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	<title>पश्चिम बंगाल में ममता से होगी BJP की कठोर टकराव &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>पश्चिम बंगाल में ममता से होगी BJP की कठोर टकराव , JNU से हुई लेफ्ट को किनारे करने को प्रारंभ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Alpana Vaish]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Nov 2020 06:38:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[JNU से हुई लेफ्ट को किनारे करने को प्रारंभ]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम बंगाल में ममता से होगी BJP की कठोर टकराव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />बिहार में एनडीए को मिली सफलता से भारतीय जनता पार्टी को पड़ोसी राज्&#x200d;य पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत की आस बढ़ गई है। पार्टी के लिए अब अगले निशाने पर यही राज्&#x200d;य है। यहां की चुनावी जंग जीतना पार्टी के कुछ मुश्किल जरूर लगता है। यहां पर 2011 के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="513" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>बिहार में एनडीए को मिली सफलता से भारतीय जनता पार्टी को पड़ोसी राज्&#x200d;य पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत की आस बढ़ गई है। पार्टी के लिए अब अगले निशाने पर यही राज्&#x200d;य है। यहां की चुनावी जंग जीतना पार्टी के कुछ मुश्किल जरूर लगता है। यहां पर 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने राज्&#x200d;य से 34 वर्ष पुराने सीपीआई (एम) के शासन को उखाड़ फैंका था और पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्&#x200d;यमंत्री बनीं थीं।2016 के चुनाव उन्&#x200d;होंने यहां से दोबारा जीत दर्ज की। ममता ने राज्&#x200d;य से वामपंथी विचारधारा की जड़ों को उखाड़ने का काम बखूबी अंजाम दिया है। यही वजह है कि 2021 के चुनाव में भाजपा की सीधी टक्&#x200d;कर भी ममता बनर्जी के साथ ही होने वाली है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="650" height="540" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh.jpg" alt="" class="wp-image-393289" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh.jpg 650w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2020/11/tguyh-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p>भाजपा ने इसकी तैयारी काफी समय पहले से ही शुरू भी कर दी है। हालांकि जानकार मानते हैं कि इस राज्&#x200d;य में भाजपा की राह बिहार की तरह आसान नहीं है। राजनीतिक विश्&#x200d;लेषक शिवाजी सरकार का कहना है कि यहां की सत्&#x200d;ता तक पहुंचने के लिए भाजपा को कुछ ज्&#x200d;यादा मेहनत करनी होगी। हालांकि उनका ये भी मानना है कि राज्&#x200d;य स्&#x200d;तर पर पार्टी में जो मतभेद हैं उससे पार्टी की राह मुश्किल हो सकती है। उन्&#x200d;होंने इस बात की भी आशंका जताई है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव बिहार की तुलना में अधिक हिंसा भरे होंगे। उनके मुताबिक पश्चिम बंगाल में यदि लेफ्ट, कांग्रेस और ममता मिलकर एक साथ चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा की राह मुश्किल कर सकते हैं। हालांकि ये समीकरण कुछ मुश्किल जरूर है। वहीं भाजपा लेफ्ट के साथ मुश्किल ही जाएगी। उन्&#x200d;होंने बताया कि आने वाले चुनाव काफी खास होंगे। इस चुनाव में ममता की सीटें बढ़ने के आसार काफी कम हैं।</p>



<p>शिवाजी का मानना है कि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट कमजोर जरूर हुआ है लेकिन खत्&#x200d;म नहीं हुआ है। यही वजह है कि इसको साधने के लिए भाजपा ने जेएनयू, जो कि लेफ्ट का गढ़ है, का सहारा लिया है। यहां पर दो वर्षों से पर्दे में ढकी स्&#x200d;वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण करके भाजपा ने लेफ्ट को ही साधने की कोशिश की है। विवेकानंद की मूर्ति के जरिए भाजपा ने पश्चिम बंगाल के चुनाव को ही निशाना बनाया है। इस मूर्ति का लेफ्ट हमेशा से ही विरोध करता रहा है। पिछले वर्ष इस मूर्ति के साथ तोड़फोड़ तक की गई थी। 2016 में जब प्रोफेसर एम जगदीश कुमार जवाहरलाल नेहरू के वाइस चांसलर बने तब उन्&#x200d;होंने इस मूर्ति को यहां पर लगाने की राह आसान की थी। हालांकि लेफ्ट समर्थित स्&#x200d;टूडेंट्स यूनियन बार-बार इस बात का आरोप लगाती रही हैं कि प्रशासन ने इसमें लाइब्रेरी के फंड को खपा दिया है। जहां तक इस मूर्ति से भाजपा का ताल्&#x200d;लुक है तो उसने ये कदम बंगाल में सहानुभूति की लहर पाने की कोशिशों के तहत उठाया है।</p>



<p>आपको यहां पर बता दें कि स्&#x200d;वामी विवेकानंद का ताल्&#x200d;लुक सीधेतौर पर पश्चिम बंगाल से है। उनका असल में नाम नरेंद्र नाथ दत्&#x200d;त था। 1913 में शिकागो में आयोजित विश्&#x200d;व धर्म महासभा में उन्&#x200d;होंने भारत का प्रतिनिधित्&#x200d;व किया था। यहां पर दिए गए उनके भाषण को आज भी याद किया जाता है। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस के शिष्&#x200d;य थे और उन्&#x200d;होंने ही रामकृष्&#x200d;ण मिशन की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में कई बार उनकी कही गई बातों को याद करते हुए दिखाई देते हैं।</p>



<p>भाजपा ने इसकी तैयारी काफी समय पहले से ही शुरू भी कर दी है। हालांकि जानकार मानते हैं कि इस राज्&#x200d;य में भाजपा की राह बिहार की तरह आसान नहीं है। राजनीतिक विश्&#x200d;लेषक शिवाजी सरकार का कहना है कि यहां की सत्&#x200d;ता तक पहुंचने के लिए भाजपा को कुछ ज्&#x200d;यादा मेहनत करनी होगी। हालांकि उनका ये भी मानना है कि राज्&#x200d;य स्&#x200d;तर पर पार्टी में जो मतभेद हैं उससे पार्टी की राह मुश्किल हो सकती है। उन्&#x200d;होंने इस बात की भी आशंका जताई है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव बिहार की तुलना में अधिक हिंसा भरे होंगे। उनके मुताबिक पश्चिम बंगाल में यदि लेफ्ट, कांग्रेस और ममता मिलकर एक साथ चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा की राह मुश्किल कर सकते हैं। हालांकि ये समीकरण कुछ मुश्किल जरूर है। वहीं भाजपा लेफ्ट के साथ मुश्किल ही जाएगी। उन्&#x200d;होंने बताया कि आने वाले चुनाव काफी खास होंगे। इस चुनाव में ममता की सीटें बढ़ने के आसार काफी कम हैं।</p>



<p>शिवाजी का मानना है कि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट कमजोर जरूर हुआ है लेकिन खत्&#x200d;म नहीं हुआ है। यही वजह है कि इसको साधने के लिए भाजपा ने जेएनयू, जो कि लेफ्ट का गढ़ है, का सहारा लिया है। यहां पर दो वर्षों से पर्दे में ढकी स्&#x200d;वामी विवेकानंद की मूर्ति का अनावरण करके भाजपा ने लेफ्ट को ही साधने की कोशिश की है। विवेकानंद की मूर्ति के जरिए भाजपा ने पश्चिम बंगाल के चुनाव को ही निशाना बनाया है। इस मूर्ति का लेफ्ट हमेशा से ही विरोध करता रहा है। पिछले वर्ष इस मूर्ति के साथ तोड़फोड़ तक की गई थी। 2016 में जब प्रोफेसर एम जगदीश कुमार जवाहरलाल नेहरू के वाइस चांसलर बने तब उन्&#x200d;होंने इस मूर्ति को यहां पर लगाने की राह आसान की थी। हालांकि लेफ्ट समर्थित स्&#x200d;टूडेंट्स यूनियन बार-बार इस बात का आरोप लगाती रही हैं कि प्रशासन ने इसमें लाइब्रेरी के फंड को खपा दिया है। जहां तक इस मूर्ति से भाजपा का ताल्&#x200d;लुक है तो उसने ये कदम बंगाल में सहानुभूति की लहर पाने की कोशिशों के तहत उठाया है।</p>



<p>आपको यहां पर बता दें कि स्&#x200d;वामी विवेकानंद का ताल्&#x200d;लुक सीधेतौर पर पश्चिम बंगाल से है। उनका असल में नाम नरेंद्र नाथ दत्&#x200d;त था। 1913 में शिकागो में आयोजित विश्&#x200d;व धर्म महासभा में उन्&#x200d;होंने भारत का प्रतिनिधित्&#x200d;व किया था। यहां पर दिए गए उनके भाषण को आज भी याद किया जाता है। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस के शिष्&#x200d;य थे और उन्&#x200d;होंने ही रामकृष्&#x200d;ण मिशन की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषणों में कई बार उनकी कही गई बातों को याद करते हुए दिखाई देते हैं।</p>



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