निधन – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Fri, 12 Dec 2025 08:00:08 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg निधन – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन https://livehalchal.com/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%94/648451 Fri, 12 Dec 2025 08:00:05 +0000 https://livehalchal.com/?p=648451 कांग्रेस के वरिष्ठ स्तंभ और देश के पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शनिवार तड़के उनके लातूर स्थित आवास पर निधन हो गया। 90 वर्ष की आयु में उन्होंने सुबह लगभग साढ़े छह बजे अंतिम सांस ली। बीते कई महीनों से वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते घर पर ही चिकित्सकीय निगरानी में थे। पाटिल …]]>

कांग्रेस के वरिष्ठ स्तंभ और देश के पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शनिवार तड़के उनके लातूर स्थित आवास पर निधन हो गया। 90 वर्ष की आयु में उन्होंने सुबह लगभग साढ़े छह बजे अंतिम सांस ली। बीते कई महीनों से वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के चलते घर पर ही चिकित्सकीय निगरानी में थे।

पाटिल ने कई प्रमुख संवैधानिक और सरकारी जिम्मेदारियां निभाईं। केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का संचालन करने से लेकर लोकसभा के अध्यक्ष पद तक की जिम्मेदारी उठाने तक—उनका सार्वजनिक जीवन भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कहानियों में दर्ज है।

मराठवाड़ा के राजनीतिक परिदृश्य में उनका प्रभाव इतना मजबूत था कि लातूर लोकसभा सीट से वे सात बार जनता का विश्वास जीतकर संसद पहुंचे। कई दशक तक क्षेत्र की राजनीति में उनकी पकड़ अडिग रही और वे कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे।

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धर्मेंद्र के बाद जैकी चैन के निधन के उड़ी झूठी खबर https://livehalchal.com/%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%88%e0%a4%a8/642911 Tue, 11 Nov 2025 07:52:24 +0000 https://livehalchal.com/?p=642911 एक्शन सुपरस्टार जैकी चैन ने अपने करियर में कितनी दमदार फिल्मों में काम किया है, ये हर कोई जानता है। हॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों में जैकी चैन की गिनती की जाती है। जैकीन चैन ने कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है और इसी बीच अब जैकी चैन के निधन की खबर उड़ी है। …]]>

एक्शन सुपरस्टार जैकी चैन ने अपने करियर में कितनी दमदार फिल्मों में काम किया है, ये हर कोई जानता है। हॉलीवुड के दिग्गज कलाकारों में जैकी चैन की गिनती की जाती है। जैकीन चैन ने कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है और इसी बीच अब जैकी चैन के निधन की खबर उड़ी है। दरअसल एक तरफ जहां बॉलीवुड में धर्मेंद्र के निधन की खबर उड़ी तो उधर हॉलीवुड से भी खबर आई कि जैकी चैन का निधन हो गया है। हालांकि यह खबरें महज अफवाह निकली हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट
दरअसल सोमवार के दिन सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुआ। इस पोस्ट में कहा गया कि अभिनेता जैकी चैन का निधन हो गया है। फेसबुक पर ये पोस्ट साझा किया गया और इस बात की जानकारी दी गई। यहां कि पोस्ट में जैकी चैन की एक तस्वीर भी शेयर की गई, जिसमें वह अस्पताल में बेड पर लेटे हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि साफ पता चल रहा है कि तस्वीर फेक है। जैसे ही ये पोस्ट वायरल हुआ तो जैकी चैन के परिवार की तरफ से कहा गया कि यह खबर झूठी है।

सोशल मीडिया पर कई फैन पेजेस ने भी इस खबर की पुष्टि की कि जैकी चैन स्वस्थ हैं और ठीक है। जो भी निधन की खबरें फैलाई जा रही हैं वह फेक हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने लिखा कि आखिरकार फेसबुक क्यों जैकी चैन की झूठी मौत की खबरें उड़ा रहा है और लोगों को यह करने में क्या मजा आ रहा है। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है जब अभिनेता जैकी चैन के ऐसे निधन की झूठी खबर उड़ी हो। इससे पहले भी कई बार जैकी चैन ऐसी फेक न्यूज का शिकार हो चुके हैं।

आपको बता दें कि जैकी चैन ने ड्रंकन मास्टर (1978), पुलिस स्टोरी (1985), रश आवर (1998) और ड्रंकन मास्टर II (1994) समेत कई हिट फिल्मों में काम किया है। वहीं भारत में जैकी चैन की अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है।

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DNA के खोजकर्ता जेम्स वॉटसन का निधन https://livehalchal.com/dna-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b5%e0%a5%89%e0%a4%9f%e0%a4%b8%e0%a4%a8-%e0%a4%95/642405 Sat, 08 Nov 2025 07:57:07 +0000 https://livehalchal.com/?p=642405 डीएनए खोजकर्ता नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स वॉटसन का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जेम्स वॉटसन ने 1953 में डीएनए की ट्विस्टेड-लैडर संरचना (डबल हेलिक्स) की खोज की थी। इसी खोज के बाद से चिकित्सा, अपराध जांच, जीनोलॉजी और नैतिकता के क्षेत्र में नई क्रांति आई। दरअसल, जेम्स वॉटसन ने 1953 में ब्रिटिश …]]>

डीएनए खोजकर्ता नोबेल पुरस्कार विजेता जेम्स वॉटसन का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। जेम्स वॉटसन ने 1953 में डीएनए की ट्विस्टेड-लैडर संरचना (डबल हेलिक्स) की खोज की थी। इसी खोज के बाद से चिकित्सा, अपराध जांच, जीनोलॉजी और नैतिकता के क्षेत्र में नई क्रांति आई।

दरअसल, जेम्स वॉटसन ने 1953 में ब्रिटिश वैज्ञानिक फ्रांसिस क्रिक के साथ मिलकर डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की पहचान की थी। जो 20वीं सदी की सबसे बड़ी वैज्ञानिक खोजों में से एक है। यह ऐतिहासिक खोज विज्ञान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी। हालांकि, नस्ल और लिंग पर उनके विवादित बयानों ने उनको भारी नुकसान पहुंचाया। जिसके चलते वैज्ञानिक समुदाय ने उनसे दूरी बना ली।

1962 में मिला था नोबेल पुरस्कार

जेम्स वाटसन को 1962 में फ्रांसिस क्रिक और मौरिस विल्किंस के साथ नोबेल पुरस्कार मिला था, क्योंकि उन्होंने यह खोज की थी कि डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड या डीएनए एक डबल हेलिक्स है, जिसमें दो स्ट्रैंड होते हैं जो एक दूसरे के चारों ओर कुंडलित होकर एक लंबी, धीरे-धीरे मुड़ने वाली सीढ़ी जैसा आकार बनाते हैं। यह खोज विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि थी। इससे तुरंत पता चल गया कि आनुवंशिक जानकारी कैसे संग्रहीत होती है और कोशिकाएँ विभाजित होने पर अपने डीएनए की प्रतिलिपि कैसे बनाती हैं।

शिकागो में जन्मे जेम्स वॉटसन की यह उपलब्धि, जो उस समय मिली जब वे मात्र 24 वर्ष के थे, उन्हें विज्ञान की दुनिया में दशकों तक एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बना दिया। लेकिन अपने जीवन अंतिम में विवादित टिप्पणियों के कारण उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। उनकी आपत्तिजनक टिप्पणियों में यह भी था कि अश्वेत लोग श्वेत लोगों से कम बुद्धिमान होते हैं।

वॉटसन ने एक बार कहा था, “फ्रांसिस क्रिक और मैंने सदी की सबसे बड़ी खोज की, यह बात बिल्कुल स्पष्ट थी।” बाद में उन्होंने लिखा: “विज्ञान और समाज पर डबल हेलिक्स के विस्फोटक प्रभाव का हम पहले से अंदाजा नहीं लगा सकते थे।”

वाटसन के ये बयान पड़े थे भारी

2007 में, जब वो पहले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की कैवेंडिश लैब में काम कर चुके थे, उन्होंने लंदन की संडे टाइम्स मैगजीन से कहा कि वो “अफ्रीका के भविष्य को लेकर निराश” हैं, क्योंकि “हमारी सारी नीतियां यह मानकर बनी हैं कि अफ्रीकी लोगों की बुद्धि हमारे जैसी ही है — जबकि सभी टेस्ट कुछ और बताते हैं.” इस बयान के बाद उन्हें न्यूयॉर्क की कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैब में चांसलर के पद से हटा दिया गया था।

2019 में उन्होंने फिर से ऐसा ही बयान दिया — जब उन्होंने कहा कि नस्ल और आप कितने बुद्धिमान है इस के बीच संबंध है तो लैब ने उनसे सभी उपाधियां छीन लीं, जैसे चांसलर एमेरिटस, प्रोफेसर एमेरिटस और मानद ट्रस्टी।

लैब ने कहा कि डॉ. वॉटसन के बयान गलत हैं और विज्ञान उनका समर्थन नहीं करता। डीएनए की खोज 1869 में हुई थी, लेकिन तब वैज्ञानिक इसकी संरचना नहीं जानते थे।

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हॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा जून लॉकहार्ट का निधन https://livehalchal.com/%e0%a4%b9%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a5%81%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a4%9c-%e0%a4%85%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0/640254 Mon, 27 Oct 2025 07:49:34 +0000 https://livehalchal.com/?p=640254 हॉलीवुड की मशहूर अदाकारा जून लॉकहार्ट अब हमारे बीच नहीं रहीं। 100 साल की उम्र में उन्होंने कैलिफोर्निया के सांता मोनिका स्थित अपने घर में आखिरी सांस ली। उनके चेहरे की मुस्कान और आंखों की चमक ने पीढ़ियों तक दर्शकों का दिल जीता। जून लॉकहार्ट उन कुछ अभिनेत्रियों में से थीं जिन्होंने सिनेमा के स्वर्ण …]]>

हॉलीवुड की मशहूर अदाकारा जून लॉकहार्ट अब हमारे बीच नहीं रहीं। 100 साल की उम्र में उन्होंने कैलिफोर्निया के सांता मोनिका स्थित अपने घर में आखिरी सांस ली। उनके चेहरे की मुस्कान और आंखों की चमक ने पीढ़ियों तक दर्शकों का दिल जीता। जून लॉकहार्ट उन कुछ अभिनेत्रियों में से थीं जिन्होंने सिनेमा के स्वर्ण युग से लेकर आधुनिक टीवी युग तक, हर दौर में अपनी पहचान बनाए रखी। जून की मौत नेचुरल तरीके से बताई जा रही है।

जून लॉकहार्ट का बैकग्राउंड
जून का जन्म एक फिल्मी माहौल में हुआ था। पिता जीन लॉकहार्ट और मां कैथलीन लॉकहार्ट दोनों ही लोकप्रिय कलाकार थे। ऐसे माहौल में कला उनके लिए सांस लेने जैसा सहज थी। बचपन में ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें पर्दे पर अपनी पहचान बनानी है। 1938 में परिवार के साथ उन्होंने ‘अ क्रिसमस केरोल’ से अपने करियर की शुरुआत की और पहले ही प्रोजेक्ट से दर्शकों को उन्हें इंप्रेस किया था।

जून के किरदारों को किया गया पसंद
1950 और 60 के दशक में जून लॉकहार्ट टीवी की दुनिया का जाना-पहचाना नाम बन चुकी थीं। सीरीज ‘लेजी’ में उन्होंने रुथ मार्टिन का किरदार निभाया जिसे दर्शकों ने काफी प्यार दिया। इस किरदार ने जून को घर-घर पहुंचा दिया। लेकिन उनका सफर यहीं नहीं रुका। ‘लोस्ट इन स्पेस” में उन्होंने एक ऐसी मां का रोल निभाया। उनके अभिनय की सहजता और भावनाओं की गहराई ने उन्हें दर्शकों के दिलों में अमर कर दिया।

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मशहूर विज्ञापन हस्ती पीयूष पांडे का 70 वर्ष की आयु में निधन https://livehalchal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9e%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%af/639749 Fri, 24 Oct 2025 08:58:49 +0000 https://livehalchal.com/?p=639749 इंडियन एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री के दिग्गज पीयूष पांडे का 70 साल की उम्र में निधन हो गया। पीयूष भारतीय विज्ञापन जगत की आवाज, मुस्कान और क्रिएटिविटी का चेहरा थे। जिन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक ओगिल्वी इंडिया में काम किया और विज्ञापन जगत को बदल दिया। दरअसल, पीयूष पांडे के निधन की जानकारी स्तंभकार सुहेल …]]>

इंडियन एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री के दिग्गज पीयूष पांडे का 70 साल की उम्र में निधन हो गया। पीयूष भारतीय विज्ञापन जगत की आवाज, मुस्कान और क्रिएटिविटी का चेहरा थे। जिन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक ओगिल्वी इंडिया में काम किया और विज्ञापन जगत को बदल दिया।

दरअसल, पीयूष पांडे के निधन की जानकारी स्तंभकार सुहेल सेठ ने अपने एक्स एकाउंट के माध्यम से देते हुए शोक जताया। उन्होंने लिखा है, ‘मेरे सबसे प्यारे दोस्त पीयूष पांडे जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति के निधन से मैं बेहद दुखी और स्तब्ध हूं। भारत ने एक महान विज्ञापन जगत की हस्ती नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और एक बेहतरीन सज्जन को खोया है। अब जन्नत में भी गूंजेगा ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा।’

1982 में की थी करियर की शुरआत

पीयूष पांडे ने 1982 में ओगिल्वी एंड माथर इंडिया (अब ओगिल्वी इंडिया) के साथ अपने विज्ञापन करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने एक प्रशिक्षु खाता कार्यकारी के रूप में शुरुआत की और फिर रचनात्मक क्षेत्र में कदम रखा। अपनी प्रतिभा से उन्होंने भारतीय विज्ञापन जगत की तस्वीर ही बदल दी।

फेविकोल का जोड़ टूट गया

वह एशियन पेंट्स के “हर खुशी में रंग लाए”, कैडबरी के “कुछ खास है” और फेविकोल की प्रतिष्ठित “एग” फिल्म जैसे प्रतिष्ठित विज्ञापन अभियानों के जनक हैं। फिल्म निर्माता हंसल मेहता ने अपने विज्ञापन अंदाज में पांडे को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। मेहता ने लिखा कि फेविकोल का जोड़ टूट गया। विज्ञापन जगत ने आज अपना गोंद खो दिया। पीयूष पांडे, आप स्वस्थ रहें।

मिले सुर मेरा तुम्हारा…

पीयूष पांडे विज्ञापन की दुनिया के जाने माने दिग्गज थे। उनके कई कैंपेन बेहद चर्चित रहे, जिसने घर-घर में ब्रांड्स की पहचान बना दी। लंबे समय तक भारत की विविधता में एकता दिखाने वाले गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ के लेखक भी थे। उन्होंने फेविकोल, हच (वोडाफोन) जैसी कंपनियों के लिए भी कई सफल ऐड कैंपेन को भी लीड किया था।

अबकी बार मोदी सरकार

पीयूष पांडे पीएम नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान का भी हिस्सा रहे। अबकी बार मोदी सरकार का नारा भी उन्होंने ही दिया था। जो काफी चर्चा में रहा।

पीयूष गोयल ने जताया शोक

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस विज्ञापन दिग्गज के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने X पर लिखा, “पद्मश्री पीयूष पांडे के निधन पर दुःख व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। विज्ञापन जगत में एक अभूतपूर्व व्यक्तित्व, उनकी रचनात्मक प्रतिभा ने कहानी कहने की कला को नई परिभाषा दी और हमें अविस्मरणीय और कालातीत कहानियां दीं। मेरे लिए, वे एक ऐसे मित्र थे जिनकी प्रतिभा उनकी प्रामाणिकता, गर्मजोशी और बुद्धिमता से झलकती थी। मैं हमारी आकर्षक बातचीत को हमेशा संजोकर रखूंगा। वे अपने पीछे एक गहरा शून्य छोड़ गए हैं जिसे भरना मुश्किल होगा। उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदना।”

2012 में पद्मश्री से सम्मानित

बता दें कि 2004 में पीयूष पांडे ने कान्स लायंस इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ क्रिएटिविटी में जूरी अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाले पहले एशियाई के रूप में इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। उनके अग्रणी योगदान को बाद में 2012 में क्लियो लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और पद्मश्री से सम्मानित किया गया, जिससे वे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने वाले भारतीय विज्ञापन जगत के पहले व्यक्ति बन गए।

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