथा दस पीढ़ी मित्र पक्ष का उद्धार कर देते हैं. वे दिव्य देह धारण कर चतुर्भुज रूप हो, पीतांबर पहने और हाथ में माला लेकर गरुड़ पर चढ़कर विष्णुलोक को जाते हैं. हे नृपोत्तम! बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था में इस व्रत को करने से पापी मनुष्य भी दुर्गति को प्राप्त न होकर सद्‍गति को प्राप्त होता है. आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की इस पापांकुशा एकादशी का व्रत जो मनुष्य करते हैं, वे अंत समय में हरिलोक को प्राप्त होते हैं तथा समस्त पापों से मुक्त हो जाते हैं. सोना, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, छतरी तथा जूती दान करने से मनुष्य यमराज को नहीं देखता.

जो मनुष्य किसी प्रकार के पुण्य कर्म किए बिना जीवन के दिन व्यतीत करता है, वह लोहार की भट्टी की तरह सांस लेता हुआ निर्जीव के समान ही है. निर्धन मनुष्यों को भी अपनी शक्ति के अनुसार दान करना चाहिए तथा धन वालों को सरोवर, बाग, मकान आदि बनवा कर दान करना चाहिए. ऐसे मनुष्यों यम का द्वार नहीं देखना पड़ता तथा संसार में दीर्घायु होकर धनाढ्‍य, कुलीन और रोगरहित रहते हैं. भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- हे राजन! जो आपने मुझसे मुझसे पूछा वह सब मैंने आपको बतलाया. अब आपकी और क्या सुनने की इच्छा है.

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