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	<title>नैंसी पेलोसी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>नैंसी पेलोसी के पति पर हथौड़े से वार करने वाले आरोपी को हुई 30 साल की जेल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 May 2024 06:52:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अन्तर्राष्ट्रीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="435" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-1-11.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-1-11.jpg 435w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-1-11-300x237.jpg 300w" sizes="(max-width: 435px) 100vw, 435px" />पूर्व अमेरिकी सदन अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के घर में घुसकर उनके पति पर हथौड़े से हमला करने के मामले में आरोपी को शुक्रवार को 30 साल जेल की सजा सुनाई गई । आरोपी डेविड डेपेप ने 28 अक्टूबर 2022 को सुबह-सुबह सैन फ्रांसिस्को में पेलोसी के घर में जबरन घुसकर उनके पति पर हथौड़े से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="435" height="343" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-1-11.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-1-11.jpg 435w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/05/inter-1-11-300x237.jpg 300w" sizes="(max-width: 435px) 100vw, 435px" />
<p>पूर्व अमेरिकी सदन अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के घर में घुसकर उनके पति पर हथौड़े से हमला करने के मामले में आरोपी को शुक्रवार को 30 साल जेल की सजा सुनाई गई । आरोपी डेविड डेपेप ने 28 अक्टूबर 2022 को सुबह-सुबह सैन फ्रांसिस्को में पेलोसी के घर में जबरन घुसकर उनके पति पर हथौड़े से हमला किया था। ये घटना कांग्रेस चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले हुई थी।</p>



<p>अमेरिकी संसद की तत्कालीन अध्यक्ष नैंसी पेलोसी के घर में घुसकर उन्हें बंधक बनाने और उनके पति पर हथौड़े से हमला करने वाले व्यक्ति को शुक्रवार को 30 साल की जेल की सजा सुनाई गई। न्यायाधीश जैकलीन स्कॉट कॉर्ली ने 44 वर्षीय डेविड डेपेप को सजा सुनाई है।</p>



<p>पिछले नवंबर जूरी सदस्यों ने आरोपी डेविड को इस मामले में दोषी पाया गया था। अभियोजकों ने 40 साल की जेल की सजा मांगी थी। उस समय 82 वर्षीय पॉल पेलोसी पर हमला 2022 के मध्यावधि चुनावों से कुछ दिन पहले हुआ था और घटना का पूरा वीडियो पुलिस बॉडी कैमरा पर कैद हो गया था, जिससे राजनीतिक जगत में हलचल मचा दी थी।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पॉल पेलोसी के सिर पर आई थी दो चोटें</h2>



<p>पॉल पेलोसी के सिर पर दो घाव हुए थे। उनका दाहिना हाथ और हाथ भी घायल हो गया। जज जैकलीन स्कॉट कॉर्ली ने डेपेप को अपहरण के प्रयास के लिए 20 साल और हमले के लिए 30 साल की सजा सुनाई, जो दोनों मामलों में अधिकतम है। सजाएं साथ-साथ चलेंगी।&nbsp;अदालत में दोपहर के अपने प्रस्ताव में, अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय ने कहा कि डेपेप को सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने बोलने का मौका नहीं दिया और यह एक मुद्दा बन सकता है।</p>



<p>बता दें कि&nbsp;डेविड ने पुलिस के सामने हथौड़े से हमला करने की बात भी स्वीकारी थी। इस पर&nbsp;न्यायाधीश ने कहा कि एक संघीय अधिकारी के घर में घुसकर हमला करना देश के इतिहास में एक अभूतपूर्व कृत्य है।</p>



<p><a href="https://www.khojle.com/?utm_source=jagranhindi&amp;utm_medium=referral&amp;utm_campaign=midarticle" target="_blank" rel="noreferrer noopener"></a></p>
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		<title>नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर भारत ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Jaya Kashyap]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Aug 2022 08:48:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slide]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[नैंसी पेलोसी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/ह्ब्य्क.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/ह्ब्य्क.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/ह्ब्य्क-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/ह्ब्य्क-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />अमेरिकी कांग्रेस की अध्‍यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर भारत ने अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस मामले में वह बहुत संभल कर चल रहा है। उधर, रूस, पाकिस्‍तान और श्रीलंका ने चीन के साथ अपनी दोस्‍ती का निर्वाह करते हुए ड्रैगन के कदम का समर्थन किया है। हालांकि, भारत की ओर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/ह्ब्य्क.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/ह्ब्य्क.jpg 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/ह्ब्य्क-300x169.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/ह्ब्य्क-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>अमेरिकी कांग्रेस की अध्&#x200d;यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर भारत ने अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस मामले में वह बहुत संभल कर चल रहा है। उधर, रूस, पाकिस्&#x200d;तान और श्रीलंका ने चीन के साथ अपनी दोस्&#x200d;ती का निर्वाह करते हुए ड्रैगन के कदम का समर्थन किया है। हालांकि, भारत की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इतना ही नहीं भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिका में उनके समकक्ष एंटनी ब्लिंकन की मुलाकात भी हुई, लेकिन इस मामले में कोई संयुक्&#x200d;त बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सवाल उठता है कि चीन के इस स्&#x200d;टैंड पर भारत की नीति क्&#x200d;या है। भारत ने पूरे मामले में चुप्&#x200d;पी क्&#x200d;यों साधी है। भारत ने चीन को क्&#x200d;या संदेश दिया है।</p>



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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" data-id="491514" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/य्त्झ्नु-1024x576.webp" alt="" class="wp-image-491514" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/य्त्झ्नु-1024x576.webp 1024w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/य्त्झ्नु-300x169.webp 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/य्त्झ्नु-768x432.webp 768w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2022/08/य्त्झ्नु.webp 1040w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>
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<p>विदेश मामलों के जानकार प्रो हर्ष वी पंत का कहना है कि भारत-चीन सीमा विवाद और तनावपूर्ण संबंधों के बाद देश ने वन चाइना का जिक्र छोड़ दिया है। उन्&#x200d;होंने कहा कि भारत ने यह निर्णय तब लिया जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपना हिस्&#x200d;सा बताने वाले बयान दिए थे। चीन ने अरुणाचल के दो शहरों को मंदारिन भाषा में नाम दिए और जम्&#x200d;मू-कश्&#x200d;मीर और अरुणाचल में रहने वाले वाले भारतीय नागरिकों के लिए स्&#x200d;टेपल वीजा जारी किया था। इसके बाद से भारत के वन चाइना के दृष्टिकोण में बदलाव देखा गया।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि इस साचे के पीछे यह धारणा है कि अगर चीन हमारे लिए संवेदनशीलता नहीं दिखा रहा तो हमें वन चाइना नीति को दोहराने की जरूरत क्&#x200d;यों है। भारत की नीति में बदलाव नहीं था बस उसे नहीं दोहराने का निर्णय लिया गया था। उन्&#x200d;होंने कहा कि भारत ने ऐसा करके यह संदेश दिया है कि अगर भारत वन चाइना नीति को मान रहा है तो चीन को भी वन इंडिया के विचार और सिद्धांत का सम्&#x200d;मान करना चाहिए। प्रो पंत ने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के आने के बाद चीन के प्रति इस फैसले को स्&#x200d;वीकार किया गया। उस वक्&#x200d;त विदेश मंत्री सुषमा स्&#x200d;वराज थीं।</p>



<p>प्रो पंत ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस की अध्&#x200d;यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर भारत मौन रहा है। भारत की नीति रही है वह किसी अन्&#x200d;य देश के द्विपक्षीय मामलों में हस्&#x200d;तक्षेप नहीं करता है। हालांकि, इस मामले में ताइवान और चीन ने भारत का जिक्र किया है। ताइवान के राजदूत बाओशेन गेर ने इस घटना के बाद कहा था कि अगर लोकतांत्रिक सिद्धातों के प्रति चीन की उपेक्षा और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के उल्लंघन पर ध्यान नहीं दिया गया और दूसरे लोकतांत्रिक देशों ने चुप्पी साधे रखी तो स&#x200d;िर्फ ताइवान ही नहीं बल्कि दूसरे स्&#x200d;वतंत्रत्र और कानून से संचालित देश भी दीर्घकाल में इसका खामियाजा भुगतेंगे। उनका इशारा भारत की ओर भी था।</p>



<p><strong>चीन के खिलाफ लोकतांत्रिक देश एकजुट हों</strong></p>



<p>ताइवानी राजदूत ने कहा कि ताइवान और भारत दोनों चीनी आक्रामकता और विस्&#x200d;तारवाद का सामना कर रहे हैं। इस बाबत उन्&#x200d;होंने गलवान घाटी में भारत और चीनी संघर्ष का भी जिक्र किया। ताइवानी राजदूत ने कहा कि चीनी आक्रामकता को देखते हुए एक विचारधारा और लोकतांत्रिक देशों को उसके खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है। उन्&#x200d;होंने कहा कि ऐसा नहीं कि चीन इस समय ताइवान और दक्षिण चीन सागर में व्&#x200d;यस्&#x200d;त है, इससे ड्रैगन का ध्&#x200d;यान हिंद महासागर व भारत से कम हो जाएगा। उन्&#x200d;होंने कहा कि चीन के खिलाफ लोकतांत्रिक मूल्&#x200d;यों वाले राष्&#x200d;ट्रों को एकजुट होना चाहिए। </p>



<p><strong>चीन ने चली कूटनीतिक चाल, भारत रहा मौन</strong></p>



<p>उधर चीन के दूतावास ने अपना बयान जारी कर कहा कि वन चाइना नीति को लेकर भारत सहित अंतरराष्&#x200d;ट्रीय समुदाय के बीच सामान्&#x200d;य सहमति है। साथ ही यह किसी भी देश के साथ संबंधों को विकसित करने के लिए चीन की राजनीतिक बुनियाद है। खास बात यह है कि चीनी दूतावास का यह बयान नैंसी के दौरे के बाद जारी किया गया था। इसमें कहा गया है कि भारत वन चाइना को मान्&#x200d;यता देने वाले पहले देशों में रहा है। प्रो पंत ने कहा कि यह चीन की एक बड़ी कूटनीति चाल का हिस्&#x200d;सा है। भारत ने इस बयान पर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया है। चीन के इस बयान पर भारत की मौन के बड़े मायने हैं। भारत वर्ष 2014 की अपने नीति पर कायम है।</p>
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