द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी – Live Halchal https://livehalchal.com Latest News, Updated News, Hindi News Portal Thu, 05 Feb 2026 05:30:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.10 https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2023/10/cropped-Live-Halchal-512-32x32.jpg द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी – Live Halchal https://livehalchal.com 32 32 आज है फाल्गुन की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, बन रहे ये शुभ-अशुभ योग https://livehalchal.com/%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%97%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0/658851 Thu, 05 Feb 2026 05:30:37 +0000 https://livehalchal.com/?p=658851 पंचांग के अनुसार, आज यानी 5 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस तिथि पर द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और …]]>

पंचांग के अनुसार, आज यानी 5 फरवरी को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस तिथि पर द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और सभी कामों में सफलता मिलती है। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग के बारे में।

तिथि: कृष्ण चतुर्थी
मास: फाल्गुन
दिन: गुरुवार
संवत्: 2082

तिथि: कृष् चतुर्थी – 06 फरवरी रात्रि 12 बजकर 22 मिनट तक
योग: सुकर्मा – 06 फरवरी रात्रि 12 बजकर 04 मिनट तक
करण: बव – दोपहर 12 बजकर 10 मिनट मिनट तक
करण: बालव – 06 फरवरी रात्रि 12 बजकर 22 मिनट तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 07 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 03 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: रात 09 बजकर 35 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: प्रातः 09 बजकर 05 मिनट पर

सूर्य और चंद्रमा की राशियां
सूर्य देव: मकर
चन्द्र देव: कन्या

आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक
अमृत काल: दोपहर 03 बजकर 32 मिनट से सायं 05 बजकर 11 मिनट तक

आज के अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 01 बजकर 57 मिनट से दोपहर 03 बजकर 19 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 09 बजकर 51 मिनट से प्रातः 11 बजकर 13 मिनट तक
यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 07 मिनट से प्रातः 08 बजकर 29 मिनट तक

आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र: रात्रि 10 बजकर 57 मिनट तक।
सामान्य विशेषताएं: विनम्रता, मेहनती स्वभाव, बुद्धिमत्ता, मददगार, उदार, ईमानदारी, बुद्धिमान, अध्ययनशील और परिश्रमी
नक्षत्र स्वामी: सूर्य देव
राशि स्वामी: सूर्य देव, बुध देव
देवता: आर्यमन (मित्रता के देवता)
गुण: राजस
प्रतीक: बिस्तर

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक पावन व्रत है, जो कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन गणपति की श्रद्धापूर्वक उपासना करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। व्रत में दिनभर उपवास रखकर संध्या के समय चंद्र दर्शन के बाद पारण किया जाता है। दूर्वा और मोदक अर्पण से बुद्धि, विवेक और सौभाग्य की वृद्धि मानी जाती है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर क्या करें
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान गणेश का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
दिनभर उपवास रखें या फलाहार करें।गणपति को दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित करें।
संध्या समय चंद्र दर्शन कर अर्घ्य दें।
गणेश मंत्र या व्रत कथा का पाठ करें।
चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करें।

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर करें ये विशेष आरती https://livehalchal.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0-2/658843 Thu, 05 Feb 2026 05:29:07 +0000 https://livehalchal.com/?p=658843 हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत हो या जीवन के संकटों का निवारण, बप्पा का नाम ही काफी है। प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। साल 2026 में फाल्गुन महीने की …]]>

हिंदू धर्म में भगवान श्री गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत हो या जीवन के संकटों का निवारण, बप्पा का नाम ही काफी है। प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। साल 2026 में फाल्गुन महीने की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जो आज मनाई जा रही है।

माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। आइए बप्पा की विशेष आरती करते हैं, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।

॥श्री गणेश जी की आरती॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।

माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।

कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर इस विधि से करें पूजा, जानें बप्पा का प्रिय भोग और फूल https://livehalchal.com/%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a4%a4%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d/658836 Thu, 05 Feb 2026 05:24:24 +0000 https://livehalchal.com/?p=658836 हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। आज 5 फरवरी 2026 को यह पावन व्रत रखा जा रहा है। संकष्टी का अर्थ होता है संकटों को हरने वाली। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान …]]>

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। आज 5 फरवरी 2026 को यह पावन व्रत रखा जा रहा है। संकष्टी का अर्थ होता है संकटों को हरने वाली। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा करता है, बप्पा उसके जीवन के सभी विघ्नों को दूर कर देते हैं। आइए जानते हैं द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि, भगवान के प्रिय भोग, फूल और प्रमुख बातें।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश के 32 रूपों में से छठा रूप द्विजप्रिय गणेश का है। द्विज का मतलब होता है, जो दो बार जन्म ले और शास्त्रों का ज्ञाता हो। बप्पा के इस रूप में चार मस्तक और चार भुजाएं हैं। इनकी पूजा करने से जातक को आरोग्य, लंबी उम्र और तेज बुद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में शुभता आती है।

पूजा विधि
सुबह स्नान के बाद लाल या पीले वस्त्र धारण करे।
हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
एक वेदी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
उन्हें गंगाजल से पवित्र स्नान कराएं।
बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं।
इसके बाद उन्हें अक्षत, फूल, मोदक, धूप और दीप अर्पित करें।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कथा का पाठ करें।
अंत में आरती करें।
एक लोटे में दूध, जल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें, क्योंकि इसके बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है।
पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
गणेश जी के प्रिय फूल – गणेश जी को लाल रंग के फूल बहुत प्रिय हैं, विशेषकर गुड़हल का फूल। इसके अलावा उन्हें दूर्वा चढ़ाना भी बहुत शुभ माना गया है।
बप्पा का प्रिय भोग – बप्पा को मोदक बहुत प्रिय हैं। इसके अलावा आप उन्हें बेसन या मोतीचूर के लड्डू का भोग भी लगा सकते हैं। इस दिन चने की दाल और गुड़ का भोग लगाना भी बहुत फलदायी माना जाता है।

पूजा मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ द्विजप्रियाय नमः
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

इन बातों का रखें ध्यान
गणेश जी की पूजा में कभी भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करें, क्योंकि गणेश जी की पूजा में तुलसी वर्जित मानी गई है। साथ ही इस दिन किसी का अनादर न करें और मन में सात्विक विचार रखें।

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4 या 5 फरवरी कब है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी? जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त https://livehalchal.com/4-%e0%a4%af%e0%a4%be-5-%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af/658619 Wed, 04 Feb 2026 05:07:55 +0000 https://livehalchal.com/?p=658619 हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और धन-वैभव बना रहता है। हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी का अलग नाम होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष पर पड़ने वाली …]]>

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और धन-वैभव बना रहता है। हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी का अलग नाम होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष पर पड़ने वाली चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 5 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 4 फरवरी, बुधवार की रात 12 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी और 5 फरवरी, गुरुवार की रात 12 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। चतुर्थी तिथि का चंद्र उदय 5 फरवरी को होगा, इसलिए इसी दिन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन सुकर्मा, धृति और मातंग नामक योग भी बन रहे हैं।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 11:17 से दोपहर 12:40 तक
दोपहर 12:18 से 01:02 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:40 से 02:03 तक
दोपहर 02:03 से 03:26 तक
शाम 06:12 से 07:49 तक
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय – रात 09:35 बजे

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

5 फरवरी, गुरुवार की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
दिनभर व्रत नियमों का पालन करें।
शुभ मुहूर्त में घर के किसी साफ स्थान पर चौकी रखकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
भगवान को तिलक लगाएं, पुष्प अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं।
इसके बाद रोली, चावल, अबीर, गुलाल, कुमकुम, वस्त्र, जनेऊ, पान और नारियल अर्पित करें।
पूजा में दूर्वा जरूर चढ़ाएं और अपनी श्रद्धा अनुसार भोग लगाएं।
पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते रहें।
अंत में भगवान गणेश की आरती करें।
चंद्रमा के दर्शन होने पर जल से अर्घ्य दें और पुष्प अर्पित करें।
मान्यता है कि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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