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					<description><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="निर्भया से प्रद्युम्न केस तक: ऐसे बदल गया जुवेनाइल लॉ...." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e.jpg 640w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) ने साफ कर दिया है कि गुरुग्राम के रेयान स्कूल में चर्चित प्रद्युम्न मर्डर केस में आरोपी छात्र पर बालिग छात्र की तरह केस चलाया जाएगा. प्रद्युम्न  के ही स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले आरोपी छात्र ने याचिका दायर की थी कि सीबीआई के चार्जशीट दायर करने तक उसके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="348" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="निर्भया से प्रद्युम्न केस तक: ऐसे बदल गया जुवेनाइल लॉ...." style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e.jpg 640w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /><p><strong>जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) ने साफ कर दिया है कि गुरुग्राम के रेयान स्कूल में चर्चित प्रद्युम्न मर्डर केस में आरोपी छात्र पर बालिग छात्र की तरह केस चलाया जाएगा.<img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-100433" src="http://www.livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e.jpg" alt="निर्भया से प्रद्युम्न केस तक: ऐसे बदल गया जुवेनाइल लॉ...." width="640" height="360" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e.jpg 640w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2017/12/3d526564c0a5d8398969c1002f305b9e-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></strong></p>
<p><strong>प्रद्युम्न  के ही स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले आरोपी छात्र ने याचिका दायर की थी कि सीबीआई के चार्जशीट दायर करने तक उसके खिलाफ नाबालिग की तरह ही केस चलाया जाए लेकिन उसे खारिज कर दिया गया. दूसरी ओर, मृतक प्रद्युम्न के पिता वरुण ठाकुर ने जेजे बोर्ड के सामने याचिका लगाई थी कि आरोपी को बालिग मानकर उसके खिलाफ केस चलाया जाए. उसने जघन्य अपराध किया है. ऐसे अपराध विकृत और व्यस्क मानसिकता के अपराधी ही कर सकते हैं, ऐसे में कोर्ट उसे बालिग मानकर अधिकतम सजा दिलाने का रास्ता साफ करे.</strong></p>
<p><strong>आखिर किसी नाबालिग आरोपी को केस की गंभीरता के आधार पर उसे बालिग मानकर केस की सुनवाई की शुरुआत कैसे, किस तरह और किन बड़ी घटना के बाद हुई. और फिर लगातार विरोध और मांग के बीच सरकार ने इस तरह का प्रावधान लाने का फैसला लिया.</strong></p>
<p><strong>&#8216;निर्भया&#8217; रेप कांड ने बदली सूरत</strong></p>
<p><strong>देश में इसकी शुरुआत 2 साल पहले यानी 2015 में हुई, जब सरकार एक जघन्य अपराध के बाद एक ऐसा कानून बनाने को बाध्य हुई जो किसी नाबालिग आरोपी को गंभीर अपराध के मामले में बालिग मानकर केस चलाने की अनुमति देता हो.</strong></p>
<p><strong>16 दिसंबर 2012 में वीभत्स दिल्ली गैंग रेप (&#8216;निर्भया&#8217; रेप कांड) ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. उस रात 23 साल की एक लड़की जो अपने एक मित्र के साथ बस में सफर कर रही थी, उसके साथ ड्राइवर समेत 6 लोगों ने बर्बरता दिखाई और सामुहिक रेप की वारदात को अंजाम दिया. बाद में उस लड़की की मौत हो गई. इनमें एक आरोपी नाबालिग भी था और अपराध के वक्त उसकी उम्र 18 साल से कम थी. उसने अपना केस जुवेनाइल कोर्ट में चलाने की अर्जी दी.</strong></p>
<p><strong>इस बीच जुलाई 2013 में भाजपा नेता सुब्रह्णयम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की जिसमें उन्होंने मांग की कि उस पर एक बालिग की तरह केस चलाया जाए. लेकिन इसी साल अगस्त में जुवेनाइन कोर्ट ने उसे नाबालिग मानते हुए 3 साल के लिए सुधार गृह भेजने की सजा सुना दी.</strong></p>
<p><strong>मृतक लड़की की माता-पिता ने इस फैसले का जमकर विरोध किया. मृतका की मां ने कहा कि जुवेनाइल कोर्ट उसे सजा नहीं दे रही बल्कि अन्य युवाओं को ऐसा करने को प्रोत्साहित कर रही है.</strong><strong> </strong></p>
<p><strong>2014 में नए कानून की तैयारी</strong></p>
<p><strong>जुलाई, 2014 में तत्कालीन महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने ऐलान किया कि सरकार ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रही है जिसमें अगर गुनहगार की उम्र 16 से 18 के बीच है और अपराध बेहद गंभीर हो तो उसके खिलाफ कार्यवाही आम गुनहगार जैसी ही होगी. इसमें कत्ल और रेप जैसे गंभीर अपराध शामिल होंगे. साथ ही ऐसे नाबालिग जिनके अपराध जघन्य अपराधों की श्रेणी में आते हैं उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत मुकदमा भी चलाया जाएगा.</strong></p>
<p><strong>अगस्त 2014 में मेनका ने यह बिल संसद में पेश किया. 22 अप्रैल, 2015 में केबिनेट ने इसमें कुछ सुधार के साथ मंजूर कर लिया. किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 नाम के विधेयक को लोकसभा ने 7 मई, 2015 को मंजूरी दी, जबकि राज्यसभा ने 22 दिसंबर, 2015 को मंजूरी देकर इसे पास कर दिया. इसके बाद यह कानून बन गया और 15 जनवरी, 2016 से अस्तित्व में आ गया.</strong></p>
<p><strong>नए कानून के बाद पहला मामला</strong></p>
<p><strong>किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अस्तित्व में आने के बाद अगस्त, 2016 में जुवेनाइन कोर्ट ने इस तरह का पहला ऐसा फैसला लिया जिसमें नाबालिग आरोपी को केस की संगीनता को देखते हुए बालिग माना और उस पर केस चलाने का फैसला लिया.</strong></p>
<p><strong>यह मामला 2016 में नॉर्थ-इस्ट दिल्ली के भजनपुरा थाने से जुड़ा है. 17 साल के एक युवा पर अपनी हमउम्र महिला मित्र के साथ यौनिक शोषण करने का मामला आया. पीड़िता ने अपने एफआईआर में बताया कि आरोपी मित्र 31 मार्च को उसे उसके स्कूल से जबरन मोटरसाइकिल पर बाहर ले गया और नोएडा के एक अपार्टमेंट में उसके साथ रेप किया. जुवेनाइनल बोर्ड ने इसे न सिर्फ जघन्य अपराध माना बल्कि जानबूझकर तथा पूरी योजना के साथ इस वारदात को अंजाम दिया गया.</strong></p>
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