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	<title>नर्मदाप्रसाद उपाध्याय &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>नर्मदाप्रसाद उपाध्याय और अतुल तारे को मिला हिन्दी गौरव अलंकरण</title>
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		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 06:08:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित संस्था मातृभाषा उन्नयन संस्थान के तत्वावधान में स्थानीय प्रेस क्लब के सभागार में हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह 2026 गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित समारोह में साहित्य जगत की दो महान विभूतियों, वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय और अतुल तारे को वर्ष 2026 के हिन्दी गौरव अलंकरण से &#8230;]]></description>
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<p>हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु समर्पित संस्था मातृभाषा उन्नयन संस्थान के तत्वावधान में स्थानीय प्रेस क्लब के सभागार में हिन्दी गौरव अलंकरण समारोह 2026 गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस प्रतिष्ठित समारोह में साहित्य जगत की दो महान विभूतियों, वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय और अतुल तारे को वर्ष 2026 के हिन्दी गौरव अलंकरण से विभूषित किया गया। इस अवसर पर साहित्य और कला क्षेत्र के अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।</p>



<p><strong>प्राथमिक शिक्षा और मातृभाषा का महत्व समझाया<br></strong>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे ने अपने उद्बोधन में मातृभाषा की शक्ति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रगति की असली कुंजी प्राथमिक शिक्षा का अपनी भाषा में होना है। जब व्यक्ति की इच्छाशक्ति प्रबल होती है, तभी मातृभाषाएं समृद्ध और विस्तृत होती हैं। उन्होंने बल दिया कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही कोई भी समाज विकास की ऊंचाइयों को छू सकता है।</p>



<p><strong>हिन्दी और देवनागरी का अटूट संबंध<br></strong>समारोह की अध्यक्षता कर रहे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने हिन्दी के भविष्य को लेकर आशावादी दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों और चिंताओं के बीच भी हिन्दी पूरी जीवंतता के साथ टिकी रहेगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिन्दी की प्रगति के लिए देवनागरी लिपि का साथ होना अनिवार्य है। लिपि और भाषा एक-दूसरे के पूरक हैं।</p>



<p><strong>भाषा और भारतीयता की रक्षा<br></strong>भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने विशेष अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज के समय में भाषा और भारतीयता के प्रति सचेत रहना आवश्यक है। उन्होंने देश में हिन्दी विरोध और विभिन्न बोलियों के बीच व्याप्त वैचारिक पाखंड को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, भाषा के प्रति ईमानदारी ही वास्तविक सेवा है।</p>



<p><strong>साहित्य और आभासी दुनिया के सरोकार<br></strong>सम्मानित विभूति नर्मदा प्रसाद उपाध्याय ने लोक भाषा और साहित्य के अंतर्संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हिन्दी लोक से ही समृद्ध हुई है और वर्तमान समय में साहित्य तथा कला के बीच अंतरानुशासन की बहुत आवश्यकता है। वहीं, सम्मानित साहित्यकार अतुल तारे ने आधुनिक युग और भाषा के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि समाचार पत्रों ने हिन्दी के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्तमान एआई और आभासी दुनिया के दौर में भाषा प्रेम को स्व-बोध का आधार बताया।</p>



<p><strong>पांच कवियों को काव्य गौरव अलंकरण से सम्मानित किया गया<br></strong>मुख्य समारोह के साथ ही काव्य साधना में लीन पांच कवियों को भी काव्य गौरव अलंकरण से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में नागदा के कमलेश दवे, मांडव के डॉ. पंकज प्रसून चौधरी, उज्जैन की निशा पंडित, बड़नगर के पुष्पेंद्र जोशी पुष्प और भोपाल की शिवांगी प्रेरणा शामिल रहीं। इसी मंच से साहित्यकार संध्या राणे के नवीन कविता संग्रह शुभम् करोति का भी विधिवत लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।</p>



<p>कार्यक्रम के प्रारंभ में नितेश गुप्ता, डॉ. नीना जोशी, पारस बिरला और अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत भाषण डॉ. अर्पण जैन अविचल ने दिया, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अखिलेश राव द्वारा किया गया। आभार प्रदर्शन और अभिनंदन पत्र का वाचन आशीष पंवार व चेतन जोशी ने किया। इस गौरवमयी क्षण के साक्षी बनने के लिए शहर के अनेक प्रबुद्ध साहित्यकार और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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