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	<title>देवी तुलसी &#8211; Live Halchal</title>
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	<title>देवी तुलसी &#8211; Live Halchal</title>
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		<title>तीसरे बड़े मंगल पर जरूर करें देवी तुलसी की पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 26 May 2025 09:42:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[देवी तुलसी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="467" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-465-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-465.jpg 812w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-465-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-465-768x581.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />तीसरा बड़ा मंगल 27 मई को मनाया जाएगा। इस दिन राम भक्त हनुमान की पूजा और तुलसी की आराधना का विशेष महत्व है। ऐसे में सुबह स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें। हनुमान जी को लाल चोला तुलसी की माला और लड्डू अर्पित करें। फिर देवी तुलसी की पूजा करें। ऐसा करने से भगवान राम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="467" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-465-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-465.jpg 812w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-465-medium.jpg 300w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2025/05/Capture-465-768x581.jpg 768w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>तीसरा बड़ा मंगल 27 मई को मनाया जाएगा। इस दिन राम भक्त हनुमान की पूजा और तुलसी की आराधना का विशेष महत्व है। ऐसे में सुबह स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें। हनुमान जी को लाल चोला तुलसी की माला और लड्डू अर्पित करें। फिर देवी तुलसी की पूजा करें। ऐसा करने से भगवान राम की कृपा मिलेगी।</p>



<p>बड़ा मंगल का दिन अपने आप में बहुत खास होता है। यह हर साल ज्येष्ठ महीने में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 27 मई को तीसरा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। इस दिन साधक राम भक्त हनुमान की विधिवत पूजा करते हैं, तो जीवन के कष्टों को दूर करने के लिए उनसे प्रार्थना करते हैं। वहीं, शुभ दिन (Bada Mangal 2025 3rd) देवी की तुलसी की पूजा का भी बहुत ज्यादा महत्व है। ऐसे में सुबह उठें और स्नान करें। इसके साथ ही लाल रंग के वस्त्र धारण करें। हनुमान जी के मंदिर जाएं, उन्हें लाल चोला और तुलसी की माला, लड्डू अर्पित करें।</p>



<p>फिर देवी तुलसी को जल चढ़ाएं। उनके सामने देसी घी का दीपक जलाएं। इसके बाद तुलसी चालीसा का पाठ और आरती करें। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही भगवान राम खुश होते हैं।</p>



<p><strong>।।तुलसी चालीसा।।</strong></p>



<p>श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।<br>जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।<br>नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।<br>दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।<br>विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।<br>भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।<br>जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।<br>करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।<br>कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।<br>तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।<br>कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।<br>वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।<br>श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।<br>कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।<br>छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।<br>तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।<br>औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,<br>देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।<br>वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।<br>नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।<br>नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।<br>नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।<br>नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।<br>नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।<br>नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।<br>जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।<br>निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।<br>करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।<br>शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।<br>क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।<br>मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।<br>जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।<br>बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।<br>प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।<br>चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।<br>करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।<br>पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।<br>यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।<br>करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।<br>है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।<br>तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।<br>भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।<br>यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।<br>गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>इंदिरा एकादशी पर करें देवी तुलसी की खास पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Sep 2024 04:44:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[इंदिरा एकादशी]]></category>
		<category><![CDATA[देवी तुलसी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="303" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-878-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-878.jpg 759w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-878-medium.jpg 300w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" />सनातन धर्म में इंदिरा एकादशी का व्रत बेहद शुभ माना गया है। साल में कुल 24 एकादशी तिथि पड़ती हैं जिसमें सभी एकादशी का अपना एक खास महत्व है। इस साल आश्विन माह की एकादशी 29 सितंबर 2024 को मनाई जाएगी। ऐसा माना जाता है कि इसका उपवास रखने से जीवन में कभी सुख और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="303" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-878-large.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-878.jpg 759w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/09/Capture-878-medium.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>सनातन धर्म में इंदिरा एकादशी का व्रत बेहद शुभ माना गया है। साल में कुल 24 एकादशी तिथि पड़ती हैं जिसमें सभी एकादशी का अपना एक खास महत्व है। इस साल आश्विन माह की एकादशी 29 सितंबर 2024 को मनाई जाएगी। ऐसा माना जाता है कि इसका उपवास रखने से जीवन में कभी सुख और शांति की कमी नहीं रहती है।</p>



<p>इंदिरा एकादशी को बेहद ही कल्याणकारी माना जाता है। यह दिन भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी हर महीने शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के 11वें दिन मनाई जाती है, ऐसी मान्यता है कि जो इस तिथि (Indira Ekadashi Ekadashi 2024) पर कठिन व्रत रखते हैं और विष्णु जी के साथ मां तुलसी की पूजा सच्चे भाव से करते हैं, उन्हें विष्णु भगवान का आशीर्वाद मिलता है।</p>



<p>इसलिए इस तिथि पर तुलसी के पौधे पर जल चढ़ाना चाहिए और उनकी परिक्रमा करनी चाहिए। समक्ष घी का दीपक जलाएं। इसके बाद मां तुलसी के 108 नामों का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन के सभी संकटों का नाश होता है।</p>



<p><strong>।। तुलसी जी के 108 नाम।।</strong></p>



<p>1.ॐ श्री तुलस्यै नमः।</p>



<p>2.ॐ नन्दिन्यै नमः।</p>



<p>3.ॐ देव्यै नमः।</p>



<p>4.ॐ शिखिन्यै नमः।</p>



<p>5.ॐ धारिण्यै नमः।</p>



<p>6.ॐ धात्र्यै नमः।</p>



<p>7.ॐ सावित्र्यै नमः।</p>



<p>8.ॐ सत्यसन्धायै नमः।</p>



<p>9.ॐ कालहारिण्यै नमः।</p>



<p>10.ॐ गौर्यै नमः।</p>



<p>11.ॐ देवगीतायै नमः।</p>



<p>12.ॐ द्रवीयस्यै नमः।</p>



<p>13.ॐ पद्मिन्यै नमः।</p>



<p>14.ॐ सीतायै नमः।</p>



<p>15.ॐ रुक्मिण्यै नमः।</p>



<p>16.ॐ प्रियभूषणायै नमः।</p>



<p>17.ॐ श्रेयस्यै नमः।</p>



<p>18.ॐ श्रीमत्यै</p>



<p>19.ॐ मान्यायै नमः।</p>



<p>20.ॐ गौर्यै नमः।</p>



<p>21.ॐ गौतमार्चितायै नमः।</p>



<p>22.ॐ त्रेतायै नमः।</p>



<p>23.ॐ त्रिपथगायै नमः।</p>



<p>24.ॐ त्रिपादायै नमः।</p>



<p>25.ॐ त्रैमूर्त्यै नमः।</p>



<p>26.ॐ जगत्रयायै नमः।</p>



<p>27.ॐ त्रासिन्यै नमः।</p>



<p>28.ॐ गात्रायै नमः।</p>



<p>29.ॐ गात्रियायै नमः।</p>



<p>30.ॐ गर्भवारिण्यै नमः।</p>



<p>31.ॐ शोभनायै नमः।</p>



<p>32.ॐ समायै नमः।</p>



<p>33.ॐ द्विरदायै नमः।</p>



<p>34.ॐ आराद्यै नमः।</p>



<p>35.ॐ यज्ञविद्यायै नमः।</p>



<p>36.ॐ महाविद्यायै नमः।</p>



<p>37.ॐ गुह्यविद्यायै नमः।</p>



<p>38.ॐ कामाक्ष्यै नमः।</p>



<p>39.ॐ कुलायै नमः।</p>



<p>40.ॐ श्रीयै नमः।</p>



<p>41.ॐ भूम्यै नमः।</p>



<p>42.ॐ भवित्र्यै नमः।</p>



<p>43.ॐ सावित्र्यै नमः।</p>



<p>44.ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः।</p>



<p>45.ॐ शंखिन्यै नमः।</p>



<p>46.ॐ चक्रिण्यै नमः।</p>



<p>47.ॐ चारिण्यै नमः।</p>



<p>48.ॐ चपलेक्षणायै नमः।</p>



<p>49.ॐ पीताम्बरायै नमः।</p>



<p>50.ॐ प्रोत सोमायै नमः।</p>



<p>51.ॐ सौरसायै नमः।</p>



<p>52.ॐ अक्षिण्यै नमः।</p>



<p>53.ॐ अम्बायै नमः।</p>



<p>54.ॐ सरस्वत्यै नमः।</p>



<p>55.ॐ सम्श्रयायै नमः।</p>



<p>56.ॐ सर्व देवत्यै नमः।</p>



<p>57.ॐ विश्वाश्रयायै नमः।</p>



<p>58.ॐ सुगन्धिन्यै नमः।</p>



<p>59.ॐ सुवासनायै नमः।</p>



<p>60.ॐ वरदायै नमः।</p>



<p>61.ॐ सुश्रोण्यै नमः।</p>



<p>62.ॐ चन्द्रभागायै नमः।</p>



<p>63.ॐ यमुनाप्रियायै नमः।</p>



<p>64.ॐ कावेर्यै नमः।</p>



<p>65.ॐ मणिकर्णिकायै नमः।</p>



<p>66.ॐ अर्चिन्यै नमः।</p>



<p>67.ॐ स्थायिन्यै नमः।</p>



<p>68.ॐ दानप्रदायै नमः।</p>



<p>69.ॐ धनवत्यै नमः।</p>



<p>70.ॐ सोच्यमानसायै नमः।</p>



<p>71.ॐ शुचिन्यै नमः।</p>



<p>72.ॐ श्रेयस्यै नमः।</p>



<p>73.ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः।</p>



<p>74.ॐ विभूत्यै नमः।</p>



<p>75.ॐ आकृत्यै नमः।</p>



<p>76.ॐ आविर्भूत्यै नमः।</p>



<p>77.ॐ प्रभाविन्यै नमः।</p>



<p>78.ॐ गन्धिन्यै नमः।</p>



<p>79.ॐ स्वर्गिन्यै नमः।</p>



<p>80.ॐ गदायै नमः।</p>



<p>81.ॐ वेद्यायै नमः।</p>



<p>82.ॐ प्रभायै नमः।</p>



<p>83.ॐ सारस्यै नमः।</p>



<p>84.ॐ सरसिवासायै नमः।</p>



<p>85.ॐ सरस्वत्यै नमः।</p>



<p>86.ॐ शरावत्यै नमः।</p>



<p>87.ॐ रसिन्यै नमः।</p>



<p>88.ॐ काळिन्यै नमः।</p>



<p>89.ॐ श्रेयोवत्यै नमः।</p>



<p>90.ॐ यामायै नमः।</p>



<p>91.ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः।</p>



<p>92.ॐ श्यामसुन्दरायै नमः।</p>



<p>93.ॐ रत्नरूपिण्यै नमः।</p>



<p>94.ॐ शमनिधिन्यै नमः।</p>



<p>95.ॐ शतानन्दायै नमः।</p>



<p>96.ॐ शतद्युतये नमः।</p>



<p>97.ॐ शितिकण्ठायै नमः।</p>



<p>98.ॐ प्रयायै नमः।</p>



<p>99.ॐ धात्र्यै नमः।</p>



<p>100.ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः।</p>



<p>101.ॐ कृष्णायै नमः।</p>



<p>102.ॐ भक्तवत्सलायै नमः।</p>



<p>103.ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः।</p>



<p>104.ॐ हरायै नमः।</p>



<p>105.ॐ अमृतरूपिण्यै नमः।</p>



<p>106.ॐ भूम्यै नमः।</p>



<p>107.ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः।</p>



<p>108.ॐ श्री तुलस्यै नमः।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>कामिका एकादशी पर करें देवी तुलसी की खास पूजा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Live Halchal Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 28 Jul 2024 06:51:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[कामिका एकादशी]]></category>
		<category><![CDATA[देवी तुलसी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="618" height="302" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1335.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1335.png 691w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1335-300x147.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />कामिका एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन कठिन उपवास का पालन करते हैं उन्हें सुख और शांति की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार कामिका एकादशी 31 जुलाई को मनाई जाएगी तो आइए इस दिन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="618" height="302" src="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1335.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1335.png 691w, https://livehalchal.com/wp-content/uploads/2024/07/Capture-1335-300x147.png 300w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" />
<p>कामिका एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन कठिन उपवास का पालन करते हैं उन्हें सुख और शांति की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार कामिका एकादशी 31 जुलाई को मनाई जाएगी तो आइए इस दिन किए जाने वाले कुछ अचूक कार्यों को जानते हैं जो यहां पर दिए गए हैं।</p>



<p>कामिका एकादशी का दिन बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा का विधान है और भक्त इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। कामिका एकादशी श्रावण माह के कृष्ण पक्ष के 11वें दिन मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल यह 31 जुलाई, दिन बुधवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन तुलसी माता को प्रसन्न करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।</p>



<p>ऐसे में इस शुभ अवसर पर उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं और उनकी 7 बार परिक्रमा करें। फिर तुलसी चालीसा का पाठ करें। अंत में आरती करके पूजा समाप्त करें। ऐसा करने से आपके जीवन में जल्द सकारात्मक बदलाव देखने को मिलने लगेंगे।</p>



<p><strong>।।तुलसी चालीसा।।</strong><br><strong>।।दोहा।।</strong></p>



<p>जय जय तुलसी भगवती</p>



<p>सत्यवती सुखदानी।</p>



<p>नमो नमो हरि प्रेयसी</p>



<p>श्री वृन्दा गुन खानी॥</p>



<p>श्री हरि शीश बिरजिनी,</p>



<p>देहु अमर वर अम्ब।</p>



<p>जनहित हे वृन्दावनी</p>



<p>अब न करहु विलम्ब॥</p>



<p><strong>॥ चौपाई ॥</strong><br>धन्य धन्य श्री तुलसी माता।</p>



<p>महिमा अगम सदा श्रुति गाता॥</p>



<p>हरि के प्राणहु से तुम प्यारी।</p>



<p>हरीहीँ हेतु कीन्हो तप भारी॥</p>



<p>जब प्रसन्न है दर्शन दीन्ह्यो।</p>



<p>तब कर जोरी विनय उस कीन्ह्यो॥</p>



<p>हे भगवन्त कन्त मम होहू।</p>



<p>दीन जानी जनि छाडाहू छोहु॥</p>



<p>सुनी लक्ष्मी तुलसी की बानी।</p>



<p>दीन्हो श्राप कध पर आनी॥</p>



<p>उस अयोग्य वर मांगन हारी।</p>



<p>होहू विटप तुम जड़ तनु धारी॥</p>



<p>सुनी तुलसी हीँ श्रप्यो तेहिं ठामा।</p>



<p>करहु वास तुहू नीचन धामा॥</p>



<p>दियो वचन हरि तब तत्काला।</p>



<p>सुनहु सुमुखी जनि होहू बिहाला॥</p>



<p>समय पाई व्हौ रौ पाती तोरा।</p>



<p>पुजिहौ आस वचन सत मोरा॥</p>



<p>तब गोकुल मह गोप सुदामा।</p>



<p>तासु भई तुलसी तू बामा॥</p>



<p>कृष्ण रास लीला के माही।</p>



<p>राधे शक्यो प्रेम लखी नाही॥</p>



<p>दियो श्राप तुलसिह तत्काला।</p>



<p>नर लोकही तुम जन्महु बाला॥</p>



<p>यो गोप वह दानव राजा।</p>



<p>शङ्ख चुड नामक शिर ताजा॥</p>



<p>तुलसी भई तासु की नारी।</p>



<p>परम सती गुण रूप अगारी॥</p>



<p>अस द्वै कल्प बीत जब गयऊ।</p>



<p>कल्प तृतीय जन्म तब भयऊ॥</p>



<p>वृन्दा नाम भयो तुलसी को।</p>



<p>असुर जलन्धर नाम पति को॥</p>



<p>करि अति द्वन्द अतुल बलधामा।</p>



<p>लीन्हा शंकर से संग्राम॥</p>



<p>जब निज सैन्य सहित शिव हारे।</p>



<p>मरही न तब हर हरिही पुकारे॥</p>



<p>पतिव्रता वृन्दा थी नारी।</p>



<p>कोऊ न सके पतिहि संहारी॥</p>



<p>तब जलन्धर ही भेष बनाई।</p>



<p>वृन्दा ढिग हरि पहुच्यो जाई॥</p>



<p>शिव हित लही करि कपट प्रसंगा।</p>



<p>कियो सतीत्व धर्म तोही भंगा॥</p>



<p>भयो जलन्धर कर संहारा।</p>



<p>सुनी उर शोक उपारा॥</p>



<p>तिही क्षण दियो कपट हरि टारी।</p>



<p>लखी वृन्दा दुःख गिरा उचारी॥</p>



<p>जलन्धर जस हत्यो अभीता।</p>



<p>सोई रावन तस हरिही सीता॥</p>



<p>अस प्रस्तर सम ह्रदय तुम्हारा।</p>



<p>धर्म खण्डी मम पतिहि संहारा॥</p>



<p>यही कारण लही श्राप हमारा।</p>



<p>होवे तनु पाषाण तुम्हारा॥</p>



<p>सुनी हरि तुरतहि वचन उचारे।</p>



<p>दियो श्राप बिना विचारे॥</p>



<p>लख्यो न निज करतूती पति को।</p>



<p>छलन चह्यो जब पार्वती को॥</p>



<p>जड़मति तुहु अस हो जड़रूपा।</p>



<p>जग मह तुलसी विटप अनूपा॥</p>



<p>धग्व रूप हम शालिग्रामा।</p>



<p>नदी गण्डकी बीच ललामा॥</p>



<p>जो तुलसी दल हमही चढ़ इहैं।</p>



<p>सब सुख भोगी परम पद पईहै॥</p>



<p>बिनु तुलसी हरि जलत शरीरा।</p>



<p>अतिशय उठत शीश उर पीरा॥</p>



<p>जो तुलसी दल हरि शिर धारत।</p>



<p>सो सहस्त्र घट अमृत डारत॥</p>



<p>तुलसी हरि मन रञ्जनी हारी।</p>



<p>रोग दोष दुःख भंजनी हारी॥</p>



<p>प्रेम सहित हरि भजन निरन्तर।</p>



<p>तुलसी राधा मंज नाही अन्तर॥</p>



<p>व्यन्जन हो छप्पनहु प्रकारा।</p>



<p>बिनु तुलसी दल न हरीहि प्यारा॥</p>



<p>सकल तीर्थ तुलसी तरु छाही।</p>



<p>लहत मुक्ति जन संशय नाही॥</p>



<p>कवि सुन्दर इक हरि गुण गावत।</p>



<p>तुलसिहि निकट सहसगुण पावत॥</p>



<p>बसत निकट दुर्बासा धामा।</p>



<p>जो प्रयास ते पूर्व ललामा॥</p>



<p>पाठ करहि जो नित नर नारी।</p>



<p>होही सुख भाषहि त्रिपुरारी॥</p>



<p><strong>॥ दोहा ॥</strong><br>तुलसी चालीसा पढ़ही</p>



<p>तुलसी तरु ग्रह धारी।</p>



<p>दीपदान करि पुत्र फल</p>



<p>पावही बन्ध्यहु नारी॥</p>



<p>सकल दुःख दरिद्र हरि</p>



<p>हार ह्वै परम प्रसन्न।</p>



<p>आशिय धन जन लड़हि</p>



<p>ग्रह बसही पूर्णा अत्र॥</p>



<p>लाही अभिमत फल जगत मह</p>



<p>लाही पूर्ण सब काम।</p>



<p>जेई दल अर्पही तुलसी तंह</p>



<p>सहस बसही हरीराम॥</p>



<p>तुलसी महिमा नाम लख</p>



<p>तुलसी सूत सुखराम।</p>



<p>मानस चालीस रच्यो</p>



<p>जग महं तुलसीदास॥</p>
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