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	<title>निर्जला एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>निर्जला एकादशी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी समेत इन 4 दिनों में बन रहे हैं बेहद शुभ संयोग</title>
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		<pubDate>Sun, 31 May 2026 05:53:31 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[निर्जला एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="316" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-62.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-62.jpg 730w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-62-300x153.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में मुंडन भी पवित्र संस्कारों में से एक है। इस संस्कार को चौल मुंडन, जदुला, चूरा कर्म या चौल कर्म संस्कार के नाम से भी जाना जाता है। 16 पवित्र संस्कारों में मुंडन संस्कार का आठवां स्थान है और यह बच्चे के सिर को पहली बार मुंडवाने के लिए किया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="316" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-62.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-62.jpg 730w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/05/5-62-300x153.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में मुंडन भी पवित्र संस्कारों में से एक है। इस संस्कार को चौल मुंडन, जदुला, चूरा कर्म या चौल कर्म संस्कार के नाम से भी जाना जाता है। 16 पवित्र संस्कारों में मुंडन संस्कार का आठवां स्थान है और यह बच्चे के सिर को पहली बार मुंडवाने के लिए किया जाता है।</p>



<p>जून में मलमास होने के कारण कई लोग मुंडन के मुहूर्त को लेकर कन्फ्यूज हैं, आइए जानते हैं मुंडन की सही तारीख एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा से।</p>



<p><strong>हिंदू धर्म में मुंडन संस्कार का महत्व<br></strong>एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, हिंदू सनातन संस्कृति में 16 संस्कारों का विशेष महत्व है, जिनमें मुंडन संस्कार (चूड़ाकर्म) अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, गर्भ के बालों को हटाने से बच्चे का जुड़ाव पिछले जन्म के कर्मों से मुक्त होता है और उसका बौद्धिक, मानसिक तथा शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है। चूंकि यह संस्कार सीधे बच्चे के स्वास्थ्य और बुद्धि से जुड़ा है, इसलिए इसे सही और शुभ मुहूर्त में करना अनिवार्य माना गया है।</p>



<p>इस वर्ष जून के महीने में ग्रहों की विशेष स्थिति और पावन तिथियों के कारण मुंडन संस्कार के लिए चार बेहद शुभ और श्रेष्ठ मुहूर्त बन रहे हैं, जो इस प्रकार हैं:</p>



<p><strong>17 जून (पहला मुहूर्त)<br></strong>जून महीने का पहला उत्तम मुहूर्त 17 जून को बन रहा है। इस दिन बुद्धि के दाता बुध, पुनर्वसु नक्षत्र में रहेंगे, जो मुंडन जैसे मांगलिक कार्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इसके साथ ही, इस दिन धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र ‘रंभा तीज’ का व्रत है और आकाश मंडल में गज योग का निर्माण हो रहा है। इस शुभ योग में बच्चे का मुंडन कराने से उसकी बुद्धि कुशाग्र होती है और उसे दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।</p>



<p><strong>22 जून (दूसरा मुहूर्त)<br></strong>दूसरा सुंदर मुहूर्त 22 जून को आ रहा है। इस दिन मन के कारक चंद्रमा अपने स्वयं के नक्षत्र यानी ‘हस्त नक्षत्र’ में गोचर करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में हस्त नक्षत्र को एक अत्यंत शुभ, सौम्य और शीघ्र फल देने वाला नक्षत्र माना गया है। चूड़ाकर्म संस्कार के लिए चंद्रमा की बलवान स्थिति और हस्त नक्षत्र का यह संयोग बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और शांत स्वभाव के लिए सर्वश्रेष्ठ फलदायी सिद्ध होगा।</p>



<p><strong>24 जून (तीसरा मुहूर्त)<br></strong>तीसरा महामुहूर्त 24 जून को पड़ रहा है। इस दिन पावन ‘गंगा दशहरा’ का महापर्व है, जो अपने आप में ही एक स्वतः सिद्ध और अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन बुध और चित्रा नक्षत्र का अद्भुत संयोग बन रहा है। गंगा दशहरा के पावन दिन मां गंगा के आशीर्वाद से बच्चे के सभी पूर्व जन्म के दोष समाप्त होते हैं और चित्रा नक्षत्र उसके जीवन में तेज और आकर्षण लेकर आता है।</p>



<p><strong>25 जून (चौथा मुहूर्त)<br></strong>चौथा और अंतिम विशेष मुहूर्त 25 जून को है। इस दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति का दिन है और चंद्रमा तुला राशि में गोचर कर रहे होंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस दिन सनातन धर्म की सबसे बड़ी एकादशी, यानी ‘निर्जला एकादशी’ का महाव्रत है। गुरुवार, तुला का चंद्रमा और एकादशी तिथि का यह त्रिवेणी संगम बच्चे के जीवन में सौभाग्य, आरोग्यता और ऐश्वर्य की वृद्धि करने वाला है।</p>
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		<title>निर्जला एकादशी पर ऐसे करें तुलसी चालीसा का पाठ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 04:48:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[निर्जला एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-22-204827.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-22-204827.png 749w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-22-204827-300x173.png 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />निर्जला एकादशी जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। यह ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष में आती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही जीवन में शुभता का आगमन होता है। भगवान विष्णु को तुलसी सबसे प्रिय है। उनके किसी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="356" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-22-204827.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-22-204827.png 749w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2026/02/Screenshot-2026-02-22-204827-300x173.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>निर्जला एकादशी जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। यह ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष में आती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही जीवन में शुभता का आगमन होता है। भगवान विष्णु को तुलसी सबसे प्रिय है। उनके किसी भी भोग में अगर तुलसी न हो, तो वे उसे स्वीकार नहीं करते।</p>



<p>जब आप एकादशी पर तुलसी चालीसा का पाठ करते हैं, तो आपको विष्णु जी की कृपा के साथ माता लक्ष्मी की भी कृपा मिलती है, तो आइए इसका पाठ करते हैं –</p>



<p><strong>।।श्री तुलसी चालीसा।।<br>(दोहा)</strong></p>



<p>श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।<br>जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।</p>



<p><strong>(चौपाई)</strong></p>



<p>नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।<br>दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।<br>विष्णुप्रिया जय जयति भवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।<br>भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।<br>जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।<br>करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।<br>कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।<br>तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।<br>कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।<br>वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।<br>श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।<br>कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।<br>छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।<br>तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।<br>औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता।<br>देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।<br>वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।<br>नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।<br>नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।<br>नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।<br>नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।<br>नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।<br>नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।<br>जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।<br>निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।<br>करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।<br>शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।<br>करहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।<br>मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।<br>जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।<br>बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।<br>प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।<br>चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।<br>करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।<br>पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।<br>यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।<br>करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।<br>है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।</p>



<p><strong>(दोहा)<br></strong>तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।<br>भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।<br>यह श्री तुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।<br>गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>निर्जला एकादशी पर जरूर करें बृहस्पति देव की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Jun 2025 04:41:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[निर्जला एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="323" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-144-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-144.jpg 822w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-144-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-144-768x401.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />निर्जला एकादशी का व्रत हर साल भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल यह आज यानी 6 जून 2025, को रखा जा रहा है। यह एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025) भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित है। कहते हैं कि इस उपवास का पालन करने से 24 एकादशी का पुण्य &#8230;]]></description>
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<p>निर्जला एकादशी का व्रत हर साल भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल यह आज यानी 6 जून 2025, को रखा जा रहा है। यह एकादशी (Nirjala Ekadashi 2025) भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित है। कहते हैं कि इस उपवास का पालन करने से 24 एकादशी का पुण्य फल मिलता है। इसके साथ ही जीवन में शुभता का आगमन होता है।</p>



<p>वहीं, इस तिथि पर बृहस्पति देव के 108 नामों का जप परम फलदायी माना गया है। इससे शीदी से जुड़ी सभी मुश्किलें दूर होती हैं, तो आइए यहां इसका जप करते हैं, जो इस प्रकार हैं।</p>



<p><strong>।।बृहस्पति देव के 108 नाम।।<br></strong>ॐ गुरवे नमः<br>ॐ गुणाकराय नमः<br>ॐ गोप्त्रे नमः<br>ॐ गोचराय नमः<br>ॐ गोपतिप्रियाय नमः<br>ॐ गुणिने नमः<br>ॐ गुणवंतांश्रेष्ठाय नमः<br>ॐ गुरूनां गुरवे नमः<br>ॐ अव्ययाय नमः<br>ॐ जेत्रे नमः<br>ॐ जयंताय नमः<br>ॐ जयदाय नमः<br>ॐ जीवाय नमः<br>ॐ अनंताय नमः<br>ॐ जयावहाय नमः<br>ॐ अंगीरसाय नमः<br>ॐ अध्वरासक्ताय नमः<br>ॐ विविक्ताय नमः<br>ॐ अध्वरकृते नमः<br>ॐ पराय नमः<br>ॐ वाचस्पतये नमः<br>ॐ वशिने नमः<br>ॐ वश्याय नमः<br>ॐ वरिष्ठाय नमः<br>ॐ वाग्विचक्षणाय नमः<br>ॐ चित्तशुद्धिकराय नमः<br>ॐ श्रीमते नमः<br>ॐ चैत्राय नमः<br>ॐ चित्रशिखंडिजाय नमः<br>ॐ बृहद्रथाय नमः<br>ॐ बृहद्भानवे नमः<br>ॐ बृहस्पतये नमः<br>ॐ अभीष्टदाय नमः<br>ॐ सुराचार्याय नमः<br>ॐ सुराराध्याय नमः<br>ॐ सुरकार्यहितंकराय नमः<br>ॐ गीर्वाणपोषकाय नमः<br>ॐ धन्याय नमः<br>ॐ गीष्पतये नमः<br>ॐ गिरीशाय नमः<br>ॐ अनघाय नमः<br>ॐ धीवराय नमः<br>ॐ धीषणाय नमः<br>ॐ दिव्यभूषणाय नमः<br>ॐ धनुर्धराय नमः<br>ॐ दैत्रहंत्रे नमः<br>ॐ दयापराय नमः<br>ॐ दयाकराय नमः<br>ॐ दारिद्र्यनाशनाय नमः<br>ॐ धन्याय नमः<br>ॐ दक्षिणायन संभवाय नमः<br>ॐ धनुर्मीनाधिपाय नमः<br>ॐ देवाय नमः<br>ॐ धनुर्बाणधराय नमः<br>ॐ हरये नमः<br>ॐ सर्वागमज्ञाय नमः<br>ॐ सर्वज्ञाय नमः<br>ॐ सर्ववेदांतविद्वराय नमः<br>ॐ ब्रह्मपुत्राय नमः<br>ॐ ब्राह्मणेशाय नमः<br>ॐ ब्रह्मविद्याविशारदाय नमः<br>ॐ समानाधिकनिर्मुक्ताय नमः<br>ॐ सर्वलोकवशंवदाय नमः<br>ॐ ससुरासुरगंधर्ववंदिताय नमः<br>ॐ सत्यभाषणाय नमः<br>ॐ सुरॆंद्रवंद्याय नमः<br>ॐ देवाचार्याय नमः<br>ॐ अनंतसामर्थ्याय नमः<br>ॐ वेदसिद्धांतपारंगाय नमः<br>ॐ सदानंदाय नमः<br>ॐ पीडाहराय नमः<br>ॐ वाचस्पतये नमः<br>ॐ पीतवाससे नमः<br>ॐ अद्वितीयरूपाय नमः<br>ॐ लंबकूर्चाय नमः<br>ॐ प्रकृष्टनेत्राय नमः<br>ॐ विप्राणांपतये नमः<br>ॐ भार्गवशिष्याय नमः<br>ॐ विपन्नहितकराय नमः<br>ॐ बृहस्पतये नमः<br>ॐ सुराचार्याय नमः<br>ॐ दयावते नमः<br>ॐ शुभलक्षणाय नमः<br>ॐ लोकत्रयगुरवे नमः<br>ॐ सर्वतोविभवे नमः<br>ॐ सर्वेशाय नमः<br>ॐ सर्वदाहृष्टाय नमः<br>ॐ सर्वगाय नमः<br>ॐ सर्वपूजिताय नमः<br>ॐ अक्रोधनाय नमः<br>ॐ मुनिश्रेष्ठाय नमः<br>ॐ नीतिकर्त्रे नमः<br>ॐ जगत्पित्रे नमः<br>ॐ सुरसैन्याय नमः<br>ॐ विपन्नत्राणहेतवे नमः<br>ॐ विश्वयोनये नमः<br>ॐ अनयोनिजाय नमः<br>ॐ भूर्भुवाय नमः<br>ॐ धनदात्रे नमः<br>ॐ भर्त्रे नमः<br>ॐ जीवाय नमः<br>ॐ महाबलाय नमः<br>ॐ काश्यपप्रियाय नमः<br>ॐ अभीष्टफलदाय नमः<br>ॐ विश्वात्मने नमः<br>ॐ विश्वकर्त्रे नमः<br>ॐ श्रीमते नमः<br>ॐ शुभग्रहाय नमः</p>
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		<title>निर्जला एकादशी पर न करें ये काम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Jun 2025 04:31:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[निर्जला एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="383" height="381" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-143-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-143.jpg 383w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-143-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-143-small.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 383px) 100vw, 383px" />6 जून 2025 यानी आज का दिन कुछ राशि के जातकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रहने वाला है। वर्तमान समय में बुध और राहु का प्रभाव रहेगा। वहीं कुछ लोगों को एंजल्स की तरफ से संभलकर रहने की सलाह दी जाती है जिसका पालन बेहद जरूरी है। आज का दिन कैसा रहने वाला है? &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="383" height="381" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-143-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-143.jpg 383w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-143-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/06/Capture-143-small.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 383px) 100vw, 383px" />
<p>6 जून 2025 यानी आज का दिन कुछ राशि के जातकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रहने वाला है। वर्तमान समय में बुध और राहु का प्रभाव रहेगा। वहीं कुछ लोगों को एंजल्स की तरफ से संभलकर रहने की सलाह दी जाती है जिसका पालन बेहद जरूरी है। आज का दिन कैसा रहने वाला है? आइए अंक ज्योतिष और टैरो विशेषज्ञ पल्लवी एके शर्मा से जानते हैं।</p>



<p>हिंदू धर्म में ज्योतिष शास्त्र को बहुत खास माना जाता है। इस शास्त्र के द्वारा भविष्य की जानकारी को आसानी से जाना जा सकता है। वहीं, आज के दौर में टैरो कार्ड रीडर की बातें भी काफी हद तक सही साबित हो रही हैं और लोगों के जीवन की मुश्किलों को दूर करने में कामयाब हो रही हैं, तो चलिए अंक ज्योतिष और टैरो विशेषज्ञ &#8221;पल्लवी एके शर्मा&#8221; से जानते हैं कि आज यानी 6 जून, 2025 का दिन कैसा रहने वाला है और आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना है?</p>



<p><strong>टैरो विशेषज्ञ की सलाह ( Nirjala Ekadashi 2025 Rules)<br></strong>अपने परिवार को प्यार करें और उनके साथ समय बिताएं।<br>अपने गुरुओं से मिलें और उनका आशीर्वाद लें।<br>अलग सोच रखें।<br>शांति बनाए रखने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए अपनी विचारों, रचनात्मकता और सकारात्मकता का इस्तेमाल करें।<br>समान विचारधारा वाले लोगों के साथ समय बिताएं।<br>खुद से प्यार करें।<br>खुश रहें और खुशियां फैलाएं।<br>अपनी रचनात्मकता को अपनी ताकत के रूप में इस्तेमाल करने के अपने तरीकों की तारीफ करें।</p>



<p><strong>क्या न करें?</strong><br>बिखरा परेशान न हों।<br>ज्यादा किसी पर अधिकार जताने से बचें।</p>



<p><strong>आज कुछ सेकंड के लिए इसका जाप करें &#8211; &#8221;मैं बहुत दयालु, भाग्यशाली और धन्य हूं…..&#8221;<br>धार्मिक उपाय</strong><br>&#8216;ॐ नमः शिवाय&#8217; मंत्र का जाप करें।<br>&#8216;श्रीं&#8217; मंत्र का जाप करें।<br>&#8216;ॐ गं गणपतये नमः&#8217; का जाप करें।<br>&#8216;हनुमान चालीसा&#8217; का पाठ करें।</p>



<p><strong>जरूर के उपाय<br></strong>श्री हरि के वैदिक मंत्रों का जाप करें।<br>लोगों की मदद और गंगा स्नान करें।<br>सकारात्मक विचार रखें।<br>पीली वस्तुओं का दान करें।<br>भगवान की दी गई सभी चीजों के लिए आभारी रहें।<br>एक अच्छी दिनचर्या का पालन करें।</p>
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		<title>निर्जला एकादशी पर करें इन चीजों का दान, खुल जाएंगे समृद्धि के द्वार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 May 2025 05:29:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[निर्जला एकादशी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="405" height="418" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-607-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-607.jpg 405w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-607-medium.jpg 291w" sizes="auto, (max-width: 405px) 100vw, 405px" />Nirjala Ekadashi 2025 निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में किया जाता है जिसका बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इस एक व्रत से साल भर की एकादशियों का फल मिलता है। इस दिन जल शरबत पंखा छाता वस्त्र अनाज और बिस्तर जैसी चीजों का दान करना शुभ होता है। हर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="405" height="418" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-607-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-607.jpg 405w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-607-medium.jpg 291w" sizes="auto, (max-width: 405px) 100vw, 405px" />
<p>Nirjala Ekadashi 2025 निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में किया जाता है जिसका बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इस एक व्रत से साल भर की एकादशियों का फल मिलता है। इस दिन जल शरबत पंखा छाता वस्त्र अनाज और बिस्तर जैसी चीजों का दान करना शुभ होता है।</p>



<p>हर महीने में दो और साल में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं। मगर, इन सभी में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण है, जिसे निर्जला एकदाशी के नाम से भी जानते हैं। कारण है कि सिर्फ इसी एकादशी का व्रत करने से साल की सभी एकादशियों का फल मिल जाता है।</p>



<p>इस व्रत के महत्व के बारे में पद्म पुराण में भी लिखा गया है और इसके बारे में महाभारत में भी वर्णन किया गया है। अपनी भूख को काबू न कर पाने वाले भीम ने भी महर्षि वेद व्यास और पितामाह भीष्म से ज्ञान लेकर निर्जला एकादशी का व्रत रखा था।</p>



<p><strong>तपस्या जैसा है निर्जला एकादशी का व्रत<br></strong>निर्जला एकदाशी का व्रत कठिन होता है और यह तपस्या के समान माना जाता है क्योंकि ज्येष्ठ की गर्मी में जब गला सूखने लगता है, तो भी इस व्रत को करने वाले पानी नहीं पीते हैं। इतने बड़े और पुण्य दिन में यदि आप कोई दान-पुण्य करते हैं, तो उसका कई गुना फल मिलता है, जिससे सुख-समृद्धि के दरवाजे खुल जाते हैं।</p>



<p>इस साल 6 जून 2025 को निर्जला एकादशी है। इस दिन एकादशी का उपवास करने और दान करने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं। दान करने वाले के जीवन से कष्ट दूर हो जाते हैं और सुखों को भोगकर वह मोक्ष को प्राप्त करता है।</p>



<p><strong>जानिए किन चीजों का करना चाहिए दान….<br></strong>जल दान से बड़ा कोई दान नहीं होता है। इस दिन घड़े या सुराही में ठंडा जल भरकर दान करना चाहिए।<br>निर्जला एकादशी के दिन प्याऊं लगवाने से भी बड़ा पुण्य मिलता है। शरबत का दान भी किया जा सकता है।<br>भीषण गर्मी के इस समय में जरूरतमंद लोगों को पंखा, छाता, बिस्तर खरबूजा, और गुड़ दान कर सकते हैं।<br>निर्जला एकादशी पर जरूरतमंद लोगों को अनाज और कपड़ों का का दान भी करना चाहिए।</p>
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